Monday, February 4, 2008

5 लोगों की अकाल मौत

सीहोर 2 फरवरी (फुरसत)। जिले भर में विभिन्न कारणों से 6 लोगों की अकाल मौत हो गई है।
ग्राम चकल्दी थाना रेहटी अन्तर्गत निवासी स्वरुप सिंह की 48 वर्षीय पत्नि सुमन बाई गत दिवस जल गई थी जिसकी जलने के कारण उपचार के दौरान मौत हो गई है।
इसी प्रकार रमगढ़ा निवासी मौजीराम अजा. के 35 वर्षीय पुत्र अमर सिंह की दुर्घटना में आई चोंटों के कारण इलाज के दौरान मौत हो गई।
इंग्लिशपुरा सीहोर निवासी 26 वर्षीय देवेन्द्र पुत्र पी.एन.पाठक की अज्ञात कारणों से कीट नाशक की दवा पी लेने से उपचार के दौरान अपेक्स अस्पताल भोपाल में मौत हो गई।
इधर इछावर थाना अन्तर्गत आने वाले ग्राम दीबड़िया निवासी 50 वर्षीय सजन सिंह पुत्र हीरालाल को हृदयघात आने पर उन्हे अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहाँ उनकी मौत हो गई। आष्टा थाना क्षेत्र में रफीकगंज निवासी भागीरथ की 25 वर्षीय पत्नि चन्द्राबाई को अज्ञात कारणों से उपचार हेतु गत दिवस अस्पताल सीहोर लाया गया था जहाँ पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने सभी मामले पंजीबध्द कर जांच की है।

कीर समाज करेगा भीख मांगों आंदोलन

सीहोर 2 फरवरी (फुरसत)। कीर समाज युवा कल्याण समिति के तत्वाधान में आरक्षण जागरुकता रैली के रुप में क्षेत्र में भ्रमण के बाद एक दिवसीय उपवास का आयोजन रखा गया जो की कीर जाति का आरक्षण समाप्त करने के विरोध में था। म.प्र. एवं केन्द्रीय सरकार ने बार-बार आश्वासन दिया किंतु कोई हल नहीं निकाला गया इसलिये समाज ने आंदोलन करने का निर्णय लिया है। कार्यक्रम के संयोजक सामाजिक नेता कमल सिंह कीर के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में एक दिवसीय उपवास में सामाजिक बंधु बैठे। इस अवसर पर कमल कीर ने अपने संबोधन में कहा कि हमारी समाज, कीर जाति, आर्थिक एवं सामाजिक तथा शैक्षणिक रुप से पिछड़ी जाति है जो अत्यंत गरीब एवं आदिम है। आज इस समाज का आदिवासी का दर्जा समाप्त होने से कीर जाति पिछड़ रही है। समाज के छात्र छात्राएं आगे शिक्षा ग्रहण नहीं कर पा रहे हैं। पढ़े लिखे नौजवान बेरोजगार घूम कर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। लेकिन अब हम उग्र आंदोलन करेंगे और अपना हक मांगेंगे। आरक्षण हमें बहुत जरुरी है, हमारा कांग्रेस समाज से आव्हान है कि आप उठ जागो और अपना हक मांगों। बाबा साहब अंबेडकर ने हमें आरक्षण दिया है, कोई सरकारों ने नहीं दिया है। हमारी अगली कड़ी में भीख मांगों आंदोलन होगा और फिर आगे उग्र आंदोलन होगा। कार्यक्रम को अन्य वक्तागणों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन नवल सिंह कीर आगरा ने किया। कार्यक्रम में प्रमुख रुप से कैलाश कीर चारुआ, रामभरोस कीर पाड़लिया, उदयराम चौहान, रामकरण कीर, हरगोविंद कीर, शिव प्रसाद कीर सहित सामाजिक बंधु उपस्थित थे। अंत में आभार गया प्रसाद कीर महागांव ने माना। समस्त सामाजिक कार्यकर्ताओं ने महामहिम राष्ट्रपति एवं रायपाल के नाम एस.डी.एम. महोदय को ज्ञापन सौंपा।

8 हजार से अधिक के सामान पर किया हाथ साफ अज्ञात चोरों ने

सीहोर 2 फरवरी (फुरसत)। मण्डी थाने के तहत ग्राम धबोटी में महिला दुग्ध सहकारी समिति मर्यादित के कार्यालय का ताला तोड़कर अज्ञात चोर वेस टर्मिनल, बेटरी, चार्जर सहित करीब 4650 रुपये नगद चुरा कर ले गये।
पुलिस ने राजेन्द्र पुत्र छगनलाल की शिकायत पर अज्ञात चोरों के खिलाफ भादवि की धारा 380 के तहत प्रकरण पंजीबध्द कर उनकी तलाश प्रारंभ कर दी है।
दूसरी और ग्राम बरखेड़ा निवासी 30 वर्षीय दिनेश पुत्र गेंदालाल यदुवंशी के आंगन में रखे दो बोरे सोयाबीन जिसकी कीमत 3600 रुपये थी। अज्ञात चोर उठाकर ले गये दिनेश की शिकायत पर पुलिस ने भादवि की धारा 380 के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है।

वायपास चौड़ीकरण से कहीं खत्म न हो जाये लाखों की तकीपुर बंधान योजना

सीहोर 1 फरवरी (विशेष सं. फुरसत)। रविन्द्र सांस्कृतिक भवन के पास स्थित पानी के स्टापडेम नाले की भव्य योजना जिसे किसी जमाने में शकर कारखाने में प्रारंभ किया गया था और भगवानपुरा तालाब से तकीपुर बंधान तक पानी और फिर इस बंधान से सीहोर तक पानी लाने की योजना विद्यमान थी जिसे पूर्ववर्ती अपनी विशेष कार्यप्रणाली से चर्चित रहीं जिलाधीश श्रीमति स्मिता चन्द्रा गाटे ने रुचि लेकर नया रुप दिया था अब आगामी सप्ताह भर कहीं पूरी तरह खत्म न हो जाये। इस महती योजना को यह व्यवस्थित कर दिया जाये तो निश्चित रुप से आगामी वर्षों में जब कलेक्टर कार्यालय भोपाल राजमार्ग पर बस डिपो के पास बन जायेगा, और वहाँ अनेक नये निवास, कालोनियाँ बनेगी तब इस क्षेत्र की भूमि में पानी रिचार्जिंग के लिये तकीपुर की यह योजना वापस जीवित करना बहुत टेढ़ी खीर हो जायेगा ? क्योंकि नया वायपास मार्ग चौड़ीकरण कार्य युध्द स्तर पर जारी है जिसके चलते भविष्य में तकीपुर से आई पाईप लाईन मिट्टी में दबकर रह जायेगी। अपने कार्यकाल में नया कलेक्ट्रेट भवन बनवाने वाले जिलाधीश राघवेन्द्र सिंह को भविष्य की भी चिंता कर लेने की आवश्यकता है....।
उल्लेखनीय है कि आज से कुछेक वर्ष पूर्व ही यहाँ रविन्द्र सांस्कृतिक भवन टाउन हाल के पास स्थित नहर जिसमें स्टापडेम भी बना हुआ है को लेकर जाग्रति आई थी। तत्कालीन जिलाधीश श्रीमति स्मिता गाटे चन्द्रा ने इस मामले में रुचि लेते हुए यहाँ बने पुल तक पानी भराने की योजना का क्रियान्वयन शुरु किया था और इस पुल के लिये लोहे के द्वार भी बनना तय थे। आसपास जेसीबी मशीन से खुदाई कर यहाँ यादा से यादा पानी भरा सके इसकी व्यवस्था कराई गई थी।
साथ ही एक रिचार्जिंग बोर भी लगवाया था जिससे पानी रिचार्ज होकर जमीन में बैठ सके। यहाँ तक पानी लाने के लिये भगवान पुरा तालाब से तकीपुर बंधान तक पानी लाने की व्यवस्था को दुरुस्त करते हुए तकीपुर बंधान पर कई वर्षों बाद लोहे के दरबार लगवाये गये थे जिससे यहाँ के ग्रामीणजन काफी खुश हो गये थे और इस ग्राम में पानी की समस्या ही हल हो गई थी। इसी बंधान से छूटकर पानी सीहोर तक लाने के लिये कारखाने द्वारा डाली गई पाईप लाईन का उपयोग किया गया था। तब वायपास मार्ग बनने पर पाईप लाईन लाना मुश्किल हो रहा था तो तत्कालीन जिलाधीश ने अपने विशेष प्रभाव का उपयोग करते हुए मार्ग कार्य के दौरान ही पहले पाईप लाईन डलवाई थी फिर सड़क बनने दी गई थी आज भी वह मोटी पाईप लाईन व्यवस्थित रुप से सड़क में मौजूद है इसके आगे नहर खुदवाकर पानी सीहोर तक लाया गया था।
इस योजना को समझते हुए लोकप्रिय विधायक रमेश सक्सेना ने भी इस मामले में रुचि दिखाई थी। उन्होने सीवन नदी में अंग्रेज सैनिकों छावनी के लिये जिस जगह पर अंग्रेजों ने नदी को गहरा कर नदी में दीवार खड़ी की थी वहाँ से पानी की नई पाईप लाईन डलवाकर पुन: यहाँ रविन्द्र सांस्कृतिक भवन तक लाये थे। ताकि यहाँ पानी भरा रहे और यही पानी आगे बढ़कर इंग्लिशपुरा मार्ग पर बने पुल में लोहे के दरबार लगवाकर वहाँ तक भरा गया था। ताकि इंग्लिशपुरा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के नलकूप आदि रिचार्ज होते रहें।
उल्लेखनीय है कि अब बस डिपो क्षेत्र से लेकर भोपाल नाका तक तथा सैकड़ाखेड़ी मार्ग पर भी अंदर ही अंदर बहुत तेजी से विकास हो रहा है और यहाँ लगातार नये-नये भवन और कार्यालय बन रहे हैं। कलेक्टर कार्यालय जिस समय यहाँ प्रारंभ हो जायेगा तब से तो निश्चित ही यहाँ और भी बहुत अधिक विकास शुरु हो जायेगा। ऐसे में इस क्षेत्र की भूमि में पानी की रिचार्जिंग की महती आवश्यकता रहेगी। वैसे ही अभी यहाँ के बोर सूखे जाते हैं तो उस स्थिति में कहीं यादा समस्या बढ़ेगी।
इस दृष्टि से तकीपुर बंधान से लेकर सीहोर तक आई नहर से पानी लाना जहाँ सीवन नदी में हस्तक्षेप को रोकेगा वहीं ऊपर से आ रहे पानी के कारण यह क्षेत्र यादा अच्छी तरह रिचार्ज होगा। लेकिन वायपास मार्ग पर बन रही चार लाईन सड़क के चलते नहर की जो पाईप लाईन सड़क के नीचे से लाई गई थी वह दबने की स्थिति में आ गई। नई सड़क बनते समय यह दब जायेगी। नई सड़क आगामी सप्ताह भर में यहाँ भी बन जायेगी और सड़क के नीचे ही पाईप लाईन दब कर रह जायेगी। अभी इस पाईप लाईन का उपयोग तो नहीं हो रहा लेकिन लाखों रुपये की एक योजना मात्र 3 पाईप यहाँ वापस लगा दिये जाने से जहाँ जीवित रह जायेगी वहीं पाईप लाईन का उपयोग भी होता रहेगा। वर्तमान में एक किसान अपनी विद्युत की डोरी इस पाईप लाईन से सड़क के दूसरी और ले गया ।
शहर के चहुँमुखी विकास की सारी संभावनाएं जहाँ ध्वस्त होती नजर आ रही है ऐसी स्थिति में राजनेताओं, समाजसेवी संस्थाओं, भाजपा-कांग्रेस नेताओं को इन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर नगर के भविष्य की चिंता करने की आवश्यकता है।

Sunday, February 3, 2008

दो जगह चोरी, जेवर व तार चुरा ले गये चोर

आष्टा 1 फरवरी (फुरसत)। सुभाष नगर मे रहने वाले पटवारी प्रहलाद सिंह के निवास से मध्य रात्रि में कल दरबाजे का कुंदा खोलकर अज्ञात चोरों ने प्रवेश कर लिया। चोरों ने अंदर घुसकर एक पेटी पर हाथ साफ कर दिया जिसमें चाँदी के हार, पायजेब, बच्चों की अंक सूची, हाथघड़ी, कपड़े आदि थे कुल मिलाकर 5 हजार रुपये से अधिक कर नुकसान प्रहलाद सिंह का हुआ है।
उधर पुराने बस स्टेण्ड पर स्थित जमील खां निवासी जुम्मापुरा की दुकान स्थित है इस दुकान की पिछली खिड़की तोड़कर अज्ञात चोरों ने प्रवेश किया और तांबे का 10 हजार रुपये कीमति तार चुरा कर ले गये। पुलिस ने दोनो ही चोरी के मामले में प्रकरण दर्ज कर लिया है।

पं. प्रदीप मिश्रा की कथा चल रही गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर

सीहोर 1 फरवरी (फुरसत)। नगर के सुप्रसिध्द कथा वाचक पं. प्रदीप मिश्रा अब आगामी 1 फरवरी से 7 फरवरी 08 तक गोवर्धन मथुरा धाम में अपने मुखार बिंद से श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा यज्ञ की अमृत वर्षा करेंगे।
पं. प्रदीप मिश्रा इसके पूर्व भी देश भर के कई प्रमुख तीर्थ स्थानों पर श्रीमद् भागवत कथा का वाचन कर सीहोर नगर का नाम गोरान्वित कर चुके हैं। गोवर्धन, मथुरा के श्याम भवन परिक्रमा मार्ग जतीपुरा में प्रात: 9 से दोपहर 12 बजे तक एवं अपरान्ह 3 से सायं 6 बजे तक भागवत ज्ञान गंगा से श्रध्दालु भक्तों को अमृतपान करायेंगे।

ग्रामीण रोजगार योजना के प्रचार-प्रसार के ठेको में उठ रही है शंका की ऊंगली

आष्टा 1 फरवरी (सुशील संचेती)। पूत के लक्षण पालने में ही नजर आने लगते हैं मतलब उक्त कहावत का यह है कि जन्म लेने वाला बच्चा जब पालने में रहता है और वो कैसी-कैसी बाल क्रिया करता है उससे उसके अभिभावक यह अंदाजा लगा लेते हैं कि यह बड़ा होगा तो कैसा होगा ? उक्त कहावत लगता है आगामी 1 अप्रैल से सीहोर जिले में गरीबों के लिये प्रारंभ हो रही राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के शुभारंभ होने के पहले इसके प्रचार-प्रसार हेतु जिस एजेंसी को आष्टा तहसील के प्रत्येक ग्राम में उक्त योजना का प्रचार-प्रसार की निविदा स्वीकृत की उसको लेकर जो शिकवा-शिकायत तथ्यों के साथ की गई है उससे लगता है कि उक्त योजना का जो बालकाल है जिसका पहला ठेका दिया है वो यह दर्शाता है कि जब इसके शुभारंभ के पहले इस योजना में जो कुछ हुआ है या यूँ कहे कि किसी को लाभ पहुँचाने के लिये किया गया है ? तो निश्चित ही इस योजना का क्या भविष्य होगा यह सोचकर ही डर लगता है। शासन की एक महती योजना प्रारंभ होने के पहले ही अनेक गड़बड़ियों का शिकार हो गई....।
असल में जो शिकायत तथ्यों के साथ जिलाधीश सीहोर को एक शिकायतकर्ता ने की है उसमें स्पष्ट खुला आरोप लगाया है कि जनपद पंचायत आष्टा द्वारा जिस डॉ अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी को प्रचार-प्रसार का लगभग 8 लाख का ठेका दिया है वो लगता है कि एक व्यक्ति विशेष को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से कार्य किया है। आष्टा जनपद पंचायत में इन दिनों क्या-क्या हो रहा है यह किसी से छुपा नहीं है। इसका उदाहरण है जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत डूका भमूरा जहाँ पर शिकायतकर्ता ने जो शिकायत पिछले दिनों की पहले तो यहाँ के अधिकारियों ने उक्त शिकायत को दबाने के काफी प्रयास किये लेकिन जब शिकायतकर्ता ने अपनी दमदारी नहीं छोड़ी तो जांच के लियं पंचायत तक जाना पड़ा जहाँ पर ग्रामीणों ने खुलकर कई मुद्दों पर शिकायतों के पक्ष में बयान दिये। यह तो केवल एक पंचायत का उदाहरण है शेष पंचायतों में हुए निर्माण कार्य, विभिन्न दी जाने वाले पेंशन, इंदिरा आवास व अन्य योजनाओं की अगर जांच हो तो अधिकारियों की आंखे खुली की खुली रह सकती है लेकिन कोई जांच करे ऐसी उम्मीद कम ही है क्योंकि ऐसा करने में बात खुद जांच करने वालों तक और उनके अधिकारियों तक आ जायेगी?
1 अप्रैल से जिले में प्रारंभ हो रही राष्ट्रीय ग्रामीण योजना के प्रचार-प्रसार के लिये जिय डॉ अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी इछावर को कार्य दिया है शिकायतकर्ता ने खुला आरोप लगाया है कि उक्त कार्य के लिये इस एजेंसी के अलावा युवा विकास मण्डल, अपवार्ड सोसायटी, रुरल वर्ल्ड हेल्थ एवं मंथन स्वयं सेवी संस्था ने भी निविदाएं डाली थी। अम्बेडकर के अलावा अन्य संस्थाओं के विभिन्न कार्यों के लिये काफी कम दाम होने के बाद भी अम्बेडकर वेलफेयर की निविदा स्वीकृत की गई है। बताया जाता है कि जब शिकायतकर्ता ने जनपद पंचायत आष्टा में शिकायत की तो उससे कहा गया कि जिला पंचायत द्वारा मांगे गये मार्गदर्शन में मीडिया प्लान को आधार बनाकर उक्त निविदा स्वीकृत की गई है जबकि शिकायत कर्ता का कहना है कि यह प्रक्रिया के विरुध्द है। अगर ऐसा ही करना था तो मिडिया प्लान के अनुरुप वित्तिय आफर मंगवाये जाना था तथ्यों के साथ शिकायत करने वाले शिकायत कर्ता राजेन्द्र सिंह सामाजिक कार्यकर्ता ने अपनी शिकायत में कहा कि जब हमने इसके बारे में जानने का प्रयास करते तो हमें बताया जाता कि हमने जिला पंचायत को भेज दिया है जैसे ही कोई निर्णय होगा बतायेंगे। बार-बार इसी प्रक्रिया से गुजरने के बाद हमें 7 जनवरी 08 को बताया गया कि डॉ अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी को उक्त कार्य दिया गया जबकि शिकायत कर्ता का आरोप है कि उक्त सोसायटी को इसके पहले ही 26 दिसम्बर 07 को कार्य दे दिया गया था यहाँ गंभीरता से लेने एवं जांच का विषय है।
इसकी सत्य प्रति भी शिकायतकर्ता ने शिकायत के साथ लगाई है जब उक्त कार्य की स्वीकृति 7 जनवरी 08 को हुई है तो उसे कार्य इसके पहले 26 दिसम्बर को कैसे दे दिया। वहीं शिकायतकर्ता ने एक और गंभीर आरोप लगाया है कि इस संस्था का प्रमुख है वो इछावर तहसील के ग्राम खजूरिया में शिक्षाकर्मी के रुप में पदस्थ है और वो 2 माह से आष्टा क्षेत्र में ही नजर आ रहा है इसने कईयों को अपना परिचय एक पत्रकार के रुप में देता है । यह भी जांच का विषय है कि अगर वो एक शिक्षाकर्मी है जो यह सब छुपाया क्यों गया तथा वो किस समाचार-पत्र का संवाददाता है।
शिकायत कर्ता राजेन्द्र सिंह ने बताया कि 26 दिसम्बर 07 को पत्र क्रमांक क्षएनआरईजीएस07 आदेश में उल्लेख था कि 7 दिन के अंदर 10 प्रतिशत राशि जमा की जाये। चार दिन बाद ही 1 जनवरी 08 को फिर पत्र के माध्यम से डॉ अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी रामनगर तहसील इछावर को सूचना दी गई कि आपकी राशि नहीं आई है। लेकिन अगले ही 2 जनवरी 08 को गुपचुप अनुबंध भी नियम विरुध्द कर लिया गया जबकि राशि संबंधित संस्था ने जमा नहीं की थी।
बिना राशि के अनुबंध जब हो ही नहीं सकता तब भी उसे अनुबंध पत्र दे दिया गया और हाथ बचाने के लिये मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किये। मतलब स्पष्ट है कि कहीं कुछ दाल में काला है। मामला यहीं नहीं थमा बल्कि 16 जनवरी तक भी एक सूचना पत्र जारी कर कागजी खानापूर्ति की गई लेकिन 16 जनवरी तक 10 प्रतिशत राशि जमा नहीं हुई। मतलब स्पष्ट है कि सभी अधिकारियाें की मिली भगत से ही यह कार्य दिया गया है। किसी खास व्यक्ति को लाभ पहुँचाने के लिये ऐसा किया जा रहा है।
पूरे ब्लाक में प्रति कार्यक्रम 1.85 पैसे में कठपुतली का प्रदर्शन, पूरे ब्लाक के हर गांव में मुनादी करने पर 10.25 रुपये, आमसभा की जानकारी देने पर 1.20 पैसे देना तय है लेकिन क्या पूरे 272 ग्रामों में इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्रचार-प्रसार किया जायेगा ? जब प्रारंभ में ही इतनी लम्बी-चौड़ी पोल है तो फिर आगे क्या होगा ? करीब 8 लाख रुपये का यह कार्य है क्या वाकई हर गांव में जाकर उपरोक्त कार्य होगा ? क्या संबंधित अधिकारी वाकई इस पर नजर रखेंगे ?
प्रतिक्रिया- शिकायतकर्ता की उक्त शिकायत पर जनपद पंचायत आष्टा के सी.ई.ओ. श्री आर.एस. वर्मा ने इस पूरी शिकायत की प्रतिक्रिया में बताया कि जो भी निविदाएं आई थी उसको खोलने के बाद जिले में भेज दिया गया था वहाँ से नियमानुसार पात्र डॉ अंबेडकर वेलफेयर सोसायटी की उक्त निविदा स्वीकृत की गई है। उक्त कार्य में पूरी पारदर्शिता अपनाकर नियमानुसार ही उक्त कार्य दिया गया है। शिकायतकर्ता की शिकायत सही नहीं है। जब उनसे पूछा की ऐसा बताया गया है कि संस्था का प्रमुख इछावर ब्लाक में शिक्षाकर्मी है तब श्री वर्मा ने कहा ऐसा मालूम नहीं है अगर ऐसा है तो इसकी जांच करवा लेता हूँ श्री वर्मा ने बताया कि 2 वर्ष के उक्त कार्य के रेट की तुलना में इसी संस्था को पात्र पाया गया था- आर.एस.वर्मा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत आष्टा । इस संबंध में फुरसत ने डा. अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी के प्रमुख से भी सम्पर्क कर उनका पक्ष लेने के भी प्रयास किये लेकिन उनसे सम्पर्क नहीं हो पाया।

लाख रु.खर्च कर नचवाया...और 20 लोगों ने देखा

जनता के रुपयों की ऐसे हो रही बर्वादी, बिना
प्रचार-प्रसार के कर डाला मंचीय कार्यक्रम
सीहोर 1 फरवरी (फुरसत)। प्रदेश में मनाये जा रहे भारत पर्व के अवसर पर सीहोर में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें देश के मशहूर संतूर वादक ओम प्रकाश चौरसिया के निर्देशन में मधुकली वृन्द भोपाल कलाकारों ने संगीत रूपक मुक्ति का महायज्ञ की शानदार प्रस्तुति दी । प्रसिद्ध विद्याधर आमटे ने बांसूरी वादन प्रस्तुत किया । बड़ा बाजार में मंच बनाकर हजारों रुपये खर्च किये गये। कलाकारों को करीब 40-50 हजार रुपये दिये गये लेकिन 8 कुर्सियाँ मंच के सामने लगाकर 20-25 दर्शकों ने ही इसे देखा....। इस प्रकार बिना प्रचार-प्रसार किये इस कार्यक्रम को करके जनता के रुपये एक तरह से बर्वाद कर दिये गये। बड़ा बाजार में गणतंत्र दिवस की संध्या पर भारत पर्व के उपलक्ष्य में संगीत रूपक मुक्ति का महायज्ञ मंचित किया गया जिसमें मधुकली वृन्द भोपाल के कलाकारों ने 1857 से 1947 की आजादी की संघर्ष गाथा को संगीत और अभिनय की जुबानी प्रस्तुत किया । ओम प्रकाश चौरसिया के निर्देशन, संगीत, आकल्पन और प्रस्तुति के इस रूपक में कवि डा. रामबल्लभ आचार्य के वृन्दगान भारत प्यारा देश हमारा की कलाकारों ने अनूठी प्रस्तुति देकर कोरियोग्राफर मनोज नायर के परिश्रम को साकार कर दिखाया । मंच एवं पार्श्व गानवृन्द में जिन कलाकारों ने सहभागिता की उनमें संदीपा पारे, हिमानी सक्सेना, चित्रा जाम्बोलकर, एकता गोस्वामी, रूपक मंडलोई, देवना चौरसिया, स्मिता नायर, पूनम सोनी, नोशाबा सईद खां, रूपल गुप्ता, हर्षिता शर्मा, गोपाल लेले, लोकेन्द्र सिंह, गौरव शर्मा, सुदीप सोहनी, अंशुमान साकल्ले, अंकित लालवानी, विजय पटेल, उमेश धर्मेश, आतिक सईद खां, चिराग सोलंकी, और गोदान शामिल थे । संगीत रूपक में वाद्य वृन्द संयोजन उमेश धर्मेश ने किया । प्रकाश व्यवस्था तरूण पाण्डे, वाचक स्वर विवेक मृदूल, रंगभूषा संदीपा पारे, वेशभूषा स्मिता नायर तथा कोरियोग्राफी निदेशक मनोज नायर थे । कार्यक्रम में उद्धोषक के रूप में विनय उपाध्याय मोजूद थे । मुक्ति का महायज्ञ रूपक के बाद बांसूरी वादन के लिए मशहूर विद्याधर आमटे ने भी बांसूरी की स्वर लहरियां बिखेरकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया । कार्यक्रम में ए.डी.एम. श्रीमति भावना वालिम्बे उपस्थित थीं। आये कलाकार मुट्ठा भर के रुपये ले गये और यहाँ उनका अभिनय किसी ने देखा ही नहीं।

केन्द्र से सब्जी उगाने के लिये आये ढाई करोड़ मुख्यमंत्री के गांवों में ठूंसे जायेंगे, कांग्रेसी हाथ मलते रह जायेंगे....

सीहोर 1 फरवरी (फुरसत)। जिले भर में उद्यानिकी के विकास के लिये ढाई करोड़ से भी अधिक राशि की कार्ययोजना जो राय सरकार ने अनुमोदित कर स्वीकृति के लिये केन्द्र सरकार को भेजी गई थी उसे केन्द्र सरकार ने स्वीकृत कर दिया गया है। कार्ययोजना स्वीकृति के बाद जिले भर में करीब तीन सौ से भी अधिक हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी क्षेत्र का विकास कार्य को अमली जामा पहनाया जा सकेगा। जिसके तहत करीब आठ नर्सरियों की स्थापना, जैविक खेती के लिये 210 हेक्टेयर क्षेत्र में आर्गनिक फारमिंग, 93 हेक्टेयर क्षेत्र में पुष्प व मसाला उत्पादन 200 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जी को प्राथमिकता दी जायेगी। इसके लिये अभी तक 134 गांवों का चयन किया जा चुका है। जिनमें उद्यानिकी विकास के लिये केन्द्र से आये 2 करोड़, 55 लाख 78 हजार 400 रुपये की वृहद धनराशि खर्च की जावेगी। लेकिन जानबूझकर यह महती योजना नर्वदा किनारे के लिये गये हैं। जो मुख्यमंत्री के क्षेत्र के हैं और यहाँ पूर्व से ही किसानों की व उद्यानिकी की स्थिति बढ़िया है। देखते हैं कांग्रेसी नर्वदा की अपेक्षा जिले की सबसे बड़ी नदी पार्वती या नदियों को लेकर जाग्रत होते हैं या नहीं ?
जिला जनसम्पर्क कार्यालय से प्रसारित समाचार के अनुसार जिला उद्यानिकी के कर्ताधर्ता जिलाधीश की अध्यक्षता में गत दिवस संपन्न एक बैठक में उद्यानिकी विकास की वर्ष 2007-08 की कार्ययोजना का अनुमोदन किया गया । बैठक में जिलाधीश ने उद्यानिकी विकास के लिए पानी की पर्याप्त उपलब्धता को लेकर बातचीत करते हुए अपनी राय थोपी की नर्वदा किनारे पर्याप्त पानी है। फिर उद्यानिकी के कार्यो को तत्काल प्रारंभ करने और प्रस्तावित कार्ययोजना का जनपद पंचायतों की कृषि स्थायी समिति से तत्काल अनुमोदन कराने के निर्देश दिए। कृषक भ्रमण प्रशिक्षण के लिए उपयुक्त किसानों का चयन करने के भी उन्होंने निर्देश दिए। जिलाधीश ने उद्यानिकी विकास के लिए सबसे जरूरी तत्व पानी पर विशेष जोर देते हुए कहा कि वर्तमान में जहां पहले से ही पानी उपलब्ध है वहां उद्यानिकी कार्यो को प्राथमिकता दी जाये। उन्होंने सुझाव दिया कि पानी की सुलभता को देखते हुए कार्ययोजना में नर्मदा किनारे के ग्रामों का चयन उपयुक्त हो सकता है। अप्रत्यक्ष रुप से उन्होने स्पष्ट ही कह दिया कि प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री जी के क्षेत्र में नर्वदा बहती है इसलिये सब समझ जाईये कि वहीं पानी पर्याप्त है और कार्य तत्काल प्रारंभ हो जिससे मुख्यमंत्री का क्षेत्र हरा-भरा-समृध्द हो जाये ताकि वह हम पर व हमारे कार्यों से प्रसन्न हो सकें।
सहायक संचालक उद्यानिकी ने जिलाधीश को बताया कि प्रस्तावित कार्ययोजना के तहत जिले में 34 क्लस्टर के कुल 130 ग्रामों का चयन किया गया है। कृषकों के चयन का कार्य जारी है । सब्जी बीज इन्फास्ट्रक्चर के तहत 80 हेक्टेयर मसाला विकास और 13 हेक्टेयर क्षैत्र में पुष्प विकास के कार्य किए जायेगे । प्रस्तावित कार्ययोजना में पुराने बगीचों में उत्पादकता बढ़ाने के मद्देनजर 25 हेक्टेयर क्षैत्र को शामिल किया गया है । इसी तरह रोपण सामग्री उत्पादन के लिए पांच-पांच सौ वर्ग मीटर में ग्रीन हाउस और नेट हाउस बनाए जायेगे । दो हेक्टेयर में मल्ंचिग का कार्य किया जायेगा । एकीकृत जीवनाशी प्रबंधन का कार्य 20 हेक्टेयर में किया जायेगा । जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 200 हेक्टेयर में सब्जी और 10 हेक्टेयर में मिर्च का उत्पादन किया जायगा। प्रस्तावित कार्ययोजना में 20 वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण और 10 जल स्त्रोंतों का उत्पादन किया जायेगा । प्रस्तावित कार्ययोजना में 20 वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण और 10 जल स्त्रोंतो का सृजन शामिल किया गया । जिले से 400 किसानों के चयन का कार्य शुरू कर दिया गया है । किसानों का चयन कर उन्हें राज्य के भीतर और राज्य के बाहर प्रशिक्षण के लिए भेजा जायगा ।
इस प्रकार केन्द्र से मंजूर हुई इस महत्वपूर्ण योजना के लिये करोड़ो रुपये में प्राप्त धनराशि एक तरह से सिर्फ मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र जिसे नर्वदा का किनारा कहकर योजना में सम्मिलित किया गया है वही हरा-भरा होगा। मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में वैसे ही कल-कारखानों से लेकर करीब एक अरब रुपये (1,00,00,00,000) तक के तरह-तरह के निर्माण कार्यों की स्वीकृति पूर्व में ही हो चुकी है। नर्वदा के किनारे होने तथा पानी खूब होने से यहाँ के किसान पहले ही समृध्द और सम्पन्न हैं। यहाँ पर्याप्त पैदावार है सभी और खुशहाली है।
ऐसे में केन् द्र से आई योजनाओं का भी इस प्रकार यहाँ उपयोग किया जा रहा है। जिसको लेकर कोई बोलने या विरोध करने वाला नहीं है। देखते हैं क्या कांग्रेस इस मामले में कुछ करेगी ?

Saturday, February 2, 2008

ध्वज अपमान मामला:प्रकरण दर्ज

जावर 31 जनवरी (फुरसत)। यहाँ जिस अमर मोती मेमोरियल स्कूल में ध्वज वंदन के बाद उसे उतारा नहीं गया था आज उस संबंध में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए यहाँ राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत मामला पंजीबध्द कर लिया है।
यहाँ अमरमोती मेमोरियल स्कूल में ध्वज वंदन हुआ था लेकिन सायं सूर्यास्त के पूर्व ध्वज को उतारा नहीं गया था। दूसरे दिन सुबह 27 जनवरी को करीब 10 बजे तक यह ध्वज लगा रहा और करीब इसी समय ये हवा में उड़कर नीचे भी गिर गया था। एक व्यक्ति ने उसे तत्काल उठाकर अपने पास सुरक्षित रख लिया था।
इसका पंचनामा भी पटवारी द्वारा बनवाया गया था। कल इस संबंध में कुछ लोगों मो. अतहर खां, भूपेन्द्र सिंह आदि के बयान भी हुए थे। आज पुलिस ने इस मामले में राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 (2) के तहत स्कूल संचालक गोपाल सिंह सिसोदिया के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है।

घरेलु गैस भरते मारुति कार पकड़ी

आष्टा 31 जनवरी (फुरसत)। आज आष्टा नगर के किलेरामा के पास से खाद्य अधिकारी ने एक स्थान पर छापा मार कर यहां पर घरेलु गैस के सिलेन्डर से अवैध रूप से एक मारूति कार क्रमांक एमपी-09-व्ही-9014 में गैस भरते समय पकड़ा है। खाद्य अधिकारी ने उक्त स्थान से मारूति एक घरेलु गैस सिलेंडर एक नलकी को जप्त किया है । पुलिस ने बताया है कि उक्त मारूति खाद्य विभाग ने जप्त कर केवल हमारी सुरक्षा में ही है जो यहां पर खड़ी है ।

सहेली हो तो ऐसी, 17-17 हजार में खरीदे सोफे

सीहोर 31 जनवरी (फुरसत)। दोस्ती हो तो ऐसी.....नगर में इन दिनों कार्यरत दो महिला अधिकारियों के बीच अच्छी बन रही है। अच्छी क्या बहुत अच्छी बन रही है। हालांकि दोनो हैं तो अलग-अलग शासकिय कार्यालयों की अधिकारी लेकिन उनकी आपस घुलती बहुत है। अक्सर दोनो को एक साथ देखा जा सकता है। बातचीत करते या फिर बाजार करते हुए भी आप एक ही नजर आ जाती हैं आखिर इसमें बुराई ही क्या है...बाहर से आने वाले अधिकारियों की स्थानीय स्तर पर कभी किसी से उतनी नहीं पट पाती जितनी किन्ही शासकिय स्तर के ही अधिकारियों से बनती है। इन दोनो शासकिय महिलाओं की इसी दोस्ती के चर्चे अब शुरु होने लगे हैं। असल छोटे-से नगर में जब कभी भी किन्ही अधिकारियों की कोई नई गतिविधि शुरु होती है तो सहज ही नगर में चर्चा का विषय भी बन जाती है। इन दोनो महिला अधिकारियों की तो पसंद भी एक-सी है । असल में पसंद को लेकर एक और चर्चा यह है कि दोनो ने 17-18 हजार की राशि के दो सोफा सेट इन दिनों बनवाये हैं। दोनो ही बेशकीमति सोफा सेट इन दोनो ने एक साथ बनवाये हैं जो इनके घर की शोभा बढ़ायेंगे। भाई तुझे जो पसंद वही मेरी पसंद यही अंदाज तो दोनो को एक दूसरे के और करीब लाया होगा तभी तो इनकी दोस्ती की चर्चाएं जिले भर के अधिकारियों में होने लगी है वो कहते हैं कि भाई दोस्ती हो तो ऐसी।

डेढ़ लाख के पार हुए विधानसभा के मतदाता महिलाएं घट गई और पुरुष बढ़ गये ?

सीहोर 31 जनवरी (फुरसत) धीरे-धीरे सीहोर विधानसभा क्षेत्र की संख्या में अब डे ढ़ लाख से पार हो गई है। हाल ही नई मतदाता सूची के प्रकाशन होने के बाद यह तथ्य सामने आया है कि अब यहाँ कुल 1 लाख 50 हजार 192 मतदाता हो गये हैं।
ज्ञातव्य है कि पूर्व में सीहोर विधानसभा में 1 लाख 39 हजार 483 कुल मतदाता था जिनमें 78 हजार 188 पुरुष और 71 हजार 295 महिलाएं शामिल थीं। लेकिन इस बार नई सूची में करीब 32 महिलाएं घटकर सिर्फ 71हजार 263 ही शेष बची हैं। नई सूची में पुरुषों की संख्या 78 हजार 929 है कुल मिलाकर 1 लाख 50 हजार 192 मतदाताओं के साथ सीहोर विधानसभा में डेढ़ लाख का आकड़ा पार हो चुका है।

शहीद दिवस पर एक तरफ गाँधी का स्मरण हुआ दूसरी तरफ खुले आम बिकता रहा मांस
सीहोर। भले पूरे देश में कुछ विशेष तिथियों महावीर जयंती, गाँधी जी की पुण्यतिथि और शहीद दिवस पर मांस-मद्य का विक्रय बंद रहता हो लेकिन यहाँ सीहोर में कभी इसका पालन नहीं कराया जाता। पिछली बार जब बार-बार जिला प्रशासन को लोगों ने महावीर जयंती पर दुकाने बंद कराने को कहा था तो बमुश्किल बंद कराई गई थी। कल 30 जनवरी को खुले आम मांस बिकता रहा।

उन्नत उर्जा चूल्हे से अब मात्र 150 रु. महिने में बन सकता घर का भोजन

सीहोर 31 जनवरी (फुरसत)। इण्डियन इंस्टीटयूट आफ साइंस बैंगलोर भारत द्वारा बनाये गये उन्नत धुंआ रहित गैस चूल्हा जिसे बीपी एनर्जी इण्डिया लिमिटेड कम्पनी द्वारा बाजार में उतारा गया है ने सीहोर में आते ही धूम मचा दी है। तमिलनाडु व महाराष्ट्र में धूम मचाने के बाद यह स्टोव अब मध्य प्रदेश में आ गया है जहाँ बहुत तेजी से यह अपना स्थान बनाने में लगा है। नूतन के बत्ती वाले स्टोव की ही तर्ज पर यह आधुनिक धुंआ रहित चूल्हा कम्पनी द्वारा दी जाने वाली जलाऊ लकड़ी जो मात्र 4 रुपये किलो होती है से चलता है और नीचे लगे पंखे से इसकी आंच नीली पड़ने लगती है। मात्र 3 रुपये में एक घंटे तक यह सुविधा के अनुसार तेज-मद्दा करके चलाया जा सकता है। यहाँ अंतराष्ट्रीय कम्पनी आईटीसी के सोया चौपाल पर यह बिक रहा है।
एक तरफ जहाँ गैस की टंकी के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं और वह 329 रुपये में किसी तरह मिल पा रही है वहीं अचानक भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा बनाये गये धुंआ रहित चूल्हे ''उर्जा'' ने इसके खरीददारों को कुछ राहत दी है। उर्जा एक छोटा-सा चूल्हा है जिसमें बीच में लगी गोल जाली है इसमें कम्पनी द्वारा दी गई विशेष प्रकार की जलाऊ लकड़ी जो बिल्कुल गाय को खिलाई जाने वाली खली की तरह रहती है उसे डाल दिया जाता है। यह जलाऊ खली पूरा स्टोब भरने पर करीब 600 ग्राम भरा जाती है। फिर इस पर घासलेट की कुछ बूंदे डालकर माचिस से आग लगा दी जाती है। आग लगते ही यह मात्र 2-3 मिनिट में ही अच्छी तरह जलने लगता है।
इसी चूल्हे जाली के आने के लिये नीचे एक तरफ से पंखा भी लगाया गया है। यह छोटा-सा पंखा स्टोव में ही लगी एक ड्राय बैटरी से चलता है यह बेटरी मोबाइल सरीखे चार्जर से जितने घंटे चार्ज की जाती है उतने ही घंटे तक यह पंखा चला देती है। कुल मिलाकर चूल्हे में लगा पंखा चूल्हे में लगी बैटरी से चलता है और पंखा हवा तेजी से अंदर जाली के अंदर फेंकता है जिससे मात्र 5 मिनिट में ही आधुनिक चूल्हा बहुत अच्छी तरह जलने लगता है। पंखे को चलाने के लिये दो गति भी दी गई यदि पंखा तेज किया जाये तो आंच तेज रहती है और उस स्थिति में इस पर बड़ी तपेली या कुछ और भी रखकर पकाया जा सकता है। जबकि कम गति पर पंखा चलाने पर आंच भी धीमी उठती है और उस पर आराम से चाय, रोटी आदि बन सकती है।
इस प्रकार भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा बनाये गये इस चूल्हे में जो जलाऊ खली डाली जाती है बस वही एक खर्चा है। लेकिन यह खली का 20 रुपये में 5 किलो का एक बोरा आ जाता है। जिसे कम्पनी से ही खरीदा जाता है। यहाँ पर्याप्त मात्रा में यह जलाऊ खली है। जिसे उपयोगक्ता को जितनी चाहिऐ वह खरीद सकता है। एक बार पूरी खली भरने पर करीब 6 सौ ग्राम भराती है और यह चूल्हा करीब 1 घंटे तक चलता है धीरे-धीरे इसकी लौ कम होती जाती है इस दौरान यदि खली और डालने की इच्छा हो तो बहुत धीरे-धीरे डाली जा सकती है। किसी 5 सदस्यीय घर के लिये सुबह का भोजन एक घंटे में बन जाता है और शाम का भी इतने ही समय में बनता है। इस प्रकार प्रतिदिन अधिकतम सवा किलो 5 रुपये की खली जलती है जो पूरे महिने में 150 रुपये से अधिक का खर्चा सामान्यत: नहीं बैठता।
हालांकि गैस की टंकी का उपयोग करने वालों की सहूलियत कुछ अधिक है लेकिन यदि बचत करने के उद्देश्य से इस देखा जाये तो यह एक अच्छी बचत का स्त्रोत बन सकता है। बीपी कम्पनी उर्जा चूल्हा ग्रामीण बड़ी संख्या में खरीदकर ले जा रहे हैं जिन्हे गैस की टंकी सामान्यत: मिल नहीं पाती और मिलती भी है तो सवा गुना दाम में मिलती है। शहर के भी कई लोगों ने यह चूल्हा खरीदा है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यह बहुत अच्छी लौ उठाता है तेज उठाता है और धुंआ नाम मात्र का भी नहीं रहता।
सबसे शानदार बात यह भी है कि जिन्हे चूल्हे की रोटी का स्वाद लगा होता है उन्हे इस चूल्हे की रोटी का स्वाद और भी अच्छा लगता है। एक स्थिति से न सिर्फ लकड़ी के चूल्हे की अपेक्षा बल्कि केरोसिन से भी यदि महिने भर रोज एक घंटा चूल्हा जलाया जाये तो 300 रुपये के आसपास खर्च बैठ ही जाता है इससे अच्छा तो यह बीपी का ''उर्जा'' चूल्हा ही माना जा सकता है। चूल्हे में लगी बैटरी को मात्र 5 घंटे एक साथ चार्ज कर देने पर सप्ताह भर तक यह अच्छी चलती है। रेग्यूलेटर से पंखे की गति तेज-धीमी भी हो जाती है। इसके अंदर कुछ ऐसी धातु का उपयोग भी किया गया है जिसके कारण खुद स्टोव कभी यादा गर्म नहीं होता। इसकी कीमत थोड़ी यादा ही 675 रुपये है। जिसके कारण इसे खरीदने में एक बारगी खूब सोच-विचार करना पड़ता है फिर इसमें जलने वाली उर्जा भी जहाँ से चूल्हा खरीदा जाता है वहीं से खरीदना पड़ती है। अभी यह चूल्हा चौपाल सागर आकर्षण का केन्द्र है।