आष्टा 16 फरवरी (सुशील संचेती)। कई महिनों से आष्टा नगर में लगातार हो रही चोरियों, मोटर साईकिल चोरी, ट्रक कटिंग, जुंआ, सट्टा को लेकर नगर का संभ्रांत नागरिक, व्यापारी, आमजन तंग आ चुका था वहीं निष्क्रिय टी.आई. के कारण नगर में ना ही चोरियाँ रुक पा रही थीं और ना ही जुंआ, सट्टा, ट्रक कटिंग आदि अपराधों में कमी आ रही थी। पीड़ित थाने तो जाता था पहले तो रिपोर्ट यह कहकर नहीं लिखी जाती थी कि टीआई आयेंगे तब लिखेंगे अभी लिखित में दे जाओ, ऐसा किस कानून में लिखा है कि टीआई कहेंगे तो ही रिपोर्ट लिखेंगे ? जैसे-तैसे रिपोर्ट लिख भी ली जाती तो चोर पकड़े ही नहीं जाते, उल्टे पुलिस को जुंआरियों-सटोरियों असामाजिक तत्वों के साथ चाय-पानी की पार्टी के रुप में नगर में कहीं भी देखा जा सकता था लम्बे समय से आष्टा के नागरिक यहाँ तक सत्ता पक्ष के नेताभी नागरिकों की मांग पर टीआई को हटाने की मांग कर रहे थे लेकिन इस और कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा था।
आज सुबह लगभग 3 बजे आष्टा नगर के कन्नौद रोड पर मोतीलाल पाटीदार के मकान-दुकान की शटर चोरों ने ऊंची की तो अंदर सो रहे पाटीदार उनके पुत्र एवं परिवार की महिलाएं जाग गईं। पाटीदार ने समय गंवाये बिना उठकर जब दुकान में आने के लिये कमरे का फाटक खोला तो एक चोर दुकान में रखे कापर वायर के रिम दूसरे चोर को दे रहा है। पाटीदार ने जब विरोध किया तो उस पर चोरों ने हमला बोलकर घायल कर दिया जान बचाने के उद्देश्य से पाटीदार घर में घुसे तब चोरों ने फाटक पर वार कर फाटक तोड़ा इसी दौरान पुलिस को सूचना की। पुलिस 15-20 मिनिट में पहुँचे तब तक चोर लगभग 40 हजार रुपये का कापर वायर पाटीदार को घायल कर भाग गये। पाटीदार ने थाने पहँचकर शिकायत दर्ज कराई। सुबह कृषि उपकरण विक्रेता संघ व नगर के अन्य व्यापारी संगठन के सदस्यों को तथा पत्रकारों को सूचना दी सूचना मिलते ही लगभग 200 से अधिक घटना स्थल पर पहुँच गये। यहीं पर सभी व्यापारी संगठनों ने बैठक कर एक स्वर में निर्णय लिया कि जब तक आष्टा थाने में टीआई बी.के.उपाध्याय के रहते हुए ना ही चोरियाँ रुकेंगी और ना ही चोर पकड़े जायेंगे क्योंकि जब तक चोर पुलिस एक साथ हो तो कैसे विश्वास करें कि चोर पकड़े जायेंगे और चोरियो रुकेंगी। तत्काल सभी के निर्णय पर एक ज्ञापन विशाल जुलूस के रुप में तहसील कार्यालय पहुँचा और एसडीएम जीव्ही रश्मि को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा जिसमें कहा गया कि मोतीलाल पाटीदार की दुकान में चोरों ने 1-2 बार नहीं 4 बार धाबा बोलकर चोर लाखों का सामान ले जा चुके हैं। इसके पूर्व मोतीलाल पाटीदार की परदेशीपुरा में जब दुकान थी तब चोरों ने 7 जुलाई 06, फिर 21 दिसम्बर 06 और 9 अक्टूबर 07 को भी चोरी कर लाखों का सामान ले गये थे। परेशान होकर आखिर पाटीदार ने वहाँ से उक्त दुकान खाली कर कन्नौद रोड पर ले गये लेकिन यहाँ भी चोर पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। अब आज तंग आ चुके व्यापारियों ने निर्णय लेकर टीआई को आष्टा से हटाने तथा चोरों को पकड़ने की मांग को ज्ञापन सौंपा। रात्रि में स्थानीय विश्राम गृह पर घटना की गंभीरता को देखते हुए तथा व्यापारियों के आक्रोश की खबर लगते ही जिला पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र प्रसाद आष्टा आये उन्होने भाजपा जिलाध्यक्ष ललित नागौरी की उपस्थित में सभी व्यापारी संगठन के अध्यक्षों ने जिला पुलिस अधीक्षक से चर्चा कर एक स्वर में टीआई को आष्टा से हटाने की मांग तथा आंदोलन के बारे में बात की। लम्बी वार्तालाप में जिला पुलिस अधीक्षक ने ठोस आश्वासन दिया कि 3 दिन में टीआई को हटा दिया जायेगा उनके इस आश्वासन पर नगर बंद का आव्हान वापस ले लिया गया।
पुलिस को व्यापारियों ने खदेड़ा- चोरी की सुबह रिपोर्ट करने के बाद जब सुबह पुलिस घटना स्थल पर पहुँची तब तक लगभग 50-100 व्यापारी एकत्रित हो गये थे। नाराज व्यापारियों ने आई पुलिस को देखकर मुर्दाबाद टीआई हटाओ नगर बचाओ के नारे लगाकर पुलिस को खदेड़ दिया। पुलिस जवान जीप में बयान लेने आये थे लेकिन व्यापारियों की नाराजी देख चलते बने।
टीआई घटना स्थल पर नहीं आये- रात्री में 3 बजे चोरी के बाद पाटीदार ने पुलिस को सूचना कर दी थी। गश्त वाहन 15-20 मिनिट बाद घटना स्थल पर पहुँचा तब तक चोर माल समेट कर भाग चुके थे लेकिन उसके बाद भी सुबह 12 बजे तक भी टीआई बी.के. उपाध्याय ने घटना स्थल पर पहुँचने की तकलीफ नहीं की इसके पूर्व भी कई बार ऐसा हुआ है कि घटना स्थल पर सूचना देने के बाद भी टीआई नहीं पहुँचे और अधिनस्थों को भेज दिया। बसंत पंचमी को एक दुर्घटना में 22 लोग आष्टा के घायल हो गये जो सड़क पर सुबह 5 बजे से तड़पते रहे पुलिस को सचना देने के बाद भी एक-डेढ़ घंटे वहाँ नहीं पहुँचे तब नगर के एक पत्रकार स्वयं एम्बुलेंस लेकर वहाँ पहुँचे और घायलों को अस्पताल ले कर आये। अलीपुर में भी इसके पहले कन्हैया गेहलोत के यहाँ जब चोर घुसे तब उन्होने टीआई को मोबाइल लगाया लेकिन उन्होने उस वक्त मोबाइल नहीं उठाया और चोर भाग गये। बाद में पुलिस काफी देर से पहुँची थी।
भाजपा ने भी टीआई को हटाने की मांग की थी- महिनों पहले आष्टा में जब भाजपा का विकास शिविर हुआ था तब सभी कार्यकर्ताओं ने शिविर में एक स्वर में प्रभारी मंत्री से टीआई को आष्टा से हटाने की मांग की थी लेकिन वे भी उन्हे नहीं हटा सके और टीआई आज तक आष्टा में हैं।
आज भाजपा-कांग्रेस भी व्यापारियों के साथ थी- आज जब नगर के सभी व्यापारी जब टीआई को हटाने तथा नगर बंद का ज्ञापन देने जा रहे थे तब भाजपा और कांग्रेस के नेता भी व्यापारियों के साथ कदम से कदम मिला कर उनकी मांग के समर्थन में साथ थे व्यापारियों के जुलूस में जिला कांग्रेस अध्यक्ष कैलाश परमार भाजपा ग्रामीण मण्डल अध्यक्ष धरम सिंह वर्मा, कालु भट्ट, भाजपा व्यापारी प्रकोष्ठ प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य सुशील संचेती, कांग्रेस के जिला प्रतिनिधि प्रदीप प्रगति जुलूस में साथ थे।
ललित नागौरी घटना स्थल पर पहुँचे- मोतीलाल पाटीदार के यहाँ चौथी बार चोरी होने की सूचना मिलते ही भाजपा जिलाध्यक्ष ललित नागौरी, कोषाध्यक्ष मुकेश बड़जात्या, व्यापारी प्रकोष्ठ के जिला उपाध्यक्ष अशोक शीतल, नगर अध्यक्ष पंकज नाकोड़ा पाटीदार के प्रतिष्ठान पर पहुँचे यहाँ पर नागौरी ने घटना की जानकारी ली और वहीं से आईजी भोपाल, प्रभारी मंत्री, जिला पुलिस अधीक्षक से बात कर श्री नागौरी ने व्यापारियों की मांग का समर्थन कर कहा कि जब तक टीआई को आष्टा से नहीं हटाया जायेगा व्यापारियों का आव्हान वापस नहीं हो सकता। तहसील कार्यालय में ज्ञापन का वाचन कपड़ा व्यापारी, नरेन्द्र जैन ने किया तथा व्यापारी संघ के अध्यक्ष नवनीत संचेती, विनय आर्य, बबलु पार्षद रवि सोनी, संजय बंटु सोनी, राजेश मित्तल, अशोक शीतल, राजेन्द्र जैन, सुरेश जैन, प्रवीण धाड़ीवाल, कैलाश जैन, रजनीश सुराना, हाफिज बब्बन भाई, विजय खण्डेलवाल, नगीन छाजेड़, प्रमोद राठौर, बद्रीलाल पाटीदार, तेज सिंह पाटीदार सहित सैकड़ो व्यापारी शामिल थे। sehore fursat
Saturday, February 16, 2008
विधायक समर्थक रमाकांत समाधिया, प्रदीप गौतम सहित ओम शर्मा, महेश पारिक भी शामिल............
ब्राह्मण समाज ने सुरेश पचौरी की बधाई दी
सीहोर 15 फरवरी (फुरसत)। सर्व ब्राह्मण समाज व सर्वब्राह्मण नवयुवक संगठन ने ब्राह्मण नेता व केन्द्रीय मंत्री व ब्राह्मणों के मसीहा सुरेश पचौरी को म.प्र. कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाये जाने पर उन्हे सर्व ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष मदन मोहन शर्मा व सर्व ब्राह्मण नवयुवक संगठन के अध्यक्ष एवं युवा नेता अनिल शर्मा ने बधाई दी। बधाई देने वालों में प्रमुख रुप से सर्वब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पं. मदन मोहन शर्मा, ब्राह्मण नवयुवक संगठन के अध्यक्ष अनिल शर्मा, सुरेश शर्मा, चन्द्रशेखर पहलवान, गीता प्रसाद शर्मा, कमलेश कटारे, प्रदीप गौतम, रमाकांत समाधिया, अभय शर्मा, प्रदीप शर्मा, राकेश पाठक, दीपक शर्मा, ओम शर्मा, सुभाष शर्मा, अशोक नायक, रवि शर्मा, महेश पारिक, राजेश चतुर्वेदी, शैलेष तिवारी, वरुण शर्मा, जयकृष्ण त्यागी, प्रहलाद दास शर्मा, विवेक शर्मा, मनोहर शर्मा कोषाध्यक्ष, संजय शुक्ला, राजेश दुबे, त्रिलोक ी शर्मा, पंकज व्यास, मनोहर शर्मा मन्नु, जितेन्द्र शर्मा, ईशान शर्मा, रमेश शर्मा, रवि पारे, राजेन्द्र शर्मा कल्लु, सुमित शर्मा, राजेश शर्मा, शेषनारायण शर्मा, सिध्दार्थ शर्मा ने बधाई दी। sehore fursat
शासन ने कोटवारों को साईकिल वितरण कार्यक्रम रस्म अदायगी की तरह किया
आष्टा 15 फरवरी (फुरसत)। स्थानीय प्रशासन लगता है सरकार की अच्छी मंशा और उनकी घोषणाओं को पतीला लगाने में कहीं से भी पीछे नहीं रह रहे हैं आज स्थानीय प्रशासन ने मुख्यमंत्री द्वारा कोटवारों की पंचायत में की गई ऐतिहासिक घोषणा के पूरे होने पर एक कार्यक्रम आयोजित कर आष्टा तहसील के सभी 298 कोटवारों (चौकीदारों) को आमंत्रित कर उन्हे साईकिलों का समारोह पूर्वक वितरण करना था, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने उक्त पूरा कार्यक्रम रस्म अदायगी की तरह करके इतिश्री कर ली।
ऐसा ही स्थानीय प्रशासन ने 26 जनवरी को किया था जब म.प्र. सरकार की घोषणा के अनुरुप समारोह आयोजित कर किसानों को नई भू-अधिकार ऋण पुस्तिका का वितरण करना था लेकिन जहाँ पर ध्वजारोहण हो रहा था वहीं पर आष्टा नगर के 4-5 किसानों को बुलवा लिया और उन्हे उक्त अधिकार पुस्तिका बांट कर इतिश्री कर ली। आखिर स्थानीय प्रशासन को ऐसी क्या परेशानी थी कि आज रस्म अदायगी की तरह तहसील में चंद गिनती के कोटवारों को बुलवा कर उन्हे साईकिल वितरण कर दी। आष्टा तहसील में लगभग 298 कोटवार हैं आज उन सभी को आमंत्रित करके एक समारोह आयोजित कर सभी कोटवारों को मुख्यमंत्री की घोषणा एवं चौकीदारों की मांग पर म.प्र.के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब प्रदेश के प्रथम नागरिक ने प्रशासन के निचले स्तर के सबसे अंतिम कर्मचारी चौकीदारों को अपने निवास पर बुलवाया और उनसे उनकी सुनी। उसी पंचायत में कोटवारों ने मुख्यमंत्री के सामने मांग रखी थी कि उन्हे आने-जाने में काफी परेशानी होती है। इसी मांग पर मुख्यमंत्री जी ने पंचायत में घोषणा की थी कि सरकार सभी चौकीदारों को साईकिल देगी और उक्त घोषणा पूरी हुई लेकिन स्थानीय प्रशासन ने आज उक्त घोषणा की रस्म अदायगी की तरह निपटा दिया। आज केवल 50-60 कोटवार ही कार्यक्रम में उपस्थित थे। उन्हे विधायक रघुनाथ सिंह मालवीय एवं जिला अध्यक्ष ललित नागौरी, संतोष झंवर, मुकेश बड़जात्या, कुमेर सिंह भाटी, एसडीएम जी.व्ही.रश्मि की उपस्थिति में रस्मी तौर पर साइकिलें वितरित कर दी। आखिर उक्त कार्यक्रम को वृहद स्तर पर स्थानीय प्रशासन ने क्यों आयोजित नहीं किया ? क्या कारण थे कि 298 चौकीदार उपस्थित नहीं हुए क्या उन्हे सूचना दी भी गई थी कि वहीं नगर के स्थानीय जनप्रतिनिधियों को क्यों सूचना नहीं दी गई। यह सब ऐसे प्रश् हैं जो स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़े करते हैं वहीं वरिष्ठ अधिकारी चाहे तो जबाव-तलब भी कर सकते है। 26 जनवरी को जिन 4-5 किसानों को भू अधिकार ऋण पुस्तिका वितरण कर प्रशासन ने उक्त कार्यक्रम की भी जो रस्म अदायगी की थी उसके बाद शेष किसानों को उक्त ऋण पुस्तिका का अभी तक क्यों वितरण नहीं हुआ क्योंकि स्थानीय प्रशासन ने अभी तक प्रेस को किसी भी प्रकार की जानकारी आदि देना मुनासिफ नहीं समझा है। sehore fursat
ऐसा ही स्थानीय प्रशासन ने 26 जनवरी को किया था जब म.प्र. सरकार की घोषणा के अनुरुप समारोह आयोजित कर किसानों को नई भू-अधिकार ऋण पुस्तिका का वितरण करना था लेकिन जहाँ पर ध्वजारोहण हो रहा था वहीं पर आष्टा नगर के 4-5 किसानों को बुलवा लिया और उन्हे उक्त अधिकार पुस्तिका बांट कर इतिश्री कर ली। आखिर स्थानीय प्रशासन को ऐसी क्या परेशानी थी कि आज रस्म अदायगी की तरह तहसील में चंद गिनती के कोटवारों को बुलवा कर उन्हे साईकिल वितरण कर दी। आष्टा तहसील में लगभग 298 कोटवार हैं आज उन सभी को आमंत्रित करके एक समारोह आयोजित कर सभी कोटवारों को मुख्यमंत्री की घोषणा एवं चौकीदारों की मांग पर म.प्र.के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब प्रदेश के प्रथम नागरिक ने प्रशासन के निचले स्तर के सबसे अंतिम कर्मचारी चौकीदारों को अपने निवास पर बुलवाया और उनसे उनकी सुनी। उसी पंचायत में कोटवारों ने मुख्यमंत्री के सामने मांग रखी थी कि उन्हे आने-जाने में काफी परेशानी होती है। इसी मांग पर मुख्यमंत्री जी ने पंचायत में घोषणा की थी कि सरकार सभी चौकीदारों को साईकिल देगी और उक्त घोषणा पूरी हुई लेकिन स्थानीय प्रशासन ने आज उक्त घोषणा की रस्म अदायगी की तरह निपटा दिया। आज केवल 50-60 कोटवार ही कार्यक्रम में उपस्थित थे। उन्हे विधायक रघुनाथ सिंह मालवीय एवं जिला अध्यक्ष ललित नागौरी, संतोष झंवर, मुकेश बड़जात्या, कुमेर सिंह भाटी, एसडीएम जी.व्ही.रश्मि की उपस्थिति में रस्मी तौर पर साइकिलें वितरित कर दी। आखिर उक्त कार्यक्रम को वृहद स्तर पर स्थानीय प्रशासन ने क्यों आयोजित नहीं किया ? क्या कारण थे कि 298 चौकीदार उपस्थित नहीं हुए क्या उन्हे सूचना दी भी गई थी कि वहीं नगर के स्थानीय जनप्रतिनिधियों को क्यों सूचना नहीं दी गई। यह सब ऐसे प्रश् हैं जो स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़े करते हैं वहीं वरिष्ठ अधिकारी चाहे तो जबाव-तलब भी कर सकते है। 26 जनवरी को जिन 4-5 किसानों को भू अधिकार ऋण पुस्तिका वितरण कर प्रशासन ने उक्त कार्यक्रम की भी जो रस्म अदायगी की थी उसके बाद शेष किसानों को उक्त ऋण पुस्तिका का अभी तक क्यों वितरण नहीं हुआ क्योंकि स्थानीय प्रशासन ने अभी तक प्रेस को किसी भी प्रकार की जानकारी आदि देना मुनासिफ नहीं समझा है। sehore fursat
जहर खाने वाली विवाहिता की मौत
सीहोर 15 फरवरी (फुरसत)। शाहगंज थाना क्षेत्र के ग्राम सागपुर में अज्ञात कारणों से जहर खाने वाली एक विवाहिता की मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरु कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम सारंगपुर में रहने वाले राजेश चौहान की 28 वर्षीय पत्नि कुंतीबाई ने गत गुरुवार की शाम अपने घर में जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को पी.एम.हेतु भेज मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरु कर दी है। sehore fursat
Friday, February 15, 2008
वेलेंटाइन पर प्यार जताने हरदा से आष्टा पहुँचे मजनू की लैला ने लू उतारी....
आष्टा 14 फरवरी (फुरसत)। आज वेलेंटाइन डे पर आष्टा नगर के बुधवारा क्षेत्र में हरदा क्षेत्र से प्यार का इजहार करने आया एक युवक एक लकड़ी के हाथों पीटते-पीटते बच गया पीटने से बचने का कारण उक्त युवक ने उक्त युवती से हाथ जोड़ कर माफी मांगी। फुरसत के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हरदा शहर का एक युवक एक लड़की को पिछले 2-3 दिनों से परेशान कर रहा था कल पुन: उक्त युवक ने इस युवती से कहा कि कल वेलेंटाइन डे है मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ उक्त युवती ने मौके का फायदा उठाकर उक्त युवक को सबक सिखाने एवं उसके प्यार का भूत उतारने की सोची और कल युवती ने उक्त युवक को आष्टा में एक निश्चित स्थान पर बुला लिया। युवक की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और जैसे-तैसे रात काटी और आज सुबह अपनी मोटर साईकिल से हरदा क्षेत्र से रवाना हुआ पूरे रास्ते उसने कई सपने भी संजोये होंगे आष्टा पहुँचा उक्त युवक पूछते-पूछते बताये स्थान पर पहुँचा। युवती ने उसे देख पूछा हरदा से आये हो युवक ने कहा हाँ...बस फिर क्या था युवती ने उसकी ऐसी लू उतारी कि वो जिंदगी भर वेलेंटाइन-डे याद रखेगा बाद में उसे जब छोड़ा जब उसने उसे बहन कहकर माफी मांगी। हसनी सपने संजोकर हरदा क्षेत्र से आष्टा आया उक्त युवक ऐसी स्थाई याद लेकर आष्टा से हरदा क्षेत्र गया की शायद वो आज का वेलेंटाइन-डे जिंदगी भर नहीं भूल पायेगा। जो इलाज इस प्रेमी का आज उक्त युवती ने किया अगर मनचलों को सबक सिखाने के लिये युवती ऐसी ही कमर कर सें तो फिर क्या कहने...। fursat sehore
जब रावण से युध्द करते राम जी पीछे हट गये, और यह सुन हनुमान नाराज हुए
सीहोर 14 फरवरी (फुरसत)। जो ज्ञान परमात्मा का ज्ञान न कराए, वह व्यर्थ है। ज्ञान तो मुक्ति के द्वार खोल देता है, यदि ज्ञान के द्वार हम मुक्ति का मार्ग न खोज पाएं तो उस ज्ञान का कोई अर्थ नहीं है। परमात्मा पर भरोसा करो तो पूरी श्रध्दा के साथ करना, कोई संशय नहीं रखना। जब तक परमात्मा पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहोगे, वह आपकी मदद उतनी तत्परता से नहीं करेगा इसलिये संशय रुपी विचार को परमात्मा की भक्ति के समय अपने मन से हटाने में ही कल्याण है।
इस आशय के उद्गार काशी से पधारे स्वामी रामकमल दास जी महाराज ने विधायक रमेश सक्सेना के गृहग्राम में लगातार 27 वीं बार मानस प्रचार समिति बरखेड़ाहसन के तत्वाधान में हो रही संगीतमय श्रीराम कथा के दूसरे दिन बड़ी संख्या में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। स्वामी जी ने कहा कि हनुमान जी और वाल्मिकी जी के बीच हुए प्रसंग को रोचक तरीके से सुनाते हुए कहा कि वाल्मिकी जी ने अपनी रामायण में लिखा है कि राम-रावण युध्द में रामजी ने एक बार अपने कदम पीछे हटाए थे, जब यह हनुमान जी ने पढ़ा तो उन्होने वाल्मिकी जी से इस लाईन को हटाने की बात कही और कहा कि मैं राम जी के साथ पग-पग पर था उन्होने कभी अपने कदम पीछे नहीं हटाए। जब वाल्मिकी जी ने कहा कि यह रामायण मैने अपनी समाधि स्थिति में लिखी है इसलिये गलत नहीं हो सकती तब यह मामला श्रीराम दरबार में पहुँचा तब श्रीराम ने कहा कि दोनो ही अपनी-अपनी जगह सही हैं क्योंकि जब मेरा और रावण का युध्द हो रहा था तब हम दोनो लड़ते-लड़ते इतने नजदीक आ गए कि हमारी छातियाँ टकराने लगीं तब धनुष की प्रत्यंचा पर वाण को चढ़ाने के लिये मुझे एक कदम पीछे रखना पड़ा इसलिये हनुमान जी जो कह रहे हैं वह भावनात्मक सत्य है और जो वाल्मिकी जी ने कहा वह तथ्यात्मक सत्य है इसलिये दोनो ही अपनी जगह सही हैं।
स्वामी जी ने कहा कि भगवान श्री राम ने सुतीक्ष्ण, शबीरी और केवट जो ज्ञानी भक्त नहीं थे, उन्हे बिना मांगे अपनी अविरल भक्ति प्रदान की है जब ज्ञानी भक्ति करते हैं तो उसमें उतना भाव नहीं आ पाता और वे किनतु परन्तु करते हैं। इसलिये अज्ञानी भक्त को भगवान की प्राप्ति अधिक सुलभ है। उन्होने कहा कि लेकिन, किंतु, परंतु और अंग्रेजी भाषा के वट शब्द ने आज पूरे संसार को नचा रखा है इसलिये भक्ति में शंका नहीं करें। उन्होने हनुमान जी के शिक्षाग्रहण की बात कहते हुए प्रसंग सुनाया और कहा कि उनसे कठिन शिष्य अभी तक कोई नहीं हुआ जिस तरह उन्होने शिक्षा ग्रहण की वह अद्भुत है। स्वामी जी ने बताया कि विश्व में कुल 226 लोगों द्वारा लिखी गई रामायण मौजूद हैं। कथा के बीच में स्वामी जी ने कई सुमधुर भजनों का रसास्वादन भी कराया। कथा स्थल पर व्यापक तैयारियाँ कर इसे भव्य स्वरुप प्रदान किया गया। दो दिन से लगातार बरखेड़ाहसन में श्रीरामरस की गंगा बह रही है। विधायक रमेश सक्सेना ने सभी धर्मप्रेमियों से श्रीरामकथा में उपसिथत होने का अनुरोध किया है। fursat sehore
इस आशय के उद्गार काशी से पधारे स्वामी रामकमल दास जी महाराज ने विधायक रमेश सक्सेना के गृहग्राम में लगातार 27 वीं बार मानस प्रचार समिति बरखेड़ाहसन के तत्वाधान में हो रही संगीतमय श्रीराम कथा के दूसरे दिन बड़ी संख्या में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। स्वामी जी ने कहा कि हनुमान जी और वाल्मिकी जी के बीच हुए प्रसंग को रोचक तरीके से सुनाते हुए कहा कि वाल्मिकी जी ने अपनी रामायण में लिखा है कि राम-रावण युध्द में रामजी ने एक बार अपने कदम पीछे हटाए थे, जब यह हनुमान जी ने पढ़ा तो उन्होने वाल्मिकी जी से इस लाईन को हटाने की बात कही और कहा कि मैं राम जी के साथ पग-पग पर था उन्होने कभी अपने कदम पीछे नहीं हटाए। जब वाल्मिकी जी ने कहा कि यह रामायण मैने अपनी समाधि स्थिति में लिखी है इसलिये गलत नहीं हो सकती तब यह मामला श्रीराम दरबार में पहुँचा तब श्रीराम ने कहा कि दोनो ही अपनी-अपनी जगह सही हैं क्योंकि जब मेरा और रावण का युध्द हो रहा था तब हम दोनो लड़ते-लड़ते इतने नजदीक आ गए कि हमारी छातियाँ टकराने लगीं तब धनुष की प्रत्यंचा पर वाण को चढ़ाने के लिये मुझे एक कदम पीछे रखना पड़ा इसलिये हनुमान जी जो कह रहे हैं वह भावनात्मक सत्य है और जो वाल्मिकी जी ने कहा वह तथ्यात्मक सत्य है इसलिये दोनो ही अपनी जगह सही हैं।
स्वामी जी ने कहा कि भगवान श्री राम ने सुतीक्ष्ण, शबीरी और केवट जो ज्ञानी भक्त नहीं थे, उन्हे बिना मांगे अपनी अविरल भक्ति प्रदान की है जब ज्ञानी भक्ति करते हैं तो उसमें उतना भाव नहीं आ पाता और वे किनतु परन्तु करते हैं। इसलिये अज्ञानी भक्त को भगवान की प्राप्ति अधिक सुलभ है। उन्होने कहा कि लेकिन, किंतु, परंतु और अंग्रेजी भाषा के वट शब्द ने आज पूरे संसार को नचा रखा है इसलिये भक्ति में शंका नहीं करें। उन्होने हनुमान जी के शिक्षाग्रहण की बात कहते हुए प्रसंग सुनाया और कहा कि उनसे कठिन शिष्य अभी तक कोई नहीं हुआ जिस तरह उन्होने शिक्षा ग्रहण की वह अद्भुत है। स्वामी जी ने बताया कि विश्व में कुल 226 लोगों द्वारा लिखी गई रामायण मौजूद हैं। कथा के बीच में स्वामी जी ने कई सुमधुर भजनों का रसास्वादन भी कराया। कथा स्थल पर व्यापक तैयारियाँ कर इसे भव्य स्वरुप प्रदान किया गया। दो दिन से लगातार बरखेड़ाहसन में श्रीरामरस की गंगा बह रही है। विधायक रमेश सक्सेना ने सभी धर्मप्रेमियों से श्रीरामकथा में उपसिथत होने का अनुरोध किया है। fursat sehore
मुस्लिमों ने भी माता पूजन के लिये पूजन सामगी दी
जावर 14 फरवरी (फुरसत)। बुधवार को ग्राम ग्वाला में माता पूजन का कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो गया ग्राम में माता पूजन को लेकर गांव वासियों में उत्साह का माहौल था। इस दौरान ग्राम में बड़ी संख्या में मेहमानों का आगमन हुआ था। यह पूजा ग्राम में एकता के रुप में भी मानी जाती है। बुधवार प्रात: तीन बजे ग्राम पटेल द्वारा शीतला माता का पूजन विधि-विधान से करने के बाद पूजन का सिल सिला शुरु हो गया था जो दिन चढ़ने तक चलता रहा। शीतला माता का पूजन सभी समाज के लोगों द्वारा किया गया। ग्राम के मांगीलाल पटेल ने बताया कि माता पूजन के दौरान महिलाएं अपने सिर पर अगि्युक्त सिगड़ी रखकर नंगे पैर पूजन के लिये पहुँची। इस दौरान दोनो हाथ कच्चे सूत से बंधे थे। बाद में पूजन स्थल पर पहुँची जहाँ पर इन महिलाओं के भाई द्वारा अगि्युक्त सिगड़ी उतारी गई। गौरतलब है कि ग्राम पटेल को एक माह पहले स्वप् आता है उसके बाद पटेल द्वारा सभी लोगों को इसकी जानकारी दी जाती है उसके बाद ग्रामवासी मिलकर पंडित से माता पूजन करने का मुहूर्त निकलवाते हैं। मुहूर्त निकलने के बाद सभी ग्राम वासी माता पूजन की तैयारी में जुट जाते हैं। घरों की साफ सफाई की गई महिलाएं द्वारा मंगल गीत गाये गये। माता पूजन कार्यक्रम को लेकर ग्राम के सभी समाज के लोगों द्वारा अपने-अपने रिश्तेदारों एवं मिलने वालों को आमंत्रित किया गया था माता पूजन कार्यक्रम में हजारों की तादात में लोग पहुँचे थे। गांव में जहाँ कई परिवारों द्वारा शुध्द शाकाहारी भोजन की व्यवस्था की गई थी वहीं कुछ परिवारों में पशुओं की बली भी चढ़ाई गई थी इस दौरान कुछ लोगों ने मदिरा का भी जमकर सेवन किया था। माता पूजन कार्यक्रम में शामिल होने के लिये एक दिन पहले से ही मेहमान बड़ी संख्या में पहुँच गये थे। गांव में कोई घर ऐसा नहीं था जहां मेहमान नहीं थे। बुधवार को पूरे गांव में उत्साह जैसा माहौल दिखाई दिया। इस दौरान बाहर से आये मेहमान अपने रिश्तेदारों के लिये कपड़े लेकर भी पहुँचे थे। माता पूजन कार्यक्रम में कोई किसी प्रकार की गड़बडी न हो इसके लिये गांव में पुलिस बल भी लगाया गया था।
मुस्लिम समाज द्वारा भी पूजन सामग्री भेजी गई
मुस्लिम समाज द्वारा भी पूजन सामग्री भेजी गई
गांव गेर माता पूजन कार्यक्रम में मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा भी सहयोग प्रदान किया गया। सरपंच सलीम खां ने बताया कि माता पूजन कार्यक्रम में हमारी तरफ से भी नारियल अगरबत्ती व पूजन साम्रगी दी गई। fursat sehore
मवेशी चोर गिरफ्तार
सीहोर 14 फरवरी (फुरसत)। मण्डी थाना पुलिस ने एक मवेशी चोर युवक को गिरफ्तार कर उससे नगदी पाँच सौ रुपये बरामद किया है जिसका एक साथी अभी फरार है। जिसकी तलाश जारी है।
जानकारी के अनुसार ग्राम शेखपुरा निवासी महेन्द्र कुमार उर्फ पप्पु सेन के कुएं पर बने मकान से चार फरवरी की रात्रि एक रास भैंस कीमति 6 हजार रुपये की चोरी जाने पर महेन्द्र कुमार ने रिपोर्ट दर्ज करते हुए अपना संदेह ग्राम के राजेन्द्र गिर पुत्र गणेश गिर पर व्यक्त किया था ।
जिसे पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की तो राजेन्द्र गिर ने उक्त वारदात अपने साथी सतीश उर्फ गुड्डा के साथ करना स्वीकार किया और अपहृत मवेशी बाजार में तीन हजार रुपये में विक्रय करना बताया तथा उक्त रकम को दोनो साथियों ने आपस में बांट लिये तथा इसने अपने हिस्से में आया रुपये में एक हजार रुपये खर्च होना बताया जिससे पुलिस ने पाँच रुपये बरामद किये हैं। इसका साथी सतीश फरार है जिसकी तलाश कर शेष राशि बरामद की जानी है। fursat sehore
जानकारी के अनुसार ग्राम शेखपुरा निवासी महेन्द्र कुमार उर्फ पप्पु सेन के कुएं पर बने मकान से चार फरवरी की रात्रि एक रास भैंस कीमति 6 हजार रुपये की चोरी जाने पर महेन्द्र कुमार ने रिपोर्ट दर्ज करते हुए अपना संदेह ग्राम के राजेन्द्र गिर पुत्र गणेश गिर पर व्यक्त किया था ।
जिसे पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की तो राजेन्द्र गिर ने उक्त वारदात अपने साथी सतीश उर्फ गुड्डा के साथ करना स्वीकार किया और अपहृत मवेशी बाजार में तीन हजार रुपये में विक्रय करना बताया तथा उक्त रकम को दोनो साथियों ने आपस में बांट लिये तथा इसने अपने हिस्से में आया रुपये में एक हजार रुपये खर्च होना बताया जिससे पुलिस ने पाँच रुपये बरामद किये हैं। इसका साथी सतीश फरार है जिसकी तलाश कर शेष राशि बरामद की जानी है। fursat sehore
मातृ पितृ गुरुपूजन हुआ
आष्टा 14 फरवरी (फुरसत)। स्थानीय जे.जे.होस्टल में पिछले पाँच वर्षों से आसाराम बापू द्वारा निर्देशित एवं संचालित बाल संस्कार केन्द्र पर पाश्चात्य सभ्यता को छोड़ 14 फरवरी को बच्चों ने अपने माता पिता एवं गुरुओं के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर बाल संस्कार केन्द्र के प्रमुख श्री यशपाल ठाकुर ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह के अच्छे संस्कार एवं अनुशासन ही भारत को पुन: विश्व गुरु बनायेंगे। होस्टल संचालक सी.बी.परमार ने इसे वर्तमान का जरुरी परिवर्तन कहा। प्रबंधक त्रिलोक बोहरा ने सभी बच्चों को माता पिता गुरुपूजन दिवस की शुभकामनाएं दी। पाश्चात्य संस्कृति के बदले भारत की संस्कृति के अनुरुप ऐसे त्यौहार मनाने वाले इस युग के छात्र वाकइ में बधाई के पात्र हैं। fursat sehore
जनसहयोग से हुआ गरीब कन्या का विवाह
सीहोर 14 फरवरी (फुरसत)। कन्यादान महादान के तहत सीहोर में एक गरीब कन्या वर्षा मालवीय पिता रणछोड़ मालवीय के विवाह समाज सेक शैलेन्द्र चंदेल, घनश्याम यादव की पहल से सम्पन्न हुआ। जिसमें हिन्दु उत्सव समिति अध्यक्ष सतीश राठौर को काफी योगदान रहा। वहीं लायनेस क्लब और प्रेरणा महिला मण्डल जैसी संस्थाएं आगे आई तो समाज सेवक भी आगे आये। जिसमें हिन्दु उत्सव समिति के अध्यक्ष सतीश राठौर, लायनेस क्लब अध्यक्ष श्रीमति रीता दुबे, प्रेरणा महिला मण्डल कोषाध्यक्ष शशि विजयवर्गीय, उमा पालीवाल, साधना सक्सेना, कांता गट्टानी सहित समाज सेवक जनप्रतिनिधि लोकप्रिय विधायक रमेश सक्सेना, रविन्द्र यादव, अखिलेश राय, जसपाल सिंह अरोरा, बलवीर तोमर, अमर सिंह मीणा अध्यक्ष मार्केटिंग, विमल जैन, सन्नी महाजन, मीनाक्षी वेलर्स, सरोज सोनी, ब्रजमोहन सोनी, राजकुमार गुप्ता, सुनील शर्मा, पंकज काबरा, साधना सक्सेना, जगदीश निगोदिया, सुरेश साबू, क्रांति श्रीवास्तव सहित अनेक समाज सेवकों का योगदान रहा। साधना महिला मण्डल अध्यक्ष विजय लक्ष्मी परिहार, आशीष शर्मा, गायत्री चौहान ने सभी संस्थाओं व समाजसेवकों को इस कार्य में सहयोग के लिये बधाई दी और इसी प्रकार सहयोग की अपेक्षा करते रहने को कहा। fursat sehore
लार अभी से टपक पेयजल संकट के नाम
सीहोर 14 फरवरी (नि.सं.)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जिला सीहोर के जिलाध्यक्ष समाजसेवी भाई नोशाद खान ने जिला प्रशासन से मांग की है कि वह तत्काल नगर की पेयजल व्यवस्था अपने हाथों में ले ले। नगर पालिका द्वारा पूर्व की भांति अभी से पेयजल संकट खड़ा कर जानबूझकर यह प्रयास किये जा रहे हैं कि सूखे के कारण अधिकाधिक राशि का आंबटन प्राप्त कर इनके बारे-न्यारे हो जावें। सभी की लार अभी से टपकने लगी है नगर में पेयजल संकट जानबूझकर खड़ा किया जा रहा है। यदि कलेक्ट्रेट पानी की टंकी पर जाकर शिकायत की जाती है तो वहाँ पर कार्यरत कर्मचारी अपनी मस्ती में मस्त ताश खेलते मिलते हैं व कोई सकारात्मक उत्तर न देकर आने वाले की हंसी उड़ा देते हैं। जिला प्रशसन तत्काल नगर की पेयजल व्यवस्था अपने हाथों मे ले लें ताकी समय समय पर ठीक ढंग से जल प्रदाय हो सके। मांग करने वालों में नोशाद खान, इंदिरा भील, राजू पत्रकार, राम स्वरुप शर्मा, किशन मालवीय, पदमा, गीता, राजेश्वरी आदि हैं। fursat sehore
वो मोटर साईकिल ले गया
आष्टा 14 फरवरी (नि.प्र.)। आष्टा नगर से कल एक युवक बड़े ही रोचक ढंग से एक दूध वाले की दुपहिया वाहन ले भाग। दूध वाले ने फुरसत को उक्त पूरा रोचक किस्सा अलीपुर के कन्हैया गेहलोत के साथ आकर सुनाया। दूध वाला युवक जिसका नाम कृपाल सिंह धनगर निवासी डोराबाद का है। कृपाल सिंह ने बताया कि वो दूध बांट कर 10 बजे अपने वाहन एम.पी.37 एम.ए.0495 टीवीएस मेक्स है को सुधराने के लिये मैकेनिक रईस भाई के पास ले गया था जो सामान लगना था उसे लेने के लिये रईस भाई का लड़का उक्त वाहन को ले गया यहीं से दिनेश नाम का एक लड़का उसके साथ बैठ गया मैकेनिक का लड़का जब दुकान से सामान ले रहा था तभी उसके साथ बैठ कर आया युवक दिनेश उक्त वाहन को ले भागा। काफी खोजबीन की लेकिन उक्त वाहन जब नहीं मिला तो कृपाल ने उक्त पूरी घटना को फुरसत को बताई। fursat sehore
पोषण आहार से अधिकारियों की चाँदी, लाखों का भ्रष्टाचार
महिला बाल विकास विभाग में 30 लाख रुपये के मासिक भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला....
सीहोर 13 फरवरी (आनन्द भैया फुरसत)। बच्चों के पोषण आहार पर डाका डालने वालों की कहानी तो फुरसत पहले ही प्रकाशित कर चुका है लेकिन अब पोषण आहार बनने के पहले ही आई नगद रुपयों की राशि में आपसी लेन-देने कर 30 लाख रुपये बनाने का सनसनीखेज मामला भी सामने आ गया है। जहाँ हजारों नियमों की धमकी देते आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से खुले आम जांच अधिकारी रुपये वसूलते हैं और फिर वरिष्ठ अधिकारियों की जेब में रुपया चला जाता है।
जिले में 1000 से अधिक आंगनबाड़ियों में आ रही लाखों रुपयों की राशि में से भारी भरकम राशि क्या वाकई जांच अधिकारियों की जेब में जा रही है ? क्यों होती है हर बार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के खिलाफ कार्यवाही और बच जाता है जांच अधिकारी ? पहले परियोजना अधिकारी के रुप में कार्य चुकी वर्तमान महिला बाल विकास अधिकारी आखिर कैसे वापस सीहोर आ गई ? और क्या-क्या गुल खिल रहे हैं महिला बाल विकास विभाग में ? इन सब पर पढ़िये फुरसत की एक नजर।
महिला बाल विकास में आने वाली करोड़ो रुपयों की सैकड़ों योजनाओं का अता-पता यूँ तो वैसे भी आम जनता को नहीं हो पाता। सीहोर में महिला बाल विकास विभाग द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं का लाभ वर्षों से उससे संबंध्द लोग और संस्था में कार्यरत अधिकारी कर्मचारियों के परिजन या रिश्तेदार ही उठाते दिखते नजर आते हैं। ऐसे में सुस्पष्ट है कि शासन की योजनाएं असल व्यक्तियों के पास तक पहुँच ही नहीं पाती हैं। और आपस में ही मिलजुल कर यह लोग चाहे जितना लाभ उठाते हैं। जिन योजनाओं का प्रसार-प्रचार नहीं होता निश्चित ही उनमें यादा गाले होते हैं और जिनमें राशि यादा आती हैं उसमें तो फिर वारे-न्यारे ही होते हैं।
पूर्व में परियोजना अधिकारी के रुप में कार्य कर चुकी वर्तमान महिला बाल विकास अधिकारी को आखिर सीहोर ही क्यों पसंद आया यह तो राम जाने लेकिन इन दिनों महिला बाल विकास में चल रही खुसुर-फुसुर पर ध्यान दें तो यहाँ बहुत गड़बड़ झाला चल रहा है।
कैसे होता है काम - महिला बाल विकास अधिकारी के नीचे परियोजना अधिकारी का पद होता है जिनके नीचे सुपरवाईजर होते हैं और फिर इनके नीचे आंगनबाड़ी विभाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता होती हैं। अब चूंकी जिले में हजार से यादा आंगनबाड़ियाँ हैं तो इस दृष्टि से उन पर निगाह रखना भी जरुरी होता है ? क्योंकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका बकायदा काम कर रही हैं या नहीं ? वह रुपयों का हेरफेर तो नहीं कर रही ? वह बच्चों को नियमित बुलाकर पढ़ा रही हैं या नहीं ? वह आंगनबाड़ी खोलती भी है या नहीं ? वह बच्चों को खाने के लिये आने वाला पोषण देती भी हैं या नहीं ? और ऐसी ही अनेक बातों पर निगाह रखने के लिये करीब 20-25 आंगनबाड़ियों के ऊपर एक सुपरवाईजर को रख दिया जाता है। ऐसे सुपरवाईजर बारीकी से निगाह रखते हैं कि हर एक आंगनबाड़ी क्या सही काम कर रही है या नहीं ?
फिर क्या होता है- आंगन बाड़ी केन्द्रों पर जिनकी नियुक्ति हुई है उनमें से अनेक तो अपनी राजनीतिक पहुँच के कारण यहाँ तक पहुँच सकी हैं और कुछ रुपयों के कारण। यहाँ सबसे महत्वपूर्ण चर्चा यह है कि विगत दिवस जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्तियाँ हुई थी उसमें भारी भ्रष्टाचार और रुपयों का लेन-देन हुआ था इसकी चर्चाएं न सिर्फ पूरे जिले में बल्कि प्रदेश स्तर तक पहुँची थी। इस संबंध में अनेक प्रकरण भी बने थे जो जिलाधीश के समक्ष से लेकर कमिश्र भोपाल तक चल रहे हैं। तो होता यह है कि ऐसी नियुक्ति प्रक्रिया के बाद जिनकी नियुक्ति हुई है उनमें से कितनी ही कार्यकर्ता व सहायिकाएं बहुत से महत्वपूर्ण कार्य नहीं कर पाती हैं। नियमों की खानापूर्ति तो दूर वह ठीक से बच्चों को एकत्र करके बैठा भी नहीं पाती हैं। तो फिर सारी कार्यवाही, उन्हे बनाकर खिलाना पिलाना और उनकी पढ़ाई की तरफ ध्यान देना तो दीगर बात है। जबकि बड़ी संख्या में बहुत अच्छी आंगनबाड़ियाँ भी यहाँ संचालित दिखती हैं लेकिन कहीं न कहीं कुछ न कु छ कमी तो जांच अधिकारी निकाल ही सकते हैं।
जांच अधिकारी की बलिहारी- ऐसे में जांच अधिकारी हर एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं पर यह दबाव बनाकर रखते हैं कि वह काम सही नहीं करेंगे तो उन्हे हटा दिया जायेगा ? अब काम तो कितना ही सही कर लो पूरा व्यवस्थित होने से तो रहा ? क्योंकि नियम इतने हैं कि उन्हे पूरा करना हाथ की घट्टी में आटा पीसने जितना भारी है और उसके बाद भी यहाँ कोई न कोई कमी तो रह ही जाती है। ऐसे में जांच अधिकारी मतलब सुपरवाईजरों की दादागिरी खुलकर चलती है। वह स्पष्ट कहते हैं कि यदि हम चाहें तो तुम्हे एक झटके में पद से हटवा सकते हैं? इसलिये हमें खुश करना तुम्हारी नैतिक मजबूरी है। इसी में तुम्हारी भी खुशी है। वह इसके लिये बहाना बनाती हैं कि हमें भी ऊपर के अधिकारियों को खुश करना पड़ता है।
जांच क्या होती है - यदि सही मायने में जांच की जाये तो हर एक आंगनबाड़ी में अनियमितता देखने को मिल सकती है लेकिन सांठगांठ के चलते ऐसा नहीं होता ।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका डरी-सहमी - बहुत बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं इन्ही जांच अधिकारियों के डर से डरी व सहमी हुई होती हैं क्योंकि यह हमेशा डरा कर रखती हैं कि कभी भी तुम्हारे केन्द्र की जांच हो सकती है, तुम्हे भगा दिया जायेगा। जांच अधिकारी कहते हैं कि मुझे ऊपर हर माह तुम्हारे आंगनबाड़ी केन्द्र की जानकारी अपनी जिम्मेदारी पर सही भेजनी पड़ती है यदि जांच हो जायेगी तो मुझे भी दिक्कत आयेगी और तुम्हारी तो नौकरी ही चली जायेगी। मैं तुम्हारे लिये खतरा क्यों लूँ या फिर केन्द्र की गड़बड़ जानकारी ऊपर के अधिकारियों को बता दूँ तो तुम्हारी नौकरी चल जायेगी ? इसी प्रकार की अबूझ धमकियाँ उन्हे दी जाती हैं।
क्यों हर बार कार्यकर्ता पर टूटता है कहर - यहाँ वर्षों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के खिलाफ या सहायिकाओं पर कार्यवाही होती देखी जाती हैं जबकि जिन क्षेत्रों में आंगनबाड़ी सही नहीं चलती वहाँ की न सुपरवाईजर पर कुछ कार्यवाही होती है ना परियोजना अधिकारी का कुछ बिगड़ता है ना ही महिला बाल विकास अधिकारी से कोई कुछ पूछने वाला रहता है। कुल मिलाकर ऊपर के अधिकारी सब मिले हुए लगते हैं और नीचे वाला पिस जाता है।
वर्तमान में कितना रुपया आता रहा है- यहाँ आंगनबाड़ी केन्द्रों पर इन दिनों हर माह 4-5 हजार से अधिक की राशि नवीन पोषण आहार के नाम से आती है जिसके तहत दूध, गजक, मुरमुरे से लेकर अनेक नई ताजा खाद्य सामग्री खरीदकर बच्चों के पोषण के लिये आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका खरीदती हैं। अंदाजा स्वयं लगाया जा सकता है कि इस भारी भरकम राशि में से कितनी कहाँ जाती होगी। नगर में इन दिनों चल रही चर्चाओं के आधार पर कुछेक आंगनबाड़ी की आधी से अधिक राशि जांच अधिकारी जांच नहीं करने के नाम पर ले लेते हैं। यह राशि ऊपर तक पहुँचती है और सबकी जेब गर्म कर देती है। कुल मिलाकर लगभग 30 लाख रुपये एक झटके में गायब हो जाते हैं जिसकी जानकारी भी किसी को पता नहीं चलती ।
यहाँ उल्लेखनीय है कि हाल ही में ब्रिजिसनगर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से 2-2 हजार रुपये छीनने की घटना एक सुपर वाईजर द्वारा की जाने का मामला तूल पकड़े हुए हैं जिसके तहत मंत्री करण सिंह वर्मा, जिलाधीश को ज्ञापन तक सौंपा गया था बल्कि जिला महिला बाल विकास अधिकारी रमा चौहान द्वारा अभी तक उस सुपरवाईजर को नहीं हटाया गया है जिसके खिलाफ 2 हजार रुपये छीनने का मामला तूल पकड़े हुए हैं। निश्चित रुप से कार्यवाही सिर्फ नीचे के लोगों पर ही होने की परम्परा यहाँ दिख रही है और बहुत कुछ अनकहा इससे झलक रहा है। यहाँ वर्षों से कई सुपरवाईजर जमी हुई हैं जिनका न तो स्थानान्तरण किया जाता है ना ही उनका कार्यक्षेत्र बदला जाता है यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है। सुपरवाईजरों की गेंग ने दी धमकी- असल में चर्चा यह है कि जिस सुपरवाइजर ने 2-2 हजार रुपये उगाये थे उसके पक्ष में सुपरवाईजरों की एक गेंग सक्रिय हो गई जिसका कहना है कि यदि उसे हटा दिया गया तो हम जो रुपया उगाते हैं उसमें दिक्कत आयेगी और कल को हम पर भी कार्यवाही होगी। चर्चा है कि इनकी ही धमकी से अभी तक कार्यवाही रोकी गई है। जिला अधिकारी ने मामले में यह कहकर पल्ला झाड़ लिया है कि कार्यवाही करने का अधिकार जिलाधीश को है। fursat sehore
जिले में 1000 से अधिक आंगनबाड़ियों में आ रही लाखों रुपयों की राशि में से भारी भरकम राशि क्या वाकई जांच अधिकारियों की जेब में जा रही है ? क्यों होती है हर बार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के खिलाफ कार्यवाही और बच जाता है जांच अधिकारी ? पहले परियोजना अधिकारी के रुप में कार्य चुकी वर्तमान महिला बाल विकास अधिकारी आखिर कैसे वापस सीहोर आ गई ? और क्या-क्या गुल खिल रहे हैं महिला बाल विकास विभाग में ? इन सब पर पढ़िये फुरसत की एक नजर।
महिला बाल विकास में आने वाली करोड़ो रुपयों की सैकड़ों योजनाओं का अता-पता यूँ तो वैसे भी आम जनता को नहीं हो पाता। सीहोर में महिला बाल विकास विभाग द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं का लाभ वर्षों से उससे संबंध्द लोग और संस्था में कार्यरत अधिकारी कर्मचारियों के परिजन या रिश्तेदार ही उठाते दिखते नजर आते हैं। ऐसे में सुस्पष्ट है कि शासन की योजनाएं असल व्यक्तियों के पास तक पहुँच ही नहीं पाती हैं। और आपस में ही मिलजुल कर यह लोग चाहे जितना लाभ उठाते हैं। जिन योजनाओं का प्रसार-प्रचार नहीं होता निश्चित ही उनमें यादा गाले होते हैं और जिनमें राशि यादा आती हैं उसमें तो फिर वारे-न्यारे ही होते हैं।
पूर्व में परियोजना अधिकारी के रुप में कार्य कर चुकी वर्तमान महिला बाल विकास अधिकारी को आखिर सीहोर ही क्यों पसंद आया यह तो राम जाने लेकिन इन दिनों महिला बाल विकास में चल रही खुसुर-फुसुर पर ध्यान दें तो यहाँ बहुत गड़बड़ झाला चल रहा है।
कैसे होता है काम - महिला बाल विकास अधिकारी के नीचे परियोजना अधिकारी का पद होता है जिनके नीचे सुपरवाईजर होते हैं और फिर इनके नीचे आंगनबाड़ी विभाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता होती हैं। अब चूंकी जिले में हजार से यादा आंगनबाड़ियाँ हैं तो इस दृष्टि से उन पर निगाह रखना भी जरुरी होता है ? क्योंकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका बकायदा काम कर रही हैं या नहीं ? वह रुपयों का हेरफेर तो नहीं कर रही ? वह बच्चों को नियमित बुलाकर पढ़ा रही हैं या नहीं ? वह आंगनबाड़ी खोलती भी है या नहीं ? वह बच्चों को खाने के लिये आने वाला पोषण देती भी हैं या नहीं ? और ऐसी ही अनेक बातों पर निगाह रखने के लिये करीब 20-25 आंगनबाड़ियों के ऊपर एक सुपरवाईजर को रख दिया जाता है। ऐसे सुपरवाईजर बारीकी से निगाह रखते हैं कि हर एक आंगनबाड़ी क्या सही काम कर रही है या नहीं ?
फिर क्या होता है- आंगन बाड़ी केन्द्रों पर जिनकी नियुक्ति हुई है उनमें से अनेक तो अपनी राजनीतिक पहुँच के कारण यहाँ तक पहुँच सकी हैं और कुछ रुपयों के कारण। यहाँ सबसे महत्वपूर्ण चर्चा यह है कि विगत दिवस जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्तियाँ हुई थी उसमें भारी भ्रष्टाचार और रुपयों का लेन-देन हुआ था इसकी चर्चाएं न सिर्फ पूरे जिले में बल्कि प्रदेश स्तर तक पहुँची थी। इस संबंध में अनेक प्रकरण भी बने थे जो जिलाधीश के समक्ष से लेकर कमिश्र भोपाल तक चल रहे हैं। तो होता यह है कि ऐसी नियुक्ति प्रक्रिया के बाद जिनकी नियुक्ति हुई है उनमें से कितनी ही कार्यकर्ता व सहायिकाएं बहुत से महत्वपूर्ण कार्य नहीं कर पाती हैं। नियमों की खानापूर्ति तो दूर वह ठीक से बच्चों को एकत्र करके बैठा भी नहीं पाती हैं। तो फिर सारी कार्यवाही, उन्हे बनाकर खिलाना पिलाना और उनकी पढ़ाई की तरफ ध्यान देना तो दीगर बात है। जबकि बड़ी संख्या में बहुत अच्छी आंगनबाड़ियाँ भी यहाँ संचालित दिखती हैं लेकिन कहीं न कहीं कुछ न कु छ कमी तो जांच अधिकारी निकाल ही सकते हैं।
जांच अधिकारी की बलिहारी- ऐसे में जांच अधिकारी हर एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं पर यह दबाव बनाकर रखते हैं कि वह काम सही नहीं करेंगे तो उन्हे हटा दिया जायेगा ? अब काम तो कितना ही सही कर लो पूरा व्यवस्थित होने से तो रहा ? क्योंकि नियम इतने हैं कि उन्हे पूरा करना हाथ की घट्टी में आटा पीसने जितना भारी है और उसके बाद भी यहाँ कोई न कोई कमी तो रह ही जाती है। ऐसे में जांच अधिकारी मतलब सुपरवाईजरों की दादागिरी खुलकर चलती है। वह स्पष्ट कहते हैं कि यदि हम चाहें तो तुम्हे एक झटके में पद से हटवा सकते हैं? इसलिये हमें खुश करना तुम्हारी नैतिक मजबूरी है। इसी में तुम्हारी भी खुशी है। वह इसके लिये बहाना बनाती हैं कि हमें भी ऊपर के अधिकारियों को खुश करना पड़ता है।
जांच क्या होती है - यदि सही मायने में जांच की जाये तो हर एक आंगनबाड़ी में अनियमितता देखने को मिल सकती है लेकिन सांठगांठ के चलते ऐसा नहीं होता ।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका डरी-सहमी - बहुत बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं इन्ही जांच अधिकारियों के डर से डरी व सहमी हुई होती हैं क्योंकि यह हमेशा डरा कर रखती हैं कि कभी भी तुम्हारे केन्द्र की जांच हो सकती है, तुम्हे भगा दिया जायेगा। जांच अधिकारी कहते हैं कि मुझे ऊपर हर माह तुम्हारे आंगनबाड़ी केन्द्र की जानकारी अपनी जिम्मेदारी पर सही भेजनी पड़ती है यदि जांच हो जायेगी तो मुझे भी दिक्कत आयेगी और तुम्हारी तो नौकरी ही चली जायेगी। मैं तुम्हारे लिये खतरा क्यों लूँ या फिर केन्द्र की गड़बड़ जानकारी ऊपर के अधिकारियों को बता दूँ तो तुम्हारी नौकरी चल जायेगी ? इसी प्रकार की अबूझ धमकियाँ उन्हे दी जाती हैं।
क्यों हर बार कार्यकर्ता पर टूटता है कहर - यहाँ वर्षों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के खिलाफ या सहायिकाओं पर कार्यवाही होती देखी जाती हैं जबकि जिन क्षेत्रों में आंगनबाड़ी सही नहीं चलती वहाँ की न सुपरवाईजर पर कुछ कार्यवाही होती है ना परियोजना अधिकारी का कुछ बिगड़ता है ना ही महिला बाल विकास अधिकारी से कोई कुछ पूछने वाला रहता है। कुल मिलाकर ऊपर के अधिकारी सब मिले हुए लगते हैं और नीचे वाला पिस जाता है।
वर्तमान में कितना रुपया आता रहा है- यहाँ आंगनबाड़ी केन्द्रों पर इन दिनों हर माह 4-5 हजार से अधिक की राशि नवीन पोषण आहार के नाम से आती है जिसके तहत दूध, गजक, मुरमुरे से लेकर अनेक नई ताजा खाद्य सामग्री खरीदकर बच्चों के पोषण के लिये आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका खरीदती हैं। अंदाजा स्वयं लगाया जा सकता है कि इस भारी भरकम राशि में से कितनी कहाँ जाती होगी। नगर में इन दिनों चल रही चर्चाओं के आधार पर कुछेक आंगनबाड़ी की आधी से अधिक राशि जांच अधिकारी जांच नहीं करने के नाम पर ले लेते हैं। यह राशि ऊपर तक पहुँचती है और सबकी जेब गर्म कर देती है। कुल मिलाकर लगभग 30 लाख रुपये एक झटके में गायब हो जाते हैं जिसकी जानकारी भी किसी को पता नहीं चलती ।
यहाँ उल्लेखनीय है कि हाल ही में ब्रिजिसनगर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से 2-2 हजार रुपये छीनने की घटना एक सुपर वाईजर द्वारा की जाने का मामला तूल पकड़े हुए हैं जिसके तहत मंत्री करण सिंह वर्मा, जिलाधीश को ज्ञापन तक सौंपा गया था बल्कि जिला महिला बाल विकास अधिकारी रमा चौहान द्वारा अभी तक उस सुपरवाईजर को नहीं हटाया गया है जिसके खिलाफ 2 हजार रुपये छीनने का मामला तूल पकड़े हुए हैं। निश्चित रुप से कार्यवाही सिर्फ नीचे के लोगों पर ही होने की परम्परा यहाँ दिख रही है और बहुत कुछ अनकहा इससे झलक रहा है। यहाँ वर्षों से कई सुपरवाईजर जमी हुई हैं जिनका न तो स्थानान्तरण किया जाता है ना ही उनका कार्यक्षेत्र बदला जाता है यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है। सुपरवाईजरों की गेंग ने दी धमकी- असल में चर्चा यह है कि जिस सुपरवाइजर ने 2-2 हजार रुपये उगाये थे उसके पक्ष में सुपरवाईजरों की एक गेंग सक्रिय हो गई जिसका कहना है कि यदि उसे हटा दिया गया तो हम जो रुपया उगाते हैं उसमें दिक्कत आयेगी और कल को हम पर भी कार्यवाही होगी। चर्चा है कि इनकी ही धमकी से अभी तक कार्यवाही रोकी गई है। जिला अधिकारी ने मामले में यह कहकर पल्ला झाड़ लिया है कि कार्यवाही करने का अधिकार जिलाधीश को है। fursat sehore
जब पुलिस ने डीलर से गैस सिलेण्डर उपभोक्ताओं को दिलवाये
सीहोर 13 फरवरी (फुरसत)। आज एक गैस एजेंसी पर 8-10 दिनों से गैस सिलेण्डर के लिये परेशान करीब 70 उपभोक्ताओं ने आक्रोशित होकर अघोषित रुप से चक्काजाम कर दिया। फलस्वरुप तहसील चौराहे से शुगर फेक्ट्री चौराहे के बीच यातायात बुरी तरह प्रभावित होने लगा।
स्थिति की गंभीरता को देखकर और हालात बिगड़ने के डर से घबराकर एजेंसी के प्रबंधक ने पुलिस को सूचित कर दिया। यह बात जब चक्काजाम कर रहे उपभोक्ताओं को ज्ञात हुई तो वे वहाँ से हटकर सड़क छोड़कर दीवान बाग के मैदान में अपनी लाईन लगा कर खड़े हो गऐ। जब प्रबंधक की सूचना पर पुलिस बल वहाँ पहुँचा तो उसे चक्काजाम जैसी कोई बात नजर नहीं आई। जब उसने कर्मचारियों से जानकारी हासिल की तो ज्ञात हुआ कि 25 जनवरी के बाद लगाये गये नमबरों पर डीलर गैस सिलेण्डर देने से इंकार कर रहा है और ब्लेक में गैस सिलेण्डर उपलब्ध कर उपभोक्ताओं को परेशान कर रहा है। fursat sehore
स्थिति की गंभीरता को देखकर और हालात बिगड़ने के डर से घबराकर एजेंसी के प्रबंधक ने पुलिस को सूचित कर दिया। यह बात जब चक्काजाम कर रहे उपभोक्ताओं को ज्ञात हुई तो वे वहाँ से हटकर सड़क छोड़कर दीवान बाग के मैदान में अपनी लाईन लगा कर खड़े हो गऐ। जब प्रबंधक की सूचना पर पुलिस बल वहाँ पहुँचा तो उसे चक्काजाम जैसी कोई बात नजर नहीं आई। जब उसने कर्मचारियों से जानकारी हासिल की तो ज्ञात हुआ कि 25 जनवरी के बाद लगाये गये नमबरों पर डीलर गैस सिलेण्डर देने से इंकार कर रहा है और ब्लेक में गैस सिलेण्डर उपलब्ध कर उपभोक्ताओं को परेशान कर रहा है। fursat sehore
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