Thursday, June 26, 2008

जब भाई सा. साईकिल चला रहे हैं तो हम भी चलायेंगे

सीहोर। मंहगाई के विरोध में जहाँ प्रदेश के मुख्यमंत्री खुद साईकिल चला रहे हैं तो यहाँ शिवराज भाई साहब के समर्थक युवा नेता भाजपा महामंत्री रमाकांत समाधिया ने भी उनका अनुशरण करना शुरु कर दिया है। विगत 4 दिन से रमाकांत समाधिया साईकिल चला रहे हैं। यह पूरी मस्ती में नगर भर में साईकिल से ही घूमते हैं और खुलकर कहते हैं कि जब हमारे भाई साहब साईकिल चला सकते हैं तो फिर हम क्यों नहीं।

नूरजहाँ आम बना किंग आफ द शो, आम फल प्रदर्शनी का समापन, किसान हुए पुरुस्कृत

सीहोर 25 जून (नि.सं.)। जिला मुख्यालय पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय आम फल प्रदर्शनी के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए प्रदेश के ग्रामोद्योग, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) करण सिंह वर्मा ने कहा कि सरकार किसानों की खुशहाली के लिए कृत- संकल्पित है और किसानों के हित में सरकार कार्य कर रही है। प्रदर्शनी में आम फल के श्रेष्ठ प्रादर्श के लिए राज्य मंत्री श्री वर्मा ने किसानों को किसानों को पुरस्कृत किया। कार्यम की अध्यक्षता आष्टा विधायक रघुनाथ सिंह मालवीय ने की। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनिता भण्डेरिया,जिला पंचायत सदस्य दुर्गाप्रसाद वर्मा और देवीप्रसाद परमार, कैलाश चन्द्रवंशी, जगदीश मेवाडा, गौरव महाजन सन्नी, छतरसिंह वर्मा, कैलाश सुराना, सुहागमल मेवाडा, एसडीएम चन्द्रमोहन मिश्रा, उप संचालक कृषि एन.एस. रघु, जिला उद्यानिकी मिशन के सचिव एवं सहायक संचालक उद्यानिकी श्री राजेन्द्र कुमार सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि और प्रदेश भर से आए किसान मौजूद थे।
आम के बगीचे लगाएं-लाभ कमाएं
समापन समारोह में राज्य मंत्री श्री करणसिंह वर्मा ने कई जिलों से आए किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि परम्परागत खेती के साथ ही आम की खेती से अतिरिक्त मुनाफा कमाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का अधिकतम लाभ दिलाना सरकार का लक्ष्य है। श्री वर्मा ने किसानों को आव्हान किया कि वे उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ प्राप्त करें। कार्यम में विधायक रघुनाथसिंह मालवीय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार द्वारा किसानों के हित में अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है जिनमें अनुदान का प्रावधान है। किसानों को चाहिए कि वे सरकार की इन योजनाओं का आगे बढ़कर लाभ प्राप्त करें।
कार्यक्रम को जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनिता भण्डेरिया ने भी संबोधित किया और राज्य स्तरीय आम फल प्रदर्शनी के आयोजन की सराहना की। उन्होने कहा कि ऐसे आयोजन के माध्यम से किसानों को खेती-किसानी के संबंध में अच्छी जानकारी हासिल होती है जिसका उन्हें काफी लाभ मिलता है।
आम फल के श्रेष्ठ प्रादर्श पुरस्कृत घोषित किया गया। आम की व्यवसायिक किस्मों के लिए 18, आम के घरेलु उत्पाद के लिए 25 और आम के व्यवसायिक उत्पाद के लिए 18 इस प्रकार 52 संस्थागत और 63 निजी पुरस्कार सहित कुल 115 पुरस्कार प्रदान किए गए। राज्य मंत्री श्री वर्मा द्वारा किसानों को पुरस्कार स्वरूप ट्राफी एवं नगद राशि प्रदान की गई और प्रशस्ति पत्र भेंटकर किसानों को सम्मानित किया गया। राज्य मंत्री करण सिंह वर्मा के निर्देश पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले किसानों को 500 रूपये और द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले किसानों को 200 रूपये की नकद राशि प्रदान की गई। श्री वर्मा ने प्रथम और द्वितीय स्थान के लिए क्रमश: 50 एवं 30 रूपये की राशि को नाकाफी बताते हुए नकद राशि में बढोतरी की घोषणा की। कार्यक्रम का संचालन प्रदीप चौहान ने किया तथा आभार उप संचालक उद्यानिकी आर.के.नामदेव ने व्यक्त किया।

ट्रक लूट प्रकरण में पुलिस सफलता से दूर

आष्टा 25 जून (नि.प्र.)। 21 जून की रात्री में अज्ञात लुटेरे जो एक वाहन में सवार होकर आये थे सोंडा पुल के पास से देशी कट्टे की नोक पर लोहे के सरियों से भरा एक ट्रक लूटकर ले गये थे। इन लोगों ने ट्रक चालक, क्लीनर को बंधक बनाकर सिवनी मालवा के जंगल में छोड़ गये थे। उक्त घटना की रिपोर्ट 2 दिन बाद आष्टा थाने में की थी घटना की शिकायत के बाद लगभग 50 घंटे बीत गये लेकिन अभी आष्टा पुलिस को कहीं से भी कोई सफलता मिलती नजर नहीं आ रही है उक्त 20 लाख की लूट से पुलिस परेशान है क्योंकि मुख्यमंत्री के गृह जिले में जब यह हाल है तो क्या कहें। टी.आई. अतिक अहमद खान ने फुरसत को बताया कि घटना के बाद ए.एस.आई. श्री सिध्दिकी के नेतृत्व में एक दल इन्दौर-धार गया है लेकिन कोई शुभ समाचार नहीं है। वहीं प्रधान आरक्षक श्री भार्गव के नेतृत्व में जो दल सिवनी मालवा, होशंगाबाद गया था वो लौट आया है घटना स्थल का निरीक्षण करें। आष्टा पुलिस के लिये उक्त लूट एक कड़ी चुनौती के रुप में है क्योंकि इतनी बड़ी लूट आष्टा थाने में पहले कभी शायद दर्ज नहीं हुई है। वहीं घटना स्थल को लेकर भी अंदर ही अंदर विवाद नजर आ रहा है क्योंकि जो घटना स्थल सोंडा के पास बताया जा रहा है वो मंडी सीहोर क्षेत्र में लगता है जबकि उक्त प्रकरण को आष्टा थाने में दर्ज करवाया गया ऐसा क्यों किया गया इसको लेकर तरह-तरह की चर्चा है।

रामदेव मंदिर में प्रतिष्ठा की साल गिरह श्रध्दा भक्ति के साथ मनी

आष्टा 25 जून (नि.प्र.)। नगर की सांई कालोनी में स्थित बाबा रामदेव मंदिर में बाबा रामदेव जी एवं पंचमुखी शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की प्रथम साल गिरह आज 25 जून को भक्तों ने श्रध्दा भक्ति के साथ मनाई। प्रथम साल गिरह पर आज प्रात: से लेकर देर रात तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम, अभिषेक, महिला संगीत एवं भजन, महाआरती एवं माँ वैष्णवी म्यूजिकल ग्रुप द्वारा रात्री में रंगारंग भजन संध्या को कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। प्राण-प्रतिष्ठा की प्रथम सालगिरह पर मंदिर को सुन्दर फूलों एवं विद्युत से सजाया गया था। महाआरती के पश्चात रात्री में प्रसाद वितरण किया गया।
मंदिर समिति के प्रमुख प्रेम कुमार राय मामा, राजा पारख, प्रेमनारायण गोस्वामी, भवानी शंकर शर्मा, दुलीचंद कुशवाह, राजकुमार गुप्ता, दशरथ सिंह राजपूत, लाल बहादुर मोटवानी, कालू राम मेवाड़ा, पार्षद रसीद पठान, पप्पु मेवाड़ा, जी.एल. नागर, एच.आर. परमाल, जितेन्द्र सोनी, प्रकाश परसाई, महेश पटेल, द्वारका प्रसाद सोनी, पूरन मेवाड़ा सहित अनेकों भक्तों ने सक्रिय रुप से विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। आज दिन भर मंदिर परिसर में भक्तों का आना-जाना लगा रहा दिनभर एवं रात्री में सम्पन्न हुए सभी कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया।

दिन दहाड़े ट्रक कटिंग हुई

आष्टा 25 जून (नि.सं.)। आज दिन में लगभग ढाई बजे राष्ट्रीय राजमार्ग पर इन्दौर से सतना जा रहे ट्रक क्रमांक एमपी 17 टी.5103 की त्रिपाल एवं रस्से काटकर अज्ञात लोगों ने ट्रक में से दो गठान कपडे क़ी उतार ली। बताया जाता है दोनो गठानों में साड़िया भरी थी। ट्रक चालक रामशिरोमणी तिवारी निवासी सिरमौर जिला रीवा ने थाने पहुँचकर ट्रक कटिंग की शिकायत दर्ज कराई है। अभी तक तो अज्ञात लोग रात के अंधेरे में ट्रक कटिंग कर वारदात को अंजाम देते थे लेकिन अब ऐसे अपराधी बैखौफ होकर ऐसी गंभीर वारदातों को अंजाम देने लगे हैं। जो इस मार्ग से निकलने वाले वाहनाें के लिये दहशत का कारण बन गये हैं।

गौरव मेवाड़ा और बंटी शर्मा 8 दिन बाद भी घर नहीं लौटे

आष्टा 25 जून (नि.प्र.)। घर से बिना बताये आष्टा के दो परिवारों के चिराग आठ दिन बाद भी घर नहीं लौटने को लेकर एक और जहाँ इन परिवारों के सदस्य चिंतित हैं वहीं इन युवकों का चले जाना नगर में भी चर्चा का विषय बना है खबर है कि इसके पहले आष्टा के पीली खदान क्षेत्र से भी दो लड़के कहीं चले गये थे लेकिन वे लौट आये हैं। वैसे अब इन दोनो परिवारों ने आष्टा थाने में शिकायत लिखा दी है पुलिस ने गुम इंसान कायम कर लिया है। खास बात यह है कि घर से जो दो युवक गये हैं वे दोनो साथ गये हैं ऐसा बताया जाता है। आष्टा थाने से प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर की सांई कालोनी क्षेत्र में रहने वाला एक युवक जिसका नाम प्रवेश उर्फ बंटी शर्मा पुत्र जय हिन्द शर्मा उम्र 20 वर्ष 18 जून को घर से गया तो अभी तक नहीं लौटा है उसके भाई मृगेन्द्र शर्मा ने थाने में रिपोर्ट की है वहीं दूसरा युवक शास्त्री कालोनी में रहने वाले जीतमल मेवाड़ा का है इसका नाम गौरव मेवाड़ा उम्र 16 वर्ष है यह 19 की शाम को घर से गया तो नहीं लौटा है गौरव के पिता का कहना है कि शाम को गौरव को बंटी के साथ कई लोगों ने देखा है। उक्त दोनो युवकों का घर से जाने के एक सप्ताह बाद भी कोई खैर-खबर नहीं होने से परिवार चिंता में है।

राधास्वामी सत्संग व्यास पर विधायक श्री सक्सेना ने कराया नलकूप खनन

सीहोर 25 जून (नि.सं.)। सीहोर शहर के मकस पुर के पास राधास्वामी संतसंग व्यास में प्रति वर्ष गर्मी में होने वाली पानी की समस्या को देखते हुये श्रघ्दालुओ के आग्रह पर विघायक श्री रमेश सक्सेना ने नलकूप खनन कराया है जिसमे पर्याप्त मात्रा मे पानी निकला है अब सत्संग भवन में सत्संगियों को पानी आसानी से उपलब्ध हो सकेगा उलेखनीय है कि शहर के निकट मकसपुर के समीप राधास्वामी सत्संग भवन है यहां पर प्रमी सत्संग का आनंद लेने आते है जिससे सत्संगीओ को गर्मी से अभी तक पानी हो पायेगा यहॉ विधिवत पूजन कराकर नलकू प खनन कराया गया। यहॉ कुल 356 फिट नलकूप खनन कार्य हुआ नलकूप खनन के अवसर पर जिला महामंत्री पं. रामाकांत समाधिया, नपा उपाध्यक्ष अशोक सिसौदिया, युवा नेता बन्टी राय, भागीरथ जागडा, रामचन्द्र पटेल, मनोज विश्वकर्मा, शैलेन्द्र भावसार, गुडडु चर्तेवेदी, बबलू पहलवान, संजय सोलंकी, मुकेश रधुवंशी, विक्रम राय, रवि राठौर, कमलेश गिरि, विजय भावसार, योगेन्द्र परमार, अजय चौहान, आदि अनेक लोग उपस्थित रहे।

शराबियों का अड्डा बना बस स्टेण्ड

इछावर 25 जून (नि.सं.)। बस स्टेण्ड पर यात्रियों के बैठने की जगह पर शराबी शराब पीते हैं। शाम ढलते ही समूचा इछावर क्षेत्र जहाँ अंधेरे में डूबने लगता है वहीं यहाँ बस स्टेण्ड पर शराबी यात्रियों को परेशान करने का क्रम शुरु कर देते हैं। जिससे राहगीर भी परेशान होते है। यात्री प्रतिक्षालय में रोजाना शराबी शराब पीने आते हैं और गाली-गलौच करते हैं जिससे बस स्टेझड पर यात्रीगणों को दिक्कत आती है।

बरसात के सीजन मे नगर से कई गांवो का सम्पर्क कट जाता है

जावर 25 जून (नि.प्र.) बरसात के सीजन मे नगर से क ई गांवो का सम्पर्क कट जाता है। जिस कारण ग्रामीण क्षेत्र के लोगो को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है ग्राम मालीपुरा के नारायण सिंह ने बताया कि हमारे गांव तक ना तो सड़क है और नही पुलिया हमारे गांव के पास नदी के उस पार बरसात जब अधिक होती है और नेवज नदी मे बाढ आ जाती है तब हमारे गांव का सम्पर्कजावर से कट जाता है परेशानी तब आति है जब गांव में कोई बीमार दुखी हो जाए । इसी प्रकार के हालात परोलिया टोकला खेड़ा,बनखेडा,धाराखेडी आदि गांव के हो जाते है गांव भारीखेडा के रूपसिंह ने बताया कि हमारे गांव सीधा सम्पर्क जावर कस्बे से है छोटे छोटे कामों के लिए जावर ही आना जाना पड़ता है लेकिन जावर से गांव तक सड़क नही होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है गर्मी सर्दी के सीजन में आसानी से आ जाते है लेकिन बरसात के सीजन मे काफी परेशानी आती है।

Wednesday, June 25, 2008

मल्‍िलका को तो देखो क्‍या अदाएं हैं....यही है मल्‍िलका ए आम, पर बहुत खास

आगे-आगे शहनाई और पीछे-पीछे चलता था आम, साफा बांधकर स्‍वागत करते थे आम बेचने का वाले का,

आज भी सीहोर के आम बेचने दहीयड़-दहीयड़ की आवाज लगाकर आम बेचते हैं, जबकि अब दहीयड ख़त्म हो चुका

(आनन्‍द गांधी)

सीहोर 24 जून । आज जब प्रदेश स्तरीय आम प्रदर्शनी सीहोर जिला मुख्यालय पर मंत्री श्री करण सिंह वर्मा के विशेष प्रयासों से लगी तो सहज ही आम की शौकीन सीहोर वासियों को पुरानी यादें ताजा हो आईं। फुरसत ने भी मौके को प्रांसगिक रुप से उपयोग करते हुए आज सीहोर के एक ऐतिहासिक घटनाक्रम प्रसिध्द दहीयड आम की बिक्री के तरीके को उठाया है। यूँ तो सीहोर में दहीयड़ का वह बोलवाला था कि किसी आम किसी क्षेत्र में न हुआ होगा, लेकिन दहीयड़ के अलावा करेला और बतेशिया, कालिया और बढ़ियाखेड़ी की आमन भी प्रसिध्द थी। सीहोर आमों को लेकर सदैव समृध्द रहा है। आज पढ़िये आमों की वह पुरानी यादें जो अब सिर्फ खासम-खास हो गई हैं।

साठ का दशक जब सीहोर में आम, ईमली और जामुन के पेड़ों की बहुतायत थी। आम और ईमली अनगिनत थे। तब आमों के अनेक बगीचे भी प्रसिध्द थे और इन बगीचों में उगने वालों आमों की किस्म भी प्रसिध्द थी। उसी जमाने में वर्तमान कलेक्ट्रेट के पीछे जो आम के पेड़ उनमें एक दहीयड़ आम का भी पेड था।

जब आम का मौसम आता था तो इस आम को नगर के प्रसिध्द फल विक्रेता जुम्मा खाँ (कूंजडा) लाकर उसकी पाल लगाते थे। नगर भर को मालूम रहता था कि आम दहीयड़ की पाल लग गई है और किस दिन पाल खुलेगी इसकी तारीख भी मालूम कर ली जाती थी। लोग उस तारीख का इंतजार करते थे जब जुम्मा खां की पाल खुले और उन्हे आम देखने, सूंघने और खाने को मिल सके।

जिस दिन पाल खुलती थी उस दिन बकायदा जुम्मा मियां गिनती के आम ठेले पर सजाते थे, फूलों से ठेला सजता था, उसके बाद आम पर बरक लगाई जाती थी, अगरबत्ती लगती थी। आम पूरा सजधज कर जब तैयार हो जाता था। तब शहर के शहनाई वादन करने वालों की बारी होती थी। शहनाई बजाने वाले प्रसिध्द दहीयड़ आम के आगे-आगे शहनाई बजाना शुरु कर देते थे। आम के आसपास भीड़ लगना शुरु हो जाती थी, फिर धीरे-धीरे जुम्मा मियां आम की सवारी ठेला गाड़ी आगे बढ़ाना शुरु करते थे, इधर चारों तरफ भीड़ जमा हो जाती थी, आगे-आगे शहनाई बजती थी और पीछे-पीछे आम चलते थे। इसी दौरान जुम्मा खां की कड़कती आवाज सबको और उत्साहित कर देती थी वह आवाज लगाते थे ''वाह रे दहीयड़ वाह, वाह रे दहीयड़ वाह''।

शहर के प्रसिध्द आम के बगीचों में एक बगीचा कासट जी का भी था और दूसरा मानक सेठ परिवार का भी था। इस संबंध में श्री नारायण कासट दहीयड़ के स्वाद की बात करते हुए आल्हादित होते हुए कहते हैं कि उसका मुकाबला मुश्किल है, दहीयड़ तो दहीयड़ ही था, वह नहीं रहा तब भी आज तक उसके नाम से लोग आम बेचकर कमा रहे हैं। श्री कासट के अनुसार दहीयड़ बहुत अच्छी खुशबूदार आम था लगता था जैसे रस क्या बल्कि किसी ने शहद भर दिया हो, पूरा आम दही की तरह भरा हुआ रहता था, जरा-रेशा नहीं था, लेकिन इस चूसने वाले आम में ईलायची की खुशबू और केशर का स्वाद आता था। यही कारण था कि इसकी प्रसिध्द बहुत अधिक थी।

हाँ तो बात चल रही थी कि आगे-आगे शहनाई और पीछे-पीछे दहीयड़ आम चलता था। फिर यह आम का ठेला सर्राफा बाजार के तिराहे चरखा लाईन पर आकर ठहर जाता था। उस जमाने में वहीं आम बिका करते थे।

यहाँ जब दहीयड़ की सवारी आकर रुकती थी तो जुम्मा खां का यहाँ पर फल बेचने वाले सारे फल विक्रेता स्वागत करते थे। बकायदा उन्हे साफा बांधकर स्वागत किया जाता था और फिर आम बिकना शुरु होते थे।

यहाँ जुम्मा खां का ठेला जब आकर रुकता तो खरीदने वालों की तो भीड़ लग जाती थी लेकिन जुम्मा खां अपने मर्जी से लोगों को आम देते थे। मसलन सिर्फ गिनती के पहचान वालों को आम दिये जाते थे, और वह उनके घर की सदस्य संख्या के हिसाब से, उन्हे या तो एक किलो, या तो दो किलो आम देते थे, इससे यादा आम नहीं दिये जाते थे। इसके बाद आवाज भी जोरदार लगती थी...जैसे 'यह चला 3 किलो वियाणी जी के यहाँ, वाह रे दहीयड़ वाह'। इस प्रकार कुल जमा 3 दिन में पूरी पाल के आम बिक जाते थे।

नगर के इस प्रसिध्द आम और फल विके्र ता ने क ई वर्षों तक इसी ढंग और परम्परा से आम बेचे फिर धीरे-धीरे यह परम्परा खत्म हो गई आज तो सीहोर में दहीयड़ का पेड़ ही नहीं बचा है। लेकिन इसके बावजूद आज भी जब कभी कोई फल विक्रेता उत्साह में आवाज लगाता है यही चिल्लाता आ गया दहीयड़....उसे क्या मालूम की दहीयड़ आम अब सीहोर में ही नहीं...आज की नई पीढ़ी दहीयड़ नाम सुनती तो है लेकिन समझ नहीं पाती कि आखिर दहीयड़ आम होता कौन-सा है।

उस जमाने दहीयड़ के अलावा दशहरा वाला बाग में उगने वाला 'बतेशिया' आम भी खासी चर्चाओ में रहता था, बतेशिया इसलिये नाम था क्योंकि यह बताशे की तरह छोटा और मीठा गट्ट था। इसी प्रकार एक अन्य आम 'कालिया' भी यही उगता था। यह भी मीठा आम था।

हां बढ़ियाखेड़ी में रफ्फू मियां का स्मरण किया जाना लाजमी है, असल में रफ्फू मियां पूर्व पार्षद के खेत में प्रसिध्द 'आमन' उगती थी, जिस पर हर आम की नजर रहती थी। 'आमन' इसे इसलिये कहते थे लगता था जैसे यह कोई आम की मादा नस्ल हो, लम्बी छरहरी पतली लेकिन ऐसी मीठी कि चूसने वाह-वाह कर उठे। इसलिये यह आमन कहलाती थी। रफ्फू मियां के खेत में ही 'रामकिला' किस्म की प्रसिध्द केरी भी उगती थी जो अचार के लिये नाम से बिकती थी। जब आम की बात चल ही रही है तो फिर 'सौंफिया आम' को कैसे भूला जा सकता है। कासट बगीचे में उगने वाले सौंफिया आम की मिठास तो थी लेकिन इसमें सौंफ जैसी खूशबू आती थी और यही उगता था 'सावनी' आम, नाम से पता चलता है कि यह आम श्रावण मास में फलता था, जब बरसात हो चुकती थी तब सावनी आता था तो इसका अचार डालने पर फिर पूरे साल नहीं बिगड़ता था।

वर्तमान में इछावर वाले सेठ रामकिशन धनराज फर्म पर संजय पालीवाल के खेत पर अवश्य करीब 30-32 प्रजाति के पेड़ मोजूद हैं, जहाँ करेला नाम का प्रसिध्द आम भी है जो सिर्फ यहीं है। यूँ तो रोहिला जी के खेत का आम चहुँ और प्रसिध्द है।

कुल मिलाकर सीहोर आमों से समृध्द रहा है और यहाँ की परम्पराएं उससे भी बढ़कर रही हैं। ऐसे में आज जब आम की बहार बाल विहार मैदान में लगी है तो पुराने दिन सहज याद आ जाते हैं।

हाय हाथ लगा लू... गजब का सुन्‍दर आम था यह राज्‍य स्‍तरीय आम प्रदर्शनी में

और यह रहीं 3 किलो की नूरजहां किंग आम द शो, गजब का आम है

नूरजहां यहीं हैं बेगम नूरजहां.....मतलब नूरजहां आम (डेढ़ किलो की एक नूरजहां)