Wednesday, July 16, 2008
उपपंजीयक कार्यालय आग के हवाले अचल सम्पत्तियों के हजारों दस्तावेज स्वाहा
बमुश्किल सुबह अग्निशामक वाहन ने यहाँ आग पर काबू किया। 1880 से लेकर आज तक उर्दू से लेकर हिन्दी और अंग्रेजी तक सवा सौ साल के रिकार्ड आग के हवाले हो गये। इस बड़ी घटना से जहाँ विभाग स्तब्ध था वहीं नगर में चर्चाएं फैल गई कि अब सम्पत्ति के कहीं नकली कागजात तो लोग नहीं बना लेंगे ? इस आग से क्या-क्या नुकसान होगा इस संबंध में फुरसत ने जानकारी संग्रहित की है।
तहसील कार्यालय स्थित उपपंजीयक कार्यालय में देर रात संभवत: बिजली के तारों में हुए शार्ट सर्किट के कारण आग लग गई। जिस कमरे में आग लगी उसी में विशेष रुप से सारे महत्वपूर्ण दस्तावेजों का संग्रहण था। करीब 10 अलमारिया लोहे की तथा शेष लकड़ी थी। छोटे-से कमरे में सन् 1800 के जमाने के उर्दू के दस्तावेज भी थे और तब से ही आज तक के समस्त प्रमुख दस्तावेज यहाँ रखे गये थे। रात यहाँ लगी आग ने सबसे पहले एक कु छ फाईलों के बाद दरवाजे के पास रखी एक लकड़ी की अलमारी को चपेट मे लिया जो पूरी जलकर स्वाहा हो गई। इसके पास ही रखी दूसरी लकड़ी की अलमारी भी इसकी चपेट में आ गई। अन्य लोहे की अलमारियों के ऊपर ढेर सारे दस्तावेज रखे गये थे उनमें आग लग गई। सुबह करीब 5 बजे सबसे पहले यहाँ एक व्यक्ति दूर से धुंआ उठता हुआ देखा जिस पर उसने संबंधित चौकीदार भृत्य को सूचना दी। इसके बाद अगि्शामक वाहन ने आकर यहाँ आग बुझाई।
हाल ही में वरिष्ठ उप पंजीयक के पद पर आमद दे चुके यू.सी. बंसल ने इस संबंध में फुरसत को बताया कि हालांकि महत्वपूर्ण कागजातों का नुकसान तो हुआ लेकिन बहुत सी फाईले रजिस्टर कोने से जले हैं जिन्हे व्यवस्थित कर लिया जायेगा। साथ ही अभी कुछ समय लगेगा जिसमें यह पता लगा सकें कि कौन-कौन से कागजात जले हैं। बंसल के अनुसार यहाँ रखे दस्तावेज अचल सम्पत्तियों के रहते हैं। जिसमें जमीन संबंधी दस्तावेज सहित अन्य फाईलें भी रहती हैं। लेकिन किसी भी सम्पत्ति के मूल रिकार्ड सिर्फ यहीं रखे दस्तावेज के आधार पर तय नहीं किया जाता बल्कि रेवेन्यू में भी रिकार्ड होता है। उन्होने बताया कि कई बार न्यायालय में किसी विवाद के समय सिविल के मामलों में जब कभी कोई पुष्टि करने के लिये पंजीयक कार्यालय से रिकार्ड बुलाया जाता है तो संभवत: ऐसे कुछ मामलों में दिक्कत आ सकती है क्योंकि जो रिकार्ड जला है वह प्रस्तुत आवश्यकता पढ़ने पर नहीं किया जा सकेगा। कुछ लोगों सर्टीफाईड कापी चाहिये होती है वह भी यहीं से दी जाती है जो रिकार्ड जल गया है उसकी कापी अब उन्हे मिलने में मुश्किल आयेगी।
पहले से ही कह दिया था...
सूत्रों के अनुसार करीब 15 दिन पूर्व ही एक व्यक्ति ने यहाँ लगी घटिया विद्युत तारों के चलते हो रहे शार्ट सकिर् ट की जानकारी दी थी। उसने कहा था कि सर्किट से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है इसलिये यहाँ तार बदलवा दिये जायें। आज भोपाल से विशेष जांच दल भी यहाँ आया था।
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मीटर बदलने के कार्यों का निरीक्षण किया
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अभी भी बाहर जाते हैं क्षेत्र के लोग इलाज करवाने
इस अस्पताल के अन्तर्गत करीब 80 गांव आते हैं। संतोष लक्ष्कार का कहना है कि अस्पताल में स्टाप की कमी के अलावा यहाँ का भवन काफी पुराना है जो जर्जर हालत में है। दीवारों में दरारे पड़ गई हैं यहाँ पर ना तो महिला चिकित्सक है और ना ही कर्मचारी हैं।
ऐसी स्थिति में महिला मरीजों को यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है शासन ने जिले के अन्य अस्पतालों में जननी एक्सप्रेस वाहन उपलब्ध करवा दिये जिसका लाभ भी वहाँ की महिलाओं को मिलने लगा है लेकिन अस्पताल को अभी तक जननी एक्सप्रेस वाहन नहीं मिल पाया है।
इस कारण क्षेत्र की महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उधर अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अस्पताल में स्टाप बढ़ाने के लिये शासन से मांग की गई लेकिन अभी तक विशेषज्ञ डाक्टरों एवं स्टाप नर्स व अन्य रिक्त पद एवं एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं की गई नागरिकों ने अस्पताल में पर्याप्त स्टाप नया भवन बनाने, जननी एक्सप्रेस वाहन व एक एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की मांग शासन से की है।
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कीटनाशक खाद किताब भंडार, कपड़ा दुकानों पर भीड़ ही भीड़
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Tuesday, July 15, 2008
नपा कर्मचारियों की मॉग पूर्ण हो जाने पर हड़ताल समाप्त
कर्मचारियों की मांगे जिसमे प्रमुख रूप से कर्मचारियों की सुरक्षा महैया कराये जाना थी। हड़ताल के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष राकेश राय द्वारा उपस्थित होकर हड़ताली कर्मचारियों को दिये गये आश्वसन के बाद की कर्मचारियो की सुरक्षा निरन्तर उपलब्ध कराई जावेगी एवं नगर पालिका गेट पर सुरक्षा गार्ड रहेगें व भविष्य में पुलिस प्रशासन से भी पूर्ण सहयोग लिया जावेगा, इस आश्वासन का स्वागत किया एवं दिनांक 14 जुलाई से सभी कर्मचारी अपने कर्तव्य पर उपस्थित हो गये एवं हड़ताल समाप्ति की घोषणा की गई।
हड़ताल के दौरान पार्षदगणों के साथ कर्मचारी प्रमोद जोशी,नरेन्द्र राठौर, योगेश राठी, हरीश चन्द्र जोशी, आर.एन. पाण्डे,नरेन्द्र चौहान, आनंद वर्मा, रमेश राय, मनोहर राजपूत, कु.साधना नागेले, श्रीमति रजनी शर्मा, नारायण सिंह बाबू लाल वर्मा, रमेश यादव, संतोष चंद्रवंशी,कांन्ता प्रसाद मसरूर,चन्द्र किशोर शर्मा, कमोद, कमल, दिनेश व्यास, पुरूषोतम, संजय शुक्ला आभार कार्यालय के अन्य कर्मचारियों उपस्थित थे।
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ब्राह्मणों ने वनमंत्री के पुतले का फर्से से वध किया
भारत देश में तो ब्राह्मणों को पूज्यी माना गया है चाहे जन्म हो या मृत्यु ब्राह्मण के बिना सभी कार्य अधूरे हैं। उक्त मंत्री शाह की अपमान जनक टिप्पणी का विरोध करते हुए आज 14 जुलाई दोपहर 12 बजे सर्वब्राह्मण समाज धर्मशाला खजांची लाईन से एक जुलूस निकाला गया जिसमें वनमंत्री विजय शाह का पुतला बनाया गया जो नगर के प्रमुख मार्गों से नारेबाजी करता हुआ सीहोर टाकीज चौराहे दोपहर 2 बजे पहुँचा। जहाँ जमकर नारेबाजी हुई जय-जय ब्राह्मण, मंत्री जी होंश में आओ के नारे लगाये गये भगवान श्री परशुराम जी के फर्से से उक्त मंत्री के पुतले का वध कर पुतले का दहन किया गया। उक्त कार्यक्रम में समाज के नवयुवक शामिल हुए और अपनी एकता का परिचय दिया। उक्त आशय की जानकारी सर्वब्राह्मण समाज एवं सर्वब्राह्मण नवयुवक संघ ने दी। श्री सर्व ब्राह्मण समाज ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से ऐसे बड़बोले मंत्री के खिलाफ कार्यवाही की मांग करते हुए उन्हे मंत्री मंडल से निकालने की मांग की है। वनमंत्री द्वारा 3 दिवस में सार्वजनिक रुप से ब्राह्मण समाज से माफी नहीं मांगी तो मजबूर होकर ब्राह्मण समाज को पूरे प्रदेश में यह आंदोलन चलाना पड़ेगा।
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ऐसी होगी नव घोषित जावर तहसील
नवगठित जावर तहसील की जनसंख्या 1 लाख से अधिक होगी इसका क्षेत्रफल काफी फैला हुआ रहेगा। वहीं जावर तहसील में जहाँ लगभग 22 पटवारी हल्के शामिल रहेंगे वहीं 2 राजस्व निरीक्षक मंडल रहेंगे। वर्तमान में जावर जो की टप्पा है यहाँ पर लगभग 15 सरकारी कार्यालय, बैंक, स्कूल, थाना आदि सबकुछ है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा जावर को नई तहसील घोषित किये जाने के बाद मुख्यमंत्री जी की उक्त घोषणा को अमली जामा पहनाने में पूरा राजस्व विभाग जुटा हुआ है। खबर है कि स्थानीय अधिकारियों ने नई जावर तहसील के बारे में पूरी जानकारी एकत्रित कर उसको जिले को भेज दी है। यहाँ से यह भोपाल पहुँचेगी और उसके बाद सही रुप में जावर तहसील का स्वरुप ग्रहण करेगी।
स्मरण रहे अभी तक जावर जो की टप्पा था इस क्षेत्र के किसानों, नागरिकों, व्यापारियों आदि को राजस्व संबंधी कार्यों के लिये 30 से 40 किलो मीटर का लम्बा सफर तय कर आष्टा तहसील आना पड़ता था जो इस क्षेत्र के नागरिकों के लिये कष्टप्रद एवं खर्चीला कार्य तो था ही समय भी काफी बर्वाद होता था। अब जब जावर तहसील का स्वरुप ग्रहण कर लेगी तो यह सब परेशानी इस क्षेत्र के नागरिकों की दूर हो जायेगी। जावर तहसील के रुप में कब कार्य करने लगेगा इसके बारे में अभी कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं है लेकिन सभी को पूरी उम्मीद है कि शीघ्र जावर में जावर तहसील का बोर्ड लगा नजर आयेगा।
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परमाणु समझौता हुआ तो 3 रुपये यूनिट की बिजली 10 रुपये होगी
यदि समझौता होता है तो जो बिजली आज हमें 3 रुपये यूनिट में मिल रही है वह 10 रुपये यूनिट में मिलेगी सोचो आम जनता का क्या होगा ? सरकार ढाई लाख करोड़ रुपये परमाणु बिजली घर डालने पर लगा रही है जबकि हमारे देश में आगामी 200 साल तक का कोयला बिजली बनाने के लिये उपलब्ध है तो इतनी बड़ी राशि खर्च करने की क्या जरुरत है। श्री गुप्ता ने कहा कि जब 68 हजार करोड़ रुपये से देश के किसानों का कर्ज माफ हो सकता है तो सरकार इन ढाई लाख करोड़ रुपये की राशि को देश के 19 करोड़ शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार देने एवं बंद कारखानों को चालू करवाने में क्यों खर्च नहीं कर रही है। परमाणु समझौता यदि ये सरकार कर भी लेती है तो यह परमाणु बिजली 2020 में ही मिलेगी तो फिर करार का क्या मतलब साथियों परमाणु समझौता धोखा है देश बचा लो अभी भी मौका है। हमारा संघर्ष इस करार के खिजाफ और तेज होगा।
गौरतलब है कि पूर्व में भाजपा सरकार द्वारा एनरॉन कंपनी से बिजली समझौता हुआ था, वहीं एनरॉन कंपनी हमारे देश को अरबों रुपयों का नुकसान पहुँचाकर गायब हो गई है।
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डाक्टर्स डे पर महिला चिकित्सक के पति का सम्मान क्यों....
जब डाक्टर-र्ड पर डाक्टर्स के अलावा महिला चिकित्सक के पति का सम्मान होगा तो खबर तो चलेगी । उसी दिन से स्वास्थ्य महकमें में यह चर्चा चली की महिला चिकित्सक के पति जिनका डाक्टरी के पेशे से दूर-दूर तक का संबंध नहीं है फिर चिकित्सा सेवा समिति इन महाशय पर क्यों किसलिये, किसकी मेहरबानी से मेहरबान हुई। भले ही बात सामान्य हो की महाशय का भी सम्मान कर दिया गया तो क्या हुआ, लेकिन ऐसा नहीं है इसके पीछे जरुर किसी की दूर दृष्टि, कड़ी मेहनत और कोई ना कोई पक्का इरादा जरुर होगा। तभी तो ऐसा हुआ और ऐसा किया गया। खैर खबर तो इतनी ही थी हम गहराई में क्यों जायें....जिसे गहराई में जाना है वो जाये।
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हीरो होण्डा ने मृतक परिवार को दिये एक लाख रुपये
जब धनराज प्रजापति की गॉव में ही अचानक मृत्यु हो गई तब हरिओम ऑटो,हीरो होण्डा शोरूम के स्थानीय संचालक श्री मनोहर राय जी ने एक लाख रूपये दिलाया। संकट के समय में यह मदद उनकी धर्मपत्नी श्री मति हेमलता प्रजापति एवं उनकी पॉच बच्चियों के लिये वरदान बन गई। श्री मनोहर राय जी ने एक लाख रूपये का चेंक श्रीमति हेमलता प्रजापति को स्थानीय पार्षद अर्जुन राठौर के द्वारा प्रदान करवाया।
हीरो होण्डा कम्पनी देश की पहली ऐसी कंपनी है जो वाहन विक्रय के साथ-साथ ग्राहक को सुरक्षा प्रदान करती है। कंपनी हीरो होण्डा मोटर सायकल खरीदने वाले को प्रेरित करती है कि वह कंपनी द्वारा संचालित पासपोर्ट योजना का सदस्य बने। जिसके के लिये मात्र 200-रूपये अदा करना पड़ता है। जिसकी मान्यता तीन वर्ष तक रहती है। जिसमें बीमें के अलावा कंपनी द्वारा अनेक उपहार आमंतत्र पत्र बधाई संदेश आदि ग्राहकों को दिये जाते है।
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ऐसे करें सोयाबीन फसल पर कीट नियंत्रण
उप संचालक कृषि एन. एस. रघु ने बताया कि जिले में कहीं - कहीं सोयाबीन फसल पर नीला भृंग, हरी अर्ध्दकुण्डलक एवं चभृंग (गर्डल बीटल) जैसे कीटों का प्रकोप दिखाई दे रहा है। इन कीटों पर दवाओं का छिडकाव कर नियंत्रण किया जा सकता है।
ऐसे करें कीट नियंत्रण
सोयाबीन की फसल में यदि एक मीटर कतार में 3 हरी अर्ध्दकुडलक या 4 ब्ल्यू बीटल अथवा गर्डल बीटल का प्रकोप दिखाई दे तो क्लोरो पायरीफॉस 20 ईसी, डेढ़ लीटर या क्यूनालफॉस 25 ईपी डेढ़ लीटर अथवा ट्रायजोफास 40 ईसी 800 मिलीमीटर दवा 700 से 800 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाब करना चाहिए। यदि फसल में रस चूसने वाले कीट का प्रकोप हो तो इथियान डेढ़ लीटर या मेटासिस्टाक 30 ईसी डेढ़ लीटर दवा को 700 से 800 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करना फायदे मंद होगा।
जैविक कीट नियंत्रण के लिए एक लीटर पानी में नीम बीज का 5 मिलीलीटर घोल बनाकर 700 से 800 लीटर प्रति हेक्टर के मान से फसल पर छिड़काव करना चाहिए। छिड़काव यंत्र उपलब्ध नहीं होने पर क्यूनालफॉस दवा डेढ़ प्रतिशत पावडर या मिथाइल पैराथियान दो प्रतिशत पावडर का उपयोग 20 से 25 किलोग्राम प्रति हैक्टर के अनुसार भुरकाव किया जा सकता है। कीट नियंत्रण के संबंध में अधिक जानकारी क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर प्राप्त की जा सकती है।
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Monday, July 14, 2008
मांसाहारी दुकानों पर मिल रहा भगवान का प्रसाद, क्या आप भी ऐसा ही भोग लगा रहे!
सीहोर 13 जुलाई (विशेष सं.)। भारतीय हिन्दु धर्म में अण्डे को मांस की श्रेणी में रखा गया है, जहाँ अण्डे का खाना तो दूर स्पर्श तक वर्जित माना गया है। ऐसे में सीहोर नगर के धार्मिक हिन्दु लोग बहुत बड़ी संख्या में ऐसी दुकानों से भगवान को चढ़ाया जाने वाला प्रसाद, भोग मिठाई खरीद रहे हैं जहाँ मांस अर्थात अण्डे से बनी खाद्य सामग्रियाँ मिलती हैं। वही दुकानदार एक तरफ अंडे के पास रखी मिठाई तौलता है और ग्राहक खुशी-खुशी भगवान का चढ़ाने पहुँच जाता है। ईश्वर की आराधना में सर्वप्रथम नियम शुध्दता का है चाहे मन की हो या तन की, शुध्दता आवश्यक है। भगवान को प्रसन्न करने के लिये जो भोग आप लगा रहे हैं यदि वही अशुध्द है तो फिर आप स्वयं पाप के भागी बन जाते हैं। मंहगी और बड़ी दुकानों पर मिल रही इस नापाक मिठाई से क्या भगवान प्रसन्न होंगे या फिर भक्त को कष्ट ही उठाने पड़ेंगे यह तो आध्यात्म का विषय है लेकिन धर्म का विषय यही है कि ऐसी दुकानों से भगवान को चढ़ाने के लिये सामान नहीं खरीदा जा सकता....क्या आप किसी मांस, मछली बिकने वाली दुकान पर रखी मिठाई खरीदकर भगवान के मंदिर ले जाना पसंद करेंगे ?
हाय-री शान-शौकत, इस शान के चक्कर में सारा का सारा धर्म ही भ्रष्ट होता जा रहा है। एक रुपये की गोली नहीं 5 रुपये की केडबरी या किटकेट बच्चे खायेंगे तब ही आपकी शान बढ़ेगी फिर भले ही केडबरी में कीड़े हों या ना हो, कोई मेहमान आयेगा तो उसके बाजार का शीतल पेय ही पिलाया जायेगा घर का नीबू शरबत या लस्सी नहीं, पिजा खाना शान है और बड़ी होटलों पर बैठकर मंहगा खानपान हमारी इात, और अब भगवान को साथ ले लिया गया है उनकी पूजन में शान जितनी बढ़े उतना पूजन करने का मजा आता है, शांति से की गई पूजा तो आजकल कई यजमानों को समझ ही नहीं आती। इसी क्रम में आती है मिठाई, जो अक्सर भगवान को चढ़ाने के लिये मंहगी से मंहगी खरीदकर ले जाना शान समझा जाने लगा है।
मांस के साथ शुध्द घी की मिठाई
बात हिन्दु धर्म की मान्यताओं और शाकाहारियों को लेकर चल रही है। विचार कीजिये की आप जब घर में भोजन शुध्द करना पसंद करते हैं, रसोई घर की साफ-सफाई का ध्यान रखते हैं, आप जब हर किसी ढाबे पर भोजन करने के पहले यह सोचते हैं कि यहां मांस तो नहीं बनता और जहाँ बनता है वहां खाने से आप बचते हैं ? किसी ताजा बकरा, मुर्गा, सुअर गोश्त मांस लटकाकर बिकने वाली दुकान पर रखी शुध्द घी की मिठाई आप नहीं खाना पसंद करते तो फिर अंडा यदि आप मांसाहार मानते हैं जो हिन्दु धर्म में मांसाहार ही है उस अंडे के साथ रखी मिठाई आप कैसे शुध्द मान लेते हैं ? और ऐसी अशुध्द मिठाईयाँ जो आप स्वयं नहीं खा सकते उन्हे भगवान को कैसे चढ़ाया जा सकता है ?
मांसाहारी दुकान है या शाकाहारी
ज्ञातव्य है कि नगर में अनेक बड़ी नामचीन दुकान ऐसी हैं जहाँ अनेक तरह की मिठाईयाँ बड़ी मात्रा में बिकती है। जैसे रसगुल्ला, चमचम, रस मलाई से लेकर शुध्द घी के पेड़े और लड्डु भी मिलते हैं, लेकिन इन्ही दुकानों पर अंडे का केक, अंडे की पेस्टी, अंडे का क्रीम रोल, अंडे के बिस्कुट और जाने क्या-क्या मांस का सामान मिलता है। ऐसी स्थिति यह दुकानें मांसाहारी दुकान है या शाकाहारी यह आप ही तय कीजिये। क्योंकि जब किसी भोजनालय पर शाकाहारी लिखा होता है तो वहाँ न अंडा आता है न ताजा मांस, और जिस भोजनालय दुकान पर अंडे से बनी खाद्य सामग्री बिकती है वह मांसाहारी भोजनालय कहलाता है। इस तर्ज पर यह मिठाईयाँ जिन दुकानों पर मिलती है वह मांसाहारी दुकानें या शाकाहारी आप स्वयं तय करें।
तो मांसाहारी दुकान की मिठाई से प्रसन्न हो जाईये गणेश जी
तो फिर इन मांसाहारी दुकानों पर बिकने वाली खाद्य सामग्री स्वयं ही दूषित मानी जानी चाहिये। यदि कोई मांस की दुकान पर सुअर-मछली-बकरे-मुर्गे के मांस बेचने वाला दुकानदार आपसे कहे कि साहब मेरी दुकान में भोजन कर लीजिये आपको हाथ धोकर शुध्द बना दूंगा तो उस दुकान में रखे मांस के साथ भी आप भोजन करेंगे या नहीं ? क्या वह भोजन देने वाला शुध्द होगा ? क्या उसके बर्तन शुध्द होंगे ? यदि आप सोचते हैं कि बेचने वाले ने हाथ धोकर खाद्य सामग्री दी है इसलिये शुध्द है तो यह आपका सोच हो सकता है न तो धार्मिक मान्यता इसे मान्य करेगी न हिन्दु धर्म के भगवान इसे स्वीकृति दे सकते हैं। इसलिये कम से कम भगवान को चढ़ाने के लिये ऐसी मिठाईयों से तौबा की जानी चाहिये जो मिठाईयाँ मुर्गी के अंडे से बनी खाद्य सामग्री के साथ बेची जाती है। वरना अब यदि आप ऐसी दुकानों से मिठाई खरीदकर भगवान को चढ़ायेंगे तो फिर यही कहियेगा कि मांसाहारी अण्डे की दुकान के चढ़ावे से प्रसन्न हो जाईये भगवान....।
नगर के अधिकांश प्रसिध्द मंदिरों में चढ़ावे के लिये आये दिन भक्तगण मिठाईयाँ इन्ही दुकानों से खरीदते हैं। जिन दुकानों पर मांस अण्डे की खाद्य साम्रगी बिकती है वहीं से अनजाने में देवभक्त मिठाई खरीदकर भगवान को भोग लगा बैठते हैं, सिर्फ ऊपर की पेकिंग, दुकान की रौनक, डिब्बे की चमक और मंहगी होने से मिठाई शुध्द नहीं हो जाती। लेकिन इस तरफ सीहोर के भक्तों का कभी ध्यान ही नहीं जाता।
वो कहते हैं अब मत छापना
कुछ दुकानदार फुरसत पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे थे कि अब फुरसत में पेस्टी, क्रीम रोल, केक, बिस्कुट जैसी अण्डे से बनी खाद्य सामग्री के लिये कोई खबर प्रकाशित न की जाये, उनका कहना था कि इससे उनके धंधे पर विपरीत असर पड़ेगा। हमने उनसे राष्ट्र व संस्कृति की रक्षा में सहयोग देने की मांग करते हुए कहा कि आप अण्डे से बनी सामग्री बेचना बंद क्यों नहीं कर देते लेकिन इससे ऐसे दुकानदार बचते नजर आ रहे हैं ? एक दुकानदार का कहना था कि अब तो सबका धर्म भ्रष्ट हम कर ही चुके हैं तो अब बेचने में जाता ही क्या है ?
सीहोर के पंडित भी मौन
सीहोर में कुछ एक ऐसे पंडितगण जो पूजन-पाठ कराते हैं, वह किसी पूजन कर्म के समय नियम कानून तो खूब बताते हैं, अपना पांडित्य भी यजमान पर झाड़ने से नहीं चूकते बल्कि पूजन के समय नये कपड़े पहनने, पूजन की सामग्री की शुध्दता से लेकर अन्य सब बातों का बारीकी से ध्यान रखते हैं लेकिन कभी यह मार्गदर्शन नहीं देते कि किस दुकान से मिठाई लाना है। यजमान महंगी और शुध्दघी मिठाई लाया सिर्फ यहीं तक उनका सोच रहता है। हालांकि कुछ पंडित मार्गदर्शन भी देते हैं और कोई दुकान विशेष अथवा मावे की ही मिठाई लाने का कह देते हैं लेकिन अन्य इस तरफ ध्यान नहीं देते।
विशे ष - सीहोर के जैन, ब्राह्मण और बनिये खा रहे हैं खुले आम ‘’अण्डे’’ कहीं आप तो इनमें शामिल नहीं... गत सोमवार को प्रकाशित उक्त समाचार पर उपरोक्त समाचार से संदर्भित है
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इंदोर कर्फ्यू के दहशत भरे वे पाँच दिन
मेरी गाडी अा चुकी थी मै अपने पापाजी कैलाश परमार के साथ निजी कार्य के लिये इन्दौर निकल चुका था रास्ते मे पड़ने वाला सोनकच्छ व देवास मे सन्नाटा था ऐसा लग रहा था शायद तूफान आने के पहले की शांति हो। हम देवास से इंदोर के लिये आगे बढ़े ही थे कि पापा के मोबाईल पर मेसेज व फोन आने लगे की इंदोर में उपद्रव हो गया है जो खजराना क्षेत्र में है मेने पापा से मुखतिर होकर कहा कि खजराना इन्दौर का बाहरी क्षेत्र है दिक्कत की कोई बात नही है। थोड़ी ही देर में फिर काल आता है कि उपद्रव में चार लोग मारे गये हैं यह सुनकर पापा को आने वाले समय का गंभीर अहसास हो गया था और वो तथा हम सब वापस आष्टा चलने की बात कहते है लेकिन में उन्हें वापस विश्वास दिलाता हूॅ कि ऐसा कुछ नहीं होगा, सब अफवाह है। शायद में इन्दौरियों की जिंदादिली संस्कार व स्वभाव से परिचित था जो मैने 7 वर्षा में इंदोर मे अध्ययनरत् रहते हुये देखी थी।
मैं व पापा अपना काम कर फ्लैट पर पहुंचें ही थे कि पापा के सेलफोन पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी से मेसेज आता है कि प्रदेश अध्यक्ष श्री सुरेश पचौरी जी सड़क मार्ग से इंदोर के दंगा ग्रस्त इलाकों मे जा रहे है आप आष्टा मे रहें। इंदोर में कुछ भयावह हुआ है उसकी पुष्टि इस मेसेज से हो चुकी थी। पापा के चहरे पर तनाव साफ दिखाई दे रहा था पापा ने मुझे कुछ काम बताकर व हिदायते देकर फ्लैट पर छोड़ दिया व तुरंत वे आष्टा के लिये निकल चुके थे क्योकि 2 घंटे में उन्हें आष्टा पहुँचना था।
मल्टी व कालोनी के लोगो के द्वारा रह रहकर खबर आती है कि कुछ लोगो को मार दिया गया है। सभी कालोनी वासी कहने लगे पता नही कल क्या होगा सभी के चेहरो पर तनाव साफ दिखाई देने लगा था। शायद इंदोर के छै: थाना क्षेत्रों में कर्फ्यु लगा दिया गया था। शुक्र वार सुबह के अखबार शहर के दामन पर खून के छीटे पड़ गये है, ऐसा साफ वयां कर रहे थे। मैं अपने भाईयों व दोस्तों के साथ अपना जरूरी कार्य निपटाने के लिये बाजार निकल चुका था लेकिन ईट पत्थर से सड़क पर गलियां पटी हुई थी। हमने अपना कार्य किया व बाद में अपने लिये कुछ शापिंग की और बाद में मनोरंजन के लिये फिल्म देखने चले गये लगभग 2 घटें कि मूवी हम देख चुके थे कि अचानक हमने देखा कुछ दर्शक उठ कर थियेटर से बाहर जा रहे हैं हमें लगा शायद फिल्म पंसद नही आई हो। लेकिन थोडे समय के अंतराल के बाद फिर कुछ महिलाये,बच्चे उठकर जाने लगे। अब थियेटर के अंदर हलचल तेज होने लगी क्योकि झुण्ड के झुण्ड बिना किसी काम के थोड़ी बाहर जा रहे थे और थोड़ी में मौजूद लोगो के सेलफोन भी अब घनघनाने लगे थे। खबर थी शहर के हालात खराब हो रहे हैं। तभी मेरे सेलफोन पर दोस्त का मेसेज आता है मार्केट छोड़ कर जल्दी घर लौटो शहर में दंगे हो गये है, कर्फ्यु लगने वाला है देखते ही देखते सारा माल व टाकिज खाली हो चुका था। बाजार बंद हो चुका था। बाहर लोग बदहवास होकर भाग रहे थे क्योकि इंदोर में मौत का ताण्डव मचा हुआ था। आंखो के सामने राहगीरो को लठों व सरियों से पीटा जा रहा था हद तो तब हो गई जब अपने घर जा रही एक महिला को भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने पत्थर से मारा। विरोध प्रदर्शन का यह तरीका बहुत ही खतरनाक था लोग अपनी जान बचाते फिर रहे थे। व्यापारी व्यवसायी अपना काम करना चाह रहे थे लेकिल चंद लोग बंद के नाम पर गुंडा दिवस मना रहे थे। लोग एक दूसरे से पूछ रहे थे आखिर ये भाजपाई तोड़फोड़ व मारपीट से क्या जताना चाह रहे हैं किसी मुद्दे का हिंसक व जबरजस्ती अंदाज में भुनाना देश भक्ति तो कतई नही है बंद करवाने वाले भाजपा के लोगो को यह बात तो सोचना चाहिये कि बाबा अमरनाथ के प्रति आस्था दिखाने का यह कौन सा तरीका है। दूध बचने वाले का दूध उडेलना, पोहे की दुकान वालो की पूरी तश्तरी नीचे फेंकना मासूम बच्चें व उसका पिता को स्कूटर से नीचे गिराकर सरेआम चोराहे पर पिटाई लगाना कोई विकृत दिमाग का आदमी ही ऐसा कर सकता है लेकिन पुलिस की मौजूदगी में सैकड़ों राहगीरों के बीच भाजपा के कार्यकर्ता हाथ में पार्टी का भगवा ध्वज लेकर यह कृत्य रहे थे चुनाव सामने है शायद मध्यप्रदेश को दूसरा गुजरात बनाने की साजिश के तहत यह सब किया जा रहा था। जो भी मैं परेशान था, सड़क पर टार्फिक जाम था। टेफिक सिग्ल तोड़कर लोग निकल रहे थे। सभी को घर जाने की जल्दी थी। सभी के चेहरे पर तनाव साफ दिखाई दे रहा था। हमें फ्लैट पर मौजूद परिचित निर्देश दे रहे थे कि हम कोन-कोन से रास्ते से फ्लैट पर पहुँचे, जब हम पहँचे तब हमने राहत की सांस ली। आधे घन्टे के अंदर ही शहर भर के लोग अपने अपने घरों में थे। और रोड़ पर सायरन बजाती हुई पुलिस फोर्स की गाड़ियाँ दोड़ रही थी। आमजन से एनाउसमेंट करके कहा जा रहा था कि शहर में कर्फ्यु लग चुका है आप घर में रहें।
अगले दिन शनिवार को भी बड़ी असमंजस की स्थिति थी दैनिक अखबार दंगाईयों के द्वारा शहर को दिये घाव की दास्ता बयां कर रहे थे। उपद्रवियों ने किसी की आंखों का तारा तो किसी की मांग सूनी कर दी थी। चूंकि हमारा फ्लैट कलेक्टर आफिस के सामने है अंत: प्रशासन की आवाजाही साफ दिखाई दे रही थी शायद नये कलेक्टर व एसपी के लिये यह कड़ी परीक्षा की घड़ी थी अफवाहों का बाजार गर्म था। कोई 4 तो कोई 14 मरने की बात कह रहा था। दूध वाले सब्जीवाले के अते पते नहीं थे। छोटे-बच्चे दूध के लिये बिलख रहे थे। सभी परीक्षाएं स्थगित हो चुकी थी। सड़के सुनसान पड़ी हुई थी चारों और केवल सन्नाटा ही पसरा हुआ था। घर से बाहर निकलने की सख्त मनाही थी। यहां तक कि आवश्यक सेवायें किराना, मेडिकल, पेट्रोल पंप व पहुंच के लिये बसें बंद पड़ी थी। बीच-बीच में एम्बुलेंस व फायर बिग्रेड के सायरन किसी स्थान पर अनहोनी को बयां कर रहे थे ऊपर से पुलिस व प्रशासन की दनदनाती गाड़िया खौफ जदा लोगो को सांसत मे डाल रही थी। फटाकों व नारो की आवाज रह-रहकर सुनाई दे रही थी इस तरह शाम हो चुकी थी। कुछ शांति देखकर प्रशासन ने घंटे भर की कर्फ्यु में छूट दी थी। चंद मिनटों में लोगो की भीड़ किराना, आटा चक्की, मेडिकल व दूध की दुकान पर लग चुकी थी। ऐसा लगा जैसे लोग वर्षों की केद से छूटे हों लगभग 28 घंटे कर्फ्यु के सायें में बिताने के बाद लोग खरीदारी के लिये टूट पड़े। रविवार को अगले दिन किसी चीज की कमी न पड़े जाये। इसलिये लोग जल्दी जल्दी खरीदकर घर लौटना चाहते थे जाम कि स्थिति बन गई थी। कुछ लोग। एटीएम पर कतारों मे नजर आये, तो कुछ लोग पेट्रोल पंपो पर पसीना बहाते नजर आये। सफाई, बिजली, पानी व अन्य आपात कालीन सुविधाऐं बेहाल हो गई थी। ऐसा लग रहा था जैसे इस शांत शहर को शांति से कोई बैर हो गया हो। मरीजों को बिना दवा कष्ट उठाना पड़ रहा था, कितने घरों मे चूल्हा नही जला था और कई मासूम व निर्दोष लोगो को जान से हाथ धोना पडा। दूध अगर गाते बजाते मिल रहा था तो 40 रूपये लीटर भाव थे। इसी प्रकार अन्य जरूरी सामान फल सब्जियों के भाव भी दौगुना कीमत में मिल रहे थे। शहर में ना तो कोई बस आ रही थी और ना ही कोई बस जा रही थी जो जहां जेसी हालत में फंसा था वो वेसी ही हालात में फंसा रहा।
अगले दिन रविवार को कर्फ्यु मे क्षेत्रवार अलग-अलग छूट देने की बात कही जा गई थी लेकिन ऐसा कम ही देखने को मिला। दूध सब्जी पानी व अन्य रोजमर्ग की वस्तुओं के लिये खासी जद्दोजहद हुई। सड़कों पर रह-रह कर पुलिस व विशेष पुलिस दल की गाड़िया दोड़ती नजर आती थी। गली मोहल्लों में भी सायरन गूंजते रहे। अपनी मस्ती व खाने-पीने में डूबे रहने वाले शहर मे छुटटी का दिन रविवार भी अब बोर लगने लगा था लोग घर व फ्लैट के अंदर तीन रोज तक बंद रहने से घबराकर बाहर आने के लिये छटपटा रहे थे। खिड़की दरवाजों पर खड़े होकर लोग यही कह रहे थे कि हमारे शहर को किसकी नजर लग गई। अब कौन व्यापारी यहां व्यापार करने आयेगा। अब लोगो में केसे वापस एक दूसरे पर विश्वास जमेगा और करोड़ो का जो व्यापार को नुकसान हुआ है उसकी भरपाई कौन करेगा। अपनी मनमर्जी राजनैतिक दल कब तक थोपतें रहेंगे। चंद राजनैतिक स्वार्थी तत्व आखिर हमारे शहर के बारे में फैसला लेने वाले कौन होते है। इसी तरह से लोग दंगाईयों को कोसते नजर आ रहे थे।
इधर मैं भी परेशान था, मुझे अपना जरूरी कार्य निपटता नही दिख रहा था में सीधे कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचा व अपने लिये कर्फ्यु पास बनवाया ताकि शहर में कार्य तेजी से निपटा संकू। इस तरह में अपना कार्य सोमवार को कर सका लेकिन अन्य की भांति मेरे मन में भी डर बैठा था मेने देखा लोगो की आखों में बीते चार दिनों का खौफनाक मंजर था। सभी लोग डरे सहमें अपने-अपने प्रतिष्ठान खोल रहे थे
सोमवार को कर्फ्यु खुल चुका था कुछ क्षेत्रों मे लगा था वहां पर भी लोग दुकान खोलने के लिये उतावले हो रहे थे। में सोमवार को शाम को आष्टा के लिये गाड़ी में बैठा-बैठा सोच रहा था कि लोगो की जीत हुई है या फिर उन सांम्प्रदायिक ताकतों की जो म.प्र. को गुजरात बनाने के लिये यह सब खेल, खेल रहे थे। वो सब भयावह सपने की तरह था जो में पीछे छोड़ चुका था। भगवान करे अब ऐसा मंजर किसी को न देखने को मिले ।
अदालत के सामने, आष्टा
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Sunday, July 13, 2008
यातायात पुलिस अधिकारी व चार पुलिस कर्मियों के सामने हुई तोड़फोड़, यह क्यों गवाही नहीं देते?
पुलिस अधीक्षक क्यों नहीं करते कार्यवाही, उनके अधिनस्थ क्या यूं ही खुलेआम गुण्डागर्दी करवाते रहेंगे
सीहोर 12 जुलाई (नि.सं.)। दो दिन पूर्व जब नगर पालिका में तोड़फोड़ हो रही थी। तब यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अपने चार जवानों के साथ नगर पालिका में एक काम से आये हुए थे। सीहोर की कर्तव्य से विमुख और भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिस का यह ताजा वलंत उदाहरण है जहाँ पुलिस की एक चार की गार्ड मौजूद थी वहाँ कुछ तत्व गेती-फावड़े लट्ठ लेकर आये और उसी कार्यालय में तोड़फोड़ करते रहे पुलिस के ही सामने जहाँ पुलिस खड़ी थी। अब पुलिस अधीक्षक कह रहे हैं कि कोई नाम क्यों नहीं बताता ? मिस्टर राजेन्द्र प्रसाद के कारिंदे ही इतने भयभीत हैं कि वो तोड़फोड़ करने वालों को भगा नहीं सके, पुलिस वायरलेस से किसी को सूचित नहीं कर सके तो फिर कोई अन्य आम आदमी कैसे उन तत्वों का नाम अपने मुख से निकाले।
दो दिन पूर्व नगर पालिका में जब कुछ तत्व तोड़फोड़ करने के लिये हाथों में सामान लेकर आये थे। ठीक उसी समय मुख्य नगर पालिका अधिकारी से मिलने के लिये सीहोर यातायात के एक वरिष्ठ अधिकारी खाकी वर्दी में और 4 जवान सफेद यातायात पुलिस की वर्दी में यहाँ आये थे। यह पूछताछ कर रहे थे कि अधिकारी कहाँ है और जिस महत्वपूर्ण कार्य से आये थे वो यह था कि आगामी दिनों में लाल परेड मैदान भोपाल में सीहोर के जमीन पट्टेधारियों को ले जाना है उसकी व्यवस्था के संबंध में बातचीत करना थी। हालांकि अधिकारी का एक पर्सनल काम भी था लेकिन वह पर्सनल था। इस प्रकार बकायदा पुलिस की वर्दी में यहाँ एक चार की गार्ड अधिकारी के साथ मौजूद थी। 2-3 वायरलेस सेट भी इनके पास मौजूद थे।
यह वहीं यातायात अधिकारी हैं जो सिर्फ ठेले वालों से हफ्ता वसूली करना जानते हैं ? यह वहीं है जिनके कारण अस्पताल चौराहे से लेकर नमक चौराहा और यहाँ से लेकर गाँधी रोड पान चौराहे तक अतिक्रमण पटा पड़ा है ? यह वहीं है जिनके कारण सब्जी मण्डी के आसपास की यातायात व्यवस्था वर्षों से नहीं सुधर रही। सीहोर के यातायात कर्मचारी इतने कर्तव्यविमुख और खाईबाज हो गये हैं कि उनके सामने ही अपराधी अपराध करता रहता है और यह कुछ बोलने को तैयार नहीं होते। कहीं झगड़ा हो रहा हो, कहीं गदर मच गया हो, चाकू-छुरी चल रही हो...गप्पे खिलाने वाले गप्पे खिलाकर ग्रामीणों को लूट रहे हो...कुछ भी अपराध घटे यातायात पुलिस कर्मी कभी किसी को टोकते नहीं देखे गये। बीच सड़क पर भी यदि कोई ठेले वाला खड़ा हो जाता है तो यह यातायात कर्मी उससे कुछ कहते नजर नहीं आते हालांकि दिनभर यह इनके वाहनों का एक्सीलेटर इतना घुमाते हैं कि पूरे नगर के कई चक्कर दिनभर में काट लेते हैं लेकिन मजाल है कि कभी व्यवस्थाओं की तरफ ध्यान दें। क्या यह इनका कर्तव्य नहीं है ?
पुलिस की वर्दी पहनकर अपराधियों से डरने वाले इस पुलिस वालों को अपनी वर्दी उतार देनी चाहिये जब इनके सामने ही कुछ तत्व गुण्डागर्दी कर रहे हैं, शासकिय सम्पत्ति को हानि पहुँचा रहे हैं? और फिर भी यह चुपचाप तमाशा देखते रहे। इनके हाथ में वायरलेस सेट किस लिये थमाया गया है ? आखिर क्यों वायरलेस सेट इन्हे दिया गया है ? क्या उस पर यह सूचना नहीं कर सकते थे ? क्या यह पुलिस फोर्स चीता पुलिस को बुला नहीं सकते थे ? पुलिस अधीक्षक को इन पाँचों ही पर कार्यवाही करने से बचना नहीं चाहिये, यदि वह बचते हैं तो फिर पुलिस अधीक्षक की कार्यप्रणाली संदिग्ध हो जायेगी ?
जब पुलिस ही सामने रहकर शासकिय सम्पत्ति तुड़वायेगी तो फिर आम आदमी क्या करेगा? जब पुलिस ही आपराधिक तत्वों के साथ मिल जायेगी उन्हे संरक्षण देगी, उनका बचाव करेगी ? तो फिर आम आदमी से कैसे अपेक्षा की जा सकती है कि वह अपराधियों के खिलाफ मोर्चा खोल ले। अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस सीहोर में किस हद तक अपराधियों को संरक्षण दे रही है ? पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र प्रसाद जी को इस अव्यवस्था को सुधारने के कारगर उपाय करना चाहिये।
वो अध्यक्ष का चहेता ठेकेदार गंदी-गदीं गालियाँ सुनता रहा लेकिन पुलिस को फोन नहीं कर सका
सीहोर। अध्यक्ष राकेश राय के कथित समर्थक उनके कितने खास हैं यह बात उस वक्त सिध्द हो गई जब नगर पालिका में टूट-फूट के साथ अध्यक्ष व उनके परिवार को अपशब्द बोले जा रहे थे तब यहीं अध्यक्ष के सबसे प्रिय ठेकेदार खड़े थे। वह तोड़फोड़ देखते रहे लेकिन उन्होने पूरे एक घंटे तक चली तोड़फोड़ के दौरान किसी को भी सूचना नहीं दी। क्या ठेकेदार चाहता तो पुलिस को सूचित नहीं कर सकता था ? क्या यह चाहता तो अध्यक्ष राकेश को खबर नहीं दे सकता था? लेकिन एक घंटे से अधिक समय तक तोड़ फोड़ होती रही यह ठेकेदार समर्थक खड़ा रहा और मुस्कुराता रहा क्योंकि उसे मालूम है कि फिर ठेका तो उसे ही मिलना है।
दूसरे एक अन्य कर्मचारी जिसे अध्यक्ष राकेश राय अपना बता-बताकर इतना सिर पर बैठा चुके हैं कि वो भ्रष्टाचार का सिरमौर बन गया है। राकेश राय के राजनीतिक जीवन पर लगातार कुठाराघात करने वाले इस अधिकारी जिसे राकेश राय अपना बताते हैं, ने भी पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस को सूचना नहीं दी आखिर क्यों ? क्या यह लोग बाहर जाकर सूचना नहीं दे सकते थे।
घटना के वक्त पर एक अधिकारी जिसे अध्यक्ष परिवार अपना पारीवारिक सदस्य बताते नहीं अघाता, साथ ही सारे भ्रष्टाचारी काम करने, और पार्षदों द्वारा जिसे 'असली अध्यक्ष' की उपमा दी गई है उसने भी तो यहाँ टूट-फूट के दौरान कुछ नहीं किया वो भी पुलिस को फोन करने से बचता रहा। यह चर्चाएं नगर पालिका कर्मचारियों के बीच तेजी से व्याप्त हैं।
जब वो सबकुछ करके चले गये तो ये चिल्लाने लगा कौन है बाहर निकलो
सीहोर । जब नगर पालिका में तोड़फोड़ करने वाले सबकुछ करके चले गये, अध्यक्ष के कमरे को बर्वाद कर गये तब जब यह जानकारी सबको मिल गई कि अब वो तत्व वापस नहीं आयेंगे तब अध्यक्ष समर्थक यहाँ एकत्र होने लगे। एक ऐसे ही एक समर्थक ने यहाँ नगर पालिका में घटना के करीब 3 घंटे बाद आकर चिल्लाना शुरु किया 'कौन-है बाहर निकलो....कौन था अब क्यों नहीं आ रहा बाहर....' इसके इस तरह चिल्लाने पर सब यही कर रहे थे कि देखा आपने शेर तो चले गये अब कैसे चिल्ला रहा है। इतनी ही हिम्मत है तो यहाँ नगर पालिका के अंदर क्यों नगर पालिका कर्मचारियों पर प्रभाव जमा रहा है कुछ करके दिखाता क्यों नहीं.....?
सीहोर 12 जुलाई (नि.सं.)। नगर पालिका में तोड़फोड़ करने वाले लोगों ने यहाँ दो वरिष्ठ अधिकारियों को सुबह से ही बता दिया था कि हम वहाँ आकर तोड़ फोड़ करेंगे। जब तोडफ़ोड़ करने वालों की पूरी तैयारी हो गई। हाथों में लट्ठ, गेती-फावड़े आदि ले लिये तब इन्होने फिर एक अधिकारी को फोन किया की भैया हम तोड़ने आ रहे हैं, तुम्हे पहले ही बता देते हैं। इस मोबाइल आने पर यह अधिकारी नगर पालिका से गायब हो गया। दिनभर घर में रहा । एक अन्य अधिकारी ने मोबाइल बंद कर दिया। और आराम से नगर पालिका अध्यक्ष का कमरा टूट गया। असल में तोड़-फोड़ तो अध्यक्ष के कमरे में ही की जाना थी इसलिये वहाँ खूब हंगामा हुआ, इतनी गालियाँ बकी की राकेश राय ने पूरे जीवन में इतने अपशब्द नहीं सुने होंगे, इतनी गंदी-गंदी गालियाँ बकी की कर्मचारियों को बाकई यह बहुत बुरा लगा और एक ने गालियाँ बकने पर टोका भी तो अन्यों ने अपशब्द न सुनने पडे ऌसलिये यहाँ से दूर हो जाना उचित समझा लेकिन यहीं खड़े एक ठेकेदार की हंसी हर गाली पर दोगुनी होती जा रही थी, वो अध्यक्ष जी का सबसे चहेता है, सबसे यादा ठेके लेता है इसलिये कर्मचारी उसकी हंसी देखकर हतप्रभ थे कि आखिर इसे आक्रोश क्यों नहीं आ रहा ? यह तो खुद को बड़ा समर्थक बताता फिरता है। प्रश् उठता है कि जब कुछेक अधिकारियों को पहले ही पता था कि तोड़फोड़ होने वाली है तो उन्होने इसकी सूचना किसी को क्यों नहीं दी।
गौरतलब बात यह भी है कि जितनी दुर्गति अध्यक्ष के कमरे की गई है उतने ही आराम से मुख्य नगर पालिका अधिकारी व एक यंत्री श्री जैन के कक्ष में सिर्फ टेबिल दिखावे मात्र के लिये टेड़ी-आड़ी की गई और कुर्सी उठाकर एक तरफ भर दी गई।
सीहोर । नगर पालिका में तीन दिन पूर्व जब तोड़फोड़ करने के लिये उपद्रवी तत्व आने वाले थे, उससे पहले ही इसकी भूमिका तय कर ली गई थी। यहाँ बकायदा कर्मचारियों के कमरो में कुछ विशेष लोगों द्वारा समोसा नाश्ता भिजवाया गया, इसके बाद सबको चाय पिलाई गई फिर बकायदा तोड़फोड़ करने वाले अपनी अदा से आये और अध्यक्ष के कमरे को तहस-नहस करने के बाद मुख्य नगर पालिका अधिकारी और एक अन्य यंत्री के कमरे में कुछ सामान बिखेरा और आराम से चले गये। इनसे कोई कुछ नहीं बोला।
सीहोर । नगर पालिका कर्मचारियों द्वारा सोमवार से हड़ताल करने की बात कही गई है। यह हड़ताल क्यों की जा रही है, किसी से मारपीट तो हुई नहीं, फिर किस बात का आक्रोश? क्या इसके पीछे कोई गणित है ? किसी का आदेश है ? इस संबंध में आगामी अंकों में फुरसत में कुछ तथ्य प्रकाशित हो सकते हैं।
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