Monday, June 23, 2008

हाय रे भैया पिंड छूटा : बोले अनेक शिक्षक

सीहोर 22 जून (नि.सं.)। सेवा कालीन शिक्षक प्रशिक्षण शिविर ग्रीष्म अवकाश के दौरान जिले भर में चलाया गया, जहाँ जिला मुख्यालय के प्रमुख विद्यालयों में गंज स्थित सुभाष विद्यालय, महारानी लक्ष्मी बाई कन्या विद्यालय, स्वामी विवेकानंद विद्यालय मे प्रशिक्षण चल रहा था वहीं अन्य स्थानों पर भी यह कार्य जारी था। 21 जून को जब यह प्रशिक्षण समाप्त हुआ तो प्रशिक्षण लेने वाले अधिकांश शिक्षकों के मुँह से बरबस ही निकल हाय-रे भैया जान बची, पिंड छूटा....।

असल में ग्रीष्म कालीन प्रशिक्षण शिविन की व्यवस्थाओं का इसमें कोई दोष नहीं है, एक से बढ़कर एक अनुभवी और प्रशिक्षित प्रशिक्षकों ने संस्थाओं में प्रशिक्षण दिया। प्रतिदिन प्रशिक्षक आये और उन्होने अपने विषय की जानकारी दी, लेकिन जो शिक्षक प्रशिक्षण लेने आ रहे थे वह इससे सरोकार रखने को तैयार ही नहीं थे...।

कुछ प्रशिक्षण केन्द्रों में तो प्रशिक्षण लेने आये शिक्षकों ने गड़बड़ी फैलाने में बच्चों को भी पीछे छोड़ दिया। यह कभी पान की पीक कोने में थूक देते, कभी पाऊच कहीं भी डाल देते, कुछ खाने का सामान फेंक देते, इन सामान्य बातों से बढ़कर एक खास बात यह भी रही अधिकांश पुरुष शिक्षक भागने में सबसे यादा आगे रहते थे, वह एक घंटे भर से अधिक रुकने को तैयार नहीं रहते थे, और प्रयास करते थे कि जैसे ही लोगों की निगाह हटे और वह भाग जायें। शिक्षकों के भाग जाने से प्रशिक्षण शिविर में अव्यवस्था हो जाती थी। उपस्थिति दर्ज कराकर ऐसे कई शिक्षकों का भागना आम बात हो गई थी। स्वामी विवेकानंद विद्यालय में तो इस संबंध में जब इस संवाददाता ने निरीक्षण किया तो पता चला कि यहाँ शिक्षकों को रोकने के लिये बाहर गेट ही बंद करना पड रहा है।

गत वर्ष तो इन शिक्षकों के लिये भोजन आदि की व्यवस्थाएं की गई थी लेकिन इस बार इसके स्थान रुपयों का वितरण किया गया।

महिला शिक्षिकाओं ने इसे पिकनिक स्पाट बना लिया था। वह प्रशिक्षण क्या लेती थी बल्कि अपने बच्चों को साथ ले आया करती थीं, और घंटे-दो घंटे समय काटकर, कभी बच्चों को खिलाने में व्यस्त रहकर समय काटती और चली जाया करती थी। इस प्रकार शिक्षक ही नन्हे बच्चों की तरह पढ़ाई बचते नजर आते रहे और 21 जून को प्रशिक्षण शिविर समाप्त हो गया।

भारतीय अस्मिता का प्रतीक है वीरांगना दुर्गावती का जौहर

..........गढ़ा मंडला की रानी दुर्गावती का बलिदान, मध्यकालीन भारतीय इतिहास की सबसे करुण गाथा है। सोलहवीं शताब्दी का भारत 'अकबरी अपहरणवाद' और 'आसफी अतिमणवाद' के खूनी खंजरों से आहत, भारत के रूप में दिखायी देता है। अकबर ने जोधाबाई व अनेकों नारियों के अपहरण से यही म प्रारम्भ किया था। दुर्गावती का बलिदान-भारत के सम्पूर्ण वनवासी समाज की अस्मिता पर मुगलों, पठानों, ताजियों द्वारा किए गए निर्लज्ज आमण व अत्याचार की क्रूर कथा है। रानी दुर्गावती के बलिदान के आस-पास 16वीं शती के बलिदानों का एक विचित्र ताना बाना बुना हुआ है.........
दुर्गावती के बलिदान का म तो, चंदेल वंश के अंतिम स्थानों उ.प्र. के महोबा, कालिंजर से ही प्रारम्भ हो जाता है। जबलपुर के अतिरिक्त डिंडोरी, मंडला, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट जिलों तथा चंद्रपुर (महाराष्ट्र) से इस बलिदान का अत्यन्त प्रेरक सम्बंध है। दो माह तक दमोह की जनता ने आसफ खां को रोका, प्रतिकार किया, अत्याचार सहे। इस पर शोध नहीं हुआ है। दमोह से लेकर गढ़ा तक हुए अत्याचारों का सिलसिला व जन प्रतिकार पर शोध बाकी है।
मंडला जिले की जनता ने इस बलिदान को स्मरण रखा। अनेकों लोक कथाओं, गीतों का सृजन कर वे सैंकड़ों वर्षों से इसे गुनगुनाते रहे हैं। बलिदान दिवस समारोहों ने इस जिले की उपेक्षा की है। अनुसूचित जनजाति की वीर रानी की स्मृति, गौरवपूर्ण बलिदान की उपेक्षा, इस देश की राष्ट्रीयता का अपमान है।
दुर्गावती, प्रतापी संग्राम शाह की पुत्रवधु तथा वीर दलपत शाह की पत्नी थी। वह आठवीं शताब्दी से भारत की राजनीति में, अपनी वीरता के कीर्तिमान स्थापित करने वाले, चंदेल वंश की पुत्री थी। महोबा (उ.प्र.) के चंदेल राजा की पुत्री होने के कारण, बाल्यावस्था से ही उसे शस्त्र संचालन व युध्द विद्या का प्रशिक्षण मिला था। दिल्ली की गद्दी पर बैठे, अत्याचारी शासकों ने, पूरे उत्तर मध्यभारत में छलकपट, लूट, बलात्कार, अपहरण, अतिमण का, 300 वर्षों से सिलसिला चला रखा था। परन्तु मंडला के राज्य पर उनके प्रत्येक आमण का यहां की प्रजा ने मुंहतोड़ उत्तर दिया था। अकबर के दरबारी इतिहासकार अबुलफजल ने स्वीकार किया है कि मंडला के राज्य में विदेशी मुस्लिम आमणकारियों का प्रवेश नहीं हो सका था। दुर्गावती के विषय में तारीखे अल्फी के मुस्लिम लेखक ने लिखा है गढ़ मंडला का प्रदेश जंगलों तथा पहाड़ियों से ढंका था और इस्लाम के अभ्युदय से लेकर, इस समय तक हिन्दुस्तान का कोई शासक उसे जीत नहीं पाया था। इस समय रानी दुर्गावती नाम की एक औरत उस पर राज्य करती थी और उस देश के सभी कुत्ते उसके भक्त थे।
सन् 1540 में अपने विवाह के उपरान्त दुर्गावती ने अपने वीर पति के साथ राज्य के प्रशासन व विस्तार में सयि रूप से भाग लिया था। संग्रामपुर व आसपास के क्षेत्र में उसके प्रमाण बिखरे पड़े हैं। दलपत शाह की मृत्यु के उपरान्त, रानी ने वीरतापूर्वक शासन किया। सन् 1555 से 1560 तक उसने मालवा के सुल्तान बाजबहादुर तथा मियाना अफगानों के आक्रमणों को विफल किया। अकबर ने उसके दरबार में गोप कवि को भेजकर, दुर्गावती के दीवान आधार सिंह कायस्थ (आधारताल का निर्माता) को अपनी और मिलाने का कूटनीतिक प्रयास किया पर उसमें असफल रहा।
सन् 1564 के मार्च माह में अकबर ने अपनी युध्द यात्राएं प्रारम्भ कीं तथा क ड़ा मानिकपुर के सूबेदार ख्वाजा अब्दुल मजीद खां (आसफ खां) को दुर्गावती के राज्य पर आमण करने भेजा। अप्रैल 1564 में दमोह पहुंचकर आसफ खां ने अकथनीय अत्याचार किए। क्षत्रियों की एक जाति को मुड़हा ठाकुर और शिल्पी जाति को चमरलढ़िया बनाया। दमोह के विशाल तालाब को जिसका चंदेल युग में निर्माण हुआ था व उसके आसपास विशाल मंदिर थे तोड़ डाला। मंदिरों को तोड़कर ईदगाह बना दी। वह तालाब आज तक फुटेरा तालाब कहलाता है। उसके आस-पास खंडित मूर्तियों के, सती स्तम्भों के टुकड़े, विशाल खंडित विष्णु वाराह की प्रतिमा, दमोह नगर की अधिष्ठात्री देवी महामाया (महामाई) की खंडित मूर्तियां, इन अत्याचारों के प्रमाण के रूप में आज भी उपस्थित हैं। दमोह की जनता ने दो माह तक सयि प्रतिकार किया। अधिकांश जनता जंगलों में चली गई। हजारों हिन्दुओं की हत्या कर गाजीमियां बन बैठे, मुगल सरदार को जनता ने ही मार डाला। अभी सन् 1946 तक एक पहाड़ी का नाम ही गाजीमियां की पहाड़ी था। फकीरों और व्यापारियों के द्वारा दुर्गावती के राज्य में अफवाहें फैलाकर, गुप्त सामरिक सूचनाएं एकत्र कर, आसफ खां, दो माह बाद जबलपुर की ओर बढ़ा। कारूंबाग (जबेरा) सिंगौरगढ़, गढ़ा में युध्द हुए। अंतिम युध्द जबलपुर की मंडला की सीमा पर नर्रई नाला पर 23 जून 1564 को हुआ। नाले में बाढ़ आ जाने से रानी सुरक्षित स्थान पर नहीं जा सकी। विजयी होने पर भी रात्रि में धोखे से आमण कर, आसफ खां ने रानी को कपटपूर्वक पराजित किया। परन्तु वीर रानी ने अपने हाथ से ही अपना प्राणांत कर, अपने शील व स्वाभिमान की रक्षा की। इस युध्द में कानुर, कल्याण, वखीला, खान हान, शम्सखान मियाना, मुबारक खान, बलूच, चमणि कलचुरि, अर्जुनदास बैस, मानब्राह्मण, महारख ब्राह्मण, जगदेव आदि वीर मारे गए। इन सभी के परिवार चौरागढ़ में थे।
दो माह बाद संभवतया सितम्बर सन् 1564 के अंत या अक्तूबर के प्रारंभ में आसफ खां ने नरसिंहपुर जिला में स्थित, चौरागढ़ की राजधानी पर आमण किया। यहां रानी का पुत्र वीरनारायण युध्द करते हुए मारा गया। वीरांगनाओं ने जौहर करने की ठानी। चौरागढ़ का जौहर मध्यकालीन भारतीय इतिहास का एक मात्र ऐसा जौहर है, जिसमें हिन्दू महिलाओं के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं ने भी अपने शील व सम्मान की रक्षा हेतु जलती चिता में बैठकर आत्माहुति दी थी। भोज, कायस्थ तथा मियां भिखारी ने इस जौहर की व्यवस्था की थी व स्वयं लड़ते हुए शहीद हुए थे। इस जौहर में रानी दुर्गावती की बहिन कमलावती व पुत्रवधु (वीर नारायण की पत्नी) को आसफी सेनाओं ने जीवित पकड़ लिया व दिल्ली दरबार में अकबर के हरम भेज दी गईं।
आसफ खां का चौरागढ़ में आवागमन बना रहा। सन् 1566 में मधी कासिम खां की सेना से लूट के माल के बंटवारे पर युध्द हुआ, पर आसफ खां ने संधि कर ली, क्योंकि अकबर द्वारा चित्तौड़ के विरुध्द महाभियान के लिए इस्लामी ताकतों की एकता का अभियान चलाया जा रहा था।
बलिदानी रानी की स्मृति को किसी जाति या प्रदेश की सीमा में बांधना अन्याय है। उसके स्मरण को अखिल भारतीय स्वरूप प्राप्त होना चाहिए। वह सशस्त्र प्रतिकार की परम्परा स्थापित करने वाली श्रेष्ठ बलिदानी नारी थी। भारतमाता मंदिर, हरिद्वार में दुर्गावती की मूर्ति की स्थापना पर विचार हो रहा है।
रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस का श्री गणेश करने वाले नेताओं ने चौरागढ़ के इस राष्ट्रीय जौहर को कोई महत्व नहीं दिया, क्योंकि इससे आमणकारी अकबरी अपहरणवाद व आसफी अतिमणवाद की कलई खुल जाती है।
भोपाल के विशाल आदिवासी अनुसंधान संस्थान जो 34, श्यामला पहाड़ी पर स्थित है, उसका नामकरण बलिदानी दुर्गावती के नाम पर किया जाना चाहिए। राजधानी भोपाल व प्रत्येक नगर, कस्बों में दुर्गावती का बलिदान केवल इसलिए भुला दिया गया कि वह वनवासी (आदिवासी) जाति की थी।

Sunday, June 22, 2008

वार्ड 15 में सड़क बनाने वाले बोल रहे थे मैं नहीं था और वार्ड 17 की बनी हुई सड़क की ढुंढाई चल रही (खास खबर)

सीहोर 21 जून (नि.सं.)। नगर पालिका द्वारा कराये गये कामों की जांच करने के लिये जो दल आया था उस दल के प्रभारी जी.के.श्रीवास्तव ने जब वार्ड 17 में जाने के पूर्व वार्ड 15 में रुककर अचानक सड़क देखी तो यहाँ भीड़ एकत्र हो गई जनता ने कहा कि यह सड़क आपके साथ चल रहे इस चश्मे वाले ने अपने सामने बनवाई है और वो चश्मे वाला कहता रहा कि साहब मुझे नहीं मालूम यह सड़क कब बनी है। जबकि वार्ड 17 में तो जिस सड़क को देखने दल पहुँचा था वहाँ सड़क कभी बनी ही नहीं है और कागजों पर बन गई है। देखिये इन दोनो स्थानों पर क्या रोचक स्थिति बनी....।
भोपाल से आये जांच दल के प्रभारी का वाहन काफिला जब वार्ड 15 प्रेम पहलवान के घर के सामने अचानक रुका और जांच अधिकारी ने यहाँ सड़क का मुआयना किया। सड़क देखी तो उसकी हालत रद्दी हो रही थी। उन्होने जब नगर पालिका अधिकारी से पूछा कि यह सडक़ कब बनी तो उन्होने साफ इंकार कर दिया कि साहब मुझे नहीं मालूम सड़क कब बनी लेकिन यहाँ आसपास खड़े लोग व शिकायत कर्ता पार्षदों ने बताया कि साहब यह जो सडक़ है मात्र 4-5 माह पूर्व ही बनी है। इतनी ताजी सड़क और हालत इतनी बदतर देखकर जांच अधिकारी अचरज करने लगे।
इसी दौरान भारी भीड़ एकत्र हो गई, नगर पालिका का अमला कह रहा था कि सड़क हमारे कार्यकाल में नहीं बनी, इसी दौरान जनता ने नगर पालिका के उस इंजीनियर अधिकारी को पहचान लिया जिसने खड़े होकर सड़क बनवाई थी। जनता ने कहा कि साहब यह जो व्यक्ति यही आज से 4-5 माह पूर्व जब सड़क बन रही थी तब आता था और सड़क का काम देखता था। बस फिर क्या था भोपाल से आये संभागीय अधिकारी श्री श्रीवास्तव अच्छे खासे नाराज हो गये। उन्होने यह भी समझ लिया कि नगर पालिका के अधिकारी कर्मचारी बात छुपा भी रहे हैं और गड़बड़ करके बचना भी चाहते हैं। उन्होने यहीं इस अधिकारी को डांटा और फिर वाहन का काफिला आगे बढ़ गया।
वार्ड 17 में जब शिकायत निरीक्षण दल पहुँचा तो वहाँ कागजों पर उल्लेखित रामकली बाई के घर से लेकर रितेश के घर तक की सडक़ को देखा गया। निरीक्षण दल रामकली बाई के घर के सामने गया तो वहाँ न कोई सड़क थी न सड़क के अवशेष दिख रहे थे। यह वार्ड पार्षद दिनेश भैरवे का है। आखिर कागजों पर सड़क बन गई और हकीकत में कैसे गायब हो गई इसे देखकर अधिकारी हतप्रभ थे।
आखिर सडक़ जमीन में चली गई थी या आसमान में उड़ गई थी ? यह प्रश् उठ रहा था और जांच दल यहाँ से भी कार्य देखकर चला गया।
इस संबंध में फुरसत ने वार्ड पार्षद दिनेश भैरवे से बातचीत की तो उन्होने बताया कि साहब सड़क तो वास्तव में स्वीकृत हुई थी और कागजों पर बनी भी है लेकिन हकीकत में वो वहाँ नहीं बनी जहाँ लिखी गई है।
हुआ यह था कि मेरे वार्ड में दो सड़क स्वीकृत हुई थी एक शीतला माता से लेकर पूरन माली के घर तक और दूसरी रामकली बाई के घर से लेकर रितेश के घर तक रामकली बाई के घर के सामने से बनने वाली सड़क छोटी-सी थी और पहले शीतला माता से लेकर पूरन माली वाली सड़क बनना शुरु हो गई जब सड़क बनी तो जनता ने मांग कर दी कि इस सड़क और आगे तक बनाया जाये, जनता जिद करने लगी, वह चाहती थी कि सड़क हरिजन मोहल्ले तक बन जाये, मजबूर होकर मैने भी एक आवेदन नगर पालिका में दिया, पार्षद ने कहा कि खुद मैने प्रयास किया की सड़क आगे तक बन जाये, तब मुझसे लिखित में लिया गया और उसके बाद जो सडक़ रामकली बाई से लेकर रितेश के घर तक बनना थी वह नहीं बनी उसके स्थान यह शीतला माता वाली सड़क ही आगे बना दी थी। यह कोई भ्रष्टाचार नहीं है यह सामान्य प्रक्रिया है।
जबकि प्रश् उठता है ? कि पूर्व में जो दो सड़क बनना थी उनके स्थान पर एक ही सड़क को बढ़ा बना दिया गया। जबकि पूर्व में दोनो सड़कें मात्र तीन-सवा तीन लाख में बन जाती है बाद के निर्णय के कारण एक ही सडक़ 6 लाख रुपये की विशाल राशि से भी अधिक में बनी है। तो रुपयों का यह अंतर कैसे समयोजित किया गया ? यह जांच का विषय हो सकता है।
इसी मोहल्ले में एक कुंआ भी चर्चा का विषय बना हुआ था। जो कुंआ क्षतिग्रस्त अवस्था में पड़ा है । पिछले दिनों विधानसभा में विधायक उमाशंकर गुप्ता द्वारा एक प्रश् सीहोर नगर पालिका के वार्ड 17 में स्थित कुएं को लेकर उठाया गया था प्रश् क्रमांक 176 के तहत पूछा गया था कि एक कुंआ जो यहाँ बना है क्या वह नगर पालिका ने बनाया है और कितनी लागत आई है, इसके जबाव में नगर पालिका ने कहा था कि यह कुंआ जनभागीदारी से बना है। इसका नगर पालिका से लेन देन नहीं है। जबकि दो माह पूर्व ही इस कु एं को लेकर 50 हजार रुपये की राशि का भुगतान एक राजेश नामक ठेकेदार को दिया गया है। तो फिर जो कुंआ नगर पालिका जनभागीदारी का बता रही थी उसका भुगतान कैसे कर दिया गया ? इसकी भी जांच दल द्वारा बारीकी से की जा रही है।
नगर पालिका द्वारा अन्य वार्डों भी जो कार्य कराये गये हैं और कहाँ-कहाँ सड़कों के नीचे से गड्डे निकले हैं। एक वार्ड में तो विशेष रुप से सड़क के दौरान बनी एक नाली को छोटी पुलिया बताकर 40-50 हजार रुपये का बिल बना लिया गया था। ऐसी ही अन्य जानकारियाँ भी सामने आई हैं? आगामी अंकों अन्य वार्डों जो गड़ बड़ी सामने आई है उसका भी प्रकाशन किया जायेगा।

सीहोर नपा में भेदभाव पूर्ण काम हो रहा यह उचित नहीं

सीहोर 21 जून (नि.सं.)। सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं का आम लोगों को लाभ दिलाने और जन समस्याओं का मौके पर निराकरण करने के उद्देश्य से शनिवार 21 जून को जिला मुख्यालय पर वृहद लोक कल्याण शिविर आयोजित किया गया। प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री तथा सीहोर जिला प्रभारी मंत्री रूस्तम सिंह के मुख्य आतिथ्य एवं वन, राजस्व, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा पुनर्वास राज्य मंत्री नारायण सिंह कुशवाह की अध्यक्षता में आयोजित लोक कल्याण शिविर में जन समस्याओं का निराकरण किया गया।
लोक कल्याण शिविर को संबोधित करते हुए जिला प्रभारी मंत्री रूस्तम सिंह ने कहा कि प्रदेश का समग्र विकास और जनता की भलाई सरकार का लक्ष्य है और इस दिशा में सरकार पूरी संजीदगी से कार्य कर रही है। रु स्तम सिंह ने कहा कि मुझे पता चला है कि सीहोर नगर पालिका में भेदभाव पूर्ण कार्य हो रहे हैं, अगर यहाँ कांग्रेस के अध्यक्ष बन गये हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि भाजपा के वार्ड में विकास ही नहीं करायेंगे। विकास के मामले में राजनीति नहीं की जाना चाहिये। हमारी भी प्रदेश में सरकार है, लेकिन मेरा दावा है कि पूरे प्रदेश के किसी भी गांव में हम विकास कराते समय यह नहीं पूछते कि यहाँ का सरपंच भाजपाई या कांग्रेसी। यह ओछी मानसिकता की बात है, यह सिर्फ चुनाव के समय देखा जाता है, निर्वाचन के बाद इससे ऊपर उठकर काम करना चाहिये। मंत्री श्री सिंह ने कहा सीहोर नगर पालिका की शिकायतें मिलने के बाद हमने जांच कराने के लिये भोपाल के अधिकारियों को निर्देश दे दिये हैं, शीघ्र ही जांच हो जायेगी।
प्रभारी मंत्री ने आज अपने संबोधन में यह भी कहा कि सीहोर में ही प्राचीन हनुमान मंदिर मठ मंदिर है, जहाँ तक सड़क नहीं बनाई गई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग वहाँ दर्शन करने जाते हैं, मंत्री पेट्रोल पंप से लेकर मठ वाले हनुमान मंदिर तक क्यों सड़क नहीं बन रही हैं इसके लिये मैं बात करुंगा।
शिविर को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि सरकार की जनोपयोगी योजनाओं का प्रदेश वासियों को लाभ मिल रहा है।
शिविर में अपने विचार व्यक्त करते हुए विधायक रमेश सक्सेना ने कहा कि सरकार की बेहतर नीतियों का ही परिणाम है कि आज प्रदेश वासियों को सरकार की अभिनव योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
शिविर को प्रभारी कलेक्टर अरूण कुमार तोमर ने भी संबोधित कर शिविर आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। लोक कल्याण शिविर में 108 जन समस्याओं के आवेदनों का पंजीयन किया जिनमें से 65 समस्याओं का मौके पर ही निराकरण किया गया। शेष 43 आवेदनों के निराकरण के लिए एक सप्ताह की समय सीमा निर्धारित की गई।
शिविर में राजस्व विभाग से संबंधित 39, जनपद के 22, नगर पालिका के 10, विद्युत के 7, पुलिस एवं पी.एच.ई. के 4 - 4, रोजगार एवं महिला बाल विकास से संबंधित 3 - 3, जिला पंचायत, कलेक्ट्रेट, सहकारिता, स्कूल शिक्षा और लीड बैंक से संबंधित 2 - 2 तथा वन, खादी ग्रामोद्योग, प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक, परिवहन एवं कृषि महाविद्यालय से संबंधित एक - एक आवेदन का पंजीयन किया गया। शिविर में राजस्व की 21, जिला पंचायत, पीएचई एवं स्कूल शिक्षा की 2 - 2 , विद्युत की 7, महिला बाल विकास की 3, नगर पालिका की 7 और जनपद पंचायत की 17, खादी ग्रामोद्योग, प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक, सहकारिता और पंचायत एवं सामाजिक न्याय विभाग से संबंधित एक-एक कुल 65 समस्याओं का मौके पर ही निराकरण किया गया।
तरह के चैक बांटे
लोक कल्याण शिविर में प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री तथा सीहोर जिला प्रभारी मंत्री रूस्तम सिंह एवं वन, राजस्व, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा पुनर्वास राज्य मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने सीहोर, आष्टा एवं इछावर जनपद क्षेत्र की 90 बालिकाओ को लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत 6 - 6 हजार रूपये के बचत पत्र प्रदान किए । उन्होंने 30 हितग्राहियों को मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना और 15 हितग्राहियों को राष्ट्रीय परिवार सहायता के चैक प्रदान किए। मंत्री द्वय ने 7 किसानों को स्प्रेयर पंप, 6 किसानों को अरहर और 3 किसानों को तिल बीज के मिनीकिट का भी वितरण किया। शिविर में भाजपा जिला अध्यक्ष ललित नागौरी, किसान मोर्चा के अध्यक्ष मायाराम गौर, नगर पालिका उपाध्यक्ष अशोक सिसौदिया, बालकृष्ण नामदेव, राजकुमार गुप्ता, रमाकांत समाधिया, श्री रघुवंशी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, पुलिस अधीक्षक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, एडीएम श्रीमती भावना वालिम्बे, सीहोर एसडीएम चन्द्रमोहन मिश्रा, आष्टा एसडीएम. जी.व्ही.रश्मि सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। हालांकि आज का शिविर जिला स्तरीय था लेकिन इसमें मात्र 108 आवेदन ही आये जिससे इसके प्रचार-प्रसार में की गई लापरवाही उजागर होती है।

लोक कल्याण शिविर बना भाजपा कल्याण शिविर मंच पर भाजपा के नेताओं का रहा बोलवाला

सीहोर 21 जून (नि.सं.)। आज जिला मुख्यालय पर जिला स्तरीय विशेष लोक कल्याण शिविर का आयोजन हुआ यह आयोजन लोक कल्याण कम भाजपा कल्याण शिविर यादा प्रतीत हो रहा था। जहाँ छोटे-बड़े भाजपा नेताओं मंच पर पूरे समय वर्चस्व, उनके भाषण और भाव भंगिमाएं जनता देखती रही और कथित लोक कल्याण शिविर सम्पन्न हो गया।
विशेष लोक कल्याण के नाम से जिला पंचायत ने जिला स्तरीय शिविर का आज आयोजन किया था जिसमें प्रभारी मंत्री रुस्तम सिंह पूर्व पुलिस अधिकारी आये थे। यहाँ मंच पर मंत्री जी के साथ पूरे समय प्रशासनिक अधिकारियों को उपस्थित रहना था, अपर कलेक्टर अरुण तोमर हों या फिर पुलिस अधीक्षक डॉ राजेन्द्र प्रसाद यह दोनो तो मंच से नीचे रहे और मंच पर पूरे समय भाजपा के नेता जमे रहे। सारी कुर्सियों पर भाजपा के नेता ऐसे पसरे बैठे थे कि मानों कोई भाजपा क ी आम सभा हो रही हो और वह भाषण देने के लिये आये हैं, मंत्री और विधायक जी तो जनता के गले उतर ही रहे थे लेकिन इनके अलावा भाजपा के ढेर सारे नेताओं को मंच पर से संचालक ने नाम ले-लेकर बुलाया और मंच पर बैठाया। ऐसा लग रहा था कि मानो यह प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं बल्कि कोई भाजपा का कार्यकर्ता सम्मेलन हो। जिस प्रकार मंच से भाजपा नेताओं और मंत्रियों की तारीफों के कसीदें गढ़े जा रहे थे और, उन्हे राष्ट्रीय स्तर तक के ख्यातिलब्ध नेता बताया जा रहा था जनता इन बोधवाक्यों से घबरा रही थी लेकिन क्या करें मजबूर थी अपनी समस्या हल कराना चाहती थी इसलिये चुपचाप बैठी थी। जबकि बाल विहार मैदान के पास से आज जो जनता निकली वह इस कार्यक्रम को देखकर यही समझती रही कि शायद यह भाजपा पार्टी का कोई कार्यक्रम है....।

मुआवजा कम बनाने पर पटवारी निलंबित

आष्टा 21 जून (नि.प्र.)। आष्टा क्षेत्र में पाले से हुए नुकसान के सर्वे को लेकर सैकड़ों शिकायतें जांच का इंतजार कर रही है कई शिकायतों को प्रशासन ने गंभीरता से लिया ओर जांच कराई जिसमें कई पटवारियों पर गाज गिरी है ऐसी ही एक शिकायत पटवारी हल्का नम्बर 6 जावर क्षेत्र के ग्राम टिगरिया के कृषकों ने शिकायत की थी कि उसके ढाई हेक्टेयर में चना नष्ट हुआ जिसका उसे पटवारी ने गलत सर्वे कर मात्र 16 सौ रुपये मुआवजा बनाया जो काफी कम है एवं शासन ने जो माप दंड तय किये उससे काफी कम है। अत: जांच करायें। अतिरिक्त तहसीलदार श्री शर्मा जावर ने उक्त शिकायत की जांच की तो जांच में शिकायत सही पाई गई नियमानुसार उक्त किसान का मुआवजा लगभग 5 से 6 हजार बनना था जांच के बाद श्री शर्मा ने प्रतिवेदन एसडीएम आष्टा को सौंपा।
एसडीएम कार्यालय से फुरसत को बताया की दोषी पटवारी गुलाब सिंह को निलंबित कर दिया है। ऐसी अनेकों शिकायतें तहसील आष्टा में जांच का इंतजार कर रही हैं।

मीसा बंदियों को प्रशस्ति पत्र दिये जायेंगे

सीहोर 21 जून (नि.सं.)। म.प्र. के मीसा बंदी लोक रक्षकगणों के कल्याण हेतु म.प्र. शासन ने अपनी विगत मंत्री परिषद की बैठक में कानून स्वीकृत कर जो सराहनीय निर्णय लिया है, वे प्रशंसा के पात्र हैं।
मुख्यमंत्री ने बजट सत्र में विधानसभा में जो इस विषय की घोषणा की थी उसका शीघ्र क्रियान्वयन किया जाना मुख्यमंत्री जी की जागरुकता और कल्याणकारी नीति का एक विशेष उदाहरण है। इस निर्णय से पूरे प्रदेश के यातनामुक्त दुख मुसीबत के मारे आदि लोगों को उनकी धीर गंभीर और साहसी मीसा बंदी जमा के साहस को बढ़ाते हुए उनके त्याग, तपस्या और बलिदान का सही मूल्यांकन किया है इस विषय में सीहोर जिला मीसा बंदी शिवराज सिंह चौहान, वित्त मंत्री राघव जी, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अजय विश्ोई, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर तथा कार्यालय प्रभारी तपन भौमिक का हृदय से आभार व्यक्त किया है संघ के जिलाध्यक्ष मथुरा प्रसाद सोनी ने बताया कि आगामी 25 जून को आपातकाल की वर्षगांठ पर मीसा बंद बंधुओं को सम्मान निधि से उपकारित कर उन्हे प्रशस्ती पत्र भी भेंट किये जायेंगे। मीसा बंदी बंधुओ को इसके लिये पृथक से सूचना पत्र भेजे जायेंगे। आभार व्यक्त करने वालों में बालकृष्ण नामदेव, सुदर्शन जी महाजन, मथुरा प्रसाद सोनी, रमेश राठौर, रमेश मिश्रा, मोतीलाल श्यामपुर, लक्ष्मण सिंह सिराड़ी, घासीराम मैना, हरिदयाल सक्सेना, रामचरण गुंदी आदि बंधु शामिल हैं।

स्वास्थ्य विभाग के पांडाल में छाये रहे भ्रष्टाचार के मामले में उलझे पूर्व मंत्री अजय विश्‍नोई

सीहोर 21 जून (नि.सं.)। आज लोक कल्याण शिविर में लगे स्वास्थ्य विभाग के पांडाल में जो प्रचार-प्रसार सामग्री लगाई थी उसमें पूर्व मंत्री अजय विश्‍नोई का चित्र ही चमक रहा था जबकि वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री डॉ. गौरी शंकर शेजवार का एक भी चित्र नहीं लगाया गया था। अब या तो यह समझा जाये कि भ्रष्टाचार के मामले में उलझे अजय विश्‍नोई का दामन अभी तक स्वास्थ्य विभाग से छूटा नहीं है...अथवा सीहोर का स्वास्थ्य विभाग अभी भी उन्हे ही अपना मंत्री मान रहा है। वैसे सीहोर में स्वास्थ्य विभाग की बारीकी से जांच हो जाये तो संभवत: यहाँ भी एक आध अजय विश्‍नोई का रिश्तेदार सामने आ सकता है। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग प्रचार-प्रसार करना चाहता था या भाजपा शासन के भ्रष्टाचार में लिप्त मंत्रियों का स्मरण दिला रहा था यह बात समझ से परे है।

जिले का खनिज रेत आदि का रुपया अब हमारे जिले में रहेगा

सीहोर 21 जून (नि.सं.)। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में 22 जून रविवार को दोपहर 1 बजे गोण खनिज (रेत रायल्टी) के तहत प्राप्त राशि के वितरण संबंधी एक बैठक सीहोर जिला प्रभारी मंत्री रूस्तम सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई है। बैठक में गौण खनिज के तहत प्राप्त राशि ग्राम जनपद पंचायताें को वितरण किए जाने के संबंध में चर्चा की जाएगी।
गौरतलब है कि म.प्र. शासन के राजपत्र (असाधारण) 13 जनवरी,2005 द्वारा गौण खनिज के तहत प्राप्त राशि के ग्राम जनपद पंचायतों में वितरण किए जाने के लिए जिला प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में जिला वितरण समिति गठित की गई है। समिति में सांसद, विधान सभा सदस्यगण एवं जिला पंचायत अध्यक्ष को सदस्य नामांकित किया गया है।

सड़क हादसें मे एक की घायल

आष्टा 21 जून (नि.सं.)। आष्टा थाना क्षेत्र के राजमार्ग स्थित सोया चौपाल के समीप टेंकर की टक्कर से इण्डिका सवार एक युवक घायल हो गया। आष्टा पुलिस ने टेंकर चालक के विरूद्व प्रकरण दर्ज कर लिया है। जानकारी के अनुसार इंडिका क्रमांक एमपी-09 -सीसी- 4551 को लेकर गुरूवार की शाम चालक प्रमोद शुक्ला कन्नौद से आष्टा आ रहा था तभी शाम को सौया चौपाल के समीप टेंकर क्रमांक टक्कर एमपी 04 के 5153 के चालक ने लापरवाही पूर्वक वाहन चलाकर इंडिका में टक्कर मार दी। परिणाम स्वरूप वाहन मे सवार सुरेश परिहार को साधारण चोंटे आई।

गिट्टी के कारखाने से गांव पर बरसते हैं पत्थर

आष्टा 21 जून (नि.प्र.)। ग्राम कांकरियाखेड़ी के समीप चेतक इंटरप्राइजेस लिमिटेड गिट्टी का बड़ा कारखाना स्थित है, जिससे बड़े पैमाने पर विस्फोट के द्वारा पत्थर निकाले जाते हैं। इससे एक वर्ष में लगभग 3 बार ग्राम कांकरियाखेड़ी के घरों में बड़े-बड़े पत्थर गिर गये जिससे मकानों को भारी नुकसान हुआ। भारी विस्फोट करने से 1 किलो मीटर की दूरी तक की भूमि में कम्पन होता है जिससे घरों की दीवारें हिलती हैं और कवेलू गिरते हैं।
जिससे मकानों में रहना, सोना, बैठना बड़ा मुश्किल हो रहा है व 17 जून को रात्रि 9 से 10 बजे के लगभग गंगाराम के मकान के सामने प्लांट के कुछ कर्मचारियों ने घर घुसकर यादती का प्रयास किया, और गंगाराम व उसके बेटे के साथ मारपीट की। जिससे उनको गंभीर चोंटे आई है। इसकी रिपोर्ट थाना जावर में दर्ज कराई गई एवं एसडीओपी को भी इस घटना से अवगत कराया गया है। आये दिन प्लांट के कर्मचारी इसी तरह की गुंडागिर्दी करते रहते हैं इस प्लांट से कांकरियाखेड़ी, झिलेला, मूंदीखेड़ी, आमला मजू जोड़ के मकानों की दीवारों में दरारे आने की बात भी ग्रामीणों ने कही है। प्रजातांत्रिक समाधान पार्टी के नगर अध्यक्ष राजेश चौहान का कहना है कि प्लांट के आसपास 1 किलो मीटर की सीमा के निवासियों के मकानों व उनकी मवेशियों को विस्फोट के समय खतरा बना रहता है एवं इससे उठने वाले धुएं व राख से आसपास के पेड़ पौधे और खेतों की फसलों को भी नुकसान होता है। एसडीएम को एक ज्ञापन सौंपकर प्लांट बंद कराने की मांग भी की गई है।

अंतत: 140 से अधिक मजदूरों का कब्जा रहेगा बरकरार, विधायक को दिया धन्यवाद

सीहोर 21 जून (नि.सं.)। शकर कारखाना प्रबंधन ने पिछले कुछ दिनों से कारखाने की जमीन पर जिन लोगों ने नाजायज कब्जा कर रखा है उन्हे हटाने का कार्यक्रम शुरु किया था। कारखाने की विशाल जमीन पर न सिर्फ कारखाने के ही श्रमिकों ने कब्जा कर लिया है बल्कि कई राजनेताओं, भूमाफियाओं और दादा किस्म के लोगों का भी विशाल भू-भाग पर कब्जा है।
लम्बे समय से शकर कारखाना बंद हो जाने के बाद यहाँ के श्रमिकों ने धीरे-धीरे कारखाने की ही जमीन पर खेती कर अपना जीवन-यापन करना शुरु कर दिया है, लेकिन कारखाना प्रबंधन पिछले कुछ दिनों से इन्हे हटाने की कार्यवाही कर रहा था। इसकी शिकायत जब श्रमिकों ने विधायक रमेश सक्सेना से की तो विधायक महोदय के लगातार प्रयास से यह कब्जा हटाने की प्रक्रिया रुक गई है। शुगर फेक्ट्री मजदूर यूनियन ने कहा है कि विधायक के प्रयास से 140 मजदूरों के घर के चूल्हे बुझने से बचे गये, मजदूरों को परिवार पालन पोषण का हक मिल गया। मजदूरों ने विधायक व जिलाधीश एवं एसडीएम व पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार को दुआएं दी हैं और धन्यवाद दिया है। मजदूरों ने अपने अधिकारों के दस्तावेजों की समस्त सामग्री सभी यथा संभव विभागों को लिखित में दे दी है एवं गुहार की है कि शीघ्र न्यायालय के आदेशों का पालन हो जिससे सभी मजदूरों को उनका हक मिल सके।

115 आवासों के लिए 25 लाख की राशि जारी

सीहोर 21 जून (नि.सं.)। जिले में वर्ष 2006-07 में अतिवृष्टिबाढ से क्षतिग्रस्त हुए 115 आवासों के निर्माण के लिए 25 लाख रूपयों की राशि जिला पंचायत द्वारा जारी कर भुगतान की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस सिलसिले में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अरूण कुमार तोमर द्वारा आदेश जारी कर समस्त जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।
जारी निर्देशों के मुताबिक ग्राम पंचायतों को प्रदाय राशि प्राप्त होने के 7 दिवस के भीतर संबंधित हितग्राही को चैक द्वारा प्रथम किश्त के रूप में नवीन आवास के लिए बारह हजार और उन्नयन आवास के लिए 6250 रूपये प्रदाय कर आवास 45 दिवस में पूर्ण कराना सुनिश्चित किया जाए। सभी आवासों में शौचालय एवं चूल्हों का निर्माण अनिवार्यत: किया जाए। राशि की वित्तीय एवं भौतिक प्रगति शासन द्वारा निर्धारित प्रारूप में हर माह 5 प्रतिशत आवास के नाम से प्रेषित की जाए। आवास निर्माण के पूर्व तथा पूर्ण आवास का फोटोग्राफ जनपद एवं संबंधित ग्राम पंचायत में सुरक्षित रखा जावे।
वर्ष 2006-07 में बाढअतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त आवासों के हितग्राहियों को यदि इंदिरा आवासमुख्यमंत्री आवास योजना से लाभांवित किया गया है तो उन्हें यह राशि वितरित नहीं की जाये। क्षतिग्रस्त आवास से संबंधित सभी दस्तावेज एवं हितग्राही की पात्रता आदि के बारे में शासन द्वारा जारी नियम निर्देशों का कडाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। जारी भुगतान स्वीकृति आदेश के मुताबिक सीहोर विकासखंड में 6 नवीन आवासों के लिए डेढ़ लाख एवं 10 उन्नयन आवास के लिए एक लाख 25 हजार रूपये, आष्टा विकासखंड में 8 नवीन आवासों के लिए 2 लाख एवं 10 उन्नयन आवास के लिए एक लाख 25 हजार रूपये, बुधनी विकासखंड में 10 नवीन आवासों के लिए दो लाख 50 हजार एवं 7 उन्नयन आवास के लिए 87 हजार 500 रूपये, इछावर विकासखंड में 33 नवीन आवासों के लिए 8 लाख 25 हजार एवं नसरूगागंज विकासखंड में 28 नवीन आवासों के लिए 7 लाख एवं 3 उन्नयन आवास के लिए 37 हजार 500 रूपये की राशि जारी कर हितग्राहियों को उपलब्ध कराई गई है।

Saturday, June 21, 2008

नगर पालिका के कारनामों की जांच जारी सीमेंट सड़कें खोदी तो नीचे डामर निकला (फुरसत की खास खबर)

सीहोर 20 जून (विशेष सं.)। नगर पालिका में हुए कार्यों में कितना भ्रष्टाचार हुआ है इसकी जांच करने भोपाल से आये स्थानीय नगरीय निकाय के अधीक्षण यंत्री जी.के.श्रीवास्तव व उनकी 8 सदस्यीय टीम ने जब पिछले दिनों सीहोर नगर का दौरा किया तो वह अचरज से भर गये। स्वयं श्रीवास्तव ने सडक़ों को देखते ही कह दिया कि यह एक दम घटिया बनी है, कुछ जगह निर्माण कार्य के फर्जी बिल देखकर वह नाराज नजर आये तो कुछ गुणवत्ता का अति निम् देखकर आश्चर्य में डूबे दिखे। नगर पालिका सीहोर के सारे कामों के वहीखाते और आवश्यक कागजात तो श्रीवास्तव अपने साथ जप्त करके ले ही गये हैं बल्कि चार सदस्यों को यहाँ कागजों की जांच पड़ताल करने के लिय भी छोड़ गये।
इस घटना के साथ ही जिन 13 पार्षदों की शिकायत पर जांच शुरु हुई है वह खुश नजर आ रहे हैं लेकिन उन ठेकेदारों की हवाईयाँ उड़ रही हैं जिन्होने लम्बे घोटाले किये हैं। जांच दल ने क्या-क्या किया इस लगातार सिलसिलेवार क्रम फुरसत के पाठकों तक पहुँचेगा ताकि जनता जनार्दन को भी पता चले कि जो निर्माण हुए हैं वो कितने घटिया और निम्न स्तर के हुए हैं। जांच दल की पहले दिन कार्यवाही पर डालिये एक नजर.............।
वो बुरी तरह घबरा गये,
कैमरा चालू रहा
गत रविवार 15 जून को सुबह से ही भोपाल से अधीक्षण यंत्री स्थानीय नगरीय निकाय जी.के.श्रीवास्तव अपनी 8 सदस्यीय जांच दल के साथ सीहोर नगर पालिका में आ गये थे। इनके आने की गूंज इतनी तेज उठी थी कि नगर पालिका के सारे कर्मचारियों-अधिकारियों और इससे जुड़े ठेकेदारों व संबंधित पार्षदों के हाथ-पाँव फूल गये थे। जब श्री श्रीवास्तव ने यहाँ उन सारे 13 पार्षदों को बुलवाया जिन्होने शिकायत की थी तो पार्षद भी अपने ताम-झाम के साथ पहुँचे। पार्षदों के साथ एक कैमरा वाला भी मौजूद था ताकि कल को जांच में आये तथ्य और अन्य बातें सारी गायब कर दी जायें तो कैमरे में रिकार्ड मौजूद रहे। जांच दल अधिकारी श्री श्रीवास्तव ने यहाँ सारे फाईलें पार्षदों के सामने ही बुलवाई उन्हे थोड़ी देर देखा और अपने अधिनस्थों से उसकी जांच करने को कहा। इसके बाद पार्षदों से पूछा गया कि जिन सड़कों व नलकूपों की शिकायत आपने की है उनकी जांच के स्थान आप दिखा दें ताकि वहाँ जांच की जा सके।
वो काम देखने गये,
यह फाईल टटोलते रहे
इसके बाद जांच दल और पार्षदों का दल एक साथ नगर में विभिन्न स्थानों पर पहुँच गया और इधर जांच दल के 4 सदस्यों को नगर पालिका में अन्य महत्वपूर्ण फाईलों को देखने और संग्रहित करके भोपाल ले चलने के लिये छोड़ दिया गया। इस दिन विशेष रुप से परिषद की बैठक का रजिस्टर और खास कर अध्यक्षीय समिति जिनमें अध्यक्ष और उनके खास 5 पार्षद शामिल रहकर तरह-तरह के निर्णय कर लेते हैं और फिर काम शुरु हो जाता है उसका रजिस्टर भी जप्त कर लिया गया।
अध्यक्षी समिति का रजिस्टर भी ले गये
सूत्रों का कहना है कि अध्यक्षीय समिति जितने निर्णय ले सकती है उसकी अपेक्षा बहुत अधिक निर्णय लिये गये हैं जो नियम में नहीं आता है। विषय के अनुसार नये विषय जोड़े जाते हैं लेकिन यादा ही नये विषय जोड़ लिये गये हैं और काम हो गये हैं इसकी भी जांच की जायेगी।
सड़क देखते ही बोले इसमें जांच
करने लायक बचा क्या है?
उधर जांच दल अधिकारी श्री जी.के.श्रीवास्तव, ए.जी.खान के नेतृत्व में जब सबसे पहले वार्ड 11 पार्षद मीना सतीश दरोठिया के यहाँ सुदामा नगर पहुँचा और वहाँ बनी एक गली के सीमेंटीकरण को देखा तो अचरज से देखता रहा।
जरा-सी गली का निर्माण 1 लाख 60 हजार रुपये के लगभग में होना दर्शाया गया था जिसमें सीमेंट के नीचे बैस डला ही नहीं था सीधे मिट्टी के ऊपर सड़क बना दी गई थी। और जब श्रीवास्तव ने एक कोने पर हाथ लगाया तो सीमेंट की बनी सड़क का कुछ अंश हाथ में ही आ गया। मोटाई बहुत कम थी। इस दौरान यहाँ जनता की भारी भीड़ एकत्र हो गई और वह लगातार कहती रही कि साहब यह सडक़ बहुत खराब बनवाई गई है...। जनता आक्रोश स्पष्ट दिख रहा था।
इस सड़क की जांच क्या करें? पार्षद बोला किसी ने सुनी नहीं
नगर पालिका द्वारा हुए घटिया निर्माण कार्यो की पोल खोलते हुए जांच का यह दल जब यहाँ से सीधे वार्ड 21 हाउसिंग बोर्ड पं.दीनदयाल नगर पहुँचा तो वहाँ सड़क पर उतरने के बाद जांच अधिकारी श्री श्रीवास्तव के मुँह से जो पहले शब्द निकले वह यह थे कि इस सड़क की क्या जांच करें ? सब स्पष्ट नजर आ रहा है। यहाँ वार्ड पार्षद मनोज गुजराती भी आये उन्होने भी जांच अधिकारी से यही कहा कि साहब जब सड़क बन रही थी तब मुझे भी लग रहा था कि खराब बन रही है, मैने ठेकेदार व इंजीनियर से भी कहा था सबसे बोला था लेकिन साहब किसी ने नहीं सुनी। पार्षद ने यह भी कहा कि मैने 4-5 बार शिकायत भी की कुछ मौखिक तो कुछ लिखित में लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई जूं तक नहीं रेंगी। पार्षद की बात गंभीरता से सुनते हुए अधिकारी ने उन्हे आश्वास्त किया की शीघ्र ही जांच के बाद सारी बातें सामने आ जायेंगी। यहाँ निरीक्षण में ही सड़क की गिट्टी उखड़ती देखी गई।
यहाँ घटा रोचक घटनाक्रम
जांच अधिकारी श्री श्रीवास्तव इसके बाद जब वार्ड 17 में जा रहे थे तो वार्ड 15 में प्रेम पहलवान के घर के सामने अचानक उन्होने वाहन रोका। यहाँ बड़ा ही रोचक घटनाक्रम घटा। जनता और अधिकारियों के बीच जो बातचीत हुई और फिर जांच अधिकारी ने क्या निर्णय सुनाया इस पर विस्तार पूर्वक खबर कल प्रकाशित की जायेगी।
और यहाँ सड़क ही गायब हो गई
यहाँ से आगे वार्ड 17 में जब जांच दल गया तो सारे के सारे जांच अधिकारी हक्के-बक्के रह गये ? यह क्या हुआ ? वह जिस सड़क को ढूंढने गये थे वो उन्हे मिल नहीं पा रही थी ? जबकि फाईलों में जो जगह दर्शाई गई थी उसी जगह वह खड़े हुए थे ? आखिर सड़क का क्या है राज और सड़क कहा चली गई ? क्या जमीन खा गई या आसमान में समा गई ? वो बनी तो थी लेकिन गायब कैसे हो गई ? वार्ड पार्षद का क्या है कहना इस संबंध में भी कल जानकारी प्रकाशित की जायेगी। वार्ड 17 में हुए आचरणों को देखकर तो जांच अधिकारी लगभग झल्लाने की स्थिति में आ गये थे, वह पहले आश्चर्य मुद्रा में थे लेकिन बाद में नाराजगी की स्थिति में आ गये थे, वह दुखी भी थे कि गजब के काम हुए हैं। इसके बाद वह काहिरी गये जहाँ उन्होने हाली नसीम के खेत में हुए नगर पालिका के बोर और काहिरी का काम देखा और वह वापस आ गये। जांच अधिकारी श्रीवास्तव ने प्रारंभिक तौर पर यह निरीक्षण किया था और इसके बाद उन्होने पाया कि शिकायत में सत्यता है और 50 प्रतिशत भ्रष्ट आचरण सामने आया है। उन्होने दूसरे ही दिन से लगातार 8-10 दिन तक सीहोर में समस्त सडक़ों, नलकूपों व अन्य कामों की जांच के लिये दल प्रभारी ए.जी.खान को बनाते हुए कहा कि वह कल से जांच करें, पक्के सबूत एकत्र करें, हर जगह पंचनामा बनवाये, जनता और शिकायत कर्ताओं के हस्ताक्षर करवायें। इसके बाद दूसरे दिन जब जांच दल ने उन्ही जगहों पर जाकर बारीकी से जांच शुरु की तो पूरी पोल सामने आ गई। जांच में क्या-क्या सामने आया है, कितने नलकूपों की खुदाई कम हुई है और किस सड़क के नीचे निकला डामर यह जानकारी आगामी अंकों में प्रकाशित हो सकेगी।