सीहोर 16 जून (नि.सं.)। मण्डी थाना अर्न्तगत हुये एक सड़क हादसे में दो लोग घायल हो गये । पुलिस ने प्रकरण कायम कर लिया है ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मगरखेड़ा निवासी 36 वर्षीय कन्हैयालाल मोटर सायकल से उदयसिंह एवं हेमसिंह के साथ मगरखेड़ा से चांदबढ़ जा रहा था कि श्यामपुर तरफ से आ रही टैम्पो क्रमांक एमपी-04-एचबी-1191 के चालक ने वाहन को तेजगति व लापरवाही पूर्वक चलाकर इनकी मोटर सायकल में टक्कर मार दी । परिणाम स्वरूप कन्हैयालाल एवं हेम सिंह को चोट आई जिन्हें उपचार हेतू जिला चिकित्सालय में दाखिल कराया गया है ।
Tuesday, June 17, 2008
क्या सारे भाजपाई राशन दुकानदार चोर हैं-जनशक्ति
सीहोर 16 जून (नि.सं.)। भारतीय जनशक्ति के नगर अध्यक्ष पार्षद कमलेश राठौर ने अपने बयान में कहा कि राय शासन के नाम से जिला कलेक्टर ने एक आदेश जारी कर कहा है कि माह में 3 दिन राशन की दुकान खोलकर सामान वितरण किया जायेगा। कमलेश राठौर ने शासन से पूछा है कि जो दुकानदार माह के बीस दिनों में पूरा सामान नहीं बांट सकते वह दुकानदार तीन दिन में राशन पूरे वार्ड में कैसे बांटेंगे। इससे तो यह प्रतीत होता है कि शासन चुनाव से पहले जनता एवं राशन की दुकान वालों में विवाद पैदा करवाना चाहता है। यदि सरकार जता की हितैषी बनना चाहती है तो प्रत्येक वार्ड में राशन की दुकान खुलवा दें जिससे गरीबों को फायदा होगा। उक्त आदेश शासन की खीज का नतीजा है क्योंकि राशन की जो दुकानें पूरे प्रदेश में संचालित हो रही हैं वह भाजपा के कार्यकर्ताओं की है क्योंकि यह सभी दुकानदार पटवा शासनकाल में भाजपा के कार्यकर्ता व नेता हैं इससे तो ऐसा लगता है कि यह सभी राशन की दुकाने वाले शासन की नजरों में चोर हैं नहीं तो सरकार को क्या पड़ी थी कि एनवक्त पर चुनाव के समय ही इन दुकानदारों की याद आई ? जबकि पूरे प्रदेश मं भाजपा के नेताओं के रिश्तेदार व मंत्री व उनके भाई भतीजे पत्नि आदि लोगों पर सरेआम भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और लोकायुक्त में भी प्रकरण दर्ज हैं तो दुकानदारों को अपने ही शासन में फजीयत क्यों हो रही है ? मांग करने वालों में श्याम चौरसिया, जिला महामंत्री कमलेश कुशवाह, कमलेश राठौर, दिनेश पुष्पद, आशीष पचौरी, बंटी सिकरवार, अमित राठौर, हेमंत राठौर, दिनेश राठौर, गोविन्द पहलवान, राजेश राठौर, राजू आदि।
भाजपा नेत्रियों को रात यूपीए सरकार के सपने आते हैं....
सीहोर 16 जून (नि.सं.)। केन्द्र की कांग्रेस नीत यूपीए सरकार मानव जीवन की जरुरी वस्तुओं के सुरसा की भांति बढ़ते दामों को रोकने में विफल होकर कटघरे में खड़ी है। चार साल में यूपीए सरकार ने लगातार जनविरोधी नीतियों के आधार पर सत्ता का संचालन कर देश की जनता जनार्दन को संकट में ही डाला है। कांग्रेस को इसके लिये दंडित करना महिला मोर्चा की दिन की चिंता और रात का स्वप् बन चुका है आने वाले चुनाव में मिशन 2008 की सफलता एवं केन्द्र से जनविरोधी सरकार को उखाड़ फेंकने में महिला मोर्चा की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। इस आशय का राजनैतिक प्रस्ताव मोर्चा द्वारा अपनी प्रदेश कार्य समिति बैठक में पारित किया गया। मोर्चा जिलाध्यक्ष श्रीमति रीना मिश्रा एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य श्रीमति विद्या बिजोरिया ने प्रदेश कार्यसमिति बैठक छिंदवाड़ा की जानकारी में बताया कि प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने पालने से जीवन की हर दहलीज पर महिलाओं को सशक्त बनाने की जो योजनाएं बनाई है उनका प्रसार की जबावदारी मोर्चा को दी गई है।
इसी क्रम में आगामी 24 जून वीरांगना दुर्गावती के बलिदान दिवस पर एक साहसी बहन का सम्मान, रक्षा बंधन उत्सव, राजमाता श्रीमति सिंधिया जयंती, जिला सम्मेलन के कार्यक्रम तय किये गये।
श्रीमति मिश्रा के अनुसार प्रदेश कार्य समिति द्वारा मतदान केन्द्र की रणनीति, प्रवास एवं संगठनात्मक जो भी कार्यक्रम दिये हैं उनको पूर्ण गरिमा के साथ जिले में सम्पन्न किया जाकर भाजपा की शक्ति में वृध्दि की जायेगी।
इसी क्रम में आगामी 24 जून वीरांगना दुर्गावती के बलिदान दिवस पर एक साहसी बहन का सम्मान, रक्षा बंधन उत्सव, राजमाता श्रीमति सिंधिया जयंती, जिला सम्मेलन के कार्यक्रम तय किये गये।
श्रीमति मिश्रा के अनुसार प्रदेश कार्य समिति द्वारा मतदान केन्द्र की रणनीति, प्रवास एवं संगठनात्मक जो भी कार्यक्रम दिये हैं उनको पूर्ण गरिमा के साथ जिले में सम्पन्न किया जाकर भाजपा की शक्ति में वृध्दि की जायेगी।
Monday, June 16, 2008
ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के काम ठेके पर कराये, करोड़ो के काम हो गये और बेरोजगारों को लाभ नहीं मिल सका...
सीहोर 15 जून (आनन्द गाँधी)। रोजगार गारंटी योजना को ग्राम के ही सरपंच सचिव ने मिलकर ऐसा चूना लगाया कि बेचारे बेकार बैठे श्रमिकों को काम ही नहीं मिल सका और उनसे जुड़े ठेकेदारों के मजे हो गये, बैठे-बैठाये काम मिल गया और मेहनत भी कम लगी। इस प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में इस मंहगाई के दौर में जो श्रमिक हेरान-परेशान थे काम नहीं मिल रहा था और अब बरसात में इन्हे और भी काम नहीं मिलेगा वह बेकार ही रह गये जबकि ठेकेदारों ने मजे उड़ाये। अधिकांश ग्रामो में ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मजाक बन रह गई... और जिला प्रशासन आंख मूंदा रह गया। ग्रामीण बेरोजगार श्रमिकों के लिये चालू की इस योजना के नियमों की जानकारी व्यापक प्रसार-प्रचार के अभाव में बेरोजगार श्रमिकों को नहीं मिल सकी वरना वह उसका अवश्य लाभ उठाते। राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना की जिले में क्या स्थिति यह तो उस वक्त ही उजागर हो गया था जब पिछले दिनों मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ने 10 ग्रामों का दौरा किया और उसमें 3 ग्रामो में अनियमिता पाई....इस योजना का किसको मिला लाभ ? किसकी जेब में गये रुपये ? कितना हुआ काम ? सब है चर्चा - ए -आम।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का धजियाँ सीहोर जिले में ऐसी बिखरीं की अब बेरोगजार सरकार को कोसते ही रह गये, मंहगाई के इस दौर में बुरे हाल हो गये और जिन ठेकेदारों, सरपंचों व अधिकारी-कर्मचारियों की इसमें सांठ गांठ की उनकी जेब एक बार फिर भरा गई। 1 अप्रैल 2008 से प्रारंभ हुई रोजगार गारंटी योजना के प्रारंभ में कहा गया था कि 100 दिन की रोजगार गारंटी दी जायेगी। इस मान से अभी जुलाई तक योजना चल सकती है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में न तो अब रुपया शेष बचा है ना ही काम ? सारा काम कहीं न कहीं हो चुका है कुछ जमीन पर तो बाकी सारा कागजों पर निपट चुका है।
3 महिने में बस 3 गड़बड़ी दिखी
विगत 30 मई को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अरुण तोमर ने अचानक आष्टा विकासखण्ड की ही ग्राम पंचायत लसूड़िया सूखा और झिलेला ग्राम पंचायतों के काम पर नजर डाली तो पता चला कि वहाँ गड़बड़ झाला चल रहा है। बात सामने आई कि कागजों की खानापूर्ति ठीक नहीं की गई है लेकिन क्या काम पूरा हुआ था वहाँ ? यहीं आष्टा विधायक के ग्राम कोठरी में भी पंचायत समन्वयक अधिकारी पर कार्यवाही की गई थी।
सूत्रों का कहा है कि जहाँ-जहाँ भी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का रुपया आवंटित किया गया वहाँ बेरोजगार श्रमिकों से काम कराने की व्यवहारिक कार्यवाही करने में संबंधित अधिकारियों ने खुद को बचाया। हालांकि कागजी खानापूर्ति उन्होने बकायदा की लेकिन काम अपने परिचित ठेकेदारों से ही कराया गया ।
असल में शासन की योजना थी कि हर बेरोजगार को कुछ न कुछ रोजगार मिल सके इसके लिये वह पहले तो अपना पंजीयन कराये और साथ ही काम करने के लिये अपना आवेदन भी दे दे लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में बेरोजगार न तो अपना आवेदन दे सके और ना ही अपना पंजीयन करा सके।
और ऐसे हो जाती काम की गारंटी
यदि वह पंजीयन करा लेते तो शासन की रोजगार गारंटी के अन्तर्गत वह आ जाते और आराम से उनको काम मिल जाता यदि शासन उन्हे काम नहीं भी देता तो शुरु हो जाती गारंटी । मतलब काम कराकर जितना रुपया उसे दिया जाता उतना ही रुपया बकायदा उसी ढंग से बिना काम कराये दिया जाता जो एक तरह से होता बेरोजगारी भत्ता। शासन की योजना थी कि या तो शासन काम देगा नहीं और 15 दिन के भीतर काम नहीं दे सकने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते के रुप में काम के बराबर का भुगतान संबंधित आवेदक को करेगा।
जानकारी ही नहीं दी
लेकिन न तो ऐसे बेरोजगारों को बिना काम कराये भुगतान किया गया और ना ही ऐसे बेरोजगारों के आवेदन ही पर्याप्त मात्रा में आये। कारण स्पष्ट है शासन की रोजगार गारंटी योजना का पर्याप्त तरह से न तो प्रचार-प्रसार हुआ ना ही बेरोजगार श्रमिकों को इसकी सही जानकारी दी गई।
वो अनजान थे इनने लाभ उठाया
श्रमिकों की अनभिज्ञता का लाभ योजना क्रियान्वयन करने वाले अधिकारी, पंचायत के संबंधित कर्ताधर्ताओं ने खूब उठाया। उन्होने अपने प्रिय ठेकेदारों से काम कराया और जब कोई यहाँ जांच करने आता तो वह पहले से ही श्रमिकों को यह सिखा कर रखते की तुम बताना की दिनभर की मजदूरी पर लगाया गया है, खुद को ठेकेदार के आदमी मत बताना। इधर उच्चस्थ अधिकारियों ने 1 अप्रैल से प्रारंभ हुई रोजगार गारंटी की जांच दो माह बीत जाने के बाद 30 मई को की थी जिसके बाद अभी तक कोई नई जानकारी नहीं है।
आये थे 28 अरब 92 करोड़ रुपये मतलब सबको काम...
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत मध्य प्रदेश में इस वर्ष 28 अरब 92 करोड 67 लाख 23 हजार रुपये आये थे जिससे पूरे प्रदेश में 1 लाख 36 हजार 3 काम पूरे किये गये हैं और 43 लाख 46 हजार 916 परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। यह किस्मत ही थी कि सीहोर जिले को भी इस योजना में जोड़ा गया था और भारी भरकम राशि भी जिले को आबंटित की गई थी।
उन ग्रामीण क्षेत्र के आम ग्रामीणों को भी अब पता चलता जा रहा है कि उनके ग्राम में कौन-कौन-से काम ग्रामीण रोजगार गारंटी के तहत हुए और हो रहे हैं जबकि उन्हे किसके द्वारा किसके आदमी कर रहे हैं। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना की चर्चा ए आम है।
उल्लेखनीय है कि ग्रामीण रोजगार गारंटी के तहत 69 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी दिया जाना तय है। ऐसे में जो बेरोजगार हर तरफ से बेकार रहते हैं और काम नहीं मिल रहा होता है उन्हे इस योजना का अच्छा लाभ मिल सकता था।
दो दिन चला और ढेर हो गया
यहाँ कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े तामझाम के साथ जहाँ रोजगारी गारंटी योजना का काम शुरु भी किया गया तो ऐसी अधिकांश ग्राम पंचायतों में दो-तीन दिन चलकर काम बंद हो गया और मजदूरों को वापस कर दिया गया ?
तो फिर गारंटी कहाँ चली गई ?
लेकिन ऐसी स्थिति जो मजदूर काम करने आये थे उन्हे रोजगार की गारंटी नहीं दी गई ? मतलब काम नहीं दे पाने की स्थिति में जो शासन का नियम है कि बेरोजगार को पूरे रुपये का भुगतान किया जायेगा वह नहीं किया गया। जावर तहसील के ग्राम खजूरिया के रहने वाले अम्बाराम के अनुसार मालवीय के अनुसार उसने तीन दिन काम किया था 10 गुणा 10 का एक फिट गड्डा खोदा और मिट्टी को ऊपर भी चढ़ाया लेकिन तीसरे दिन काम का आंकलन करने वाले अधिकारी ने उसे 30 रुपये प्रतिदिन देने का निर्णय सुना दिया। ऐसी स्थिति में कोई कैसे कर सकता है काम। कुल मिलाकर इतनी बड़ी योजना सीहोर में आई थी जिससे हजारों बेरोजगारों को पर्याप्त रोजगार भी मिलता और 100 दिन के काम की गारंटी भी ? लेकिन न तो काम ही उसे मिला, ना ही गारंटी। ना रुपया मिला न पंजीयन हो सका और रोजगार गारंटी सिर्फ अधिकारियों की कमाई की गारंटी बनकर रह गई।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का धजियाँ सीहोर जिले में ऐसी बिखरीं की अब बेरोगजार सरकार को कोसते ही रह गये, मंहगाई के इस दौर में बुरे हाल हो गये और जिन ठेकेदारों, सरपंचों व अधिकारी-कर्मचारियों की इसमें सांठ गांठ की उनकी जेब एक बार फिर भरा गई। 1 अप्रैल 2008 से प्रारंभ हुई रोजगार गारंटी योजना के प्रारंभ में कहा गया था कि 100 दिन की रोजगार गारंटी दी जायेगी। इस मान से अभी जुलाई तक योजना चल सकती है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में न तो अब रुपया शेष बचा है ना ही काम ? सारा काम कहीं न कहीं हो चुका है कुछ जमीन पर तो बाकी सारा कागजों पर निपट चुका है।
3 महिने में बस 3 गड़बड़ी दिखी
विगत 30 मई को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अरुण तोमर ने अचानक आष्टा विकासखण्ड की ही ग्राम पंचायत लसूड़िया सूखा और झिलेला ग्राम पंचायतों के काम पर नजर डाली तो पता चला कि वहाँ गड़बड़ झाला चल रहा है। बात सामने आई कि कागजों की खानापूर्ति ठीक नहीं की गई है लेकिन क्या काम पूरा हुआ था वहाँ ? यहीं आष्टा विधायक के ग्राम कोठरी में भी पंचायत समन्वयक अधिकारी पर कार्यवाही की गई थी।
सूत्रों का कहा है कि जहाँ-जहाँ भी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का रुपया आवंटित किया गया वहाँ बेरोजगार श्रमिकों से काम कराने की व्यवहारिक कार्यवाही करने में संबंधित अधिकारियों ने खुद को बचाया। हालांकि कागजी खानापूर्ति उन्होने बकायदा की लेकिन काम अपने परिचित ठेकेदारों से ही कराया गया ।
असल में शासन की योजना थी कि हर बेरोजगार को कुछ न कुछ रोजगार मिल सके इसके लिये वह पहले तो अपना पंजीयन कराये और साथ ही काम करने के लिये अपना आवेदन भी दे दे लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में बेरोजगार न तो अपना आवेदन दे सके और ना ही अपना पंजीयन करा सके।
और ऐसे हो जाती काम की गारंटी
यदि वह पंजीयन करा लेते तो शासन की रोजगार गारंटी के अन्तर्गत वह आ जाते और आराम से उनको काम मिल जाता यदि शासन उन्हे काम नहीं भी देता तो शुरु हो जाती गारंटी । मतलब काम कराकर जितना रुपया उसे दिया जाता उतना ही रुपया बकायदा उसी ढंग से बिना काम कराये दिया जाता जो एक तरह से होता बेरोजगारी भत्ता। शासन की योजना थी कि या तो शासन काम देगा नहीं और 15 दिन के भीतर काम नहीं दे सकने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते के रुप में काम के बराबर का भुगतान संबंधित आवेदक को करेगा।
जानकारी ही नहीं दी
लेकिन न तो ऐसे बेरोजगारों को बिना काम कराये भुगतान किया गया और ना ही ऐसे बेरोजगारों के आवेदन ही पर्याप्त मात्रा में आये। कारण स्पष्ट है शासन की रोजगार गारंटी योजना का पर्याप्त तरह से न तो प्रचार-प्रसार हुआ ना ही बेरोजगार श्रमिकों को इसकी सही जानकारी दी गई।
वो अनजान थे इनने लाभ उठाया
श्रमिकों की अनभिज्ञता का लाभ योजना क्रियान्वयन करने वाले अधिकारी, पंचायत के संबंधित कर्ताधर्ताओं ने खूब उठाया। उन्होने अपने प्रिय ठेकेदारों से काम कराया और जब कोई यहाँ जांच करने आता तो वह पहले से ही श्रमिकों को यह सिखा कर रखते की तुम बताना की दिनभर की मजदूरी पर लगाया गया है, खुद को ठेकेदार के आदमी मत बताना। इधर उच्चस्थ अधिकारियों ने 1 अप्रैल से प्रारंभ हुई रोजगार गारंटी की जांच दो माह बीत जाने के बाद 30 मई को की थी जिसके बाद अभी तक कोई नई जानकारी नहीं है।
आये थे 28 अरब 92 करोड़ रुपये मतलब सबको काम...
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत मध्य प्रदेश में इस वर्ष 28 अरब 92 करोड 67 लाख 23 हजार रुपये आये थे जिससे पूरे प्रदेश में 1 लाख 36 हजार 3 काम पूरे किये गये हैं और 43 लाख 46 हजार 916 परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। यह किस्मत ही थी कि सीहोर जिले को भी इस योजना में जोड़ा गया था और भारी भरकम राशि भी जिले को आबंटित की गई थी।
उन ग्रामीण क्षेत्र के आम ग्रामीणों को भी अब पता चलता जा रहा है कि उनके ग्राम में कौन-कौन-से काम ग्रामीण रोजगार गारंटी के तहत हुए और हो रहे हैं जबकि उन्हे किसके द्वारा किसके आदमी कर रहे हैं। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना की चर्चा ए आम है।
उल्लेखनीय है कि ग्रामीण रोजगार गारंटी के तहत 69 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी दिया जाना तय है। ऐसे में जो बेरोजगार हर तरफ से बेकार रहते हैं और काम नहीं मिल रहा होता है उन्हे इस योजना का अच्छा लाभ मिल सकता था।
दो दिन चला और ढेर हो गया
यहाँ कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े तामझाम के साथ जहाँ रोजगारी गारंटी योजना का काम शुरु भी किया गया तो ऐसी अधिकांश ग्राम पंचायतों में दो-तीन दिन चलकर काम बंद हो गया और मजदूरों को वापस कर दिया गया ?
तो फिर गारंटी कहाँ चली गई ?
लेकिन ऐसी स्थिति जो मजदूर काम करने आये थे उन्हे रोजगार की गारंटी नहीं दी गई ? मतलब काम नहीं दे पाने की स्थिति में जो शासन का नियम है कि बेरोजगार को पूरे रुपये का भुगतान किया जायेगा वह नहीं किया गया। जावर तहसील के ग्राम खजूरिया के रहने वाले अम्बाराम के अनुसार मालवीय के अनुसार उसने तीन दिन काम किया था 10 गुणा 10 का एक फिट गड्डा खोदा और मिट्टी को ऊपर भी चढ़ाया लेकिन तीसरे दिन काम का आंकलन करने वाले अधिकारी ने उसे 30 रुपये प्रतिदिन देने का निर्णय सुना दिया। ऐसी स्थिति में कोई कैसे कर सकता है काम। कुल मिलाकर इतनी बड़ी योजना सीहोर में आई थी जिससे हजारों बेरोजगारों को पर्याप्त रोजगार भी मिलता और 100 दिन के काम की गारंटी भी ? लेकिन न तो काम ही उसे मिला, ना ही गारंटी। ना रुपया मिला न पंजीयन हो सका और रोजगार गारंटी सिर्फ अधिकारियों की कमाई की गारंटी बनकर रह गई।
नगर पालिका के भ्रष्टाचार की जांच के आदेश दिये
सीहोर 15 जून (नि.सं.)। नगर पालिका के एक नहीं अनेक ऐसे मामले में हैं जो संदिग्ध हैं और रुपयों के गलत तरीके से इस्तेमाल के किये जाने के संबंध में हैं। इसको लेकर कुछ पार्षद लम्बे समय से भोपाल संबंधित विभागों को सूचित भी करते रहे हैं हाल ही में सीहोर जिला प्रभारी मंत्री रुस्तम सिंह ने इस संबंध में एक तुरंत जांच के आदेश दिये हैं।
जानकारी के अनुसार पिछले दिनों से नाराज 13 पार्षदों के समुह और पार्षद रंजीत वर्मा ने नगर पालिका द्वारा कराये गये कई निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और कांक्रीट सड़क में किये गये भ्रष्टाचार की सूची देते हुए प्रभारी मंत्री से मांग की थी कि इसकी सख्ती से जांच कराई जाये। इसी तारतम्य में 11 जून को पंचायत एवं ग्रामीा विकास मंत्री रुस्तम सिंह ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त को आदेश दिये हैं कि संबंधित समस्त शिकायतों की जांच अविलम्ब की जाये और परीक्षण कराकर जांच की कार्यवाही से अवगत कराया जाये।
इस आदेश के बाद अब एक जांच दल सीहोर आ भी चुका है जो नगर पालिका के सारे खाते जांच पड़ताल रहा है।
जानकारी के अनुसार पिछले दिनों से नाराज 13 पार्षदों के समुह और पार्षद रंजीत वर्मा ने नगर पालिका द्वारा कराये गये कई निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और कांक्रीट सड़क में किये गये भ्रष्टाचार की सूची देते हुए प्रभारी मंत्री से मांग की थी कि इसकी सख्ती से जांच कराई जाये। इसी तारतम्य में 11 जून को पंचायत एवं ग्रामीा विकास मंत्री रुस्तम सिंह ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त को आदेश दिये हैं कि संबंधित समस्त शिकायतों की जांच अविलम्ब की जाये और परीक्षण कराकर जांच की कार्यवाही से अवगत कराया जाये।
इस आदेश के बाद अब एक जांच दल सीहोर आ भी चुका है जो नगर पालिका के सारे खाते जांच पड़ताल रहा है।
Sunday, June 15, 2008
राकेश राय मनोरंजन टैक्स जमा करते रहे और सर्कस मनोरंजन करके चलता बना नगर पालिका कर्मचारियों ने सर्कस खूब लिये मजे, पालिका का हुआ नुकसान
सीहोर 14 जून (नि.सं.)। नगर पिछले दिनों एक सर्कस आया था और उसे देखने वालों की भीड़ भी बहुत थी। सर्कस ने भारी भरकम जमीन पर अपना सर्कस फैलाकर कई दिनों तक सीहोर की जनता का मनोरंजन किया लेकिन इससे नगर पालिका ने मनोरंजन कर के नाम पर आधी से भी कम राशि वसूली। जबकि हर दिन कई नगर पालिका कर्मी यहाँ सर्कस देखने पहुँच जाया करते थे।
जिस नगर पालिका का अध्यक्ष खुद हजारों रुपये का मनोरंजन कर हर माह चुकाता हो उसी नगर पालिका ने मनोरंजन कर में भारी छूट किसी बाहरी सर्कस कम्पनी को दे डाली। अब इसे छूट कहें या सेटिंग लेकिन पिछले दिनों जो ईसा स्टार सर्कस बस स्टेण्ड के पास लगा हुआ था उसके प्रतिदिन 2 शो के हिसाब से बहुत बड़ी राशि मनोरंजन कर के रुप में बनती थी लेकिन नगर पालिका के कुछ कर्मचारियों ने इससे मनोरंजन की उक्त राशि जमा ही नहीं करवाई।
उल्लेखनीय है कि सर्कस करीब एक माह से अधिक समय तक सीहोर में रहा और हर दिन इसके दो शो हुए। हालांकि बीच में इसकी दो दिन के लिये छुट्टी थी क्योंकि सर्कस के कर्मचारियों का आपस में विवाह समारोह था। सर्कस 17 अप्रैल से आया था और 18 मई तक इसने अपना प्रदर्शन किया था। इस प्रकार दो शो रोज के हिसाब से प्रति शो 50 रुपये के मान से भी 3 हजार रुपये के करीब इसका मनोरंजन कर जमा कराया जाना था । सुविज्ञ सूत्रों का कहना है कि मनोरंजन कर की बड़ी राशि ईसा स्टार सर्कस से वसूली जाना थी । क्या उसे वसूला गया या नहीं इसे तो नहीं कहा जा सकता लेकिन मात्र 1 हजार रुपये जमा करवा दिये गये हैं जबकि राशि अधिक वसूल की जाना चाहिये थी। इस दौरान कुछ नगर पालिका के कर्मचारी अक्सर अपने परिजनों या मिलने वालों के साथ सर्कस देखने पहुँच जाते थे यह अलग बात है। लेकिन विचारणीय बात यह है कि जिस नगर पालिका का अध्यक्ष ही हजारों रुपये का मनोरंजन कर चुकाता है उसी नगर पालिका ने किसी दूसरे पर इतनी रहमदिली कैसे दिखा दी ? देखते हैं क्या नगर पालिका अध्यक्ष इस खुले आम हुई गड़बड़ी की जांच करते हैं या नहीं ।
जिस नगर पालिका का अध्यक्ष खुद हजारों रुपये का मनोरंजन कर हर माह चुकाता हो उसी नगर पालिका ने मनोरंजन कर में भारी छूट किसी बाहरी सर्कस कम्पनी को दे डाली। अब इसे छूट कहें या सेटिंग लेकिन पिछले दिनों जो ईसा स्टार सर्कस बस स्टेण्ड के पास लगा हुआ था उसके प्रतिदिन 2 शो के हिसाब से बहुत बड़ी राशि मनोरंजन कर के रुप में बनती थी लेकिन नगर पालिका के कुछ कर्मचारियों ने इससे मनोरंजन की उक्त राशि जमा ही नहीं करवाई।
उल्लेखनीय है कि सर्कस करीब एक माह से अधिक समय तक सीहोर में रहा और हर दिन इसके दो शो हुए। हालांकि बीच में इसकी दो दिन के लिये छुट्टी थी क्योंकि सर्कस के कर्मचारियों का आपस में विवाह समारोह था। सर्कस 17 अप्रैल से आया था और 18 मई तक इसने अपना प्रदर्शन किया था। इस प्रकार दो शो रोज के हिसाब से प्रति शो 50 रुपये के मान से भी 3 हजार रुपये के करीब इसका मनोरंजन कर जमा कराया जाना था । सुविज्ञ सूत्रों का कहना है कि मनोरंजन कर की बड़ी राशि ईसा स्टार सर्कस से वसूली जाना थी । क्या उसे वसूला गया या नहीं इसे तो नहीं कहा जा सकता लेकिन मात्र 1 हजार रुपये जमा करवा दिये गये हैं जबकि राशि अधिक वसूल की जाना चाहिये थी। इस दौरान कुछ नगर पालिका के कर्मचारी अक्सर अपने परिजनों या मिलने वालों के साथ सर्कस देखने पहुँच जाते थे यह अलग बात है। लेकिन विचारणीय बात यह है कि जिस नगर पालिका का अध्यक्ष ही हजारों रुपये का मनोरंजन कर चुकाता है उसी नगर पालिका ने किसी दूसरे पर इतनी रहमदिली कैसे दिखा दी ? देखते हैं क्या नगर पालिका अध्यक्ष इस खुले आम हुई गड़बड़ी की जांच करते हैं या नहीं ।
मुख्यमंत्री की उपस्थिति में विधायक हंसी का पात्र बने
आष्टा 14 जून (नि.सं.)। 12 जून को जावर में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में हजारों जनता के सामने आष्टा विधायक रघुनाथ मालवीय ऐसे हंसी के पात्र बने की मंच पर बैठे मुख्यमंत्री भी विधायक पर हंसे बिना नहीं रह सके। कारण यह था कि मुख्यमंत्री के आगमन के बाद मंच से भाषण देने वालों का सिलसिला शुरु हुआ इसी कड़ी में संचालक ने विधायक को भाषण के लिये आमंत्रित किया भाषण शुरु करने के पहले उन्होने एक नारा लगवाया लेकिन विधायक नारा भूल गये और नारा लगवाने में चूक गये तो मंच संचालक बाबुलाल पटेल ने विधायक को भूल गये नारा याद दिलाया फिर विधायक ने उक्त नारा लगवाने का प्रयास कियो लेकिन फिर भी वे भूल गये तो जनता खूब हंसी। मंच पर बैठे मुख्यमंत्री भी हंसी नहीं रोक पाये जब विधायक उक्त नारा नहीं लगवा पाये तो संचालक बाबुलाल पटेल ने ही उक्त नारा लगवाया और इस तरह आष्टा विधायक अपनी झांकी जमाने के चक्कर में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में हजारों जनता के बीच हंसी के पास बन गये। बाद में उन्होने अपना भाषण पूरा किया।
खुले आम चल रही है नदी में मोटरें, कुछ ने जलपरी डाल रखी
सीहोर 14 जून (नि.सं.)। सीवन नदी में यूं तो पानी की चोरी का किस्सा नया नहीं हैं यहाँ 12 महिने पानी की चोरी खुले आम होती है और बढ़ियाखेड़ी तथा कस्बाई क्षेत्र में तो नदी किनारे की जमीनों पर नदी से पानी ले-लेकर खेती भी चलती रहती है लेकिन इस बार तो हद यह हो गई की कस्बा क्षेत्र में कई लोगों ने नदी में मोटरें डाल दी एक ने तो बकायदा जलपरी ही नदी में पटक दी।
नगर में एक तरफ भयावह जल संकट का दौर रहता है ओर दूसरी और सीवन नदी में पानी की चोरी का क्रम कभी टूटता ही नहीं है। जिला प्रशासन से कई बार कहने के बाद भी वह सीवन नदी से हो रही खुले आम पानी की चोरी को रोकने के लिये सक्रिय नहीं होता। पूरे वर्ष में सिर्फ एक बार ही पिछले दिनों प्रशासन की सक्रियता के चलते कुछ मोटरें पकड़ाई थीं लेकिन अभी भी बढ़ियाखेड़ी और कस्बा क्षेत्र के आसपास ढेर सारी मोटरें सीवन नदी में डली हुई हैं। पानी की चोरी करती यह मोटरें धीरे-धीरे बड़े हार्स पावर की इस्तेमाल की जाने लगी है। सीवन के किनारे सटे अधिकांश खेत मालिक नदी से पानी चुराने से बाज नहीं आते हैं। कुछ खुले आम तो कुछ छुपकर रात के समय मोटर डालते हैं।
इस बार कस्बा जनता घांट के आसपास तो कुछ लोगों ने जलपरी मोटर ही डाल दी थी और खुले आम पानी की चोरी की थी। उल्लेखनीय है सिंचाई विभाग को भारी भरकम रकम चुकाने के बाद भगवान पुरा तालाब से सीहोर की सीवन नदी के लिये पानी छोड़ा जाता है तब जाकर नगर के सभी पेयजल स्त्रोत कुएं, बावड़ी और नलकूर रिचार्ज हो पाते हैं लेकिन पानी चोर सीवन को समय से पहले ही खाली कर देते हैं।
नगर में एक तरफ भयावह जल संकट का दौर रहता है ओर दूसरी और सीवन नदी में पानी की चोरी का क्रम कभी टूटता ही नहीं है। जिला प्रशासन से कई बार कहने के बाद भी वह सीवन नदी से हो रही खुले आम पानी की चोरी को रोकने के लिये सक्रिय नहीं होता। पूरे वर्ष में सिर्फ एक बार ही पिछले दिनों प्रशासन की सक्रियता के चलते कुछ मोटरें पकड़ाई थीं लेकिन अभी भी बढ़ियाखेड़ी और कस्बा क्षेत्र के आसपास ढेर सारी मोटरें सीवन नदी में डली हुई हैं। पानी की चोरी करती यह मोटरें धीरे-धीरे बड़े हार्स पावर की इस्तेमाल की जाने लगी है। सीवन के किनारे सटे अधिकांश खेत मालिक नदी से पानी चुराने से बाज नहीं आते हैं। कुछ खुले आम तो कुछ छुपकर रात के समय मोटर डालते हैं।
इस बार कस्बा जनता घांट के आसपास तो कुछ लोगों ने जलपरी मोटर ही डाल दी थी और खुले आम पानी की चोरी की थी। उल्लेखनीय है सिंचाई विभाग को भारी भरकम रकम चुकाने के बाद भगवान पुरा तालाब से सीहोर की सीवन नदी के लिये पानी छोड़ा जाता है तब जाकर नगर के सभी पेयजल स्त्रोत कुएं, बावड़ी और नलकूर रिचार्ज हो पाते हैं लेकिन पानी चोर सीवन को समय से पहले ही खाली कर देते हैं।
टेम्पों मोटर साईकिल भिड़े, 4 घायल
सीहोर 14 जून (नि.सं.)। इछावर थाना क्षेत्र में गत दिनों शाम साढ़े चार बजे हुए इछावर सीहोर र्मा कांकड़खेड़ा के समीप एक टेम्पों और मोटर साईकिल की टक्कर में चार लोग घायल हो गये। सूचना पर पुलिस ने प्रकरण पंजीबध्द कर लिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार फूल मोगरा मण्डी निवासी महेन्द्र वर्मा पुत्र भागीरथ वर्मा 30 साल अपनी बाइक एमपी 37 0498 से इछावर अपनी भाभी एवं दो बच्चियों को लेकर फूल मोबरा आ रहा था कि पीछे से आ रहे टेम्पो क्रमांक एमपी 04 के 7967 के चालक ने तेजगति एवं लापरवाही पूर्वक टेम्पो चलाकर इनकी बाइक में टक्कर मार दी। परिणाम स्वरुप महेन्द्र को सिर में चोंट आने से सीहोर रिफर किया गया तथा भावी कमलाबाई, बच्ची सविता एवं मनीषा को भी इलाज हेतु अस्पताल सीहोर भेजा गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार फूल मोगरा मण्डी निवासी महेन्द्र वर्मा पुत्र भागीरथ वर्मा 30 साल अपनी बाइक एमपी 37 0498 से इछावर अपनी भाभी एवं दो बच्चियों को लेकर फूल मोबरा आ रहा था कि पीछे से आ रहे टेम्पो क्रमांक एमपी 04 के 7967 के चालक ने तेजगति एवं लापरवाही पूर्वक टेम्पो चलाकर इनकी बाइक में टक्कर मार दी। परिणाम स्वरुप महेन्द्र को सिर में चोंट आने से सीहोर रिफर किया गया तथा भावी कमलाबाई, बच्ची सविता एवं मनीषा को भी इलाज हेतु अस्पताल सीहोर भेजा गया।
इसलिये निरक्षरों का अंगूठा मान्य होता है
आष्टा 14 जून (नि.सं.)। जो लोग निरक्षर होते हैं और वे जरुरी दस्तावेतों व अन्य लिखा पढ़ी में हस्ताक्षर नहीं कर पाते हैं इसलिये उनका अंगूठा मान्य होता है। अंगूठे की निशानी को ही हस्ताक्षर माना जाता है। अब प्रश् यह उठता है कि हाथ में पाँच अंगुलिया होती हैं उनमें से किसी अंगुली को अंगूठे की तरह मान्यता क्यों नहीं अंगुलियों को दस्तावेजों पर या लिखापढ़ी में निशानी क्यों नहीं ली जाती है। शायद इसके बारे में किसी को ज्ञान हो ऐसा कम को ही मालूम होगा लेकिन इसके पीछे एक ऐसा सत्य छुपा है जो परिवर्तित नहीं हो सकता। अंगूठे को ही निशानी या निरक्षर व्यक्ति के हस्ताक्षर के रुप में इसलिये मान्य किया गया है क्योंकि हाथ में जो अंगूठे के अलावा चार अन्य ऊंगलियां हैं इनकी रेखाएं परिवर्तित होती हैं जबकि अंगूठा एक मात्र ऐसा है जिसकी रेखाएं कभी भी परिवर्तित नहीं होती हैं इसलिये अंगूठे की निशानी को निरक्षरों के हस्ताक्षर के रुप में मान्य किया गया है। उक्त रहस्यमय तथ्य परक बात महावीर स्वामी श्वेताम्बर प्यास प्रवर मुनि श्री वीररत्न विजय जी ने धर्मसभा में अरिहंत की वाणी को समझाने के लिये बताई। मुनिश्री ने बताया कि जिस प्रकार अंगूठे की रेखा परिवर्तित नहीं होती है ठीक उसी प्रकार अरिहंत की वाणी में कभी भी किसी भी युग में परिवर्तित नहीं होती है।
स्थानान्तरण होते ही एसपी इलेवन ने कलेक्टर इलेवन की धजियाँ बिखेर दीं
सीहोर 14 जून (नि.सं.)। एक रोमांचक मुकाबले एसपी इलेवन के स्टार बल्लेबाज मदन कुशवाह की 22 गेंदो पर 42 रनों की धमाकेदार पारी की बदौलत एसपी इलेवन क्रिकेट टीम ने कलेक्टर इलेवन को 8 विकेट से पटखनी देकर विदा किया। जिलाधीश राघवेन्द्र सिंह का स्थानान्तरण होने के बाद उनका यह दूसरा महत्वपूर्ण मैच था एक मैच वह आष्टा में तीन दिन पूर्व खेलने पहुँचे थे जहाँ बरसात के कारण दोनो टीमों को बराबर कर दिया गया।
उक्तआशय की जानकारी देते हुए जिला क्रिकेट संघ के प्रवक्ता ने बताया कि आज सुबह एसपी इलेवन के कप्तान डॉ.राजेन्द्र प्रसाद ने टास जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण करने का निर्णय लिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी कलेक्टर इलेवन की शुरुआत काफी खराब हुई।
सलामी बल्लेबाज मोहनिश त्रिवेदी 5 रनों के निजी स्कोर पर कैच आउट होकर चलते बने क्रीज पर आये कमलेश परोचे भी 11 रनों के स्कोर पर संजय पटेल की गेंद पर आउट होकर पैवेलियन लौट गये। विषम स्थिति में फंसी कलेक्टर इलेवन के कप्तान राघवेन्द्र सिंह की साहसिक 59 गेंदो पर 39 रनों की पारी की बदौलत निर्धारित 20 ओवर में 129 रनों का स्कोर खड़ा किया। इसमें आशीष शर्मा ने 29गेंदों पर 38 रन, होमगार्ड कंमाडेंट केएस परिहार ने 17 गेंदों पर 14 रन और अंतराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी मुनिश अंसारी ने 5 गेंदो पर 10 रनों की धुंआधार पारी खेली। एसपी इलेवन की और से गेंदबाजी करते हुए सचिन कीर, संजय पटेल, चेतन मेवाड़ा और पिंटु केशरिया ने 1-1 विकेट झटके। जबाव में लक्ष्य का पीछा करने उतरी एसपी इलेवन ने विजय लक्ष्य 19.2 ओवर में 2 विकेट खोकर प्राप्त कर लिया। जिसमें मदन ने 22 गेंदों पर 40 रन, हेमंत केशरिया ने 35 गेंदो पर 36 रन, चेतन व सचिन कीर ने 20 रन शानदार पारी खेली। आज मैच के अंत में जिला क्रिकेट एसोसियेशन के सचिव प्रमोद पटेल, पुलिस अधीक्षक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, होमगार्ड कमाडेंट केएस परिहार, एस.एन. पहलवान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जी.एस.राजपूत, व्ही.पी.सिंह, ओम वर्मा, बाबूलाल परमार, आशीष गेहलोत, रमेश चतुर्वेदी, उल्लास मामा, विशाल परदेशी, भगवान चन्द्रवंशी, राजेश विलय, अतुल कुशवाह, गौरव खरे, महेन्द्र शर्मा आदि ने कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह को विदाई दी। इस अवसर पर कांग्रेस नेता प्रमोद पटेल ने कहा कि कलेक्टर राघवेन्द्र ईमानदार, कर्मठ, जनसेवक हैं मैं ही नहीं हर खेल प्रेमी उन्हे हमेशा याद करता रहेगा।
उक्तआशय की जानकारी देते हुए जिला क्रिकेट संघ के प्रवक्ता ने बताया कि आज सुबह एसपी इलेवन के कप्तान डॉ.राजेन्द्र प्रसाद ने टास जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण करने का निर्णय लिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी कलेक्टर इलेवन की शुरुआत काफी खराब हुई।
सलामी बल्लेबाज मोहनिश त्रिवेदी 5 रनों के निजी स्कोर पर कैच आउट होकर चलते बने क्रीज पर आये कमलेश परोचे भी 11 रनों के स्कोर पर संजय पटेल की गेंद पर आउट होकर पैवेलियन लौट गये। विषम स्थिति में फंसी कलेक्टर इलेवन के कप्तान राघवेन्द्र सिंह की साहसिक 59 गेंदो पर 39 रनों की पारी की बदौलत निर्धारित 20 ओवर में 129 रनों का स्कोर खड़ा किया। इसमें आशीष शर्मा ने 29गेंदों पर 38 रन, होमगार्ड कंमाडेंट केएस परिहार ने 17 गेंदों पर 14 रन और अंतराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी मुनिश अंसारी ने 5 गेंदो पर 10 रनों की धुंआधार पारी खेली। एसपी इलेवन की और से गेंदबाजी करते हुए सचिन कीर, संजय पटेल, चेतन मेवाड़ा और पिंटु केशरिया ने 1-1 विकेट झटके। जबाव में लक्ष्य का पीछा करने उतरी एसपी इलेवन ने विजय लक्ष्य 19.2 ओवर में 2 विकेट खोकर प्राप्त कर लिया। जिसमें मदन ने 22 गेंदों पर 40 रन, हेमंत केशरिया ने 35 गेंदो पर 36 रन, चेतन व सचिन कीर ने 20 रन शानदार पारी खेली। आज मैच के अंत में जिला क्रिकेट एसोसियेशन के सचिव प्रमोद पटेल, पुलिस अधीक्षक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, होमगार्ड कमाडेंट केएस परिहार, एस.एन. पहलवान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जी.एस.राजपूत, व्ही.पी.सिंह, ओम वर्मा, बाबूलाल परमार, आशीष गेहलोत, रमेश चतुर्वेदी, उल्लास मामा, विशाल परदेशी, भगवान चन्द्रवंशी, राजेश विलय, अतुल कुशवाह, गौरव खरे, महेन्द्र शर्मा आदि ने कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह को विदाई दी। इस अवसर पर कांग्रेस नेता प्रमोद पटेल ने कहा कि कलेक्टर राघवेन्द्र ईमानदार, कर्मठ, जनसेवक हैं मैं ही नहीं हर खेल प्रेमी उन्हे हमेशा याद करता रहेगा।
प्रमाणित बीज नहीं मिलने से किसान परेशान
जावर 14 जून (नि.सं.)। क्षेत्र में खरीफ की बुआई का काम शुरु हो गया है। लेकिन किसानों को अभी भी प्रमाणित बीज नहीं मिल रहा है। क्षेत्र के किसान रोज प्रमाणित बीज के लिये समिति के चक्कर काट रहे हैं लेकिन बीज कहीं भी नहीं मिल रहा है परेशान किसानों ने जिला प्रशासन से क्षेत्र की समितियों से प्रमाणित बीज शीघ्र उपलब्ध कराने की मांग की है। क्षेत्र में पूर्व जनपद सदस्य कल्याण सिंह का कहना है कि क्षेत्र में बारिश का दौर शुरु हो गया। कई-कई बोवनी भी शुरु हो गई है लेकिन किसान अभी भी प्रमाणित बीज नहीं मिलने से इधर-उधर बीज के लिये भटकता फिर रहा है लेकिन उसे कोई भी संतोषजनक जबाव नहीं देता। वह मजबूरी में बीज विक्रेताओं से मंहगे भाव पर बीज खरीदने को मजबूर है। सिंह का कहना है कि जिला प्रशासन को बोवनी के समय को देखते हुए क्षेत्र की समितियों में शीघ्र बीज बेचने की व्यवस्था करना चाहिये ताकि समय रहते किसान बोवनी कर सके। उधर सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक सान सिंह का कहना है कि हमने समिति की और से तीन माह पहले ही 50 क्विंटल बीज भेजने की डिमांड भेज चुके हैं लेकिन हमारे पास अभी तक बीज के नाम पर एक दाना भी नहीं आया है ।
महिला चिकित्सक अंजना सिंह, 2 दिन की छुट्टी पर गई थीं 51 दिन बाद भी नहीं लौटी...
आष्टा 14 जून (नि.सं.)। सिविल अस्पताल में पदस्थ महिला चिकित्सक डॉ. श्रीमति अंजना सिंह 26 अप्रेल को 2 दिन की छुट्टी पर गई थीं लंकिन 15 जून को उन्हे 51 दिन हो गये हैं। 51 दिन बाद भी वे आष्टा अस्पताल कार्य पर नहीं लौटी हैं। दो दिन की छुट्टी खत्म होने के बाद जरुर उनकी और से एक टेलिग्राम आया था कि छुट्टी बढ़ा देवें कितने दिन की छुट्टी बढ़ाना है यह स्पष्ट नहीं है। आष्टा सिविल अस्पताल में तीन महिला चिकित्सक पदस्थ हैं इसमें से अंजना सिंह 2 दिन की छुट्टी पर गई थीं जो 51 दिन बाद भी नहीं लौटी हैं। शेष 2 महिला चिकित्सक श्रीमति अर्चना सोनी एवं श्रीमति माधवी राय हैं इसमें से एक नाईट में कार्य करती हैं तो दूसरे दिन उनका आफ रहता है शेष एक महिला चिकित्सक के जिम्मे अस्पताल के आने वाली सभी महिला मरीजों को एवं प्रसूति के लिये आने वाली महिलाओं की जिम्मेदारी रहती है जो संभालना मुश्किल का कार्य होता है और इस कारण से महिला मरीजों को कई बार परेशानी का सामना भी करना पड़ता है। 2 दिन की छुट्टी पर गई महिला चिकित्सक 51 दिन बाद भी नहीं लौटी। इस संबंध में बीएमओ रामचन्द्र गुप्ता से जब चर्चा की तो उन्होने बताया कि 2 दिन की छुट्टी के बाद टेलिग्राम पर उनकी छुट्टी बढ़ाने की सूचना आई थी वैसे हमने इसकी सूचना जिला कार्यालय कर दी है।
एक लाख गम्बूशिया मछली मलेरिया रोकने आयेगी
सीहोर 14 जून (नि,स, ) मलेरिया निरोधक माह जून मनाये जाने हेतु जिला स्तरीय टास्क फोर्स बैठक एडीएम श्री मति भावना वालिम्बे की अध्यक्षता में कलेक्टर सभा कक्ष सीहोर में सम्पन्न की गई । मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारी सीहोर डा एल मरावी, एवं आंनद शर्मा, आर सी सिरसाठिया सहायक मलरिया अधिकारी द्वारा मलेरिया माह जून में आयोजित गतिविधियों पर बैठक मे उपस्थित समस्त जिला स्तरीय विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अवगत कराया गया। बैठक मे डा मरावी द्वारा मलेरिया के लक्षण एवं उसके बचाव की जानकारी दी।
मुख्य रूप से मच्छर उत्पत्ति वाले स्थानों पर कीट नाशक एवं स्थायी जल स्त्रोंतो में विभाग द्वारा गम्बूसिया मछली डालने कि जानकारी दी ग्रामीण क्षेत्र की जनता को मलेरिया डेगुं चिकनगुनिया से बचाव कि जानकारी दी । साथ डा मरावी ने कार्य योजना अनुसार अवगत कराया कि प्रत्येक विकास खण्ड पर मलेरिया एडवोकेसी वर्कशाप ब्लाक के अन्य विभाग के अधिकारियों कर्मचारियो जनप्रतिनिधियो को आमंत्रित करें। मलेरिया डेगुं चिकनगुनिया के बचाव हेतु विस्तृत जानकारी दी जावें। इस प्रकार स्थायी एवं अस्थायी जल स्त्रोंतो से मच्छर की उत्पत्ति के नियंत्रण हेतु लार्वाभक्षी गम्बुसिया मछली एक लाख मछलियां डाली जावेगी । मलेरिया प्रमावित गांवो मे विशेष सर्वे लेंस कराया जावें। समस्त बी एम ओ अपने-2 ब्लाकों मे हाट बाजारों में माईकिंग पेम्पलेट एवं पोस्टरो द्वारा आम जनता को मलेरिया से बचाव हेतु प्रचार प्रसार कराया जावें । निर्देश दिऐ गए है कि पंचायत स्तर पर भी मलेरिया एडवोकेसी वर्कशाप आयोजन हेतु अवगत कराया । प्रति बल मे 40 ग्राम पंचायतों मे मलेरिया में एडवोकेसी कार्यशालाओं का आयोजन कराया जाना है। मलेरिया रथ जिले के के समस्त विकास खण्डों में एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर आम जनता को मलेरिया रोड डेगुं एवं चिकनगुनिया जैसी घातक बीमारियों के बचाव संम्बन्धी जानकारी देगा । माह जून मे मच्छरो की उत्पत्ति पर नियंत्रण एवं मलेरिया डेगुं चिकनगुनिया बीमारियों से बचाव हेतु किसी व्यक्ति को बुखार आने पर नजदीकी स्वास्थ केन्द्रों या स्वास्थ कार्यकताओं से खून की जांच अवश्यक करावें । जांच में अगर मलेरिया पाया जाता है, तो दवाई का पूर्ण कोर्स किसी स्वास्थ केन्द्र से या स्वास्थ कार्यकर्ता से प्राप्त करें। मलेरिया चिकनगुनिया डेगुं आदि खतरनाक बीमारियों से बचाव हेतु समस्त आम जनता अपने -2 घरों के आस पास सफाई रखे, घरों के आस पास गढढों में पानी इकठ्ठा न होने दे मच्छर दानी का प्रयोग करें । साथ ही डेगुं का लक्षण , जैसे तेज बुखार त्वचा पर खून के धब्बे जोडो पर दर्द खून की उल्टी , सिरदर्द आदि चिकनगुनिया के लक्षण जैसे तेज बुखार जोडो में सुजन सांस लेने मे कठिनाई आदि। मलेरिया के लक्षण दिखने पर निम् उपाय करें। बुखर आने पर स्वयं दवा न ले तुरन्त निकट के चिकित्सालय मे अथवा चिकित्सा केन्द्र पर डाक्टर को दिखावें , अधिक मात्रा में पानी ग्लूकोज फलो का रस आदि पिलावें, तेज बुखार आने पर शरीर को गीले कपड़े से पोंछे एवं पेरासिटामाल की, गोली चिकित्सक से परामर्श लें।
मुख्य रूप से मच्छर उत्पत्ति वाले स्थानों पर कीट नाशक एवं स्थायी जल स्त्रोंतो में विभाग द्वारा गम्बूसिया मछली डालने कि जानकारी दी ग्रामीण क्षेत्र की जनता को मलेरिया डेगुं चिकनगुनिया से बचाव कि जानकारी दी । साथ डा मरावी ने कार्य योजना अनुसार अवगत कराया कि प्रत्येक विकास खण्ड पर मलेरिया एडवोकेसी वर्कशाप ब्लाक के अन्य विभाग के अधिकारियों कर्मचारियो जनप्रतिनिधियो को आमंत्रित करें। मलेरिया डेगुं चिकनगुनिया के बचाव हेतु विस्तृत जानकारी दी जावें। इस प्रकार स्थायी एवं अस्थायी जल स्त्रोंतो से मच्छर की उत्पत्ति के नियंत्रण हेतु लार्वाभक्षी गम्बुसिया मछली एक लाख मछलियां डाली जावेगी । मलेरिया प्रमावित गांवो मे विशेष सर्वे लेंस कराया जावें। समस्त बी एम ओ अपने-2 ब्लाकों मे हाट बाजारों में माईकिंग पेम्पलेट एवं पोस्टरो द्वारा आम जनता को मलेरिया से बचाव हेतु प्रचार प्रसार कराया जावें । निर्देश दिऐ गए है कि पंचायत स्तर पर भी मलेरिया एडवोकेसी वर्कशाप आयोजन हेतु अवगत कराया । प्रति बल मे 40 ग्राम पंचायतों मे मलेरिया में एडवोकेसी कार्यशालाओं का आयोजन कराया जाना है। मलेरिया रथ जिले के के समस्त विकास खण्डों में एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर आम जनता को मलेरिया रोड डेगुं एवं चिकनगुनिया जैसी घातक बीमारियों के बचाव संम्बन्धी जानकारी देगा । माह जून मे मच्छरो की उत्पत्ति पर नियंत्रण एवं मलेरिया डेगुं चिकनगुनिया बीमारियों से बचाव हेतु किसी व्यक्ति को बुखार आने पर नजदीकी स्वास्थ केन्द्रों या स्वास्थ कार्यकताओं से खून की जांच अवश्यक करावें । जांच में अगर मलेरिया पाया जाता है, तो दवाई का पूर्ण कोर्स किसी स्वास्थ केन्द्र से या स्वास्थ कार्यकर्ता से प्राप्त करें। मलेरिया चिकनगुनिया डेगुं आदि खतरनाक बीमारियों से बचाव हेतु समस्त आम जनता अपने -2 घरों के आस पास सफाई रखे, घरों के आस पास गढढों में पानी इकठ्ठा न होने दे मच्छर दानी का प्रयोग करें । साथ ही डेगुं का लक्षण , जैसे तेज बुखार त्वचा पर खून के धब्बे जोडो पर दर्द खून की उल्टी , सिरदर्द आदि चिकनगुनिया के लक्षण जैसे तेज बुखार जोडो में सुजन सांस लेने मे कठिनाई आदि। मलेरिया के लक्षण दिखने पर निम् उपाय करें। बुखर आने पर स्वयं दवा न ले तुरन्त निकट के चिकित्सालय मे अथवा चिकित्सा केन्द्र पर डाक्टर को दिखावें , अधिक मात्रा में पानी ग्लूकोज फलो का रस आदि पिलावें, तेज बुखार आने पर शरीर को गीले कपड़े से पोंछे एवं पेरासिटामाल की, गोली चिकित्सक से परामर्श लें।
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