सीहोर 9 जून (नि.सं.)। नगर पालिका परिषद के 13 पार्षदों ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर नगर पालिका अध्यक्ष राकेश राय पर लगाया जनता को गुमराह करने का आरोप। इनका कहना है कि कुछ दिन पहले नपाध्यक्ष राकेश राय ने पत्रकार वार्ता में पत्रकारों के माध्यम से बड़े जोश में कहा था कि वर्षा पूर्व शहर में डामरीकरण का कार्य कराया जायेगा शहर को कीचड़ मुक्त किया जायेगा किन्तु अध्यक्ष जी जनता को समय भी बता देते की सन 2008 में या 2009 में क्योंकि अब तो वर्षा शुरु हो गई है। वर्षा में तो डामरीकरण का कार्य नहीं होता क्या कागजों में तो नहीं कराने का इरादा है जिस प्रकार प्रत्येक वार्ड में दो-दो बोर खनन कराये जायेंगे प्रत्येक वार्ड में पुस्तकालय खोले जायेंगे जैसी घोषणाएं की गई थी ? पार्षदों ने आरोप लगाया है कि यह बातें आपने पूर्व में कही थी लेकिन ढाई वर्ष का कार्यकाल बीतने के बाद भी आज तक घोषणाएं पूरी नहीं हुई हैं। अब इस शहर की जनता आपकी घोषणाएं पहचानने लगी है। क्योंकि आप शहर को ग्रीन सिटी और क्लीन सिटी बनाने की घोषणाएं करते हैं।
आज पार्षद रंजीत सिंह वर्मा व हृदेश राठौर के नेतृत्व में सीहोर बस स्टेण्ड का निरीक्षण 13 पार्षद दल ने किया और पाया कि किस प्रकार आने-जाने वाले यात्रियों को समस्या उठाना पड़ रही है। इससे यह प्रतीत होता है कि सीहोर बस स्टेण्ड की जब यह हालत है तो पूरे नशहर की क्या स्थिति होगी। अध्यक्ष जी नींद से जागो और शहर की सड़कों की मरम्मत एवं मुरम डलवाने की सोचो। आरोप लगाने वाले पार्षदों में श्रीमति प्रभा राठौर पार्षद दल सचेतक, श्रीमति कमला पिपलोदिया, श्रीमति लीला लोधी, श्रीमति रजनी ताम्रकार, श्रीमति सरोज ठाकुर, श्रीमति राजश्री छाया, हृदेश राठौर, भोजराज यादव, विपिन सास्ता, अर्जुन सिंह राठौर, रंजीत सिंह वर्मा, राजू पहलवान, सीताराम अहिरवार आदि।
Tuesday, June 10, 2008
मजदूरी करने जा रहे गरीब परिवार की एक महिला रेल से कटकर मरी
हिन्दु उत्सव समिति ने की मदद, मृतिका का किया हिन्दु रीति से अंतिम संस्कार
सीहोर 9 जून (नि.सं.)। रविवार की रात 10 बजे बनारस निवासी लालचंद पत्नि गेना देवी, 13-14 वर्षीय पुत्र पंकज व कुसुम व बहु रमोला भदोई जिला उ.प्र. के ग्राम गौरा से राजकोट मजदूरी करने जा रहे थे। भोपाल से यह परिवार राजकोट एक्सप्रेस पर बैठा। टिकिट जनरल था जहाँ जगह नहीं मिलने पर यह रिजर्वेशन में चढ़ गये लेकिन सीहोर में आकर उतरे और फिर जरनल डिब्बे में बैठने का प्रयास किया। गाड़ी में अधिक भीड़ होने के कारण यह परिवार राजकोट में नहीं बैठ पाया और रात 10 बजे के आसपास जब चैन्नई रेल आई तो उसमें चढ़ने का प्रयास किया। परिवार बच्चे-बच्ची व बहु तो बैठ गये लेकिन इनकी माँ नहीं बैठ पाई। इसके पति लालचंद ने इसे बैठाने का प्रयास भी किया लेकिन रेल चल दी पत्नि गेनाबाई चढ़ी लेकिन उसका पैर फिसल गया और वह रेल में आकर उसका शरीर कट गया घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गई। तब रेल सीहोर स्टेशन पर ही रुकी और रेल्वे पुलिस ने मामला दर्ज किया। जिला चिकित्सालय में मृतक महिला को मृत घोषित किया गया। इधर हिन्दु उत्सव समिति के समाजसेवी घनश्याम यादव अस्पताल में उपस्थित थे। घनश्याम ने परिवार की मदद करते हुए उन्हे कृष्णा भोजनालय से भोजन लाकर कराया। समिति के अध्यक्ष सतीश राठौर व हरी पालीवाल को सूचना दी जिस पर सतीश राठौर ने तत्काल जिला अस्पताल आकर पीड़ित परिवार से मिले। आज सुबह 10 बजे हिन्दु उत्सव समिति के सदस्यों वासुदेव मिश्रा, शंकर प्रजापति, मोहन चौरसिया, दिलीप राठौर, हरी पालीवाल, घनश्याम यादव, गोविन्द पहलवान, सुरेश जायसवाल, नरेन्द्र शर्मा, मोहन यादव, मुकेश यादव, दुष्यंत समाधिया आदि ने अंतिम संस्कार में भाग लिया। समिति ने जिला प्रशासन से पीड़ित परिवार को सहायता की मांग की जिस पर प्रशासन ने 5 हजार की मदद की। सहायता राशि देने पर हिन्दु उत्सव समिति ने प्रशासन का आभार व्यक्त किया है।
सीहोर 9 जून (नि.सं.)। रविवार की रात 10 बजे बनारस निवासी लालचंद पत्नि गेना देवी, 13-14 वर्षीय पुत्र पंकज व कुसुम व बहु रमोला भदोई जिला उ.प्र. के ग्राम गौरा से राजकोट मजदूरी करने जा रहे थे। भोपाल से यह परिवार राजकोट एक्सप्रेस पर बैठा। टिकिट जनरल था जहाँ जगह नहीं मिलने पर यह रिजर्वेशन में चढ़ गये लेकिन सीहोर में आकर उतरे और फिर जरनल डिब्बे में बैठने का प्रयास किया। गाड़ी में अधिक भीड़ होने के कारण यह परिवार राजकोट में नहीं बैठ पाया और रात 10 बजे के आसपास जब चैन्नई रेल आई तो उसमें चढ़ने का प्रयास किया। परिवार बच्चे-बच्ची व बहु तो बैठ गये लेकिन इनकी माँ नहीं बैठ पाई। इसके पति लालचंद ने इसे बैठाने का प्रयास भी किया लेकिन रेल चल दी पत्नि गेनाबाई चढ़ी लेकिन उसका पैर फिसल गया और वह रेल में आकर उसका शरीर कट गया घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गई। तब रेल सीहोर स्टेशन पर ही रुकी और रेल्वे पुलिस ने मामला दर्ज किया। जिला चिकित्सालय में मृतक महिला को मृत घोषित किया गया। इधर हिन्दु उत्सव समिति के समाजसेवी घनश्याम यादव अस्पताल में उपस्थित थे। घनश्याम ने परिवार की मदद करते हुए उन्हे कृष्णा भोजनालय से भोजन लाकर कराया। समिति के अध्यक्ष सतीश राठौर व हरी पालीवाल को सूचना दी जिस पर सतीश राठौर ने तत्काल जिला अस्पताल आकर पीड़ित परिवार से मिले। आज सुबह 10 बजे हिन्दु उत्सव समिति के सदस्यों वासुदेव मिश्रा, शंकर प्रजापति, मोहन चौरसिया, दिलीप राठौर, हरी पालीवाल, घनश्याम यादव, गोविन्द पहलवान, सुरेश जायसवाल, नरेन्द्र शर्मा, मोहन यादव, मुकेश यादव, दुष्यंत समाधिया आदि ने अंतिम संस्कार में भाग लिया। समिति ने जिला प्रशासन से पीड़ित परिवार को सहायता की मांग की जिस पर प्रशासन ने 5 हजार की मदद की। सहायता राशि देने पर हिन्दु उत्सव समिति ने प्रशासन का आभार व्यक्त किया है।
Monday, June 9, 2008
गंगा दशहरा : दस प्रकार के पापों से मुक्ति का पर्व
ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, हस्त नक्षत्र, बुध दिन, दशमी तिथि, गर करण, आनंद योग, व्यतीपात, कन्या राशि के चंद्रमा तथा वृष राशि के सूर्य इन दसों का संयोग महान पुण्य का कारक माना गया है। अतऱ् इन दस योगों से युक्त दशमी तिथि को गंगा स्नान और गंगा पूजन से दस प्रकार के पापों (तीन कायिक, चार वाचिक और तीन मानसिक) का हरण होता है।
इसीलिए इसे गंगा दशहरा कहते हैं। देव नदी गंगा का प्राणी मात्र के उद्धार हेतु पृथ्वी पर अवतरण ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को ही हुआ था। अत इस तिथि को गंगा दशहरा के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन पवित्र नदी में स्नान कर, गंगा जी का ध्यान करें। पूजा में दस प्रकार के गुण, धूप, दीप, सुगंध, नैवे, तांबूल एवं फल होने चाहिए तथा तिल, जौ एवं सत्तू सोलह-सोलह मुट्ठी होने चाहिए, जिन्हें दस ब्राह्मणों को दक्षिणा सहित दान करना चाहिए। इस प्रकार पापों से क्षय के लिए सभी वस्तुएं दस की संख्या में होनी चाहिए। उक्त प्रकार विधि-विधान से पूर्वक पूजा करने से मनुष्य सारे पापों से मुक्त हो श्री हरि के धाम को जाता है।
एक समय अयोध्या में सगर नाम के राजा राज्य करते थे। महाराज सगर चक्रवर्ती सम्राट थे। महराज सगर की दो रानियां केशिनी एवं सुमति थी। केशिनी के असमंजस नामक पुत्र था तथा सुमति के साठ हजार पुत्र थे। राजा सगर के असमंजस सहित सभी साठ हजार पुत्र घमंडी एवं क्रूर थे, जिनसे देवता दुखी एवं भयभीत रहते थे।
कपिल मुनि का शाप....
एक बार राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया और उसके लिए एक अश्व छोड़ा। राजा के दुष्ट पुत्रों को सबक सिखाने हेतु इंद्र ने अश्वमेघ यज्ञ के उस घोड़े को चुपके से कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया, जोकि उस समय तपस्या में लीन थे। घोड़े को खोजते-खोजते सगर के सभी पुत्र कपिल मुनि के आश्रम में जा पहुंचे। अपने अश्व को वहीं बंधा देख, वे सभी क्रोधित हो कपिल मुनि को युद्ध के लिए ललकारने लगे। अपनी तपस्या भंग होने पर क्रोधित कपिल मुनि ने शाप से उन सभी को भस्म कर दिया। अपने पुत्रों के भस्म होने की सूचना मिलने पर राजा सगर ने असमंजस के पुत्र अंशुमान, जो कि स्वभाव से धार्मिक एवं उदार स्वभाव का था, को कपिल मुनि के आश्रम भेजा। अंशुमान के अनुनय-विनय से प्रभावित हो कपिल मुनि ने उसे घोड़ा ले जाने तथा अपने पितामह को यज्ञ पूर्ण करने की आज्ञा दी। अंशुमान के आग्रह पर कपिल मुनि ने बताया कि उन सभी भस्म किए हुए सगर पुत्रों की मुक्ति तभी हो सकती है, जब गंगाजी स्वर्ग से आकर उनकी भस्म को स्वयं में समाहित कर लें। अंशुमान ने घोड़ा ले जाकर यज्ञ पूर्ण कराया तथा महाराज सगर के बाद राजा बने। अंशुमान के मन में हर समय अपने पूर्वजों की मुक्ति की चिंता बनी रहती थी। अतऱ् वे अपने पुत्र दिलीप को राज्य सौंप गंगा जी की प्रसन्नता हेतु वन में जाकर तपस्या में लीन हो गए। जहां तपस्या करते हुए उनका देहावसान हो गया।
राजा अंशुमान की मृत्यु के उपरांत महाराज दिलीप भी अपने पुत्र भगीरथ को राज्य सौंप, अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए तपस्या हेतु वन को चले गए और तपस्या करते हुए मृत्यु को प्राप्त हुए, किंतु वे भी गंगा जी को स्वर्ग से पृथ्वी पर नहीं ला सके। महाराज दिलीप के बाद भगीरथ ने भी घोर तपस्या की। तीन पीढ़ियों की तपस्या से प्रसन्न हो ब्रह्मा जी ने भगीरथ को दर्शन दिए तथा वरदान मांगने को कहा। भगीरथ ने कहा हे ब्रह्मदेव आप मेरे साठ हजार पूर्वजों, जो कि कपिल मुनि केश्राप से भस्म हो गए थे, की मुक्ति के लिए गंगा जी को अपने कमंडल से पृथ्वी लोक पर भेजने की कृपा करें। ब्रह्मा जी बोले, हे भगीरथ मैं अपने कमंडल से गंगा जी को पृथ्वी पर छोड़ने के लिए तैयार हूं, किंतु गंगा जी के वेग को रोकने में यह पृथ्वी असमर्थ है। अत: तुम भगवान शिव की आराधना कर, उन्हें गंगाजी को अपनी जटाओं में धारण करने के लिए प्रेरित करो।
ब्रह्माजी के परामर्श पर राजा भगीरथ ने एक पैर पर खड़े होकर अनेक वर्षों तक भगगवान शिव की घोर तपस्या की। उनकी कठिन तपस्या से प्रसन्न हो भगवान शिव गंगाजी को अपनी जटाओं में धारण करने के लिए सहमत हो गए। ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से गंगाजी को पृथ्वी की ओर भेज दिया। श्री शिव ने पृथ्वी पर आने से पहले उन्हें अपनी जटाओं में धारण कर लिया तथा राजा भगीरथ के पूर्वजों की मुक्ति के लिए अपनी एक जटा को पृथ्वी की ओर खोल दिया। इस प्रकार गंगाजी राजा भगीरथ के पीछे-पीछे पृथ्वी की ओर चल पड़ीं और भागीरथी के नाम से विख्यात हुईं। मार्ग में जब गंगाजी जाह्नु ऋषि के आश्रम से गुजरीं, तो ऋषि ने उनका पान कर लिया तथा भगीरथ की प्रार्थना पर गंगाजी को अपनी पुत्री बनाकर दाहिने कान से निकाल दिया। इसीलिए गंगा जी को जाह्नवी नाम से भी पुकारा जाता है। राजा भगीरथ का अनुसरण करते हुए गंगाजी कपिल मुनि के आश्रम पहुंची, जहां महाराज भगीरथ के पूर्वजों की भस्म पड़ी थी। गंगाजल के स्पर्श से वे सभी मुक्ति एवं मोक्ष को प्राप्त हो बैकुंठ को गए तथा गंगाजी अपनी यात्रा को जारी रखते हुए समुद्र में समाहित हो गईं।
गंगोत्री मंदिर उत्तरांचल में दशहरा तिथि को विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। उक्त तिथि को यहां गोमुख (जहां गंगाजी का उद्गम हुआ) दर्शन व गंगा स्नान एवं पूजन का विशेष महत्व है।
इसीलिए इसे गंगा दशहरा कहते हैं। देव नदी गंगा का प्राणी मात्र के उद्धार हेतु पृथ्वी पर अवतरण ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को ही हुआ था। अत इस तिथि को गंगा दशहरा के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन पवित्र नदी में स्नान कर, गंगा जी का ध्यान करें। पूजा में दस प्रकार के गुण, धूप, दीप, सुगंध, नैवे, तांबूल एवं फल होने चाहिए तथा तिल, जौ एवं सत्तू सोलह-सोलह मुट्ठी होने चाहिए, जिन्हें दस ब्राह्मणों को दक्षिणा सहित दान करना चाहिए। इस प्रकार पापों से क्षय के लिए सभी वस्तुएं दस की संख्या में होनी चाहिए। उक्त प्रकार विधि-विधान से पूर्वक पूजा करने से मनुष्य सारे पापों से मुक्त हो श्री हरि के धाम को जाता है।
एक समय अयोध्या में सगर नाम के राजा राज्य करते थे। महाराज सगर चक्रवर्ती सम्राट थे। महराज सगर की दो रानियां केशिनी एवं सुमति थी। केशिनी के असमंजस नामक पुत्र था तथा सुमति के साठ हजार पुत्र थे। राजा सगर के असमंजस सहित सभी साठ हजार पुत्र घमंडी एवं क्रूर थे, जिनसे देवता दुखी एवं भयभीत रहते थे।
कपिल मुनि का शाप....
एक बार राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया और उसके लिए एक अश्व छोड़ा। राजा के दुष्ट पुत्रों को सबक सिखाने हेतु इंद्र ने अश्वमेघ यज्ञ के उस घोड़े को चुपके से कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया, जोकि उस समय तपस्या में लीन थे। घोड़े को खोजते-खोजते सगर के सभी पुत्र कपिल मुनि के आश्रम में जा पहुंचे। अपने अश्व को वहीं बंधा देख, वे सभी क्रोधित हो कपिल मुनि को युद्ध के लिए ललकारने लगे। अपनी तपस्या भंग होने पर क्रोधित कपिल मुनि ने शाप से उन सभी को भस्म कर दिया। अपने पुत्रों के भस्म होने की सूचना मिलने पर राजा सगर ने असमंजस के पुत्र अंशुमान, जो कि स्वभाव से धार्मिक एवं उदार स्वभाव का था, को कपिल मुनि के आश्रम भेजा। अंशुमान के अनुनय-विनय से प्रभावित हो कपिल मुनि ने उसे घोड़ा ले जाने तथा अपने पितामह को यज्ञ पूर्ण करने की आज्ञा दी। अंशुमान के आग्रह पर कपिल मुनि ने बताया कि उन सभी भस्म किए हुए सगर पुत्रों की मुक्ति तभी हो सकती है, जब गंगाजी स्वर्ग से आकर उनकी भस्म को स्वयं में समाहित कर लें। अंशुमान ने घोड़ा ले जाकर यज्ञ पूर्ण कराया तथा महाराज सगर के बाद राजा बने। अंशुमान के मन में हर समय अपने पूर्वजों की मुक्ति की चिंता बनी रहती थी। अतऱ् वे अपने पुत्र दिलीप को राज्य सौंप गंगा जी की प्रसन्नता हेतु वन में जाकर तपस्या में लीन हो गए। जहां तपस्या करते हुए उनका देहावसान हो गया।
राजा अंशुमान की मृत्यु के उपरांत महाराज दिलीप भी अपने पुत्र भगीरथ को राज्य सौंप, अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए तपस्या हेतु वन को चले गए और तपस्या करते हुए मृत्यु को प्राप्त हुए, किंतु वे भी गंगा जी को स्वर्ग से पृथ्वी पर नहीं ला सके। महाराज दिलीप के बाद भगीरथ ने भी घोर तपस्या की। तीन पीढ़ियों की तपस्या से प्रसन्न हो ब्रह्मा जी ने भगीरथ को दर्शन दिए तथा वरदान मांगने को कहा। भगीरथ ने कहा हे ब्रह्मदेव आप मेरे साठ हजार पूर्वजों, जो कि कपिल मुनि केश्राप से भस्म हो गए थे, की मुक्ति के लिए गंगा जी को अपने कमंडल से पृथ्वी लोक पर भेजने की कृपा करें। ब्रह्मा जी बोले, हे भगीरथ मैं अपने कमंडल से गंगा जी को पृथ्वी पर छोड़ने के लिए तैयार हूं, किंतु गंगा जी के वेग को रोकने में यह पृथ्वी असमर्थ है। अत: तुम भगवान शिव की आराधना कर, उन्हें गंगाजी को अपनी जटाओं में धारण करने के लिए प्रेरित करो।
ब्रह्माजी के परामर्श पर राजा भगीरथ ने एक पैर पर खड़े होकर अनेक वर्षों तक भगगवान शिव की घोर तपस्या की। उनकी कठिन तपस्या से प्रसन्न हो भगवान शिव गंगाजी को अपनी जटाओं में धारण करने के लिए सहमत हो गए। ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से गंगाजी को पृथ्वी की ओर भेज दिया। श्री शिव ने पृथ्वी पर आने से पहले उन्हें अपनी जटाओं में धारण कर लिया तथा राजा भगीरथ के पूर्वजों की मुक्ति के लिए अपनी एक जटा को पृथ्वी की ओर खोल दिया। इस प्रकार गंगाजी राजा भगीरथ के पीछे-पीछे पृथ्वी की ओर चल पड़ीं और भागीरथी के नाम से विख्यात हुईं। मार्ग में जब गंगाजी जाह्नु ऋषि के आश्रम से गुजरीं, तो ऋषि ने उनका पान कर लिया तथा भगीरथ की प्रार्थना पर गंगाजी को अपनी पुत्री बनाकर दाहिने कान से निकाल दिया। इसीलिए गंगा जी को जाह्नवी नाम से भी पुकारा जाता है। राजा भगीरथ का अनुसरण करते हुए गंगाजी कपिल मुनि के आश्रम पहुंची, जहां महाराज भगीरथ के पूर्वजों की भस्म पड़ी थी। गंगाजल के स्पर्श से वे सभी मुक्ति एवं मोक्ष को प्राप्त हो बैकुंठ को गए तथा गंगाजी अपनी यात्रा को जारी रखते हुए समुद्र में समाहित हो गईं।
गंगोत्री मंदिर उत्तरांचल में दशहरा तिथि को विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। उक्त तिथि को यहां गोमुख (जहां गंगाजी का उद्गम हुआ) दर्शन व गंगा स्नान एवं पूजन का विशेष महत्व है।
गरीबों को पट्टे दिये जायेंगे सर्वेक्षण की अंतिम तारीख 15 जून
सीहोर 8 जून (नि.सं.)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में गत 17 अप्रैल 2008 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में निवास करने वाले ऐसे समस्त आवासहीन निर्धन परिवारों को आवासीय पट्टा देने का निर्णय लिया गया है जो 31 दिसम्बर 2007 की स्थिति में शासकीय नजूल अथवा नगरीय निकाय अथवा विकास प्राधिकरण की भूमि पर झुग्गी-झोपड़ी में निवास कर रहे हैं। ऐसे परिवारों को पट्टे की पात्रता की शर्तों का निर्धारण किया गया है। लेकिन सीहोर जिले में इस जानकारी को जानबूझकर छुपाया जा रहा है।
सिर्फ कुछ खास लोगों को इसका लाभ मिल सके इसके लिये प्रशासन लगा हुआ है। कई लोगों ने झोपड़े तान लिये हैं।
मंत्रिपरिषद द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार यदि व्यापक जनहित में सार्वजनिक उपयोग के लिए झुग्गी बस्तियों को वर्तमान स्थान से हटाना आवश्यक समझा जायेगा तो इन्हें अस्थाई अधिकार पत्र दिए जाकर अन्यत्र व्यवस्थापन की कार्यवाही की जा सकेगी। भूमिहीन व्यक्ति के वास्तविक अधिभोग की भूमि का व्यवस्थापन या किसी अन्य भूमि का आवंटन, जो 450 वर्गफीट से ज्यादा न हो, उसके पक्ष में किया जायेगा। किन्तु इससे अधिक भूमि होने की स्थिति में नगर पंचायत क्षेत्र में 800 वर्गफीट, नगर पालिका क्षेत्र में 600 वर्गफीट और नगर निगम क्षेत्र में 450 वर्गफीट भूमि के व्यवस्थापन की सीमा होगी। ऐसी अतिरिक्त भूमि रिक्त कराकर अन्य पात्र व्यक्ति को आंवटित की जा सकेगी या नगरीय निकाय उसका अन्य रुप में उपयोग कर सकेंगे। यह भी निर्णय लिया गया है कि व्यापक जनहित में और भावी आवश्यकतों को दृष्टिगत रखते हुए, वर्तमान झुग्गी बस्तियों को उनके स्थान से अन्यत्र व्यवस्थापित किए जाने का निर्णय राजधानी, संभागीय मुख्यालय के शहरों और जिला मुख्यालय के शहरों एवं अन्य शहरों के लिए गठित समितियों द्वारा किया जायेगा। यदि व्यापक जनहित में किसी भी समय शासन द्वारा यह आवश्यक समझा जाता है कि पट्टा प्रदाय की गई झुग्गी बस्ती की भूमि किसी सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यक है तो उक्त भूमि का पट्टा निरस्त कर भूमि वापिस ली जा सकेगी और पट्टेधारी को अन्यत्र उचित स्थान पर बसाने की कार्यवाही की जायेगी। यदि कोई झुग्गीवासी किरायेदार के रुप में निवास कर रहा है तब उसे भी पट्टे की पात्रता होगी परंतु झुग्गी के मालिक को पट्टा नहीं दिया जायेगा। पूर्व पट्टेधारी द्वारा पुन: पट्टा प्राप्त करने के आवेदन या गलत जानकारी देने पर उसका यह कृत्य दंडनीय होगा। आवासीय भूमि का पट्टा पति-पत्नी दोनों के संयुक्त नाम से दिया जायेगा। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रदेश के समस्त शहरों में झुग्गी-झोपड़ियों में निवासरत आवासहीनों का सर्वेक्षण कराया जायेगा। यह सर्वेक्षण 15 जून 2008 तक पूर्ण कराये जाने का लक्ष्य है। इसके बाद पट्टों का आवंटन, झुग्गियों के व्यवस्थापन आदि के कार्य पूर्ण कराये जायेंगे। सर्वेक्षण के दौरान पात्र पाये गये आवासहीनों का बायोमेट्रिक सर्वे भी कराया जायेगा जिसे समय सीमा में पूर्ण करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित की जायेगी जो इस संबंध में निर्णय लिए जाने हेतु अधिकृत होगी।
सिर्फ कुछ खास लोगों को इसका लाभ मिल सके इसके लिये प्रशासन लगा हुआ है। कई लोगों ने झोपड़े तान लिये हैं।
मंत्रिपरिषद द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार यदि व्यापक जनहित में सार्वजनिक उपयोग के लिए झुग्गी बस्तियों को वर्तमान स्थान से हटाना आवश्यक समझा जायेगा तो इन्हें अस्थाई अधिकार पत्र दिए जाकर अन्यत्र व्यवस्थापन की कार्यवाही की जा सकेगी। भूमिहीन व्यक्ति के वास्तविक अधिभोग की भूमि का व्यवस्थापन या किसी अन्य भूमि का आवंटन, जो 450 वर्गफीट से ज्यादा न हो, उसके पक्ष में किया जायेगा। किन्तु इससे अधिक भूमि होने की स्थिति में नगर पंचायत क्षेत्र में 800 वर्गफीट, नगर पालिका क्षेत्र में 600 वर्गफीट और नगर निगम क्षेत्र में 450 वर्गफीट भूमि के व्यवस्थापन की सीमा होगी। ऐसी अतिरिक्त भूमि रिक्त कराकर अन्य पात्र व्यक्ति को आंवटित की जा सकेगी या नगरीय निकाय उसका अन्य रुप में उपयोग कर सकेंगे। यह भी निर्णय लिया गया है कि व्यापक जनहित में और भावी आवश्यकतों को दृष्टिगत रखते हुए, वर्तमान झुग्गी बस्तियों को उनके स्थान से अन्यत्र व्यवस्थापित किए जाने का निर्णय राजधानी, संभागीय मुख्यालय के शहरों और जिला मुख्यालय के शहरों एवं अन्य शहरों के लिए गठित समितियों द्वारा किया जायेगा। यदि व्यापक जनहित में किसी भी समय शासन द्वारा यह आवश्यक समझा जाता है कि पट्टा प्रदाय की गई झुग्गी बस्ती की भूमि किसी सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यक है तो उक्त भूमि का पट्टा निरस्त कर भूमि वापिस ली जा सकेगी और पट्टेधारी को अन्यत्र उचित स्थान पर बसाने की कार्यवाही की जायेगी। यदि कोई झुग्गीवासी किरायेदार के रुप में निवास कर रहा है तब उसे भी पट्टे की पात्रता होगी परंतु झुग्गी के मालिक को पट्टा नहीं दिया जायेगा। पूर्व पट्टेधारी द्वारा पुन: पट्टा प्राप्त करने के आवेदन या गलत जानकारी देने पर उसका यह कृत्य दंडनीय होगा। आवासीय भूमि का पट्टा पति-पत्नी दोनों के संयुक्त नाम से दिया जायेगा। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रदेश के समस्त शहरों में झुग्गी-झोपड़ियों में निवासरत आवासहीनों का सर्वेक्षण कराया जायेगा। यह सर्वेक्षण 15 जून 2008 तक पूर्ण कराये जाने का लक्ष्य है। इसके बाद पट्टों का आवंटन, झुग्गियों के व्यवस्थापन आदि के कार्य पूर्ण कराये जायेंगे। सर्वेक्षण के दौरान पात्र पाये गये आवासहीनों का बायोमेट्रिक सर्वे भी कराया जायेगा जिसे समय सीमा में पूर्ण करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित की जायेगी जो इस संबंध में निर्णय लिए जाने हेतु अधिकृत होगी।
Sunday, June 8, 2008
एड्स ! नहीं हो सका बचाव, सीहोर में एड्स रोगी महिला ने शिशु को जन्म दिया, लेकिन हो गई अनेक चूक...
सीहोर 7 जून (विशेष संवाददाता)। जिला चिकित्सालय में एक एड्स पीड़िता महिला ने गत दिनों स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दिया है जिसकी खुशी समाये नहीं समा रही है। नवजात के माता-पिता दोनो ही एड्स पीड़ित हैं लेकिन भारतीय शासन के एड्स संबंधी कुछ सख्त नियम हैं कि ऐसे मामले में जिस किसी एड्स पीड़ित महिला का आपरेशन हो उसके आपरेशन संबंधी साजो- सामान को मय सबूत के एक 5 फुट गहरे गड्डे में पाँच लोगों की उपस्थित में दबवा दिया जाना चाहिये तथा इसके सबूत भी रखे जाने चाहिये क्या सीहोर में ऐसा हुआ है ? अथवा जिस सामान से आपरेशन हुआ है आज भी वह सामान अस्पताल में मौजूद है ? और उपयोग हो रहा है ? साथ ही नवजात के जन्म के समय जिन विशेष दवाईयों का उपयोग होना था उनका उपयोग हुआ या नहीं ? क्या सावधानी ही बचाव नहीं बन सकी। एड्स के मामले में जिला चिकित्सालय में हो रही चूकों पर आज आप भी डालिये हमारे एक नजर.....।
विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत सरकार भले ही एड्स पर करोड़ो रुपयों का व्यय कर प्रचार-प्रसार करने में लगे हैं और सावधानी ही रोकथाम अथवा बचाव का नारा पूरे देश में गूंज रहा है लेकिन क्या स्वास्थ्य कर्मी ही इसको लेकर सचेत और गंभीर हैं या नहीं ? यह भी एक चिंतनीय प्रश् है। हालांकि चिकित्सा सेवा में कार्यरत लोगों के प्रशिक्षण समय-समय पर होते रहते हैं कि किस प्रकार एड्स की रोकथाम की जा सकती है। साथ ही सार्वभौम सावधानियों का पालन करने के निर्देश भी दिये जाते रहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन लगातार सार्वभौम सावधानियों का पालन करने का निर्देश देता रहता है।
पिछले दिनों सीहोर नगर में एक एड्स से ग्रस्त महिला ने स्वस्थ शिशु को जन्म दिया है। संभवत: सीहोर में यह पहली एड्स पीड़िता के बच्चे का जन्म हुआ है। सीहोर के इंग्लिशपुरा मार्ग निवासी (महिला व पति का नाम प्रकाशित नहीं किया जाना उचित रहेगा) महिला जो मुम्बई की रहने वाली है और पति की सीहोर में एक होटल में नौकरी लग जाने के कारण यहाँ आई हुई थी को जब प्रसव वेदना हुई तो उसे जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया जहाँ उसका आपरेशन करना तय हुआ। चूंकि खून कम था इसलिये उससे अलग से खून दिया जाने की व्यवस्था हुई तो बदले में उसके पति ने भी यहाँ अपना खून डोनेट किया। इसके पति के खून की जांच की गई तो पता चला कि उसे एचआईवी पाजीटिव है और दूसरे चरण में है।
इसकी जानकारी मिलते ही तत्काल इसकी पत्नि गर्भस्थ महिला के खून की जांच भी बारीकी से की गई तब जानकारी सामने आई की उसे भी एचआईवी पाजीटिव है लेकिन प्रथम चरण में है।
इसकी जानकारी जिला चिकित्सालय में दर्ज कर ली गई और उधर आराम से आपरेशन कर दिया गया तथा स्वस्थ बच्चे का जन्म हो गया। यह घटना है करीब दो माह पूर्व की 9 अप्रैल के दिन महिला ने बच्चे को जन्म दिया था।
सूत्र बताते हैं कि जब कभी भी एड्स ग्रस्त खून की जांच सीहोर जिला चिकित्सालय में होती है तो वहाँ जिस सूई, रुई अथवा अन्य सामान का इस प्रक्रिया में उपयोग होता है उसे हाईपोक्लोराईड में गलाकर नष्ट किया जाता है। यहाँ बकायदा एक कर्मचारी सामान नष्ट करने के लिये गड्डा खोदकर गाड़कर भी आता है।
लेकिन जब यहाँ आपरेशन थियेटर में एड्स ग्रस्त महिला का आपरेशन हुआ तो क्या उसके खून से भीगे कपड़े, रुई, सूई, छुरी, ब्लेड, दस्ताने, आदि का सावधानी पूर्वक नष्ट किया गया है ? क्या इसके नष्ट करने के कोई सबूत लिखत पढ़त की गई है।
क्या इन सामानों को लाल डिब्बे में पटकने के बाद किसी गड्डे में सावधानी पूर्वक गड़वाया गया है ? क्या उपयोग किये गये औजार हाईपोक्लोराईड आदि बकायदा विशेष प्रक्रिया के तहत साफ किये गये हैं ? क्या यह सामग्री आपरेशन थियेटर में उपलब्ध है ? क्या 9 अप्रैल को इसका इस्तेमाल हुआ ?
इस संबंध में सिविल सर्जन श्री टी.एन. चतुर्वेदी जानकारी देने से बचे और उन्होने सिर्फ इतना ही कहा कि हाँ एक एड्स पीडिता के बच्चे का जन्म अवश्य हुआ है।
अब अगर सामान नष्ट नहीं हुआ है तो फिर विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत सरकार के नियमों और एड्स की रोकथाम के लिये किये जा रहे करोड़ो के खर्च का क्या फायदा ?
जिस महिला को एचआईवी था उसके बच्चे भी दुग्ध पान के बाद इसके संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है यूँ तो आपरेशन के दौरान ही जरा-सी असावधानी से बच्चा संक्रमित हो जाता है लेकिन अब जिस एड्स पीड़िता महिला ने बच्चे को जन्म दिया है वह अभी तक अस्पताल नहीं बुलाई गई है जबकि उसे नवजात शिशु को एड्स से बचाने के लिये अनेक आवश्यक कदम उठाने आवश्यक थे। इसकी भी सावधानी जिला चिकित्सालय प्रशासन ने नहीं रखी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत सरकार भले ही एड्स पर करोड़ो रुपयों का व्यय कर प्रचार-प्रसार करने में लगे हैं और सावधानी ही रोकथाम अथवा बचाव का नारा पूरे देश में गूंज रहा है लेकिन क्या स्वास्थ्य कर्मी ही इसको लेकर सचेत और गंभीर हैं या नहीं ? यह भी एक चिंतनीय प्रश् है। हालांकि चिकित्सा सेवा में कार्यरत लोगों के प्रशिक्षण समय-समय पर होते रहते हैं कि किस प्रकार एड्स की रोकथाम की जा सकती है। साथ ही सार्वभौम सावधानियों का पालन करने के निर्देश भी दिये जाते रहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन लगातार सार्वभौम सावधानियों का पालन करने का निर्देश देता रहता है।
पिछले दिनों सीहोर नगर में एक एड्स से ग्रस्त महिला ने स्वस्थ शिशु को जन्म दिया है। संभवत: सीहोर में यह पहली एड्स पीड़िता के बच्चे का जन्म हुआ है। सीहोर के इंग्लिशपुरा मार्ग निवासी (महिला व पति का नाम प्रकाशित नहीं किया जाना उचित रहेगा) महिला जो मुम्बई की रहने वाली है और पति की सीहोर में एक होटल में नौकरी लग जाने के कारण यहाँ आई हुई थी को जब प्रसव वेदना हुई तो उसे जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया जहाँ उसका आपरेशन करना तय हुआ। चूंकि खून कम था इसलिये उससे अलग से खून दिया जाने की व्यवस्था हुई तो बदले में उसके पति ने भी यहाँ अपना खून डोनेट किया। इसके पति के खून की जांच की गई तो पता चला कि उसे एचआईवी पाजीटिव है और दूसरे चरण में है।
इसकी जानकारी मिलते ही तत्काल इसकी पत्नि गर्भस्थ महिला के खून की जांच भी बारीकी से की गई तब जानकारी सामने आई की उसे भी एचआईवी पाजीटिव है लेकिन प्रथम चरण में है।
इसकी जानकारी जिला चिकित्सालय में दर्ज कर ली गई और उधर आराम से आपरेशन कर दिया गया तथा स्वस्थ बच्चे का जन्म हो गया। यह घटना है करीब दो माह पूर्व की 9 अप्रैल के दिन महिला ने बच्चे को जन्म दिया था।
सूत्र बताते हैं कि जब कभी भी एड्स ग्रस्त खून की जांच सीहोर जिला चिकित्सालय में होती है तो वहाँ जिस सूई, रुई अथवा अन्य सामान का इस प्रक्रिया में उपयोग होता है उसे हाईपोक्लोराईड में गलाकर नष्ट किया जाता है। यहाँ बकायदा एक कर्मचारी सामान नष्ट करने के लिये गड्डा खोदकर गाड़कर भी आता है।
लेकिन जब यहाँ आपरेशन थियेटर में एड्स ग्रस्त महिला का आपरेशन हुआ तो क्या उसके खून से भीगे कपड़े, रुई, सूई, छुरी, ब्लेड, दस्ताने, आदि का सावधानी पूर्वक नष्ट किया गया है ? क्या इसके नष्ट करने के कोई सबूत लिखत पढ़त की गई है।
क्या इन सामानों को लाल डिब्बे में पटकने के बाद किसी गड्डे में सावधानी पूर्वक गड़वाया गया है ? क्या उपयोग किये गये औजार हाईपोक्लोराईड आदि बकायदा विशेष प्रक्रिया के तहत साफ किये गये हैं ? क्या यह सामग्री आपरेशन थियेटर में उपलब्ध है ? क्या 9 अप्रैल को इसका इस्तेमाल हुआ ?
इस संबंध में सिविल सर्जन श्री टी.एन. चतुर्वेदी जानकारी देने से बचे और उन्होने सिर्फ इतना ही कहा कि हाँ एक एड्स पीडिता के बच्चे का जन्म अवश्य हुआ है।
अब अगर सामान नष्ट नहीं हुआ है तो फिर विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत सरकार के नियमों और एड्स की रोकथाम के लिये किये जा रहे करोड़ो के खर्च का क्या फायदा ?
जिस महिला को एचआईवी था उसके बच्चे भी दुग्ध पान के बाद इसके संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है यूँ तो आपरेशन के दौरान ही जरा-सी असावधानी से बच्चा संक्रमित हो जाता है लेकिन अब जिस एड्स पीड़िता महिला ने बच्चे को जन्म दिया है वह अभी तक अस्पताल नहीं बुलाई गई है जबकि उसे नवजात शिशु को एड्स से बचाने के लिये अनेक आवश्यक कदम उठाने आवश्यक थे। इसकी भी सावधानी जिला चिकित्सालय प्रशासन ने नहीं रखी है।
एड्स पीड़ित महिला की जचकी के लिये पात्र नहीं सीहोर, फिर हुआ आपरेशन, नहीं दी आवश्यक दवाएं
सीहोर। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जिस माँ को एड्स होता है उसे प्रसव के समय और जन्म के 72 घंटो के भीतर उसे नवजात शिशु को नेविरापाइन की एक-एक खुराक दी जाती है। प्रसव वेदना के दौरान अत:शिरा माध्यम से माता को तथा जन्म के 6 सप्ताह के भीतर शिशु को जिडोवुडाइन भी दी जाना आवश्यक है इससे एड्स के संचरण का खतरा कम होता है। यदि जिडोवुडाइन प्रसव के समय दी जाती है खतरा आधा ही रह जाता है। इसके अलावा सबसे बड़ा खतरा नवजात शिशु के लिये माँ का स्तनपान करना होता है क्या उसके लिये सीहोर की संबंधित एड्स महिला को सावधान किया गया ? इस संबंध में जिला स्वास्थ्य अधिकारी एक बारगी जांच करने की आवश्यकता है।
विद्युत प्रवाह से युवक की मौत
सीहोर 7 जून (नि.सं.)। ग्राम मानाखेड़ी निवासी एक युवक की बिजली करंट लगने से मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है।
जानकारी के अनुसार आष्टा थाना अन्तर्गत आने वाले ग्राम मानाखेड़ी निवासी 23 वर्षीय रुप सिंह पुत्र घासीराम अपने कु एं पर काम कर रहा था तभी उसे अचानक बिजली करंट लग गया जिस उपचार हेतु आष्टा अस्पताल लाया गया जहाँ पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उधर नस. गंज क्षेत्र में मणीबाई पत्नि नारायण जाट 29 साल निवासी सीगांव की अज्ञात कारणों से जहरीला पदार्थ का सेवन करने से मौत हो गई। उधर बुदनी थाना क्षेत्र में बीती रात रेल्वे गेट के समीप रेल से कटने से अज्ञात युवक की मौत हो गई। मृत युवक नीले रंग की टीशर्ट, सफे द रंग का पेंट पहने हुए नंगे पैर था जिसे लोगों द्वारा मंदबुध्दि का बताया गया है। जो बुदनी क्षेत्र में घूमता रहता था।
जानकारी के अनुसार आष्टा थाना अन्तर्गत आने वाले ग्राम मानाखेड़ी निवासी 23 वर्षीय रुप सिंह पुत्र घासीराम अपने कु एं पर काम कर रहा था तभी उसे अचानक बिजली करंट लग गया जिस उपचार हेतु आष्टा अस्पताल लाया गया जहाँ पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उधर नस. गंज क्षेत्र में मणीबाई पत्नि नारायण जाट 29 साल निवासी सीगांव की अज्ञात कारणों से जहरीला पदार्थ का सेवन करने से मौत हो गई। उधर बुदनी थाना क्षेत्र में बीती रात रेल्वे गेट के समीप रेल से कटने से अज्ञात युवक की मौत हो गई। मृत युवक नीले रंग की टीशर्ट, सफे द रंग का पेंट पहने हुए नंगे पैर था जिसे लोगों द्वारा मंदबुध्दि का बताया गया है। जो बुदनी क्षेत्र में घूमता रहता था।
सड़क हादसे में घायल
सीहोर 7 जून (नि.सं.)। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में सड़क हादसों में तीन लोग घायल हो गये। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया है।
आष्टा थाना क्षेत्र के ग्राम बारेखड़ा निवासी बिहारीलाल अपनी पत्नि के साथ पैदल गांव जा रहा था कि तभी ग्राम के समीप निपानिया तरफ से आ रहे अज्ञात जीप चालक ने तेजगति एवं लापरवाही पूर्वक वाहन चलाकर बिहारीलाल को टक्कर मारकर घायल कर दिया जिसे आष्टा अस्पताल में उपचार हेतु भर्ती कराया गया है।
इसी प्रकार कान्द्राखेड़ी निवासी मनोहर पुत्र कमल सिंह अपने चचेरे भाई अजब सिंह के साथ बाइक से आष्टा से आ रहा था तभी कासमपुरा जोड़ के समीप विपरीत दिशा से आ रही जीप एमपी 04 एच 5068 के चालक ने तेजगति एवं लापरवाही पूर्वक वाहन चलाकर टक्कर मार दी जिसमें अजब सिंह को गंभीर चोंट होने से फ्रेक्चर अस्पताल भोपाल में भर्ती कराया गया है।
उधर जावर थाना क्षेत्र में ट्रक सीजी.04 जे.5190 के चालक ने राजमार्ग स्थित झिल्ला जोड़ के समीप बीती रात अनियंत्रित गति से वाहन चलाकर मीनी ट्रक एमपी 09 जीई 4020 में टक्कर मार दी। परिणामस्वरुप मीनी ट्रक पलट जाने से उसका क्लीनर घायल हो गया।
आष्टा थाना क्षेत्र के ग्राम बारेखड़ा निवासी बिहारीलाल अपनी पत्नि के साथ पैदल गांव जा रहा था कि तभी ग्राम के समीप निपानिया तरफ से आ रहे अज्ञात जीप चालक ने तेजगति एवं लापरवाही पूर्वक वाहन चलाकर बिहारीलाल को टक्कर मारकर घायल कर दिया जिसे आष्टा अस्पताल में उपचार हेतु भर्ती कराया गया है।
इसी प्रकार कान्द्राखेड़ी निवासी मनोहर पुत्र कमल सिंह अपने चचेरे भाई अजब सिंह के साथ बाइक से आष्टा से आ रहा था तभी कासमपुरा जोड़ के समीप विपरीत दिशा से आ रही जीप एमपी 04 एच 5068 के चालक ने तेजगति एवं लापरवाही पूर्वक वाहन चलाकर टक्कर मार दी जिसमें अजब सिंह को गंभीर चोंट होने से फ्रेक्चर अस्पताल भोपाल में भर्ती कराया गया है।
उधर जावर थाना क्षेत्र में ट्रक सीजी.04 जे.5190 के चालक ने राजमार्ग स्थित झिल्ला जोड़ के समीप बीती रात अनियंत्रित गति से वाहन चलाकर मीनी ट्रक एमपी 09 जीई 4020 में टक्कर मार दी। परिणामस्वरुप मीनी ट्रक पलट जाने से उसका क्लीनर घायल हो गया।
जानलेवा हमला
सीहोर 7 जून (नि.सं.)। मामूली-सी बात को लेकर एक युवक ने दूसरे युवक पर छुरी से प्रहार का जानलेवा चोंटे पहुँचाई। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया है। जानकारी के अनुसार जलालीपुरा कस्बा निवासी तबरेज पुत्र बन्ने खां शुक्रवार की रात साढ़े साते बजे दीवानबाग में भैया मियां के पास गया था जहाँ पर बशीम लाईन मेन के घर के पास खड़ा था तभी बाबू बेलदार का भानेज रोशन निवासी कोनाझिर का आया और तबरेज से बोला कि तेरे भाई का धंधा बंद करवा दूंगा और छुरी निक ल कर तबरेज पर जानलेवा हमला कर दिया घायल तबरेज को उपचार हेतु भोपाल भेजा गया।
विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण प्रेमी संघ ने नगर में अनेको परिसरों में किया वृक्षारोपण
आष्टा 7 जून (नि.प्र.)। निरन्तर विकराल हो रही प्रदूषण संबंधी समस्याओं से ग्रस्त मनुष्यता को इन समस्याओं से निजात दिलाने हेतू आष्टा के कुछ जागरूक युवाओं ने पर्यावरण प्रेमी संघ के माध्यम से विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आष्टा की विभिन्न शासकीय एवं धार्मिक संस्थाओं में अधिकारियों एवं संस्था प्रमुखों द्वारा वृहद पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया । सर्वप्रथम न्यायालय परिसर में प्रात: 9.30 बजे न्यायाधीश राजेश श्रीवास्तव, सुधीर चौधरी आनंद कुमार सहलाम द्वारा पौधारोपण किया गया ।
इसी श्रृंखला में हेड पोस्ट आफिस में पोस्टमास्टर एच.एल.रघुवंशी, एवं स्टाफ, टेलीफोन एक्सचेंज में प्रबंधक रवि शंकर राजौरिया एवं स्टाफ, तहसील प्रागंण में आई. एस. श्रीमति जी.व्ही. रश्मि, तहसीलदार विहारी सिंह, हरीबाबू शर्मा, थाना परिसर में टी.आई. अतीक अहमद खान, शा. महा. प्रागंण में प्राचार्य डा. एल. डी.मोदी, प्रो. हिमांशु राय एवं स्टाफ, शा. उ. बा. उ.मा.वि. परिसर में प्राचार्य श्रीमति सुलक्षणा दुबे एवं स्टाफ, जनपद पंचायत परिसर में एम.एल.पाटिल, डी.पी.जोशी एवं स्टाफ, शा. मा. शाला. बुधवारा परिसर मे प्राधानाचार्य संतोष जैन एवं स्टाफ, शा.कन्या उ.मा.विद्यालय परिसर में भृत्य गणपत दास द्वारा पौधारोपण किया गया । इसी तारतम्य में शहर के प्रतिष्ठित गायत्री मंदिर परिसर मे ंगायत्री परिवार के सदस्यों द्वारा तथा नूरानी मस्जिद परिसर में हजरत मोहम्मद कलीमउद्दीन सिद्धीकी जाुफर नगर द्वारा मुस्लिम भाईयों की उपस्थिति में पौधारोपण किया । इस संपूर्ण कार्यक्रम के दौरान रेंजर ए.के.एस.सेंगर, पार्षद अजीज अंसारी, मो. राशीद मामू, सूरज उपाध्याय, जी.एल.नागर, अशोक देशलहरा, विजय खंडेलवाल, आदि ने इस कार्यक्रम में उपस्थित होकर सक्रिय सहयोग प्रदान किया। इस कार्यक्रम में पर्यावरण प्रेमी संघ के धीरज धारवां, सुभाष दुबे, सुदीप जायसवाल, संजय जोशी, धरमपाल माहेश्वरी, विकास जायसवाल, अभिभाषकगण विजेन्द्र ंसिह ठाकूर, दिलीप सिंह ठाकूर, प्रदीप धाड़ीवाल, कुलदीप शर्मा, एनके सारसिया, जेपी शर्मा, चित्रेन्द्र सिंह सोलंकी, मनोज शर्मा, भूपेश जामलिया, राकेश बैरागी, दिलीप यादव, कालू सोनी, चन्दर मेवाउा आदि उपस्थित रहे । पर्यावरण प्रेमी संघ ने इस उद्देश्य पूर्ण कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित किया है तथा साथ ही साथ इस दिवस पर शहर एवं अंचल में अन्य जागरूक जनों एवं संस्थाओं द्वारा भी इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने हेतू सभी को धन्यवाद दिया ।
इसी श्रृंखला में हेड पोस्ट आफिस में पोस्टमास्टर एच.एल.रघुवंशी, एवं स्टाफ, टेलीफोन एक्सचेंज में प्रबंधक रवि शंकर राजौरिया एवं स्टाफ, तहसील प्रागंण में आई. एस. श्रीमति जी.व्ही. रश्मि, तहसीलदार विहारी सिंह, हरीबाबू शर्मा, थाना परिसर में टी.आई. अतीक अहमद खान, शा. महा. प्रागंण में प्राचार्य डा. एल. डी.मोदी, प्रो. हिमांशु राय एवं स्टाफ, शा. उ. बा. उ.मा.वि. परिसर में प्राचार्य श्रीमति सुलक्षणा दुबे एवं स्टाफ, जनपद पंचायत परिसर में एम.एल.पाटिल, डी.पी.जोशी एवं स्टाफ, शा. मा. शाला. बुधवारा परिसर मे प्राधानाचार्य संतोष जैन एवं स्टाफ, शा.कन्या उ.मा.विद्यालय परिसर में भृत्य गणपत दास द्वारा पौधारोपण किया गया । इसी तारतम्य में शहर के प्रतिष्ठित गायत्री मंदिर परिसर मे ंगायत्री परिवार के सदस्यों द्वारा तथा नूरानी मस्जिद परिसर में हजरत मोहम्मद कलीमउद्दीन सिद्धीकी जाुफर नगर द्वारा मुस्लिम भाईयों की उपस्थिति में पौधारोपण किया । इस संपूर्ण कार्यक्रम के दौरान रेंजर ए.के.एस.सेंगर, पार्षद अजीज अंसारी, मो. राशीद मामू, सूरज उपाध्याय, जी.एल.नागर, अशोक देशलहरा, विजय खंडेलवाल, आदि ने इस कार्यक्रम में उपस्थित होकर सक्रिय सहयोग प्रदान किया। इस कार्यक्रम में पर्यावरण प्रेमी संघ के धीरज धारवां, सुभाष दुबे, सुदीप जायसवाल, संजय जोशी, धरमपाल माहेश्वरी, विकास जायसवाल, अभिभाषकगण विजेन्द्र ंसिह ठाकूर, दिलीप सिंह ठाकूर, प्रदीप धाड़ीवाल, कुलदीप शर्मा, एनके सारसिया, जेपी शर्मा, चित्रेन्द्र सिंह सोलंकी, मनोज शर्मा, भूपेश जामलिया, राकेश बैरागी, दिलीप यादव, कालू सोनी, चन्दर मेवाउा आदि उपस्थित रहे । पर्यावरण प्रेमी संघ ने इस उद्देश्य पूर्ण कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित किया है तथा साथ ही साथ इस दिवस पर शहर एवं अंचल में अन्य जागरूक जनों एवं संस्थाओं द्वारा भी इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने हेतू सभी को धन्यवाद दिया ।
लाखों रुपये का गेहूं खुले में पड़ा कोई उठाने को तैयार नही
जावर 7 जून (नि.प्र.)। सेवा सहकारी समिति कजलास के प्रांगण में समर्थन मूल्य पर खरीदा गया लाखों रुपये का गेहूं बाहर पड़ा कोई उठाने को तैयार नही। गेहूं उठाने की सूचना क्षैत्रिय अधिकारी से लेकर नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंधक तक को कर दी । सेवा सहकारी समिति कजलास द्वारा इस वर्ष समर्थन मूल्य पर सात सौ उन्नतीस क्विंटल गेहूं खरीदा गया जो समिति के प्रांगण में खुल में पड़ा है । समिति के अध्यक्ष गजराजसिंह ने बताया कि लाखों रुपये का गेहूं खूले में रखा है हमारे पास कोई गोडाउन भी नही जो गोडाउन हैं वह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है । जो कभी भी धरासायी हो सकता है । अब हमें यह चिंता सता रही है कि उक्त गेहूं के बोरों को रखे तो रखे कहां यदि गेंहू को शीध्र नही उठाया गया तो पूरा गेंहू बरसात होने पर खराब हो जायेगा क्योंकि बरसात को दौर शुरू हो गया है । प्रतिदिन क्षैत्र में बादल छाते है और बूदाबादी होती है । समिति के प्रबंधक नरेन्द्र सिंह का कहना है कि समिति प्रांगण में समर्थन मूल्य पर खरीदा गया गेहूं की देखभाल के लिये दो लोगों की डयूटी लगा रखी है । हमें एक ही चिंता सता रही है कि कई बरसात जो जाये तो यदि बरसात हो गई तो लाखों रुपये का गेहूं खराब हो जायेगा समिति प्रांगण में कुल 729 बोरे रखे है । गेंहू उठाने की सूचना क्षैत्रिय अधिकारी जिला सहकारी केन्द्रिय बैंक सीहोर से लेकर नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंधक कोशल तक को कर दी इसके अलावा जिस व्यक्ति ने यहां कजलास से गेंहू उठाने को ठेका लिया है उसे भी सूचना दे दी । लेकिन इस और कोई भी अधिकारी ध्यान नहीं दे रहा है ।
उधार नहीं देने पर व्यापारी को पीटा
सिध्दिकगंज 7 जून (नि.सं.)। आज सिध्दिकगंज थाने के अन्तर्गत आने वाले ग्राम गहमत निवासी हालमुकाम सिध्दिकगंज अजब सिंह ठाकुर पुत्र कल्लु सिंह ठाकुर के यहाँ के ग्राम जिसका नाम दल्लु उर्फ दिलीप पुत्र रुग्गा जाति बंजारा निवासी टीपूपुरा दुकान पर आया तथा दुकानदार से सामान उधार मांगने लगा। दुकानदार ने उधार सामान देने से इंकार किया तो उक्त ग्राहक ने दुकानदार के साथ मारपीट कर दी। बाद में दुकानदार की शिकायत पर पुलिस ने धारा 323, 294, 506 के तहत प्रकरण दर्ज किया।
मुख्यमंत्री ने कहा अवैध पशु ले जाते हुए देखो तो तत्काल सूचित करो
सीहोर 7 जून (नि.सं.)। मुख्यमंत्री म.प्र. शासन भोपाल द्वारा 3 जून को समाधान आनलाईन कार्यक्रम में जिला गोपालन एवं पशु संर्वधन की बैठक में पुलिस पदाधिकारियों की उपस्थिति एवं पशुओं के अवैध परिवहन संबंधी मार्गो व स्थानों की पहचान कर इस संबंध में एक पुलिस अधिकारी नियुक्त कर समुचित कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये है । जिले में पशुओं के अवैध परिवहन पर रोक लगाने इस तरह के कार्यो में लिप्त व्यक्तियों के विरूद्व विधिसमत कार्यवाही कराये जाने हेतू जिला स्तर पर नोडल अधिकारी जगत सिंह राजपूत, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीहोर को नियुक्त किया गया है । जिनका सम्पर्क नम्बर मोबाइल 94251-37968, कार्यालय दूरभाष क्रमांक 07562-224854, दूरभाष निवास 07562-224277 हैं । जिले में किसी भी मार्ग से पशुओं के अवैध परिवहन की सूचना जन सामान्य द्वारा नोडल अधिकारी को उल्लेखित दूरभाष, मोवाइल नम्बरों पर दी जा सकती है । जिस पर नाडल अधिकारी तत्काल वैधानिक कार्यवाही करायेंगे साथ ही स्वयं ऐसे मार्गो व स्थानों को चिहिन्त कराकर इस संबंध में समन्वय का कार्य करेगें । इस संबंध में जिला पुलिस अधीक्षक ने आदेश जारी कर दिया है । जो तत्काल प्रभावशील होगा
हिन्दू उत्सव समिति की कार्यकारिणी घोषित
जावर 7 जून (नि.प्र.)। नगर की प्रतिष्ठित हिन्दू उत्सव समिति के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राजेन्द्रसिंह सेंधव ने समिति के वरिष्ठ सदस्यों की सहमति एवं परामर्श से समिति की कार्यकारिणी की घोषणा की । समिति के सचिव विजेन्द्र सिंह ठाकूर ने जारी विज्ञप्ति में बताया कि समिति में उपाध्यक्ष तेजसिंह सेंधव पूर्व पार्षद, भवानीशंकर वर्मा, कोषाध्यक्ष कमलेश जायसवाल, सहकोषाध्यक्ष विमल सोनी, सहसचिव संतोष लक्ष्यकार, प्रवक्ता बहादूरसिंह ठाकूर पत्रकार एवं कमलेश खत्री संगठन मंत्री- धीरजसिंह ठाकूर, रमेश सेन, तेजसिंह गुड्डू, राजू भावसार, सत्यनारायण राठौर, प्रचार मंत्री जगदीश सिंह ठाकूर, कैलाश सौलंकी, मुकेश प्रजापति, नारायण सिंह टेकरा, हिम्मत सिंह भाटीखेड़ा ।
कार्यालय मंत्री - मुकेश राठौर, कमलेश ठाकूर, फुद्दी बनाये गये इसी प्रकार समिति के विधि सलाहकार बाबूलाल पटेल, कृष्णगोपाल अजमेरा, कल्याण सिंह खजूरिया, मुकेश चौरसिया, सुनील जैन, सुभाष भावसार, राजपालसिंह ठाकूर बनाये गये । समिति के संरक्षक संतोष माहेश्वरी, जयनारायण राठौर, राजेन्द्र ठाकूर पूर्व पार्षद शिवनारायण राठौर, संजय अजमेरा, अनिल सोनी, कृपाल ठाकूर एडवोकेट, राकेश सिंह सेंधव, कृपालसिंह बच्चीसेठ मनोनीत किये गये है । समिति के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को नगर के जन प्रतिनिधियों गणमान्य नागरिको, शुभचिंतकों, पत्रकारों आदि ने बधाई देते हुए हर्ष व्यक्त किया ।
कार्यालय मंत्री - मुकेश राठौर, कमलेश ठाकूर, फुद्दी बनाये गये इसी प्रकार समिति के विधि सलाहकार बाबूलाल पटेल, कृष्णगोपाल अजमेरा, कल्याण सिंह खजूरिया, मुकेश चौरसिया, सुनील जैन, सुभाष भावसार, राजपालसिंह ठाकूर बनाये गये । समिति के संरक्षक संतोष माहेश्वरी, जयनारायण राठौर, राजेन्द्र ठाकूर पूर्व पार्षद शिवनारायण राठौर, संजय अजमेरा, अनिल सोनी, कृपाल ठाकूर एडवोकेट, राकेश सिंह सेंधव, कृपालसिंह बच्चीसेठ मनोनीत किये गये है । समिति के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को नगर के जन प्रतिनिधियों गणमान्य नागरिको, शुभचिंतकों, पत्रकारों आदि ने बधाई देते हुए हर्ष व्यक्त किया ।
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