Friday, June 13, 2008

जीवन में जोड़ना नहीं जो जोड़ा उसे अच्छे कार्यों में लगाना महत्वपूर्ण है क्रांतिकारी संत मुनिश्री वीररत्न विजय जी

आष्टा 12 जून (नि.सं.)। व्यक्ति जन्म लेता है, बड़ा होता है, व्यापार करता है धन जोड़ता है जो जोड़ा वो महत्वपूर्ण नहीं है जीवन में जो जोड़ा उसे अच्छे कार्यों में लगाना यह महत्वपूर्ण है। अगर नदी को सागर में मिलना है तो तट को सुरक्षित रखना जरुरी है, ठीक उसी प्रकार यह जीवन अगर सफल बनाना है तो जीवन में छोटे-मोटे व्रतों को धारण करना चाहिये।
उक्त उद्गार महावीर स्वामी श्वेताम्बर जैन मंदिर गंज के प्रवचन कक्ष में मालवा के क्रांतिकारी ओजस्वी प्रवचनकार पूय पन्यास प्रवर मुनिश्री वीररत्न विजय जी म.सा. ने खचाखच भरी धर्मसभा में कहे। मुनिश्री ने आगे कहा कि आस्थान, विश्वास, समर्पण की भावना से ओत प्रोत आस्थावान नगरी आष्टा में 12 वर्ष बाद आने पर श्रावक-श्राविकाओं की भक्ति अविस्मरणीय है। इस धरती पर असीम भूतकाल बीता है, उन्होने आज प्रवचन में वर्षों पहले आष्टा में हुए अपने चातुर्मास को याद किया उन्होने कहा कि चातुर्मास में उत्सव महोत्सव, पूजन होने से चातुर्मास सफल नहीं होता जहाँ चातुर्मास किया वहाँ के श्री संघ ने आपको पुन: चातुर्मास का निमंत्रण दिया की नहीं इससे सफलता आंकी जाती है। आज आपने चातुर्मास की जो विनती की उसने यह सिध्द किया कि मेरा वर्षों पूर्व हुआ चातुर्मास सफल था। जीवन में संत की क्यों जरुरत है संत के पास क्यों जाना, उनसे क्या पाना, क्थ्या अपनाना और वहाँ जाकर क्या खोना चाहिये इनका निर्णय लेनार ही संत का सानिध्य लाभदायक होता है। वचन, आचरण व्यक्ति के जीवन का निर्माण करते हैं। बुध्दि तो मिली लेकिन बुध्दि का उपयोग शुध्दी के लिये किया या वृध्दि के लिये ? बुध्दि का उपयोग मारक भी हो सकता है तारक भी हो सकता है। पहले संतान को संस्कार पहले दिये जाते थे और शिक्षा बाद में आज शिक्षा पहले दी जाती है संस्कार देना भूल जाते हैं। पहले बाप बेटे को बोलना सीखाता था आज बेटा बाप को चुप रहना सिखाता है। उन्होने कहा कि जो मृत्यु से डरता है मृत्यु उसे कभी नहीं छोड़ती है। जो मृत्यु का सामना करना है मृत्यु उससे दूर रहती है। व्यक्ति को सत्य, प्रिय, हितकारी वाणी बोलना चाहिये।
प्रवचन के पहले अन्नपूर्णा मंदिर से मुनिश्री एवं साध्वी जी म.सा. के साथ भव्य नगर प्रवेश का जुलूस निकला जो किला मंदिर से होता हुआ गंज मंदिर पर समाप्त हुआ। गंज मंदिर में प्रवचन के पहले रिना सुराना, स्मिता एवं ऋतु ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। श्रेयास सुराना ने स्वागत गीत तथा नगीन जैन, रमेश चंद पारख, लोकेन्द्र बनवट, कैलाश चन्द्र गोखरु ने अपने विचार रखे। श्रीमति वोहरा ने भजन प्रस्तुत किया।
12 जून को प्रात: 9 से 10 बजे तक मणिभद्र वीर के इतिहास एवं जीवन पर प्रवचन होंगे एवं पूजन तथा अनुष्ठान का कार्यक्रम तथा रात्री में अरविन्द चौरड़िया की भजन संध्या होगी। कार्यक्रम का संचालन दिलीप सुराना ने तथा आभार पवन सुराना ने व्यक्त किया। यहाँ पर श्री संघ के सवाईमल बोहरा, नगीन जैन, जवरचंद चतुर्मुथा, डालचंद जैन, लखमीचंद पारख, पारस सिंघवी, रविन्द्र रांका, दिलीप संचेती, सुरेश सुराना, सुशील संचेती, नगीन छाजेड़, शिखर सुराना, भविष्य सुराना, नवनीत संचेती, महिला मंडल की सदस्याओं ने महाराज श्री की अगवानी की प्रवेश जुलूस में बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाएं उपस्थित थे।