Thursday, November 27, 2008

आपके हाथ में आपका भविष्य, आज मतदान अवश्य करें

      लम्बे समय से सीहोर निरन्तर बर्वादी की नई सीढ़ी चढ़ता नजर आ रहा है...मालवा के कोने पर बसा और भोपाल से सटा सीहोर, न घर सुरक्षित रख सका ना घांट। अंग्रेजों ने जिसे अपनी छावनी बनाया और जो सीहोर, भोपाल का भी जिला था, आज उस जिले में समृध्दि की कोई वस्तु नजर नहीं आती। शहरयार हायर सेकेण्डरी स्कूल हो जहाँ भोपाल के सभ्यघरानों के बच्चे पढने आते हों या प्रदेश का ख्यातिलब्ध कृषि महाविद्यालय दोनो बर्वाद हो चुके हैं। शिक्षा के नाम पर लूट-खसोट और अपसंस्कृति को बढ़ावा देते शिक्षण संस्थान ही हमारे पाले में हैं....आवासीय खुला भी तो किसी ने ध्यान नहीं दिया, सबकी निगाह सिर्फ उसके केन्टीन के ठेके पर ही रही व्यवस्थाओं पर नहीं...धीरे-धीरे यह विशेष संस्थान गंभीर बीमारी की चपेट में आ चुका है।

      रोजगार के हजारों अवसर उपलब्ध कराती और शान बढ़ाती फेक्ट्रियों को तो हम सबने मिलकर ही बर्वाद कर लिया। पेपर मिल को नोच-नोचकर खत्म कर दिया गया। हालांकि असुरक्षित पडी बेशकीमति सामान की चोरी नहीं होगी तो और क्या होगा। जो भी हो किसी समाजसेवी या राजनेता ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया था, आज भी संरक्षण देकर बचा-खुचा सामान चोरी कराया जाना चालू है। शकर कारखाने के लिये कोई आंदोलन करने नहीं आया, सोयाबीन प्लांट से किसी ने रिश्ता बनाने का प्रयास ही नहीं किया, जबकि यह प्लांट रांगोली तेल बनाकर पूरे प्रदेश में हमारी नाक ऊंची कर रहा था, जगमानक साल्वेंट प्लांट की याद तो कोई करने को ही तैयार नहीं है...गौचारे के प्लांट के विकास की किसी को चिंता ही नहीं है...मण्डी का ओद्योगिक क्षेत्र क्यों उजड़ रहा है किसी को मतलब नहीं....और थूना के पास स्थित ओद्योगिक जमीन पर कोई उद्योग कैसे लग सकता है ऐसा विचार किसी को आता ही नहीं...यहाँ एक व्यापारी बर्वाद होने की स्थिति में आता है तो हर एक खुशी मनाता है...राजनेता यादा खुश होते हैं।

      तीसरा महायुध्द पानी को लेकर होगा यह बात अटल जी कई बार कह चुके और आज हम देखने भी लगे हैं...आपसी द्वंद सिर्फ पानी को लेकर हो रहा है...अब जो कुछ पानी को लेकर मारपीट, हत्या, लड़ाई-झगडे हमारे यहाँ हो चुके उससे यादा इस अगले वर्ष के सूखे में होने की संभावना है...सीवन गहरीकरण जब हो रहा था तब कोई नेता सामने नजर नहीं आता था, सारे समाजसेवी अवश्य लगे हुए थे...काहिरी बंधान के लिये आज तक किसी ने कुछ नहीं किया...पार्वती का दूसरा चरण 10 साल से अटका पड़ा है किसी को फिक्र नहीं है....आज हम चुपचाप 10 दिन में एक बार नल आता देखते हैं और हर दिन के हिसाब से नगर पालिका में भुगतान करते हैं...सीवन साल में चार बार सूखती है...नाले पर अतिक्रमण इतना हो चुका है कि नाला अब गटर मलमूत्र और नगर के कचरे का कचराघर बन गया...।

      जिस सीहोर की चार दिशाओं में भोपाल नबाव ने चार बड़े तालाब खुदवाये थे ताकि सीहोर को पानी की कमी न रहे, जमोनिया तालाब, भगवानपुरा तालाब, कोनाझिर तालाब सब हमारे लिये हैं...लेकिन इनके संरक्षण की तरफ किसने ध्यान दिया...? किसी का दिमाग चला भी तो उसकी फूटी खोपड़ी से निकला कि गंज के पीछे के फूटे तालाब को सही किया जाये...रुपये भी बर्वाद हुए और पानी भी नहीं रुक सका। जलाभिषेक के रुपये आये तो एक ठेकेदार ने पं.दीनदयाल नगर हाउसिंग बोर्ड में एक तालाब बना दिया (ढूंढो तो जाने)....।

      आज हमारे पास ना पानी है....न फेक्ट्री उद्योग धंधा है और ना ही शिक्षा है...। तीन तरफा बर्वादी हुई है जैसे किसी का श्राप लग गया हो या फिर उच्चकोटि की राजनीति के माध्यम से यह सब बर्वादी हुई हो...जो भी हुआ हो हम बर्वाद हो चुके हैं...।

      आज मतदान है...कर्तव्य के साथ अपने भविष्य को संवारने की ताकत आज हमारे पास है, सोच-समझकर, बहुत सोच-विचारकर हमें मतदान करना होगा...किसी से संबंध या रिश्ते होने के कारण दबने की जरुरत नहीं...खूब विचारें...तीन विकल्प हैं....कौन क्या कर सकता है यह सोचें...किसने आज तक क्या किया यह सोचें...आगे कौन क्या कर सकता है...किसके पास उर्जा है...शक्ति है...इच्छा है...आपके हाथ में आपका भविष्य है...। मतदान अवश्य करें।

नन्द भैया

जबर्दस्त चली तोड़-फोड़, रात भर दौड़े वाहन, कड़ी-पुड़ी बनाने वाले को ही उठा लाई पुलिस

सीहोर 26 नवम्बर (नि.सं.)। चुनाव के अंतिम दिन बुधवार को दोपहर बाद से ही कत्ल की रात जैसा माहौल बन चुका था...हर तरफ अफरा-तफरी, हर पार्टी के कर्ताधर्ताओं में तनाव की स्थिति....भागम-भाग जारी थी। सबको शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों का सबसे यादा तनाव था। हर प्रत्याशी अपनी सम्पूर्ण दम-खम के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में घूम रहा था। अपने प्रभाव वाले ग्रामों में जाने की बजाये आज दिन व रात भर उन ग्रामों में दखल दिया गया जहाँ विरोध करने वाले यादा ही उग्रता दिखा रहे थे...उन्हे कैसे साम-दाम अथवा दण्ड-भेद से शांत किया जाये इसके प्रयास हुए। गढ़ तोड़ने, अपने पक्ष में करने अथवा उजाड़ देने के प्रयास भी हुए। बाहुबल का प्रयोग जमकर हुआ।

      मतदान के एक दिन पूर्व जिसे चुनावी कत्ल की रात क हा जाता है, वाकई कई कारनामे हुए। बहुत बडी संख्या में बाहुबल के प्रयोग की चर्चाएं तो देर रात से ही शुरु हो गई थीं, लेकिन इतनी तरह की चर्चाएं सामने आईं कि लोग हतप्रभ रह गये। ग्रामीण क्षेत्रों को सारे ही प्रमुख प्रत्याशियों को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना रखा है। ग्रामीण क्षेत्रों में ही सर्वाधिक तोड़फोड होती है यह भी सत्य है, इसलिये वहाँ कहीं दादागिरी या धन के दम पर मतदाताओं को प्रभावित न किया जाये इस पर हर प्रत्याशी ने आज नजर रखी। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्याशी व उनके बहुतायत समर्थक बारीकी से निगाह रखे हुए थे।

      जानकारों का कहना था कि एकाधिक प्रत्याशियों ने बाहर से भी अपने बाहुबलि साथियों को बुलाया है। हालांकि विधानसभा क्षेत्र में बाहरी व्यक्तियों की उपस्थिति नहीं रहने की बातें कही जा रही थी लेकिन चर्चाओं को रोका भी तो नहीं जा सकता।

      जानकारों का कहना है कि रातभर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्याशियों के वाहन घूमेंगे और अपने ढंग से टेलर दिखायेंगे, हर तरह से जिसे (मतदाता को)जो समझाना होगा समझाया जायेगा और उसे समझना भी पड़ेगा।

बजरंग दल विहिप ने भाजपा

के पक्ष में प्रचार शुरु किया

      चुनाव के अंतिम दिनों में कई चर्चित पर्चे मैदान में आ गये हैं। तीनों ही तरह के प्रत्याशियों के लिये तरह-तरह के पर्चे चौराहों पर बंट चुके हैं। बांटने वाले बांटकर कब गायब हो गये पता ही नहीं चला। भाजपा के पक्ष में एक पर्चा बड़ा धार्मिक है जिसमें पाँच भगवानों के फोटो व मंत्रों के साथ सनातन हिन्दु धर्म के पक्ष में महत्वपूर्ण बातें लिखी गई हैं बल्कि जनता से भाजपा को जिताने के लिये गणेश जी के मंत्र का 108 बार जाप करने तक का कहा गया है। इस पर्चे को बांटने वालों के नाम में अमरनाथ संघर्ष समिति, बजरंग दल, विहिप कुल 8 संगठनों के नाम शामिल हैं।

चर्चित भतीजा 15 लाख रुपये बांटते हुए दिखा

      आज अफवाहों का बाजार भी सरगर्म रहा। शाम से ही यह बात लगातार कही जाती रही कि पुलिस ने ग्रामीण क्षेत्रों से एक चर्चित भतीजे को एक-दो नहीं बल्कि पूरे 15 लाख रुपये के साथ पकड़ा है। यह ग्रामीणों को इसके पूर्व कई लाख रुपये बांटते हुए आगे जा रहा था। जिसकी शिकायत पर पुलिस मौके पर पहुँची और इसे रुपये सहित पकड़ा गया। लेकिन इस बात पर पुलिस लगातार ना-नुकुर करती रही स्पष्ट कुछ भी कहने को तैयार नहीं थी। यह अफवाह थी या हकीकत राम जाने।

 

 

 

मतदान केन्द्र अधिकारी नशे में धुत मिला

      आष्टा 26 नवम्बर (नि.सं.)। आष्टा विधानसभा क्षेत्र के मतदान केन्द्र क्रमांक 171 ग्राम मैना झोन क्रमांक 15 पर तैनात मतदान केन्द्र अधिकारी क्रमांक 2 ने आज अपने मतदान केन्द्र पर शराब पीकर उधम मचाई।

      मैना चौकी प्रभारी मालवीय ने बताया कि आज दोपहर में झोन क्रमांक 15 के झोनल अधिकारी श्री विश्वकर्मा अपने झोन के मतदान केन्द्रों पर निरीक्षण के लिये पहुँचे तब मैना में मतदान केन्द्र क्रमांक 171 के मतदान अधिकारी क्रमांक 2 जगदीश कहार जो कि बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नस. गंज में सहायक अध्यापक हैं इनकी डयूटी 27 नवम्बर को चुनाव कार्य सम्पन्न कराने के लिये कराई गई थी ने आज शराब पीकर जमकर उधम मचाई। तब पीठासीन अधिकारी व झोनल अधिकारी पंचनामा बनाकर शिकायत मैना चौकी को की। नशे की हालत में कर्मचारी को आष्टा सिविल अस्पताल लाकर इनका मेडिकल कराया गया तथा बाद में रिजर्व मतदान दल में से एक कर्मचारी को आष्टा से मैना भेजा गया।

भाजपा हमने छोड़ी है वे क्या निकालेंगे

सीहोर 26 नवम्बर (नि.सं.)। भाजपा में मनमानी, असामाजिक तत्वों को महत्व, जनभावनाओं के विरोध के बाद भी विवादस्पद लोगों को टिकिट देने के विरोध स्वरूप हमने भाजपा से इस्तीफा दिया और भाजश की सदस्यता ली है अब भाजपा संगठन हमें निकालने का कोरा ढोंग कर रहा है। यह बात भाजपा छोड़कर भाजश में जाने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता मेहरबानसिंह बलभद्र ने एक विज्ञप्ति जारी कर कही।

      श्री बलभ्रद ने कहा कि नाम निर्देशन पत्र जमा कराने के पहले ही मैंने अपने साथियों के साथ जिसमें भाजश प्रत्याशी सन्नी महाजन भी शामिल है, भाजपा को छोड़ने की घोषणा की थी जो समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित भी की थी। भाजपा छोड़ने के कारण हमने बताए थे। अब बीस दिन बाद भाजपा नेता निष्कासन का ढोंग कर रहे हैं। भाजपा नेता हमें क्या निकालेंगे हमने तो खुद भाजपा को त्यागा है। भाजपा हमे अब समर्पित कार्यकर्ताओं की आवश्यकता नहीं रही अब तो भाजपा में महिलाएं भी असुरक्षित हो गई हैं। पहले भाजपा नहीं छोडते तो अब तो छोड़ना ही पड़ता। श्री बलभद्र ने कहा कि भाजपा अब संगठन पतन की ओर जा रहा है इसका प्रमाण जनता देखेगी। उनका कहना है कि सीहोर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी को अपने प्रभाव का अब अच्छा ज्ञात हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस बार भाजपा को नहीं बल्कि भाजश प्रत्याशी सन्नी महाजन को जिताने के लिए लोग बेताब है। भाजपा में ऐसा ही ढोंग चलता रहा तो जो लोग चुनाव में घर बैठे है वह भी भाजपा को अलविदा कहने में देर नहीं करेंगे।

 

 

 अंतिम दिन सिर्फ भाजपाईयों पर की भाजपा ने मेहनत

      सीहोर 26 नवम्बर (नि.सं.)। घर-परिवार में यदि मनमुटाव हो भी जाये तो उसे साथ बैठकर सुलझा लेना चाहिये, कोई तीसरा व्यक्ति घर की लड़ाई का लाभ उठाये ऐसा नहीं होना चाहिये इससे तो घर ही कमजोर होता है। कुछ इसी तर्ज पर और इसी बात के आधार पर आज अंतिम दिन भाजपा ने नाराज भाजपाईयों क ी ही नाराजगी दूर करने के उपक्रम जारी रखे। भाजपा से कुछेक समाज के बहुतायत लोग नाराज थे। छावनी के एक समाज के लोग जनशक्ति का काम कर रहे थे। उस समाज की एक विशेष बैठक आज सम्पन्न कराई गई, नवयुवकों को बुजुर्गों ने कहा कि बेटा हमारी जिंदगी भर की कमाई पर तुम लोग नगाड़ा बजाकर पानी फेर दोगे, तो युवा अंतत: बड़ो का सम्मान करने के लिये तैयार हो गये। फिर समाज को आज तक पहुँचे लाभ और भविष्य के लिये विचार-चिंतन भी हुआ। और अंतत: राजी-खुशी घर की बात घर में निपट लिये जाने वाली खुशी दर्शाई गई।

      गंज क्षेत्र के एक समाज के बहुतायत लोगों की नाराजी के लिये भी आज भाजपा ने एक बैठक ली। जिसमें समाज के सभी सम्मानीय लोगों को बुलाकर लम्बी बातचीत चली। समाज के वरिष्ठ लोगों ने जहाँ वर्षों से स्वयं के भाजपा से जुड़े होने की बात कही वहीं शिवराज का नाम भी आया। यहाँ भी राजी-खुशी बैठक सम्पन्न हो गई। भाजपा ने आज दिनभर टुकड़ो-टुकड़ो में कई ऐसे लोगों व परिवारों की तरफ यादा ध्यान दिया जो या तो खुलकर नाराजगी व्यक्त कर रहे थे अथवा अंदर ही अंदर नाराज थे। कहीं शपथ दिलाई गई तो कई मनानवे हुए। भाजपाईयों पर ही भाजपा की हुई मेहनत की चर्चाएं आज दिनभर चलती रहीं।

 

 

 

कांग्रेस ने कत्ल की रात मुस्लिम मतदाताओं को संगठित किया

      सीहोर 26 नवम्बर (नि.सं.)। आज अंतिम दिन कांग्रेस ने सर्वाधिक रुप से अपने मुस्लिम मतदाताओं की तरफ ध्यान दिया। सुबह से लेकर रातभर मुस्लिम मतदाताओं की तरफ ध्यान दिया गया। प्रभावी मुस्लिम समाज के लोगों ने भी सहयोग दिया। पिछले दिनों बाहर से आये मुस्लिम समाज के वाहनों ने भी जो माहौल बिगाड़ा था उसे कमजोर करने के लिये आज कांग्रेस ने सारे प्रयास किये हैं।

      बैठकों के बाद सफलता की मुस्कान भी देखी गई।

      26 नवम्बर को अंतिम क्षणों में एक बारगी फिर कांग्रेस ने मुस्लिम मतदाताओं की तरफ रुख करते हुए उन्हे समझाया। वर्षों की परम्परा और साथ की बातें हुई। पूर्व में दिये गये सहयोग का स्मरण दिलाया गया, बाहर से आये प्रभावी लोगों ने तथा समाज के ही प्रमुख लोगों ने बहुत दमदारी से कांग्रेस के पक्ष में बातें की तथा  अपनी ताकत को संगठित करने के लिये सबको उत्साहित किया गया। काफी देर तक और अनेक स्थानों पर समझाईश दी गई और हर बैठक में यह कहा गया कि समाज की एकता और ताकत दिखाना आवश्यक है। जानकारों के अनुसार लगभग हर प्रयास के बाद बिखरी मुस्कान ने यह इंगित किया कहीं कुछ कांग्रेस ने अपना काम कर लिया है।

      ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेषकर अहमदपुर सेक्टर में कांग्रेसियों की सक्रियता की खबरें और वहाँ घटित अनेक घटनाएं आज नगर में आती रहीं।

 

दो उम्मीदवारों के खिलाफ एफ.आई.आर.

      सीहोर 26 नवम्बर। विधान सभा क्षेत्र 156-बुधनी से चुनाव लड़ रहे दो अभ्यर्थियों द्वारा व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किए जाने के चलते उनके खिलाफ एफ.आई. आर.दर्ज करा दी गई।

      वरिष्ठ लेखाधिकारी एवं प्रभारी अधिकारी (आय-व्यय लेखा) ने बताया है कि विधान सभा क्षेत्र 156-बुधनी में गोंडवाना मुक्ति सेना की ओर से चुनाव लड रहे अभ्यर्थी सुमेर सिंह और निर्दलीय प्रत्याशी अब्दुल जब्बार के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई है। प्रभारी अधिकारी आय-व्यय लेखा ने बताया कि इन दोनों प्रत्याशी द्वारा निर्धारित दिनांक 14 नवम्बर एवं 18 नवम्बर,08 पर व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया था जिसके चलते उन्हें नियमानुसार नोटिस जारी किए गए। नोटिस जारी होने के बावजूद भी इनके द्वारा व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं करने पर रिटर्निंग ऑफीसर द्वारा दिए गए निर्देश के मुताबिक एफ. आई.  आर. दर्ज करा दी गई।

संचार प्रणाली से जुड़ा होगा हर मतदान केन्द्र

सीहोर : 26 नवम्बर।  कलेक्टर  एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री डी.पी.आहूजा ने कहा है कि इस बार के चुनाव में हर मतदान केन्द्र संचार प्रणाली से जुड़ा होगा और यह संचार प्रणाली मतदान के दौरान पूरी तरह सजग होकर कार्य करेगी।

      कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री डी.पी.आहूजा ने निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा निर्देशों के हवाले से बताया है कि जिन मतदान केन्द्राें में संचार की कोई अन्य व्यवस्था नहीं होगी वहां एक शासकीय सेवक को मतदान केन्द्र कक्ष और परिसर में मोबाइल फोन ले जाने तथा उसका उपयोग करने के लिए प्राधिकृत किया जायगा।

      यह शासकीय सेवक बी.एल. ओ. या पीठासीन अधिकारी हो सकता है। शासकीय सेवक को यह प्राधिकार रिटर्निंग आफीसर द्वारा केन्द्रीय प्रेक्षक की जानकारी में लाकर मतदान केन्द्रवार लिखित अनुमति के आधार पर दिया जायगा। यह प्राधिकार रिटर्निंग ऑफीसर द्वारा लिखित में जारी किया जायगा जो सामग्री वापस जमा करने तक संभाल कर रखना पडेगा। प्राधिकार पत्र में मोबाइल का नम्बर और उसके मालिक का विवरण लिखा जायगा।

       सामग्री वितरण के समय इस प्रकार प्राधिकृत व्यक्ति को संबंधित केन्द्रीय प्रेक्षकों, जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी, आर.ओ., ए.आर.ओ., सेक्टर मजिस्ट्रेट और श्री जोनल अधिकारी के मोबाइल एवं अन्य संपर्क नम्बर जरूरी तौर पर सूचीबध्द कराए जांएगे। मतदान केन्द्र के भीतर ऐसा मोबाइल सायलेन्ट मोड पर रखा जायगा। मतदान दल की रवानगी से लेकर सामग्री वापस जमा किए जाने तक प्राधिकृत व्यक्ति इस मोबाइल फोन से केवल तयशुदा  जरूरी जानकारियों सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए बात कर सकेगा। मोबाइल फोन का उपयोग केवल प्राधिकृत व्यक्ति के नियंत्रण में उसके द्वारा किया जायगा। किसी भी सूरत में इस मोबाइल फोन का उपयोग करके अन्य कॉल्स को कतई अटेण्ड नहीं किया जायगा। अवांछनीय सूचनाआें के आदान-प्रदान को अत्यन्त गंभीरता से लिया जायगा और इस अनियमितता पर कठोर कार्रवाही की जायगी।

Wednesday, November 26, 2008

कांग्रेस सुरक्षा, भाजपा तोड़फोड़ से बढ़त, जनशक्ति घात में लगी, क्या भाजपा-कांग्रेस 26 हजार मतों से करेंगे शुरुआत, तो जनशक्ति कहां से होगी शुरु

सीहोर। विधानसभा चुनाव 2008 के लिये मतदान करने का समय अब सन्निकट आ चुका है, लेकिन आज तलक स्थिति बजाये सुधरने के लगातार असमंजस पूर्ण होती जा रही है। कांग्रेस, भाजपा यदि यह दोनो पार्टियाँ ही आमने-सामने होती तो निश्चित रुप से कुछ और बात होती लेकिन इस बार चूंकि भाजपा की बहन जनशक्ति भी मैदान में आ गई है इसलिये स्थिति बहुत ही गुत्थम-गुत्थे की हो गई है। पिछले विधानसभा चुनाव में जब भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने थे तब भाजपा को 51 हजार और कांग्रेस को 40 हजार के लगभग मत मिले थे। लेकिन इस बार पिछले चुनाव के मुकाबले स्थिति एकदम भिन्न हो गई है। जहाँ पिछले चुनाव में कांग्रेस के विरोध की लहर थी वहीं इस चुनाव में भाजपा के विरोध की लहर है। जहाँ पिछले चुनाव में कांग्रेस के विरोध के साथ-साथ कांग्रेस प्रत्याशी सुरेन्द्र सिंह का विरोध और बगावती उम्मीद्वार जसपाल सिंह अरोरा के खड़े होने से स्थिति विषम हो गई वहीं भाजपा से किसी तरह की बगावत नहीं हुई थी बल्कि उमाश्री भारती की शक्ति भाजपा के लिये चट्टान का काम कर रही थी। इस दृष्टि से पिछले चुनाव को सामने रखकर विश्लेषण किया जाना कुछ मुश्किल लग रहा है। पिछले चुनाव और इस चुनाव में दो ही समान बातें नजर आ रही है एक तो विरोध की लहर इस बार भी है बस लहर भाजपा प्रत्याशी पर पलट गई है और दूसरा बगावती प्रत्याशी इस बार भी है लेकिन वह भाजपा का हो गया है।  फिर भी चुनावी रणनीति में कुशल भाजपा इन दोनो ही विपरीत स्थितियों में भी अपने प्रत्याशी रमेश सक्सेना के कारण कमजोर नहीं मानी जा रही है। कांग्रेस अंतिम समय तक आक्रामक शैली नहीं पकड़ पाई है।

शिवराज का मुखौटा

      ऐसी असमंजस पूर्ण स्थिति में आखिर कौन जीतेगा ? कौन हारेगा ? जनता क्या करेगी यह कहना सिर्फ खयाली बातें ही हो सकती है। अभी तक यह कहा जाना मुश्किल हो रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों का रुख और शहरी मतदाता किस और झुकेगा। भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिवराज सिंह का मुखौटा आगे कर दिया है और शिवराज के नाम पर वोट मांगे जा रहे हैं।

यह विरोधी हैं इसलिये पर वो कम नहीं...

      इस बार एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी के भी पक्ष में लहर नहीं दिख रही है, जनशक्ति के पक्ष में लहर इसलिये नजर आ रही है क्योंकि उनके साथ विद्रोही और नाराज लोगों का नया जमावड़ा है, नये लोग तो वैसे ही आकर्षण का केन्द्र होते हैं। हालांकि अखिलेश राय का आकर्षण किसी से छुपा नहीं है, पिछले दो-तीन दिनों में ऐसा कई बार हुआ कि अखलेश राय कहीं गये और उनके आसपास भीड़ जमा होते-होते बड़ा हुजूम लग गया। लेकिन जिस तरह से दो दिन पूर्व शाम के समय विधायक रमेश सक्सेना ने सभाएं ली थी उस समय भी भीड़ का बड़ा हुजूम भोपाली फाटक पर लग गया था। जनसम्पर्क के समय की भीड़ भी तीनों ही प्रत्याशियों की सामान्य नजर आई। कोई विशेष बात नहीं दिखी।

आंकड़ो की गणित में भाजपा-कांग्रेस बहुत आगे

      आकड़ो से समझा जाये तो भाजपा के पास मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग है जब रमेश सक्सेना निर्दलीय लड़े थे तब भी भाजपा के पास 26 हजार वोट गिरे थे और जब वह निर्दलीय लड़कर चुनाव जीते थे तब भी भाजपा 26 हजार वोट लाई थी  कुल मिलाकर भाजपा अपनी झोली में 26 हजार     वोट मानती है। भाजपा का मानना है कि हमारी शुरुआत 26 हजार से होगी।

      इसके बाद कांग्रेस की बात की जाये तो कांग्रेस भी एक-दो नहीं बल्कि मुस्लिम मतदाताओं के बड़े समूह को अपने पक्ष में मानते हुए चलती है और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या बढ़कर 27 हजार के लगभग हो चुकी है जिसमें से 22 हजार मत तो गिरते ही हैं के आधार पर 22 हजार मुस्लिम वोट से कांग्रेस की शुरुआत होगी और कांग्रेसी मतों के आधार को लेकर कम से कम आंका जाये तो भी 26 हजार के लगभग वोट तो कांग्रेस के पास भी सुरक्षित ही हैं।

      लेकिन उमाश्री भारती की जनशक्ति के पास कितने वोट हैं यह कहना बड़ा मुश्किल है। जनशक्ति की शुरुआत है इसलिये जनशक्ति की झोली में सिर्फ 1 ही वोट माना जा सकता है। हालांकि जनशक्ति ने हजारों लोगों को सदस्यता दिला दी है इसलिये कम से कम 2 से 4 हजार वोट जनशक्ति की झोली में माना भी जा सकता है। इस दृष्टि से जनशक्ति को सर्वाधिक मेहनत करने की जरुरत प्रतीत होती है।

जनशक्ति सिर्फ भाजपा पर केन्द्रित

      मतों के विभाजन की बात करें तो चाहे कांग्रेस का कोई बागी हो या भाजपा को बगावती। जब कभी वह लड़ता है तो यह सही कि लम्बे समय से जिस विचारधारा से वह जुड़ा होता है उसके साथ उस विचारधारा के लोग जुड़ते हैं लेकिन यह भी सही है कि दूसरी विचारधारा के लोगों को भी वह अपनी तरफ झुकाता है। लेकिन सीहोर में मामला कुछ पेचीदा है। जनशक्ति की उमाश्री भारती लगातार यह कह रही हैं कि हमारी भाजपा से बुराई नहीं है, लेकिन कांग्रेस को तो हम आने ही नहीं देंगे। वह यह भी कह रही है कि सारे भाजपाई अब हमारी असली भाजपा में आ जाओ, जनशक्ति के प्रत्याशी सन्नी महाजन ने भी जब कभी कुछ शब्द मुँह से बोले हैं तो सिर्फ भाजपा के खिलाफ ही वह बोले हैं, और भाजपाईयों को ही अपनी तरफ झुकाने का प्रयास किया है। इस दृष्टि से देखा जाये तो वह लगातार भाजपा को तोड़ने और उसके वोट बटोरने के प्रयास कर रहे हैं।

      भाजपा का वोट बैंक तोड़ना और पलट देना सबसे दुरुह कार्य माना जाता है, इसलिये ही उमाश्री भाजपा के खिलाफ नहीं बोलतीं बल्कि हर कार्यालय में, कार्यक्रम में, सभा स्थल पर बार-बार दीनदयाल जी से लेकर तरह-तरह के भाजपा के पुराने नेताओं के फोटो लगाये जाते हैं ताकि भाजपा का मतदाता उधर आकर्षित हो सके। कुल मिलाकर भाजपा के मतदाताओं को रिझाने का प्रयास जारी है।  हालांकि जनशक्ति का प्रत्याशी नया चेहरा नहीं होने से हर तरफ अपनी बढ़त बनायेगा, कांग्रेसियों को भी तोड़ेगा लेकिन वह भाजपा को ही नुकसान पहुँचाना चाहता है इसलिये उसे ही पहुँचायेगा ऐसा लगता है।

      जैसा की खुद विधायक रमेश सक्सेना ने निर्दलीय चुनाव जब लड़ा था तब जीतने के बाद भी उनका यही कहना था कि भाजपा के वोट उन्हे नहीं मिले बल्कि कांग्रेस के ही वोट मिले थे, जब दूसरी बार मुस्लिम मतदाताओं ने उन्हे मत दिया तो वह जीत गये। रमेश सक्सेना उस समय कांग्रेस के बागी कहलाते थे। और इस बार सन्नी भाजपा का बागी है।

क्या जनशक्ति कांग्रेस को नुकसान पहुँचा सकेगी ?

      एक और विचारणीय स्थिति है कि क्या कसम खाकर भाजपा के पीछे पड़ी जनशक्ति कांग्रेस को कभी नुकसान पहुँचा सकती है ? क्या सीहोर में जनशक्ति कांग्रेस को हानि पहुँचायेगी यह भी विचारणीय प्रश् है क्योंकि अभी तक जनशक्ति ने कांग्रेस के वोट बैंक को विशेष रुप से प्रभावित नहीं किया है, तो क्या जनशक्ति के पक्ष में बिना मेहनत के ही कांग्रेसी मत झुकेगा या नहीं झुकेगा। और यदि कांग्रेस का कुछ वोट उमाभारती की जनशक्ति के पक्ष में झुका तो कितना अधिक झुक पायेगा। कितने कांग्रेस के मत इनकी झोली में गिरेंगे।

अब बात सक्सेना की, उन्होने क्या-क्या किया

      इन सारी गणितों को छोड़कर सिर्फ हम राजनीति के धुरंधर और महापंडित माने जाने वाले रमेश सक्सेना की चुनावी गतिविधियों की तरफ ध्यान दें तो शायद कुछ बातें हमारे सामने आ सकें। एक तो इस बार सक्सेना ने भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठकों का क्रम बहुत प्रभावी ढंग से चलाया, संगठन में शक्ति है के सूत्र को उन्होने आत्मसात किया और संगठन में उर्जा भरने के लिये नामांकन दाखिले के पूर्व नहीं बल्कि 11 नवम्बर के बाद युध्द स्तर पर भिड़ गये। 4 दिन तक लगातार एक-एक मतदान केन्द्र के आसपास अपने कार्यकर्ताओं की छोटी-छोटी बैठकें उन्होने ली और उर्जा का संचार किया। नगर में जनसम्पर्क हो या माहौल बनाने के लिये सभाएं हो वह सब आम बातें हैं लेकिन कोलार के पानी की बात और नये उद्योग लगाने की बात के साथ सक्सेना ने सन्नी और स्वदेश पर प्रहार भी शुरु किये।

फिर कर दी तोड़-फोड़

      इसके बाद उन्होने सीधे कांग्रेस में तोड़-फोड़ करना शुरु कर दिया। मौलिक रुप से कांग्रेस के प्रमुख नेता माने जाने वाले जसपाल उनकी ही स्वीकृति से भाजपा में आये, उनका उपयोग भी शुरु हुआ, फिर एक मुस्लिम नेता आरिफ बेग को लाया गया, सतीश यादव भी आये, कांग्रेस में टूट-फूट के साथ ही विधायक ने खुलकर कहा कि कांग्रेस में आज भी उनके साथी हैं जो उनके लिये काम कर रहे हैं, इसके बाद उनकी तीसरी प्रमुख कार्यवाही यह रही कि उन्होने लम्बे समय बाद एक बार फिर मुस्लिम मतदाताओं की तरफ मुखरता से रुझान दिखाया और चाहे सराय चौराहा हो या फिर भोपाली फाटक, गाड़ी अड्डा यहाँ आमसभाएं लेकर मुस्लिम मतदाताओं से कहा कि विकास का सबसे बड़ा मतलब है कि क्षेत्र में साम्प्रदायिक तनाव या दंगे ना हो, और पिछले 15 साल में ऐसा नहीं हुआ है, इसके पूर्व ही उन्होने मुस्लिम क्षेत्रों के आसपास जसपाल को आगे रखकर कई कार्यालय भी खोले। कुल मिलाकर कांग्रेस की मुस्लिम मतदाताओं वाली शक्ति पर लगातार प्रहार हुए।

तो निष्कर्ष निकलता है कि कांग्रेस

को ही प्रमुख प्रतिद्वंदी माना सक्सेना ने

      अब हम सक्सेना की गतिविधियों को बिना यादा सोचे-विचारे देखें तो लगेगा कि उन्होने कहीं ना कहीं लगातार कांग्रेस को कमजोर करने का प्रयास किया, उसके मुस्लिम वोट बैंक को प्रभावित करने के सारे उपक्रम किये और माहौल बनाया। उन्होने सन्नी को महत्व नहीं दिया, वह लगातार कांग्रेस को कमजोर करते हुए नजर आये जैसे की उनका सामना सीधे-सीधे कांग्रेस से ही है। उन्होने संगठन को संभालने का भी प्रयास किया, इससे प्रतीत होता है कि कहीं वह कुछ आशंकित थे कि संगठन के कार्यकर्ता इधर-उधर ना हो इसलिये उन्होने हर कार्यकर्ता से खुलकर बातचीत की। सीधे-सीधे शब्दों में उन्होने अपनी सुरक्षा तो की ही बल्कि कांग्रेस को भी कमजोर किया।

      दूसरे शब्दों में इसी बात को कहें तो लगता है सन्नी के होने से उन्हे कहीं कांग्रेस की मजबूती नजर आई और उन्होने उस पर अपने ढंग से प्रहार भी किये।

      लेकिन कहीं भी उन्होने सन्नी को कमजोर करने के प्रयास नहीं किये, मतलब सक्सेना के लिये जनशक्ति का महत्व ही नहीं है। अगर वह चाहते तो जनशक्ति में भी बहुत कुछ कर सकते थे लेकिन उन्होने कुछ नहीं किया। कुल मिलाकर उन्होने अपने सामने कांग्रेस को लक्ष्य रखा और उसे कमजोर करने में ही उर्जा लगाई।

अब कांग्रेस की रणनीति समझें

      अब हम कांग्रेस द्वारा की गई गतिविधियों पर ध्यान दें तो अखलेश राय ने पहले ही दिन कांग्रेस के सारे लोगों को विरोध के बावजूद एक मंच पर लाकर 7 नवम्बर को आवेदन भरा। इसके बाद कांग्रेस में हुई टूट-फूट की तरफ उन्होने ध्यान नहीं दिया और फिर मुस्लिम मतदाताओं को जोड़ने के लिये कई बार मुस्लिम बस्तियों में कार्यक्रम हुए, राजबब्बर आये तो उनकी सभा भी सराय चौराहे पर कराई गई। कुल मिलाकर कांग्रेस ने किसी दूसरे पर ध्यान न देते हुए सिर्फ खुद के मतदाताओं की सुरक्षा पर ध्यान दिया। कांग्रेस किसी बड़े भाजपा नेता को अथवा जनशक्ति के किसी व्यक्ति को तोड़ने में भी सक्रिय नहीं दिखी, वह सिर्फ खुद को सुरक्षित करती नजर आई। कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना भी नहीं साधा, जनशक्ति के लिये भी वह कुछ नहीं बोली। वरना भाजपा के खिलाफ मुखर होकर कई कैसेटें चलवाई जा सकती थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया। एक पत्रकार वार्ता में अवश्य अखलेश स्वदेश राय ने विधायक कार्यकाल के संबंध में कई बातें मुखरता से कही। कुल मिलाकर कांग्रेस ने सिर्फ सुरक्षा के रुप में अपनी पूरी रणनीति बनाई और वह अंतिम दिन तक कायम रही।

      इस प्रकार विश्लेषणात्मक रुप से तीनों ही प्रत्याशियों की तीन बातें सामने आती है। सन्नी सिर्फ भाजपा के वोट खाने के प्रयास में है, भाजपा वोट की सुरक्षा के साथ ही प्रमुख रुप से कांग्रेस के वोट बैंक को तोड़ने के प्रयास में लगी है और कांग्रेस सिर्फ अपनी सुरक्षा में लगी हुई है। दोनो ही दृष्टि से भाजपा और कांग्रेस, जनशक्ति से वजनदार नजर आती है। क्योंकि भाजपा कांग्रेस के वोट तो अपने पक्ष में कर रही है और वोट बढ़ा रही है जबकि कांग्रेस सुरक्षा कर रही है मतलब उसे अलग से वोट नहीं चाहिये सिर्फ उसके वोट ही उसे मिल जायें वह इसकी फिक्र कर रही है। राजनीतिक पंडितों की भी यदि मानी जाये तो वह कांग्रेस को शुरु से मजबूत मानकर चल रहे हैं और भाजपा के दो फाड़ हो जाने से कमजोर आंक रहे हैं।

      इन सारे फेक्टरों को छोड़कर यदि वर्षो से पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं को आधार माने तो कांग्रेस का कार्यकर्ता भाजपा में तो जाने से रहा और क्या वह उमाश्री से अचानक प्रभावित हुआ होगा ऐसा भी होना मुश्किल लगता है, हाँ जनशक्ति के प्रत्याशी सन्नी के आकर्षण से अवश्य कांग्रेसी प्रभावित हुए होंगे इससे इंकार नहीं किया जा सकता।

      जनशक्ति के लिये सबसे वजनदार बात सिर्फ यही हो सकती है कि उसके पास भाजपा और कांग्रेस के अलावा वह मतदाता भी सामने आ गया है जो हमेशा सुप्त रहता है, जिसे किसी को वोट देने की इच्छा नहीं रहती है ऐसा भी एक बड़ा वर्ग होता है इसलिये नये लोग भी सन्नी के साथ नजर आ रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी के विरोध का लाभ तो सन्नी ले ही रहे हैं। कुल मिलाकर सन्नी दोनो तरफ हाथ मार रहे हैं भाजपा में बहुत यादा और कांग्रेस में थोड़ा-बहुत । इसलिये जनशक्ति भी ठीक-ठाक नजर आ रही है।

वो क्या करें जो असमंजस में हैं...

      कुल मिलाकर ऐसी असमंजस पूर्ण स्थिति बन गई है कि मतदाताओं को यह समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करें। मुख्यमंत्री को देखते हैं सब भूलकर सिर्फ कमल नजर आता है, विधायक जी को देखते हैं मन में कुछ नाराजगी नजर आती है और फिर विकल्प सन्नी नजर आता है, कांग्रेस को देखते हैं तो नायक अखलेश राय नजर आता है, जिससे कुछ अपेक्षाएं जुड़ी हैं यूं तो सन्नी से भी कई अपेक्षाएं हैं। अपेक्षाएं तो नये व्यक्ति से ही हो सकती है क्योंकि वह आजमाया हुआ नहीं होता...। कुल मिलाकर असमंजस पूर्ण स्थिति है।

जो हराना चाहते हैं वह भी परेशान है...क्या करें

      बेचारे सटोरियों को तो इस महिने भर में इतना तनाव हो गया कि उनके सिर के बाल पकने लगे हैं क्या करें ? कैसे लाभ उठायें ? कौन जीतेगा ? कौन हारेगा ? उनके पल्ले ही नहीं पड़ रही। कांग्रेस जीत के प्रति आश्वस्त नजर आती है, भाजपा 21 हजार से जीत बताती है और जनशक्ति की हुल्लड़ उनकी नींद छीन लेती है। करें तो क्या करें....? भाजपा को हराने वाले भी यह नहीं समझ पा रहे कि वह किधर जाये...सन्नी को वोट देकर उनका हल निकलेगा या कांग्रेस का हाथ मजबूत करेंगे तो भाजपा हारेगी। कांग्रेस से खफा लोग खुलकर भाजपा में आ गये हैं लेकिन भाजपा से खफा बेचारे जनशक्ति में जा रहे हैं।

          चूंकि निष्कर्ष हमें नहीं निकालना है इसलिये विश्लेषण करके हमने अवश्य देखा है। कांग्रेस सुरक्षा, भाजपा तोड़फोड़ से बढ़त और जनशक्ति भाजपा में घात करने में लगी है। मतदाता का रुख किस करवट बैठेगा कहना मुश्किल है। परिवर्तन चाहिये, शिवराज चाहिये या फिर उमाश्री के अपमान का बदला चाहिये.....सबकुछ असमंजस है।

मतदान का बहिष्कार नहीं, स्वर्णकार समाज की बैठक सम्पन्न

          आष्टा 25 नवम्बर (नि.प्र.)। श्री मेढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक में समाज के पूर्व अध्यक्ष रवि सोनी पाष्रद पर जिला प्रशासन द्वारा की गई जिलाबदर की कार्यवाही के विरोध स्वरूप काफी रोष समाज बंधुओं द्वारा प्रकट किया गया और दमदारी से इस मांग को उठाया गया कि एक समाज सेवी पर इस प्रकार की कार्यवाही को तुरंत वापय लिया जाना चाहिए।

      प्रशासन द्वारा की गई कार्यवाही को न्यायोचित नप बताते हुए आगामी समय में आंदोलन की चेतावनी भी दी गई। बैठक में समाज के कुछ सदस्यों द्वारा इस प्रकरण पर आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का भी सुझाव दिया गया परन्तु समाज की बैठक में इस निर्णय पर सर्वसम्मति नहीं दी गई। उक्त जानकारी समाज अध्यक्ष रामेश्वर सोनी एवं महामंत्री मनोज सोनी काका द्वारा सयुक्त रूप से दी गई है।

 

 

कई रैलियों को रोका जिलाधीश ने

      सीहोर 25 नवम्बर (नि.सं.)। आज जिला प्रशासन की उपस्थिति में जहाँ बड़ी संख्या में पुलिस दल से भरे वाहन नगर भर में घूमे वहीं जिलाधीश द्वारा आज भाजपा व जनशक्ति के चल रहे प्रचार को भी रुकवाया गया।

          जब आयोग के वाहनों का काफिला भोपाल फाटक की तरफ से जा रहा था तब यहीं जनशक्ति के अनेक कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए जा रहे थे। अचानक जिलाधीश ने वाहन रुकवाया, हार्न दिया फिर उतरकर सन्नी को बुलवाया।  उनसे कहा कि आपको स्वीकृति नहीं है, इतने लोगों को लेकर कैसे घूम रहे हैं दो-तीन लोग ही प्रचार करने जाईये। सबको यहाँ हटवा दिया गया। सारे लोग स्तब्ध रह गये।

      ठीक ऐसा ही घटनाक्रम लुनिया चौराहे पर हुआ जब यहाँ भाजपा प्रत्याशी को तौला जा रहा था और बड़ी संख्या में भीड़ उपस्थित थी। यहाँ से निकलते हुए वाहन के काफिला अचानक रुका और एक पार्षद को देखकर पुलिस से उस पर जारी वारंट की तामिली के प्रयास किये साथ ही कुछ अन्य धाराएं लगाने की बात हुई तो खुद विधायक श्री सक्सेना ने बात कही कि यह हमारी पार्टी का प्रमुख कार्यकर्ता है हमारा निवेदन है कि चुनाव को दो दिन शेष है उसके बाद जो कार्यवाही करना कीजिये। इस पर पार्षद को कोतवाली ले जाया गया फिर बाद में छोड़ दिया गया।

      इसके बाद स्वदेश नगर में जब जसपाल अरोरा की उपस्थिति में सक्सेना का जनसम्पर्क चल रहा था तब भी जिला प्रशासन का काफिला पहुँचा और कलेक्टर ने दोनो प्रमुखों को बुलवाया और कहा कि आपको जब स्वीकृति नहीं है तो आप यहाँ कैसे जनसम्पर्क कर रहे हैं।

      यदि करना ही है तो फिर दो-तीन लोग मात्र जाईये, भीड़ हटाईये। इसके बाद यहाँ से भी भीड़ हटा दी गई।

 

 

राजब्बर नहीं आये उत्साही कांग्रेसी मायूस हुए

      आष्टा 25 नवम्बर (नि.प्र.)। आज चारबत्ती चौक पर कांग्रेस प्रत्याशी गोपालसिंह इंजीनियर के समर्थन में एक आमसभा को सम्बोधित करने के लिए फिल्म स्टार कांग्रेस के नेता राजब्बर आने वाले थे घंटो उनका इंतजार कांग्रेस के नेता एवं जनता करती रही लेकिन वे नहीं आये।

      उनके इंतजार में सभा को कांग्रेस नेता कैलाश परमार, गोपालसिंह इंजीनियर, रतनसिंह ठाकुर, राजमल सेठी, लक्ष्मी नारायण वर्मा, शिवनारायण पटेल, ओंकारसिंह ठाकुर, भैया मिया, सोभालसिंह भाटी, फूलसिंह मालवीय, प्रहलादसिंह, दशरथसिंह राजपूत, गगन पटेल, गुलाब बाई ठाकुर, अजीज अंसारी, घनश्याम जांगड़ा, पप्पू मेहतवाड़ा, दिलीप शर्मा, जितेन्द्र शोभाखेड़ी, महेन्द्रसिंह, जितेन्द्र शास्त्री, रविन्द्र गुप्ता आदि ने सम्बोधित किया इसी बीच जब खबर आई की राज बब्बर नहीं आ रहे है तो जिला कांग्रेस अध्यक्ष कैलाश परमार ने कहा कि हेलिकाफ्टर में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण राजब्बर हमारे बीच में उपस्थित नहीं हो पाये है राजब्बर के नहीं आने की सूचना के बाद उपस्थित जनता निरास लौट गई वहीं कांग्रेस के नेता भी धीरे-धीरे चलते बने।

 

 

मारपीट कर जान से मारने की धमकी

      आष्टा 25 नवम्बर (नि.सं.)। आष्टा थाना अन्तर्गत ग्राम मोलूखेड़ी में ग्राम के ही एक व्यक्ति ने घर के सामने रहने वाले व्यक्ति को रोककर गंदी-गंदी गालियाँ दी तथा जान से मारने की धमकी दी।

      पुलिस सूत्रों के अनुसार जटाल सिंह पुत्र राम प्रसाद मेवाड़ा ने शिकायत दर्ज कराई कि उसके घर के सामने रहने वाले आरोपी लालजी राम आत्मज खुशीलाल मेवाड़ा ने रोककर गंदी-गंदी गालियाँ देकर मारपीट की तथा जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया। 

 

 

एक विद्युत मोटर सहित 4 मवेशी चोरी

      आष्टा 25 नवम्बर (नि.सं.)। ग्राम पदमसी में एक ग्रामीण के कुएं वाले खेत के ग्वाड़े से अज्ञात चोर एक विद्युत मोटर, डोरी व चार मवेशी चुराकर ले गये। पुलिस ने ग्रामीण की शिकायत पर चोरी का प्रकरण दर्ज किया।

      पुलिस सूत्रों के अनुसार पदमसी निवासी मोहन सिंह आत्मज नरबत सिंह मेवाड़ा के कुएं वाले खेत पर से रात्रि 10 से 12 बजे के बीच अज्ञात चोर दो भैंस, दो पाड़ी, एक विद्युत मोटर तथा एक हजार फिट विद्युत डोरी कुल कीमति चालीस हजार रुपये की चुराकर ले गये।

      मोहन सिंह अपने खेत पर से रात्रि 10 बजे घर गया और 12 बजे दो घंटे बाद ही पानी फेरने के लिये खेत पर आया तो न तो मोटर थी कुएं पर और समीप के ग्वाड़े से भैंस और दोनो वाड़ियाँ भी नदारत थीं। किसी वाहन से ही चोर मवेशियों को और मोटर को संभवत: ले गये हैं।