Saturday, August 16, 2008

रक्षाबंधन व श्रवण पूजन का मुहूर्त

श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाने वाला पर्व रक्षाबंधन इस वर्ष कई कारणों से विचारणीय है विशेषकर रक्षाबंधन तथा श्रावण पूजन के समय का विचार करना आवश्यक है। इस बार पूर्णिमा के दिन अर्थात 16 अगस्त को सूर्योदय पूर्व से ही भद्रा दोष है जो दोपहर 2.04 मिनिट तक रहेगा। भद्रा में रक्षाबंधन निषेध है। भद्रा में रक्षा बंधन से देश का नाश होता है ऐसा ''मदरत्न'' और ब्रह्म वैवतृ पुरान का कथन है। चन्द्रग्रहण का सूतक इस दिन सायं 4 बजकर 6 मिनिट से लगेगा। पूजन कार्य सूतक में निषेध है। इसलिये श्रवण पूजन 4 बजकर 06 मिटिन के पूर्व किया जाना ही श्रेयस्कर है। लेकिन श्रवण पूजन श्रवण नक्षत्र के रहते ही किया जाना चाहिये जो की भद्रा के साथ ही दोपहर 2.04 बजे समाप्त हो जायेगा। चूंकि श्रवण नक्षत्र 15 अगस्त को दोपहर 12.27 से 16 अगस्त दोपहर 2.04 बजे तक है और पूर्णिमा में समयाभाव है अत: 15 अगस्त शुक्रवार को दोपहर 12.27 के पश्चात श्रवण पूजन तथा देव मंदिरों तथा माता जी को रक्षाबंधन कर लेना उचित मान्य होगा।
आपस में रक्षाबंधन ग्रहण के सूतक में भी किया जा सकता है क्योकि ग्रहण के पूर्व तेरस से नौ दिन तक ग्रहण का प्रभाव रहता है जिनमें नित्य नैमित्तिक कर्म पर्व आदि का निषेध नहीं रहता है। जिस प्रकार होलिका दहन ग्रहण में भी पूर्णिमा की रात्रि में ही किया जाता है ठीक उसी प्रकार रक्षाबंधन भी किया जा सकेगा। ऐसा भविष्य पुराण का मत है। -
पं. पृथ्वी बल्लभ दुबे
सीहोर



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