Thursday, May 8, 2008

पंचायत सचिव की नियुक्ति के विवाद में पूरे गांव में चले लट्ठ पत्‍थर, 3 घायल

आष्टा 7 मई (नि।प्र।)। लगभग 10 माह पूर्व आष्टा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत लोरास खुर्द में पंचायत सचिव की नियुक्ति को लेकर जो स्थिति बनी भी और उससे उपजा रंजिश का सिलसिला अंतत: आज झगड़े में बदल गया और आज सुबह ग्राम में जमकर लट्ट-पत्थर चले जिसमें तीन लोग घायल हो गये एक गंभीर को भोपाल रेफर किया गया है ।
आज ग्राम में जो कुछ भी हुआ इसमें अगर जनपद पंचायत एवं स्थानीय प्रशासन को भी जिम्मेदार माना जाये तो कोई अतिशियोक्ति नही होगी क्योंकि इस पंचायत में 10 माह पूर्व जो पंचायत सचिव की नियुक्ति का मामला था जिसमें कलेक्टर सीहोर ने जनपद से सीईओ तक को फटकार लगाई थी लेकिन उसके बाद भी न ही प्रशासन जागा और न ही जनपद के सीईओ ने कभी इस पंचायत के विवाद को गंभीरता से लिया परिणाम यह रहा कि आज ग्राम में लट्ट -पत्थर चले खून बहा और पुलिस को वहां पहुंचना पड़ा ।
आज हुए झगड़े में ग्राम के जगदीश आ. खुमानसिंह उम्र 30वर्ष, चरणसिंह आ. उदयसिंह उम्र 30 वर्ष, किशोरसिंह आ. उदयसिंह गंभीर रूप से घायल हो गये जिन्हें आज सुबह अस्पताल लाये यहां से चरणसिंह को भोपालल रेफर किया गया है । घटना के बारे में घायल जगदीश ने फुरसत को अस्पताल में बताया कि आज सुबह 6-7 बजे चरणसिंह हमारे घर के सामने खड़ा था तभी कमल, शिवनारायण, विजेन्द्र सिंह, योगेन्द्र सिंह आदि आये और चरणसिंह पर लठ से हमला कर दिया तब मै चरणसिंह को बचाने गया तो मुझे भी मारा मुझे बचाने किशोर सिंह आये तो इन लोगों ने हम तीनों को लठ से मारा तब परिवार की महिला राजजकुवंर बाई मुझे बचाकर घर में ले गई। जगदीश ने बताया कि जिन लोगो ने हम लोगों पर हमला किया उसके पीछे 10 अगस्त07 को ग्राम पंचायत में हुआ पंचायत सचिव का चुनाव कारण है । ये लोग 3-44 दिन से ग्राम में लठ लिये घुमते भी देखे गये थे । जगदीश ने बताया कि 10 अगस्त को लोरास खुर्द में पंचायत सचिव को लेकर मतदान हुआ था सचिव के लिए मैने (जगदीश ) कमलसिंह की बहु राधाबाई, घनश्याम एवं शंकरलाल साहू ने फार्म भरे थे 10 अगस्त को पंचो ने मतदान किया । जगदीश ने बताया कि उस दिन मेरे पक्ष में पंच कम थे इसलिए हमने शंकरलाल को समर्थन दे दिया था मतदान में शंकरलाल का 7 एवं राधाबाई को मत बराबर-बराबर मत प्राप्त होने से निर्णय नही हुआ था ।
मतदान के बाद ग्राम पंचायत के सरपंच ने बताया कि मुझसे जबरन राधाबाई के पक्ष में मतदान कराया गया है याने की शंकरलाल की जीत निश्चित थी । बराबर मत पड़ने के कारण निर्णय नही हुआ उसके बाद इन लोगों ने बोखलाकर सरपंच की शिकायत करना शुरू कर दी थी। बाद में ना जाने कैसे आष्टा यह खबर आई कि कलेक्टर सीहोर ने राधाबाई के नाम का सचिव के लिए अनुमोदन कर दिया तब पुन: कलेक्टर सीहोर को पूरे प्रकरण की शिकायते की शिकायतों के बाद कलेक्टर सीहोर ने आष्टा जनपद के सीईओ को कड़ा पत्र लिखकर फटकार लगाई लेकिन उसके बाद भी जनपद नही जागा शिकायतों के बाद कलेक्टर सीहोर ने राधाबाई के नाम का जो अनुमोदन किया था उसे निरस्त कर दिया तब आष्टा जनपद पंचायत ने इस पंचायत में प्रभारी सचिव के रूप में गोविन्द शर्मा को नियुक्त किया पंचायत निरीक्षक श्री जौहरी ने इसकी पुष्टि भी कि है । इतने में राधाबाई हाईकोर्ट पहुंच आई और आपुष्ट खबर यह है कि वो वहां से स्थगन आदेश भी ले आई जिसकी प्रति उन्होंने आष्टा जनपद को भी दी लेकिन सीहोर से इस संबंध में कोई स्पष्ट आदेश आष्टा जनपद को प्राप्त नही होने पर कोई कार्यवाही नही कि गई । और इस पंचायत में सचिव को लेकर जो उलझन मची हुई थी जिसे जनपद ने कभी गंभीरता से नही लिया आज यह परिणाम निकला कि वहां लठ चले, पथराव हुआ खून बहा और ग्राम में पुलिस को पहुंचना पड़ा ।
पुलिस ने यह कहा
इस घटना के बारे में फुरसत क ो आष्टा पुलिस ने बताया कि आज सुबह ग्राम में झगड़ा हो गया । फरियादी जगदीश आ. खुमानसिंह मेवाड़ा ने ग्राम के ही विजेन्द्र सिंह आ. कमल मेवाड़ा, योगेन्द्र आ. कमल मेवाड़ा, कमल आ. रतनसिंह, एवं शिवनारायण आ. रतनसिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है । जगदीश की रिपोर्ट पर इन लोगों के खिलाफ धारा 307,294, 341, 34 के अर्न्तगत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है । झगड़े में जगदीश, चरण सिंह, किशोर सिंह घायल हो गये है । जिसमें चरणसिंह को रेफर किया है। पुलिस बल ग्राम में पहुंच गया है । अभी किसी की गिरफ्तारी नही हुई है ।
कलेक्टर साहब से गलत अनुमोदन किसने कैसे करा लिया
लोरास खुर्द पंचायत सचिव के मामले में इस बात की भी जांच होना चाहिये कि आखिर वास्तविकता को दबाकर जिलाधीश सीहोर से लोरासखुर्द पंचायत में सचिव पद के लिए राधाबाई जिन्हें 7 मत प्राप्त हुए थे तथा दुसरे उम्मीदवार शंकरलाल साहू को भी सात मत प्राप्त हुए थे तब तभी सरपंच ने डरा धमकाकर जबरन मत डलवाने की शिकायत भी कि थी सब कुछ जनपद पंचायत आष्टा को ज्ञात था फिर भी जिलाधीश सीहोर को किसने भूलावे में रखा और कैसे उनसे राधाबाई के नाम का अनुमोदन करवा लिया स्मरण रहे सब कुछ मालुम होने के बाद जिलाधीश ने ही उक्त अनुमोदन को बाद में निरस्त भी किया था इस पूरे प्रकरण में गहराई में जाने की भी आवश्कता है ।
घटना के तीन आरोपी कर्मचारी है
आज लोरास खुर्द में जो घटना घटी और जिन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है पुलिस ने बताया कि इसमें से तीन आरोपी शासकीय कर्मचारी है शिवनारायण मेवाड़ा जो कि पंचायत एवं सामाजिक न्याय विभाग में यू.डी.सी. के पद पर पदस्थ है । कमल मेवाड़ा जो कि सेवदा ग्राम पंचायत में सचिव के पद पर पदस्थ है एवं योगेन्द्र मेवाड़ा शिक्षाकर्मी है ।
शंकरलाल अपनी मां को भी खो चुका है
लोरास खुर्द ग्राम पंचायत में सचिव के चुनाव के वक्त काफी मेहनत करने के बाद शंकरलाल साहू की मां को उम्मीद जागी थी कि अब मेरा बेटा जैसे भी हो नौकरी पर लग जायेगा लेकिन जब मतदान के दिन उसे बराबर तम मिलने की सूचना मिली और शंकरलाल की मां को ऐसा झटका लगा कि वो देवलोक हो गई उस वक्त यह मुद्दा भी समाचार पत्रों में छाया हुआ था ।
प्रभारी सचिव तो नियुक्त किया चार्ज क्यों नहीं दिलवाया
इस पूरे मामले में जनपद पंचायत के अधिकारी किस प्रकार दोषी है उसका एक और उदाहरण यहां सुनने को मिला ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत सचिव के विवाद में पंचायत का कार्य प्रभावित ना हो इसके लिए जनपद पंचायत ने एक आदेश जारी कर सचिव गोविन्द शर्मा को प्रभारी सचिव तो बना दिया उनके आदेश भी आ गये लेकिन उन्हें राधाबाई से चार्ज नही दिलवाया गया इस कारण से महिनों हो गये यहां कोई ना ही कार्य हुआ और न ही चल रही योजनाओं का कार्य रूका पड़ा खबर है कि राधाबाई के नाम का अनुमोदन निरस्त हो जाने के बाद भी उन्होनें प्रभारी सचिव को चार्ज नही सौंपा था ।
कलेक्टर साहब पूरे मामले की जांच होना
पंचायत सचिव के चुनाव की प्रक्रिया से लेकर आज तक इस पंचायत में जो कुछ इस मामले में गतिविधियां घटी मतदान में सरपंच के मत को लेकर हुई शिकायत, राधाबाई के नाम का अनुमोदन फिर अनुमोदन निरस्त होना, शंकरलाल को किसने आश्वासन दिया कि तेरा ही चयन होगा । स्थगन के बाद राधाबाई द्वारा चार्ज नही देना । प्रभारी सचिव को जनपद ने क्यों नही आज तक चार्ज दिलवाया, राधाबाई ही सचिव बने को लेकर किस-किस की रूचि थी इस कार्य में कौन-कौन लगे है वे कहां किस पद पर पदस्थ है यह सब जांच के विषय हो सकते है अगर गहराई में जाकर जांच हो तो कई चेहरे उजागर हो सक ते है।