Monday, February 25, 2008

अरे भाई जब ऐश्वर्या रितिक की नहीं हुई तो जोधा अकबर की कैसे होगी ? जोधाबाई तो अकबर की बहु थी,

सलीम दिलीप कुमार अभी जिंदा हैं,
कहीं आशुतोष गोवारीकर को लेने के देने न पड़ जायें
जोधा-अकबर एक ऐतिहासिक फिल्म है। हिन्दुस्तान के शक्तिशाली सम्राट अकबर पर बनी यह फिल्म है। लेकिन इन्ही खूबियो में ही छिपा है इस फिल्म का विवादो के पचड़े में पड़ना। दरअसल जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर एक रियल लाईफ करैक्टर है। मरने के सैकड़ो साल बाद भी लोग उसकी धर्मनिरेपक्षता को याद करते है। धर्मनिरेपक्षता-सभी धर्मो को एक समान दृष्टि से देखना-ही क्यों, उसकी हिन्दुस्तान को एक धागे में पिरोकर रखने की क्षमता, महिलाओ को बराबरी का अधिकार, उसकी प्रशासनिक व्यवस्था, मनसबदारी, भूमि सुधार, जैसे उसके कदम ऐसे हैं जो आनी वाली पीढ़ी, राजाओ और व्यवस्था के लिये मील के पत्थर साबित हुये। भारतीय इतिहास में (चंद्रगुप्त मौर्य से लेकर 21 वी सदी तक) सम्राट अशोक को छोड़कर शायद ही कोई ऐसा राजा होगा जो किसी भी मायने में अकबर का मुकाबला कर सकता हो। असल में जोधाबाई, अकबर की पत्नी नही पुत्रवधु है। जबकि लोग 'मुगल-ए-आजम' फिल्म में दिखाई गई कहानी को ही हकीकत मानते थे। लेकिन जैसे-जैसे इतिहास पढ़ते गये, ये बात समझ में आ गई कि जोधा, अकबर के बेटे जहांगीर उर्फ सलीम की पत्नी थी। अरे भाई जब ऐश्वर्या, रितिक रोशन की नहीं हुई तो फिर जोधाबाई, अकबर की कैसे हो सकती हैं। सलीम दिलीप कुमार अभी जिंदा हैं कहीं अपनी जोधा के लिये वह आशुतोष गोवारीकर पर नाराज न हो जायें वरना उन्हे लेने के देने पड़ जायेंगे ।
क्‍या फतेहपुर के गाइड जिम्मेदार हैं.....
जब आशुतोष गोवारिकर की फिल्म जोधा-अकबर रिलीज होने वाली थी तब जरुर आश्चर्य हुआ कि एक बार जो गलती हो गई थी-मुगल-ए-आजम-के वक्त उसे क्यो दुहराया जा रहा है। जानकारो का मानना है कि इस गड़बड़-झाले के पीछे फतेहपुर सीकरी के गाईड़ जिम्मेदार है। दरअसल फतेहपुर सीकरी (आगरा के करीब वो शहर जो कभी अकबर की राजधानी हुआ करता था) में अकबर का किला है। इस किले का एक हिस्सा जोधा-महल के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि इस महल में मुगल राजाओ की हिंदु रानियां रहा करती थी। शायद, जहांगीर की पत्नी जोधा भी इसी महल में रहती होगी और इस महल का नाम जोधा-महल पड़ गया। फिर क्या था यहां के गाईडस ने जोधा को अकबर की पत्नी बताना शुरू कर दिया।
इस फिल्म का नाम 'हरका-अकबर' होना चाहिये था। जानते है क्यो ?आमेर (जयपुर) के कछवाहा राजपूत, राजा भारमल की बेटी थी हरका। मुगल सत्ता पर काबिज होने के करीब छह साल बाद (यानि 1562 में) अकबर एकबार अपने लावो-लश्कर के साथ अजमेर की दरगाह शरीफ से लौट रहा था। रास्ते में उसकी मुलाकात राजा भारमल से हुई। भारमल ने शिकायत की मेवात का मुगल हाकिम (गर्वनर) उन्हे आये-दिन परेशान करता रहता है। उनसे मनमाना चौथ वसूलता है। कहते है, अकबर ने भारमल को अपने ही मुलाजिम से मुक्ति दिलाने के लिये दो शर्ते रखी। पहली, राजा भारमल खुद उसके कैंप पर आकर अपनी बात (मिन्नत करे) रखे। दूसरा ये कि वो अपनी बेटी हरका की शादी उससे कर दे। उस वक्त अकबर की उम्र महज़ बीस साल थी।
हरका से शादी के बाद तो अकबर ने कई राजपूत राजकुमारियों से शादी रचाई। बीकानेर के राजा की बेटी, काहन, जोधपुर की एक राजकुमारी से, एक रोहिगा राजकुमारी रुकमावती...। राजपूत घराने में शादी रचाने की परपंरा अकबर के बेटे सलीम उर्फ जहांगीर ने भी जारी रखी। खुद अकबर ने ही अपने बेटे सलीम की शादी जोधपुर के राजघराने की बेटी जगत गोसाई (जो असलियत में जोधाबाई का नाम था) से बड़ी धूम-धाम से कराई थी। लेकिन ऐसा नही है कि हिंदुस्तान में अकबर पहला मुस्लिम राजा था जिसने हिंदु लड़कियो से शादी रचाई थी। उससे पहले अलाउद्दीन खिलजी, दक्षिण के बाहमनी राजा फिरोज शाह, गुजरात के मुहम्मद शाह सहित कई मुस्लिम राजाओ ने हिंदु रानियों से विवाह किया था। लेकिन अकबर ने हिंदु (खासतौर से राजपूत) राजघराने में शादी को अपनी राज-नीति बनाया था।
राजपूत राजा देते थे मुँह तोड़ जबाव
इन शादियों से अकबर एक बड़े साम्राज्य को एक सूत्र में बांधने में कामयाब हो पाया। शादी करने से एक तो इन राजपूत राजाओ से रिश्ते बन जाते थे, यानि उनके विद्रोह की संभावना लगभग ना के बराबर हो जाती थी। राजस्थान के छोटे-छोटे राजपूत राजा दिल्ली (या आगरा) के उन राजाओ को मुंह तोड़ जबाब देते थे जो उनकी सरजमीं की तरफ आंख उठाकर देखने की जुर्रत करते थे। दूसरा ये कि राजपूत अपनी वफादारी के लिये जाने जाते थे। आड़े वक्त में वही अकबर का साथ देते थे। मरते वक्त अकबर के अब्बा, हुंमायू ने उसे हिंदुस्तान में राज करने का मूल-मंत्र दिया था। उसने अकबर को सीख दी थी कि, राजपूत कौम का हमेशा ध्यान रखना, क्योकि ना तो वे (राजपूत) कभी कानून तोड़ते है और ना ही कभी आज्ञा का उल्लंघन करते है। वे तो सिर्फ आज्ञा का पालन करते है और अपना फर्ज (वफादारी का) निभाते है। गुजरात को कूच करते वक्त तो अकबर ने आमेर के राजा मान सिंह को ही आगरा (सत्ता का केंद्रबिंदु) की गद्दी का रखवाला घोषित कर दिया था। यहां तक की मान सिंह को और उनके परिवार के दूसरे सदस्यो को हरम (राजघराने की रानियों की रहने की जगह) की भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी-जो कभी भी किसी मर्द के हवाले नहीं की जाती थी। दूर-दराज के कई विद्रोह कुचलने में भी राजपूत राजाओ ने अह्म भूमिका निभाई थी। अकबर का साम्राज्य काफी बड़ा था। इसलिये आये-दिन दूर-दराज के हाकिम अपने को स्वतंत्र घोषित कर देते थे। ऐसे में अकबर, राजपूतो के सिवाय किसी पर विश्वास नही कर पाता था। यहां तक की अपने बेटे सलीम पर भी वो इतना भरोसा नही करता था क्योकि खुद सलीम ने भी एक बार अपने पिता के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजाया था।
वीर महाराणा प्रताण
राजपूत घरानो से रिश्ते बनाकर अकबर अपने प्रजा में एक सदेंश देना चाहता था। वो दिखाना चाहता था कि क्या हिंदु और क्या मुसलमान, उसके लिये सभी बराबर है। राजपूत राजाओ के लिये भी ये घाटे का सौदा नही था। राजस्थान के मेवाड़ राज्य के महाराणा प्रताप को छोड़कर हरेक राजा अकबर के सामने नत-मस्तक हो चुके थे।
1562 में अकबर का आमेर जयपुर के राजा भारमल कछवाहा की बेटी हीराकुंवर या हरखबाई से ब्याह हुआ । धर्म परिवर्तन करके उनका नाम मरियम उामानी रखा गया। वे मेधावी और धर्म सम्पन्न थीं। उन्होने अपने महल में कृष्ण की मूर्ति स्थापित की और हिन्दु धर्म के विधि विधानों का जीवन भर पालन किया। जहांगीर उनके ही बेटे थे और नूरजहां के प्रभावी हो जाने तक दरबार पर उनका पूरा प्रभाव रहा। बाबर सुन्नी थे, पर भाईयों और शेरशाह सूरी के उत्तराधिकारियों से निबटने में हुमायूं की मदद फारस के शाह तस्मास्प ने उन्हे शिया बनाकर ही दी थी। लिहाजा कोई सुन्नी प्रतिरोध न हो, इसलिये हीराकुंवरी या हरखबाई का नाम हमेशा मरियम उामानी ही लिखा गया। इसलिये भी कि हिन्दू रानी का बेटा बादशाह बन रहा है, इस बात को भी मुगल सल्तनत को किसी प्रतिरोध से बचाना था। बाद में हीराकुंवरी ने अपने बेटे से अपनी भतीजी मानमती की भी शादी कराई जिससे खुसरु पैदा हुए। जहांगीर की एक शादी जोधपुर के राज परिवार की जगत गोसाईन से भी हुई। उससे खुर्रम यानी शाहजहां पैदा हुए। जोधपुर की होने से उन्ही का नाम जोधबाई पड़ गया था। मुगल इतिहास में अकबर की बेगम को कहीं भी जोधा बाई नहीं कहा गया। कर्नल टाड नामक लेखक ने अवश्य नामों का गड्ड-मड्ड करके अकबर की बेगम जोधाबाई लिख डाला था जिसे मुगलेआजम फिल्म ने पुख्ता कर दिया।
पर बात नाम के बदल जाने की नहीं है। उससे इतिहास की मूलधारा पर कोई फर्क नहीं पड़ता। मूलधारा में फर्क पड़ने की बात दूसरी है। इसकी कि यह शादी कैसे और किस कारण हुई? पहले अकबर के जन्म को देख लें, शेरशाह से हारकर हुमायूं जब ईरान की और भाग रहे थे, तो छोटे भाई हिंदाल के खेमे में उन्होने चौदस साल की एक शिया लडक़ी हमीदा बानो को देखा और उस पर मुग्ध हो गये। हुमायूं को योतिष पर यकीन था । उनका ज्ञान और मन दोनो यह कहने लगे कि इस लड़की से पैदा हुआ लड़का बादशाह बनेगा। उन्होने दबाव डालकर शादी की। पर शरण कहां ले? भाई विरोध कर रहे थे। पास में सैनिक और सम्पत्ति भी नहीं थी, ऐसे में सिंध के राजपूत राजा ने उन्हे शरण दी। अमरकोट में राजपूत राजा की छांव में ही अकबर का जन्म हुआ।
बाद में परिवार को साथ लेकर हुमायूं सहायता पाने के लिये ईरान की और बढ़े तो भाई असकरी ने हमला कर दिया। 14 महिने के बच्चे को वहीं सैनिक शिविर में ही अपनी एक पुरानी बेगम के साथ छोड़ वे ईरान की और भागे। असकरी ने भतीजे का मारा नहीं, वह उसे काबुल ले गया। दूसरे भाई कामरान ने उसे इसलिये भी रख लिया ताकि बेटा उसके कब्जे में रहने से हुमायूं ईरान की मदद पाकर भी काबुल पर हमला नहीं कर सक ता। ईरान के शाह ने हुमायूं को शरण तो दी पर नसीहत भी दी कि पठानों से लड़ रहे हो तो फिर राजपूतों से शादी-ब्याह के संबंध बनाओ, तभी तो राज कर पाओगे। तब शिया बन जाने की शर्त मान लिये जाने पर उन्होने हुमायूं को सैनिक मदद दी और काबुल हुमायु के कब्जे में आ गया।
काबुल में उन्हे तीन साल का हो गया अपना बेटा अकबर मिला पर अब आगे हिन्दुस्तान पर हमला करना था और बेटे को साथ नहीं ले जाया जा सकता था। इसलिये सुरक्षा के लिये अकबर को मध्य प्रदेश के रीवा राजघराने में पलने-बढ़ने के लिये पहुँचा दिया गया। शेरशाह ने अपने अंतिम दिनों में कलिंजर के किले का घेरा डाला था वहाँ रीवा के राजा से ही चल रही लड़ाई में हुए विस्फोट में शेरशाह मारा गया।
अकबर को रीवा महाराज ने अपने बेटे रामसिंह की तरह ही पाला। अकबर बादशाह बने तो रीवा ने उन्हे ग्वालियर के तानसेन और सीधी के बीरबल ये दो रत्न उपहार में दिये। हुमायू ने भी मरने से पहले अकबर को वही किया कि राजपूतो से संबंध रखना। 18 साल की उम्र होते-होते जब अकबर बैरम खां और अपनी धाय मां माहम अमका के दबदबे से मुक्त हुए तो उन्होने संबंध के लिये राजपूतों की और देखा। जयपुर सबसे नजदीक था, इसलिये उन्होने लड़की लेने और देने का प्रस्ताव वहाँ रखा। लेकिन राजपूत घरानों ने लड़की देकर धर्म बचाना मुनासिफ समझा ना की मुस्लिम लकड़ी लाकर पूरे घर को मुस्लिम बनाना उचित। इसलिये वह मुस्लिम राजकन्याएं नहीं लाये। ( उल्लेख संस्कृति के चार अध्याय-रामधारी सिंह दिनकर)
इतिहास का मर्म इस बात में है कि जिन राजपूत राजाओं को मुगल शाहजादों-बादशाहों को अपनी बेटियां देनी पड़ी थीं, उन्होने या इस देश ने इस पर जश् नहीं मनाया था, हंसते हुए नहीं, रोते हुए बेटी बिदा की थी। और बेटे भी ऐसे ही विदा किये थे पश्चिम की और आक्रमण पर जाना पड़ता तो खुद न जाकर किसी बेटे को भेजा जाता। इसलिये कि पश्चिम जाने का अर्थ है धर्म का चला जाना (संस्कृति के चार अध्याय)
इतिहास का जो बाजारुपन, दुख और सुख में बदल दे, रुदन को उल्लास में बदल दे, कुर्बानी को उपलब्धि में बदल दे, इतिहास की सारी भावना को ही बदल दे, इसलिये कि उसे एक कल्पिन प्रेमकथा बेचनी है, तो इसे क्या कहेंगे ? देश और राष्ट्र के अपमान के सिवा इसे और क्या कहेंगे ? हजारों किताबें हैं, हजार दस्तावेज हैं जो मुगल इतिहास को सामने रखते हैं और सब जांचा हुआ भी है यह क्यों भूल जाते हैं फिल्म निर्माता कि हीराकुंवरी के व्याह के साथ ही जयपुर से कई राजपूत घरानों ने शाद-व्याह के रिश्ते इस तरह तोड़ दिये थे कि वह फिर वर्षों टूटे रहे।

Sunday, February 24, 2008

...शेखचिल्ली जैसी कल्पना करते हुए रामपुरा जलाशय से पानी लाने की बात कर रहे सीहोर नपा अध्यक्ष राकेश

सीहोर 23 फर (आनन्द गांधी, फुरसत)। सनातन भारतीय धर्म में पानी पिलाने का पुण्य सबसे अधिक माना गया है, यहाँ सम्पन्न लोगों द्वारा समाज के लिये सार्वजनिक प्याऊ बनवाने का महत्व सर्वाधिक रहता है सीहोर में भी कई लोग गर्मी में पेयजल उपलब्ध कराकर पुण्य लाभ कमाते देखे जाते हैं लेकिन नगर पालिका अध्यक्ष राकेश राय और उनकी परिषद मण्डली को नागरिकों के लिये पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास करते कभी नहीं देखा जाता। बल्कि जनता के रुपयों पर लम्बा हाथ मारने के लिये हर बार तरह-तरह की नौटंकियों के साथ लाखों रुपये का हेरफेर सिर्फ टेंकरों से पेयजल वितरण को लेकर हो जाता है।
इस वर्ष भी चूंकि बहुत अच्छी बरसात हुई थी इसलिये काहिरी बंधान सहित सारे अन्रू जल स्त्रोत भरा चुके थे लेकिन दिन रात काहिरी बंधान से पानी की चोरी होती रही, जानबूझकर नगर पालिका अध्यक्ष ने व उनकी पार्षद मण्डली ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया, विज्ञप्तियाँ भेजकर खानापूरी कर ली। नाकाम नगर पालिका अध्यक्ष के कारण पेयजल स्त्रोतों से पूरा पानी चोरी जा चुका है जो आगामी गर्मी के लिये पर्याप्त नहीं है।
ऐसे में शेखचिल्ली जैसी कल्पना करते हुए राकेश राय ने विज्ञप्ति जारी की है कि यदि....काश....रामपुरा से पानी छूट जाये तो यहाँ काहिरी बंधान में पानी ही पानी हो जाये....। वह यह भूल गये हैं कि सीहोर की जनता इतनी नासमझ नहीं है कि उसे यह भी ना मालूम हो कि रामपुरा से अब पानी नहीं आ सकता। जनता को ऐसी विज्ञप्तियों से बरगलाने की कोशिश बेमानी है। खैर हकीकत से धरातल से जनता क ो दूर करने का राकेश राय का यह प्रयास कितना बेमानी है और पेयजल की क्या स्थिति है इस पर पढ़िये फुरसत की एक नजर।
ठंड विदा हो चुकी है और ग्रीष्म ऋतु ने अपनी दस्तक दे दी है अब तो रात में ठंड का असर थोड़ा बहुत दिखाई देता है लेकिन दिन का पारा शनै: शनै: बढ़कर अपनी तपिश का अहसास कराने लगा है। ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ होते ही सीहोर नगर में पेयजल का संकट उभरने लगा है।
शहर भर में जहाँ-तहाँ लगे हेण्डपंप बोल चुके हैं नगर पालिका की जल प्रदाय व्यवस्था ठप्प-सी दिखने लगी है। कभी कभार यदि नलों से पानी आता है तो वह भी गंदला और बदबूदार। स्थिति यह है कि न तो काहिरी में और ना ही जमोनिया में पर्याप्त पानी का भंडार बचा है। जलस्त्रोत सूखते जा रहे हैं भूजल दिन व दिन नीचे गिरता चला जा रहा है। शहरवासी पीने के पानी के लिये अभी से इधर-उधर भटकने को मजबूर होने लगे हैं।
ऐसे में नगर पालिका अध्यक्ष का नया नाटक शुरु हो गया है। नाटक करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष ने अब अचानक रामपुरा डेम से पानी छोड़ने की मांग कर डाली है। सीहोर की जनता को और अपने ही मतदाताओं को वह जानबूझकर भ्रमित करने के लिये रामपुरा-रामपुरा का राग अलापने का नाटक कर रहे हैं जबकि रामपुरा डेम से पानी सीहोर लाना आज की तारीख में नामुमकि न जैसा हो चुका है फिर भी नागरिकों को यह जताने का प्रयास किया जा रहा है कि नगर पालिका बहुत सक्रिय है।
नगर पालिका द्वारा पानी का उचित प्रबंधन नहीं करने तथा समय रहते नदी-तालाबों से हो रही पानी चोरी को रोकने के कोई प्रयास नहीं करने के कारण नगर के लिये उपयोगी जल स्त्रोत सूख चुके हैं। वैसे भी नगर पालिका ने कभी नगर के ही पुराने जल स्त्रोतों का ध्यान नहीं रखा।
फरवरी माह में ही शहर के कई हिस्सों में पार्वती पेयजल योजना से लगातार पानी प्रदाय नहीं हो सका है। नगर पालिका कभी बिजली कटौती का बहाना बनाती है तो कभी बंधान के मोटर पंप खराब पड़े होने का बहाना बनाकर हाथ झाड़ लेती है।
भूले भटके यदि पेयजल प्रदाय किया भी जाता है तो वह पीने योग्य तो बिल्कुल भी नहीं होता है। उदाहरण के लिये कल गंज क्षेत्र में करीब एक हफ्ते बाद नल चले लोगों ने बड़ी उम्मीद से पानी भरना प्रारंभ किया लेकिन नागरिक उस समय हतप्रभ रह गये जब पानी में फेन आता रहा। मटमैला और बदबूदार पानी देखकर नागरिक उस पानी से अपने घरों का छिड़काव करते दिखाई दिये। गंदगी युक्त बदबूदार पानी से हैरान परेशान नागरिक नगर पालिका की पेयजल प्रदाय व्यवस्था को कोसते रहे।
गंज क्षेत्र में जमोनिया तालाब पेयजल प्रदाय किया जाता है लगता है जो जल प्रदाय किया गया है। वह सीधे ही तालाब से नागरिकों को मुहैया कराया गया है। पानी को साफ करने कराने की भी जहमत उठाना नगर पालिका ने गवारा नहीं समझा।
अब मजे की बात यह है कि नगर पालिका अध्यक्ष राकेश राय ने एक विज्ञप्ति प्रसारित कर कहा है कि इस वर्ष वर्षा कम हुई है जिसके कारण पेयजल स्त्रोतों में जल की कमी है काहिरी, खारपा और जमोनिया तालाब में पानी की पूर्ति के लिये रामपुरा डेम से पानी पार्वती नदी में छोड़ा जाये। रामपुरा डेम पार्वती के उद्गम स्थल पर सिध्दिकगंज क्षेत्र में स्थित है। वहाँ से पार्वती नदी में पानी छोड़ा भी जाता है तो इस बात की कितनी संभावना है कि वह पानी सीहोर की पेयजल से जुड़े खारपा और काहिरी बंधान तक पहुँच ही जायेगा। क्योंकि इन दो बंधानों से पूर्व आष्टा और आष्टा के बाद दो तीन बंधानों के बाद ही खारपा और उसके बाद फिर काहिरी बंधान आता है। जहाँ ग्रीष्म के मौसम में रामपुरा जलाशय से छुड़वाया गया पानी पहुँचना नामुमकिन जैसा हो चुका है।
आष्टा नगर पालिका अध्यक्ष कैलाश परमार जैसी छवि और दमदारी वाली बात हो जो स्वयं अपना दल लेकर रामपुरा से पार्वती के बीच पानी चोरी करने वाले लोगों को रोकते हैं और पूरी दमदारी से चाहे कितनी ही मेहनत लगे आष्टा वासियों के लिये पानी लाते हैं। आज यदि रामपुरा से पानी छूटा भी तो वह पहले तो पार्वती तक आना ही मुश्किल हो जाता है फिर आ भी गया पार्वती में भरा जायेगा और आगे बढ़ेगा तो अगले जलस्त्रोतों व डेम में भराकर आगे ही नहीं बढ़ सकता। क्या इतनी सी समझ पढ़े लिखे समझदार बुध्दीमान नगर पालिका अध्यक्ष राकेश राय में भी नहीं है। राकेश राय का कितना हास्यास्पद तर्क है कि रामपुरा डेम से छोड़े गए पानी से खारपा और काहिरी लबालब हो जायेगी और सीहोर में पेयजल संकट नहीं रहेगा।
नगर पालिका अध्यक्ष को मुंगेरीलाल जैसे सपनों को त्यागकर वास्तविक धरातल पर खड़े होकर गंभीरता के साथ शहर के नागरिकों के प्यासे कंठो की प्यास बुझाने के सार्थक प्रयास करना होगा। इसके लिये वह चाहें तो सीहोर के पुराने पेयजल स्त्रोतों को जीवित करने का सार्थक प्रयास कर सकते हैं। बेंगन घांट का पुराना स्त्रोत जो एक समय संपूर्ण सीहोर की प्यास बुझाने का बड़ा माध्यम था, लाल कुंआ एवं क्षेत्र के जीवित नलकूप शहर की पेयजल व्यवस्था को सुचारु बनाये रखने में अपनी अहम भूमिका निभा सकते हैं इसके लिये नगर पालिका को अपनी संकल्प शक्ति का परिचय देना होगा। इसके साथ ही सीवन नदी और शहर के बीचों-बीच बहने वाले नाले में भगवान पुरा तालाब से पानी छुड़वाने के गंभीर प्रयास जरुरी हैं। नदी और नाले में भरपूर पानी हो तो शहर की अधिकांश क्षेत्रों के हेण्डपंप, कुएं बावड़ी में पानी के स्त्रोत स्वत: जीवित हो जायेंगे और नागरिकों के पेयजल समस्या का कुछ हद तक निराकरण भी हो सकता है।

बैलगाड़ी चढ़ने से एक बच्ची की मौत

सीहोर 23 फरवरी (फुरसत)। थाना कोतवाली क्षैत्रार्न्तगत बैलगाड़ी चढ़ने से एक वर्षीय बच्ची की मौत हो गई पुलिस ने प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया है।
ग्राम तखनाखुर्द बालाघाट सिवनी हाल-शिकारपुर निवासी अनिल दीवाड़े की एक वर्षीय पुत्री कृति रोड पर खेल रही थी कि ग्राम बमूलिया निवासी मांगीलाल ने आज दोपहर साढ़े 12 बजे बैलगाड़ी को लापरवाही से चलाकर बैलगाड़ी का पहिया उसके उपर चढ़ा दिया जिससे उसकी मौत हो गई ।

आष्टा खड़ी में धूमधाम से मनी रविदास जयंती

आष्टा 23 फरवरी (फुरसत)। संत शिरोमणी रविदास महाराज की जयंती ग्राम खड़ी में धूमधाम से मनाई गई। जयंती पर संत जी की विशाल यात्रा ग्राम में निकली समापन पर श्रवण कुमार के मुख्य आतिथ्य उपसरपंच मनोहर पटेल की अध्यक्षता एवं लक्ष्मीनारायण वर्मा, बाबुलाल वर्मा, किशन जी वर्मा के विशेष आतिथ्य में कार्यक्रम एवं पदाधिकारियों का सम्मान समारोह कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर संत रविदास जयंती कार्यक्रम में ग्राम के अनेकों नागरिक गण शामिल हुए।

आष्टा में जहरीला पदार्थ खाने से विवाहिता की मौत

आष्टा 23 फरवरी (फुरसत)। आष्टा थाना क्षैत्र में जहरीला पदार्थ खाने वाले एक विवाहिता की मौत हो गई । पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार ग्राम अतरालिया निवासी जगदीश दर्जी की 35 वर्षीय पत्नी सीताबाई ने गत दिवस अज्ञात कारणो से जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया जिसे उपचार हेतू अस्प. शुजालपुर में दाखिल कराया गया था जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई ।

सीहोर जिला चिकि. में रात्रिकालीन मेडिकल स्टोर पुन: चालू करने हेतु पुन: ज्ञापन सौंपा

सीहोर 23 फरवरी (फुरसत)। जिला भारतीय राष्ट्रीय संगठन जिला सीहोर द्वारा जिला चिकित्सालय में रात्रि कालीन मेडिकल स्टोर बंद कर दिया गया है। जिससे पूरे जिले में भर्ती मरीजों को रात्रि में काफी परेशानीयों का सामना करना पड़ रहा है।
साथ ही रात्रि में दवाई उपलब्ध नही होने से उनके स्वास्थ्य पर बहुत प्रभाव पड़ रहा है। पूर्व में एनएसयूआई जिला इकाई द्वारा अतिरिक्त जिलाधीश श्रीमति भावना बिलम्बे को ज्ञापन सौप कर रात्रि कालीन मेडिकल स्टोर जिला चिकित्सालय में चालू करने के लिये ज्ञापन सौंपा था जिस पर आज दिनांक तक कोई पहल नही हुई है ।
आज युवक कांग्रेस अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल के नेतृत्व में नगर अध्यक्ष भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन अध्यक्ष मोहम्मद आरिफ जिलाध्यक्ष एनएसयूआई पंकज गुप्ता, प्रदेश सचिव राजीव गुजराती के विशेष आतिथ्य में सैकड़ो छात्रों के साथ एसडीएम सीहोर को चेतावनी के साथ ज्ञापन सौंपा कि यदि जनहित में मेडिकल स्टोर प्रारंभ नही किया गया तो आंदोलन किया जायेगा जिसकी जवाबदारी जिला प्रशासन की होगी । एसडीएम ने आश्वासन दिया कि 25 फरवरी को होने वाली रोगी कल्याण समिति की मिटिंग में उक्त ज्ञापन पर निर्णय लिया जायेगा । इस अवसर पर सुशील कचनेरिया, जितेन्द्र गोस्वामी, शाकिर कुरैशी, राशिद मंसूरी, मुजीब कुरेशी, राहुल कोठारी, राधेश्याम वर्मा, अम्बर मोनू, राजेश मांझी, मुनव्वर उर्फ मुन्ना भाई, नितीन बाली, अभिषेक त्यागी, अनिल शर्मा, हनीफ कुरैशी, मनीष अग्रवाल, कय्यूम भाई, प्रवीण सोनी, राहुल पाटीदार, राहुल ठाकूर, संदीप सिंह, आदि छात्रगण मौजूद थे ।

सीहोर में जोघा अकबर पर प्रतिबंध का स्वागत किया राजपूत समाज ने

सीहोर 23 फरवरी (फुरसत)। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ठा. भेरूसिंह चौहान, राष्ट्रीय प्रमुख महामंत्री प्रो. सुरेन्द्र सिंह तोमर, राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष, राजीव सिंह भदौरिया के द्वारा प्रदेश भर में फिल्म जोधा अकबर में व्यवसायिक दोहन के निहित स्वार्थ हेतू फिल्मांकित तथ्यात्मक विसंगतियों के खिलाफ प्रदेश भर में चलाये जा रहे अभियान के तहत सीहोर के राजपूत समाज के गतदिवस फिल्म को प्रतिबंधित करने हेतू लीसा टाकीज पर जोरदार प्रदर्शन कर जिलाधीश को महामहिम राष्ट्रपति महो. व मुख्यमंत्री श्री चौहान ने राजपूत समाज की भावना का सम्मान करते हुये आज पूरे प्रदेश में फिल्म को प्रतिबंधित कर दिया । मुख्यमंत्री म.प्र. शासन के द्वारा समयानुकुल और उचित निर्णय लेकर पूरे प्रदेश में फिल्म प्रदर्शन पर लगाई रोक के लिये राजपूत समाज सीहोर उनका आभार व्यक्त करता है ।
आभार व्यक्त करने वालो में प्रमुख रूप से गोविन्द्र सिंह सिसोदिया, नरेन्द्र सिंह सिसोदिया, युवा अध्यक्ष, श्रीमति गायत्री चौहान, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष, राजेन्द्र सिंह सिसोदिया, महामंत्री, बाबूसिंह चौहान, महेन्द्रसिंह सिसोदिया, रामसिंह चौहान, रघुवीरसिंह तोमर, राजेन्द्र सिंहचंदेल, प्रेमनारायण सिंह परमार, इंदरसिंह बैस, दशरथ सिंह सोलंकी, आईएस सिंदल, राजेन्द्र सिंह तोमर, फूलसिंह राजपूत, कमलसिंह परिहार, सुरेन्द्र सिंह बैस, अर्जुनसिंह राठौड़, त्रिलोचन सिंह, डा. एम अस परिहार, सुमेर सिंह महोडिया, विनय सिंह चौहान, अजीत सिंदल, देवेन्द्र सिंह सोलंकी, युवराज सिंह राघव, मनोज सिंह सेंगर, महेंद्र सिंह सिसोदिया, भूपेन्द्र सिंह सिसोदिया, जितेन्द्र सिंह सिसोदिया आदि शामिल है ।

सीहोर के सुकवि मोहन राय स्मृति शिवना सारस्वत सम्मान प्रो. डॉ. जैन का दिया जायेगा

सीहोर 23 फरवरी (फुरसत)। शहर की अग्रणी साहित्यिक प्रकाशन संस्था शिवना प्रकाशन सुकवि मोहन राय की प्रथम पुण्य तिथि पर गीतांजली समारोह का आयोजन करने जा रहा है । आयोजन में स्थानीय माहविद्यालय में प्राचार्य तथा शिक्षाविद् प्रो. डॉ. भागचंद जैन का वर्ष 2008 का सुकवि मोहन राय स्मृति शिवना सारस्वत सम्मान प्रदान किया जाएगा ।
शिवना प्रकाशन के प्रकाशक पंकज सुबीर ने जानकारी देते हुए बताया कि सीहोर के सुप्रसिध्द कवि स्व. श्री मोहन राय की प्रथम पुण्य तिथि 26 फरवरी को होने वाले आयोजन में ये सम्मान प्रदान किया जाएगा । शिवना प्रकाशन ने वर्ष 2006 में शिवना सारस्वत सम्मान की स्थापना की थी जिसे वर्ष 2006 में वरिष्ठ गीतकार श्री रमेश हठीला को तथा 2007 में वरिष्ठ पत्रकार श्री अम्बादत्त भारतीय को दिया गया था । पूर्व के वर्षों में वसंत पंचमी को दिया जाने वाला ये सम्मान इस वर्ष से स्व. श्री राय की पुण्य तिथि पर सुकवि मोहन राय स्मृति शिवना सारस्वत सम्मान के नाम से दिया जाएगा । हर वर्ष किसी भी विधा में लेखनी और ज्ञान ने अपनी पहचान स्थापित करने वाले एक वरिष्ठ व्यक्तिव का सम्मान सारस्वत सम्मान के तहत किया जाता है । इस वर्ष भी सम्मान के लिये नाम का चयन करने के लिये एक समिति का गठन वरिष्ठ साहित्यकार श्री नारायण कासट की अध्यक्षता में किया गया था समिति में वरिष्ठ गीतकार श्री रमेश हठीला, वरिष्ठ शायर श्री डॉ. कैलाश गुरू स्वामी, शास. महाविद्यालय में हिन्दी की प्राध्यापक डॉ. श्रीमती पुष्पा दुबे और पंकज सुबीर शामिल थे । पूर्व के वर्षों में पत्रकारिता एवं साहित्य में सम्मान देने के बाद इस वर्ष समिति ने शिक्षा के क्षेत्र में सम्मान देने का निर्णय लिया था तथा समिति ने सर्व सम्मति से प्रो. डॉ. भागचंद जैन का नाम सम्मान के लिये तय किया है । जिले के वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ. जैन ने स्थानीय शासकीय महाविद्यालय में लम्बे समय प्राध्यापक के रूप में कार्य करते हुए विषय विशेषज्ञ के रूप में अपनी एक अलग पहचान स्थापति की है । तत्पश्चात वे आष्टा के महाविद्यालय में प्राचार्य रहे और उसके बाद वर्तमान में सीहोर के कन्या महाविद्यालय में प्राचार्य के रूप में कार्यरत हैं । इस सम्मान के तहत शाल श्रीफल स्मृति चिन्ह तथा सम्मान पत्र भेंट किया जाता है। सुकवि मोहन राय स्मृति गीतांजली समारोह स्थानीय नगर पालिका भवन के सभागार में किया जा रहा है ।

Saturday, February 23, 2008

...और अब दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा नहीं लगेगी, कांग्रेसी परिषद ने लिया निर्णय

सीहोर 22 फरवरी (आनन्द गाँधी, फुरसत)। नगर पालिका परिषद की एक बैठक में राकेश राय की अध्यक्षता में भाजपा पार्षद भोजराज यादव ने यह प्रस्ताव रखा कि अस्पताल चौराहे का नाम स्व.गेंदालाल जी राय के नाम से रखा जाये इस प्रस्ताव के साथ ही एक अन्य प्रस्ताव विपिन सास्ता ने कोलीपुरा चौराहे पर पूर्व नपाध्यक्ष स्व. जीवनलाल राय के नाम करने का रखा इस पर भी सारे पार्षदों ने भाजपा पार्षदों की बात पर सहमति जता दी। अब मजे की बात यह है कि जिन स्व. पं. दीनदयाल उपाध्याय के भाजपा अपना सर्वमान्य अग्रज मानती हैं, उनके नाम पर पहले ही पटवा शासन में नदी चौराहे का नामकरण किया जाकर यहाँ प्रतिमा स्थापित किये जाने की घोषणा तत्कालीन बाबूलाल गौर स्थानीय शासन मंत्री कर चुके थे। आज वह भाजपा के पार्षदों ने यह नया प्रस्ताव पास करके भाजपा की वर्षों की मंशा पर पानी फेर दिया।
देखते हैं कि क्या भाजपा ऐसे पार्षदों पर कोई कार्यवाही करती हैं ? अपनी ही पार्टी के पुरोध्दाओं के नाम पर घोषणाएं करके भाजपा पूरा शासन काल निकल जाने पर अमल नहीं कर पा रही है आश्चर्य है।
नगर पालिका परिषद की बैठक में सुरेश पचौरी समर्थक राकेश राय की अध्यक्षता में उनकी खास सिपलसालार जो उनकी विशेष अध्यक्षीय समिति में विशेष सदस्य हैं राबिया अशफाक ने भी यहाँ परिषद बैठक में स्व. माधवराव सिंधिया की प्रतिमा तहसील चौराहे पर स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, जिस पर सबने स्वीकृति दी। अब मजे की बात यह है कि तहसील चौराहे के सौन्दर्यीकरण का काम भी राय परिवार द्वारा ही कराया गया था और अब यहाँ राकेश राय के कार्यकाल में सिंधिया जी की प्रतिमा स्थापित हो जायेगी तो कल तो राकेश राय सिंधिया समर्थक भी कहलाने लगेंगे। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस तहसील चौराहे पर पूर्व में एक राष्ट्रीय फूल कमल बना हुआ था उस स्थान पर सिंधिया जी की प्रतिमा बैठ जायेगी। fursat sehore

चुनावी वर्ष में प्रतिमाओं की नई राजनीति शुरु, राष्ट्रीय फूल कमल हटाकर बैठाये जायेंगे माधवराव सिंधिया....

सीहोर । परिषद की विज्ञप्ति के अनुसार नगर पालिका परिषद सीहोर की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई जिसमें नगर विकास सहित जनहित के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होकर एकमत से जनहित के निर्णय लिये गये हैं?
उक्त बात नगर पालिका द्वारा जारी विज्ञप्ति में कही गई है। नगर पालिका सीहोर में जिन विषयों पर चर्चा हुई उनमें प्रमुख रुप से यूआईडी एस.एस. एम. टी.योजना सहित नगर की पेयजल व्यवस्था के संबंध में कार्ययोजना रुपये 89.20 लाख, शहर में नवीन दुकाने बनाकर नागरिकों को रोजगार देने, माननीय मुख्यमंत्री जी की घोषणा अनुरुप चर्च मैदान पर विशाल स्टेडियम निर्माण, डिग्री कालेज के सामने पूर्व भूखण्डों की नीलाम शासन निर्देशानुसार पुन: करने हड्डी मिल को जनस्वास्थ्य की दृष्टि से तत्काल हटाये जाने, हरिजन समाज का वाल्मिकी भवन आदि विषयों पर परिषद में चर्चा होकर जनहित एवं नगर विकास के लिये सर्वसम्मति से प्रस्तावों को पारित किया जाकर कार्यवाही के लिये अध्यक्ष एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी सीहोर को अधिकृत किया गया।
एजेण्डा के अलावा अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई जिसमें पार्षद शमीम अहमद ने नगर की सफाई व्यवस्था पर चर्चा करते हुए विस्तार से प्रकाश डालते हुए जनसेवक कर्मचारियों कर्मचारियों की कमी बताई जाकर सफाई व्यवस्था अच्छी बनाने के लिये 50 मस्टर जनसेवकों को रखे जाने एवं 200 जनसेवकों को भर्ती हेतु शासन को प्रस्ताव भेजे जाने का प्रस्ताव रखा गया जिस पर चर्चा उपरांत सीएमओ को शासन दिशा निर्देशानुसार शीघ्र कार्यवाही को कहा गया।
पचौरी समर्थक राकेश राय की परिषद सिंधिया की प्रतिमा लगवायेगी
नगर की जल प्रदाय व्यवस्था को लेकर सभापति श्रीमति नीरु पवन राठौर द्वारा बताया गया कि नगर में विभिन्न क्षेत्रों में जल प्रदाय के लिये बिछाई जाने वाली, जीआई एवं पीवीसी पाईपलाईन के निविदाएं बुलाई गई किन्तु बाजार में रेट अधिक होने से वर्तमान प्रचलित दर पर कार्य हेतु कोई ठेकेदार तैयार नहीं होने से 100 प्रतिशत अधिक पर कार्य का प्रस्ताव रखा जिसे सदस्यों द्वारा सहमति दी गई तथा सीएमओ को नियमानुसार कार्यवाही के निर्देश दिये। नगर के तहसील चौराहे का नाम बदलकर स्वर्गीय माधवराव सिंधिया चौराहा रखे जाने एवं स्वर्गीय सिंधिया जी की प्रतिमा का प्रस्ताव पार्षद राबिया अशफाक द्वारा तथा पार्षद भोजराज यादव द्वारा अस्पताल चौराहे का नाम स्वर्गीय गेंदालाल राय चौराहा एवं स्वर्गीय श्री राय की प्रगतिा लगाने का प्रस्ताव रखा गया, पार्षद विपिन सास्ता द्वारा बढ़ियाखेड़ी कोलीपुरा चौराहे का नाम पूर्वनपाध्यक्ष स्वर्गीय जीवनलाल राय के नाम करने एवं प्रतिमा लगाये जाने का प्रस्ताव रखा गया जिस पर चर्चा उपरांत नियमानुसार कार्यवाही हेतु निर्देश दिये गये।
बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष राकेश राय, पार्षद हफीज चौधरी, राहुल यादव, शमीम अहमद, मनोज गुजराती, दिनेश भैरवे, जितेन्द्र पटेल, कमलेश राठौर, हृदेश राठौर, भोजराज यादव, राजू पहलवान, कमला पिपलोदिया, रंजीत सिंह वर्मा, लीला लोधी, प्रभा राठौर, राजश्री छाया, नीरु पवन राठौर, राबिया अशफाक, फरहाना-इरफान वेल्डर, सरोज सिंह ठाकुर, सांसद प्रतिनिधि मेहरबान सिंह बलभद्र, विपिन सास्ता, मीना सतीश दरोठिया, अर्जुन सिंह राठौर, रजनी ताम्रकार, सीताराम अहिरवार, राम प्रकाश चौधरी, रामचन्दर पटेल, मिथिलेश मिश्रा, हाजी सलीम कुरैशी, आशीष गेहलोत आदि सहित सीएमओ डी.के.श्रीवास्तव सहायक यंत्री पी.के.जैन आदि उपस्थित थे। fursat sehore

बीएसएनएल के बिगड़े नेटवर्क से उपभोक्ता परेशान

आष्टा 22 फरवरी (सुशील संचेती, फुरसत )। एक और भारत संचार निगम लिमिटेड अपने घटते हुए उपभोक्ताओं से चिंतित होकर नई-नई स्कीम और योजनाएं लाकर उपभोक्ताओं को अपनी और आकर्षित कर रही है। उपभोक्ता आकर्षित भी हो रहे हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर अधिकारी इनसे वालों का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की समस्या से वे खबर होने के कारण उपभोक्ताओं में रोष है।
आष्टा नगर में इन दिनों जो उपभोक्ता बीएसएनएल के मोबाइल उपयोग कर रहे हैं वे नेटवर्क की गड़बड़ी के कारण परेशान है। आष्टा में ऐसे उपभोक्ताओं के पास उक्त कम्पनी का मोबाइल तो है लेकिन नेटवर्क के कारण उन्हे बात करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कम्पनी ने 149 रुपये वाली टेलिफोन पर जो सेवा प्रारंभ की है उसमें ऐसी सेवा वाले टेलीफोन उपभोक्ता अपने लेण्डलाइन से मोबाइल पर बात निशुल्क है लेण्डलाईन के उपभोक्ता जब उक्त प्राप्त सेवा का लाभ उठाने के लिये लेण्ड लाईन से बीएसएनएल के मोबाइल पर काल करते हैं तो घंटी तो जाती है लेकिन बात नहीं होती है। इसके पीछे बीएसएनएल का बिगड़ा नेटवर्क ही कारण माना जा रहा है। आष्टा में ऐसे उपभोक्ता काफी परेशान है स्थानीय टेलीफोन विभाग के अधिकारियों को इस और ध्यान देना चाहिए नहीं तो बिगड़ी उक्त व्यवस्था से जो लोग बीएसएनएल की और आकर्षित हुए हैं कहीं वे फिर दूर होना प्रारंभ ना कर दें। Fursat sehore

अब चलित थाने गांवों में ही पहुँचकर सुनवाई करेंगे

आष्टा 22 फरवरी (फुरसत)। अभी तक पीड़ितों को घटना दुर्घटना के बाद चल कर थाने आना पड़ता था और यहाँ कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था सरकार और पुलिस महकमे के आला अफसरों को अब लगा की जो थाने में आता है वो कितना परेशान होता होगा और किन-किन समस्याओं से उसे दो चार होना पड़ता होगा।
अब आई.जी.भोपाल, जिला पुलिस अधीक्षक सीहोर के निर्देशानुसार थाने में बैठे टीआई या सक्षम अधिकारी सादल बल के चलित थानों के साथ ग्रामों में पहुँचेंगे और वहीं पर शिविर लगाकर ग्रामीणों की शिकायतों समस्याओं का निराकरण करेंगे। एसडीओपी मनु व्यास ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि 22 फरवरी को आष्टा थाने का चलित थाना बड़झिरी एवं 26 फरवरी को टिटोरिया पहुँचेगा। जावर थाने का चलित थाना 24 फरवरी को बीसूखेड़ी एवं 26 फरवरी को मुरावर पहुँचेगा। सिध्दिकगंज थाने का चलित थाना 25 फरवरी को पगरिया हाट एवं नीलबड़ पहुँचेगा एवं 25 फरवरी को खाचरौद बादरिया हाट पहुँचेगा और इन ग्रामों में आये आवेदन पत्रों की जांच करेंगे तथा इन क्षेत्रों के निगरानी बदमाशों, गुण्डा तत्वों की जांच करेंगे। आर्म्स, लायसेंस, मुसाफिरान, पेंशन दारान की भी जांच करेंगे तथा इन ग्रामों में ग्राम रक्षा समितियो की बैठक आयोजित करेंगे। चलित थानों को मौके पर जो शिकायतें मिले उसकी त्वरित जांच कर निराकरण भी सुनिश्चित करेंगे। अगर पुलिस ने इन चलित थानों की योजना को ईमानदारी से निभाया तो निश्चित वरिष्ठ अधिकारियों को जिस उद्देश्य से उक्त चलित थानों की शुरुआत की है उसमें सफलता तो मिलेगी पुलिस के प्रति ग्रामीणों को विश्वास भी बढ़ेगा और अगर चलित थानों के साथ पहुँची। पुलिस ने वहाँ भी थानों जैसा रवैया अपनाया तो निश्चित यह योजना पुलिस को और बदनाम करेगी। देखना है अधिनस्थ अपने वरिष्ठों की कसौटी पर कितने खरे उतरते हैं। fursat sehore

मुआवजा लेने के बाद भी निर्माण नहीं हटाने पर प्रशासन ने जेसीबी से भवन गिराया

आष्टा 22 फरवरी (सुशील संचेती, फुरसत)। सीहोर से देवास तक बन रहा फोर लेन मार्ग का कार्य इन दिनों बड़ी तेजी से चल रहा है। आष्आ से 3 कि.मी. दूर इन्दौर मार्ग पर स्थित मार्डन उेरी का अग्रभाग जिसमें डेरी का प्लांट लगा है वो भी रोड में आया है, शासन की और से उसका मुआवजा लगभग 16 लाख रुपये 7-8 माह पूर्व भुगतान हो जाने तथा उक्त भवन हटाने का समय दिये जाने के बाद भी जब उक्त भवन नहीं तोड़ा तथा रोड के निर्माण कार्य में बाधा आने पर आखिरकार कल फोरलेन सड़क निर्माण एजेंसी के मैनेजर ने पिछले दिनों कलेक्टर को बताया था कि उक्त भवन मालिक द्वारा सड़क में आ रहे उक्त भवन को नहीं हटा रहा है।
जिससे सड़क का कार्य प्रभावित हो रहा है कलेक्टर ने एसडीएम आष्टा को निर्देश दिये जिस पर कल एसडीएम श्रीमति रश्मि, एसडीओपी मनु व्यास सादल बल के उक्त अतिक्रमण को हटाने पहुँचे तो डेरी में दूध देने वाले 100-150 दूध वालों ने विरोध किया जिन्हे प्रशासन ने खदेड़ दिया और बाद में जेसीबी से उक्त भवन को तोड़ने का कार्य शुरु हुआ जो जारी
उक्त आ रहे भवन का मुआवजा देने के बाद भवन मालिक ने 1 माह का समय मांगा था तब प्रशासन ने समय दे दिया था लेकिन उसके बाद भी 5-6 माह तक उसने भवन नहीं तोड़ा उल्टे और समय मांगने लगा इससे ऐसा लग रहा था कि भवन के मालिक की मंशा कुछ और नजर आ रही थी sehore fursat

सुकवि स्व. मोहन राय की स्मृति में गीतांजली समारोह का आयोजन करेगा शिवना प्रकाशन

सीहोर 22 फरवरी (फुरसत)। शहर की अग्रणी साहित्यिक प्रकाशन संस्था शिवना प्रकाशन सुकवि मोहन राय की प्रथम पुण्य तिथि पर गीतांजली समारोह का आयोजन करने जा रहा है ।
शिवना प्रकाशन के प्रकाशक पंकज सुबीर ने जानकारी देते हुए बताया कि सीहोर के सुप्रसिध्द कवि स्व. श्री मोहन राय की प्रथम पुण्य तिथि 26 फरवरी को ये आयोजन किया जाएगा । स्व. श्री राय सीहोर के मूर्ध्दन्य कवियों में थे तथा प्रकृति चित्रण की अपनी कविताओं के लिये एक जाना माना नाम थे । प्रदेश भर के अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों के मंचों पर काव्य पाठ करके उन्होंने सीहोर को गौरवान्वित किया था । स्व. श्री राय का साहित्य को लेकर विशेष अनुराग था तथा सीहोर की साहित्यिक गतिविधियों में उनका विशेष योगदान हुआ करता था ।
उनके दो काव्य संग्रहों गुलमोहर के तले तथा झील का पानी का प्रकाशन शिवना प्रकाशन ने क्रमश: वर्ष 2005 तथा 2006 में किया था। शिवना प्रकाशन के संस्थापन में भी उनका विशेष योगदान था तथा उनकी ही प्रेरणा से तीन वर्ष पूर्व ये प्रकाशन स्थापित किया गया था। प्रकाशन की पहली पुस्तक के रूप में भी उनकी ही किताब गुलमोहर के तले का प्रकाशन किया गया था ।
उनकी पुस्तक गुलमोहर के तले साहित्य जगत में खासी चर्चित रही थी । बाद में उनकी ही प्रेरणा से शिवना प्रकाशन ने वर्ष 2006 में शिवना सारस्वत सम्मान की स्थापना की थी जिसे वर्ष 2006 में गीतकार श्री रमेश हठीला को तथा 2007 में वरिष्ठ पत्रकार श्री अम्बादत्त भारतीय को दिया गया था । शिवना प्रकाशन ने निर्णय लिया है कि पूर्व के वर्षों में वसंत पंचमी को दिया जाने वाला ये सम्मान इस वर्ष से स्व. श्री राय की पुण्य तिथि पर दिया जाएगा और इस वर्ष से इसका नाम भी सुकवि मोहन राय स्मृति शिवना सारस्वत सम्मान कर दिया गया है । जैसी की स्व. श्री राय की इच्छा थी कि हर वर्ष किसी भी विधा में लेखनी और ज्ञान ने अपनी पहचान स्थापित करने वाले एक वरिष्ठ व्यक्तिव का सम्मान सारस्वत सम्मान के तहत किया जाता है। इस वर्ष भी सम्मान के लिये नाम का चयन करने के लिये एक समिति का गठन कर दिया गया है जो एक दो दिन में नाम चयन कर लेगी वरिष्ठ साहित्यकार नारायण कासट की अध्यक्षता में गठित समिति में वरिष्ठ गीतकार रमेश हठीला, वरिष्ठ शायर डॉ. कैलाश गुरू स्वामी, शास. महाविद्यालय में हिन्दी की प्राध्यापक डॉ. श्रीमती पुष्पा दुबे और पंकज सुबीर शामिल हैं । इस सम्मान के तहत शाल श्रीफल स्मृति चिन्ह तथा सम्मान पत्र भेंट किया जाता है । इस वर्ष सुकवि मोहन राय स्मृति गीतांजली समारोह स्थानीय नगर पालिका भवन के सभागार में किया जा रहा है जहां पर सीहोर के कवि गण, साहित्यकार, पत्रकार एवं सुकवि श्री राय के मित्रगण उन्हें श्रध्दांजली प्रदान करेंगें।