Monday, August 25, 2008

शरीर छोड़ते समय भगवान का नाम लेने से कट जाते हैं सारे पाप

सीहोर 25 अगस्त (नि.सं.)। अंतिम समय यदि मनुष्य के मुंह से भगवान का नाम निकलता है और वह भगवान का नाम जप करता हुआ शरीर छोड़ देता है तो उसके जीवन के सारे पाप कट जाते हैं किंतु अंतिम समय में भगवान का नाम इतनी आसानी से मुंह से नहीं निकलता क्योंकि अंतिम समय में शरीर की स्थिति बड़ी विकट हो जाती है इसलिये बार-बार भगवान के नाम जप के अभ्यास की बात कही जाती है ताकि भगवान के नाम जप की आदत बनी रहे और शरीर छोड़ते समय भगवान का नाम मुंह से आसानी से निकल सके।
उक्त आशय के उद्गार स्थानीय बडा बाजार में श्री रामानुज मंडल के तत्वाधान में चल रहे श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ महोत्सव के चौथे दिन उज्‍जैन से पधारे परम पूयनीय संत र्पवर 1008 श्री स्वामी रंगनाथाचार्य जी महाराज व्याकरण वेदांताचार्य श्री रामानुज कोट उजैन ने अपनी ओजस्वी एवं अमृतमयी वाणी से बड़ी संख्या में उपस्थित श्रध्दालुजनों को कथामृत का पान कराते हुए व्यक्त किये।
स्वामी जी ने कहा कि जिस प्रकार लोहा, लोहे को काटता है किंतु लोहे को काटने के लिये कई बार घन मारना पड़ता है परन्तु वह घन की आखरी चोंट से कटता है इसका मतलब यह नहीं कि लोहे को काटने में अंतिम चोंट का ही योगदान है, उसके पहले जो चोंटे पड़ी उसका भी योगदान है। इसलिये भगवान का नाम जप करना अभी से शुरु करना चाहिये ताकि अंतिम समय में भी भगवान का नाम मुंह से निकले और पूरे पाप नष्ट हो सके। स्वामी जी ने कहा कि बच्चों के नाम भी देवत्व प्रभाव वाले रखना चाहिये क्योंकि नाम का प्रभाव भी बच्चों के जीवन पर पड़ता है इसलिये बच्चों के नाम ऐसे रखे जिनसे भगवान का स्मरण हो सके।
स्वामी जी ने कहा कि गर्भवती स्त्रियों को गर्भकाल में रामायण, भागवत और श्रीभगवत नाम स्मरण करते रहना चाहिये जिससे गर्भस्थ शिशु में भक्ति के संस्कार पड़ सकें। बाहर के बच्चों की अपेक्षा गर्भ में पल रहा बालक भगवान की भक्ति आसानी से सीख सकता है इसलिये माताओं को गर्भकाल के दौरान भगवान की अधिक आराधना करना चाहिये तभी उनके बच्चे देश के लिये सही दिशा देने वाले बन सकेंगे। स्वामी जी ने कहा कि सभी मनुष्य कश्यप मुनि की संतान है इसलिये यदि किसी को अपना गोत्र नहीं मालूम हो तो वह पूजा और संकल्प के समय अपना गोत्र कश्यप बोले तो भी काम चल जायेगा। बिना गोत्र के पूजा या संकल्प नहीं करना चाहिये।
स्वामी जी ने बताया कि नारायण कवच के विधिवत पाठ से खोई हुई सम्पत्ति को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होने बताया कि एक करोड़ नाम जपने से व्यक्ति में वही संस्कार पड़ जाते हैं और दूसरे जन्म के समय उसके मुंह से वही ईष्ट देव का नाम निकलता है। उन्होने कहा कि तीन करोड़ जाप कराने से व्यक्ति के मन के संकल्प पूरे होने लगते हैं, पाँच करोड़ जाप से सत्य और असत्य का विवेक होने लगता है नौ करोड़ जाप से नवग्रह की दशाओं का प्रभाव नहीं पड़ता और यदि तेरह करोड़ जाप कर लिये जायें तो प्रत्यक्ष रुप से भगवान की अनुभूति होने लगती है। इसलिये अधिक से अधिक भगवान का नाम जप करें। उन्होने मारने वाला है भगवान, बचाने वाला है भगवान, बाल न बांका होता उसका, जिसका रक्षक दयानिधान नामक अत्यंत सुंदर भजन समेत अन्य भजन सुनाए जिससे श्रोतागण आनंद मग् हो गये।
श्रीमद् भागवत कथा को सुनने पूरे शहरभर से लोग एकत्रित हो रहे हैं। महिलाओं की संख्या श्रोताओं में सर्वाधित रहती है,। आज कथास्थल को जन्माष्टमी के अवसर पर बड़े ही सुन्दर तरीके से सजाया गया था। पूरा बड़ा बाजार क्षेत्र में माहौल धार्मिक हो गया है। श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ महोत्सव के मुख्य यजमान विधायक रमेश सक्सेना ने सभी श्रध्दालुजनों से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर पुण्यलाभ प्राप्त करें।


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