Sunday, May 11, 2008
हत्या का मामला दर्ज
सीहोर 10 मई (नि.सं.)। गत दिनों बुदनी क्षैत्र के देवगांव स्थित नाले में संदिग्ध परिस्थितियों में मिली एक बालक की लाश के मामले में पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। उल्लेखनीय है कि जिस समय बालक की लाश मिली थी उसके बदन पर चोट के निशान थे । बदनी पुलिस ने आज उक्त कार्यवाही पोस्टमार्टम रिर्पोट प्राप्त होने पर की है ।
उपचार के दौरान विवाहिता की मौत
आष्टा 10 मई (नि.प्र.)। आष्टा थाना क्षैत्र के ग्राम रिछाड़िया में रहने वाली एक विवाहिता की उपचार के दौरान मौत हो गई । पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है ।
जानकारी के अनुसार ग्राम रिछाड़िया में रहने वाली 50 वर्षीय सुशीला पत्नी धूलगिरी बीते माह अज्ञात कारणों के चलते जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था। जिसे उपचार के हेतू एम.वाय.अस्प. इंदौर में दाखिल कराया गया था जहां पर उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई । इधर दोराहा थाना क्षैत्र में सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल 29 वर्षीय राजेश आ. ओमसेन निवासी इमली खेड़ा की मृत्यु इलाज के दौरान एलबीएस अस्प. भोपाल में हो गई ।
जानकारी के अनुसार ग्राम रिछाड़िया में रहने वाली 50 वर्षीय सुशीला पत्नी धूलगिरी बीते माह अज्ञात कारणों के चलते जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था। जिसे उपचार के हेतू एम.वाय.अस्प. इंदौर में दाखिल कराया गया था जहां पर उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई । इधर दोराहा थाना क्षैत्र में सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल 29 वर्षीय राजेश आ. ओमसेन निवासी इमली खेड़ा की मृत्यु इलाज के दौरान एलबीएस अस्प. भोपाल में हो गई ।
प्याऊ खुलने से हर्ष व्याप्त
इछावर 10 मई (नि.प्र.)। इछावर के बस स्टेण्ड पर प्याऊ खुलने से यात्रियों में हर्ष व्याप्त है । वरिष्ठ समाज सेवक रितेश सेन राणु पान भण्डार पत्रकार राजेन्द्र सक्सेना की और से प्याऊ का शुभारंभ हो चुका है । जिससे कि लोगो को पीने के पानी के लिये इधर-उधर भटकना नही पड़ता है। प्याऊ का निर्माण हो जाने से आम व्यक्ति खासकर यात्रियों को पीने के पानी के लिये होटलो का सहारा नही लेना पड़ता है । इससे कि यात्रियों में उत्साह है ।
Saturday, May 10, 2008
बड़ी सिंटेक्स टंकियाँ अब फिर खरीदेगी नगर पालिका.......? क्यों खरीदेगी क्या आपको मालूम है...?
सीहोर 9 मई (नि.सं.)। नगर पालिका ने पिछले दिनों अपनी पुरानी लोहे की टंकियों को बिसार कर नई सिंटेक्स की लाखों रुपये की टंकियाँ खरीदी थी ? जो हर एक वार्ड में करीब 2 आ जायें इतनी ली गई थी इनका क्या उपयोग हो रहा है ? यह किस काम की साबित हुई हैं ? और किस काम आ रही हैं ? यह सर्वविदित है ही लेकिन इसके बावजूद अब नये सिरे वापस 10 टंकियाँ खरीदे जाने के बिल नगर पालिका में बनने की चर्चाएं हैं। यह 10 टंकियाँ अब कौन सप्लाई करेगा ? किस भाव में खरीदी जा रही हैं को लेकर भी चर्चाएं सरगर्म हैं ? लेकिन क्या इनकी आवश्यकता है ? क्या आपको पता है कि यह क्यों खरीदी जा रही है।
पिछले दिनों बड़ी-बड़ी काली सिंटेक्स की टंकियाँ नगर के विभिन्न मोहल्लों में आकर रखाई थी। लोग पूछ रहे थे भाई इनका क्या होगा ? इनमें से कुछ में नल लगे फिर इनमें नगर पालिका द्वारा पानी भराना शुरु हुआ। लेकिन इनकी प्रक्रिया कुछ लम्बी नहीं चल सकी। पता चला कि कुछ ही दिनों में आधी टंकियाँ बेकाम हो गई। न तो इनमें पानी भरा रहा था और ना ही पानी भराने से पूरा मोहल्ला इसका उपयोग कर पा रहा था। छोटे-छोटे नलों से आने वाले पानी से 4 केन पानी भराने में इतना समय लग जाता था कि लोग घबराकर वापस चले जाते थे और किसी अन्यत्र स्थान से पानी की जुगाड़ करते थे।
पूर्व में जो सिंटेक्स की टंकियाँ नगर पालिका में आई थी वह लोक निर्माण विभाग के माध्यम से आने की सूचना है। किसी अन्य शासकिय विभाग के माध्यम से आने के कारण इन टंकियों से नगर पालिका के ठेकेदारों को कोई लाभ हानि हुई ही नहीं और लाखों रुपये का काम भी हो गया। हालांकि इस प्रयोग ने ठेकेदारों के लिये नये द्वार अवश्य खोल दिये थे । वह भी सोच रहे थे कि काश उन्हे टंकी सप्लाई करने के आर्डर मिल जाते तो उनके मजे हो जाते....। इधर नगर भर में रखी टंकिया अब धीरे-धीरे अनुपयोगी सिध्द होने लगी है और प्रभावशाली लोग उसका खुद के लिये कैसे उपयोग हो इसकी योजनाएं भी बनाने लगे हैं।
अब नगर पालिका से निकली कुछ अफवाहों पर ध्यान दें तो ऐसा अफवाह चल पड़ी है कि कुछ ही दिन पूर्व कुछ खास लोगों ने गुपचुप बैठक में निर्णय लिया है कि 10 टंकियां और सप्लाई करी जाये जो लाखों रुपये की हों। इसके लिये एक ठेकेदार भी तय कर लिया गया है। यदि अफवाहों पर विश्वास किया जाये तो यह भी बात है कि यह टंकियाँ 2 व 6 हजार लीटर ही खरीदी जायेंगी और इनका मूल्य 6-7 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से भी निर्धारित हो सकता है। इस मान से 6 हजार लीटर की टंकी यदि 7 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से खरीदी गई तो 42 हजार की पड़ेगी।
बाजार में जिनती अधिक लीटर की टंकी खरीदी जाती है उतने ही दाम प्रति लीटर कम होते जाते हैं। सिंटेक्स की बड़ी टंकियों के दाम 4 रुपये 40 पैसे के आसपास होने की संभावना है।
जब नगर में टंकियों को लेकर यादा उत्साह नहीं है, जनता को कोई लाभ नहीं है ? और फिर इनका कोई उपयोग भी नहीं है ? पूर्व की लोहे वाली टंकियों का उपयोग किया ही नहीं जा रहा है ? उनका उपयोग किया जा सकता है। तो ऐसी सब परिस्थितियों में भी यदि फिर टंकी खरीदी जा रही है तो निश्चित ही क्या कारण होंगे इसको लेकर सहज ही अंदाजा लग सकता है।
पिछले दिनों बड़ी-बड़ी काली सिंटेक्स की टंकियाँ नगर के विभिन्न मोहल्लों में आकर रखाई थी। लोग पूछ रहे थे भाई इनका क्या होगा ? इनमें से कुछ में नल लगे फिर इनमें नगर पालिका द्वारा पानी भराना शुरु हुआ। लेकिन इनकी प्रक्रिया कुछ लम्बी नहीं चल सकी। पता चला कि कुछ ही दिनों में आधी टंकियाँ बेकाम हो गई। न तो इनमें पानी भरा रहा था और ना ही पानी भराने से पूरा मोहल्ला इसका उपयोग कर पा रहा था। छोटे-छोटे नलों से आने वाले पानी से 4 केन पानी भराने में इतना समय लग जाता था कि लोग घबराकर वापस चले जाते थे और किसी अन्यत्र स्थान से पानी की जुगाड़ करते थे।
पूर्व में जो सिंटेक्स की टंकियाँ नगर पालिका में आई थी वह लोक निर्माण विभाग के माध्यम से आने की सूचना है। किसी अन्य शासकिय विभाग के माध्यम से आने के कारण इन टंकियों से नगर पालिका के ठेकेदारों को कोई लाभ हानि हुई ही नहीं और लाखों रुपये का काम भी हो गया। हालांकि इस प्रयोग ने ठेकेदारों के लिये नये द्वार अवश्य खोल दिये थे । वह भी सोच रहे थे कि काश उन्हे टंकी सप्लाई करने के आर्डर मिल जाते तो उनके मजे हो जाते....। इधर नगर भर में रखी टंकिया अब धीरे-धीरे अनुपयोगी सिध्द होने लगी है और प्रभावशाली लोग उसका खुद के लिये कैसे उपयोग हो इसकी योजनाएं भी बनाने लगे हैं।
अब नगर पालिका से निकली कुछ अफवाहों पर ध्यान दें तो ऐसा अफवाह चल पड़ी है कि कुछ ही दिन पूर्व कुछ खास लोगों ने गुपचुप बैठक में निर्णय लिया है कि 10 टंकियां और सप्लाई करी जाये जो लाखों रुपये की हों। इसके लिये एक ठेकेदार भी तय कर लिया गया है। यदि अफवाहों पर विश्वास किया जाये तो यह भी बात है कि यह टंकियाँ 2 व 6 हजार लीटर ही खरीदी जायेंगी और इनका मूल्य 6-7 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से भी निर्धारित हो सकता है। इस मान से 6 हजार लीटर की टंकी यदि 7 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से खरीदी गई तो 42 हजार की पड़ेगी।
बाजार में जिनती अधिक लीटर की टंकी खरीदी जाती है उतने ही दाम प्रति लीटर कम होते जाते हैं। सिंटेक्स की बड़ी टंकियों के दाम 4 रुपये 40 पैसे के आसपास होने की संभावना है।
जब नगर में टंकियों को लेकर यादा उत्साह नहीं है, जनता को कोई लाभ नहीं है ? और फिर इनका कोई उपयोग भी नहीं है ? पूर्व की लोहे वाली टंकियों का उपयोग किया ही नहीं जा रहा है ? उनका उपयोग किया जा सकता है। तो ऐसी सब परिस्थितियों में भी यदि फिर टंकी खरीदी जा रही है तो निश्चित ही क्या कारण होंगे इसको लेकर सहज ही अंदाजा लग सकता है।
आज 10 मई को झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और मंगलपाण्डे आयेंगे नगर के बीच
सीहोर 9 अप्रैल (नि.सं.)। 1857 के रण वांकुरों की स्मृति में संस्कार भारती द्वारा नयन् 1857 के रूप में इस महान स्थान्त्र समर की 150वीं वर्षगांठ के रूप में वर्ष भर समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम पूरे राष्ट्र में आयोजित किये थे जिसमें उन स्थानों जहां पर कि 1857 के स्वातंत्र समर के योद्धा शहीद हुये थे उन स्थानों की पवित्र धूली पूरे राष्ट्र से एकत्रित कर पेशवा नाना साहब के जन्मस्थान बिठूरर में एकत्रित कर प्रणामांजली अर्पित की थी ।
अब वही धूली पवित्र नदियों के जल से अभिसिंचित कर देश के विभिन्न स्थानों पर धूलिकलश के माध्यम से पहुंचाई गई है ।
दिनांक 10 मई,08 को हमारी सिद्धपुर नगरी में 1857 के स्वातंत्र समर के उन महान योद्धाओं के पवित्र रक्त से सिंचित इस धूली की कलश यात्रा आयोजित की गई है । यह कलश यात्रा राठौर चौराहा गंज से शाम 5 बजे प्रांरभ होगी, इसमें भारत माता तथा रानी लक्ष्मीबाई, मंगलपांडे, तात्याटोपे, बहादूर शाह जफर, के प्रतिरूप बनाकर जुलुस के रूप में निकाले जायेंगे यह कलश यात्रा बड़ा बाजार सीहोर पहुंचेगी जहां पर मुख्य कार्यक्रम किराना व्यापारी संघ, नव दुनिया समाचार पत्र, संस्कार भारती के सौजन्य से राष्ट्र भक्ति पूर्ण गीतों का संगीतमय कार्यक्रम होगा । इस कार्यक्रम में राजधानी भोपाल एवं जिला सीहोर के कलाकार एक से बढ़कर एक राष्ट्रभक्ति के गीतों की प्रस्तुति देगें ।
मुख्य कार्यक्रम स्थल पर विराट भारत का मानचित्र रंगोली से बनाया जायेगा । कार्यक्रम स्थल पर 1857 दीपकों को प्रावलित कर शहीदों को प्रणामांजली अर्पित की जावेगी । संस्क ार भारती सीहोर किराना व्यापारी संघ तथा नव दुनिया परिवार की और से मुकेश सक्सेना, बसंत दासवानी, राजेन्द्र उपाध्याय, सुनील राठौर, एच.पी.चक्रधर, नन्दकिशोर विश्वकर्मा, मनोहर रैकवार, हरिओम शर्मा दाऊ , नंदकिशोर संधानी, सुंदरलाल राठौर, भानू सक्सेना, अशोक सिसोदिया, मनोज, प्रदीप गौतम, माखन परमार, श्रीमति सरोज ठाकूर, श्रीमति प्रेमलता राठौर, रीना मिश्रा, पंडित रमाकांत समाधिया, आदि ने नागरिकों से अपील की है कि यह इन शहीदों के नाम दिनांक 10 मई,08 को शाम को अपने-अपने घरों में दीप जलाकर श्रद्धांजली अर्पित करें तथा कलश यात्रा में एवं मुख्य कार्यक्रम में भारी तादात में सम्मिलित होकर कार्यक्रम को सफल बनायें ।
अब वही धूली पवित्र नदियों के जल से अभिसिंचित कर देश के विभिन्न स्थानों पर धूलिकलश के माध्यम से पहुंचाई गई है ।
दिनांक 10 मई,08 को हमारी सिद्धपुर नगरी में 1857 के स्वातंत्र समर के उन महान योद्धाओं के पवित्र रक्त से सिंचित इस धूली की कलश यात्रा आयोजित की गई है । यह कलश यात्रा राठौर चौराहा गंज से शाम 5 बजे प्रांरभ होगी, इसमें भारत माता तथा रानी लक्ष्मीबाई, मंगलपांडे, तात्याटोपे, बहादूर शाह जफर, के प्रतिरूप बनाकर जुलुस के रूप में निकाले जायेंगे यह कलश यात्रा बड़ा बाजार सीहोर पहुंचेगी जहां पर मुख्य कार्यक्रम किराना व्यापारी संघ, नव दुनिया समाचार पत्र, संस्कार भारती के सौजन्य से राष्ट्र भक्ति पूर्ण गीतों का संगीतमय कार्यक्रम होगा । इस कार्यक्रम में राजधानी भोपाल एवं जिला सीहोर के कलाकार एक से बढ़कर एक राष्ट्रभक्ति के गीतों की प्रस्तुति देगें ।
मुख्य कार्यक्रम स्थल पर विराट भारत का मानचित्र रंगोली से बनाया जायेगा । कार्यक्रम स्थल पर 1857 दीपकों को प्रावलित कर शहीदों को प्रणामांजली अर्पित की जावेगी । संस्क ार भारती सीहोर किराना व्यापारी संघ तथा नव दुनिया परिवार की और से मुकेश सक्सेना, बसंत दासवानी, राजेन्द्र उपाध्याय, सुनील राठौर, एच.पी.चक्रधर, नन्दकिशोर विश्वकर्मा, मनोहर रैकवार, हरिओम शर्मा दाऊ , नंदकिशोर संधानी, सुंदरलाल राठौर, भानू सक्सेना, अशोक सिसोदिया, मनोज, प्रदीप गौतम, माखन परमार, श्रीमति सरोज ठाकूर, श्रीमति प्रेमलता राठौर, रीना मिश्रा, पंडित रमाकांत समाधिया, आदि ने नागरिकों से अपील की है कि यह इन शहीदों के नाम दिनांक 10 मई,08 को शाम को अपने-अपने घरों में दीप जलाकर श्रद्धांजली अर्पित करें तथा कलश यात्रा में एवं मुख्य कार्यक्रम में भारी तादात में सम्मिलित होकर कार्यक्रम को सफल बनायें ।
दो नेत्रहीन अब देख सकेंगे रंगीन दुनिया, सीहोर में नेत्रदान हुआ
सीहोर 9 मई (नि.सं.)। नेत्र शिविर आयोजित कराने और नेत्रदान कराने वाली जिले की अग्रणी संस्था सेवा के प्रयासों और परिजनों के सहयोग से फिर से दो नेत्रहीनों को रोशनी मिलेगी। सेवा संस्था ने वरिष्ठ समाज सेवी खेमचंद्र अग्रवाल का नेत्रदान कराया। इस नेत्रदान में स्व. खेमचन्द्र अग्रवाल के परिवार की मुख्य भूमिका रही । बड़ा बाजार निवासी वरिष्ठ समाजसेवी खेमचंद अग्रवाल (चूने वाले मामा ) का बुधवार की रात निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे । स्व. अग्रवाल समाज के हित में कई कार्य भी कर चुके है। पूर्व में ही उन्होंने इच्छा व्यक्त कि थी कि मृत्यु के बाद मेंरी दोनो आंखे दान कर दी जाएं । स्व. अग्रवाल की इच्छा उनके निधन के बाद उनके बड़े पुत्र मदनलाल, श्यामलाल, द्वारिका दास, जगदीश प्रसाद अग्रवाल ने पूरी की । उनके निधन के बाद इसकी सूचना सबसे पहले उन्होंने सेवा संस्था के संयोजक को दी । इस पर संस्था के संयोजक कमल झंवर ने जिला अस्पताल में नेत्र विशेषज्ञ डा. एसके जैन, सहायक नेत्र चिकित्सक प्रभात जैन के सहयोग से उनका नेत्र दान कराया । स्व. अग्रवाल की दोनो आंखो से अब दो नेत्रहीनों को रोशनी मिल सकेगी । नेत्रदान के बाद दोनो नेत्र सेवा सदन बैरागढ़ भेजे गये है । स्व. अग्रवाल के नेत्रदान कराने पर उनके परिवार के प्रति संस्था ने साधुवाद ज्ञापित किया है ।
ठंड से प्रभावित किसानों को मुआवजा वितरण शुरू, अभी तक 2 करोड़ बांटे
आष्टा 9 मई (नि.प्र.)। इस बार अत्याधिक ठंड पड़ने से क्षैत्र के सैकड़ो किसानों की हजारो एकड़ में खड़ी चना, मसूर, बटला, व अन्य फसले प्रभावित हुई। म.प्र. सरकार ने ऐसे में किसानों की पीड़ा को समझा और गांव-गांव मे सर्वे कार्य कराया गया । अब तहसील आष्टा से ऐसे पीड़ित किसानों को मुआवजा राशि के चैकों को वितरण ग्राम-ग्राम जाकर वितरण किया जा रहा है । तहसीलदार बिहारी सिंह ने फुरसत को बताया कि अभी तक लगभग 2 करोड़ रुपये के चैक प्रभावित किसान भाईयों को बांटे जा चुके है। तथा लगभग 6 करोड़ की राशि अभी और वितरीत कि जाना है जैसे जैसे प्रकरण तैयार होते जा रहे है चैक बनाकर वितरण किया जा रहा है । श्री सिंह ने बताया कि कई स्थानों से यह शिकायत आ रही है कि बैंक वाले किसानों के चैकों का भुगतान करने के लिए 500 रुपये जमाकर खाता खोलने का कह रहे है । सभी बैंको को निर्देश दिये है कि वे ऐसे किसानों के खाते शुन्य बेलेन्स पर एकाउन्ट खोले और उनके चैको का खातों में जमाकर भुगतान करें । इसके बाद भी अगर कोई बैंक किसानो को परेशान करती है तो और शिकायत प्राप्त होती है तो जो भी कार्यवाही होगी की जायेगी ।
आग से झुलसी बालिका ने अस्पताल में दम तोड़ा
जावर 9 मई (नि.प्र.)। जावर थाना क्षैत्र के कुरावर में रहने वाली आग से जली एक बालिका की उपचार के दौरान मौत हो गई । पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है । जानकारी के अनुसार कुरावर निवासी बाबूलाल की 13 वर्षीय पुत्री राधा बीते माह अपने ही घर में आग से जल गई थी गंभीर रूप से जली हुई राधा को उपचार हेतू एम.वाय.अस्पताल इंदौर में दाखिल कराया गया था जहां पर उसकी मौत हो गई।
आज मंडी के व्यापारी हड़ताल पर रहेंगे
आष्टा 9 मई (नि.प्र.)। अनाज व्यापारियों के महासंघ की गत दिवस आष्टा में संपन्न हुई बैठक में लिये गये निर्णय के अनुसार आज 10 मई को म.प्र. की सभी मंडीयों के व्यापारी अपनी विभिन्न मांगो को लेकर आज एक दिन की सांकेतिक हड़ताल पर रहेंगे । आज मंडी के व्यापारी नीलामी कार्य में भाग नही लेंगे मंडी व्यापारी संघ के अध्यक्ष नवनीत संचेती सचिव दिनेश शर्मा ने बताया कि अगर व्यापारियों की मांगे नही मानी गई तो 15 मई से म.प्र. की सभी मंडीयों के व्यापारी अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जायेगें । मंडी सचिव छोटू खान ने बताया कि व्यापारियों ने 10 मई को एक दिनी हड़ताल का लिखकर सूचना दी है । इसलिए आज 9 मई को एलान करा दिया कि किसान भाई 10 मई को कृषि उपज ना लाये ताकि वे परेशान न हो ।
आज से तेन्दु पत्ता तुड़ाई कार्य प्रारंभ
आष्टा 9 मई (नि.प्र.)। आज से आष्टा क्षैत्र की मेहतवाड़ा एवं सिद्धीकगंज लद्यु वनोपज सहकारी समिति द्वारा तेन्दू पत्ता तुड़वाई कार्य का शुभारंभ किया है इस बार तेन्दू पत्ता संग्रहण क रर््ताओ को प्रति गड्डी 45 रुपये के स्थान पर 55 रुपये दिये जाने के निर्देश दिये है । इस वर्ष 4100 बोरे तेन्दू पत्ता संग्रहण करने का लक्ष्य रखा गया है । वन परिक्षेत्राधिकारी ए.के.सिंह सेंगर ने बताया कि इस वर्ष शासन ने मेहतवाड़ा समिति को 2060 एवं सिद्धीकगंज को 2040 माणक बोरे तेन्दू पत्ता संग्रहण का लक्ष्य दिया है ।
प्रदूषित नदी का कब होगा उद्वार
जावर 9मई (नि.प्र.)। कल-कल करते हुए सबको शुद्व और पवित्र करने वाली तथा प्यास बुझाते हुए भूमि को सींचकर अन्न-भण्डार देने वाली नदी आज स्वयं प्रदूषित होकर शुद्विकरण की बाट जोह रही है ।
नेवज नदी के तट जल भण्डार से रिक्त होकर गंदगी के अतिक्रमण से अपनी बदहाली आंसू बहा रहे है । देवांचल से जावर तक की दस किमी लम्बी यात्रा के बाद मेहतवाड़ा की बाल्यावस्था से तरूणावस्था की ओर पैर रखती हुई नदी अब अपने तटों को भी सुरक्षित नही कर पा रही है ।
जहां एक और गंदगी का साम्राज्य नदी पर बने डेम से बस स्टेण्ड के पास पुल तक व्याप्त है वही पुल के दोनो और अवैध रेत का खनन करने वालों ने किनारों को खोदकर नदी के तटों को विकृत स्वरूप दे दिया है । जिससे बस स्टेण्ड के पास रखी गुमठियां ही खतरे में आ गई है ।
पूर्व समय में मंदिर में रहने वाले महात्मा संत नदी किनारें बने घाट पर स्नान कर नदी में बहते जल एवं किनारों की पवित्रता प्रमाणित करते थे। वही नदी मे बने गंगा जल झीदे से लोग प्यास भी बुझाते थे वही स्नान और पशुओं के पानी पीने की व्यवस्था भी होती थी ।
आज इन स्थानों पर लोग मल त्याग करके गंदगी फैला रहे है । नन्नूलाल का कहना है कि नगर पंचायत भी नदी की सफाई और इसे प्रदूषण मुक्त रखने की दिशा में कोई ठोस उपाय नही कर रही है। वही सुभाष भावसार का कहना है कि बस स्टेण्ड के आसपास के कटते किनारों के लिए भी प्रोजेक्ट बनाना चाहिये । नूतन कुमार जैन का कहना है कि नदी में मिलने वाले गंदे नाले के कारण भी नदी अब एक गंदा नाला बन कर रह गई है। नगर पंचायत को गंगा जल झीरा, किनारे के घाटों को गंदगी से मुक्त कराकर नदी में शौच करने वाले लोगों पर रोक लगाना चाहिये । संतोष लश्कार का कहना है कि नए घाटों का निर्माण कर नदी के किनारों को सौन्दर्यी करण करना चाहिये । इससे किनारों का कटाव भी रूकेगा ।
नेवज नदी के तट जल भण्डार से रिक्त होकर गंदगी के अतिक्रमण से अपनी बदहाली आंसू बहा रहे है । देवांचल से जावर तक की दस किमी लम्बी यात्रा के बाद मेहतवाड़ा की बाल्यावस्था से तरूणावस्था की ओर पैर रखती हुई नदी अब अपने तटों को भी सुरक्षित नही कर पा रही है ।
जहां एक और गंदगी का साम्राज्य नदी पर बने डेम से बस स्टेण्ड के पास पुल तक व्याप्त है वही पुल के दोनो और अवैध रेत का खनन करने वालों ने किनारों को खोदकर नदी के तटों को विकृत स्वरूप दे दिया है । जिससे बस स्टेण्ड के पास रखी गुमठियां ही खतरे में आ गई है ।
पूर्व समय में मंदिर में रहने वाले महात्मा संत नदी किनारें बने घाट पर स्नान कर नदी में बहते जल एवं किनारों की पवित्रता प्रमाणित करते थे। वही नदी मे बने गंगा जल झीदे से लोग प्यास भी बुझाते थे वही स्नान और पशुओं के पानी पीने की व्यवस्था भी होती थी ।
आज इन स्थानों पर लोग मल त्याग करके गंदगी फैला रहे है । नन्नूलाल का कहना है कि नगर पंचायत भी नदी की सफाई और इसे प्रदूषण मुक्त रखने की दिशा में कोई ठोस उपाय नही कर रही है। वही सुभाष भावसार का कहना है कि बस स्टेण्ड के आसपास के कटते किनारों के लिए भी प्रोजेक्ट बनाना चाहिये । नूतन कुमार जैन का कहना है कि नदी में मिलने वाले गंदे नाले के कारण भी नदी अब एक गंदा नाला बन कर रह गई है। नगर पंचायत को गंगा जल झीरा, किनारे के घाटों को गंदगी से मुक्त कराकर नदी में शौच करने वाले लोगों पर रोक लगाना चाहिये । संतोष लश्कार का कहना है कि नए घाटों का निर्माण कर नदी के किनारों को सौन्दर्यी करण करना चाहिये । इससे किनारों का कटाव भी रूकेगा ।
अस्पताल में प्रसूति के लिए लाई गई महिला के परिजन आक्सीजन के लिए भटकते रहे
आष्टा 9 मई (नि.प्र.)। सिविल अस्पताल आष्टा जो कि हमेशा कई अव्यवस्थाओं के लिए चर्चा में रहता है । यहां के जिम्मेदार अधिकारियों की निगाह भी व्यवस्थाओं पर नही रहती है । आज सुबह सिविल अस्पताल में आष्टा की एक महिला को प्रसूति के लिए परिजन सिविल अस्पताल ले कर पहुंचे महिला को ऑंक्सीजन लगाना है जब यह बताया तो परिजन अस्पताल में स्टोर में पहुंचे तब ज्ञात हुआ कि जो सिलेन्डर यहां रखें है वे खाली है भरा सिलेन्डर स्टोर में रखा है अस्पताल का समय नही हुआ था तब प्रसूति के लिए आई महिला के परिजन स्टोर कीपर के निवास पर पहुंचे और बाद में ऑंक्सीजन से भरा सिलेन्डर निकलवा कर महिला को ऑंक्सीजन लगाया जब मरीज को राहत मिली प्रश् यह उठता है कि जब सिलेन्डर खाली पड़े थे तो उन्हें भरवा कर क्यों नही रखा जाता है । एन वक्त पर ही उन्हें भराने के लिए क्यों भेजा जाता है। ऐसे में कोई गंभीर मरीज आ जाये तो और उसे आवश्यकता के अनुरूप ऑंक्सीजन नही मिला तो क्यो होगा जो होगा उसका जिम्मेदार कौन होगा । प्रसूति वाली महिला और परिजन 1 घंटे तक ऑक्सीजन के लिए आज भटकते रहे ।
सड़क हादसें में सात घायल
सीहोर 9 मई (नि.सं.)। जिले के विभिन्न थाना क्षैत्र में हुयें अलग-अलग सड़क हादसों में सात लोग घायल हो गये । जानकारी के अनुसार दोराहा थाना के कादमपुर निवासी सुरेश अपने भाई लखन के साथ बाइक क्रमांक एमपी-37-एमबी-7002 से सीहोर तरफ आ रहा था कि तभी चांदबढ़ के समीप रोड पर खड़े ट्रेमें पीछे से जा घुसा जिससे दोनो भाई घायल हो गये जिन्हें एल.वी.एस.अस्प. भोपाल में इलाज हेतू दाखिल कराया गया है । इधर कोतवाली थाना क्षैत्र में बीती रात राजमार्ग स्थित लसूड़िया ढाबा के समीप बाइक से आ रहे भाऊखेड़ी निवासी चांद खां व उसके भाई नूर खां की बाइक में कार क्रमांक एमपी-09-सीसी-3199 के चालक ने लापरवाही पूर्वक वाहन चलाकर टक्कर मारकर घायल कर दिया घायल चांद खां को अस्प. सीहोर एवं नूरखां को दाखिल कराया गया। उधर दोराहा थाना में बीते माह राठौर बस सर्विस क्रमांक एमपी04 एच 7827 के चालक ने वाहन चलाकर वाहन चलाकर विपरीत दिशा से आ रहे अज्ञात वाहन में टकरा दिया परिणामस्वरूप बस में सवार गौरेलाल व गोपीलाल के हाथों में चोट लगी।
Friday, May 9, 2008
3 गड्डे और 4 लाख रुपये का बिल 4 ठेकेदारो ने कर दिया कमाल
सीहोर 8 मई (आनन्द गांधी)। जी हाँ काहिरी बंधान में 3 बड़े-बड़े गड्डे किये गये हैं, यह गड्डे वाकई में गड्डे हैं। गड्डे मतलब पूरे के पूरे गड्डे। यहाँ नदी में गड्डा करके आसपास जमीन से झिरकर पानी एकत्र करने का यह प्रयोग था। लेकिन प्रयोग इतना महंगा पड़ा है कि इसके बिल देखकर एक बारगी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बुरी तरह खिन्न ही हो गये हैं। यहाँ नदी के बीच किये गये 3 गड्डे 4 लाख रुपये के पड़े हैं जबकि जहाँ गड्डे हुए हैं वहाँ अभी तक मिट्टी नदी में ही पड़ी हैं ? तो फिर इतना विशाल बिल किस बात का बनाया गया है। यह आश्चर्य है....और क्या कोई और योजना नहीं थी इतने महंगे गड्डो से क्या जितनी लागत आई है उतना भी पानी मिल सका है?
अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाने वाली नगर पालिका को गड्डे में डालने के प्रयास तो आये दिन होते ही रहते हैं लेकिन इसके बावजूद गड्डे करने वाले कभी पीछे नहीं हटते हैं....यह तरह-तरह के गड्डे करते हैं और नगर पालिका को गड्डे में डाल देते हैं। कभी कोई काम कर दिया जाता है और कभी कोई नया अनोखा काम कर उसके लाखों रुपये के बिल बना दिये जाते हैं।
खैर, इस बार तो एक अच्छा प्रयोग नगर पालिका में किया जा रहा था यह था काहिरी बंधान के पास पार्वती नदी के बीच गड्डा कर उसमें एक कुंआ बना देने का। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ कहीं नदी नाले होते हैं जब वह सूख जाते हैं तो ऐसी स्थिति में वहाँ के लोग उसमें एक छोटा-सा कुंआ खोदना शुरु कर देते हैं। यह कुंआ खोदने के बाद कुंए के चारों तरफ की दीवार में से पानी रिस-रिसकर आना शुरु आ जाता है और कुंआ कुछ घंटो में भर जाता है। इस प्रकार लोग अपनी प्यास बुझा लेते हैं।
यही प्रयोग काहिरी बंधान में भी किया गया। यहाँ पूर्व में एक कुंआ खुदा था
कुछ लोगों की सलाह पर जिला प्रशासन का सहयोग लेकर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने पोकलीन मशीन बुलवाकर कुछ कार्य कराया था। इससे कुछेक लाभ भी मिला था। इसी की तर्ज पर दो पार्षदों ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को पुन: 3-4 गड्डे करवाने के लिये मनाया, उन्होने कहा कि आप लोग व्यवस्था करो। बस स्वीकृति मिलते ही इन लोगों ने कार्य शुरु कर दिया।
चर्चा है कि ले-देकर 4 ठेकेदारों ने आपस में मिलकर यहाँ गड्डे खोदने का कार्य शुरु किया। जिसमें पोकलीन मशीन मंगाई गई और यहाँ मशीन ने घंटे के हिसाब से काम कर खारपा डाल और काहिरी में पार्वती नदी के बीच बड़े गड्डे कर दिये। लेकिन मिट्टी खोद खोदकर यहीं आसपास जमा भी कर दी। मतलब नदी की मिट्टी नदी में ही रही तो नदी का गहरी करण नहीं हो पाया और नदी में मिट्टी का पहाड़ लग गया।
इधर इन तीन गड्डो में कितना पानी आया और कितना सीहोर तक पहुँचा यह तो सर्वविदित ही है। पूरी योजना ढाक के तीन पात साबित हो गई।
अब प्रश् उठता है कि आखिर कितने लाख रुपये यह गड्डे हुए। तो गड्डे कुछ हजार रुपये नहीं बल्कि 4 लाख रुपये में हुए। इतनी भारी भरकम राशि में आखिर यहाँ क्या किया गया ? यह तो राम जाने लेकिन जब इतनी भारी भरकम राशि का बिल अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के समक्ष प्रस्तुत हुआ तो बस वह विफर पड़े। चर्चा है कि वह नाराज हो गये बोले आखिर भैया 4 लाख रुपये में किया क्या आपने ? इतना बड़ा बिल कैसे बन गया ? क्या हमें भी आम अधिकारी समझ रखा है ? ऐसा कौन-सा काम हो गया 4 लाख रुपये में...? बिल में मिट्टी की ढुलाई, पोकलीन मशीन का किराया भी जुड़ा हुआ है। लेकिन इतना बड़ा किराया या मिट्टी ढुलाई कैसे हो गई यह समझ नहीं आ रहा। अब मजे की बात यह है कि आखिर 4 लाख रुपये का बिल क्या पास होगा ? या नहीं होगा ? 3 गड्डे, 4 लाख और 4 ठेकेदारों का यह कारनामा अंजाम दिया जा चुका है। लेकिन जनता को पानी नहीं मिला है। देखते हैं आखिर मामला क्या रंग लाता है।
अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाने वाली नगर पालिका को गड्डे में डालने के प्रयास तो आये दिन होते ही रहते हैं लेकिन इसके बावजूद गड्डे करने वाले कभी पीछे नहीं हटते हैं....यह तरह-तरह के गड्डे करते हैं और नगर पालिका को गड्डे में डाल देते हैं। कभी कोई काम कर दिया जाता है और कभी कोई नया अनोखा काम कर उसके लाखों रुपये के बिल बना दिये जाते हैं।
खैर, इस बार तो एक अच्छा प्रयोग नगर पालिका में किया जा रहा था यह था काहिरी बंधान के पास पार्वती नदी के बीच गड्डा कर उसमें एक कुंआ बना देने का। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ कहीं नदी नाले होते हैं जब वह सूख जाते हैं तो ऐसी स्थिति में वहाँ के लोग उसमें एक छोटा-सा कुंआ खोदना शुरु कर देते हैं। यह कुंआ खोदने के बाद कुंए के चारों तरफ की दीवार में से पानी रिस-रिसकर आना शुरु आ जाता है और कुंआ कुछ घंटो में भर जाता है। इस प्रकार लोग अपनी प्यास बुझा लेते हैं।
यही प्रयोग काहिरी बंधान में भी किया गया। यहाँ पूर्व में एक कुंआ खुदा था
कुछ लोगों की सलाह पर जिला प्रशासन का सहयोग लेकर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने पोकलीन मशीन बुलवाकर कुछ कार्य कराया था। इससे कुछेक लाभ भी मिला था। इसी की तर्ज पर दो पार्षदों ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को पुन: 3-4 गड्डे करवाने के लिये मनाया, उन्होने कहा कि आप लोग व्यवस्था करो। बस स्वीकृति मिलते ही इन लोगों ने कार्य शुरु कर दिया।
चर्चा है कि ले-देकर 4 ठेकेदारों ने आपस में मिलकर यहाँ गड्डे खोदने का कार्य शुरु किया। जिसमें पोकलीन मशीन मंगाई गई और यहाँ मशीन ने घंटे के हिसाब से काम कर खारपा डाल और काहिरी में पार्वती नदी के बीच बड़े गड्डे कर दिये। लेकिन मिट्टी खोद खोदकर यहीं आसपास जमा भी कर दी। मतलब नदी की मिट्टी नदी में ही रही तो नदी का गहरी करण नहीं हो पाया और नदी में मिट्टी का पहाड़ लग गया।
इधर इन तीन गड्डो में कितना पानी आया और कितना सीहोर तक पहुँचा यह तो सर्वविदित ही है। पूरी योजना ढाक के तीन पात साबित हो गई।
अब प्रश् उठता है कि आखिर कितने लाख रुपये यह गड्डे हुए। तो गड्डे कुछ हजार रुपये नहीं बल्कि 4 लाख रुपये में हुए। इतनी भारी भरकम राशि में आखिर यहाँ क्या किया गया ? यह तो राम जाने लेकिन जब इतनी भारी भरकम राशि का बिल अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के समक्ष प्रस्तुत हुआ तो बस वह विफर पड़े। चर्चा है कि वह नाराज हो गये बोले आखिर भैया 4 लाख रुपये में किया क्या आपने ? इतना बड़ा बिल कैसे बन गया ? क्या हमें भी आम अधिकारी समझ रखा है ? ऐसा कौन-सा काम हो गया 4 लाख रुपये में...? बिल में मिट्टी की ढुलाई, पोकलीन मशीन का किराया भी जुड़ा हुआ है। लेकिन इतना बड़ा किराया या मिट्टी ढुलाई कैसे हो गई यह समझ नहीं आ रहा। अब मजे की बात यह है कि आखिर 4 लाख रुपये का बिल क्या पास होगा ? या नहीं होगा ? 3 गड्डे, 4 लाख और 4 ठेकेदारों का यह कारनामा अंजाम दिया जा चुका है। लेकिन जनता को पानी नहीं मिला है। देखते हैं आखिर मामला क्या रंग लाता है।
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