सीहोर 3 अक्टूबर (आनन्द भैया )। अचानक उम्मीद्वारी जताते हुए प्रकट हुई उमाश्री भारती की पार्टी भारतीय जन शक्ति ने यहाँ पहले ही दिन से कहना शुरु कर दिया है कि वर्तमान विधायक की जमानत जप्त हो जायेगी...अब पार्टी के पदाधिकारी भी यही कहते हैं कि हमारी जीत तो तभी सुनिश्चित हो जायेगी जब भाजपा रमेश सक्सेना को उम्मीद्वार बना देगी। जनशक्ति का यह प्रलाप धुरंधर राजनीतिक खूब समझते हैं कि कहीं ना कहीं जनशक्ति को भाजपा से सक्सेना की उम्मीद्वारी क ा खतरा ही सबसे यादा लग रहा है और इसलिये ही अभी तक सीहोर से जनशक्ति की उम्मीद्वारी को स्पष्ट नहीं किया गया है।
भारतीय जनता पार्टी में निर्दलीय विजयी प्रत्याशी के रुप में आये और आज भाजपा के विधायक लोकप्रिय रमेश सक्सेना की आगामी विधानसभा को लेकर उम्मीद्वारी का अभी तक असमंजस की स्थिति में बनी हुई है। भाजपा में जहाँ संघ परिवार की पूरी पैनल हर बार की तरह इस बार भी सक्सेना के अंदर ही अंदर विरोध में नजर आ रही है वहीं कुछ नेता भी इस संबंध में चुप्पी साधे बैठे हैं। कुछ भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से सक्सेना की वर्षों पुरानी दुश्मनी के गड़े मुर्दे भी बार-बार चित्कार करने में लगे हुए हैं। ऐसे में खुद विधायक श्री सक्सेना का पिछले दिनों अपनी उम्मीद्वारी के प्रति असमंजस की स्थिति और अन्य लोगों से टिकिट मांगे जाने की बातें करने के बाद नगरीय क्षेत्र में काफी चर्चाएं सरगर्म हो गई हैं।
इधर भतीजे देवेन्द्र सक्सेना की तेज होती गतिविधियों ने भी चर्चाओं के बाजार को सरगर्म कर दिया है।
भाजपा के पुराने और धुरंधर नेताओं का मानना है कि इस बार टिकिट को लेकर काफी ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है और यही कारण कि पिछले दिनों जहाँ मुख्यमंत्री की सभा में सीहोर विधानसभा क्षेत्र के लोगों की अनुपस्थिति सर्वाधिक चर्चा में रही वहीं पिछले दिनों भाजपा के सर्वाधिक महती कार्यक्रम 25 सितम्बर के महाकुंभ में भी सीहोर से गये अधिकांश वाहन खाली ही थे। इस सबको कहीं ना कहीं विधायक सक्सेना के अनमने मन का कारण बताया जा रहा है।
ऐसे में संगठन और सत्ता में मतभेद भी सीहोर विधानसभा क्षेत्र को लेकर उभरने लगे हैं। कांग्रेस के कमजोर प्रत्याशियों के सामने खड़ी सत्तासीन भाजपा के अधिकांश लोग यही चाहते हैं कि इस बार उनकी भी पूछ परख हो जाये अथवा टिकिट उन्हे मिल जाये। इसलिये बारम्बार भोपाल से कई भाजपा नेता टिकिट मांगने और लेने के लिये प्रयासरत हैं और यही लोग दूसरे प्रत्याशियों की कमी का बखान भी बखूबी कर रहे हैं, दूसरे प्रत्याशियों कब-कब भाजपा के खिलाफ, मुख्यमंत्री के खिलाफ, संघ के खिलाफ बोला है, अथवा दूसरे प्रत्याशियों की भावनाएं भाजपा व संघ के प्रति क्या है इसका बखान भी खूब हो रहा है।
जो भी हो, भाजपा के इस अंतद्वंद ने कांग्रेस और हाल ही उमाश्री की एक सभा के बाद सामने आई जनशक्ति की जान सांसत में डाल रखी है। विशेषकर जनशक्ति की बयानबाजी की चर्चाएं सर्वाधिक सरगर्म रहती हैं। जहाँ उमाश्री ने आते ही श्यामपुर की सभा में खुलकर कहा कि वर्तमान विधायक की जमानत जप्त हो जायेगी। इसका मतलब था कि भाषण सुन रही जनता का विधायक के प्रति झुकाव को उमाश्री कम करना चाहती थीं। इस भाषण की चर्चाएं उतनी सरगर्म नहीं हो सकी जितनी जनशक्ति को अपेक्षा थी इसके बाद जनशक्ति के पदाधिकारियों ने खुले रुप से यह कहना शुरु कर दिया कि जनशक्ति को सिर्फ यही चाहती है कि भाजपा से विधायक रमेश सक्सेना को टिकिट मिल जाये...ताकि जनशक्ति की जीत सुनिश्चित हो जाये।
जनशक्ति का यह कहना भी कहीं ना कहीं विधायक सक्सेना की दमदारी की और इंगित करता है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो राजनीति का यह भी एक तरीका है कि सामने वाले को कमजोर प्रदर्शित करना शुरु कर दिया जाये ताकि उसका टिकिट ही कट जाये और अपनी लाईन साफ हो जाये। बार-बार जनशक्ति का यह कहना कि रमेश सक्सेना यदि लड़ेंगे तो जनशक्ति जीत जायेगी इससे लगता है कि जनशक्ति चाहती है कि सक्सेना लड़े ही नहीं। क्योंकि अगर जनशक्ति स्वयं की जीत सुनिश्चित ही कहना चाहती तो वह यही कहती कि हमारी जीत तो सुनिश्चित है, हम जीतेंगे चाहे कोई भी सामने हो, लेकिन बार-बार भाजपा के विधायक का नाम लिया जाना कहीं न कहीं जनशक्ति के सहमे होने की और इंगित कर रहा है। क्योंकि जनशक्ति ने सिर्फ रमेश सक्सेना का नाम लिया और किसी अन्य भाजपा से संभावित उम्मीद्वार का नाम नहीं लिया। उधर उमाश्री ने भी सिर्फ वर्तमान उम्मीद्वार के खिलाफ बोला।
कुल मिलाकर जनशक्ति द्वारा अभी तक स्वयं के उम्मीद्वार की घोषणा नहीं किये जाने से भी उसकी घबराहट सामने आ रही है। संभव है अपने तीर छोड़ने के बाद जनशक्ति देखना चाहती हो कि वह भाजपा के पर निशाने पर लगे या नहीं और यही निशाने पर लग गये तो जनशक्ति अपना उम्मीदवार मैदान में सामने ले आयेगी। हर दिन राजनीतिक समीकरण बनते-बिगड़ते रहते हैं देखते हैं आगे क्या होता है और कौन-सी राजनीतिक बिसात बिछाई जाती है।
Saturday, October 4, 2008
साहब जानकारी नहीं, बस आप तो सेवा बताईये क्या पेश कर दूँ, कलेक्टर से भी नहीं डरता हूँ...सब भ्रष्ट हैं कहाँ नहीं है करप्शन
सीहोर 3 अक्टूबर (नि.सं.)। महिला बाल विकास विभाग शहरी परियोजना अधिकारी कार्यालय जहाँ से पूरे नगर की आंगनबाड़ी, मुख्यमंत्री की लाड़ली लक्ष्मी योजना का संचालन होता है। नगरीय क्षेत्र की आंगनबाड़ियों में क्या कुछ हो रहा है और यहाँ कितनी गड़बड़ी चल रही है इसकी जानकारी आज हर एक घर परिवार तक पहुँच चुकी है क्योंकि अधिकांश हितग्राही बच्चों को आंगनबाड़ी से न कुछ खाने मिलता है ना कोई सामग्री दी जाती है। वहीं लाड़ली लक्ष्मी योजना में शहर सबसे पीछे नजर आ रहा है।
ऐसे में यदि कभी शहरी विकास परियोजना अधिकारी महिला बाल विकास विभाग से इस संबंध में कोई पूछताछ की जाती है, खाद्य सामग्री नहीं मिलने की बात बताई जाती है तो वहाँ से हमेशा एक ही जबाव दिया जाता है कि हम जो कर रहे हैं, सही कर रहे हैं, आपसे बने तो ऊपर शिकायत कर दो, कलेक्टर से कह दो, नीचे से लेकर ऊपर तक करप्शन है यदि हम भी इसमें शामिल हैं तो कौन-सी अनोखी बात हो गई।
आखिर शहर में जितनी आंगनबाड़ियाँ चल रही हैं उनमें कितनी खाद्य सामग्री भेजी जा रही है ? सर्वाधिक चर्चा में रहने वाली ब्रेड आखिर क्यों बच्चों न बंटकर मोहल्ले के घर-परिवार में जाती है ? बच्चों को मिलने वाले पोष्टिक खाद्य सामग्री चाहे वह दलिया हो या हो कुरकुरे-मुरमुरे वह चले कहाँ जाते हैं...? आखिर आंगनबाड़ियाँ कभी किसी के घर में तो कभी कहीं छुपकर क्यों लगाई जाती हैं...? क्यों कर आंगनबाड़ियों में बच्चों की संख्या कम रहती है...? आखिर कितनी खाद्य सामग्री बनवाई जा रही है...? कितनी मंगवाई जा रही है...? और कितनी बंट रही है....? आखिर आंगनबाड़ी में बंटने वाली पंजीरी कहा चली गई है...? और किसके मुँह में जाना चाहिये और कि सके मुँह में जा रही है? आंगनबाड़ी में बंटने वाला हलवा कौन-से घी से बनकर आ रहा है....? और आखिर क्या कारण है कि भोपाल के लोगों से बनवाकर इसे सीहोर बुलवाया जाता है और फिर बंटता है...? आखिर क्यों आंगनबाड़ी पर्यवेक्षकों द्वारा आंगनबाड़ी सहायिकाओं पर समय-समय पर दबाव बनाया जाता है और चौथ वसूली की जाती है...? लाड़ली लक्ष्मी योजना के फार्म आखिर क्यों उपलब्ध नहीं है...? क्या मुख्यमंत्री जी ने यह फार्म बांटने से मना कर दिया है....? क्यों पात्र हितग्राहियों को इस योजना का लाभ उठाने के लिये, इन फार्मों को खरीदने के लिये 5 से 50 रुपये तक अदा करना पड़ते हैं...?
ऐसे ही अनेकानेक सवालों का जबाव यदि आप महिला बाल विकास विभाग में पदस्थ परियोजना अधिकारी से पूछते हैं तो फिर वह सवाल के जबाव में बचते हुए या तो कहते हैं कि हमारे सांख्यिकी अधिकारी से आप बात कर लीजिये आपकी सारी समस्या हल हो जायेगी...? अथवा यहाँ से संदेश दिया जाता है कि साहब जानकारी नहीं आप तो ''सेवा'' बताईये क्या पेश कर दूं....।
और यदि इस ''सेवा'' की बात सुनकर कोई आम व्यक्ति नाराज होकर अधिकारियों से सही काम करने की बात कहे तो फिर सीधे यहाँ कहा जाता है कि आप चाहे जों करें, मुख्यमंत्री से कहें या कलेक्टर से कह दे, हमारा कुछ नहीं होगा...नीचे से लेकर ऊपर तक करप्शन है...सभी इसमें लिप्त हैं....आप भी जुड़ जाईये वरना जो बने कर लीजिये....।
शहर में स्थापित एक शासकिय कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार का चरम इसी बात से इंगित हो जाता है कि यहाँ कोई जानकारी देने के नाम छोटा-सा बाबू भी यह कह देता कि साहब सेवा बताईये और मेवा खाईये। जिस विभाग से आने वाली पीढ़ी, जच्चा-बच्चे का स्वास्थ्य, कुपोषण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे जुडे हैं, जिस विभाग से लाड़ली लक्ष्मी योजना जुड़ी है, उस विभाग में भ्रष्टाचार का यह आलम है।
ऐसे में यदि कभी शहरी विकास परियोजना अधिकारी महिला बाल विकास विभाग से इस संबंध में कोई पूछताछ की जाती है, खाद्य सामग्री नहीं मिलने की बात बताई जाती है तो वहाँ से हमेशा एक ही जबाव दिया जाता है कि हम जो कर रहे हैं, सही कर रहे हैं, आपसे बने तो ऊपर शिकायत कर दो, कलेक्टर से कह दो, नीचे से लेकर ऊपर तक करप्शन है यदि हम भी इसमें शामिल हैं तो कौन-सी अनोखी बात हो गई।
आखिर शहर में जितनी आंगनबाड़ियाँ चल रही हैं उनमें कितनी खाद्य सामग्री भेजी जा रही है ? सर्वाधिक चर्चा में रहने वाली ब्रेड आखिर क्यों बच्चों न बंटकर मोहल्ले के घर-परिवार में जाती है ? बच्चों को मिलने वाले पोष्टिक खाद्य सामग्री चाहे वह दलिया हो या हो कुरकुरे-मुरमुरे वह चले कहाँ जाते हैं...? आखिर आंगनबाड़ियाँ कभी किसी के घर में तो कभी कहीं छुपकर क्यों लगाई जाती हैं...? क्यों कर आंगनबाड़ियों में बच्चों की संख्या कम रहती है...? आखिर कितनी खाद्य सामग्री बनवाई जा रही है...? कितनी मंगवाई जा रही है...? और कितनी बंट रही है....? आखिर आंगनबाड़ी में बंटने वाली पंजीरी कहा चली गई है...? और किसके मुँह में जाना चाहिये और कि सके मुँह में जा रही है? आंगनबाड़ी में बंटने वाला हलवा कौन-से घी से बनकर आ रहा है....? और आखिर क्या कारण है कि भोपाल के लोगों से बनवाकर इसे सीहोर बुलवाया जाता है और फिर बंटता है...? आखिर क्यों आंगनबाड़ी पर्यवेक्षकों द्वारा आंगनबाड़ी सहायिकाओं पर समय-समय पर दबाव बनाया जाता है और चौथ वसूली की जाती है...? लाड़ली लक्ष्मी योजना के फार्म आखिर क्यों उपलब्ध नहीं है...? क्या मुख्यमंत्री जी ने यह फार्म बांटने से मना कर दिया है....? क्यों पात्र हितग्राहियों को इस योजना का लाभ उठाने के लिये, इन फार्मों को खरीदने के लिये 5 से 50 रुपये तक अदा करना पड़ते हैं...?
ऐसे ही अनेकानेक सवालों का जबाव यदि आप महिला बाल विकास विभाग में पदस्थ परियोजना अधिकारी से पूछते हैं तो फिर वह सवाल के जबाव में बचते हुए या तो कहते हैं कि हमारे सांख्यिकी अधिकारी से आप बात कर लीजिये आपकी सारी समस्या हल हो जायेगी...? अथवा यहाँ से संदेश दिया जाता है कि साहब जानकारी नहीं आप तो ''सेवा'' बताईये क्या पेश कर दूं....।
और यदि इस ''सेवा'' की बात सुनकर कोई आम व्यक्ति नाराज होकर अधिकारियों से सही काम करने की बात कहे तो फिर सीधे यहाँ कहा जाता है कि आप चाहे जों करें, मुख्यमंत्री से कहें या कलेक्टर से कह दे, हमारा कुछ नहीं होगा...नीचे से लेकर ऊपर तक करप्शन है...सभी इसमें लिप्त हैं....आप भी जुड़ जाईये वरना जो बने कर लीजिये....।
शहर में स्थापित एक शासकिय कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार का चरम इसी बात से इंगित हो जाता है कि यहाँ कोई जानकारी देने के नाम छोटा-सा बाबू भी यह कह देता कि साहब सेवा बताईये और मेवा खाईये। जिस विभाग से आने वाली पीढ़ी, जच्चा-बच्चे का स्वास्थ्य, कुपोषण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे जुडे हैं, जिस विभाग से लाड़ली लक्ष्मी योजना जुड़ी है, उस विभाग में भ्रष्टाचार का यह आलम है।
मवेशी चराने की बात पर हत्या, तीन घायल
सीहोर 3 अक्टूबर (नि.सं.) अहमदपुर थाना क्षेत्र के ग्राम कऊखेड़ी में मवेशी भगाने की बात को लेकर हुई मारपीट में पिता-पुत्र सहित चार लोग घायल हो गये। जिन्हें उपचार हेतु श्यामपुर भर्ती पिता की बीती रात मौत हो गई।
कऊखेड़ी निवासी नारायण देशवाली उम्र 60 वर्ष एवं बाबूलाल का खेत पास-पास हैं। गुरुवार की शाम करीबन 4 बजे दिनेश व अवधेश की मवेशी नारायण सिंह के सोयाबीन के खेत में आ गई थी जिन्हें भगाने नारायण सिंह का पुत्र भैयालाल गया वही पास में बाबूलाल बगैरह भी अपने खेत पर थे भैयालाल को अवधेश, दिनेश मारपीट करने लगे जिसे बचाने नारायण सिंह अपने पुत्र मुकेश के साथ गया तभी मांगीलाल, प्रकाश, बाबूलाल सामने से रास्ते में रोककर मारपीट करने लगे। बीच बचाव करने आये अशोक के साथ भी इन लोगों ने मारपीट की घायल नारायण सिंह एवं उसके पुत्र भैया लाल को प्राथमिक उपचार हेतु श्यामपुर अस्पताल में दाखिल कराया गया जहां पर नारायण सिंह की रात्रि में मौत हो गई।
कऊखेड़ी निवासी नारायण देशवाली उम्र 60 वर्ष एवं बाबूलाल का खेत पास-पास हैं। गुरुवार की शाम करीबन 4 बजे दिनेश व अवधेश की मवेशी नारायण सिंह के सोयाबीन के खेत में आ गई थी जिन्हें भगाने नारायण सिंह का पुत्र भैयालाल गया वही पास में बाबूलाल बगैरह भी अपने खेत पर थे भैयालाल को अवधेश, दिनेश मारपीट करने लगे जिसे बचाने नारायण सिंह अपने पुत्र मुकेश के साथ गया तभी मांगीलाल, प्रकाश, बाबूलाल सामने से रास्ते में रोककर मारपीट करने लगे। बीच बचाव करने आये अशोक के साथ भी इन लोगों ने मारपीट की घायल नारायण सिंह एवं उसके पुत्र भैया लाल को प्राथमिक उपचार हेतु श्यामपुर अस्पताल में दाखिल कराया गया जहां पर नारायण सिंह की रात्रि में मौत हो गई।
गाँधी जयंती पर बिका खूब मांस न कांग्रेस जागी ना भाजपा, पुलिस वाला ले गया रुपये
सीहोर 3 अक्टूबर (नि.सं.)। भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की जयंती अहिंसा दिवस के रुप में भारत वर्ष में मनाया जाता है लेकिन सीहोर में इसका कोई असर देखने को नहीं मिलता। अहिंसा दिवस पर जहाँ पूरे भारत वर्ष में मांस व शराब बिक्रय प्रतिबंधित रहता है वहीं सीहोर में खुले आम मांस बिक्रय होता रहा । इतना ही नहीं एक पुलिस वाले ने तो यहाँ से खुले आम उगाई भी कर ली और छूट दे दी।
मछली बाजार में प्रतिदिन की भांति मांस का बिक्रय कल गाँधी जयंती अहिंसा दिवस पर भी जमकर हुआ। न इन्हे कोई टोकने वाला था ना रोकने वाला था। हालांकि यहाँ दुकानदारों को मालूम है कि इस दिन दुकान बंद रखना है लेकिन जब बंद कराने वालों से ही सांठगांठ हो जाये तो यह लोग दुकान क्याें बंद रखे। इसलिये उन्होने दुकान खोल ली, इन्हे सुरक्षा देते हुए एक पुलिस वाले ने आकर इनसे रुपये की उगाई भी की। इस प्रकार अहिंसा दिवस मांस विक्रय के साथ सीहोर में मनाया गया।
मछली बाजार में प्रतिदिन की भांति मांस का बिक्रय कल गाँधी जयंती अहिंसा दिवस पर भी जमकर हुआ। न इन्हे कोई टोकने वाला था ना रोकने वाला था। हालांकि यहाँ दुकानदारों को मालूम है कि इस दिन दुकान बंद रखना है लेकिन जब बंद कराने वालों से ही सांठगांठ हो जाये तो यह लोग दुकान क्याें बंद रखे। इसलिये उन्होने दुकान खोल ली, इन्हे सुरक्षा देते हुए एक पुलिस वाले ने आकर इनसे रुपये की उगाई भी की। इस प्रकार अहिंसा दिवस मांस विक्रय के साथ सीहोर में मनाया गया।
सड़क हादसे में 6 घायल
सीहोर 3 अक्टूबर (नि.सं.)जिले के तीन थाना क्षेत्रों में हुये-अलग-अलग सड़क हादसों में एक बालक सहित 06 लोग घायल हो गये। पुलिस ने सभी मामले दर्ज कर लिये है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नादानपुरा निवासी फरीद खाँ उम्र 40 वर्ष गुरुवार को दोपहर अपनी बाइक से भोपाल की तरफ जा रहा था तभी झरखेड़ा स्थित बस स्टेण्ड के समीप जीप क्रमांक एम.पी. 04 एच. 4658 के चालक ने तेजगति एवं लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुये फरीद खां को टक्कर मारकर घायल कर दिया।
इसी प्रकार आज सुबह झरखेड़ा मोड़ के समीप अज्ञात वाहन चालक ने शंकर आ. रम्लू पंवार 45 साल निवासी संगम निजामाबाद को लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुये टक्कर मारकर घायल कर दिया। दोनों घायलों को उपचार हेतु हमीदिया अस्पताल भोपाल में भर्ती कराया गया है।
इधर सिद्दीकगंज थाना क्षेत्र में ग्राम देवनखेडी निवासी रतनसिंह के 4 वर्षीय पुऋ गुलशन को रोड क्रास करते समय ग्राम के हरनाथ अजा. ने लापरवाहीपूर्वक बैलगाड़ी चलाकर टक्कर मारकर पहिया पैर पर चढ़ा कर घायल कर दिया।
आष्टा थाना क्षेत्र में आष्टा शुजालपुर मार्ग पर हर्राजखेडी ज़ोड के समीप दो बाइक की टक्कर में तीन लोग घायल हो गये। जानकारी के अनुसार ग्राम हर्राजखेड़ी निवासी लखनलाल आज सुबह अपनी काकी रेशमबाई व बच्ची को आष्टा से लेकर अपनी बाइक से हर्राजखेडी ज़ा रहा था तभी जोड के समीप पीछे से आ रहे बाइक सवार चालक ने तेजगति एवं लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाकर उसकी वाहन में टक्कर मार दी।
परिणामस्वरूप लखनलाल व रेशमबाई तथा बाइक सवार संजय जावरिया इस घटना में घायल हो गये।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नादानपुरा निवासी फरीद खाँ उम्र 40 वर्ष गुरुवार को दोपहर अपनी बाइक से भोपाल की तरफ जा रहा था तभी झरखेड़ा स्थित बस स्टेण्ड के समीप जीप क्रमांक एम.पी. 04 एच. 4658 के चालक ने तेजगति एवं लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुये फरीद खां को टक्कर मारकर घायल कर दिया।
इसी प्रकार आज सुबह झरखेड़ा मोड़ के समीप अज्ञात वाहन चालक ने शंकर आ. रम्लू पंवार 45 साल निवासी संगम निजामाबाद को लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुये टक्कर मारकर घायल कर दिया। दोनों घायलों को उपचार हेतु हमीदिया अस्पताल भोपाल में भर्ती कराया गया है।
इधर सिद्दीकगंज थाना क्षेत्र में ग्राम देवनखेडी निवासी रतनसिंह के 4 वर्षीय पुऋ गुलशन को रोड क्रास करते समय ग्राम के हरनाथ अजा. ने लापरवाहीपूर्वक बैलगाड़ी चलाकर टक्कर मारकर पहिया पैर पर चढ़ा कर घायल कर दिया।
आष्टा थाना क्षेत्र में आष्टा शुजालपुर मार्ग पर हर्राजखेडी ज़ोड के समीप दो बाइक की टक्कर में तीन लोग घायल हो गये। जानकारी के अनुसार ग्राम हर्राजखेड़ी निवासी लखनलाल आज सुबह अपनी काकी रेशमबाई व बच्ची को आष्टा से लेकर अपनी बाइक से हर्राजखेडी ज़ा रहा था तभी जोड के समीप पीछे से आ रहे बाइक सवार चालक ने तेजगति एवं लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाकर उसकी वाहन में टक्कर मार दी।
परिणामस्वरूप लखनलाल व रेशमबाई तथा बाइक सवार संजय जावरिया इस घटना में घायल हो गये।
जमकर बरसे बादल...
आष्टा 3 अक्टूबर (नि.प्र.) आष्टा क्षेत्र में बादल बरसने जैसे तो बन रहे है लेकिन बरस नहीं रहे किसानों की इच्छा है एक बार पूरे क्षेत्र में बरस जाये तो गेंहू-चने की बोवनी हो जाये। लेकिन कल इन्द्र देवता सिद्दीकगंज क्षेत्र में मेहरबान हो गये बताया जाता है कल भी देर रात तक सिद्दीकगंज क्षेत्र में पानी जमकर बरसा सड़कों पर बह निकला कल हुई बरसात से इस क्षेत्र में उन सभी खेतों में बोवनी की तैयारी किसानों ने शुरु कर दी है जहां पानी बरसा है बताते हे कि कल इतना पानी बरसा की रामपुरा डेम में आधा फिट पानी बढ़ गया है।
विधानसभा की मतदाता सूची का हुआ प्रकाशन, 2610 नाम काटे और 5 हजार नये नाम जोड़े
आष्टा 3 अक्टूबर (सुशील संचेती) लम्बी जांच के बाद तैयार हुई आष्टा विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 158 की मतदाता सूची का 30 सितम्बर को अंतिम प्रकाश कर दिया गया निर्वाचन आयोग के निर्देश पर कल आष्टा विधानसभा क्षेत्र के सभी 248 मतदान केन्द्रों पर तैयार की गई फोटो युक्त मतदाता सूची का प्रकाशन कर मतदाताओं ने निरीक्षण के लिए रखी गई है जहां पहुंचकर मतदाता अपने नाम देखकर अगर कोई त्रुटी हो तो आपत्ति दर्ज कर सकते है। आज आष्टा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची के हुए अंतिम प्रकाशन के अनुसार अब आष्टा विधानसभा क्षेत्र में 1 लाख 75 हजार 696 मतदाता हो गये है। इसमें 99 हजार 279 पुरुष एवं 84 हजार 417 महिला मतदाता है। जबकि 30 जून 08 के पहले आष्टा विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाता 1 लाख 73 हजार 997 मतदाता थे इस प्रकार आष्टा विधानसभा क्षेत्र में 1699 मतदाताओं का इजाफा हुआ है। आज इस सम्बन्ध में सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी श्री बिहारी सिंह तहसीलदार आष्टा ने फुरसत को बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देश पर 30 जून से 15 जुलाई तक आष्टा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची का संक्षिप्त पुर्नरिक्षण कार्य किया गया था। 30 सितम्बर को सभी कार्यपूर्ण होने के बाद आष्टा विधान सभा क्षेत्र की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन सभी मतदान केन्द्रों पर कर दिया गया है। अंतिम प्रकाशन के पहले 30 सितम्बर से 15 जुलाई के बीच हमारे पास नये नाम जोड़ने के लिए 6176 आवेदन आये थे जांच में 5634 आवेदन स्वीकृत कर इन नये नामों को मतदाता के रूप में जोडे गये शेष 542 आवेदन अस्वीकृत किये गये। इसी प्रकार 2611 आवेदन नाम काटे जाने के आवेदन प्राप्त हुए थे इसमें 2610 स्वीकृत किये गये थे एवं 1 आवेदन आस्वीकृत किया गया था। इसी प्रकार 647 आवेदन ऐसे मतदाताओं के प्राप्त हुए थे जो इधर से उधर चले गये थे उनके नाम एक जगह से हटाकर दूसरी जगह पर जोड़े गये। श्री बिहारी सिंह ने फुरसात को बताया कि आष्टा विधानसभा क्षेत्र के 1 लाख 75 हजार 969 मतदाओं मं से 1 लाख 66 हजार 738 मतदाताओं के फोटो मतदाता सूची में आ गये है शेष 8959 मतदाता ऐसे है जिनके कई प्रयास के बाद फोटो नहीं हो पाये है।
मतदान केन्द्र बढ़े :-आष्टा विधासभा क्षेत्र में पहले 190 मतदान केन्द्र थे अब मतदान केन्द्रों के सम्बंध में निर्वाचन आयोग के आये निर्देशों के बाद आष्टा विधान सभा क्षेत्र में 248 मतदान केन्द्र हो गये है 30 सितम्बर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन भी इसी हिसाब से कर सभी 248 मतदान केन्द्र हो गये है 30 सितम्बर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन भी इसी हिसाब से कर सभी 248 मतदान केन्द्रों पर निरीक्षण के लिए रखी गई है।
ग्रामों की स्थिति :-आष्टा तहसील में कुल 302 ग्राम है इसमें से 14 वनग्राम है 270 राजस्व ग्राम है तथा 18 ऐसे ग्राम है जिनके नाम तो है लेकिन इन ग्रामों में कोई रहता ही नहीं है इसलिए इन 18 ग्रामों को विरान ग्राम की श्रेणी में रखा गया है।
5 हजार पहली बार वोट डालेंगे :- इस बार होने वाले विधानसभा के चुनाव में 5092 ऐसे नये मतदाता मतदाता सूची में जुडे है जो पहली बार मतदान करेंगे। अंतिम प्रकाशन के पहले आष्टा क्षेत्र में 6176 नये मतदाताओं ने नाम जोड़ने के आवेदन किये थे जांच में इसमें से 542 आवेदन अस्वीकृत कर दिये थे शेष 5092 के नाम मतदाता के रूप में जोड दिये गये है।
मतदान केन्द्र बढ़े :-आष्टा विधासभा क्षेत्र में पहले 190 मतदान केन्द्र थे अब मतदान केन्द्रों के सम्बंध में निर्वाचन आयोग के आये निर्देशों के बाद आष्टा विधान सभा क्षेत्र में 248 मतदान केन्द्र हो गये है 30 सितम्बर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन भी इसी हिसाब से कर सभी 248 मतदान केन्द्र हो गये है 30 सितम्बर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन भी इसी हिसाब से कर सभी 248 मतदान केन्द्रों पर निरीक्षण के लिए रखी गई है।
ग्रामों की स्थिति :-आष्टा तहसील में कुल 302 ग्राम है इसमें से 14 वनग्राम है 270 राजस्व ग्राम है तथा 18 ऐसे ग्राम है जिनके नाम तो है लेकिन इन ग्रामों में कोई रहता ही नहीं है इसलिए इन 18 ग्रामों को विरान ग्राम की श्रेणी में रखा गया है।
5 हजार पहली बार वोट डालेंगे :- इस बार होने वाले विधानसभा के चुनाव में 5092 ऐसे नये मतदाता मतदाता सूची में जुडे है जो पहली बार मतदान करेंगे। अंतिम प्रकाशन के पहले आष्टा क्षेत्र में 6176 नये मतदाताओं ने नाम जोड़ने के आवेदन किये थे जांच में इसमें से 542 आवेदन अस्वीकृत कर दिये थे शेष 5092 के नाम मतदाता के रूप में जोड दिये गये है।
Thursday, October 2, 2008
नवरात्र: तरह-तरह के हवन-पूजन में लगे विभिन्न उम्मीद्वार
सीहोर 1 अक्टूबर (नि.सं.)। आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर खींचा-तानी और टिकिट की मारा-मारी के बीच ही माँ दुर्गा के सिध्द नवरात्र भी आ गये हैं इसका पूरा-पूरा लाभ उठाकर कुछ उम्मीद्वार तांत्रिक प्रयोग में जुट गये हैं, कुछ सर्वार्थसिध्दी मनोरथ, कुछ मनोवांछित फल की प्राप्ति और कुछ अपने दुश्मनों को निपटाने के प्रयोजन के तहत पूजन-पाठ, हवन, यज्ञ, अनुष्ठान के साथ ही साधनारत हैं। विभिन्न बाबाओं के चक्कर काटने के अलावा कुछ ने अपने घरों पर सिध्द साधुओं को बुलाना शुरु कर दिया है। पंडितों से पूजन-पाठ भी शुरू हो गई। मारण, मोहन, स्तंभन, उच्चाटन, कीलन, वशीकरण, आकर्षण से लेकर तरह-तरह के प्रयोग जारी हैं। नवरात्र में इस बार यादा धार्मिक कर्म हो रहे हैं।
यूँ तो हर साल नवरात्री आती है पर इस साल की नवरात्री कुछ विशेष है क्योंकि आगामी कुछ ही दिनों के अंदर जहाँ कांग्रेस और भाजपा पार्टी के विभिन्न दावेदारों की दावेदारी पक्की होने वाली है, पार्टियों द्वारा अपनी-अपनी पार्टी के उम्मीद्वार का चयन करके उसकी घोषणा की जानी है वहीं इन दोनो ही प्रमुख पार्टियों में काफी विवाद और असमंजस की स्थिति भी बनी हुई है।
धार्मिक नगरी सीहोर में जहाँ सिध्द चौसठ योगिनी मंदिर भी है और पीताम्बरा धाम भी मौजूद है, जहाँ तांत्रिक प्रयोगों में तथा देवी भागवत में उल्लेखित दसम महाविद्या काली, तारा, छिन्नमस्ता, बगलामुखी,षोडशी कमला, भुवनेश्वरी तक के मंदिर मौजूद हैं। जहाँ मानव निर्मित पहला शक्तिपीठ माँ ललिता त्रिपुरसुन्दरी विराजित हैं, जहाँ सिध्द सिध्दिदात्री मंदिर मौजूद हैं जहाँ वर्षों से अखण्ड योति जल रही है, ऐसी सिध्द भूमि के आमजन सहित खास लोग जो जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं वह भी देवी भक्ती में लीन रहते हैं।
नगर में ऐसे अधिकांश उम्मीद्वार जो कांग्रेस व भाजपा से लड़ने के इच्छुक हैं वह धार्मिक प्रवृत्ति के हैं और हनुमान जी के साथ ही साथ देवी के अनन्य भक्त भी हैं। ऐसे में नवरात्र की शुरुआत के साथ ही यह लोग भक्ति में लीन हो गये हैं। नवरात्र में देवी जाग्रत अवस्था में रहती हैं साथ ही यह नौ दिन तांत्रिक प्रयोगों के लिये सिध्द माने गये हैं। ऐसे में सभी प्रकार के मनोरथों की सिध्दि के लिये कुछ उम्मीद्वार पूजन-पाठ में लग गये हैं।
एक के यहाँ तो सिध्द महांकाल की नगरी और तांत्रिकों के गढ़ उजैनी से कुछ पंडितजन पधारे हैं वह लगातार हवन, अनुष्ठान करा रहे हैं। उम्मीद्वार ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सूर्योपासना के साथ ही साथ दिनभर विभिन्न स्त्रोतों के जाप में संलग् हैं। दूसरे जो अक्सर प्रसिध्द बगलामुखी देवी धाम दतिया जाते रहते हैं वह भी माता की पूजन में तत्पर हैं। दिनभर साधना करने में व्यस्त हैं। घर पर ही माँ की आराधना और मंत्र जाप में लगे हुए हैं। ऐसे साधक उम्मीद्वार माँ को किसी भी तरह मनाने के लिये कठोर साधना करते हुए उपवास भी रख रहे हैं।
एक भाजपाई उम्मीद्वार अभी एक देवी धाम से होकर लौट आये हैं और वह अनुष्ठान आदि कराकर आने की जानकारी व चर्चाएं चल रही हैं। टिकिट पाने की होड़ में ही यह धार्मिक आयोजन इन्होने किया है।
इसके अलावा कुछ अन्य उम्मीद्वार जो स्वयं पर भरोसा ना करते हुए अपने गुरुओं व सिध्द पुरुषो पर भरोसा करते हैं वह इस दौरान लगातार किसी ना किसी बाबा, सिध्द व्यक्ति, गणितज्ञ, योतिषी अथवा ऐसे स्थानों पर जा रहे हैं जहाँ कोई हवा आदि आती है। ऐसे स्थानों पर पहुँचकर यह उम्मीद्वार अपने भाग्य की जानकारी लेते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। लगभग हर दिन किसी ना किसी स्थान पर एकांत में या रात के समय अथवा छुपकर ऐसे उम्मीद्वार सिध्द लोगों से मिल रहे हैं और उनसे चर्चा कर अपने टिकिट की बात पूछ रहे हैं। दूरस्थ अंचलों में, शहरों में जहाँ भी इन्हे पता चल रहा है यह जाने में संकोच नहीं कर रहे।
कुछ सिध्द पंडितजन इस नवरात्र में अपनी पसंद के उम्मीद्वारों के लिये स्वयं के स्तर पर भी अनुष्ठान आदि जप साधना में लगे हैं ताकि नौ दिन की साधना के पश्चात वह अपने प्रिय के लिये देवी से कुछ मांग सकें।
इधर रक्षा कवच के लिये भी तरह-तरह के प्रयोगों से उम्मीद्वार अछूते नहीं हैं। आगामी दिनों में अथवा नवरात्र के दौरान इन पर कोई प्रयोग आदि ना हो सके इसके लिये जहाँ हनुमान जी का आशीर्वाद यह लगाकर ले रहे हैं वह श्रीराम रक्षा स्तोत्र से लेकर अन्य रक्षा के मंत्र, कवच का पाठ भी उम्मीद्वारों द्वारा नियमित किया जा रहा है।
यूँ तो हर साल नवरात्री आती है पर इस साल की नवरात्री कुछ विशेष है क्योंकि आगामी कुछ ही दिनों के अंदर जहाँ कांग्रेस और भाजपा पार्टी के विभिन्न दावेदारों की दावेदारी पक्की होने वाली है, पार्टियों द्वारा अपनी-अपनी पार्टी के उम्मीद्वार का चयन करके उसकी घोषणा की जानी है वहीं इन दोनो ही प्रमुख पार्टियों में काफी विवाद और असमंजस की स्थिति भी बनी हुई है।
धार्मिक नगरी सीहोर में जहाँ सिध्द चौसठ योगिनी मंदिर भी है और पीताम्बरा धाम भी मौजूद है, जहाँ तांत्रिक प्रयोगों में तथा देवी भागवत में उल्लेखित दसम महाविद्या काली, तारा, छिन्नमस्ता, बगलामुखी,षोडशी कमला, भुवनेश्वरी तक के मंदिर मौजूद हैं। जहाँ मानव निर्मित पहला शक्तिपीठ माँ ललिता त्रिपुरसुन्दरी विराजित हैं, जहाँ सिध्द सिध्दिदात्री मंदिर मौजूद हैं जहाँ वर्षों से अखण्ड योति जल रही है, ऐसी सिध्द भूमि के आमजन सहित खास लोग जो जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं वह भी देवी भक्ती में लीन रहते हैं।
नगर में ऐसे अधिकांश उम्मीद्वार जो कांग्रेस व भाजपा से लड़ने के इच्छुक हैं वह धार्मिक प्रवृत्ति के हैं और हनुमान जी के साथ ही साथ देवी के अनन्य भक्त भी हैं। ऐसे में नवरात्र की शुरुआत के साथ ही यह लोग भक्ति में लीन हो गये हैं। नवरात्र में देवी जाग्रत अवस्था में रहती हैं साथ ही यह नौ दिन तांत्रिक प्रयोगों के लिये सिध्द माने गये हैं। ऐसे में सभी प्रकार के मनोरथों की सिध्दि के लिये कुछ उम्मीद्वार पूजन-पाठ में लग गये हैं।
एक के यहाँ तो सिध्द महांकाल की नगरी और तांत्रिकों के गढ़ उजैनी से कुछ पंडितजन पधारे हैं वह लगातार हवन, अनुष्ठान करा रहे हैं। उम्मीद्वार ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सूर्योपासना के साथ ही साथ दिनभर विभिन्न स्त्रोतों के जाप में संलग् हैं। दूसरे जो अक्सर प्रसिध्द बगलामुखी देवी धाम दतिया जाते रहते हैं वह भी माता की पूजन में तत्पर हैं। दिनभर साधना करने में व्यस्त हैं। घर पर ही माँ की आराधना और मंत्र जाप में लगे हुए हैं। ऐसे साधक उम्मीद्वार माँ को किसी भी तरह मनाने के लिये कठोर साधना करते हुए उपवास भी रख रहे हैं।
एक भाजपाई उम्मीद्वार अभी एक देवी धाम से होकर लौट आये हैं और वह अनुष्ठान आदि कराकर आने की जानकारी व चर्चाएं चल रही हैं। टिकिट पाने की होड़ में ही यह धार्मिक आयोजन इन्होने किया है।
इसके अलावा कुछ अन्य उम्मीद्वार जो स्वयं पर भरोसा ना करते हुए अपने गुरुओं व सिध्द पुरुषो पर भरोसा करते हैं वह इस दौरान लगातार किसी ना किसी बाबा, सिध्द व्यक्ति, गणितज्ञ, योतिषी अथवा ऐसे स्थानों पर जा रहे हैं जहाँ कोई हवा आदि आती है। ऐसे स्थानों पर पहुँचकर यह उम्मीद्वार अपने भाग्य की जानकारी लेते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। लगभग हर दिन किसी ना किसी स्थान पर एकांत में या रात के समय अथवा छुपकर ऐसे उम्मीद्वार सिध्द लोगों से मिल रहे हैं और उनसे चर्चा कर अपने टिकिट की बात पूछ रहे हैं। दूरस्थ अंचलों में, शहरों में जहाँ भी इन्हे पता चल रहा है यह जाने में संकोच नहीं कर रहे।
कुछ सिध्द पंडितजन इस नवरात्र में अपनी पसंद के उम्मीद्वारों के लिये स्वयं के स्तर पर भी अनुष्ठान आदि जप साधना में लगे हैं ताकि नौ दिन की साधना के पश्चात वह अपने प्रिय के लिये देवी से कुछ मांग सकें।
इधर रक्षा कवच के लिये भी तरह-तरह के प्रयोगों से उम्मीद्वार अछूते नहीं हैं। आगामी दिनों में अथवा नवरात्र के दौरान इन पर कोई प्रयोग आदि ना हो सके इसके लिये जहाँ हनुमान जी का आशीर्वाद यह लगाकर ले रहे हैं वह श्रीराम रक्षा स्तोत्र से लेकर अन्य रक्षा के मंत्र, कवच का पाठ भी उम्मीद्वारों द्वारा नियमित किया जा रहा है।
जिलाधीश के वाहन में लगी आग, बचे
सीहोर 1 अक्टूबर (नि.सं.)। आज जिलाधीश श्री आहूजा जब सलकनपुर माता धाम से होते हुए भोपाल मार्ग से जब सीहोर आ रहे थे तब शाम के समय भोपाल पुलिस नियंत्रण कक्ष के पास से ही इनका वाहन निकला। यहीं अचानक जिलाधीश के वाहन में शार्ट सर्किट होने के कारण आग लग गई लेकिन तुरत-फुरत में इस पर काबू पा लिया गया।
अगर मुझे टिकिट मिला तो निश्चित जीतकर आऊंगा सर्वाधिक चर्चित कांग्रेस के दावेदार अक्षत कासट से फुरसत की बातचीत
सीहोर 1 अक्टूबर (नि.सं.)। कांग्रेस की राजनीति में जहाँ पूर्व से कई दिग्गज सीहोर में मौजूद हैं वहीं अचानक कांग्रेस नेता के रुप में उभरे राष्ट्रीय स्तर तक दमखम रखने वाले अक्षत कासट ने भी अपनी पैठ बहुत अल्पसमय बना ली है। आज स्थिति यह है कि आश्चर्य किंतु सत्य जैसी स्थिति के रुप में अक्षत को जाना-पहचाना जाने लगा है। कांग्रेस के प्रति निष्ठावान कासट परिवार से जुड़े अक्षत कासट सीधे विधान सभा सीट के कांग्रेस से उम्मीद्वार के रुप में सर्वाधिक चर्चा में हैं। एक दिल्ली से प्रकाशित खबर में तो सीहोर विधान सभा सीट से कांग्रेस में पहले अक्षत कासट का नाम भी प्रकाशित हो गया है। कुल मिलाकर अक्षत कासट का नाम चहुँ और हैं और आज सर्वाधिक चर्चा में भी है। हालांकि अक्षत कासट की सक्रियता ने सीहोर के कांग्रेसी नेताओं की नींद में जरुर खलल डाल दिया है। अब तो बस यही देखना शेष है कि किसको टिकिट कांग्रेस देती है क्या कहीं राहुल गाँधी के युवाओं को आगे लाने वाली राजनीतिक सूझबूझ के चलते अक्षत कासट को तो कांग्रेस से टिकिट नहीं मिल जायेगा। उक्त अनेक प्रश्ों के संबंध में आज कांग्रेस से सर्वाधिक चर्चित अक्षत कासट से फुरसत ने बातचीत की।
आपका नाम पैनल में जोड़ा गया है, इसके बारे में आप क्या कहना चाहते हैं ?
अक्षत ने कहा - निश्चित तौर पर यह श्रेय सीहोर विधानसभा क्षेत्र के युवा वर्ग को जाता है, जिनके स्नेह और विश्वास ने मुझे इस काबिल बनाया है। मैने निश्चित अपना पक्ष कांग्रेस के बड़े नेताओं के समक्ष रखा और उन्होने मेरे नाम पे विचार करने का निश्चय किया है, यह बात सत्य है कि सीहोर विधानसभा का फैसला ही नहीं बल्कि पूरे जिले के प्रत्याशियों का फैसला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं सभी बड़े नेताओं की आम सहमति के साथ तय होगा, कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है, चाहे पार्टी किसी को भी टिकिट दे, जहाँ तक मेरा या मेरे परिवार की बात है, हम तीन पीढ़ियों से कांग्रेसी हैं और कांग्रेस के प्रत्याशियों के लिये तन, मन, और धन से काम करते आये हैं और करते रहेंगे। मुझे टिकिट मिला तो निश्चित ही जीतकर आऊंगा। कासट परिवार का इतिहास सबके सामने हैं, हमने कभी भी पार्टी और जनता की पीठ में छुरा घोपने जैसे काम के बारे में सपने में भी नहीं सोचा। पार्टी का निर्णय सर्वमान्य है, यह अलग बात है कि पार्टी के बड़े नेताओं को भी पार्टी के प्रति निष्ठावान लोगों की भावनाओं का समुचित ख्याल रखना होगा। श्री कासट ने कहा कि पार्टी किसी ऐसे आदमी को टिकिट ना देवे जिसका संगठन में और उसके कार्यक्रमों में कभी भी योगदान नहीं रहा हो।
जब अक्षत कासट से पूछा कि यदि मान लीजिये आपको कांग्रेस प्रत्याशी बना भी दे तो शहर के प्रति आपकी क्या प्राथमिकताएं रहेंगी ?
इस पर अक्षत कासट ने कहा कि युवाओं को रोजगार, नये उद्योग-धंधों की स्थापना, पूराने एवं बंद पड़े उद्योग को पुनर्जीवित करने का बीड़ा, किसाने भाईयों को बिजली एवं पानी की समस्या से निजात दिलाने जैसी बातें मेरी प्राथमिकता रहेगी। पार्वती के द्वितीय चरण को शुरु करना, शहरी क्षेत्र में सड़क का निर्माण मेरा लक्ष्य रहेगा।
और जब अक्षत से पूछा मान लीजिये प्रदेश में भाजपा की सरकार है ? आप विधायक बन जायेंगे तो फिर भाजपा की सरकार से पहले तो चुनाव में ही कैसे मुकाबला करेंगे ?
अक्षत कासट ने सीधे कहा कि भाजपा की भ्रष्ट सरकार, भ्रष्ट मुख्यमंत्री और भ्रष्ट मंत्रियों की टोली और विधायकों की पोल खुल चुकी है इस सरकार के काले कारनामे जनता जनार्दन के सामने आ चुके हैं, आज का मतदाता भी बहुत समझदार है वो सब जानता है, शिवराज सिंह चौहान के दिन पूरे हो चुके हैं, जनता अपना मत कांग्रेस के पक्ष मैं देने का फैसला कर चुकी है, नतीजे अपूर्व ही सामने आ जायेंगे।
कांग्रेस में जिसको टिकिट मिलता है सब उसके पीछे पड़ जाते हैं? और उम्मीद्वार अकेला पड़ जाता है बाकी उसके विरोध में नजर आते हैं? क्या आपके साथ ऐसी स्थिति नहीं बनेगी ? आपको क्या लगता है ? क्या कमल छाप कांग्रेसी आपको छोड़ेंगे ? क्या भाजपाई उम्मीद्वारों को चंदा देने वाले कांग्रेस नेता आपका सहयोग करेंगे ?
अक्षत कासट ने इस प्रश् का उत्तर भी एक गंभीर कांग्रेसी के रुप में देते हुए कहा कि जहाँ तक संगठन की बात है, हमें निश्चित ही आदरणीय सुरेश पचौरी जी के रुप में आज तक के सबसे कारगुजार अध्यक्ष मिले हैं उनकी संगठन के प्रति समर्पण भाव और बातें कार्य कौशल से कौन परिचित नहीं है, उनके संगठन पे पकड़े, कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद और संगठन को मजबूत करने का दृंढ निश्चय ही तो उनकी कार्यशैली की विशिष्टता को दर्शाता है। जिन परिस्थितियों में उन्होने प्रदेश अध्यक्ष का पद ग्रहण कर कार्यकर्ताओं में एक नई उर्जा का संचार कर दिया है। छिंदवाड़ा में एकता सम्मेलन को मूर्तरुप देकर भाजपा को भयाक्रांत कर देना यह केवल पचौरी जी जैसे कुशल संगठनात्मक व्यक्ति के ही बस की बात है। सोनिया जी से लेकर, कमल नाथ जी, दिग्विजय सिंह जी, योति-रादित्य सिंधिया जी एवं तमाम सारे बड़े नेताओं के सहयोग के चलते पचौरी जी की अगवानी में हम आने वाले विधानसभा चुनावों में बहुमत हासिल कर रहे हैं, माध्द सीहोर विधानसभा ही नहीं वरन पूरे जिले के कांग्रेसी कार्यकर्ता एवं सभी सम्मानित नेतागण भी इस बात को भली भांति समझ चुके हैं और छिंदवाड़ा एकता सम्मेलन से सीख लेकर एकजुट हो चुके हैं। कांग्रेस में टिकिट की संभावित उम्मीद्वार को एक स्वस्थ प्रतियोगिता के रुप में जाना जाता है, इक्का-दुक्का नेताओं के कु-प्रयासों से संगठन पर फर्क नहीं पड़ता, कांग्रेस पार्टी एक विशाल परिवार की तरह है और सोनिया जी एवं राहुल जी के सदप्रयासों से जनता की अविरल सेवा जारी रहेगी।
कांग्रेस में टिकिट को लेकर चल रहे नामों में एक नये और सर्वाधिक चर्चित नाम अक्षत कासट से हुई बातचीत जस की तस इस प्रकार रही। देखते हैं आगामी दिनों में कांग्रेस में क्या कुछ होता है ?
आपका नाम पैनल में जोड़ा गया है, इसके बारे में आप क्या कहना चाहते हैं ?
अक्षत ने कहा - निश्चित तौर पर यह श्रेय सीहोर विधानसभा क्षेत्र के युवा वर्ग को जाता है, जिनके स्नेह और विश्वास ने मुझे इस काबिल बनाया है। मैने निश्चित अपना पक्ष कांग्रेस के बड़े नेताओं के समक्ष रखा और उन्होने मेरे नाम पे विचार करने का निश्चय किया है, यह बात सत्य है कि सीहोर विधानसभा का फैसला ही नहीं बल्कि पूरे जिले के प्रत्याशियों का फैसला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं सभी बड़े नेताओं की आम सहमति के साथ तय होगा, कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है, चाहे पार्टी किसी को भी टिकिट दे, जहाँ तक मेरा या मेरे परिवार की बात है, हम तीन पीढ़ियों से कांग्रेसी हैं और कांग्रेस के प्रत्याशियों के लिये तन, मन, और धन से काम करते आये हैं और करते रहेंगे। मुझे टिकिट मिला तो निश्चित ही जीतकर आऊंगा। कासट परिवार का इतिहास सबके सामने हैं, हमने कभी भी पार्टी और जनता की पीठ में छुरा घोपने जैसे काम के बारे में सपने में भी नहीं सोचा। पार्टी का निर्णय सर्वमान्य है, यह अलग बात है कि पार्टी के बड़े नेताओं को भी पार्टी के प्रति निष्ठावान लोगों की भावनाओं का समुचित ख्याल रखना होगा। श्री कासट ने कहा कि पार्टी किसी ऐसे आदमी को टिकिट ना देवे जिसका संगठन में और उसके कार्यक्रमों में कभी भी योगदान नहीं रहा हो।
जब अक्षत कासट से पूछा कि यदि मान लीजिये आपको कांग्रेस प्रत्याशी बना भी दे तो शहर के प्रति आपकी क्या प्राथमिकताएं रहेंगी ?
इस पर अक्षत कासट ने कहा कि युवाओं को रोजगार, नये उद्योग-धंधों की स्थापना, पूराने एवं बंद पड़े उद्योग को पुनर्जीवित करने का बीड़ा, किसाने भाईयों को बिजली एवं पानी की समस्या से निजात दिलाने जैसी बातें मेरी प्राथमिकता रहेगी। पार्वती के द्वितीय चरण को शुरु करना, शहरी क्षेत्र में सड़क का निर्माण मेरा लक्ष्य रहेगा।
और जब अक्षत से पूछा मान लीजिये प्रदेश में भाजपा की सरकार है ? आप विधायक बन जायेंगे तो फिर भाजपा की सरकार से पहले तो चुनाव में ही कैसे मुकाबला करेंगे ?
अक्षत कासट ने सीधे कहा कि भाजपा की भ्रष्ट सरकार, भ्रष्ट मुख्यमंत्री और भ्रष्ट मंत्रियों की टोली और विधायकों की पोल खुल चुकी है इस सरकार के काले कारनामे जनता जनार्दन के सामने आ चुके हैं, आज का मतदाता भी बहुत समझदार है वो सब जानता है, शिवराज सिंह चौहान के दिन पूरे हो चुके हैं, जनता अपना मत कांग्रेस के पक्ष मैं देने का फैसला कर चुकी है, नतीजे अपूर्व ही सामने आ जायेंगे।
कांग्रेस में जिसको टिकिट मिलता है सब उसके पीछे पड़ जाते हैं? और उम्मीद्वार अकेला पड़ जाता है बाकी उसके विरोध में नजर आते हैं? क्या आपके साथ ऐसी स्थिति नहीं बनेगी ? आपको क्या लगता है ? क्या कमल छाप कांग्रेसी आपको छोड़ेंगे ? क्या भाजपाई उम्मीद्वारों को चंदा देने वाले कांग्रेस नेता आपका सहयोग करेंगे ?
अक्षत कासट ने इस प्रश् का उत्तर भी एक गंभीर कांग्रेसी के रुप में देते हुए कहा कि जहाँ तक संगठन की बात है, हमें निश्चित ही आदरणीय सुरेश पचौरी जी के रुप में आज तक के सबसे कारगुजार अध्यक्ष मिले हैं उनकी संगठन के प्रति समर्पण भाव और बातें कार्य कौशल से कौन परिचित नहीं है, उनके संगठन पे पकड़े, कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद और संगठन को मजबूत करने का दृंढ निश्चय ही तो उनकी कार्यशैली की विशिष्टता को दर्शाता है। जिन परिस्थितियों में उन्होने प्रदेश अध्यक्ष का पद ग्रहण कर कार्यकर्ताओं में एक नई उर्जा का संचार कर दिया है। छिंदवाड़ा में एकता सम्मेलन को मूर्तरुप देकर भाजपा को भयाक्रांत कर देना यह केवल पचौरी जी जैसे कुशल संगठनात्मक व्यक्ति के ही बस की बात है। सोनिया जी से लेकर, कमल नाथ जी, दिग्विजय सिंह जी, योति-रादित्य सिंधिया जी एवं तमाम सारे बड़े नेताओं के सहयोग के चलते पचौरी जी की अगवानी में हम आने वाले विधानसभा चुनावों में बहुमत हासिल कर रहे हैं, माध्द सीहोर विधानसभा ही नहीं वरन पूरे जिले के कांग्रेसी कार्यकर्ता एवं सभी सम्मानित नेतागण भी इस बात को भली भांति समझ चुके हैं और छिंदवाड़ा एकता सम्मेलन से सीख लेकर एकजुट हो चुके हैं। कांग्रेस में टिकिट की संभावित उम्मीद्वार को एक स्वस्थ प्रतियोगिता के रुप में जाना जाता है, इक्का-दुक्का नेताओं के कु-प्रयासों से संगठन पर फर्क नहीं पड़ता, कांग्रेस पार्टी एक विशाल परिवार की तरह है और सोनिया जी एवं राहुल जी के सदप्रयासों से जनता की अविरल सेवा जारी रहेगी।
कांग्रेस में टिकिट को लेकर चल रहे नामों में एक नये और सर्वाधिक चर्चित नाम अक्षत कासट से हुई बातचीत जस की तस इस प्रकार रही। देखते हैं आगामी दिनों में कांग्रेस में क्या कुछ होता है ?
दिल्ली में पचौरी के बंगले से बेइज्जत होकर आया आष्टा का एक युवा कांग्रेस नेता...
आष्टा 1 अक्टूबर (नि.सं.)। अगर इज्जत पाना है तो पहले दूसरों की इात करना होगी, झूठ बोलकर या किसी के खिलाफ झूठी अफवाह फैलाने से कोई क्या कुछ पा सकता है नहीं ऐसे लोगों के केवल बेइज्जत ही होना पड़ता है और ऐसा ही कुछ हुआ है आष्टा के एक कांग्रेस के युवा नेता के साथ क्योंकि उक्त नेता इन दिनों एक झूठी अफवाह फैलाकर कुछ पाने की इच्छा लिये जब दिल्ली पहुंचे और दिल्ली में आष्टा से साथ गये एक वर्तमान पदाधिकारी जो टिकिट पाना चाहते है एक पूर्व पदाधिकारी जो टिकिट दिलाना चाहते है और एक अन्य युवा कांग्रेस का पदाधिकारी जो पूर्व पदाधिकारी का यसमेन है ये चारों दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी के बंगले पर पहुंचे पचौरी जी ने इन्हें देख लिये इन लोगों ने चर्चा करने की इच्छा जताई पचौरी जी इन चारों में से एक युवा नेता के द्वारा जो अफवाह झूठी उड़ाई जा रही है उसके बदले इसकी लू उतारना चाह रहे थे प्रथम दिन तो पचौरी जी कहीं निकल गये थे दोपहर बाद इनकी उनसे भेंट हुई बस पचौरी ने उक्त युवा नेता जो आजकल लोगों को टिकिट दिलाने दिल्ली ले जा रहा है को पास बुलाया और उसकी ऐली लू उतारी की शायद इस युवा नेता के भी तक के राजनीति जीवन में कभी किसी नेता ने सार्वजनिक रूप से नहीं उतारी होगी जैसे ही लू उतरना शुरु हुई साथ गये। 3 अन्य नेता घूमते नजर आये उस वक्त पचौरी जी के बंगले पर बताते हे 50-60 अन्य स्थानों के लोग थे।
पचौरी जी के बंगले से बेइात होकर लैटा उक्त युवक जो इन दिनों मुफलिसी का जीवन गुजार रहा है की बेइाती के किस्से आष्टा आते ही चौराहे-चौराहे सुनाये जा रहे है वही जो युवक बेइात होकर लौटा है वो खुद अपने किस्से सुना रहा है और उसमें यह भी जोड रहा है कि मैंने भी उन्हें पलटकर जवाब दिये है। जबकि ऐसा हुआ ही नहीं है उक्त युवा नेता इन दिनों एक झूठी अफवाह उड़ाने में लगा हुआ है और उक्त बात पचौरी के कानों तक भी जा पहुंची उसी का यह परिणाम रहा है कि उक्त युवक की पचौरी जी ने अपने बंगले पर ऐसी लू उतारी है कि शायद ही उक्त नेता अब कभी पचौरी के सामने आये।
पचौरी जी के बंगले से बेइात होकर लैटा उक्त युवक जो इन दिनों मुफलिसी का जीवन गुजार रहा है की बेइाती के किस्से आष्टा आते ही चौराहे-चौराहे सुनाये जा रहे है वही जो युवक बेइात होकर लौटा है वो खुद अपने किस्से सुना रहा है और उसमें यह भी जोड रहा है कि मैंने भी उन्हें पलटकर जवाब दिये है। जबकि ऐसा हुआ ही नहीं है उक्त युवा नेता इन दिनों एक झूठी अफवाह उड़ाने में लगा हुआ है और उक्त बात पचौरी के कानों तक भी जा पहुंची उसी का यह परिणाम रहा है कि उक्त युवक की पचौरी जी ने अपने बंगले पर ऐसी लू उतारी है कि शायद ही उक्त नेता अब कभी पचौरी के सामने आये।
क्या देवेन्द्र को जनशक्ति उम्मीद्वार बनायेगी.....?
सीहोर 30 सितम्बर (नि.सं.)। उमाश्री भारती की जनशक्ति के मजे चाहे जो, चाहे जैसे उठाने में व्यस्त नजर आ रहा है। जनशक्ति के ही एक पदाधिकारी तो पिछले दिनों विधानसभा चुनाव लड़ने के लिये अपने मित्रों से सहयोग की मांग भी करते नजर आ रहे थे लेकिन यह तो उनका हक था, पर नगर में जो जनशक्ति से कोसों दूर हैं वह भी जनशक्ति को अपनी जेब में बताने से चूक नहीं रहे हैं। विधायक रमेश सक्सेना के भतीजे देवेन्द्र सक्सेना को लेकर यह बातें बहुत तेजी से नगर में फैलाई जा रही हैं जो देवेन्द्र के ही घनिष्ठ मित्र धीरे-धीरे फैलाने में लगे हुए हैं यदि परिस्थिति अनुकूल नहीं हुई तो फिर अपने मतलब देवेन्द्र सक्सेना जनशक्ति से लड़ेंगे। लगता है जनशक्ति को सब अपनी गरीब की लुगाई मानकर बैठे हैं....या हो सकता है जनशक्ति वालों की ही इसमें कुछ हामी हो। खैर जो भी हो लेकिन यह चर्चा या अफवाह भी बाजार में छोड़ी जा चुकी है। पर क्या उमाश्री की जनशक्ति देवेन्द्र को उम्मीद्वार बना सकती है ? यह भी विचारणीय प्रश् है।
शीतला माता मंदिर में चोरी, चोर माता के गहने ले गये
आष्टा 1 अक्टूबर (नि.सं.)। जावर थाने के अन्तर्गत आने वाले ग्राम कजलास में पहाड़ी पर एक प्राचीन शीतला माता का मंदिर है कुछ दिनों पूर्व अज्ञात चोर उस वक्त माता जी के गहने जिसमें हार, कुंडल, मगल सूत्र आदि गहने चुरा ले गये। जब मंदिर के पुजारी श्री बद्री प्रसाद कजलास में एक शव यात्रा में शामिल होने गये थे। इस मंदिर समिति के उपाध्यक्ष फते सिंह भी बाहर गये हुए थे। अब लौटे तब पुजारी ने माता जी के गहने चोरी जाने की बात उन्हे बताई आज फते सिंह ने जावर थाने पहुँचकर उक्त चोरी की शिकायत दर्ज कराई।
मदरसों के द्वारा शासन को लगाया जा रहा है चूना
आष्टा 1 अक्टूबर (नि.प्र.)। आष्टा क्षेत्र में चल रहे कई मदरसों के द्वारा शासन से आई लाखों की राशि में गोल-माल करने तथा मदरसों में बच्चों को फर्जी नाम चढ़ा रखे है ऐसी अनेको गंभीर शिकायतों की जांच की मांग पत्रकार जहूर मंसूरी, युनूस अंसारी, बाबूभाई, चन्दूभाई, सलाम भाई, जाकिर भाई, नूर खां, शरीफ भाई, भययू भाई ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर की है कि कई ऐसे मदरसे है जहां 45 बच्चों पर एक टीचर होना चाहिये लेकिन यहां पर 15-20 बच्चे है और टीचर भी एक के स्थान पर दो-दो रखे गये है। कई मदरसों में बच्चों के फर्जी नाम जोड़ रखे है। जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि जुलाई माह में मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए शासन से स्कूल ड्रेस के लिए लाखों रुपये आये संचालकों ने उक्त पैसा निकाल भी लिया लेकिन आज भी मदरसों में कई बच्चे ऐसे है जिन्हें ड्रेस नहीं मिली है। ड्रेस कितनी बनी है, कितने बच्चे पड़ते है इसकी जांच हो तो बड़ा गोल माल का पता चलेगा। विज्ञप्ति जारी करने वालों ने कलेक्टर सीहोर से आष्टा तहसील के मदरसों की जांच कराने की मांग की है।
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