Thursday, February 28, 2008

दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज

आष्टा 27 फरवरी (फुरसत)। अपने घर में विवाहिता को दहेज की मांग को लेकर सताने वाले ससुरालियों के खिलाफ सिद्धिकगंज पुलिस ने दहेज एक्ट के तहत तीन लोगो के विरूद्ध मामला दर्ज कर लिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम अभयपुर देवास निवासी अजाबसिंह की 22 वर्षीय पुत्री माया का विवाह 4-5 वर्ष पूर्व ग्राम पगारिया हाट निवासी जितेन्द्र सिंह के साथ हुआ था बताया जाता है कि माया का पति जितेन्द्र सिंह दहेज में एक लाख रुपया नगद मोटर सायकल व रंगीन टी.वी. की मांग कर माया को प्रताड़ित करता था तथा उसके इस कार्य में लखन एवं पपीता द्वारा भी सहयोग दिया जाता था । जिनकी प्रताड़ना से तंग आकर मायाबाई ने थाना सिद्धिकगंज पहुंचकर अपनी व्यथा पुलिस को सुनाई जिस पर पुलिस ने इनके विरूद्ध प्रकरण दर्ज कर कानूनी कार्यवाही प्रारंभ कर दी है।

अब पचौरी 3 को आयेंगे सीहोर

सीहोर 27 फरवरी (फुरसत)। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद यहाँ सीहोर में पहली बार आ रहे हैं जो पहले 2 मार्च को आने वाले थे अचानक इनका कार्यक्रम बदलकर 3 मार्च हो गया है जिससे कांग्रेसी यादा उत्साहित हैं अब पचौरी जी सुबह 1 बजे कोतवाली चौराहा पर पहुँचेंगे जो शाम तक सीहोर में रहेंगे। शाम 5 बजे पत्रकार वार्ता भी सभा स्थल पर ही होगी। आज वरिष्ठ कांग्रेस नेता जसपाल सिंह अरोरा, अध्यक्ष कैलाश परमार सहित अन्य कांग्रेसी नेता भोपाल जाकर सुरेश पचौरी से इस संबंध में मिलकर बातचीत करके आये।

Wednesday, February 27, 2008

सीहोर में अब बीच नाले पर हो रहा है पक्का निर्माण कार्य नगर पालिका को सम्पत्ति का ख्याल नहीं

सीहोर 26 फरवरी (फुरसत)। नगर को सुन्दर स्वच्छ बनाने के हसीन सपने दिखाने वाले नगर पालिका अध्यक्ष राकेश राय ने तो नगर के लिये कुछ नहीं किया लेकिन यहाँ नगर पालिका की उदासीनता के कारण अतिक्रमकारियों के हौंसले बुलंद वा बुलंद होते चले गये हैं। पूरा नगर अतिक्रमण की चपेट में है। हर तरफ अतिक्रमण.... अतिक्रमण..... अतिक्रमण। यहाँ तक लोग नल्ले की गंदगी में भी अपना सुन्दर मकान और दुकान बनाने से नहीं चूक रहे हैं। गंज क्षेत्र में नाले पर प्रतिदिन अतिक्रमण हो रहा है। नालियों पर मकान तानना तो दूर अब नालियां पूर कर अतिक्रमण की नई शुरुआत भी हो चुकी है। सडक़ों पर घरों का पानी बहाया जा रहा है। दुकानदारों ने सड़कों पर दुकान का निर्माण कर लिया है।
अतिक्रमणकारियों के बुलंद हौंसले नगर पालिका के अकर्मण्य रवैये और नजुल विभाग की कुंभकर्णी नींद का खामियाजा अब संपूर्ण नगर और नगर वासियों को भोगना पड़ रहा है। अतिक्रमण करने वालों से नदी नाले भी महफूज नहीं दिखाई देते।
अतिक्रमण कर्ताओं की सरेआम सरकारी गैरसरकारी से जहाँ एक और शहर भर अव्यवस्थित होने लगा है वहीं इन अतिक्रमणकारियों की कार गुजारियों को शहर के संभ्रांत लोग भुगतने को मजबूर से होकर रह गये हैं।
शहर की सड़कें, खाली पड़ी भूमि, इन अतिक्रमणकारियों की निगाहों में खटकने लगी है। प्रशासन की उदासीनता ने इन जमीन खोरों के हौंसले बुलंद कर रखे हैं। नगर के प्रत्येक वार्ड में अतिक्रमण-कारियों की कारगुजारियां आये दिनदेखी सुनी जा सकती है। राजनैतिक दल और क्षेत्र के पार्षद भी इन जमीन खोरों की हरकतों से वाकिफ है लेकिन अतिक्रमणकारियों को रोकना तो दूर चाहे अनचाहे इन कथित जनप्रतिनिधियों का उन्हे सहयो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से उन्हे प्राप्त होता रहता है। जब सैयां भए कोतवाल तो डर काहे का वाली कहावत अनुसार जमीन खोर अब नागरिकों का जीना दुश्वार तक करने लगे हैं।
शहर में दो तरह का अतिक्रमण जोरों पर चल रहा है। व्यवसायिक अतिक्रमण और आवासीय अतिक्रमण व्यवसायिक अतिक्रमणकारियों ने जहाँ बाजार का स्वरुप ही बिगाड़कर रख दिया है वहीं आवासीय अतिक्रमण कारियों ने शहर की सम्पूर्ण व्यवस्था पर ही प्रश् चिन्ह अंकित कर दिया है।
आवासीय अतिक्रमण कारियों की निगाहें हमेशा सरकारी और गैर सरकारी खाली पड़ी भूमि पर लगी रहती है और वह हमेशा ऐसे स्थान की तलाश में रहते हैं तथा मौका मिलते ही उस पर अपना कब्जा ठोंक कर उस पर अपना जबरिया हक जता देते हैं। मछली पुल के पास बीच नाले में हो रहा पक्का अतिक्रमण इसका वलंत उदाहरण है।
ऐसे में कोई यदि इन अतिक्रमण कारियों का विरोध करने का साहस जुटाता भी है तो यह जमीन खोर उसे सबक सिखाने से नहीं चूकते हैं।
शहर के गंज, कस्बा, मंडी, फ्री गंज, बेलदार पुरा, सिपाही पुरा, कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ आवासीय अतिक्रमण कारियों ने अपने-अपने घरों की सीमा रेखा बढ़ा ली है जहाँ जैसा मौका मिला उन्होने अतिक्रमण कर उसे अपनी सीमा में घेर लिया है।
गंज, कस्बा, सुदामा नगर, फ्री गंज मंडी ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ अतिक्रमण कारियों का सर्वाधिक जोर है । गंज क्षेत्र में तो अतिक्रमणकर्ता रहवासियों ने अपने घरों की नालियाँ समाप्त कर सड़कों की पटरियाँ तक अपने कब्जे में कर कच्चे-पक्के निर्माण कार्य तक करा डाले हैं। नालियाँ बंद होने से जहाँ घरों के निस्तार का गंदा पानी सड़कों पर फैलकर गंदगी पैदा करता है वहीं वाहन और पैदल से आवाजाही करने वालों को परेशानियों के साथ हमेशा दुर्घटनाओं का भय बना रहता है। प्रशासन यदि गंभीरता के साथ शहर में हो रहे इस प्रकार के अतिक्रमण का सर्वे कराए तो और भी अधिक चौंकाने वाले तथ्य उभरकर आयेंगे।
इसी प्रकार व्यवसायिक अतिक्रमणकारी मेरा टेसू यहीं अड़ा की तर्ज पर चाहे जहाँ अपनी गुमठी ठेला अड़ाकर बाजार की आवाजाही को ठप्प कर डालते हैं। गाँधी मार्ग, मेन रोड, न्यू बस स्टेण्ड, कोतवाली चौराहा, नदी चौराहा, गल्ला मंडी चौराहा इन व्यवसायिक अतिक्रमण-कारियों से भरा पड़ा है। बस स्टेण्ड पर आने जाने वाले यात्रियों को तो इन लोगों के पान डब्बों और हाथ ठेलों की वजह से बैठने तक को स्थान नहीं मिल पाता है। कुल मिलाकर नगर पालिका एवं जिला प्रशासन की लापरवाही और उपेक्षा के चलते शहर के विकास का सपना चूर-चूर होने लगा है। पूरा नगर अतिक्रमण की चपेट में आ चुका है। सड़के सकरी हो गई हैं। गलियाँ इतनी सी रह गई हैं कि जिनमें से निकलना दूभर हो गया है। सड़कों पर लोगों के सेफ्टीटेंक बने हुए हैं। न सिर्फ सड़क, नालियाँ बल्कि नगर पालिका की कई सार्वजनिक सम्पत्तियों पर और नजूल विभाग की जमीनों पर भी खुले आम अतिक्रमण पूरे रौब के साथ जारी है। खुद नगर पालिका की सम्पत्तियों की नपा देखभाल नहीं कर रही है। जिससे सम्पत्ति भी नष्ट हो रही है।

सिक्कों की समस्या के लिये भाजपा व्यापारी प्रकोष्ठ सक्रिय

जावर 26 फरवरी (फुरसत)। सोमवार को भाजपा व्यापारी प्रकोष्ठ द्वारा नगर में खुल्ले सिक्के एक,दो की समस्या को लेकर भारतीय रिर्जव बैंक के गवर्नर के नाम तहसील के रीडर को ज्ञापन दिया । गोरतलब है कि नगर में लम्बे समय से खुल्ले पैसे एक दो के सिक्कों को समस्या बनी हुई है । खुल्ले पैसे नही होने के कारण दुकानदार ग्राहको को ट्राफी पाउच या फिर माचिस देते है कई बार खुल्ले पैसे को लेकर व्यापारी व ग्राहक में तकरार भी हो जाती है । बाजार में एक दो के सिक्के नही होने के कारण व्यापारियों को व्यापार करने में असुविधा होती है । इन सिक्कों को कमी के कारण व्यापारी को प्रतिदिन नुकसान भी उठाना पड़ता है । वही ग्राहकों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है । ज्ञापन में मांग की गई है कि पहले प्रचुर मात्रा में एक, दो के सिक्के चलन में थे लेकिन न जाने क्यों उक्त सिक्के बाजार से गायब हो गये इसके कारणों की खोज होना चाहिये । पत्र में मांग की गई एक व दो के सिक्के बैकों के माध्यम से व्यापारीयों को उपलब्ध करवाये जाये । कई बार बैंको की शाखा में भी सिक्कों के लिये सम्पर्क किया गया , लेकिन बैंक वाले आज तक सिक्के उपलब्ध नही करा पाये । एक व दो के सिक्कों की नगर में लम्बे समय से कमी है जिस कारण व्यापारी व ग्राहक दोनो परेशान है । व्यापारी भाजपा व्यापारी प्रकोष्ठ ने स्थानीय बैंक शाखाओं में एक व दो के सिक्के उपलब्ध करवाने की मांग ज्ञापन के माध्यम से भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर से की है । ज्ञापन सौंपने वालो में मण्डल अध्यक्ष राकेश सिंह, प्रेमसिंह, बहादुरसिंह, राजेन्द्रसिंह, संतोष जैन, रामसिंह, हरिश शर्मा, सुरेन्द्र सिंह, संतोष लश्कार, सुनील लोधी, आदि । fursat sehore

सीहोर सरस्वती विद्या मंदिर में दीक्षांत समारोह संपन्न

सीहोर 26 फरवरी (फुरसत)। स्थानीय सरस्वती विद्या मंदिर उ.मा.वि. डिपो सीहोर में कक्षा द्वादशी के भैया-बहिनों का विदाई समारोह हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ । कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जे.पी. पुरोहित, अध्यक्ष डा. सुनीता जैन, के द्वारा दीप प्रावलित कर किया गया। मातृ वन्दना के पश्चात विद्यालय के भैया रितेश शर्मा व मनोहर मीणा द्वारा तिलक व श्रीफल भेंट कर स्वागत किया गया संस्था प्रधान दिनेश सिंह राठौड़ द्वारा परिचय दिया गया भैया-बहिनों को मार्गदर्शित करते हुए श्री पुरोहित ने कहा कि कक्षा बारहबी भविष्य निर्धारण का आधार होती है । हम इस प्रकार की शिक्षा प्राप्त करे जिसके साथ-साथ हम जीविकोपार्जन भी कर सकें । इस अवसर पर डा. सुनीता जैन ने भैया बहिनों को आर्शीवाद प्रदान किये । तत्पश्चात विद्यालय के प्राचार्य द्वारा भैया बहिनों को मार्गदर्शित किया । इस अवसर पर कक्षा द्वादशी के भैया बहिनों ने अपने अनुभवों को व्यक्त किये । एकादशी के भैया -बहिनों द्वारा दी गई यह विदाई ढेरों शुभकामनाओं व स्वल्पाहार के साथ संपन्न हुई। fursat sehore

उपभोक्ता फोरम द्वारा बिजली का बिल निरस्त

सीहोर 26 फरवरी (फुरसत)। जिला उपभोक्ता फोरम ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में अनावेदक म.प्र. म.क्षै.वि.वि.कं. लि. बुधनी के विरूद्व एवं आवेदक विवेक सेन के पक्ष में निर्णय पारित किया है कि अनावेदक द्वारा किया गया बिल 1.03.07 रुपया 5,476- का अपत्ति किया जाता है साथ में परिवाद व्यय स्वरूप 500- रु. दिलाये जाने के आदेश पारित किये है ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आवेदक ने अपना एसटीडी पीसीओ चलाने के लिये विपक्षी से एक विद्युत कनेक्षन प्राप्त किया था । आवेदक का प्रत्येक माह 25-30 यूनिट की खपत होती थी परंतु दिनांक 01.08.07 को अनावेदक ने 834 यूनिट की खपत बताते हुये 5,476-रु. का बिल आवेदक को दिया । आवेदक ने इसकी शिकायत कई बाद विपक्षी से की और विपक्षी ने मीटर बदलने का कहा । आवेदक ने दुखी होकर अपने अधिवक्ता जी.डी. बैरागी से सलाह लेकर जिला उपभोक्ता फोरम में आवेदन प्रस्तुत किया । जिला उपभोक्ता फोरम में विद्वान अध्यक्ष ए.के. तिवारी, सदस्य अम्बादत्त भारती, सदस्या शकुन विजयवर्गीय ने दोनो अधिवक्ताओं के तर्क श्रवण कर रिकार्ड का अवलोकन कर आदेश पारित किया कि अनावेदक द्वारा दिया गया बिल निरस्त किया जावे एवं अनावेदक आवेदक को परिवाद स्वरूप 500रुपये अदा करे । आवेदक की और से पैरवी अधिवक्ता जी.डी. बैरागी ने की । fursat sehore

आष्टा में डा. सत्यनारायण जटिया विचार मंच की कार्यकारिणी घोषित

आष्टा 26 फरवरी (फुरसत)। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता उज्‍जैन सांसद डा. सत्यनारायण जटिया विचार मंच का गठन विगत दिनों किया गया था । जिसमें अध्यक्ष युवा मोर्चा जिलामंत्री संजीव सोनी पांचम को बनाया गया था । युवा नेता संजीव सोनी पांचम ने डा. सत्यनारायण जटिया विचार मंच की कार्यकारिणी की घोषणा की जिसमें उपाध्यक्ष राकेश गुप्ता, सुरेश पांचाल, प्रशांत जैन, संदीप धनगर, महामंत्री- रूपेश सोनी, कोषाध्यक्ष - प्रदीप मालवीया, उपकोषाध्यक्ष- विनोद गुंजाल, मंत्री- गोपाल मेवाड़ा, धीरज सोनी, विकास नागौरी, सांस्कृतिक मंत्री- अरूण खत्री, प्रवीण राठौर, निखिल नामदेव, निक्की सोनी, प्रचार मंत्री- नरेन्द्र डोंगरे, ललित सोनी, प्रकाश नायक, भय्यू नामदेव, संजय गोस्वामी, प्रवक्ता- चंचल मोटवानी, कार्यालय मंत्री- रवि श्रौत्रिय, ग्रामीण प्रभारी व कार्यकारी अध्यक्ष- नितीन सोनी महाकाल को बनाया गया है । fursat sehore

Tuesday, February 26, 2008

लाड़ली लक्ष्मी योजना बनी करोड़ो ग्रामीणों के लिये खतरे की घंटी..? सीहोर से फुरसत की खास खबर

मुख्यमंत्री के ग्रह जिले सीहोर में लाड़ली लक्ष्मी से हुई ठगी
सीहोर 25 फरवरी (आनन्द गाँधी)। फागुन के इस मौसम में कल एक महिला और दो पुरुषों की जोड़ी ने कमाल ही कर दिया। वह शहर में ही इन्द्रानगर कालोनी पहुँचे और यहाँ स्वयं को मुख्यमंत्री का आदमी बताकर लाड़ली लक्ष्मी योजना के नाम पर कई लोगों को एकत्र किया....फिर कहा कि सब 100-100 रुपये जमा करवा दो और अपने-अपने नाम और बेटी का नाम लिखा दो, यह विशेष योजना लाड़ली लक्ष्मी योजना है जिसमें सबको दो-ढाई लाख रुपये हर बच्ची को मिलेंगे। अभी बस 100 रुपये देना है।
इनके आसपास भारी भीड़ लग गई, लोगों में होड़ मच गई कि वह अपना नाम पहले लिखायें। कुछ ही देर में इन लोगों ने 2-3 हजार रुपये एकत्र कर लिया.....इस प्रकार खुले आम मुख्यमंत्री की लाड़ली लक्ष्मी से शहरवासी ठगा गये। लेकिन इन ठगों से भी बढ़कर निकला एक पुलिस वाला जो यहाँ आया और ठगों से 'संतुष्ट' होकर उन्हे छोड़ कर चल दिया....फिर जब लोगों ने इस पुलिस वाले से शिकायत करने का प्रयास किया तो पुलिस वाले ने इन्द्रा नगर के लोगों को खूब डांट पिलाई और कहा वह (ठग) जो कर रहे हैं उन्हे करने क्यों नहीं देते वह सब ठीक कर रहे हैं......।
जब शहर के लोगों को यह लोग ठग कर ले गये तो फिर विशाल ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों लोग जिन्हे सही से लाड़ली लक्ष्मी की जानकारी ही नहीं है उनको यह लोग कितनी आसानी से लूटेंगे ? इन ठगों के माध्यम से अब ग्रामीणों पर खतरे की घंटी मंडरा रही है ? एक बात स्पष्ट हो गई है कि जिला प्रशासन जब शहर में लाड़ली लक्ष्मी योजना क्या है ? यही नहीं बता सका है तो मुख्यमंत्री की इस योजना का क्या खाक प्रचार-प्रसार चल रहा होगा ? प्रचार-प्रसार के अभाव में लाड़ली लक्ष्मी से प्रदेश के करोड़ो ग्रामीणों पर एक तरह से खतरे की घंटी मंडरा रही है...? इस छोटी-सी घटना से बहुत बड़ी शिक्षा लेने की आवश्यकता प्रदेश शासन और मुख्यमंत्री को है....घटनाक्रम पर एक नजर।
हुलिये से टपोरी, कपड़े भी हल्के किस्म के और बातचीत में औसत लेकिन धूर्त व चालाक दो व्यक्ति के साथ एक इसी किस्म की महिला थी इस तिगड़ी ने कल इन्द्रानगर में कमाल कर दिया। महिला और दो पुरुष की यह जोड़ी कहीं से एक फटा-पुराना रजिस्टर हाथ में लेकर और एक लीड के साथ इन्द्रानगर में आये थे। इन्होने एक-एक घर जाकर स्थानीय लोगों को समझाना शुरु किया कि ''हम मुख्यमंत्री के आदमी हैं....आपकी बेटी के लिये आये हैं। आप आज 100 रुपये जमा करवाकर अपनी बेटी का नाम लिखवा दो, कल हम फिर एक फार्म लाकर उसे भर देंगे और रिसिप्ट भी दे जायेंगे, इससे आपकी बेटी को जब वो बड़ी हो जायेगी तो सीधे 2 लाख से ऊपर दो-सवा दो लाख रुपये मिलेंगे।
अभी रुपये जमा करवा दो, हमें आगे जाना है...'' रविवार के दिन इन्द्रा नगर के जैसे शांत क्षेत्र में जब इस तिगड़ी ने 100-100 रुपये में बीमा कर लड़कियों को सीधे मुख्यमंत्री द्वारा दो-सवा दो लाख रुपये देने की बात शुरु की तो इनके आसपास भीड़ लग गई। लाड़ली लक्ष्मी योजना के कुछ रंगीन छपे कागज भी इनके पास थे जिन्हे यह दिखा-दिखाकर मुख्यमंत्री के नाम का प्रभाव जमा रहे थे। करीब घंटे भर में इन्होने इस क्षेत्र में ऐसा जादू चलाया कि फिर यह जिस घर पर जायें वहाँ भीड़ लगने लगी, लोग खुद इनको सहयोग करके रुपये दिलाने लगे और धीरे-धीरे इनके पास रुपयों का भंडार जमा होने लगा...।
इधर इनके पहनावे पर शक करते हुए क्षेत्र के कुछ युवकों को विश्वास नहीं हो रहा था लेकिन वह भी चूंकि मुख्यमंत्री के कागजात, उनके फोटो लगे चित्र देख रहे थे जिस पर लाड़ली लक्ष्मी योजना का प्रचार-प्रसार था तो चुप हो गये। इस पर यहीं क्षेत्र के एक समाजसेवी को वह यह कहकर बुलाकर ले आये कि आप चलो आप देख लो, वो लाड़ली लक्ष्मी वाले लोग आये हैं, मुख्यमंत्री ने भेजा है, एक बार आप कम से कम उनसे बात तो कर लो।
स्थानीय समाजसेवी आये तो उन्होने पूछताछ की, तब पता चला कि मामला संदिग्ध है। लेकिन इसी दौरान दृश्य बदल गया....!
और इंट्री हो गई एक पुलिस वाले की
इस पुलिस वाले ने आते ही जब तीनों ठगों को देखा तो जाने कैसे वो मामला समझ गया। इस दौरान युवक भड़कने की स्थिति में आ गये थे। तो पुलिस वाले ने इन्द्रा नगर के युवकों और पुरुषों को तेज आवाज में डांट पिला दी कहा कि उन्हे काम क्यों नहीं कर देते हैं, दूर हटो, वह जो कर रहे हैं करने दो। परेशान मत करो और इस प्रकार उसने पक्ष लेकर उन ठगों को किसी तरह यहाँ से सुरक्षित निकालने का प्रयास किया।
इतना कहकर पुलिस वाला तत्काल अपना दो पहिया वाहन चालू कर आगे बढ़ गया। इसके बाद स्थानीय समाजसेवी के कारण चूंकि ठगों की पोल खुल चुकी थी इसलिये उनकी आंशिक धप चुटाई हुई, ठगों ने धमकी दी कि पुलिस हमारी है, अभी तुम्हे मजा चखा देंगे। इस पर भी उनसे सबके रुपये वापस करवाये गये। और चूंकि पुलिस कार्यवाही कर ही नहीं रही थी इसलिये उन्हे छोड़ दिया गया।
सूत्रों का कहना है कि इन ठगों को ग्रामीण क्षेत्राें में ठगी करने जाना था। क्योंकि उनके बातचीत व्यवहार से लग रहा था कि उन्हे ग्रामीण क्षेत्रों में जाना तय था वह रास्ते में रुक गये हैं। पुलिस वाले ने भी जिस प्रकार उन्हे देखा और बड़ी अदाकारी से मदद कर दी उससे लगता है कि पुलिस वाले को भी मालूम था कि यह क्या कर रहे हैं। ठग और पुलिस की आपस में बातचीत जो कुछ हुई वह समझ तो नहीं आ सकी लेकिन लोग अनुमान लगाते रहे कि संभवत: उन्हे कुछ गांवों में जाना था।
इस दृष्टि से स्वयं ही समझा जा सकता है कि यदि इस प्रकार लाड़ली लक्ष्मी के नाम से मुख्यमंत्री के फोटो लगे पम्पलेट पोस्टर जो थोड़ी बहुत मात्रा में ही छपवाये जाते हैं, उन्हे इन ठगों ने जिस प्रकार इस्तेमाल किया है वैसा ही इस्तेमाल न सिर्फ पूरे सीहोर जिले के बल्कि प्रदेश भर के ग्रामीण क्षेत्रों की भोली जनता तो ठगने में उपयोग किया जा सकता है। जब शहर के आम नागरिक छोड़ कई सक्रिय समाज सेवियों तक को नहीं मालूम की लाड़ली लक्ष्मी योजना के आवेदन फार्म कहाँ भराते हैं ? यह कैसी योजना है ? कितने रुपये का? कितने दिनो का? कितनी उम्र तक की बच्ची का बीमा होता है ? तो फिर आम जनता और ग्रामीण क्षेत्रों की भोली भाली जनता को क्या मालूम । उन्हे तो बस अखबारों में शिवराज सिंह चौहान के बड़े-बड़े फोटो और हाथ में एक बच्ची को पकड़े हुए चित्र देखने को मिल रहे हैं, जिससे उन्हे यह मालूम पड़ रहा है कि लड़कियों का बीमा हो रहा है। कहाँ हो रहा है ? कौन कर रहा है ? यह 98 प्रतिशत प्रदेश वासियों को नहीं मालूम। इस प्रकार गलत-सलत घटिया प्रचार सामग्री के कारण ऐसी स्थिति बन रही है। प्रदेश भर में जगह-जगह एक बच्ची को हाथ में पकड़े मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री का चित्र लगे होर्डिंग तो लगवाये गये हैं लेकिन लाड़ली लक्ष्मी की गणित किसी को समझ ही नहीं आ रही है।
सिर दिया है ओखली में तो फिर दुचने-पिटने से क्या डरना वाली कहावत यहाँ सिध्द होती है कि यदि लाड़ली लक्ष्मी योजना के प्रचार-प्रसार पर करोड़ो रुपये बर्वाद किये ही जा रहे हैं तो उन्हे फिर व्यवस्थित प्रचार कराने की आवश्यकता है। यहाँ राजधानी से लगे हुए जिला मुख्यालय पर ही रहने वालों को यह नहीं मालूम की लाड़ली लक्ष्मी योजना में क्या-क्या होता है ? तो इसमें जिला प्रशासन कितना बड़ा दोषी है यह बात समझ में आती है लेकिन फिर पूरे प्रदेश में दूरस्थ क्षेत्रों में क्या स्थिति होगी यह भी चिंता का विषय है। जब पुलिस ने मुख्यमंत्री के नाम पर ठगी करने वालों को संरक्षण दे रही हो, तो फिर समझ में आता है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन कितना बैखोफ है, हालांकि पुलिस स्थानीय भाजपा नेताओं को तो जानती है कि वह बेचारे पूरे झूम-झूमकर भी एक टीआई को नहीं हटवा सकते, तो फिर मुख्यमंत्री क्या खाक कर सकता है। पुलिस ने ठगों को संरक्षण देकर एक तरह से उन्हे भारत की इस सबसे अच्छी योजना पर कुठाराघात करने के लिये छोड़ दिया है। लाड़ली लक्ष्मी योजना के नाम पर अब ऐसे ठग ग्रामीण क्षेत्रों में कितने लोगों को लूटेंगे? क्या ग्रामीण क्षेत्रों से यह जानकारियाँ उभरकर आयेंगी ? क्या अभी लूट नहीं हो रही होगी ? क्या प्रदेश के एक लाख से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं न कहीं इस लाड़ली लक्ष्मी के कारण मुख्यमंत्री के नाम से ठगी नहीं हो रही होगी ? स्थानीय जिला प्रशासन को इस मामले में गंभीरता बरतने की आवश्यकता है। साथ ही ऐसे दुराग्रही पुलिस वाले पर भी कार्यवाही सुनिश्चित की जाना चाहिये। वह तो भला हो स्थानीय समाजसेवी का जिसके कारण लोगों के रुपये बच गये। sehore fursat

श्रीमति रश्मि ही होंगी आष्टा एसडीएम

आष्टा 25 फरवरी। प्रशिक्षु कार्यकाल पूर्ण होने के बाद सीहोर जिलाधीश के नये आदेशानुसार अब आष्टा अनुविभागीय अधिकारी श्रीमति जी.व्ही. रश्मि होंगी। अभी तक इनके साथ इछावर के श्री अहिरवार भी एसडीएम आष्टा का कार्य देख रहे थे।

25 हजार की सागौन पकड़ी, आरोपी भाग गये

आष्टा 25 फरवरी (फुरसत)। ए.के.एस. सेंगर वन परिक्षैत्र अधिकारी आष्टा के मार्गदर्शन में सुरेन्द्र शर्मा वनरक्षक, मनीष पाण्डेय वनरक्षक, रवीन्द्र श्रीवास्तव, एवं महेश कुमार आदि वनकर्मचारियों ने ताजपुरा की पुलिया पर ईमारती लकड़ी लेकर आती हुई चार साइकिले जप्त की मौके पर अपराधीगण अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गये । लकड़ी मय सायकिले रेन्ज कार्यालय आष्टा लाकर वन अपराध प्रकरण पंजीबद्ध किया गया । जप्त वनोपज की कीमत लगभग 25,000 रुपये आंकी गई ।

रिश्ता तोड़ गया मोहन

मोहन! मोह न किया किसी का, छोड़ गये जग तुम क्षण में ।
किया विचार नही किंचित भी, क्या सोचा तुमने मन में ॥
इतने समझदार होकर भी, ये क्या तुमने कर डाला।
देते थे उपदेश सभी को, नियम नही तुमने पाला॥
नेह का धागा बांधा तुमने, तोड़ दिया क्यों एक पल में ।
मोहन! मोह न किया किसी का, छोड़ गये जग तुम क्षण में ॥
सच्चा नेही, श्रोता, वक्ता, स्पष्टबात, प्यारी प्यारी ।
प्रेम सिन्धु थे, सरल हृदय थे, पढ़ने की ध्वनि थी न्यारी ॥
मंच की शोभा गई आज तो, चर्चा है यह जनजन में ।
मोहन! मोह न किया किसी का छोड़ गये जग तुम क्षण में ॥
जनता का विश्वास दीर्घ था, क्यों अघवर ही छोड़ गये ।
होनहार कवि थे नगरी के, सबकी आशा तोड़ गये ॥
भोली भोली हंसमुख मूरत धूमें सबकी आंखन में ।
मोहन ! मोह न किया किसी का छोड़ गये जग तुम क्षण में ॥
हरी इच्छा बलवान है मित्रो, जन का दोष नही इसमें ।
सत्य किसी ने कहा किसी के काल नही होता बस में ॥
होनहार बलवान पढ़ा था, विद्वानों के ग्रन्थन में ।
मोहन ! मोह न किया किसी का छोड़ गये जग तुम क्षण में ॥
मेरी श्रद्धांजली समर्पित, करलो तुम स्वीकार सखे।
सर्व सांत्वना दे जगदीश्वर, सुखी रहे परिवार सखे॥
आंसू सूखे, पीर मिटे भर जाये साहस तन-मन में ।
मोहन! मोह न किया किसी का, छोड़ गये जग तुम क्षण में ॥

कृष्णहरि पचौरी
हाऊसिंग बोर्ड कालोनी, सीहोर
मो.- 9301163136, फोन- 329498

पटवारी पर धोखाधड़ी करने एवं राशि हड़पने का आरोप लगाया कृषक ने

जावर 25 फरवरी (फुरसत)। कृषक द्वारा पटवारी पर धोखा धड़ी करने एवं राशि हड़पने का आरोप लगाया है कृषक द्वारा उक्त पटवारी की लिखित शिकायत जिलाधीश सीहोर को एवं अनुविभागीय अधिकारी आष्टा को की गई है। कु ण्डिया नाथू के कृषक भीम सिंह ने बताया कि हमारे परिवार के चंदर सिंह, बहादुर सिंह, गजराज सिंह एवं रूपसिंह के नाम कृषि भूमि सामूहिक रूप से है । हम सब ने सहमति से सामलात कृषि भूमि का बटवारा करवाने के लिये हमारे हल्के के पटवारी राजकिशोर जाट से बात की तो पटवारी ने कहा की बटवारा तो करवा दूंगा लेकिन इसके लिये आपको मुझे पच्चीस हजार रुपये देना होगा, इस पर हमने आपस में मिलकर उक्त राशि पटवारी को नगदी दे दी लेकिन पटवारी द्वारा हमारा काम बंटवारा नही किया गया मैने पटवारी से बात की तो उन्होंने हमारे नाम की अलग-अलग बही तो बना दी जब उक्त बही को लेकर में वर्तमान पटवारी सोदान सिंह से मिला तो उन्होनें बही देखकर कहा कि तुम्हारी जमीन का अभी तक कोई बंटवारा नही हुआ है । यह बही तो नकली है इस तरह उक्त पटवारी ने हमारे साथ धोखाधडी की, साथ ही हमारे द्वारा दी गई राशि भी हड़प कर गया, कृषक द्वारा उक्त भ्रष्ट पटवारी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने के लिये लिखित शिकायत जिलाधीश एवं अनुविभागीय अधिकारी आष्टा को की गई है । sehore fursat

Monday, February 25, 2008

अरे भाई जब ऐश्वर्या रितिक की नहीं हुई तो जोधा अकबर की कैसे होगी ? जोधाबाई तो अकबर की बहु थी,

सलीम दिलीप कुमार अभी जिंदा हैं,
कहीं आशुतोष गोवारीकर को लेने के देने न पड़ जायें
जोधा-अकबर एक ऐतिहासिक फिल्म है। हिन्दुस्तान के शक्तिशाली सम्राट अकबर पर बनी यह फिल्म है। लेकिन इन्ही खूबियो में ही छिपा है इस फिल्म का विवादो के पचड़े में पड़ना। दरअसल जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर एक रियल लाईफ करैक्टर है। मरने के सैकड़ो साल बाद भी लोग उसकी धर्मनिरेपक्षता को याद करते है। धर्मनिरेपक्षता-सभी धर्मो को एक समान दृष्टि से देखना-ही क्यों, उसकी हिन्दुस्तान को एक धागे में पिरोकर रखने की क्षमता, महिलाओ को बराबरी का अधिकार, उसकी प्रशासनिक व्यवस्था, मनसबदारी, भूमि सुधार, जैसे उसके कदम ऐसे हैं जो आनी वाली पीढ़ी, राजाओ और व्यवस्था के लिये मील के पत्थर साबित हुये। भारतीय इतिहास में (चंद्रगुप्त मौर्य से लेकर 21 वी सदी तक) सम्राट अशोक को छोड़कर शायद ही कोई ऐसा राजा होगा जो किसी भी मायने में अकबर का मुकाबला कर सकता हो। असल में जोधाबाई, अकबर की पत्नी नही पुत्रवधु है। जबकि लोग 'मुगल-ए-आजम' फिल्म में दिखाई गई कहानी को ही हकीकत मानते थे। लेकिन जैसे-जैसे इतिहास पढ़ते गये, ये बात समझ में आ गई कि जोधा, अकबर के बेटे जहांगीर उर्फ सलीम की पत्नी थी। अरे भाई जब ऐश्वर्या, रितिक रोशन की नहीं हुई तो फिर जोधाबाई, अकबर की कैसे हो सकती हैं। सलीम दिलीप कुमार अभी जिंदा हैं कहीं अपनी जोधा के लिये वह आशुतोष गोवारीकर पर नाराज न हो जायें वरना उन्हे लेने के देने पड़ जायेंगे ।
क्‍या फतेहपुर के गाइड जिम्मेदार हैं.....
जब आशुतोष गोवारिकर की फिल्म जोधा-अकबर रिलीज होने वाली थी तब जरुर आश्चर्य हुआ कि एक बार जो गलती हो गई थी-मुगल-ए-आजम-के वक्त उसे क्यो दुहराया जा रहा है। जानकारो का मानना है कि इस गड़बड़-झाले के पीछे फतेहपुर सीकरी के गाईड़ जिम्मेदार है। दरअसल फतेहपुर सीकरी (आगरा के करीब वो शहर जो कभी अकबर की राजधानी हुआ करता था) में अकबर का किला है। इस किले का एक हिस्सा जोधा-महल के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि इस महल में मुगल राजाओ की हिंदु रानियां रहा करती थी। शायद, जहांगीर की पत्नी जोधा भी इसी महल में रहती होगी और इस महल का नाम जोधा-महल पड़ गया। फिर क्या था यहां के गाईडस ने जोधा को अकबर की पत्नी बताना शुरू कर दिया।
इस फिल्म का नाम 'हरका-अकबर' होना चाहिये था। जानते है क्यो ?आमेर (जयपुर) के कछवाहा राजपूत, राजा भारमल की बेटी थी हरका। मुगल सत्ता पर काबिज होने के करीब छह साल बाद (यानि 1562 में) अकबर एकबार अपने लावो-लश्कर के साथ अजमेर की दरगाह शरीफ से लौट रहा था। रास्ते में उसकी मुलाकात राजा भारमल से हुई। भारमल ने शिकायत की मेवात का मुगल हाकिम (गर्वनर) उन्हे आये-दिन परेशान करता रहता है। उनसे मनमाना चौथ वसूलता है। कहते है, अकबर ने भारमल को अपने ही मुलाजिम से मुक्ति दिलाने के लिये दो शर्ते रखी। पहली, राजा भारमल खुद उसके कैंप पर आकर अपनी बात (मिन्नत करे) रखे। दूसरा ये कि वो अपनी बेटी हरका की शादी उससे कर दे। उस वक्त अकबर की उम्र महज़ बीस साल थी।
हरका से शादी के बाद तो अकबर ने कई राजपूत राजकुमारियों से शादी रचाई। बीकानेर के राजा की बेटी, काहन, जोधपुर की एक राजकुमारी से, एक रोहिगा राजकुमारी रुकमावती...। राजपूत घराने में शादी रचाने की परपंरा अकबर के बेटे सलीम उर्फ जहांगीर ने भी जारी रखी। खुद अकबर ने ही अपने बेटे सलीम की शादी जोधपुर के राजघराने की बेटी जगत गोसाई (जो असलियत में जोधाबाई का नाम था) से बड़ी धूम-धाम से कराई थी। लेकिन ऐसा नही है कि हिंदुस्तान में अकबर पहला मुस्लिम राजा था जिसने हिंदु लड़कियो से शादी रचाई थी। उससे पहले अलाउद्दीन खिलजी, दक्षिण के बाहमनी राजा फिरोज शाह, गुजरात के मुहम्मद शाह सहित कई मुस्लिम राजाओ ने हिंदु रानियों से विवाह किया था। लेकिन अकबर ने हिंदु (खासतौर से राजपूत) राजघराने में शादी को अपनी राज-नीति बनाया था।
राजपूत राजा देते थे मुँह तोड़ जबाव
इन शादियों से अकबर एक बड़े साम्राज्य को एक सूत्र में बांधने में कामयाब हो पाया। शादी करने से एक तो इन राजपूत राजाओ से रिश्ते बन जाते थे, यानि उनके विद्रोह की संभावना लगभग ना के बराबर हो जाती थी। राजस्थान के छोटे-छोटे राजपूत राजा दिल्ली (या आगरा) के उन राजाओ को मुंह तोड़ जबाब देते थे जो उनकी सरजमीं की तरफ आंख उठाकर देखने की जुर्रत करते थे। दूसरा ये कि राजपूत अपनी वफादारी के लिये जाने जाते थे। आड़े वक्त में वही अकबर का साथ देते थे। मरते वक्त अकबर के अब्बा, हुंमायू ने उसे हिंदुस्तान में राज करने का मूल-मंत्र दिया था। उसने अकबर को सीख दी थी कि, राजपूत कौम का हमेशा ध्यान रखना, क्योकि ना तो वे (राजपूत) कभी कानून तोड़ते है और ना ही कभी आज्ञा का उल्लंघन करते है। वे तो सिर्फ आज्ञा का पालन करते है और अपना फर्ज (वफादारी का) निभाते है। गुजरात को कूच करते वक्त तो अकबर ने आमेर के राजा मान सिंह को ही आगरा (सत्ता का केंद्रबिंदु) की गद्दी का रखवाला घोषित कर दिया था। यहां तक की मान सिंह को और उनके परिवार के दूसरे सदस्यो को हरम (राजघराने की रानियों की रहने की जगह) की भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी-जो कभी भी किसी मर्द के हवाले नहीं की जाती थी। दूर-दराज के कई विद्रोह कुचलने में भी राजपूत राजाओ ने अह्म भूमिका निभाई थी। अकबर का साम्राज्य काफी बड़ा था। इसलिये आये-दिन दूर-दराज के हाकिम अपने को स्वतंत्र घोषित कर देते थे। ऐसे में अकबर, राजपूतो के सिवाय किसी पर विश्वास नही कर पाता था। यहां तक की अपने बेटे सलीम पर भी वो इतना भरोसा नही करता था क्योकि खुद सलीम ने भी एक बार अपने पिता के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजाया था।
वीर महाराणा प्रताण
राजपूत घरानो से रिश्ते बनाकर अकबर अपने प्रजा में एक सदेंश देना चाहता था। वो दिखाना चाहता था कि क्या हिंदु और क्या मुसलमान, उसके लिये सभी बराबर है। राजपूत राजाओ के लिये भी ये घाटे का सौदा नही था। राजस्थान के मेवाड़ राज्य के महाराणा प्रताप को छोड़कर हरेक राजा अकबर के सामने नत-मस्तक हो चुके थे।
1562 में अकबर का आमेर जयपुर के राजा भारमल कछवाहा की बेटी हीराकुंवर या हरखबाई से ब्याह हुआ । धर्म परिवर्तन करके उनका नाम मरियम उामानी रखा गया। वे मेधावी और धर्म सम्पन्न थीं। उन्होने अपने महल में कृष्ण की मूर्ति स्थापित की और हिन्दु धर्म के विधि विधानों का जीवन भर पालन किया। जहांगीर उनके ही बेटे थे और नूरजहां के प्रभावी हो जाने तक दरबार पर उनका पूरा प्रभाव रहा। बाबर सुन्नी थे, पर भाईयों और शेरशाह सूरी के उत्तराधिकारियों से निबटने में हुमायूं की मदद फारस के शाह तस्मास्प ने उन्हे शिया बनाकर ही दी थी। लिहाजा कोई सुन्नी प्रतिरोध न हो, इसलिये हीराकुंवरी या हरखबाई का नाम हमेशा मरियम उामानी ही लिखा गया। इसलिये भी कि हिन्दू रानी का बेटा बादशाह बन रहा है, इस बात को भी मुगल सल्तनत को किसी प्रतिरोध से बचाना था। बाद में हीराकुंवरी ने अपने बेटे से अपनी भतीजी मानमती की भी शादी कराई जिससे खुसरु पैदा हुए। जहांगीर की एक शादी जोधपुर के राज परिवार की जगत गोसाईन से भी हुई। उससे खुर्रम यानी शाहजहां पैदा हुए। जोधपुर की होने से उन्ही का नाम जोधबाई पड़ गया था। मुगल इतिहास में अकबर की बेगम को कहीं भी जोधा बाई नहीं कहा गया। कर्नल टाड नामक लेखक ने अवश्य नामों का गड्ड-मड्ड करके अकबर की बेगम जोधाबाई लिख डाला था जिसे मुगलेआजम फिल्म ने पुख्ता कर दिया।
पर बात नाम के बदल जाने की नहीं है। उससे इतिहास की मूलधारा पर कोई फर्क नहीं पड़ता। मूलधारा में फर्क पड़ने की बात दूसरी है। इसकी कि यह शादी कैसे और किस कारण हुई? पहले अकबर के जन्म को देख लें, शेरशाह से हारकर हुमायूं जब ईरान की और भाग रहे थे, तो छोटे भाई हिंदाल के खेमे में उन्होने चौदस साल की एक शिया लडक़ी हमीदा बानो को देखा और उस पर मुग्ध हो गये। हुमायूं को योतिष पर यकीन था । उनका ज्ञान और मन दोनो यह कहने लगे कि इस लड़की से पैदा हुआ लड़का बादशाह बनेगा। उन्होने दबाव डालकर शादी की। पर शरण कहां ले? भाई विरोध कर रहे थे। पास में सैनिक और सम्पत्ति भी नहीं थी, ऐसे में सिंध के राजपूत राजा ने उन्हे शरण दी। अमरकोट में राजपूत राजा की छांव में ही अकबर का जन्म हुआ।
बाद में परिवार को साथ लेकर हुमायूं सहायता पाने के लिये ईरान की और बढ़े तो भाई असकरी ने हमला कर दिया। 14 महिने के बच्चे को वहीं सैनिक शिविर में ही अपनी एक पुरानी बेगम के साथ छोड़ वे ईरान की और भागे। असकरी ने भतीजे का मारा नहीं, वह उसे काबुल ले गया। दूसरे भाई कामरान ने उसे इसलिये भी रख लिया ताकि बेटा उसके कब्जे में रहने से हुमायूं ईरान की मदद पाकर भी काबुल पर हमला नहीं कर सक ता। ईरान के शाह ने हुमायूं को शरण तो दी पर नसीहत भी दी कि पठानों से लड़ रहे हो तो फिर राजपूतों से शादी-ब्याह के संबंध बनाओ, तभी तो राज कर पाओगे। तब शिया बन जाने की शर्त मान लिये जाने पर उन्होने हुमायूं को सैनिक मदद दी और काबुल हुमायु के कब्जे में आ गया।
काबुल में उन्हे तीन साल का हो गया अपना बेटा अकबर मिला पर अब आगे हिन्दुस्तान पर हमला करना था और बेटे को साथ नहीं ले जाया जा सकता था। इसलिये सुरक्षा के लिये अकबर को मध्य प्रदेश के रीवा राजघराने में पलने-बढ़ने के लिये पहुँचा दिया गया। शेरशाह ने अपने अंतिम दिनों में कलिंजर के किले का घेरा डाला था वहाँ रीवा के राजा से ही चल रही लड़ाई में हुए विस्फोट में शेरशाह मारा गया।
अकबर को रीवा महाराज ने अपने बेटे रामसिंह की तरह ही पाला। अकबर बादशाह बने तो रीवा ने उन्हे ग्वालियर के तानसेन और सीधी के बीरबल ये दो रत्न उपहार में दिये। हुमायू ने भी मरने से पहले अकबर को वही किया कि राजपूतो से संबंध रखना। 18 साल की उम्र होते-होते जब अकबर बैरम खां और अपनी धाय मां माहम अमका के दबदबे से मुक्त हुए तो उन्होने संबंध के लिये राजपूतों की और देखा। जयपुर सबसे नजदीक था, इसलिये उन्होने लड़की लेने और देने का प्रस्ताव वहाँ रखा। लेकिन राजपूत घरानों ने लड़की देकर धर्म बचाना मुनासिफ समझा ना की मुस्लिम लकड़ी लाकर पूरे घर को मुस्लिम बनाना उचित। इसलिये वह मुस्लिम राजकन्याएं नहीं लाये। ( उल्लेख संस्कृति के चार अध्याय-रामधारी सिंह दिनकर)
इतिहास का मर्म इस बात में है कि जिन राजपूत राजाओं को मुगल शाहजादों-बादशाहों को अपनी बेटियां देनी पड़ी थीं, उन्होने या इस देश ने इस पर जश् नहीं मनाया था, हंसते हुए नहीं, रोते हुए बेटी बिदा की थी। और बेटे भी ऐसे ही विदा किये थे पश्चिम की और आक्रमण पर जाना पड़ता तो खुद न जाकर किसी बेटे को भेजा जाता। इसलिये कि पश्चिम जाने का अर्थ है धर्म का चला जाना (संस्कृति के चार अध्याय)
इतिहास का जो बाजारुपन, दुख और सुख में बदल दे, रुदन को उल्लास में बदल दे, कुर्बानी को उपलब्धि में बदल दे, इतिहास की सारी भावना को ही बदल दे, इसलिये कि उसे एक कल्पिन प्रेमकथा बेचनी है, तो इसे क्या कहेंगे ? देश और राष्ट्र के अपमान के सिवा इसे और क्या कहेंगे ? हजारों किताबें हैं, हजार दस्तावेज हैं जो मुगल इतिहास को सामने रखते हैं और सब जांचा हुआ भी है यह क्यों भूल जाते हैं फिल्म निर्माता कि हीराकुंवरी के व्याह के साथ ही जयपुर से कई राजपूत घरानों ने शाद-व्याह के रिश्ते इस तरह तोड़ दिये थे कि वह फिर वर्षों टूटे रहे।

Sunday, February 24, 2008

...शेखचिल्ली जैसी कल्पना करते हुए रामपुरा जलाशय से पानी लाने की बात कर रहे सीहोर नपा अध्यक्ष राकेश

सीहोर 23 फर (आनन्द गांधी, फुरसत)। सनातन भारतीय धर्म में पानी पिलाने का पुण्य सबसे अधिक माना गया है, यहाँ सम्पन्न लोगों द्वारा समाज के लिये सार्वजनिक प्याऊ बनवाने का महत्व सर्वाधिक रहता है सीहोर में भी कई लोग गर्मी में पेयजल उपलब्ध कराकर पुण्य लाभ कमाते देखे जाते हैं लेकिन नगर पालिका अध्यक्ष राकेश राय और उनकी परिषद मण्डली को नागरिकों के लिये पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास करते कभी नहीं देखा जाता। बल्कि जनता के रुपयों पर लम्बा हाथ मारने के लिये हर बार तरह-तरह की नौटंकियों के साथ लाखों रुपये का हेरफेर सिर्फ टेंकरों से पेयजल वितरण को लेकर हो जाता है।
इस वर्ष भी चूंकि बहुत अच्छी बरसात हुई थी इसलिये काहिरी बंधान सहित सारे अन्रू जल स्त्रोत भरा चुके थे लेकिन दिन रात काहिरी बंधान से पानी की चोरी होती रही, जानबूझकर नगर पालिका अध्यक्ष ने व उनकी पार्षद मण्डली ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया, विज्ञप्तियाँ भेजकर खानापूरी कर ली। नाकाम नगर पालिका अध्यक्ष के कारण पेयजल स्त्रोतों से पूरा पानी चोरी जा चुका है जो आगामी गर्मी के लिये पर्याप्त नहीं है।
ऐसे में शेखचिल्ली जैसी कल्पना करते हुए राकेश राय ने विज्ञप्ति जारी की है कि यदि....काश....रामपुरा से पानी छूट जाये तो यहाँ काहिरी बंधान में पानी ही पानी हो जाये....। वह यह भूल गये हैं कि सीहोर की जनता इतनी नासमझ नहीं है कि उसे यह भी ना मालूम हो कि रामपुरा से अब पानी नहीं आ सकता। जनता को ऐसी विज्ञप्तियों से बरगलाने की कोशिश बेमानी है। खैर हकीकत से धरातल से जनता क ो दूर करने का राकेश राय का यह प्रयास कितना बेमानी है और पेयजल की क्या स्थिति है इस पर पढ़िये फुरसत की एक नजर।
ठंड विदा हो चुकी है और ग्रीष्म ऋतु ने अपनी दस्तक दे दी है अब तो रात में ठंड का असर थोड़ा बहुत दिखाई देता है लेकिन दिन का पारा शनै: शनै: बढ़कर अपनी तपिश का अहसास कराने लगा है। ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ होते ही सीहोर नगर में पेयजल का संकट उभरने लगा है।
शहर भर में जहाँ-तहाँ लगे हेण्डपंप बोल चुके हैं नगर पालिका की जल प्रदाय व्यवस्था ठप्प-सी दिखने लगी है। कभी कभार यदि नलों से पानी आता है तो वह भी गंदला और बदबूदार। स्थिति यह है कि न तो काहिरी में और ना ही जमोनिया में पर्याप्त पानी का भंडार बचा है। जलस्त्रोत सूखते जा रहे हैं भूजल दिन व दिन नीचे गिरता चला जा रहा है। शहरवासी पीने के पानी के लिये अभी से इधर-उधर भटकने को मजबूर होने लगे हैं।
ऐसे में नगर पालिका अध्यक्ष का नया नाटक शुरु हो गया है। नाटक करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष ने अब अचानक रामपुरा डेम से पानी छोड़ने की मांग कर डाली है। सीहोर की जनता को और अपने ही मतदाताओं को वह जानबूझकर भ्रमित करने के लिये रामपुरा-रामपुरा का राग अलापने का नाटक कर रहे हैं जबकि रामपुरा डेम से पानी सीहोर लाना आज की तारीख में नामुमकि न जैसा हो चुका है फिर भी नागरिकों को यह जताने का प्रयास किया जा रहा है कि नगर पालिका बहुत सक्रिय है।
नगर पालिका द्वारा पानी का उचित प्रबंधन नहीं करने तथा समय रहते नदी-तालाबों से हो रही पानी चोरी को रोकने के कोई प्रयास नहीं करने के कारण नगर के लिये उपयोगी जल स्त्रोत सूख चुके हैं। वैसे भी नगर पालिका ने कभी नगर के ही पुराने जल स्त्रोतों का ध्यान नहीं रखा।
फरवरी माह में ही शहर के कई हिस्सों में पार्वती पेयजल योजना से लगातार पानी प्रदाय नहीं हो सका है। नगर पालिका कभी बिजली कटौती का बहाना बनाती है तो कभी बंधान के मोटर पंप खराब पड़े होने का बहाना बनाकर हाथ झाड़ लेती है।
भूले भटके यदि पेयजल प्रदाय किया भी जाता है तो वह पीने योग्य तो बिल्कुल भी नहीं होता है। उदाहरण के लिये कल गंज क्षेत्र में करीब एक हफ्ते बाद नल चले लोगों ने बड़ी उम्मीद से पानी भरना प्रारंभ किया लेकिन नागरिक उस समय हतप्रभ रह गये जब पानी में फेन आता रहा। मटमैला और बदबूदार पानी देखकर नागरिक उस पानी से अपने घरों का छिड़काव करते दिखाई दिये। गंदगी युक्त बदबूदार पानी से हैरान परेशान नागरिक नगर पालिका की पेयजल प्रदाय व्यवस्था को कोसते रहे।
गंज क्षेत्र में जमोनिया तालाब पेयजल प्रदाय किया जाता है लगता है जो जल प्रदाय किया गया है। वह सीधे ही तालाब से नागरिकों को मुहैया कराया गया है। पानी को साफ करने कराने की भी जहमत उठाना नगर पालिका ने गवारा नहीं समझा।
अब मजे की बात यह है कि नगर पालिका अध्यक्ष राकेश राय ने एक विज्ञप्ति प्रसारित कर कहा है कि इस वर्ष वर्षा कम हुई है जिसके कारण पेयजल स्त्रोतों में जल की कमी है काहिरी, खारपा और जमोनिया तालाब में पानी की पूर्ति के लिये रामपुरा डेम से पानी पार्वती नदी में छोड़ा जाये। रामपुरा डेम पार्वती के उद्गम स्थल पर सिध्दिकगंज क्षेत्र में स्थित है। वहाँ से पार्वती नदी में पानी छोड़ा भी जाता है तो इस बात की कितनी संभावना है कि वह पानी सीहोर की पेयजल से जुड़े खारपा और काहिरी बंधान तक पहुँच ही जायेगा। क्योंकि इन दो बंधानों से पूर्व आष्टा और आष्टा के बाद दो तीन बंधानों के बाद ही खारपा और उसके बाद फिर काहिरी बंधान आता है। जहाँ ग्रीष्म के मौसम में रामपुरा जलाशय से छुड़वाया गया पानी पहुँचना नामुमकिन जैसा हो चुका है।
आष्टा नगर पालिका अध्यक्ष कैलाश परमार जैसी छवि और दमदारी वाली बात हो जो स्वयं अपना दल लेकर रामपुरा से पार्वती के बीच पानी चोरी करने वाले लोगों को रोकते हैं और पूरी दमदारी से चाहे कितनी ही मेहनत लगे आष्टा वासियों के लिये पानी लाते हैं। आज यदि रामपुरा से पानी छूटा भी तो वह पहले तो पार्वती तक आना ही मुश्किल हो जाता है फिर आ भी गया पार्वती में भरा जायेगा और आगे बढ़ेगा तो अगले जलस्त्रोतों व डेम में भराकर आगे ही नहीं बढ़ सकता। क्या इतनी सी समझ पढ़े लिखे समझदार बुध्दीमान नगर पालिका अध्यक्ष राकेश राय में भी नहीं है। राकेश राय का कितना हास्यास्पद तर्क है कि रामपुरा डेम से छोड़े गए पानी से खारपा और काहिरी लबालब हो जायेगी और सीहोर में पेयजल संकट नहीं रहेगा।
नगर पालिका अध्यक्ष को मुंगेरीलाल जैसे सपनों को त्यागकर वास्तविक धरातल पर खड़े होकर गंभीरता के साथ शहर के नागरिकों के प्यासे कंठो की प्यास बुझाने के सार्थक प्रयास करना होगा। इसके लिये वह चाहें तो सीहोर के पुराने पेयजल स्त्रोतों को जीवित करने का सार्थक प्रयास कर सकते हैं। बेंगन घांट का पुराना स्त्रोत जो एक समय संपूर्ण सीहोर की प्यास बुझाने का बड़ा माध्यम था, लाल कुंआ एवं क्षेत्र के जीवित नलकूप शहर की पेयजल व्यवस्था को सुचारु बनाये रखने में अपनी अहम भूमिका निभा सकते हैं इसके लिये नगर पालिका को अपनी संकल्प शक्ति का परिचय देना होगा। इसके साथ ही सीवन नदी और शहर के बीचों-बीच बहने वाले नाले में भगवान पुरा तालाब से पानी छुड़वाने के गंभीर प्रयास जरुरी हैं। नदी और नाले में भरपूर पानी हो तो शहर की अधिकांश क्षेत्रों के हेण्डपंप, कुएं बावड़ी में पानी के स्त्रोत स्वत: जीवित हो जायेंगे और नागरिकों के पेयजल समस्या का कुछ हद तक निराकरण भी हो सकता है।