Saturday, September 13, 2008

नपा में भी हुआ एक डम्फर काण्ड परिषद की हंगामेदार बैठक सम्पन्न

तत्पर गैस एजेंसी के ऊपर कैसे दिया रिलायंस का कार्यालय, मचा बवाल, होगी जांच, मामला उठते ही कुछ पार्षदों के चेहरे पीले पड़े

सीहोर 12 सितम्बर (नि.सं.)। नगर में जल योजना यूडीआई के नाम पर केन्द्र शासन से यूआईडीएसएसएमटी योजना अन्तर्गत आई साढ़े 14 करोड़ रुपये की राशि अब कम पड़ रही है इसके संबंध में नगर पालिका परिषद की एक आपात बैठक बुलाई गई थी। लेकिन बैठक होते ही पार्षदों ने यह मांग रखी के पिछली दो परिषदों की बैठक में हुए निणयों की जानकारी हमें नियमानुसार पहले दी जाये क्योंकि क्या-क्या निर्णय हो चुके हैं और क्या लिखे गये हैं हमें बताया जाना चाहिये।

आज परिषद की बैठक गहमा-गहमा और गर्माहट की हद तो तब भी हो गई जब एक पार्षद ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी से अभद्रता कर दी जिससे वह उठकर चले गये। कई मामलों ने परिषद ने आज नगर पालिका कर्मचारियों के द्वारा किये जा रहे कार्यों को गलत ठहराया।

जहाँ बिना स्वीकृति के लिये एक डम्फर खरीदने के प्रस्ताव पर आज हंगामा खड़ा हो गया, जिसका जबाब अध्यक्ष राकेश राय तक नहीं दे पाये। जबकि दूसरी बार तत्पर गैस एजेंसी संचालक द्वारा ऊपर बनाकर एक किसी निजी कम्पनी रिलायंस को किराये से भवन दे दिये जाने का मामला भी बहुत गर्माया जिससे कुछेक पार्षदों के चेहरे पीले पड़ गये थे।

देर तक चली हंगामेदार बैठक

नगर पालिका परिषद की आज आपात बैठक बुलाई गई थी जो अपने निर्धारित समय 2.30 बजे की अपेक्षा आधा घंटा देरी से प्रारंभ हुई और 2 घंटे तक पूरी गहमा-गहमी के साथ चली। योजना अन्तर्गत आई साढ़े 14 करोड़ की राशि के विरुध्द जब निविदाएं आमंत्रित की गई तो वह 23 करोड़ 67 लाख रुपये से अधिक की आई थी। इसलिये आज यह तय किया जाना था कि शेष राशि का प्रबंध नगर पालिका परिषद कैसे करें ? क्या मांग की जाये अन्य कुछ व्यवस्था हो।

कैसे जुड़ गया डम्फर?

इस विषय पर बातचीत हो उसके पूर्व ही आज परिषद बैठक में उपस्थित पार्षदों ने पिछली परिषद की बैठक में हुए निर्णयों की जानकारी मांग ली। टालने के प्रयास के बाद अंतत: जब मांग की गई तो 18 अगस्त को पारित हुए निर्णय सुनाये गये। जिसमें अनेक निर्णयों की जानकारी दी गई लेकिन जब अपशिष्ठ ठोस प्रबंधन के संबंध में कुछ जानकारी दी गई तो यहाँ विवाद की स्थिति बनी। इस मद में आये रुपयों से सफाई व्यवस्था के स्थान पर सामग्री क्यों खरीदी गई ? और जो सामग्री खरीदना तय थी उसमें परिषद की बिना स्वीकृति के डम्फर कैसे जुड़ा ? डम्फर का नाम आते ही सारे पार्षदों ने एक स्वर में खड़े होकर कहा कि पहले यह बताया जाये कि डम्फर कैसे जुडा ? डम्फर किसने जोड़ा इसका दोषी कौन है? सारे पार्षद एक स्वर में एक ही बात पूछते रहे। पार्षद दिनेश भैरवे, शमीम अहमद, कमलेश राठौर, राहुल यादव, हृदेश राठौर सहित अनेक ने पूछा कि यह डम्फर आखिर कैसे जुड़ा ? इस पर ना तो मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने जबाव दिया और ना ही अध्यक्ष राकेश राय ने इसका जबाव दिया, बल्कि उन्होने तो कह दिया कि भैया मुझे भी मालूम ही नहीं है कि यह कैसे जुड़ गया ? कुल मिलाकर सबने मना कर दिया और एजेण्डे में डम्फर खरीदने का आदेश लिखा था। जिसे परिषद ने निरस्त कराने का निवेदन किया।

2 लाख का फिनाइल और 70 हजार का मलेरिया आईल

स्वच्छता और कीटनाशक सामग्री क्रय करने के नाम पर हुई लाखों रुपये की स्वीकृति में मलेरिया आइल के नाम पर 70 हजार, नई फागिंग मशीन, आटो रिक्शा के हजारों रुपये का बिल सहित कीटनाशक फिनाईल के लिये 2 लाख रुपये की स्वीकृति भी बताई गई। इस पर किसी ने आपत्ति नहीं ली।

रिलायंस को कितने किराये पर दिया

आज एक पार्षद ने जब कर्मचारियों द्वारा वसूली के मामले को उछालते हुए कहा कि कुछ कर्मचारियों की मिली भगत से किराया वसूला नहीं जा रहा है ? आज तक किरायेदारों की सूची जारी नहीं की गई है यदि कर्मचारी दलाली छोड़कर वसूली करने हमारे साथ चले तो हम बतायें। इसी दौरान एक मुद्दा उठाया गया कि तत्पर गैस एजेंसी के संचालक मुल्ला जी को जमीन नगर पालिका ने लीज पर दी थी तो उस पर किस आधार पर उन्होने ऊपर नया भवन बना लिया और उसे रिलायंस कम्पनी के टावर आदि के हजारों रुपये महिने पर किराये पर दे दिया ? इसमें कर्मचारियों की मिली भगत है। पार्षद गुजराती ने कहा कि एक साल पहले मैने शिकायत की थी लेकिन आज तक कार्यवाही नहीं की गई।

और चेहरे पीले पड़ गये

इस मामले के उछलते ही सारे पार्षद आक्रोशित तो होने लगे लेकिन कुछेक पार्षदों के चेहरे फक हो गये और पीले पड़ने लगे, वह बार-बार ईशारा करके उन पार्षदों को बैठाने का प्रयास कर रहे थे जो विरोध करने में लगे थे। असल में दो ऐसे पार्षदों की चर्चाएं हमेशा रहती है जिन्होने इस कार्य को करवाने में अपनी भूमिका निभाई है।

धर्मशाला के सामने वाले प्लाटो को मिलेगा नोटिस

इस मामले में मुख्य नगर पालिका अधिकारी डी.एस.परिहार के जबाव ने यूं तो सबकी बोलती कर दी थी कि हम सितम्बर अंत तक मामला सुलझा देंगे यदि गड़बड़ी पाई गई तो किसी भी स्थिति में लीज ही समाप्त कर दी जायेगी। लेकिन पार्षदों ने किसी भी तरह की स्पष्ट मांग नहीं की बस जांच की जाये यही कहा गया। इसी दौरान तहसील चौराहे पर स्थित अन्य भूमि पर भी तथा दो ऐसे प्लाटों की जानकारी पार्षदों ने उठाई जिस पर नगर पालिका ने तय किया था कि वहाँ पार्क बनेगा लेकिन आज लोग वहाँ निर्माण कर रहे हैं। इस पर श्रीराम धर्मशाला के सामने चल रहे निर्माण कार्य के लिये नगर पालिका से नोटिस तथा अन्य सभी दुकानदारों को अपनी-अपनी भूमि के संबंध में कागजात नगर पालिका में पेश करने के नोटिस दिये जाने का निर्णय हुआ। इसके अलावा मछली बाजार में तीन नगर पालिका दुकान के किरायेदारों द्वारा पीछे दुकान में निर्माण कराये जाने की बात भी सामने आई जिस पर नोटिस देने को कहा गया।

मुनपा अधिकारी ने दिया जबाव

आज 50 सफाई कामगारों के मामले में भी मुख्य नगर पालिका अधिकारी और पार्षद दिनेश भैरवे में गहमा गहमी हुई लेकिन मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री परिहार ने स्पष्ट कहा कि हम सिर्फ नियमों से बंधे हैं, आपकी परिषद जो भी निर्णय लेती है उसे नियमानुसार हम करते हैं। हम कोई निर्णय नहीं लेते। हम कानून के दायरे में काम करते हैं और करेंगे। आप प्रस्ताव करो, वैधानिक होगा तो हम उस पर कार्यवाही करेंगे।

पार्षद ने की अभद्रता

इसके कुछ ही समय बाद निर्माण कार्य नहीं होने, ठेकेदारी की फाईल पास नहीं होने से उखड़े एक पार्षद ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी से अभद्रता करते हुए बहुत तेज आवाज में कहा कि तुम फिर सीहोर आये ही क्यों ? इस पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी एक झटके उठे और बैठक छोड़कर बाहर हो गये, इनके साथ पूरे कर्मचारी भी बाहर चले गये। हालांकि इसका विरोध करने का प्रयास भी अध्यक्ष व पार्षदों ने किया लेकिन कुछ कर नहीं पाये। बाद में मुख्य नगर पालिका अधिकारी स्वयं ही आ गये और फिर बैठक आगे बढ़ाई।

अशोक सिसोदिया को सुना नहीं

पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अशोक सिसोदिया के अल्प कार्यकाल में एक बैठक सितम्बर में ही हुई थी इसमें भी जो निर्णय हुए उसे पार्षदों ने सुना। जिसमें वार्ड क्रमांक सहित उल्लेख था कि किन वार्डों में प्राथमिकता से काम होना चाहिये। इसको लेकर भाजपाई पार्षद ही इतने उखड़ गये कि श्री सिसोदिया को जबाव तक नहीं देने दिया जबकि श्री सिसोदिया ने खुलकर कहा कि हमने जो प्रस्ताव पास किया है उस हम हर प्रश् का जबाव देने को तैयार हैं। लेकिन चिल्ला-चोंट होती रही। पार्षद नेत्री प्रभा राठौर के शब्द सुनाई दे रहे थे कि संगठन वालों को ही आपने अलग कर दिया, श्रीमति राठौर बहुत नाराज थी । जबकि पार्षद भोजराज यादव ने कहा कि 35 वर्षों से मेरा वार्ड भाजपा का है, पहली बार भाजपा का अध्यक्ष बना और मेरे ही वार्ड का ख्याल नहीं रखा गया।



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