Monday, July 7, 2008

सीहोर के जैन, ब्राह्मण और बनिये खा रहे हैं खुले आम ‘’अण्डे’’ कहीं आप तो इनमें शामिल नहीं...

सीहोर 6 जुलाई (आनन्द भैया गाँधी)। जी हाँ अविश्वसीय किन्तु सत्य, हो सकता है आपके बच्चे खुशी-खुशी अंडे खा रहे हों और आपको मालूम भी ना चले। बाजार में मिलने वाले ऐसी अनेक खाद्य सामग्री मौजूद है जो अंडे से बन रही है और समय-समय पर आप व आपके परिजन भी इसे खाते रहते हैं। फुरसत ने इस संबंध में पूर्व में स्थानीय दुकानदारों को सलाह दी थी कि वह ऐसे अंडे के सामान के साथ अलग से जानकारी दें या एक बोर्ड लगायें कि यह सामान अंडे का है, लेकिन सीहोर के नामचीन दुकानदारों ने अंडे का सामान बेचना जारी रखा और लोगों को पता भी नहीं चला। आज स्थिति यह है कि सीहोर में हर जाति, धर्म, विशेषकर धार्मिक महिलाएं, जैन, ब्राह्मण, अग्रवाल, माहेश्वरी बनिया परिवार जहाँ मांस व अंडा वर्जित है उन परिवारों में भी अंडे की सामग्री भूल से आ जाती है और पूरा परिवार मिल जुलकर अंडे का सामान अनजाने में खा लेता है।

कैसे खाते हैं आप अंडे...ध्यान दीजिये

आज कल सीहोर के प्रसिध्द दुकानों पर, बड़ी-बड़ी नामचीन होटलों पर जहाँ आईस्क्रीम, नमकीन बंगाली मिठाईयाँ मिलती हैं वहीं केक के साथ ''पेस्ट्री'' भी मिलती है। जी हाँ पेस्ट्री गजब की स्वादिष्ट लगती है, एक तरह से यह छोटा केक होता है। ऊपर विभिन्न प्रकार के क्र ीम और नीचे केक जैसा स्वादिष्ट ब्रेड होती है। पेस्ट्री का हर कोई दीवाना है। आजकल पेस्ट्री खाना फेशन बनता जा रहा है। विशेषकर सीहोर नगर की बालिकाओं, नवयुवतियों, किशोरियों को पेस्ट्री का बुखार सा चढ़ा हुआ है। हर कोई पेस्ट्री की दीवानी है। आजकल समोसा-कचौड़ी नहीं बल्कि इन बड़ी दुकानों लोग पेस्ट्री खाना यादा पसंद करने लगे हैं। पूरे जिले में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में 'पेस्टी' अण्डे से ही बनती है। यह जानकारी दुकानदारों को बहुत अच्छे से है लेकिन वह खरीदने वालों को इसकी जानकारी नहीं देते हैं, और सीहोर के दुकानदार जानबूझकर अंडे वाली पेस्टी बेचते रहते हैं। उन्हे मालूम भी रहता है कि खाने वाले का धर्म उसे अंडे खाने की स्वीकृति नहीं देता तब भी यह दुकानदार उसे आगाह नहीं करते कि पेस्टी अंडे की है जो हम बेच रहे हैं।

पेस्टी में कितने मिलते हैं अंडे

सीहोर की प्रसिध्द बेकरी के दुकानदार व संचालक ने खुद का नाम छापने का मना करते हुए फुरसत से इस संबंध में विशेष बातचीत की व बताया कि सीहोर में भी पेस्टी बनाने की मशीन है, लेकिन पेस्टी बड़ी मात्रा में भोपाल से ही आती है। पेस्टी में मशीन के घान के हिसाब में 4 किलो मैदा, 4 किलो शक्कर के साथ 150 अण्डे डालना जरुरी है, अंडे कम यादा नहीं हो सकते। इतना अधिक अंडे डालने के बाद अच्छी और स्वादिष्ट पेस्टी बन पाती है। तो अब आप समझ ही गये होंगे कि एक पेस्टी में कितना अंडा होता है। कुल मिलाकर अंडे के खेल पर ही पेस्टी का निर्माण टिका हुआ है। पेस्टी की कल्पना अंडे के बिना की ही नहीं जा सकती है अंडे बिना पेस्टी बनाना संभव ही नहीं है। मशीन से पेस्टी का घोल बनता है ।

तो क्या बिना अंडे

का नहीं बनता केक?

जी हाँ कल हो या आज बाजार में मिलने वाला क्रीम का केक चाहे वो दुकानदार यह कहकर भी दे कि उसमें अंडा नहीं है, वह दुकानदार झूठ बोलता है। आप चाहें तो उस दुकानदार से बिना अंडे वाला केक खरीदें और उसका बिल बनवायें फिर खाद्य विभाग में लेबोरेटरी जांच कराकर ऐसे दुकानदारों को सजा भी दिलवा सकते हैं। असल में बिना अंडे का केक बनाया तो जा सकता है लेकिन उसमें वह स्वाद नहीं आता जो आम तौर पर बाजार के केक में रहता है। इसलिये चाहें तो आप बिना अंडे का केक जो दुकानदार बेचता है उससे कह सकते हैं कि हमारे सामने बनाया जाये तब स्थिति स्पष्ट हो जायेगी यदि केक में अंडा नहीं डाला जायेगा तो बेस्वाद होगा और बेकार लगेगा।

याद करें इसके पहले जब आप किसी दुकान पर बिना अंडे का केक लेने गये होंगे, उस दुकानदार से आपसे कहा होगा कि हम बनवा देंगे, आर्डर बुक कर दो, फिर वो बिना अंडे का केक के नाम से आपको केक दिया गया होगा।

कारीगर बोले-बिना अंडे का केक हमने कभी नहीं बनाया

लेकिन इस संबंध में जब फुरसत में गहन छानबीन की तो पता चला कि सीहोर के बेकरी निर्माताओं के उस्तादों ने बताया कि आज तक हमने अपने जीवन में बिना अंडे का केक नहीं बनाया है, जब हमने उनसे पूछा कि तो शायद भोपाल के उस्ताद बनाना जानते हों ? तब भोपाल की बड़ी बेकरी निर्माताओं के यहाँ के एक उस्ताद जिसने पिछले दिनों सीहोर में काम किया था उसने भी बताया कि हम हमेशा झूठ बोलते हैं क्योंकि मालिक और दुकानदार यही चाहता है कि अंडे का केक बनाया जाये और बिना अंडे का बताकर बेच दिया जाये। इस प्रकार जहाँ तक जानकारी मिलती है बाजार में बिकने वाला कोई भी ब्रेड-मैदे का केक जिस पर क्रीम आदि लगी होती है वो बिना अंडे का नहीं होता।

ऐसे फंसा सकते हैं

आप दुकानदार को

तो आगे से ध्यान रखियेगा कि आपको केक का खाने का मन हो, तो दुकानदार से अच्छी तरह बातचीत कर लें फिर जिस केक को दुकानदार बिना अंडे का बताये और कहें की इसमें अंडा नहीं है उस दुकानदार से एक रसीद लें और उस पर लिखवायें की बिना अंडे का केक और उसका मूल्य लिखवा लें। फिर वह कथित बिना अंडे का केक की जांच करवायें, शिकायत करें, लेबोरेटरी भेजें तथा एक मुकदमा दर्ज करायें क्योंकि उपरोक्त दुकानदार द्वारा आपका झूठ बोलकर धर्म भ्रष्ट किया जा रहा था, इसलिये आप उस पर ढेर सारे मुकद्मे दर्ज करवा सकते हैं। ताकि ऐसे दुकानदार को सजा भी मिल सके।

ब्राह्मण श्रेष्ठ सबसे यादा बेचते हैं अंडे की पेस्टी

सीहोर में कुछ नामचीन दुकानदार ऐसे हैं जो धर्म से तो ब्राह्मण हैं लेकिन यह अपने ग्राहक देवता का धर्म भ्रष्ट करने से बाज नहीं आते। यह लोग अंडे की बनी पेस्टी बेचते हैं जबकि ग्राहक को पता ही नहीं होता कि पेस्टी अंडे की है।

1 रुपये के खातिर यह ब्राह्मण समाज के दुकानदार अपने ही समाज के सैकड़ो ब्राह्मणों को अब तक अंडे की पेस्टी खिला चुके हैं। इस प्रकार अपना ही धर्म भ्रष्ट करने में लगे हुए हैं।

वो बिस्कुट भी अंडे के हैं जो नमकीन और कुरकुरे होने के कारण खाते हो

देशभर की अनेक कम्पनियाँ यह समझ चुकी हैं कि भारत देश में अंडे की सामग्री बहुतायत से नहीं बेची जा सकती। इसलिये इन्होने नया फंडा निकाला है। बाजार में कुछ कम्पनियाँ ऐसी हैं जो बिस्कीट बेचती हैं, और आजकल भारत शासन के नियम अनुसार उन पर शाकाहारी होने का लेबल हरा चिन्ह भी लगा रहता है। लेकिन बेकरी के उस्ताद कारीगरों का कहना है कि ऐसे कुछ बिस्कुट जो विशेष रुप से चमक मारते हैं, (हम मजबूर हैं यहाँ किसी कम्पनी का नाम नहीं छाप सकते) यह पतले भी होते हैं, छेददार हों या अन्य किस्म के हों लेकिन इनके ऊपर जो चमक होती है वह चमक तब ही आती है जब इनका सिकाव अंडे के घोल में डालकर उसे निकाला जाये और फिर सेका जाये तो इनकी चमक बहुत तेज हो जाती है। इस प्रकार अंडे के घोल में डालकर सिकाव करने के कारण यह नहीं कहा जा सकता कि इसके अंदर अंडा मिलता है, कम्पनियाँ दोहरी चाल से अंडे का लाभ उठाती हैं, बिस्कुट एकदम चमक उठता है और भारत में बिक्री भी खूब होती है।

अंडे की चमक का राज क्या है ?

असल में किसी भी बेकरी में बनने वाली खाद्य सामग्री जिसके ऊपर की चमक एकदम तेज हो उसमें उतना ही अंडा मिला माना जाता है। बेकरी उद्योग से जुड़े कारीगरों के अनुसार जिस सामग्री के चमक अच्छी होती है, जिस बिस्कुट के ऊपर चमक यादा हो, चिकना हो वो सिर्फ अंडे से होता है।

जैसे क्रीम रोल....

आपने क्रीम रोल तो खाया ही होगा। 95 प्रतिशत क्रीम रोल अंडे के बिना बनना संभव नहीं है। असल में इसे समझ लें कि क्रीम रोल वो भले ही ठेले पर बिकने वाला 1 रुपये का हो या किसी बड़ी दुकान में 5 रुपये वाला हो, सारे क्रीम रोल का रोल जो ऊपर से कड़क होता है उस पर सिकाव के बाद एक चमक आती है ? यही चमक अंडे की होती है। क्रीम रोल का रोल बनाते समय उसे अंडे के घोल में डालकर फिर सेका जाता है जिससे सिकाव के बाद उसकी चमक बढ़ जाती है। शायद अब आप समझ गये हों कि चमक क्या होती है। यही चमक उन कम्पनियों के बिस्कुट में भी रहती है।

अब हो जाईये सावधान

तो यदि आप धार्मिक स्वभाव के हैं, विशेषकर जैन धर्म, ब्राह्मण, अग्रवाल, माहेश्वरी, बौध्द आदि हैं अथवा आप मांसाहारी नहीं है तो फिर अंडे से बचने के लिये ऐसी खाद्य सामग्रियाँ जिनमें खुलकर अंडे का प्रयोग हो रहा है उनसे बचें। साथ ही आपके बालक-बालिकाएं जो पेस्टी, केक के स्वाद के आगे सबकुछ भूल जाते हैं, उन्हे अपना धर्म याद दिलाईये। भारतीय दर्शन, शास्त्र और धर्म में अंडे को मांसाहारी माना गया है, इसलिये हमने उन धार्मिकों का इस और ध्यान दिलाया है जो अंडे से बचना चाहते हैं। समाचार से हमारा अभिप्राय न किसी अंडा प्रेमी का दिल दुखाना है ना ही अंडे से बनी खाद्य सामग्री बेचने वालों को किसी प्रकार का नुकसान पहुँचाना। उद्देश्य पवित्र है, धार्मिक है इसे इसी ढंग से लिया जाना चाहिये।

कांग्रेस नेताओं को आष्टा लाने की खबर ने विश्राम गृह को पुलिस छावनी में बदला

आष्टा 6 जुलाई (नि.प्र.)। कर्फ्यू ग्रस्त इन्दौर में आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का इन्दौर पहुँचकर वहाँ पीड़ित एवं प्रभावित लोगों से मिलने का कार्यक्रम था जिसे इन्दौर प्रशासन द्वारा नहीं करने दिया गया तथा कर्फ्यू ग्रस्त क्षेत्रों में कांग्रेस नेताओं को नहीं जाने दिया गया। इन कांग्रेस नेताओं को इन्दौर एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया था। शाम को इन गिरफ्तार नेताओं को आष्टा विश्राम गृह को अस्थायी जेल बनाकर इन्दौर से आष्टा भेजे जाने की खबर के बाद पूरा पुलिस महकमा सतर्क होकर आष्टा विश्राम गृह में छावनी में बदल दिया गया। जैसे ही यह खबर स्थानीय कांग्रेस के नेताओं को लगी। रात होते-होते बड़ी संख्या में कांग्रेस के लोग स्थानीय विश्राम गृह के बाहर जमा होना शुरु हो गये। लेकिन रात लगभग 9 बजे के बाद स्थानीय कांग्रेस के नेताओं ने अपने-अपने सूत्रों से सम्पर्क कर जब यह जानना चाहा कि इन गिरफ्तार नेताओं को इन्दौर से अन्यंत्र स्थानान्तरित करने के लिये रवाना किया तो वो कहाँ है ? तब पता चला कि उन्हे देवास विश्राम गृह में रखा गया है। वहीं यह भी खबर आती रही देवास के स्थान पर आष्टा भी भेजा सकता है इस खबर के बाद भी सैकड़ो कार्यकर्ता यहाँ जमा रहे। एसडीओपी मनु व्यास, टीआई श्री खान व भारी पुलिस बल विश्राम गृह पर नजर आया। कांग्रेस अध्यक्ष कैलाश परमार व अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी देर रात तक यहाँ विश्राम गृह पर डेरा डाले रखा।

Sunday, July 6, 2008

विधायक के आश्वासन के बावजूद बिना नोटिस 20 झुग्गी तोड़ी, लाठी भांजी


महिलाओं को किया घायल, घर तोड़ सामान नष्ट कर गये
सीहोर 5 जुलाई (नि.सं.)। विगत 4-5 माह से पक्की झुग्गी बनाकर रह रहे 20 परिवारों को आज जिला प्रशासन ने आव देखा ना ताव जानकारी दिये बिना सीधे जाकर मकान तोड़ दिये गये। घर में सो रही महिलाओं को पकड़-खींच बाहर निकाल दिया, महिला पुलिस ने लाठियाँ भांजी एक सिर फोड दिया, दूसरी को ऐसा धक्का दिया कि बेचारी के घुटने में लग गई, बाकी रोती रही और मकान टूटते रहे ना सामान उठाने दिया गया ना सही बात की गई। रही सही कसर तब टूट गई जब कलेक्टर को ज्ञापन देने आई बेघर हुई महिलाओं का आवेदन कलेक्टे्रट में फाड़ दिया गया और विधायक रमेश सक्सेना ने भी 3-4 दिन पूर्व इन्हे आश्वासन दिया था कि जाओ कोई तोड़ फोड़ नहीं होगी, कुछ हो तो मुझे तत्काल सूचना कर देना लेकिन आज विधायक जी ने भी कोई मदद नहीं की है। कुल मिलाकर महिलाएं असहाय इधर उधर भटकती नजर आईं।
बड़ी ग्वालटोली में विगत 2-3 माह से 20 नई झुग्गियों की नई बस्ती अचानक नजर आने लगी थी। यूँ तो झुग्गी वालों का कहना है कि उनका विगत 2 वर्ष से यहाँ कब्जा था, वो लोग पन्नी की झुग्गी में रहती थीं और अब उन्होने धीरे-धीरे इसे पक्का कर लिया है और वो यहीं रहने लगे हैं। लखन का बगीचा के पास ग्वाल टोली स्कूल के पास यह झुग्गी धीरे-धीरे मजबूती से बनने लगी थी।
इधर आज अचानक बिना किसी पूर्व सूचना के जिला प्रशासन यहाँ आ धमका। यूँ तो सुबह 11-12 बजे कुछ महिला पुलिस भी यहाँ पहुँची थी लेकिन दोपहर बार अचानक जेसीबी मशीन झुग्गियों को तोड़ने पहुँच गई। यहाँ करीब 20 झुग्गी थी जिनमें महिलाएं अपने बच्चों के साथ मौजूद थीं। जब जेसीबी झुग्गी तोड़ने को उद्यत हुई तो महिलाओं ने कहा कि हमें 2 घंटे का समय दे दो हम अपना सामान समेट लें लेकिन अचानक पहुँचे प्रशासन ने यहाँ किसी की नहीं सुनी और जेसीबी मशीन चलवा डाली। मशीन सीधे झुग्गियों को तोड़ने लगी और महिला पुलिस घर में घुसी महिलाओं को खींच-खींच कर बाहर निकालने लगीं। महिलाएं घर के अंदर बैठी थीं। इन पर लट्ठ चलाये गये। लट्ठ से जब यह नहीं मानी तो कुछ के साथ मारपीट हुई, एक दो अच्छी चोंट आई, एक महिला कृष्णा बाई बाबुलाल हरिजन जो अपाहिज है के पैर में चोंट आ गई दूसरी शांतिबाई को इतना तेज धक्का दिया कि उसके सिर में चोंट आई सिर फूल गया और इस प्रकार पूरी झुग्गियाँ नष्ट कर दी गई। जेसीबी से चद्दरें दबवाकर उन्हे नष्ट कराने का प्रयास भी किया गया। झुग्गी के सामान को तोड़ा भी गया । और इस प्रकार पूरी झुग्गी बस्ती प्रशासन का बुलडोजर घूम गया। यहाँ घरेलू सामान मशीन से ही दब गया। कुछ की खाद्य सामग्री इस मंहगाई के युग में नष्ट हो गई।
उल्लेखनीय है कि कम से कम मानवीय नियमों के आधार पर इन बस्ती वालों को यदि वह रहने लगे थे तो 3 दिन पहले सूचना दी जानी चाहिये अथवा दो दिन पहले भी सूचना देकर बताया जा सकता था कि किस समय तक झुग्गी हटा ली जाये। यदि ऐसा हो जाता तो निश्चित ही यहाँ झुग्गी का सामान व खाद्य सामग्री नष्ट नहीं होगी ना ही महिलाओं बच्चों के साथ मारपीट की नौबत आती।
इन महिलाओं ने फुरसत को बताया कि हम 3-4 दिन पहले विधायक रमेश सक्सेना जी के पास भी गई थीं। उनसे कहा कि हमारी झुग्गी बनी हुई है, वो कोई तोड़ेगा तो नहीं, 2 साल से हमारा कब्जा है, ऐसी सारी बात बताई थी। महिलाओं के अनुसार इस पर विधायक जी ने उनसे कहा था कि आप लोग निश्चिंत रहे कुछ नहीं होगा, आराम से रहें झुग्गी झोपड़ी वालों को तो हमारी सरकार पट्टा दे रही है उसे तोड़ेंगे नहीं, और यदि कुछ हो तो आप हमें सूचना कर देना, फोन लगा देना, मैं तत्काल उसे रोकूंगा। महिलाओं ने बताया कि जब हमने आज विधायक जी को फोन लगाया तो बस उन्होने उठाया ही नहीं और अभी तक वो नहीं आये हमारी मदद करने।
आज यह महिलाएं जब जिलाधीश को इस संबंधी शिकायत करने के लिये गईं तो यहाँ जिन अधिकारी ने उनसे ज्ञापन लिया उन्होने उनके सामने ही फाड़ दिया और कहा चुपचाप चलती बनो। आज जिलाधीश नहीं मिल पाये। महिलाएं काफी देर तक कलेक्ट्रेट के द्वार पर बैठी रहीं, दुखी रहीं और अंतत: सूर्यास्त होने पर मजबूर होकर अपने टूटे-फूटे घरों और बच्चों को देखने पहुँच गई।
आज इस संबंध में विधायक श्री सक्सेना को लगातार सम्पर्क करने के प्रयास किये गये लेकिन उनसे किसी मोबाइल नम्बर पर सम्पर्क नहीं किया जा सका। मध्य प्रदेश शासन ने इस वर्ष झुग्गी बस्ती वालों को पट्ट देने की घोषणा की है जिसका पूर्व जिलाधीश के कार्यकाल के दौरान गुपचुप सर्वे हो चुका है, अभी उन्ही के कार्यकाल के कुछ अधिकारी सीहोर में शेष भी रह गये हैं, और आज झुग्गी तोड़ दी गई हैं ? क्या इन्हे शासन पट्टे नहीं दिलवाने देना चाहता है भाजपा शासन ही पट्टे देने से बच रहा है ?

विधायक जी का चुनावी कार्यालय का सुन्दरकाण्ड के साथ उद्धाटन

सीहोर 5 जुलाई (नि.सं.)। चुनावी वर्ष में क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक रमेश सक्सेना ने आज अपना चुनावी कार्यालय छावनी के बीचों-बीच बड़ा बाजार में खोलने की भूमिका रख ली। सप्ताह भर से यह कार्यालय एक दम तैयार हो रहा था। तीन दिन पूर्व यहाँ भाजपा की एक छोटी-सी बैठक भी रखी गई थी जिसमें जिला भाजपाध्यक्ष ललित नागौरी भी आये थे। आज शनिवार को अनौपचारिक उद्धाटन के रुप में यहाँ सुन्दर काण्ड का आयोजन विधायक समर्थकों द्वारा कराया गया है। इसके बाद से ही यह कार्यालय मान लिया जायेगा। हालांकि अभी तक इसकी अधिकृत सूचना या जानकारी नहीं दी गई है लेकिन विधायक जी सदा पूर्ण तैयारी के साथ हर कार्य करने के पक्षधर हैं। तथैव चुनावी तैयारियों के मद्देनजर ही यह कार्यालय खोला गया है। महाराजा टेलर्स के ठीक बगल में एक मकान में काफी ऊंची सीढ़ियों के ऊपर सफेद रंग पुतवाकर यह कार्यालय तैयार किया गया है। जहाँ शनिवार को सुन्दर काण्ड का आयोजन हुआ। संभवत: पूरे जिले में इस चुनावी वर्ष का पहला कार्यालय होगा। कार्यालय अत्याधिक पहले खोले जाने को आंशिक चर्चाएं भी हैं, लेकिन दो दिन पहले ललित नागौरी द्वारा विधायक जी के टिकिट को लेकर हुई टिप्पणी ने कई बातों पर रोक लगा दी है।

वो पुरुष शौचालय में ताला लगाकर छुप गये

आष्टा 5 जुलाई (नि.प्र.)। नगर पालिका कार्यालय हमेशा किसी ना किसी विषय को लेकर चर्चा में बना ही रहता है आज एक नये और अनोखे कारण से नगर पालिका कार्यालय चर्चा में रहा। आज हुआ यूँ कि सुबह से किसी ने नगर पालिका कार्यालय में बने पुरुष एवं महिला शौचालयों में तो जाने से रहे परेशान होकर लघु शंका के लिये नागरिकों एवं कर्मचारियों को नगर पालिका कार्यालय से उतरकर बस स्टेण्ड पर बने शौचालय एवं सुलभ काम्पलेक्स में जाना पड़ा लगभग 12 बजे जब नेता प्रतिपक्ष रवि सोनी एल्डरमेन प्रहलाद पंवार नगर पालिका पहुँचे तो कर्मचारियों एवं अन्यों ने उक्त हरकत के बारे में बताया तब कईयों से पूछा की उक्त शौचालय में ताला किसने लगाया लेकिन कोई भी बताने को तैयार नहीं था।
तब नागरिकों एवं कर्मचारियों की परेशानी को देखते हुए पार्षद रवि सोनी ने पुरुष शौचालय में लगे उक्त ताले को तोड़ दिया और उक्त सुविधा शुरु करा दी। आज की इस घटना से कईयों को घंटो परेशानी हुई कई छुपकर उन पर हंसते रहे।

दहेज की शिकायत की

आष्टा 5 जुलाई (नि.प्र.)। दहेज को लेकर प्रताड़ित करने से तंग आकर आखिरकार बजरंग कालोनी निवासी अब्दुल रहमान की पुत्री अफसाना जिसका विवाह डोडी में अमजद खान से हुआ था जिसे पति एवं ससुर दहेज के लिये प्रताड़ित करते थे ने थाने पहुँचकर अपने पति एवं ससुर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
उक्त महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि मेरे पति ने मेरे होते हुए भी दूसरी शादी कर ली है।

दहेज की शिकायत की

आष्टा 5 जुलाई (नि.प्र.)। दहेज को लेकर प्रताड़ित करने से तंग आकर आखिरकार बजरंग कालोनी निवासी अब्दुल रहमान की पुत्री अफसाना जिसका विवाह डोडी में अमजद खान से हुआ था जिसे पति एवं ससुर दहेज के लिये प्रताड़ित करते थे ने थाने पहुँचकर अपने पति एवं ससुर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
उक्त महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि मेरे पति ने मेरे होते हुए भी दूसरी शादी कर ली है।

वनरक्षक भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित

सीहोर 5 जुलाई (नि.सं.)। जिले की वनरक्षक भर्ती वर्ष 2008 की लिखित परीक्षा में साक्षात्कार शारीरिक अर्हता हेतु चयनित परीक्षार्थियों का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया है जिसमें 88 परीक्षार्थियों को वनरक्षक परीक्षा 2008 की लिखित परीक्षा में चयनित उम्मीदवार घोषित किया गया है।
वनमंडलाधिकारी सीहोर ने बताया है कि वनरक्षक भर्ती वर्ष 2008 में जिन चयनित उम्मीदवारों को घोषित किया है उनमें रोल नंबर 7 शिवपाल वर्मा, रोल नंबर 29 सतीश प्रजापति, रोल नंबर 66 शैलेन्द्र कुमार, रोल नंबर 71 यशपालसिंह राठौर, रोल नंबर 76 मोहनसिंह, रोल नंबर 130 मनोज हारमा, रोल नंबर 137 विनय कुमार सोलंकी, रोल नंबर 611 प्रिंयका अहिरवार, रोल नंबर 628 संतोष कुमार मालवीय, रोल नंबर 845 प्रेमसिंह, रोल नंबर 846 रामदास, रोल नंबर 919 कोशल कुमार, रोल नंबर 920 प्रकाश कुमार, रोल नंबर 976 चेतन कुमार आर्य, रोल नंबर 982 मिक्की साहू, रोल नंबर 1038 फूलसिंह यादव, रोल नंबर 1077 विनोद कुमार, रोल नंबर 1094 जगदीश, रोल नंबर 1146 बालकृष्ण मीना, रोल नंबर 1163 रामबाबू भिलाला, रोल नंबर 1189 दिनेश कुमार, रोल नंबर 1195 रामसिंह, रोल नंबर 1256 उमेश, रोल नंबर 1342 ओमप्रकाश भिलाला, रोल नंबर 1420 धर्मेन्द्र, रोल नंबर 1423 प्रतापसिंह, रोल नंबर 1501 दिलीपसिंह, रोल नंबर 1511 जितेन्द्र कुमार, रोल नंबर 1742 प्रेम नारायण शाक्य, रोल नंबर 1757 चन्द्रसिंह, रोल नंबर 1791 भूपेन्द्र, रोल नंबर 1901 कमलेश वर्मा, रोल नंबर 2151 केदारसिंह, रोल नंबर 2326 कृष्णगोपाल, रोल नंबर 2339 दीपनारायण, रोल नंबर 2356 इमरतलाल, रोल नंबर 2439 राजेश कुमार, रोल नंबर 2443 श्रीमती कमलेश, रोल नंबर 2451 संतोष कुमार, रोल नंबर 2461 राकेश कुमार, रोल नंबर 2462 विम राय, रोल नंबर 2463 महेश कुमार, रोल नंबर 2481 जयप्रकाश, रोल नंबर 2523 नीरज शर्मा, रोल नंबर 2535 कुमारी मीरा जाटव, रोल नंबर 2549 जितेन्द्र धनवाल, रोल नंबर 2588 रवि माहेश्वरी, रोल नंबर 2589 राकेश कुमार, रोल नंबर 2594 सुशील चन्द्रवंशी, रोल नंबर 2606 योगेश चौहान, रोल नंबर 2626 जगदीश प्रसाद, रोल नंबर 2810 यामसिंह, रोल नंबर 2824 राजेन्द्र सोनगरा, रोल नंबर 2835 युनूस खां, रोल नंबर 2994 संजय, रोल नंबर 3020 गणेशराम, रोल नंबर 3062 मीना वर्मा, रोल नंबर 3136 अवतारसिंह, रोल नंबर 3150 सुनील, रोल नंबर 3151 कमलसिंह, रोल नंबर 3172 राकेश, रोल नंबर 3173 निर्मल, रोल नंबर 3280 श्रीमती सुमन, रोल नंबर 3281 श्रीमती रचना राठौर, रोल नंबर 3402 राहुल, रोल नंबर 3434 सीमा चौहान, रोल नंबर 3500 ब्रजेश राठौर, रोल नंबर 3566 मंजीतसिंह, रोल नंबर 3825 लक्ष्मीनारायण, रोल नंबर 3855 कुमारी रागनी, रोल नंबर 3951 देवेन््द्र, रोल नंबर 4000 राकेश, रोल नंबर 4051 राजेश, रोल नंबर 4088 ललित, रोल नंबर 4326 नरेन्द्र, रोल नंबर 4345 रितेश, रोल नंबर 4405 दुर्गाप्रसाद, रोल नंबर 4439 जितेन्द्र, रोल नंबर 4470 अनिमेष कुमार, रोल नंबर 4505 योगेश, रोल नंबर 4506 कमलेश, रोल नंबर 4551 हेमराज, रोल नंबर 4563 आशीष, रोल नंबर 4695 कुमारी आशा, रोल नंबर 4699 कोमलसिंह, रोल नंबर 4745 अर्जुनसिंह, रोल नंबर 4747 शिवराज तथा रोल नंबर 4877 आनंद मालवीय शामिल है।

मंत्री जी पुण्यतिथि पर जिला अस्पताल में फल वितरित

सीहोर 5 जुलाई। वरिष्ठ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी,पूर्व विधायक एवं जिले की पत्रिकारिता के पितृ,पुरूप जिला कांग्रेस अध्यक्ष स्व.हहिकुष्ण सिंह मंत्री की 25 वीं पुण्यतिथि पर जिला श्रमजीवी पत्रकार संघ के बैनर तले मंत्री जी परिजनों एवं पत्रकारों ने परम्परा अनुसार जिला अस्पताल के सभी वर्डो में भर्ती मरीजों को फल एवं बिस्किट वितरित किये।
गौरतलब है कि विगत 25 वर्षा से मंत्री जी के परिजन मरीजों को अनवरत् रूप से प्रतिवर्ष फल वितरित करते आ रहे है। इस अवसर पर संगठन के जिला अध्यक्ष रघुवर दयाल गोहिया, कांग्रेस नेता कमलेश कटारे पत्रकार, प्रदीप चौहान,राजकुमार गुप्ता,मंत्री जी के पुत्र एवं पत्रकार संतोष सिंह शेखमुंशी, अंकुर तिवारी,अनिल सक्सेना,ओममोदी, डॉ यशवंत सिंह, हनीफ कुरैशी, पुरूषोतम राय, सौरभ जयन्त, सौरभ जयन्त,नितेश सिंह एवं नागरिक गण उपस्थित थे। इसी प्रकार महिला बाल विकास विभाग के सेक्टर पचामा के ग्राम थूना,पचामा,नयापुरा, पिपलिया मीरा,एवं में मंत्री की पुत्री एवं सेक्टर पर्यवेक्षक वंदनावाला सिंह ने कुपोषित बच्चों को पौष्टिक बिस्किट वितरित किये।

वर्षा जनित महामारियों की रोकथाम हेतु 13 काम्बेट टीम गठित

सीहोर 5 जुलाई (नि.सं.)। जिले में वर्षाजनित महामारियों के नियंत्रण के लिए जिले में 13 काम्बेट टीमों का गठन किया गया है जिसमें चिकित्सक, कम्पान्डर, ए.एन.एम. आदि की तैनाती की गई। वर्षाजनित महामारियों के नियंत्रण हेतु मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.ए.एल.मरावी द्वारा सभी स्वास्थ्य संस्थाओं को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
जारी निर्देशों में कहा गया है वर्षागतु के मद्देनजर संभावित महामारियों पर नजर रखी जाय और महामारी नियंत्रण के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाते हुए ब्लाक मुख्यालय एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मुख्यालयों पर सेक्टर तथा सब सेक्टर स्तर पर पर्याप्त दवाओं का भंडारण रखा जाय। आवश्यकता पडने पर जिला कार्यालय से दवाओं की तत्काल मांग की जाये जिससे समय रहते दवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
वर्षा के मौसम में सभी ब्लाक मेडिकल ऑफीसर अपने अधीनस्थ अमले और ए.एन.एम. तथा एम.पी.डब्ल्यू की मुख्यालय पर उपस्थिति सुनिश्चित कर आवश्यक निर्देश जारी करें। क्षेत्र में किसी भी प्रकार की महामारी की सूचना मिलने पर तत्काल कॉम्बेट टीम को सूचित कर फौरन जांच एव उपचार का कार्य प्रारंभ करें। डॉ. मरावी ने बताया कि जिले के समस्त ग्रामों में 1207 डिपो होल्डर बनाए गए हैं जिनके पास दवाओं का स्टॉक बी.एम.ओ. द्वारा उपलब्ध कराया गया है। जिले के 93 समस्या मूलक ग्रामों में स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देश सभी बी.एम.ओ.को दिए गए हैं। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सतत रूप से भ्रमण करने, पेयजल स्त्रोंतो के जल शुध्दि करण और ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

नवगठित लायनेंस क्लब अध्यक्ष उमा पालीवाल बनी

सीहोर 5 जुलाई (नि.सं.)। लायनेंस क्लब इकाई का गत दिवस पुन:गठन सर्वसम्मति से किया गया। क्लब की नवगठित कार्यकारिणी में एकमत सर्वसहमति से लायनेंस अध्यक्ष पद पर ला. उमा पालीवाल को मनोनीत किया गया।
लायनेंस क्लब की कार्यकारिणी निम्‍नानुसार गठित की गई। अध्यक्ष उमा पालीवाल, प्रथम उपाध्यक्ष राजू पालीवाल, द्वितीय उपाध्यक्ष, साधना सक्सेना, तृतीय उपाध्यक्ष सुधा गुप्ता, सचिव रेखा अग्रवाल, सहसचिव शशि विजयवर्गीय, कोषाध्यक्ष अरुणा हर्णे, सह-कोषाध्यक्ष सुनीता शाह टेमर, टेमर मंजू चड्डा, टेल ट्रिवस्टर मंजू अग्रवाल, चार्टर अध्यक्ष तारा अग्रवाल, भूतपूर्व अध्यक्ष ला. रीता दुबे, रीजनल कोआर्डिनेटर रीजन 3 ला. सीमा जोशी, ला. सुधा गोस्वामी, संचालक मंडल एवं सभी सदस्यगणों ने नवगठित कार्यकारिणी को बधाई दी साथ सभी उपस्थित सदस्यों ने कार्यक्रमों को विधिवत सम्पन्न करने के लिये सहयोग प्रदान करने एवं सहयोग देने की बात कही।
लायनेंस क्लब के नवगठन के साथ ही यह अपेक्षा भी सदस्यों ने की है कि निश्चित ही लायनेंस क्लब अपने कर्तव्यों पर खरा उतरेगी तथा क्लब को शिखर स्थान पर पहुँचायेगी। सभी सामाजिक संस्थाओं ने नवगठित कार्यकारिणी को बधाई दी है।

शासन के उपक्रम मृगनयनी में विशेष डिस्काउंट सेल

सीहोर 5 जुलाई (नि.सं.)। मध्य प्रदेश शासन के उपम मृगनयनी एम्पोरियम भोपाल द्वारा 14 जुलाई,08 तक विशेष डिस्काउन्ट उपभोक्ताओं को प्रदान किया जाएगा। इसके तहत 36 फीसदी तक छूट मिलेगी।
भोपाल के जी.टी.बी. कॉम्पलेक्स स्थित मृगनयनी एम्पोरियम के प्रभारी ने एक जानकारी में बताया कि मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम के मृगनयनी एम्पोरियम में विशेषकर भैवरग़ढ, पंडाना, इंदौर, नीमच की चादरें एवं काटन साड़ियां, चंदेरी, कोसा, महेश्वर सिल्केप, शिफॉन एवं जार्जर अर्थात बेडिंग साड़ियों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है जिन पर डिस्काउंट दिया जा रहा है। उपभोक्ताओं को 36 प्रतिशत तक डिस्काउन्ट देने का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं बल्कि बुनकरों, दस्तकारों को आगामी त्यौहारी सीजन में रोजगार दिलाना है।
मृगनयनी रोजाना प्रात: 11 से रात्रि 9.00 बजे खुला रहेगा। सीहोर जिले के नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपनी आवश्यकतानुसार खरीदी कर मृगनयनी द्वारा दिए जा रहे डिस्काउन्ट का लाभ प्राप्त करें।

उपचार के दौरान विवाहिता की मौत

सीहोर 5 जुलाई (नि.सं.)। जहरीले पदार्थ का सेवन करने से एक विवाहिता की उपचार के दौरान एवं इछावर थाना क्षेत्र में विद्युत प्रवाह से एक बालत की मौत हो गई। सूचना पर पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरु कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम बोरदी में रहने वाले किशन नाथ की 28 वर्षीय पत्नि पप्पीबाई ने अज्ञात कारणों के चलते जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था जिसे उपचार हेतु भोपाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था पर उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इसी प्रकार इछावर थाना अन्तर्गत आने वाले ग्राम कोलारी में रहने वाले करण सिंह अजा. का 8 वर्षीय पुत्र पप्पु गत दिवस रात को पोल के पास खेल रहा था कि उसे अचानक विद्युत प्रवाह लग गया परिणाम स्वरुप पप्पु की घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गई।

Saturday, July 5, 2008

आजादी के 60 साल बाद देवली ग्राम के आदिवासियों ने पहली बार कलेक्टर को देखा

आष्टा 4 जुलाई (सुशील)। आजादी के बाद से लेकर आज तक अपनी एवं अपने ग्राम की उपेक्षा के शिकार आष्टा तहसील की अंतिम सीमा पर बसे आदिवासियों के ग्राम देवली (जो आज तक राजस्व रिकार्ड में दर्ज नहीं है) के आदिवासियों को इस बार उम्मीद की एक किरण नजर उस वक्त आई जब उन्होने अपने ग्राम में पहली बार कलेक्टर को अपने बीच देखा कि कलेक्टर ऐसे होते हैं, ऐसे आते हैं उनके साथ इतने अधिकारी और कर्मचारी होते हैं तथा वे जो कह देते हैं वो हो जाता है।
पूरी आष्टा तहसील में यूँ तो कई ऐसे ग्राम हैं जहाँ आदिवासी लोग रहते हैं लेकिन आष्टा तहसील में अरनिया जौहर ग्राम पंचायत में आने वाला देवलीग्राम (जो ग्राम नहीं अरनिया जौहरी का एक मोहल्ला है) जिसमें 99 प्रतिशत आदिवासी परिवार ही रहता है लेकिन इस ग्राम के रहने वालों की समस्याओं को एवं इन आदिवासी परिवारों के उत्थान एवं विकास के लिये आज तक किसी ने ना ही सोचा और ना ही इन उपेक्षितों की और कभी देखा की ये लोग किस हाल में बेहाल रह रहे हैं। जब ग्राम पंचायत अरनिया जौहरी के युवा सरपंच कचरुलाल ने भाजपा जिला अध्यक्ष ललित नागौरी से इस ग्राम के आदिवासियों को एक बार मिलवाकर उनकी समस्याओं से उन्हे अवगत कराकर बताया कि लगभग 200 घरों की बस्ती वाले इस देवली ग्राम जिसमें लगभग 190 घर आदिवासियों के हैं लेकिन आज भी उक्त इतना बड़ा ग्राम राजस्व रिकार्ड में शामिल नहीं है। इतने बड़े उक्त ग्राम को आजादी के लगभग 60 साल बाद भी अरनिया जौहरी का एक मोहल्ला ही माना जाता है जबकि उक्त ग्राम अरनिया जौहरी से लगभग 3 किलो मीटर दूर पहाड़ी पर बसा है। इस ग्राम को राजस्व रिकार्ड में शामिल कराया जाना चाहिये, अरनिया जौहरी से देवली तक 3 किलो मीटर सड़क बनना चाहिये तथा यहाँ पीने के पानी की गंभीर समस्या को हल किया जाना चाहिये। सरपंच कचरुलाल ने ग्राम पंचायत की और से जो प्रयास किये उससे भी उन्हे अवगत कराया तब सरपंच एवं जिला अध्यक्ष ललित नागौरी के प्रयास से सरकार की मंशा के अनुरुप रात्री विश्राम ग्रामीणों के बीच रहकर उनसे मिलना उनकी सुनना और उनकी समस्या को हल करने की योजना के तहत मार्च माह के अंतिम सप्ताह में तत्कालिक जिलाधीश राघवेन्द्र सिंह रात्री विश्राम के लिये देवली ग्राम पहुँचे। उक्त ग्राम के आदिवासियों ने 60 साल में पहली बार अपने ग्राम के कलेक्टर के आगमन पर उनका आदिवासी परम्पराओं के अनुसार नृत्य कर स्वागत सत्कार, सम्मान किया और चौपाल पर बैठे कलेक्टर सिंह को अपनी मांगों से अवगत कराया कि उनकी यह मांग है कि हमारा उक्त ग्राम राजस्व रिकार्ड में दर्ज हो, अरनिया जौहरी से हमारे ग्राम तक सड़क बने, पीने के पानी की समस्या का स्थायी हल हो, और भी कुछ मांगे रखी थी। कलेक्टर श्री सिंह के रात्री विश्राम को 3 माह पूरे हो गये अब इस ग्राम के आदिवासियों को इंतजार है कि कलेक्टर श्री सिंह की उन घोषणाओं के पूरे होने की जो वे आदिवासियों के बीच करके आये थे। श्री सिंह का इसी बीच अब स्थानान्तर हो गया है अब उनके स्थान पर नये युवा तथा एक अलग ही सोच रखने वाले कलेक्टर डी.पी. आहूजा सीहोर पहुँचे है। देवली के आदिवासी सिध्दुलाल, दौल सिंह, विक्रम सिंह, मोहन सिंह आदि ने फुरसत को अब अपना माध्यम बनाकर नवागत कलेक्टर श्री आहूजा से मांग की है कि पूर्व कलेक्टर श्री सिंह जो एक आशा उम्मीद की किरण हमें दिखा गये थे वो हकीकत में बदी जाये ताकि हम भी विकास की धारा में आगे बढ़ सकें।
स्मरण रहे उक्त आदिवासी ग्राम राजस्व के रिकार्ड में दर्ज नहीं होने से शासन की कोई भी योजना विकास के कार्य वहाँ नहीं पहुँच पाते हैं जो कार्य योजना स्वीकृत होती है वो अरनिया जौहरी के ग्राम के नाम से स्वीकृत होती है और उसका लाभ यहीं के लोगों को मिलता है। वैसे पंचायत की और से यहाँ कई कार्य कराये जाते हैं लेकिन वो बहुत ही कम होते हैं। फुरसत कार्यालय पहुँचे आदिवासियों को दावा है कि पूरी आष्टा तहसील में केवल हमारा ही ग्राम पूरी तरह से आदिवासी ग्राम है क्योंकि यहाँ लगभग 200 घरों की बस्ती है इसमें से 190 घरा आदिवासियों के हैं। सरकार आदिवासियों के उत्थान, विकास एवं उन्हे विकास की धारा में साथ लाने की बड़ी-बड़ी घोषणा कर रही है वहीं हमारा ग्राम राजस्व रिकार्ड में दर्ज होने के लिये 60 साल से तरस रहा है। इस कारण से हम आदिवासी समस्याओं के आगोश में रह रहे हैं और जी रहे हैं। देवली ग्राम के सभी लोगों को इस बार पूरी उम्मीद है कि हमारी समस्याओं को हल करने के लिये जो प्रक्रिया राघवेन्द्र सिंह कलेक्टर के आगमन के बाद से शुरु हुई वो पूरी होगी । देखना है इन पीडित, शोषित और समस्याओं के बीच रह रहे आदिवासियों की समस्या कब तक हल होती है।