सीहोर 24 मार्च (नि.सं.)। बढ़ियाखेड़ी निवासी दूध के व्यापारी गेंदा राय को विगत चार दिन पूर्व सीहोर जेल में बंद किया गया था। करीब 20 साल पुराने एक नकली दूध के मामले में पेशियों पर नहीं जा पाने के कारण इन्हे सजा हुई थी। तीन दिन पूर्व सजा होने के बाद इन्हे स्थानीय जेलर ने भोपाल भेज दिया था जहाँ उनकी कल शाम मृत्यु हो गई। यह खबर सीहोर आते ही यहाँ खासा आक्रोश छा गया। बढ़ियाखेड़ी के लोगों में आक्रोश फूटा तो उन्होने एकत्र होकर यहाँ नदी चौराहा पर आकर जेल के सामने चक्काजाम किया। लेकिन वर्तमान जिला प्रशासन की स्थिति को कौन नहीं समझता। एसडीएम और एसडीओपी सहित अनेक पुलिस के वाहन यहाँ बड़ी संख्या में आये और एक त्र आक्रोशित भीड़ को सीधे खदेड़ दिया गया। ना सुनी गई ना स्थिति बताई गई।
Tuesday, March 25, 2008
सूखा राहत में रोजगार के लिए 8.13 लाख स्वीकृति
सीहोर 24 मार्च (नि.सं.)। जिलाधीश द्वारा सूखाग्रस्त बुधनी तहसील की ग्राम पंचायत नयागांव के ग्राम ककरदा में जरूरतमंद लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए 8 लाख 13 हजार रुपयों की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई । राहत कार्यो का संचालन शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों के मुताबिक कराने के निर्देश दिए गए है । इस सिलसिले में कलेक्टर द्वारा आदेश जारी कर दिए हैं ।
जारी आदेश के मुताबिक ग्राम ककरदा में मुख्य सड़क से नहर तक पहुंच मार्ग निर्माण के लिए 4.06 लाख और ककरदा से नदी तक नाला गहरीकरण निर्माण हेतू 4.07 लाख की राशि स्वीकृत की गई है । ग्रामीण यांत्रिकी सेवा सीहोर द्वारा दी गई तकनीकि स्वीकृत के अनुसार उक्त कार्यो की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति जारी की गई है । निर्माण कार्य के लिए ग्राम पंचायत नयागांव की क्रियान्वयन एजेन्सी बनाया गया है । जारी प्रशासकीय स्वीकृति की शर्तो में कहा गया है कि कार्य स्थल पर बाकायदा मानचित्र तैयार कराया जाकर कार्य प्राक्कलन और प्रशासकीय स्वीकृति के मुताबिक कराए जाएंगे । राहत कार्यो में व्यय पर लगातार नजर रखी जाये तथा यह सुनिश्चित किया जाये कि आबंटित राशि से अधिक का व्यय न हो । राहत कार्य में मशीनों का उपयोग कतई नही किया जायेगा । मंजूर की गई राशि का 75 फीसदी भाग मजदूरी पर व्यय किया जायेगा । सामग्री पर अधिकतम 25 फीसदी व्यय किया जा सकता है । मजदूरी का भुगतान श्रम आयुक्त द्वारा कृषि नियोजन में लगने वाले अकुशल श्रमिकों के लिए निर्धारित दर पर किया जायेगा । राहत कार्य में मजदूरी का भुगतान टास्क बेसेस पर करने की ताकीद की गई । मजदूरी के रूप में तीन किलो खाद्यान्न प्रति मानव दिवस तथा शेष मजदूरी का भुगतान नकद किया जायेगा । यह सुनिश्चित करने की ताकीद की गई है कि मजदूरी का भुगतान नियमित रूप से निर्धारित समयावधि में हो । भुगतान के दस दिन से अधिक लम्बित रहने की दिशा में संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी । मजदूरों की सूची और भुगतान का विवरण पंचायत के दृश्य पटल पर चस्पा किया जायेगा । कार्य स्थानीय मजदूरो से कराने और कम उम्र के बाल श्रमिकों को रोजगार में नही लगाने की ताकीद की गई है ।
जारी आदेश के मुताबिक ग्राम ककरदा में मुख्य सड़क से नहर तक पहुंच मार्ग निर्माण के लिए 4.06 लाख और ककरदा से नदी तक नाला गहरीकरण निर्माण हेतू 4.07 लाख की राशि स्वीकृत की गई है । ग्रामीण यांत्रिकी सेवा सीहोर द्वारा दी गई तकनीकि स्वीकृत के अनुसार उक्त कार्यो की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति जारी की गई है । निर्माण कार्य के लिए ग्राम पंचायत नयागांव की क्रियान्वयन एजेन्सी बनाया गया है । जारी प्रशासकीय स्वीकृति की शर्तो में कहा गया है कि कार्य स्थल पर बाकायदा मानचित्र तैयार कराया जाकर कार्य प्राक्कलन और प्रशासकीय स्वीकृति के मुताबिक कराए जाएंगे । राहत कार्यो में व्यय पर लगातार नजर रखी जाये तथा यह सुनिश्चित किया जाये कि आबंटित राशि से अधिक का व्यय न हो । राहत कार्य में मशीनों का उपयोग कतई नही किया जायेगा । मंजूर की गई राशि का 75 फीसदी भाग मजदूरी पर व्यय किया जायेगा । सामग्री पर अधिकतम 25 फीसदी व्यय किया जा सकता है । मजदूरी का भुगतान श्रम आयुक्त द्वारा कृषि नियोजन में लगने वाले अकुशल श्रमिकों के लिए निर्धारित दर पर किया जायेगा । राहत कार्य में मजदूरी का भुगतान टास्क बेसेस पर करने की ताकीद की गई । मजदूरी के रूप में तीन किलो खाद्यान्न प्रति मानव दिवस तथा शेष मजदूरी का भुगतान नकद किया जायेगा । यह सुनिश्चित करने की ताकीद की गई है कि मजदूरी का भुगतान नियमित रूप से निर्धारित समयावधि में हो । भुगतान के दस दिन से अधिक लम्बित रहने की दिशा में संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी । मजदूरों की सूची और भुगतान का विवरण पंचायत के दृश्य पटल पर चस्पा किया जायेगा । कार्य स्थानीय मजदूरो से कराने और कम उम्र के बाल श्रमिकों को रोजगार में नही लगाने की ताकीद की गई है ।
ट्रेक्टर ट्राली के नीचे आने से बालक की मौत
सीहोर 24 मार्च (नि.सं.)। रविवार की शाम नसरूल्लागंज थाना क्षैत्र के ग्राम मगरिया में ट्रेक्टर ट्राली के पहिये के नीचे आ जाने से एक बालक की दर्दनाक मौत हो गई । इधर रेहटी थाना अर्न्तगत एक गुमशुदा बालक की जंगली जानवर के खाने से मृत्यु हो गई है । पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है । प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम मगरिया में रहने वाले इत्तू खां का 8 वर्षीय पुत्र अरबाज ररिवार की शाम पांच बजे खेलते हुए घर के सामने ढालान पर खड़ी ट्रेक्टर ट्राली पर पहुंच गया तभी ट्रेक्टर ट्राली सहित ढालान से आगे बढ़ गई और अर- बाज उस पर से नीचे गिर पड़ा जिसके सिर पर ट्राली का पहिया चढ़ने से उसकी दुर्घटना स्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई । बताया जाता है कि चालक रामनारायण ने ढालान पर ट्रेक्टर ट्राली खड़ा करते समय ठेक नही लगाया था। रेहटी थाना अर्न्तगत आंवली- घाट निवासी श्रीकिशन अजा. का 7 वर्षीय देवकुमार गत शुक्रवार की शाम से घर से गायब था जिसके गुमने की रिर्पोट उसके परिजनों द्वारा थाना रेहटी में दर्ज कराई गई थी । गुमशुदा बालक को ढूंढने पर उसका शव आज कोसी नाला के समीप पड़ा पाया गया जिसे किसी जंगली जानवर ने खा लिया।
धूमधाम से मनी होली, न.पा. के खिलाफ आक्रोश फूटा
सीहोर 24 मार्च (नि.सं.)। इस बार भी धूमधाम से होली मनी, दो दिन जमकर होली हुई, नगर भी बंद रहा लेकिन नगर पालिका ने इस बार निकम्मेपन का इतिहास बना दिया और पूरे नगर में होली पर जो जल वितरण टैंकर से किया जाता है वह नहीं किया गया बल्कि होली पर नल तक नहीं दिये गये। जनता खासी आक्रोशित रही। लाल टंकी पर जाकर दो-तीन अलग-अलग चौराहों के युवकों हुरियारों ने मुर्दाबाद के नारे लगाये थे लेकिन इसके बावजूद कुछ नहीं हुआ।
होली का दो दिवसीय त्यौहार बड़ी धूमधाम से मना। नगर भर में होली खेली गई, हर एक चौराहें पर उत्साह छाया हुआ था। पहले दिन गमी की होली पर इस बार गैर निकालने की परम्परा और भी व्यवस्थित नजर आई। कुछ नये समाजों ने इस तरह की परम्परा को शुरु किया है जिसके तहत सभी मिलजुलकर ऐसे गमी वाले परिवारों में बड़ी संख्या में पहुँचे तथा वहाँ गमी वाले परिवारों को गम भुलाकर अब बाहर निकलने की समझाईश, उन्हे होली का रंग लगाकर कहा कि आओ अब गम छोड़ो और होली में बाहर निकलो हम सब तुम्हारे साथ हैं। पहली दिन गमी की होली धूमधाम से हुई। दूसरे दिन कल भाईदूज पर नगर में होली का उत्साह देखते ही बन रहा था। हर एक चौराहे पर होली का उत्साह था। लेकिन नगर पालिका ने इस उत्सव में सारे विघ् उत्पन्न किये। सुबह जहाँ 8-9 बजे से पानी के टैंकर चलने चाहिये थे वह दोपहर 12 बजे तक चलना शुरु हुए और जो चले तो एक-एक बार पानी भरकर फिर ऐसे गायब हुए कि कहीं नजर ही नहीं आये। हुरियारे खासे नाराज हुए, अनेक चौराहों पर पानी नहीं आने के कारण वहाँ होली ठीक से नहीं मन पाई, राकेश राय मुर्दाबाद के नारे अनेक चौराहों पर लगे, इसके अलावा अनेक नारे भी लगाये गये, जिला प्रशासन हाय-हाय के नारे तो खुद जिला प्रशासन के सामने लाल टंकी पर हुरियारों ने जाकर लगाये लेकिन इसके बाद भी पानी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई। नमक चौराहा और गंज क्षेत्र सहित कुछ अन्य स्थानों की टोलियाँ भी लालटंकी बाल विहार मैदान पहुँची जहाँ पानी के टैंकर नहीं भेजने को लेकर हाट-टाक हुई, नारेबाजी हुई उसके बाद बमुश्किल पानी भेजा गया। कुल मिलाकर नगर पालिका ने होली जैसे त्यौहार पर कोई पुराना बदला ले लिया। इतना ही नहीं जब होली हो गई तो नगर में नल आने की परम्परा की खंडित कर दी गई, हालांकि जिला प्रशासन ने यह व्यवस्था कथित रुप से अपने कब्जे में ले रखी है लेकिन इस मामले में सिर्फ दादागिरी ही नजर आई व्यवस्था के नाम पर कुछ नहीं किया गया, पानी आया ही नहीं, लोग होली के बाद नल के लिये तरसते रहे और आक्रोशित रहे।
होली का दो दिवसीय त्यौहार बड़ी धूमधाम से मना। नगर भर में होली खेली गई, हर एक चौराहें पर उत्साह छाया हुआ था। पहले दिन गमी की होली पर इस बार गैर निकालने की परम्परा और भी व्यवस्थित नजर आई। कुछ नये समाजों ने इस तरह की परम्परा को शुरु किया है जिसके तहत सभी मिलजुलकर ऐसे गमी वाले परिवारों में बड़ी संख्या में पहुँचे तथा वहाँ गमी वाले परिवारों को गम भुलाकर अब बाहर निकलने की समझाईश, उन्हे होली का रंग लगाकर कहा कि आओ अब गम छोड़ो और होली में बाहर निकलो हम सब तुम्हारे साथ हैं। पहली दिन गमी की होली धूमधाम से हुई। दूसरे दिन कल भाईदूज पर नगर में होली का उत्साह देखते ही बन रहा था। हर एक चौराहे पर होली का उत्साह था। लेकिन नगर पालिका ने इस उत्सव में सारे विघ् उत्पन्न किये। सुबह जहाँ 8-9 बजे से पानी के टैंकर चलने चाहिये थे वह दोपहर 12 बजे तक चलना शुरु हुए और जो चले तो एक-एक बार पानी भरकर फिर ऐसे गायब हुए कि कहीं नजर ही नहीं आये। हुरियारे खासे नाराज हुए, अनेक चौराहों पर पानी नहीं आने के कारण वहाँ होली ठीक से नहीं मन पाई, राकेश राय मुर्दाबाद के नारे अनेक चौराहों पर लगे, इसके अलावा अनेक नारे भी लगाये गये, जिला प्रशासन हाय-हाय के नारे तो खुद जिला प्रशासन के सामने लाल टंकी पर हुरियारों ने जाकर लगाये लेकिन इसके बाद भी पानी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई। नमक चौराहा और गंज क्षेत्र सहित कुछ अन्य स्थानों की टोलियाँ भी लालटंकी बाल विहार मैदान पहुँची जहाँ पानी के टैंकर नहीं भेजने को लेकर हाट-टाक हुई, नारेबाजी हुई उसके बाद बमुश्किल पानी भेजा गया। कुल मिलाकर नगर पालिका ने होली जैसे त्यौहार पर कोई पुराना बदला ले लिया। इतना ही नहीं जब होली हो गई तो नगर में नल आने की परम्परा की खंडित कर दी गई, हालांकि जिला प्रशासन ने यह व्यवस्था कथित रुप से अपने कब्जे में ले रखी है लेकिन इस मामले में सिर्फ दादागिरी ही नजर आई व्यवस्था के नाम पर कुछ नहीं किया गया, पानी आया ही नहीं, लोग होली के बाद नल के लिये तरसते रहे और आक्रोशित रहे।
Saturday, March 22, 2008
शिवराज ने कहा अब तुम ही संभालो सीहोर
सीहोर 21 मार्च (हो.सं.)। मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नवरत्नों में से एक कीमति रत्न राघवेन्द्र को श्री सिंह ने इस बार चुनावी मैदान में उतारने का फैसला ले लिया है। इसके लिये सभी जानते हैं कि राघवेन्द्र के लिये सबसे उपयुक्त सीट सीहोर ही है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी इसी तरह की कार्यप्रणाली को अपने कार्यकाल में अंजाम दिया था इसी तर्ज पर शिवराज सिंह चौहान ने भी यह कदम लेने का निर्णय लिया है। इसी के चलते शिवराज के नवरत्न राघवेन्द्र आज की स्थिति में सीहोर में एक चर्चित हस्ती के रुप में स्थापित किये जा चुके हैं। शिवराज का इशारा मिलने के बाद से ही राघवेन्द्र खुलकर जनसेवा के कार्य में जुट गये हैं। जिसका उन्होने आज होली के एक दिन पहले अपने ही खेमे के एक अधिकारी को अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने पर स्वयं पहली बार जिला चिकित्सालय देखने का पुण्य उपक्रम किया यही नहीं आराम न मिलने पर भोपाल तक ले जाने की व्यवस्था की। साथ ही राकेश राय के इस्तीफा दे देने तथा बिगड़ी जल व्यवस्था को भी राघवेन्द्र ने गंभीरता से लेते हुए अब स्वयं तंबू गाड़ लिया है। वह जल व्यवस्था के लिये अपना केन्द्र भी बना चुके हैं। राघवेन्द्र ने चैलेंज के साथ पूरे नगर में जल व्यवस्था व्यवस्थित करने की बात कह डाली है। ज्ञातव्य है कि राघवेन्द्र ने शिवराज के इशारे पर गांव-गांव में मच्छरों के साथ रात काटी है। इतना ही नहीं टेलिफोनिक नेता के रुप में भी आप खासे चर्चित हो गये हैं।
नगर का कूड़ा
शंकर साबू : मैं सीहोर आ रहा हूँ
नंद गोपाल बियाणी : शेयर बादशाह
गिरधर कुईया : गद्दी तक सीमित
मदन मोहन शर्मा गुरु : वामन कब एक होंगे यार
प्रमोद पटेल : वायपास रोड से मंच पर पहुँचे
रमेश सक्सेना : तुमने पुकारा और हम चले आये
जसपाल अरोरा : पचौरी भाई हमारे नेता हैं
राकेश राय : प्रशासन का रिमोट
प्रकाश व्यास काका : चैन की बंशी बजा रहे
अखलेश राय : सीहोर को मुम्बई बनाऊंगा
अनिल पालीवाल : हाफ चड्डी
कैलाश अग्रवाल : गंजे पन से परेशान
उमेश शर्मा : शेयर में फेयर
शंकर गुप्ता : मीठा पत्ता
अजय खण्डेलवाल : मंत्री के पीए
दिलीप शाह : आवक जारी है
रमेश साहू : भाव हमारा चलेगा
मोहन चौरसिया : टिकिट किसे मिलेगा?
जयंत शाह : छुपे रुस्तम
द्वारका अग्रवाल : समाज में व्यस्त
कुलदीप सिंह सेठी : मनमौजी
मदनलाल त्यागी : अब हमारा समय है
प्रेमबंधु शर्मा : मेरा पेमेंट तो करा दो
नरेश मेवाड़ा : मेरे गुटखे में हाथ मत डालना
हरि सोनी : दुबले दो अषाढ़
सतीश यादव : शह और मात के खेल में
रमाकांत समाधिया : ससुराल में होली खेलेंगे
हरीश अग्रवाल : आदि शक्ति भवानी की जय...
राजकुमार गुप्ता : कलेक्टरी के राजा
कमल झंवर : इनकी चाल पर गाँधी रोड दीवाना
दिनेश ठाकुर : तुकतान जारी है
राजेन्द्र अग्रवाल : सलाहकारों से परेशान
हण्डु सेठ : सोने के भाव आसमान पर
जगदीश निगोदिया : जेब कटों से परेशान
कमलेश कटारे : पचौरी भाई आ रहे हैं....
रमेश जैन : नई सोच की और
किशोर कौशल : चापलूसों के शिकार
लोकेन्द्र मेवाड़ा : उमाजी को सीहोर से लड़ायेंगे
देवेन्द्र सक्सेना : हॉकी के सहारे
महेश पारिक : नेता गिरी छोड़ हीरो बने
ओम दीप : फिर जुनून हावी
धर्मेन्द्र राठौर : चाण्डाल चौक ड़ी की गिरफ्त में
गौरव सन्नी महाजन : हाथ मिलाने के शौकीन....
अक्षत कासट : दिल्ली से दिल पर राज करने लोटे
रीना मिश्रा : अनीता से परेशान
रुकमणी रोहिला : वक्त का इंतजार
अनीता भण्डेरिया : मैं भी चुनाव लड़ूंगी
दीपशिखा जोशी : महिलाओं के आरक्षण से खुश
ममता त्रिपाठी : अपनी अदालत भरी
महेन्द्र सिंह अरोरा : भैया के खेवैया
जमना प्रसाद वर्मा गाँधी रोड : सूचना मंत्री
पुरुषोत्तम राय : राय देने से बच रहे
नवनीत दुधे : सावधानी से चल रहा काम
सीताराम यादव : ईद के चाँद हुए
पवन राठौर : ...राधा ने पकड़ा रंग डाला
डॉ अनीस खान : एमबीबीएस, एसएमएस बने
भारत अग्रवाल : फाग गा रहे हैं...
राजेश रऊआ सीटू : लाल टीशर्ट का राज क्या है
राजकुमार जायसवाल : मामा पर भारी
आशीष रोहिला लालू : सेल्फ स्टार्ट नेता
मनोज मामा : भगवन
रुद्र प्रकाश राठौर : अब भैया से मिलो.....
नंद गोपाल बियाणी : शेयर बादशाह
गिरधर कुईया : गद्दी तक सीमित
मदन मोहन शर्मा गुरु : वामन कब एक होंगे यार
प्रमोद पटेल : वायपास रोड से मंच पर पहुँचे
रमेश सक्सेना : तुमने पुकारा और हम चले आये
जसपाल अरोरा : पचौरी भाई हमारे नेता हैं
राकेश राय : प्रशासन का रिमोट
प्रकाश व्यास काका : चैन की बंशी बजा रहे
अखलेश राय : सीहोर को मुम्बई बनाऊंगा
अनिल पालीवाल : हाफ चड्डी
कैलाश अग्रवाल : गंजे पन से परेशान
उमेश शर्मा : शेयर में फेयर
शंकर गुप्ता : मीठा पत्ता
अजय खण्डेलवाल : मंत्री के पीए
दिलीप शाह : आवक जारी है
रमेश साहू : भाव हमारा चलेगा
मोहन चौरसिया : टिकिट किसे मिलेगा?
जयंत शाह : छुपे रुस्तम
द्वारका अग्रवाल : समाज में व्यस्त
कुलदीप सिंह सेठी : मनमौजी
मदनलाल त्यागी : अब हमारा समय है
प्रेमबंधु शर्मा : मेरा पेमेंट तो करा दो
नरेश मेवाड़ा : मेरे गुटखे में हाथ मत डालना
हरि सोनी : दुबले दो अषाढ़
सतीश यादव : शह और मात के खेल में
रमाकांत समाधिया : ससुराल में होली खेलेंगे
हरीश अग्रवाल : आदि शक्ति भवानी की जय...
राजकुमार गुप्ता : कलेक्टरी के राजा
कमल झंवर : इनकी चाल पर गाँधी रोड दीवाना
दिनेश ठाकुर : तुकतान जारी है
राजेन्द्र अग्रवाल : सलाहकारों से परेशान
हण्डु सेठ : सोने के भाव आसमान पर
जगदीश निगोदिया : जेब कटों से परेशान
कमलेश कटारे : पचौरी भाई आ रहे हैं....
रमेश जैन : नई सोच की और
किशोर कौशल : चापलूसों के शिकार
लोकेन्द्र मेवाड़ा : उमाजी को सीहोर से लड़ायेंगे
देवेन्द्र सक्सेना : हॉकी के सहारे
महेश पारिक : नेता गिरी छोड़ हीरो बने
ओम दीप : फिर जुनून हावी
धर्मेन्द्र राठौर : चाण्डाल चौक ड़ी की गिरफ्त में
गौरव सन्नी महाजन : हाथ मिलाने के शौकीन....
अक्षत कासट : दिल्ली से दिल पर राज करने लोटे
रीना मिश्रा : अनीता से परेशान
रुकमणी रोहिला : वक्त का इंतजार
अनीता भण्डेरिया : मैं भी चुनाव लड़ूंगी
दीपशिखा जोशी : महिलाओं के आरक्षण से खुश
ममता त्रिपाठी : अपनी अदालत भरी
महेन्द्र सिंह अरोरा : भैया के खेवैया
जमना प्रसाद वर्मा गाँधी रोड : सूचना मंत्री
पुरुषोत्तम राय : राय देने से बच रहे
नवनीत दुधे : सावधानी से चल रहा काम
सीताराम यादव : ईद के चाँद हुए
पवन राठौर : ...राधा ने पकड़ा रंग डाला
डॉ अनीस खान : एमबीबीएस, एसएमएस बने
भारत अग्रवाल : फाग गा रहे हैं...
राजेश रऊआ सीटू : लाल टीशर्ट का राज क्या है
राजकुमार जायसवाल : मामा पर भारी
आशीष रोहिला लालू : सेल्फ स्टार्ट नेता
मनोज मामा : भगवन
रुद्र प्रकाश राठौर : अब भैया से मिलो.....
बाबा अभी आराम करेंगे, बाद में सारे काम करेंगे

सीहोर 21 मार्च (हो.सं.)। सीहोर के पत्रकारों में राजकुमार का यह डायलाग चर्चा का विषय बन गया है कि बाबा अभी आराम करेंगे, बाद में सारे काम करेंगे...। गौरतलब है कि वरिष्ठ पत्रकार पुरुषोत्तम कुईया बाबा के हाल पूछने जिला चिकित्सालय पहुँचे। हालचाल पूछने के बाद अपनी महेश्वरी टेक्निक से धीरे-से जब विगत दिवस घटे घटनाक्रम के संबंध में बातचीत करते हुए कप का प्याला बाबा की और बढ़ाया और फिर बाबा से कहना ही शुरु किया था कि बाबा कुछ करो ना.... कुईया अपने शब्द पूरे करते बीच में ही यहीं बैठे राजकुमार गुप्ता ने कहा कि बाबा की तबियत अभी खराब है बाबा अभी आराम करेंगे बाद में सारे काम करेंगे। गुप्ता की बात सुनकर कुईया जी स्तब्ध रह गये लेकिन बाबा ने अपने आप को स्थित रखा।
कविता इनके नाम रोती है
नारायण कासट : खाट पर पड़े हैं
कृष्ण हरि पचौरी : बहुत दुखी हैं
रमेश हठीला : भूल गये कविता पढ़ना
लक्ष्मीनारायण राय : वही पुराना ढर्रा
कैलाश गुरु स्वामी : मुझे हिन्दी नहीं आती
प्रमोद जोशी गुंजन : बस कभी कभी
हरि ओम दाऊ : मौके की तलाश
संतोष जैन संतु : अवसर की खोज
धर्मराज देशराज : चलती का नाम गाड़ी
सुभाष चौहान : समय नहीं मिलता
राजेश शम्बर : घुसपैठिया
सुभाष जोशी : पतझड़
विष्णु फुरसतिया : वे समय का रागी
डॉ. आजम : चाँदनी रात
रमेश गोहिया : चढ़ गई है
जोरावर सिंह : महाकवि की लालसा
ब्रजेश शर्मा : कविता का खुमार
पंकज पुरोहित : निराला बनना चाहता हूं
विवेक पाराशर : कभी कभी
राजेन्द्र तिवारी : स्वर दूसरे का
विनोद तिवारी : हाँ जी
द्वारका वांसुरिया : जरा झूम के
कु.पूजा जोशी : मेरा नाम मोना
चौथमल वर्मा : हर कहीं
कमलेश आर्य : वनवास से आये हैं
देवकरण आर्य : भूल गये कविता
रामनारायण राठौर : लजीली बाई
श्याम चतुर्वेदी : बीता बसंत
कृष्ण हरि पचौरी : बहुत दुखी हैं
रमेश हठीला : भूल गये कविता पढ़ना
लक्ष्मीनारायण राय : वही पुराना ढर्रा
कैलाश गुरु स्वामी : मुझे हिन्दी नहीं आती
प्रमोद जोशी गुंजन : बस कभी कभी
हरि ओम दाऊ : मौके की तलाश
संतोष जैन संतु : अवसर की खोज
धर्मराज देशराज : चलती का नाम गाड़ी
सुभाष चौहान : समय नहीं मिलता
राजेश शम्बर : घुसपैठिया
सुभाष जोशी : पतझड़
विष्णु फुरसतिया : वे समय का रागी
डॉ. आजम : चाँदनी रात
रमेश गोहिया : चढ़ गई है
जोरावर सिंह : महाकवि की लालसा
ब्रजेश शर्मा : कविता का खुमार
पंकज पुरोहित : निराला बनना चाहता हूं
विवेक पाराशर : कभी कभी
राजेन्द्र तिवारी : स्वर दूसरे का
विनोद तिवारी : हाँ जी
द्वारका वांसुरिया : जरा झूम के
कु.पूजा जोशी : मेरा नाम मोना
चौथमल वर्मा : हर कहीं
कमलेश आर्य : वनवास से आये हैं
देवकरण आर्य : भूल गये कविता
रामनारायण राठौर : लजीली बाई
श्याम चतुर्वेदी : बीता बसंत
अखलेश राय ने किया रंग पंचमी तक क्रिसेंट, वारटपार्क और टाकीज को जनता के लिये फ्री
सीहोर 21 मार्च (हो.सं.)। चुनावी वर्ष को देखते हुए सब अपने-अपने राजनैतिक रंग में रंगते दिखाई दे रहे हैं तो ऐसे में अचानक सीहोर के प्रसिध्द समाजसेवी अखलेश राय ने आज सागर चौपाल चौराहे पर खड़े होकर घोषणा की है कि पूरे शहर की जनता दिल से होली खेले। और होली खेलने के पश्चात नहाने-धोने के लिये हमारे वाटर पार्क पधारे, ताकि नहाने-धोने के साथ-साथ आम जनता का सैर सपाटा भी हो जायेगा। और इसके पश्चात भोजन पानी के लिये भी क्रिसेंट का लंगर खोल दिया गया है। साथ ही खाना खाने के पश्चात पूरे शहर की जनता को 4 शो में टाकीज भी फिल्म देखने के लिये फ्री कर दिया गया है। श्री राय का कहना है कि होली का त्यौहार मौज मस्ती का त्यौहार है यह सबका त्यौहार है, इसलिये सब खूब मनायें। अखलेश राय की इस घोषणा से हुरियारों में खुशी का ठिकाना नहीं है। साथ ही आष्टा की जनता को भी श्री राय सौगात देने से नहीं भूले उन्होने मामा को फोन करके अंशय चित्रालय को भी आज आष्टा की जनता के लिये फ्री कर दिया है।राय की घोषणा से आष्टा में विरोध के स्वर फूटने लगे हैं। आष्टावासियों ने अपने दिल की पीड़ा सुनाते हुए कहा है कि सीहोर में वाटर पार्क और क्रीसेंट फ्री हैं लेकिन हमे तो नहाना भी घर पड़ेगा और खाना भी घर पड़ेगा। बस फिल्म ही फ्री देखने को मिलेगी। श्री राय का यह क्षेत्रवाद सहन नहीं किया जायेगा। श्री राय ने आष्टावासियों का गुस्सा शांत करते हुए कहा है कि शीघ्र ही वहाँ पर भी खाने और नहाने की व्यवस्था की जा रही है ताकि अगले साल तक आपको सुविधा मिल सके। उल्लेखनीय है कि जिस किसी को इन सुविधाओं का लाभ उठाना हो उन्हे सुबह 8 बजे से चौपाल सागर चौराहा पहुँचना होगा जहाँ स्वयं अखलेश राय फ्री के कूपन जनता को वितरित करेंगे।
श्मशान घांट के पथप्रदर्शक
डॉ. अनिल शर्मा : मैं हूँ ना
डॉ. आर.के.गुप्ता : बस एक ख्वाब और है...
डॉ. रमेश वर्मा : सर जी मेरी क्या गलती है
डॉ. एस.एस.तोमर : नाइट डयूटी के मजे
डॉ. गिरीश जोशी : बीएमओ सिंह भला आदमी
डॉ. एल.एन.नामदेव : ओपीडी टाइम से दुखी
डॉ. आनन्द शर्मा : सौजन्यता से सभी खुश
डॉ. कनेरिया : कब तक पिसते रहेंगे
डॉ. एस.आर.गट्टानी : चलो दांगी स्टेट
डॉ.एस.एस.राठौर : एज ए रुल
डॉ. मांझी : 25 अप्रैल का इंतजार
डॉ. मेश्राम : सरकार ने दुखी कर दिया
डॉ.श्रेष्ठा सक्सेना : सर्वश्रेष्ठ
डॉ. एस.के.जैन : वी.आर.एस. की धमकी
डॉ.विनोद मोदी : बुढ़ापे में मत करो परेशान
डॉ. ए.ए.कुरैशी : प्रमोशन से परेशान
डॉ. श्रीमति एफ.ए.कुरैशी: बच्चों की पहली पसंद
डॉ. रेखा भाटी : अब वो दिन नहीं रहे
डॉ. टी.एन.चतुर्वेदी : हिज मास्टर्रस वाइस
डॉ. कैलाश अग्रवाल : मिश्री की डली
डॉ. बी.के. चतुर्वेदी : सबका मालिक एक
डॉ.श्रीमति मंजू सक्सेना: अल्ला मियां की गाय
डॉ. वी.एन.सक्सेना : किस्मत साथ नहीं दे रही
डॉ. एम.एल.भारती : विकलांग केम्प लगते रहें
डॉ. डी.आर.अहिरवार : दलित पैंथर
डॉ. उमेश श्रीवास्तव : हर हाल में खुश
डॉ. अभय खरे : हमारे बैतूल में ऐसा नहीं था
डॉ. श्रीमति शोभा खरे : डॉ.सा. बहुत सीधे हैं
डॉ. मालती आर्य : नया दौर
डॉ.भरत आर्य : चाहे कोई मुझे जंगली कहे
डॉ श्रीमति नीरा श्रीवास्तव: मासूम
डॉ. आर.के.गुप्ता : बस एक ख्वाब और है...
डॉ. रमेश वर्मा : सर जी मेरी क्या गलती है
डॉ. एस.एस.तोमर : नाइट डयूटी के मजे
डॉ. गिरीश जोशी : बीएमओ सिंह भला आदमी
डॉ. एल.एन.नामदेव : ओपीडी टाइम से दुखी
डॉ. आनन्द शर्मा : सौजन्यता से सभी खुश
डॉ. कनेरिया : कब तक पिसते रहेंगे
डॉ. एस.आर.गट्टानी : चलो दांगी स्टेट
डॉ.एस.एस.राठौर : एज ए रुल
डॉ. मांझी : 25 अप्रैल का इंतजार
डॉ. मेश्राम : सरकार ने दुखी कर दिया
डॉ.श्रेष्ठा सक्सेना : सर्वश्रेष्ठ
डॉ. एस.के.जैन : वी.आर.एस. की धमकी
डॉ.विनोद मोदी : बुढ़ापे में मत करो परेशान
डॉ. ए.ए.कुरैशी : प्रमोशन से परेशान
डॉ. श्रीमति एफ.ए.कुरैशी: बच्चों की पहली पसंद
डॉ. रेखा भाटी : अब वो दिन नहीं रहे
डॉ. टी.एन.चतुर्वेदी : हिज मास्टर्रस वाइस
डॉ. कैलाश अग्रवाल : मिश्री की डली
डॉ. बी.के. चतुर्वेदी : सबका मालिक एक
डॉ.श्रीमति मंजू सक्सेना: अल्ला मियां की गाय
डॉ. वी.एन.सक्सेना : किस्मत साथ नहीं दे रही
डॉ. एम.एल.भारती : विकलांग केम्प लगते रहें
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डॉ श्रीमति नीरा श्रीवास्तव: मासूम
श्मशान घांट के पथप्रदर्शक
डॉ. अनिल शर्मा : मैं हूँ ना
डॉ. आर.के.गुप्ता : बस एक ख्वाब और है...
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डॉ. एल.एन.नामदेव : ओपीडी टाइम से दुखी
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डॉ श्रीमति नीरा श्रीवास्तव: मासूम
नगर पालिका अध्यक्ष राकेश राय ने इस्तीफा दिया
अब बाजी भाजपा के हाथ, उपाध्यक्ष संभालेंगे कमान, भाजपा में खुशी छाई
सीहोर 21 मार्च (होली सं.)। नगर पालिका अध्यक्ष पद की जिस कुर्सी पर समाजसेवी राकेश राय ने जनता से भारी बहुमत प्राप्त कर पदभार ग्रहण किया था। आज अचानक उस पद से उन्होने इस्तिफा देकर विरोध के सारे स्वरों को विराम दे दिया है। जिलाधीश श्री सिंह को राकेश राय द्वारा दिये गये इस्तिफे की खबर पहले पहल तो किसी को हजम ही नहीं हुई, दोपहर तक राकेश राय के घर पर उनके समर्थकों की भारी भीड़ एकत्र हो गई। कोई समझ नहीं पा रहा था कि राकेश राय ने ऐसा क्यों किया है। इस संबंध में फुरसत ने भी श्री राय से बातचीत करना चाही तो यही जबाव मिला कि जिस तरह से उन्हे तरह-तरह से परेशान किया जा रहा था और पार्षद दबाव बनाये हुए थे उससे कुपित होकर उन्होने यह कदम उठाया है। लेकिन आज इस उठे कदम से सीहोर की राजनीति में एक भूचाल-सा आ गया है। हालांकि यह जानकारी देर रात तक सार्वजनिक नहीं हो पाई थी।
उल्लेखनीय है कि नगर पालिका अध्यक्ष पद का पद्भार ग्रहण करने के साथ ही राकेश राय को विपरीत सरकार भाजपा के कारण खासी परेशानी उठाना पड़ रही थी। पिछले दिनों उन पर कुछ मामले भी लग गये थे जिस पर तरह-तरह की पेशी के लिये उन्हे भोपाल जाना पड़ता था। विकास के लिये न तो भोपाल से कोई धनराशि मिल रही थी ना ही कोई अन्य सहयोग। इस पर भी आये दिन सत्ता पक्ष की घुड़कियाँ और ठेकों में चल रही राजनीति से श्री राय खासे परेशान थे।
इस सबसे ऊपर श्री राय इस वर्ष पानी की पैदा की गई किल्लत, जमोनिया तालाब से ग्रामीणों को दिलाये गये पानी के पीछे की राजनीति के बाद शुरु हुए आंदोलनों से हैरान परेशान हो गये थे। और उन्होने ऐसी विषम स्थिति में नगर के पत्रकाराें की एक वार्ता बुलाकर अपनी परेशानी भी बताई थी। इसी दौरान अध्यक्षीय समिति के पाँच पार्षद जो उनके कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे एन पानी की समस्या के सामने आते ही उन्होने भी साथ छोड़ दिया और राकेश राय के खिलाफ आंदोलन शुरु कर दिये।
इस तरह चारों तरफ से घिरे राकेश राय ने संभवत: परिवार के सदस्यों अथवा कुछ शुभ चिंतकों से सलाह मशविरा कर यह कठोर कदम उठाया । संभवत: राकेश राय के छोटे भाई अखलेश राय ने भी उन्हे इस तरह की समझाईश दी है।
जो भी हो, आज करीब 11.30 बजे के आसपास राकेश राय बहुत ही गुपचुप या कहे तो शांत तरीके से भोपाल जाकर नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव को अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह बात आज सीहोर में सार्वजनिक भी नहीं हो पाई। लेकिन फुरसत के सूत्रों को जब यह जानकारी दोपहर बाद लगी तो अपने स्तर पर हमने इस संबंध में जब राकेश राय से मोबाइल नम्बर 9425024444 पर बातचीत करने का प्रयास किया तो पता चला कि वह घर पर हैं लेकिन मोबाइल बंद है और किसी से नहीं मिल रहे हैं।
हालांकि राके श राय के समर्थकों को जैसे-जैसे गुपचुप रुप से यह जानकारी लगती रही वह उनके निवास पर एकत्र होते रहे लेकिन शाम तक श्री राय ने किसी से बातचीत करना उचित नहीं समझा।
ऐसा विश्वास किया जा रहा है कि आज इस संबंध में राकेश राय पत्रकार वार्ता भी लेंगे और अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे।
उधर अब नगर पालिका का क्या होगा ? इस संबंध में नगर पालिका उपाध्यक्ष अशोक सिसोदिया से बातचीत की तो उन्हे भी यह जानकारी लगते ही पहले विश्वास नहीं हुआ लेकिन वह खुश नजर आये। उन्होने फुरसत से कहा कि राय एक अच्छे व्यक्ति हैं लेकिन वह कई मामलों में पूरी तरह असफल सिध्द हुए हैं। यदि पार्टी ने आज्ञा दी, और विधायक जी की अनुमति रही तो जैसा ही परिषद में भाजपा का बहुमत है। इस दृष्टि से यदि भाजपा ने यह कार्यभार संभाला तो मैं विश्वास दिलाता हूँ कि इतना पानी है कि पूरे नगर में गर्मी भर पानी की कोई कमी नहीं आने दी जायेगी, प्रतिदिन जल प्रदाय शहर में किया जा सकता है। अन्य विकास कार्य की अनेक संभावनाएं हैं।
चुनावी वर्ष में राकेश का इस्तीफा विधायक जी को भारी न पड़ जाये
सीहोर। आज राकेश राय द्वारा दिये गये इस्तीफे को यदि राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाये तो यह एक बड़ा घटनाक्रम सिध्द हो सकता है। यह चुनावी वर्ष है और जिस तरह से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी बन गये हैं। उसके बाद से ही कांग्रेसी राजनीति में कुछ उफान सा आया है। उधर भाजपा में विधायक रमेश सक्सेना ही आगामी प्रत्याशी रहेंगे ऐसा विश्वास सभी को है। ऐसे में नगर में अचानक उभरे कांग्रेसी नेता के रुप में राकेश राय ने जिस बहुत भारी मतों के अंतर से पिछले दिनों विजयश्री का वरण किया था और अब जब जनता कुछ नाराज दिखी तो उन्होने बिना विचारे इस्तीफा दे डाला है। इस घटनाक्रम से जनता में उनके प्रति सहज सहानुभूति की लहर दौड़ पड़ेगी। यदि ऐसा हुआ और प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने भी इस भांपते हुए राकेश को टिकिट दे दिया तो यहाँ कम से कम नगरीय क्षेत्र में तो निश्चित ही विधायक जी के लिये एक कड़ी चुनौती की स्थिति बन जायेगी। ग्रामीण क्षेत्र में राकेश राय के भाई अखलेश राय की छवि कुछ दम टेक सकती है। देखते हैं आज हुए इस राजनीतिक घटनाक्रम का भविष्य में क्या प्रतिफल दिखाई देता है।
आष्टा से सीहोर पानी आ रहा है, इस्तीफा क्यों दिया-कैलाश परमार
सीहोर। हाल में सार्वजनिक मंच पर कांग्रेस में वापस आये राकेश राय द्वारा अचानक नगर पालिका पद से इस्तीफा दे दिये जाने के संबंध में कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष कैलाश परमार से फुरसत ने बातचीत कर यह पूछा कि क्या इस संबंध में पार्टी ने कुछ विचार-विमर्श किया है अथवा आपके निर्देश हैं ? इस पर कैलाश परमार ने पूर्णत: अनभिज्ञता जाहिर की है, श्री परमार ने कहा है कि उन्हे भी कुछ ही समय पूर्व इस तरह की जानकारी मिली है और वह खुद आश्चर्य में है कि श्री राय ने यह कदम कैसे उठा लिया है, नगर पालिका अध्यक्ष का कार्यभार उन्हे संभालना चाहिये था। जब फुरसत ने पूछा कि कहीं आष्टा में पार्वती से पानी सीहोर नहीं आने देने से उपजे जल संकट से त्रस्त श्री राय ने इस्तीफा दिया है आपको नहीं लगता कि इसमें कहीं आप भी दोषी हैं ? आपको उनकी विषम स्थिति मदद करना चाहिये थी? कैलाश परमार इस प्रतिपक्ष पर लगभग उखड़ते हुए बोले की यदि बात पानी की ही है तो आष्टावासियों का इसमें कोई दोष नहीं है, पार्वती भराने के बाद ऊपर का पानी सीहोर की तरफ जा रहा है, उसे कोई छेड़ नहीं रहा है। जल संकट के लिये श्री राय को अपने स्तर पर विशेष प्रयास करने की आवश्यकता थी, वह चाहते तो हमसे बात कर सकते थे, लेकिन उन्होने इस्तीफा दे दिया। आवश्यकता हुई तो हम उनसे बात करेंगे।
सीहोर 21 मार्च (होली सं.)। नगर पालिका अध्यक्ष पद की जिस कुर्सी पर समाजसेवी राकेश राय ने जनता से भारी बहुमत प्राप्त कर पदभार ग्रहण किया था। आज अचानक उस पद से उन्होने इस्तिफा देकर विरोध के सारे स्वरों को विराम दे दिया है। जिलाधीश श्री सिंह को राकेश राय द्वारा दिये गये इस्तिफे की खबर पहले पहल तो किसी को हजम ही नहीं हुई, दोपहर तक राकेश राय के घर पर उनके समर्थकों की भारी भीड़ एकत्र हो गई। कोई समझ नहीं पा रहा था कि राकेश राय ने ऐसा क्यों किया है। इस संबंध में फुरसत ने भी श्री राय से बातचीत करना चाही तो यही जबाव मिला कि जिस तरह से उन्हे तरह-तरह से परेशान किया जा रहा था और पार्षद दबाव बनाये हुए थे उससे कुपित होकर उन्होने यह कदम उठाया है। लेकिन आज इस उठे कदम से सीहोर की राजनीति में एक भूचाल-सा आ गया है। हालांकि यह जानकारी देर रात तक सार्वजनिक नहीं हो पाई थी।
उल्लेखनीय है कि नगर पालिका अध्यक्ष पद का पद्भार ग्रहण करने के साथ ही राकेश राय को विपरीत सरकार भाजपा के कारण खासी परेशानी उठाना पड़ रही थी। पिछले दिनों उन पर कुछ मामले भी लग गये थे जिस पर तरह-तरह की पेशी के लिये उन्हे भोपाल जाना पड़ता था। विकास के लिये न तो भोपाल से कोई धनराशि मिल रही थी ना ही कोई अन्य सहयोग। इस पर भी आये दिन सत्ता पक्ष की घुड़कियाँ और ठेकों में चल रही राजनीति से श्री राय खासे परेशान थे।
इस सबसे ऊपर श्री राय इस वर्ष पानी की पैदा की गई किल्लत, जमोनिया तालाब से ग्रामीणों को दिलाये गये पानी के पीछे की राजनीति के बाद शुरु हुए आंदोलनों से हैरान परेशान हो गये थे। और उन्होने ऐसी विषम स्थिति में नगर के पत्रकाराें की एक वार्ता बुलाकर अपनी परेशानी भी बताई थी। इसी दौरान अध्यक्षीय समिति के पाँच पार्षद जो उनके कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे एन पानी की समस्या के सामने आते ही उन्होने भी साथ छोड़ दिया और राकेश राय के खिलाफ आंदोलन शुरु कर दिये।
इस तरह चारों तरफ से घिरे राकेश राय ने संभवत: परिवार के सदस्यों अथवा कुछ शुभ चिंतकों से सलाह मशविरा कर यह कठोर कदम उठाया । संभवत: राकेश राय के छोटे भाई अखलेश राय ने भी उन्हे इस तरह की समझाईश दी है।
जो भी हो, आज करीब 11.30 बजे के आसपास राकेश राय बहुत ही गुपचुप या कहे तो शांत तरीके से भोपाल जाकर नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव को अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह बात आज सीहोर में सार्वजनिक भी नहीं हो पाई। लेकिन फुरसत के सूत्रों को जब यह जानकारी दोपहर बाद लगी तो अपने स्तर पर हमने इस संबंध में जब राकेश राय से मोबाइल नम्बर 9425024444 पर बातचीत करने का प्रयास किया तो पता चला कि वह घर पर हैं लेकिन मोबाइल बंद है और किसी से नहीं मिल रहे हैं।
हालांकि राके श राय के समर्थकों को जैसे-जैसे गुपचुप रुप से यह जानकारी लगती रही वह उनके निवास पर एकत्र होते रहे लेकिन शाम तक श्री राय ने किसी से बातचीत करना उचित नहीं समझा।
ऐसा विश्वास किया जा रहा है कि आज इस संबंध में राकेश राय पत्रकार वार्ता भी लेंगे और अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे।
उधर अब नगर पालिका का क्या होगा ? इस संबंध में नगर पालिका उपाध्यक्ष अशोक सिसोदिया से बातचीत की तो उन्हे भी यह जानकारी लगते ही पहले विश्वास नहीं हुआ लेकिन वह खुश नजर आये। उन्होने फुरसत से कहा कि राय एक अच्छे व्यक्ति हैं लेकिन वह कई मामलों में पूरी तरह असफल सिध्द हुए हैं। यदि पार्टी ने आज्ञा दी, और विधायक जी की अनुमति रही तो जैसा ही परिषद में भाजपा का बहुमत है। इस दृष्टि से यदि भाजपा ने यह कार्यभार संभाला तो मैं विश्वास दिलाता हूँ कि इतना पानी है कि पूरे नगर में गर्मी भर पानी की कोई कमी नहीं आने दी जायेगी, प्रतिदिन जल प्रदाय शहर में किया जा सकता है। अन्य विकास कार्य की अनेक संभावनाएं हैं।
चुनावी वर्ष में राकेश का इस्तीफा विधायक जी को भारी न पड़ जाये
सीहोर। आज राकेश राय द्वारा दिये गये इस्तीफे को यदि राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाये तो यह एक बड़ा घटनाक्रम सिध्द हो सकता है। यह चुनावी वर्ष है और जिस तरह से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी बन गये हैं। उसके बाद से ही कांग्रेसी राजनीति में कुछ उफान सा आया है। उधर भाजपा में विधायक रमेश सक्सेना ही आगामी प्रत्याशी रहेंगे ऐसा विश्वास सभी को है। ऐसे में नगर में अचानक उभरे कांग्रेसी नेता के रुप में राकेश राय ने जिस बहुत भारी मतों के अंतर से पिछले दिनों विजयश्री का वरण किया था और अब जब जनता कुछ नाराज दिखी तो उन्होने बिना विचारे इस्तीफा दे डाला है। इस घटनाक्रम से जनता में उनके प्रति सहज सहानुभूति की लहर दौड़ पड़ेगी। यदि ऐसा हुआ और प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने भी इस भांपते हुए राकेश को टिकिट दे दिया तो यहाँ कम से कम नगरीय क्षेत्र में तो निश्चित ही विधायक जी के लिये एक कड़ी चुनौती की स्थिति बन जायेगी। ग्रामीण क्षेत्र में राकेश राय के भाई अखलेश राय की छवि कुछ दम टेक सकती है। देखते हैं आज हुए इस राजनीतिक घटनाक्रम का भविष्य में क्या प्रतिफल दिखाई देता है।
आष्टा से सीहोर पानी आ रहा है, इस्तीफा क्यों दिया-कैलाश परमार
सीहोर। हाल में सार्वजनिक मंच पर कांग्रेस में वापस आये राकेश राय द्वारा अचानक नगर पालिका पद से इस्तीफा दे दिये जाने के संबंध में कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष कैलाश परमार से फुरसत ने बातचीत कर यह पूछा कि क्या इस संबंध में पार्टी ने कुछ विचार-विमर्श किया है अथवा आपके निर्देश हैं ? इस पर कैलाश परमार ने पूर्णत: अनभिज्ञता जाहिर की है, श्री परमार ने कहा है कि उन्हे भी कुछ ही समय पूर्व इस तरह की जानकारी मिली है और वह खुद आश्चर्य में है कि श्री राय ने यह कदम कैसे उठा लिया है, नगर पालिका अध्यक्ष का कार्यभार उन्हे संभालना चाहिये था। जब फुरसत ने पूछा कि कहीं आष्टा में पार्वती से पानी सीहोर नहीं आने देने से उपजे जल संकट से त्रस्त श्री राय ने इस्तीफा दिया है आपको नहीं लगता कि इसमें कहीं आप भी दोषी हैं ? आपको उनकी विषम स्थिति मदद करना चाहिये थी? कैलाश परमार इस प्रतिपक्ष पर लगभग उखड़ते हुए बोले की यदि बात पानी की ही है तो आष्टावासियों का इसमें कोई दोष नहीं है, पार्वती भराने के बाद ऊपर का पानी सीहोर की तरफ जा रहा है, उसे कोई छेड़ नहीं रहा है। जल संकट के लिये श्री राय को अपने स्तर पर विशेष प्रयास करने की आवश्यकता थी, वह चाहते तो हमसे बात कर सकते थे, लेकिन उन्होने इस्तीफा दे दिया। आवश्यकता हुई तो हम उनसे बात करेंगे।
बहना ने भाई की कलाई पर टिकिट बांधा है...
सीहोर 21 मार्च (होली.सं.)। बहना ने भाई की कलाई पर प्यार बांधा है....यह प्रसिध्द गीत तो आपने सुना ही होगा, इस बार प्यारे भईया रमेश सक्सेना की सबसे प्यारी बहन सुश्री छुईमा भारती ने अपने प्यारे भाई को अंतत: उसकी कलाई पर सीधे टिकिट ही बांध दिया है। यह वर्ष चुनावी होने के कारण बहन अपने भाई को कुछ खास देना चाहती थी। लेकिन उन्हे यह समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या दे इस पर सुश्री छुईमा ने सीधे-सीधे टिकिट ही दे दिया है। अब भईया परेशान है कि अपनी बहन के इस प्यार को कैसे ठुकरायें। बहना के प्यार को ठुकराना भी आफत है और रखना भी आफत है। ऐसी स्थिति में भईया रमेश बहुत मुश्किल में पड़ गये हैं। हालांकि उन्होने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए बहन की रक्षा का वचन तो दे दिया है लेकिन हाथ में बंधे टिकिट ने उनका हाथ भारी भी कर दिया है। कैसे क्या करें कुछ समझ नहीं आ रहा है।उल्लेखनीय है कि इस बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीधे-सीधे बाहर प्रत्याशी के रुप में सीहोर को राघवेन्द्र रुपी भाजपाई प्रत्याशी दे दिया है जिसके चलते ऐसा माना जा रहा है कि विधायक रमेश सक्सेना का टिकिट भाजपा से संभवत: कट जायेगा। गौरतलब है कि पूर्व में दिल्ली की एजेंसी से मुख्यमंत्री द्वारा कराये गये सर्वे में भी यह मामला उजागर हुआ था कि सीहोर और आष्टा सहित प्रदेश की 100 सीटों पर भाजपा हार सकती है। संभवत: इसलिये ही शिवराज ने सीट बदल दी और अब संभावित है कि बहना का प्यार भईया ठुकरा नहीं पायेंगे।
कोतवाली अभिशप्त............................................
एक पूर्णिमा पर दो टीआई बदलाये, तीसरे की टांग टूटी सीहोर 21 मार्च (हो.सं.)। वास्तुदोष से परिपूर्ण बनी नई कोतवाली में आये दिन असामान्य घटनाएं घटती रहती हैं। अक्सर ऐसी घटनाएं पूर्णिमा और अमावस्या के आसपास यादा होती हैं। जिससे यह माना जाने लगा है कि कोतवाली अभिशप्त है या यहाँ किसी आत्मा की छायां आदि पड़ गई हैं। लेकिन पिछली पूणम पर जिस प्रकार दो टीआई यहाँ बदला गये और फिर एक नये टीआई की टांग ही टूट गई उससे लगता है कि निश्चित ही कोई बड़ी छायां यहां लग गई है।इस संबंध में नगर के वरिष्ठ योतिषाचार्य, वास्तुविद्वान, पंडित पृथ्वी बल्लभ जी दुबे ने फुरसत को बताया है कि जिस सार्वजनिक भवन में किसी व्यक्ति की असामायिक मौत हो जाये, तो उसकी आत्मा उस भवन में मंडराती रहती है और भवन के मुखिया के साथ हमेशा साये की तरह बनी रहती है। यह कोई शुभ संकेत नहीं है। दुखी आत्मा की उपस्थिति से भवन में रहने वाले सभी लोग दुखी और पीड़ित रहने लगते हैं। उन्होने इसका हल बताया कि यहाँ कुछ जप-तप और हवन आदि शुध्दता से कमाई हुई पूंजी से कराने पर लाभ हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व कोतवाली में एक व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद लगातार यहाँ गड़बड़ी जारी है। मजे की बात यह है कि कोतवाली में आने वाले सारे कर्मचारी अधिकारी सुबह हस्ताक्षर करने के बाद पहले पुरानी कोतवाली में जाते हैं और वहां स्थापित हनुमान जी को मारे भय के नमन करते हैं ताकि किसी भी तरह की अला-बला से बचे रहें।
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