Monday, October 6, 2008
गरबा महोत्सव में संदलपुर के दल ने दर्शकों का मन मोहा
उक्त प्रतियोगिता में संदलपुर एवं आष्टा के गरबा दल ने रंगारंग गरबा प्रस्तुत कर एक और जहाँ माता की भक्ति की वहीं रंग बिरंगी राजस्थानी एवं गुजराती गरबा ड्रेस तथा गरबा की प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। गरबा प्रति. सम्पन्न होने के बाद पुरुस्कारों की घोषणा हुई। जिसमें संदलपुर के प्रसिध्द दल को युवा नेता घनश्याम जांगड़ा, धर्मेन्द्र गौतम, ग्रीन फील्ड हायर सेकेण्डरी स्कूल के सौजन्य से 11111 रुपये की राशि भेंट की। द्वितीय पुरुस्कार संदलपुर की ही द्वितीय टीम को विश्राम सिंह ठाकुर ने सौजन्य भेंट 5555 रुपये का नगद पुरुस्कार भेंट की। तृतीय पुरुस्कार विजेन्द्र ठाकुर एसीसी सीमेंट की और से 3333 रुपये व ट्राफी प्रदान की। उक्त गरबा प्रति. में गरबा दल के अलावा आष्टा की दो उभरती प्रतिभाओं वैभव कल्याणी एवं लविना ने शानदार प्रस्तुति दी। इसके पश्चात शास्त्रीय संगीत पर दिव्या उपाध्याय ने शानदार प्रस्तुति प्रस्तुत कर दर्शकों का वाहवाही लूटी। कार्यक्रम समापन पर मुख्य अतिथि नगर निरीक्षक हनुमंत सिंह, पत्रकार सुधीर पाठक, प्रकाश पोरवाल, नरेन्द्र गंगवाल, संजय जैन, सुशील संचेती, बाबु पांचाल आदि का विवेकानंद यूथ क्लब की और से अध्यक्ष रोहित बेदमूथा, जितेन्द्र शोभाखेड़ी, अमजद पठान, पुनीत तिवारी आदि ने स्वागत किया। कार्यक्रम संचालन अमित तिवारी कपड़ा व्यापारी संघ अध्यक्ष ने किया।
करंट से एक मृत एक घायल, कुएं में डूबने से मृत्यु
मारुती की टक्कर से दो घायल
आष्टा 5 अक्टूबर। देवास से माताजी के दर्शन कर सीहोर का एक परिवार अपनी मारुति क्रमांक एमपी 04 बीए 2614 में देवास से सीहोर आ रहे थे तभी विपरीत दिशा से आ रही पगारिया घाटी पर एक मोटर साईकिल एमपी 37 बीए 0321 को उक्त मारुती से टक्कर हो गई। जिसमें मोटर साईकिल सवार उमराव सिंह निवासी बड़लिया बरामद एवं लखन घायल हो गये। इन्हे इलाज के लिये भर्ती किया है।
करंट से एक मृत एक घायल
आष्टा 5 अक्टूबर (नि.सं.)। आज शाम को ग्राम भटोनी में तेज हवा के साथ पानी बरसा। तेज हवाएं चलने के कारण करंट फैल गया। विद्युत तार में करंट फैलने से खेत से आ रही एक महिला सुमन बाई पत्नि स्व. बापूलाल परमार उम्र 55 वर्ष ग्राम भटोनी की करंट से मृत्यु हो गई। इसे बचाने गये एक युवक कांतिलाल पुत्र दिलीप सिंह उम्र 20 वर्ष गंभीर रुप से घायल हो गया जो आष्टा में इलाज के लिये भर्ती है।
महिषासुर मर्दिनी माता के कई चमत्कार हैं...
ऐसा कहा जाता है कि जहां पर आज जावर नगर की संरचना है यहां पर घना जंगल हुआ करता था पेड़ों की झुरमुट तथा जंगली जानवरों का भय इस भू-भाग की विशेषता थी अनेकानेक वर्षो पूर्व सेंधव समाज के लोग बैलगाड़ियों से राहगीरों की तरह यहां से गूजरे तो रात्रि का अधिक समय होने के कारण यहां पर रात्रि विश्राम के लिये रुके ये मध्यरात्रि को सेंधव समाज के इस काफिले के पटेल की स्वप् में माता के दर्शन दिये यहां पर मंदिर का निर्माण करो तथा यहां पर निवास कर गांव बस लो सुबह जब यह बात उन्होंने अपने काफिले के साथियों को बताई तो सभी ने यहां पर रुककर गांव बयाने का निर्णय लिया तथा जावर नगर यहां पर बस गया पेड़ों के झुरमुट के बीच से माता महिषासुर मर्दिनी की अदभुत तथा चमत्कारिक प्रतिमा भी वहां से मिली थी मंदिर का निर्माण हुआ तथा खुदाई में मिले पत्थरों की नक्काशी तथा पाषाण कला के अवशेष इस मंदिर के पौराणिक होने के किस्से स्वयं बयां कर रहे थे। तभी से जावर नगर बस गया तथा धीरे-धीरे यहां माता के भक्त आकर निवासित होने लगे आज वर्तमान समय में माँ महिषासुर मर्दिनी का भव्य मंदिर यहां पर बना दिया गया है कलात्मक मंदिर भव्य तथा आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। मंदिर में उमड़ती भक्तों की भीड़ तथा पूरी होती मनोकामनाऐं भक्तों को स्वयं माता के दरबार में आकर्षित कर लेती है। एक वरिष्ठ साहित्यकार के मतानुसार चीन के धर्मगुरु फाययान जब भारत यात्रा पर आये थे तो उन्होंने अपनी भारत माता की विर्णत किताब में जावर नगर के प्राचीन इतिहास का वर्णन भी किया है क्योंकि वह भी दो दिवस तक जावर में रुके थे तथा यहां के प्राचीन मंदिरों तथा नगर के भौगोलिक वातावरण का अध्ययन भी किया गया।
खैर यहां मंदिर में स्थित मां महिषासुर मर्दिनी मंदिर की अद्भुत प्रतिमा दिन में तीन, पहर में तीन रूपों को धारण करती है सुबह मां का वाल्यरूप, दोपहर में रोद्र तथा ढलती शाम को सौम्य रूप के दर्शन होते है। नवरात्रि में माता के विशेष श्रृंगार किये जाते है तथा आकर्षक पोशाकों तथा वेशभूषा से श्रृंगारित किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यहां पर वर्षो पूर्व ग्राम कुंडिया के दरबार प्रतिवर्ष पाड़े की बलि चढ़ाते थे परन्तु समय के परिवर्तन के बाद उन्होंने यह बलि बंद कर दी आज भी नवरात्रि की नवमी को मध्य रात्रि में अनेक बकरों की बलि यहां पर चढ़ाकर लोग अपनी-अपनी मन्नते र्पूण् करते है। इस दिन प्रशासन विशेष रूप से चौकस रहकर बलि प्रथा के कार्य को पूर्ण करवाता है।
जावर नगर तथा क्षेत्र पूर्णतया माता के चमत्कार तथा शक्ति पर पूर्ण विश्वास करते है माता रानी नगर तथा क्षेत्र की स्वयं रक्षा करते है। प्राकृतिक सक्कट हो या अवर्षा की स्थिति तथा कोई भी आकस्मिक संकट हो लोग मां महिषासुर मर्दिनी की चरणों में भावनात्मक समर्पण अर्पित कर आस्था के पुष्प चढ़ातेत है तो संकट का त्वरित निराकरण हो जाता है तथा मां अपने चमत्कार से प्रत्येक संकट हरण कर लेती है। माता के अद्भुत चमत्कारों के सैकड़ों किस्से आज भी नगर में प्रचलित है।
खैर नवरात्रि में माता के दरबार में भक्तों की काफी भीड़ है तथा लोग मां के दर्शनों का लाभ उठाकर मन्नते मानते है तथा श्रद्धा पुष्प समर्पित कर माता की प्रतिदिन की आरती में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते है। जावर नगर यूं भी आस्था की नगरी है हमेशा माता के दरबार में कन्या भोजन दीपदान सहित अनेक आयोजन समय-सय पर होते रहते है।
बहादुर शाह जफर के जमाने का ईद उल जुहा
'तारीखे-उरुजे-सल्तनते इंग्लीशिया' नामक ग्रन्थ के पृष्ठ 688 पर स्पष्ट रूप से अंकित है कि सुप्रसिद्ध विद्वान् मौलाना फजले-हक खैराबादी ने बहादुरशाह के प्रशासन के लिये जो संविधान तैयार तैयार किया था, उसकी प्रथम धारा यही थी कि बादशाह के राज्य में कहीं भी गाय जिबह न की जाय। इसी तरह उस काल के सुप्रसिद्ध खबरनवीस जीवनलाल ने अपनी बहुचर्चित डायरी में दिनांक 28 जुलाई सन् 1857 ई. के अन्तर्गत लिखा था-बादशाह ने हुक्म दिया कि जनरल तथा फौज के दूसरे आला अफसरान के पास हिदायती खत भेजे जायं कि ईद के मौके पर कोई गाय जिबह न की जाय और खबरदार किया कि अगर कोई मुसलमान ऐसा करते हुए पाया जाता है तो उसे तोप से उड़ा दिया जाय। यही नहीं, किसी मुसलमान ने गायकी कुर्बानी देने के लिये अगर किसी को कोई मशवरा दिया तो उसे भी सजा-ए-मौत दी जाय।
जीवनलाल ने अपनी डायरी में आगे लिखा था-दरबार में मौजूद हकीम एहसानुल्लाह ने जब इस हुक्म की मुखालिफत करते हुए सलाह दी कि उसे शाया करने के पहले उसके बारे में मौलवी-मुल्लाओं से सलाह-मशवरा करना जरूरी है तो बादशाह को बहुत गुस्सा आ गया और दरबार खत्म करते हुए वे फौरन अपने महल में चले गये।
'प्रेस लिस्ट ऑफ म्यूटिनी पेपर्स' 3 एस (31)-के अनुसार बादशाह के आदेश का पालन करते हुए उसी दिन अर्थात् दिनांक 28 जुलाई सन् 1857 ई. को सेनापति ने घोषणा की थी-बहादुर शहर कोतवाल को मालूम हो कि शाहंशाह के हुक्म के मुताबिक हर खासो आम को इत्तिला दी जाती है कि कोई भी मुसलमान शहर में ईद-उल-जुहा के अवसर पर गायकी कुर्बानी हरगिज न दें और अगर कोई इस हुक्म की उदूली करके गाय की जिबह करता हुआ पाया जाएगा तो उसे सजा-ए-मौत भुगतनी पड़ेगी।
इसी दिन जारी की गयी एक दूसरी घोषणा में कहा गया था-'खल्क खुदाका, मुल्क बादशाह का, हुक्म फौज के आला अफसर का'-जो कोई इस मौसम में बकरीद या उसके आगे-पीछे गाय, बैल, बछड़ा, बछड़ी, भैंस या भैंसा छिपाकर अपनी घर में जिबह और कुर्बानी करेगा, वह आदमी हुजूर शाहगंज का जानी दुश्मन समझा जायगा ओर उसको मौत की सजा होगी तथा जो कोई किसी पर इस बात की तोहमत एवं झूठा इल्जाम लगायेगा तो हुजूर की तरफ से उसकी जांच की जायगी, यानी अगर तोहमत का जुर्म साबित होगा तो उसको सजा होगी, नहीं तो जिसने उसकी तोहमत लगायी होगी उसको सजा मिलेगी और इसमें जिसका जुर्म एवं कुसूर साबित होगा, वह बेशक तोप से बांधकर उड़वा दिया जाएगा। ('प्रेस लिस्ट ऑफ म्यूटिनी पेपर्स',3 एस (31))
उसी पृष्ठ पर अन्यत्र अंकित है 'खल्क खुदाका, मुल्क बादशाह का, हुक्म फौज के आला अफसर का'-जो कोई ईद के आगे-पीछे, दिन में या रात में अथवा चुराकर घर में गाय, बैल, बछड़ा, बछड़ी, भैंस या भैंसा जिबह करेगा, वह बादशाह का दुश्मन होगा और तोपसे उड़ा दिया जायगा और जो शख्स झूठ कहेगा कि किसी ने चुराकर जिबह किया है तो उसकी रोकथाम की जायगी।
सेनापति द्वारा दिये गये इस आदेश का पालर करते हुए तत्कालीन शहर कोतवाल मुबारकशाह खां ने नगर भर में उसका ढिंढोरा पिटवा दिया था। उसके इस कृत्य पर सेनापति ने उसे पुन: लिखा था-बहादुर मुबारकशाह खां शहर कोतवाली को मालूम हो-क्योंकि तुमने कल शाही खत मिलते ही पूरे शहर में ढिंढोरा पिटवा दिया था और गाय की जिबह तथा कुर्बानी पर बंदिश लगा दी थी, इससे अब तुम्हें लिखा जाता है कि शहर के फाटकों पर इस तरह का मुकम्मल इंतजाम करो कि कोई भी गाय का व्यापारी आज से बकरीद के तीन दिन तक शहर में गाय या भैंस बेचने के लिये न ला सके और जिन मुसलमानों के घरों में गाय पली हों, उन्हें लेकर कोतवाली में बंधवा दिया जाय और गायों की पूरी हिफाजत की जाय, अगर कोई आदमी खुल्लमखुल्ला या छिपाकर गायों की अपने घरों में कुर्बानी करेगा तो यह बात उसकी मौत की वजह बनेगी।
ईद-उल-जुहा के अवसर पर गो वध के बारे में इस तरह का इंतजाम हो कि गाय बिकने के लिये भी शहर में न जाने पाये और पली हुई गायों का भी जिबह न हो। कोतवाली की ओर से इस बारे में जितनी भी कोशिशें की जायेंगी, वे हमारी खुशी की वजह बनेंगी, ज्यादा लिखने की जरुरत नहीं। ('प्रेस लिस्ट ऑफ म्यूटिनी पेपर्स, 61, संख्या 245')
इस पत्र के उत्तर में शहर कोतवाल ने हजारत जहांपनाह की सेवा में निवेदन करते हुए लिखा था-शहंशाहे-आलम की खिदमत में अर्ज है कि उन मुसलमानों के लिये जिनके घरो में गाय बंधी हैं, जो यह हुक्म दिया गया है कि उन्हें मंगवाकर ईद-उल-जुहा के खत्म होने तक कोतवाली में बंधवा दिया जाय, तो कोतवाली में इतनी जगह नहीं है कि चालीस-पचास गायें भी वहां खड़ी हो सकें। अगर शहर के सभी मुसलमानों के घरों की पली हुई गायें मंगायी जायेंगी तो उनके लिये जगह नहीं हो पायेगी। इस काम के लिये कोई बहुत बड़ी जगह या हाता होना चाहिये कि वहां वे छ:-सात दिनों तक बंद रहें, तो इस नमकख्वार की जानकारी में कोई ऐसी जगह नहीं है। गायों का मंगाया जाना उनके मालिकान के लिये भी ठीक या फायदेमंद नहीं साबित होगा, इसलिये कि अकलमंद और बेवकूद सभी तरह के लोग होते हैं। इसमें गाय के मालिकों की बगावत भी डर है और कहीं किसी दूसरी तरह की बात खड़ी न हो जाय। इसलिये अगर हुक्म हो तो थानेदार अपने इलाके के मुसलमानों से जिन-जिन लोगों के पाय गायें हों मुचलके पर ले लें। जैसा हुक्म होगा वैसा किया जायगा। परवरदिगार खुदा आप पर हमेशा मेहरबान रहे ओर सूरज-जैसी आपकी चमक में हरदम बढ़ोतरी करता रहे-फिदवी सैयिद मुबारकशाह खां कोतवाली, 7 जिलाहि अर्थात् दिनांक 26 जुलाई सन् 1857 ई. ('प्रेस लिस्ट ऑफ म्यूटिनी पेपर्स', 3 एस, संख्या 44)
शहर कोतवाल के इस पत्र के संदर्भ में उसे हिदायत देते हुए बादशाह की ओर से उसे सूचित किया गया था-उन मुसलमानों के, जिनके घरों में गायें हों, नाम लिख लिये जायं और फिर उनसे यह मुचलके लिखवा लिये जायें कि वे न खुल्लमखुल्ला ओर न चोरी से गोवध करेंगे। जिन घरों में गाये बंधी हों, वहां उसी तरह बंधी रहें। उन्हें तीन घरों में गाये बंधी हों, वहां उसी तरह बंधी रहें। उन्हें तीन दिन तक दाना-चारा उसी जगह पर खिलाया जाय और उन्हें चरने के लिये हरगिज न छोड़ा जाय। उनके मालिकान को अच्छी तरह यह बात समझ लेनी चाहिये कि तीन दिन बाद अगर एक भी गाय गायब मिली या अगर किसी ने छिपाकर उनकी कुर्बानी की तो वह सजा का हकदार होगा और जान से मार डाला जायगा। इस बात में बहुत खबरदार रहने की जरुरत है। क्योंकि कोतवाली में बंधवाने या उनके लिये अलग किसी जगह के इंतजाम करने की अब कोई जरुरत नहीं-दिनांक 26 जुलाई सन् 1857 ई.।
टिप्पणी-सभी थानेदारों को हिदायत दी गयी-दिनांक 30 जुलाई सन् 1857 ई.। स्मरणीय है कि यह सब पत्र-व्यहवहार मात्र एक दिन की अवधि सीमा में किया गया था। आज के युग में जब संचार-व्यवस्था लाख गुनी अच्छी हो गयी है, किसी भी सरकारी आदेश-निर्देश सम्बंधी उत्तर-प्रत्युत्तर में महीनों का समय लग जाता है और तब भी पूरी तरह उसका कार्यान्वयन नहीं हो पाता।
बहादुरशाह का राज्य धर्मनिरपेक्ष नहीं था, उसके आधारस्तम्भ हमेशा शरीयत के कानून रहे। इस तथ्य के बावजूद हिन्दू-विश्वास और मान्यताओं की रक्षा करने में वह जिस ईमानदारी के साथ निरन्तर सन्नद्ध रहा, उसकी आज के कथित धर्मनिरपेक्ष राजनेता कल्पना भी नहीं कर सकते। आज देश में हर रोज हजारों गाय और भैंसों की हत्या की जाती है, परंतु सरकार के बड़े से बड़े मंत्री में भी यह हिम्मत नहीं कि वह उसके विरोध में कोई कदम उठा सके।
संकीर्ण असाम्प्रदायिकता की अपेक्षा विराट् साम्पदायिकता अपने देश जन की भावनाओं का कितना ख्याल रख सकती है, यह बहादुरशाह के इन फरमानों से स्वत: सिद्ध है।
Sunday, October 5, 2008
आष्टा सिविल अस्पताल में भर्ती 3 कुपोषित बच्चे ग्रामीण क्षेत्रों में हालात अच्छे नही, 9 माह में 109 कुपोषण के शिकार बच्चे इलाज के लिये आये
आष्टा 4 अक्टूबर (सुशील संचेती)। म.प्र. कई क्षेत्र में कई क्षेत्र के बच्चे कुपोषण के शिकार है कई बच्चों की मृत्यु भी हुई है यूं तो आष्टा तहसील में ऐसे हालात नहीं है और न ही क्षेत्र में कही से कुपोषित बच्चों की मृत्यु की खबर है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में हालात अच्छे नहीं है क्योंकि 9 माह में आष्टा के सिविल अस्पताल में चल रहे पोषण पुनर्वास केन्द्र में 109 कुपोषित बच्चे इलाज के लिए आये इसमें से 5 गंभीर बच्चों की जिनमें खून की काफी कमी थी उच्च इलाज के लिए सीहोर रेफर किये गये। वैसे अब दावा किया जा रहा है कि अभी तक जितने भी बच्चे पोषण पुनर्वास केन्द्र सिविल अस्पताल आष्टा में आये वे सभी स्वस्थ है फुरसत ने आज आष्टा सिविल अस्पताल में चल रहे पोषण पुनर्वास केन्द्र का भ्रमण किया तो पाया कि उक्त पुनर्वास केन्द्र में अभी भी तीन कुपोषित बच्चों का इलाज यहां चल रहा है ।
जब इस सम्बंध में केन्द्र के प्रभारी डा. ए.के. जैन से चर्चा की तो उन्होंने बताया की वर्तमान में आष्टा के उक्त केन्द्र में तीन बच्चे इलाज हेतु भर्ती है इसमें एक बालक जिसका नाम हरिओम आ. नारायण सिंह निवासी भंवरीकलां है जो कि ग्रेड-4 में आता है इसकी उम्र साढ़े छै: माह है तथा इसका वजन 3 किलो 700 गा्रम है। जबकि इसका वजन उम्र के हिसाब से 4.500 ग्राम से ऊपर होना चाहिए था का इलाज चल रहा है। दूसरी बालिका है जिसका नाम पूनम आत्मज मुकेश निवासी सेमनरी रोड आष्टा है इसकी उम्र 1 साल 4 माह है इस उम्र में इसका वजन 6.500 ग्राम से अधिक होना चाहिये लेकिन इसका वजन 6.400 ग्राम है इसका भी इलाज जारी है तीसरी बालिका है जिसका नाम राधा आत्मज हरिचरण बजरंग कालोनी आष्टा की है इसकी उम्र 9 माह है उम्र के हिसाब से इसका वजन 5.500 गाम से ऊपर होना चाहिये लेकिन इसका वजन 5.300 ग्राम है इसका भी इलाज चल रहा है पूनम और राधा को ग्रेड-3 के रूप में मारकर उचित इलाज कर पोषण दिलाया जा रहा है डा. श्री जैन ने फुरसत को बताया कि जो कुपोषित बच्चे यहां आते है भर्ती होते ही उन्हें 200 रुपये एवं उनकी माता को 65 रुपये रोज के हिसाब से राशि दी जाती है भोजन, दवा सब कुछ नि:शुल्क दिया जाता है तथा 14 दिन तक इन्हें भर्ती रखा जाता है उसके बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर छुट्टी दे दी जाती है तथा समय समय पर पुन: जांच हेतू बुलाया जाता है। अभी तक जितने भी कुपोषित बच्चें यहां इलाज कराकर गये उनका स्वास्थ्य सुधरा है और वे ठीक है। अभी तक 14 बेज पूरे हो चुके है इलाज का वर्तमान में 15 वां वेच चल रहा है लेकिन सूत्र बताते हे कि ग्रामीण क्षेत्रों में खास कर आदिवासी पिछड़े इलाकों में हालात अच्छे नहीं है कई जगहों पर आंगनबाड़ी केन्द्रों की भी शिकायते यह आती है कि वहां ऐसे बच्चों के प्रति कोई खास-ध्यान नहीं दिया जाता है कई जगहों पर आंगनबाड़ी कब खुलती है कब बंद हो जाती है ग्रामीणों को मालूम ही नहीं पड़ता है पहले आंगनबाड़ी केन्द्र ग्रामों में ही चलते थे कुछ समय से आष्टा में भी आंगनबाड़ी चालू हुई है। फुरसत को जो जानकारी मिली उसके अनुसार आष्टा सिविल अस्पताल में चल रहे पोषण पुनर्वास केन्द्र में 25 फरवरी 08 से 3 अक्टूबर 08 तक जो कुपोषित बच्चों के इलाज हेतु पहुंच उसमें अधिक बच्चे आष्टा तहसील के ग्राम बागैर, जगमालपुर, इन्द्रा कालोनी आष्टा, रिछारिया, रूपाहेड़ा, गुराडिया, बडोदिया, गाडरी खामखेड़ा, बैजनाथ ग्राम से आये है मतलब यह की इन क्षेत्रों में ऐसे बच्चों की संख्या पाई गई है महिला एवं बाल विकास विभाग ने ऐसे ग्रामों के लिए कुपोषित बच्चों के आने के बाद क्या किया। यह भी जांच का विषय है आज कुछ मुद्दों पर फुरसत ने महिला बाल विकास विभाग की प्रमुख से चर्चा करने के लिए सम्पर्क किया लेकिन वे नहीं मिल पायीं। फुरसत ने आज जब एक भर्ती कुपोषित बालक हरिओम की माता जो बाहर ही खड़ी थी जिनका नाम ममता बाई है से जब पोषण पुर्नवास केन्द्र में कैसी व्यवस्था है बच्चों को क्या-क्या दिया जा रहा है आदि के बारे में चर्चा की तो वे बच्चों के इलाज से संतुष्ट नजर आई वैसे फुरसत ने जब उक्त केन्द्र के कक्ष का निरीक्षण किया तो लगा की पूरे अस्पताल में उक्त कक्ष ही साफ और व्यवस्थित रहता है न कोई गंदगी है और ना ही पलंग पर पीछे गादी, चद्दर, कम्बल खराब है सब कुछ व्यवस्थित नजर आया।
क्यों होते है बच्चे कुपोषित :- आज जब इस सम्बन्ध में फुरसत ने डा. ए.के. जैन से चर्चा की कि आखिर ये छोटे-छोटे बच्चे कुपोषण का शिकार क्यों कैसे हो जाते है जैन ने बताया की इसके प्रमुख कारण है अशिक्षा, गरीबी तथा बच्चों के परिजनों की खराब आर्थिक स्थिति कई बार लापरवाही भी इसका उचित स्थान पर इन्हें इलाज के लिए ना लाकर गांव में ही नीम हकीमों से इलाज कराते रहते है जब स्थिति बिगड़ जाती है तब वे अस्पताल पहुंचते है इसके लिए आज भी ग्राम-ग्राम में जागरूकता जगाने की जरूरत है। 274 आंगनबाड़ी है :- फुरसत को मिली जानकारी के अनुसार आष्टा तहसील में कुल 274 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित है इसमें से 20 आंगनबाड़ी केन्द्र आष्टा नजर में चल रहे है। पहले आंगनबाड़ी सुबह 8 से 12 बजे तक खुलती थी अब समय बदल कर 9 से 1 बजे कर दिया गया है।
परियोजना कार्यालय ने ये कहा :- आज इस सम्बंध में फुरसत ने परियोजना कार्यालय में कुपोषित बच्चों के बारे में जानकारी चाही गई तो वहां से बताया कि आष्टा तहसील में 223 अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित किया गया है ये सभी ग्रेड 3 एवं 4 के है 94 को भर्ती कराकर उनका ग्रेड बड़ाया गया है। 2-3 बच्चे ऐसे थे जिनकी ग्रेड नहीं बड़ी उनके माता-पिता को उचित निर्देश दिए गये। शीघ्र मुस्कान प्रोजेक्ट के तहत आष्टा कोठरी जावर अस्पताल में स्वास्थ्य शिविर लगाये जा रहे है।
क्या देते है बच्चों को :- फुरसत को मिली जानकारी के अनुसार आंगनबाड़ी में जो बच्चे आते है उन्हें ग्रामीण क्षेत्र में दलिया, मुरमुरे, पंजेरी, हलवा, उपमा बदल-बदल कर दिया जाता है वही शहरी क्षेत्र की आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों को पंजेरी, ब्रेड, मुरमुरे दिये जाते है जब से ब्रेड देना शुरु किया है शहरी क्षेत्र की आंगनबाड़ियों में बच्चों की संख्या में पहले से इजाफा हुआ है।
अनजान व्यक्ति को किरायेदार नहीं रखे, वरना कार्यवाही होगी
जारी आदेश के तहत अब सीहोर अनुभाग में कोई भी मकान मालिक और दुकानदार अपने मकान अथवा दुकान पर बिना पुलिस सत्यापन (बेरीफिकेशन) अथवा थाने में सूचना दिए बगैर किसी भी व्यक्ति को अपने मकान में किराये से और अपनी दुकान में कार्य पर नही रख सकेगा। यदि किसी भी व्यक्ति द्वारा इस आदेश का उगंघन किया जाता है तो उनके विरूध्द नियमानुसार दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी।
गौरतलब है कि देश और प्रदेश में बढ रही आतंकवाद की घटनाओं के मद्देनजर जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन ने अनुभाग सीहोर में ऐसे मकान मालिकों एवं दुकानदारों को आगाह किया जाना आवश्यक समझा है कि वे अनजान व्यक्ति को किरायेदार न बनाए और न ही दुकान पर रखे जिससे आपराधिक एवं आतंकी गतिविधियों में सम्मिलित होने के लिए आतंकवादी फर्जी नामों के सहारे विभिन्न स्थानों पर शरण नही ले पाएं। ऐसी परिस्थितियों मे निवासरत किरायेदारों एवं घरेलू अथवा दुकानों में कार्य करने वाले नौकरों के संबंध में पूर्ण विवरण अपने क्षेत्र के थाने को प्रस्तुत करें ताकि उनके आचार एवं व्यवहार का परिचय किया जा सके।
थ्रेसर में सोयाबीन निकालने वक्त युवक के फंसने से मृत्यु
हादसे में बालक घायल
सीहोर 4 अक्टूबर (नि.सं.) कोतवाली थाना अन्तर्गत हुये एक सड़क हादसे में एक 4 वर्षीय बालक घायल हो गया। जिसे उपचार हेतु जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कोतवाली थाना अन्तर्गत स्थानीय लाल मस्जिद निवासी सुधीर सुन्दरानी का 4 वर्षीय पुत्र रोड क्रास कर रहा था कि स्कूल के चालक ने वाहन को तेजगति एवं लापरवाही पूर्वक चलाकर अंश को टक्कर मारकर घायल कर दिया जिसे प्राथमिक उपचार हेतु जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया।
फोटो ग्राफर को देख कर्मचारी छत पर चढ़ा
कोटा कम करने से डीजल का संकट किसान हो रहा है परेशान, कैसे खेत करेगा तैयार
खेतों में खड़ा सोयाबीन कट गया है उसे निकालने के लिए बाहर से जो बड़ी-बड़ी हडम्बा मशीने आई है उन्हें डीजल नहीं मिलने से वे मंहगा डीजल ला रहे है और सोयाबीन निकालने का प्रति घंटे का शुल्क 300 से बड़कर 350 -400 रुपये कर दिया है। सोयाबीन कटने के बाद किसान गीते खेत को हाथ से नहीं जाने देना चाहता है तुरंत बख्खर फैर कर बोनी करने की इच्छा रखता है लेकिन उसे डीजल नहीं मिल रहा है जिससे वो परेशान है कडकड़ाती धूप के कारण गीले खेत सुखते जा रहे है वही इस बार बरसात कम होने से जल स्त्रोत भी साथ देने की स्थिति में नहीं है की वो पलेवा कर ले और फिर बोवनी क्षेत्र के किसान डीजल नहीं मिलने से परेशान है वही जो डीजल आता है उसे बड़े-बड़े लोग भरवा लेते है और छोटा किसान वंचित रह जाता है स्थानीय एवं जिला प्रशासन को इस और ध्यान देना चाहिये।
कोटा कम करने से डीजल का संकट किसान हो रहा है परेशान, कैसे खेत करेगा तैयार
खेतों में खड़ा सोयाबीन कट गया है उसे निकालने के लिए बाहर से जो बड़ी-बड़ी हडम्बा मशीने आई है उन्हें डीजल नहीं मिलने से वे मंहगा डीजल ला रहे है और सोयाबीन निकालने का प्रति घंटे का शुल्क 300 से बड़कर 350 -400 रुपये कर दिया है। सोयाबीन कटने के बाद किसान गीते खेत को हाथ से नहीं जाने देना चाहता है तुरंत बख्खर फैर कर बोनी करने की इच्छा रखता है लेकिन उसे डीजल नहीं मिल रहा है जिससे वो परेशान है कडकड़ाती धूप के कारण गीले खेत सुखते जा रहे है वही इस बार बरसात कम होने से जल स्त्रोत भी साथ देने की स्थिति में नहीं है की वो पलेवा कर ले और फिर बोवनी क्षेत्र के किसान डीजल नहीं मिलने से परेशान है वही जो डीजल आता है उसे बड़े-बड़े लोग भरवा लेते है और छोटा किसान वंचित रह जाता है स्थानीय एवं जिला प्रशासन को इस और ध्यान देना चाहिये।
अवकाश पर प्रतिबंध
जारी आदेश के मुताबिक विधानसभा चुनाव से संबंधित कार्य के मद्देनजर जिले में कार्यरत अधिकारी एवं कर्मचारी के किसी भी प्रकार के अवकाश पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया गया है। निर्वाचन कार्य संपन्न होने तक समस्त प्रकार के अवकाश कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी की अनुमति से ही स्वीकृत किए जांएगे। समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी अपने निर्धारित मुख्यालय पर उपस्थित रहेंगे। सार्वजनिक अवकाशों में भी कार्यालय खुले रहेंगे। शासकीय कार्य से मुख्यालय से बाहर जाना है तो उसकी अनुमति भी कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी सीहोर से प्राप्त की जायगी।
धूम्रपान पूर्णत: वर्जित
इसी तारतम्य में आज जिला चिकित्सालय में तीन व्यक्ति ध्रूमपान करते पाए गए जिनसे जिला चिकित्सालय प्रशासन द्वारा जुर्माना किया गया। जिन तीन लोगों पर जुर्माना किया गया उनमें ग्राम गोलूखेड़ी के रामसिंह आत्मज नन्नूसिंह, ग्राम गुड़भेला के प्रहलाद आत्मज मंदरूप और ग्राम चायनी के आजाद खां आत्मज हिम्मत खां शामिल है। जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक ने जिला चिकित्सालय में आने वाले मरीजों एवं उनके अटेण्डेटों को समझाईश दी है कि वे जिला चिकित्सालय के वार्डो एवं परिसरों में ध्रूमपान न करें अन्यथा उन्हें जुर्माना देना पड़ेगा।
अवैध मत चलाना...
सम्बंधित वितरण केन्द्र पर कनेक्षन प्राप्त करने के लिए राशि जमा कर कनेक्षन प्राप्त करे। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के लिए जो राशि 1,2,3 माह के लिए निर्धारित की है उसे वितरण केन्द्र पर देखा जा सकता है।
तीन शासकीय कर्मचारी निलंबित
पोस्ट मेट्रिक अनुसूचित जाति छात्रावास सीहोर के अधीक्षक श्री मेहरबान सिंह जांगडे को निलम्बित कर दिया गया है। कारण श्री जांगडे बिना सक्षम अधिकारी के अवकाश का लाभ उठा रहे थे। तहसील बुधनी के नाजिर इस कारण निलम्बित किए गए कि उन्होंने कैश बुक के संधारण में लापरवाही बरती। नाजिर के सहायक श्री संतोष सिसौदिया भी निलम्बन से नहीं बच पाए। श्री सिसौदिया कोर् कत्तव्य स्थल से बिना अनुमति गायब रहने के चलते सस्पेंड कर दिया गया।
जिला कोषालय के सहायक कोषालय अधिकारी श्री ललित कुमार बिजलानी को प्रतिफल की अपेक्षा ले डूबी। श्री बिजलानी को एक जांच कार्य सौंपा गया था जिसमें उन्होंने लापरवाही तो बरती ही साथ ही प्रतिफल की अपेक्षा भी की जिसके चलते उन्हें वेतन वृध्दि से हाथ धोना पड़ा।
जता और बता का समीकरण
इस कार्यवाही ने यह जता और बता दिया कि कलेक्टर श्री डी.पी.आहूजा केवल निर्देश ही जारी नहीं करते बल्कि उनका पालन कराना भी उन्हें बखूबी आता और भाता है। गौरतलब है कि श्री आहूजा द्वारा पिछले दिनों विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए गए थे जिनमें शासकीय अनुशासनात्मक नियमों का पालन करने की सख्त ताकीद की गई थी। जारी निर्देशों में उन हिदायतों का भी खास खुलासा किया गया था जिनका शासकीय कर्मचारी को ध्यान रखना होता है। दिशा निर्देशों में मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के हवाले से उन सभी सरकारी तौर तरीको का पालन करने की ताकीद की गई थी जो एक लोक सेवक द्वारा आवश्यक रूप से पालन किए जाते हैं। निलम्बन की इस कार्यवाही से यह जाहिर हो चुका है कि कलेक्टर श्री आहूजा ने सरकारी महकमों में सुधार का मन बना लिया है।