

फिल्म की शूटिंग का दृश्य सुबह से शाम तक यहाँ पुलिस की उपस्थिति में होता रहा। बिना किसी व्यवधान के आसानी से शूटिंग एक दिन में सम्पन्न हुई। कम से कम 8 बड़े वाहन, कुछ छोटे चार पहिया वाहन सहित विशाल ताम-झाम, भोजन की व्यवस्था से लेकर अनेकानेक तरह के आधुनिक मशीनों से सुसज्जित यह पूरी यूनिट सीहोर आई थी जिनकी संख्या करीब 40-50 थी। यहाँ व्यवस्थित रुप से एक दृश्य फिल्म के फिल्माया गया जिसमें फिल्म के कलाकार रघुवीर यादव जो संभवत: एक वकील की भूमिका में इस फिल्म में है वह फि ल्म में एक अब्दुलगंज नामक तहसील के अनुविभागीय अधिकारी अनुरक्षण कार्यालय से तमतमाते हुए बाहर निकलते हैं और फिर अपनी स्कूटर पर किक मारते हैं, दृश्य के अनुसार इसी समय यहाँ एक सफाई कामगार झाड़ू लगाते हुए धूल उड़ा रहा होता है जिसको देखकर और लगभग खीजते हुए वकील बने रघुवीर यादव उस पर ही कुछ नाराजगी जताते हुए बड़बडाना शुरु कर देते हैं और स्कूटर में दो-तीन किक मारते हैं। यह दृश्य कई बार रिटेक होने के बाद यहाँ बमुश्किल फाईनल हो सका। उल्लेखनीय है कि अभिनय की दुनिया में रघुवीर यादव का अपना मुकाम है, वह ऐसे कलाकार हैं जिन्होने बालीवुड में कम काम करके भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। वह चरित्रों को पूरी तरह जीवंत बना देने वाले कलाकारों मे ंसे हैं। रघुवीर यादव ने हमेशा भूमिकाओं की लंबाई-चौडाई पर ध्यान न देकर चरित्रों को प्रधानता दी है आजकल वह लगान और बंवडर फिल्मों में अपने अभिनय के कारण चर्चा में है। लगान में उन्होने भूरा की भूमिका निभाई थी। इसके अलावा छोटे पर्दे पर प्रसिध्द धारावाहिक चाचा चौधरी जैसी किरदार को भी वह निभाते नजर आते हैं। रघुवीर यादव ने फुरसत से अल्प बातचीत में यह कहा कि फिल्म के संबंध में कुछ भी बताने की अभी स्वीकृति नहीं है, उन्होने कहा कि मैं मूलरुप से रंगमंच से आया कलाकार हूँ इसलिये मेरी भूमिकाओं में दर्शकों को अधिक जीवंतता नजर आती होगी, मैं सहजगा के साथ अभिनय करता हूँ।

हमेशा फूहड़ हास्य से बहुत दूर ठेठ एक असली जीवंत कलाकार की भूमिका निभाते रघुवीर यादव ने हर बार एक दम नये स्वरुप में ही प्रस्तुत हुए हैं।
वह एक स्थापित कलाकार हैं। इतना ही नहीं वह कला पारखियों के आदर्श भी हैं और मनोज वाजपेयी सरीखे अभिनेता उन्हे अपना आदर्श भी मानते हैं। धारावाहिक मुंगेरीलाल के हसीन सपने से अपनी शुरुआत करने वाले रघुवीर यादव ने शुरुआत से दर्शकों को अपने गले लगा लिया था। यही रघुवीर यादव जब सीहोर आये तो कई लोग उन्हे और उनकी कला को देखते रहे। भारी भीड़ उन्हे देखने के लिये भरचक धूप में डटी रही।