सीहोर 1 फरवरी (विशेष सं. फुरसत)। रविन्द्र सांस्कृतिक भवन के पास स्थित पानी के स्टापडेम नाले की भव्य योजना जिसे किसी जमाने में शकर कारखाने में प्रारंभ किया गया था और भगवानपुरा तालाब से तकीपुर बंधान तक पानी और फिर इस बंधान से सीहोर तक पानी लाने की योजना विद्यमान थी जिसे पूर्ववर्ती अपनी विशेष कार्यप्रणाली से चर्चित रहीं जिलाधीश श्रीमति स्मिता चन्द्रा गाटे ने रुचि लेकर नया रुप दिया था अब आगामी सप्ताह भर कहीं पूरी तरह खत्म न हो जाये। इस महती योजना को यह व्यवस्थित कर दिया जाये तो निश्चित रुप से आगामी वर्षों में जब कलेक्टर कार्यालय भोपाल राजमार्ग पर बस डिपो के पास बन जायेगा, और वहाँ अनेक नये निवास, कालोनियाँ बनेगी तब इस क्षेत्र की भूमि में पानी रिचार्जिंग के लिये तकीपुर की यह योजना वापस जीवित करना बहुत टेढ़ी खीर हो जायेगा ? क्योंकि नया वायपास मार्ग चौड़ीकरण कार्य युध्द स्तर पर जारी है जिसके चलते भविष्य में तकीपुर से आई पाईप लाईन मिट्टी में दबकर रह जायेगी। अपने कार्यकाल में नया कलेक्ट्रेट भवन बनवाने वाले जिलाधीश राघवेन्द्र सिंह को भविष्य की भी चिंता कर लेने की आवश्यकता है....।
उल्लेखनीय है कि आज से कुछेक वर्ष पूर्व ही यहाँ रविन्द्र सांस्कृतिक भवन टाउन हाल के पास स्थित नहर जिसमें स्टापडेम भी बना हुआ है को लेकर जाग्रति आई थी। तत्कालीन जिलाधीश श्रीमति स्मिता गाटे चन्द्रा ने इस मामले में रुचि लेते हुए यहाँ बने पुल तक पानी भराने की योजना का क्रियान्वयन शुरु किया था और इस पुल के लिये लोहे के द्वार भी बनना तय थे। आसपास जेसीबी मशीन से खुदाई कर यहाँ यादा से यादा पानी भरा सके इसकी व्यवस्था कराई गई थी।
साथ ही एक रिचार्जिंग बोर भी लगवाया था जिससे पानी रिचार्ज होकर जमीन में बैठ सके। यहाँ तक पानी लाने के लिये भगवान पुरा तालाब से तकीपुर बंधान तक पानी लाने की व्यवस्था को दुरुस्त करते हुए तकीपुर बंधान पर कई वर्षों बाद लोहे के दरबार लगवाये गये थे जिससे यहाँ के ग्रामीणजन काफी खुश हो गये थे और इस ग्राम में पानी की समस्या ही हल हो गई थी। इसी बंधान से छूटकर पानी सीहोर तक लाने के लिये कारखाने द्वारा डाली गई पाईप लाईन का उपयोग किया गया था। तब वायपास मार्ग बनने पर पाईप लाईन लाना मुश्किल हो रहा था तो तत्कालीन जिलाधीश ने अपने विशेष प्रभाव का उपयोग करते हुए मार्ग कार्य के दौरान ही पहले पाईप लाईन डलवाई थी फिर सड़क बनने दी गई थी आज भी वह मोटी पाईप लाईन व्यवस्थित रुप से सड़क में मौजूद है इसके आगे नहर खुदवाकर पानी सीहोर तक लाया गया था।
इस योजना को समझते हुए लोकप्रिय विधायक रमेश सक्सेना ने भी इस मामले में रुचि दिखाई थी। उन्होने सीवन नदी में अंग्रेज सैनिकों छावनी के लिये जिस जगह पर अंग्रेजों ने नदी को गहरा कर नदी में दीवार खड़ी की थी वहाँ से पानी की नई पाईप लाईन डलवाकर पुन: यहाँ रविन्द्र सांस्कृतिक भवन तक लाये थे। ताकि यहाँ पानी भरा रहे और यही पानी आगे बढ़कर इंग्लिशपुरा मार्ग पर बने पुल में लोहे के दरबार लगवाकर वहाँ तक भरा गया था। ताकि इंग्लिशपुरा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के नलकूप आदि रिचार्ज होते रहें।
उल्लेखनीय है कि अब बस डिपो क्षेत्र से लेकर भोपाल नाका तक तथा सैकड़ाखेड़ी मार्ग पर भी अंदर ही अंदर बहुत तेजी से विकास हो रहा है और यहाँ लगातार नये-नये भवन और कार्यालय बन रहे हैं। कलेक्टर कार्यालय जिस समय यहाँ प्रारंभ हो जायेगा तब से तो निश्चित ही यहाँ और भी बहुत अधिक विकास शुरु हो जायेगा। ऐसे में इस क्षेत्र की भूमि में पानी की रिचार्जिंग की महती आवश्यकता रहेगी। वैसे ही अभी यहाँ के बोर सूखे जाते हैं तो उस स्थिति में कहीं यादा समस्या बढ़ेगी।
इस दृष्टि से तकीपुर बंधान से लेकर सीहोर तक आई नहर से पानी लाना जहाँ सीवन नदी में हस्तक्षेप को रोकेगा वहीं ऊपर से आ रहे पानी के कारण यह क्षेत्र यादा अच्छी तरह रिचार्ज होगा। लेकिन वायपास मार्ग पर बन रही चार लाईन सड़क के चलते नहर की जो पाईप लाईन सड़क के नीचे से लाई गई थी वह दबने की स्थिति में आ गई। नई सड़क बनते समय यह दब जायेगी। नई सड़क आगामी सप्ताह भर में यहाँ भी बन जायेगी और सड़क के नीचे ही पाईप लाईन दब कर रह जायेगी। अभी इस पाईप लाईन का उपयोग तो नहीं हो रहा लेकिन लाखों रुपये की एक योजना मात्र 3 पाईप यहाँ वापस लगा दिये जाने से जहाँ जीवित रह जायेगी वहीं पाईप लाईन का उपयोग भी होता रहेगा। वर्तमान में एक किसान अपनी विद्युत की डोरी इस पाईप लाईन से सड़क के दूसरी और ले गया ।
शहर के चहुँमुखी विकास की सारी संभावनाएं जहाँ ध्वस्त होती नजर आ रही है ऐसी स्थिति में राजनेताओं, समाजसेवी संस्थाओं, भाजपा-कांग्रेस नेताओं को इन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर नगर के भविष्य की चिंता करने की आवश्यकता है।
Monday, February 4, 2008
Sunday, February 3, 2008
दो जगह चोरी, जेवर व तार चुरा ले गये चोर
आष्टा 1 फरवरी (फुरसत)। सुभाष नगर मे रहने वाले पटवारी प्रहलाद सिंह के निवास से मध्य रात्रि में कल दरबाजे का कुंदा खोलकर अज्ञात चोरों ने प्रवेश कर लिया। चोरों ने अंदर घुसकर एक पेटी पर हाथ साफ कर दिया जिसमें चाँदी के हार, पायजेब, बच्चों की अंक सूची, हाथघड़ी, कपड़े आदि थे कुल मिलाकर 5 हजार रुपये से अधिक कर नुकसान प्रहलाद सिंह का हुआ है।
उधर पुराने बस स्टेण्ड पर स्थित जमील खां निवासी जुम्मापुरा की दुकान स्थित है इस दुकान की पिछली खिड़की तोड़कर अज्ञात चोरों ने प्रवेश किया और तांबे का 10 हजार रुपये कीमति तार चुरा कर ले गये। पुलिस ने दोनो ही चोरी के मामले में प्रकरण दर्ज कर लिया है।
उधर पुराने बस स्टेण्ड पर स्थित जमील खां निवासी जुम्मापुरा की दुकान स्थित है इस दुकान की पिछली खिड़की तोड़कर अज्ञात चोरों ने प्रवेश किया और तांबे का 10 हजार रुपये कीमति तार चुरा कर ले गये। पुलिस ने दोनो ही चोरी के मामले में प्रकरण दर्ज कर लिया है।
पं. प्रदीप मिश्रा की कथा चल रही गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर
सीहोर 1 फरवरी (फुरसत)। नगर के सुप्रसिध्द कथा वाचक पं. प्रदीप मिश्रा अब आगामी 1 फरवरी से 7 फरवरी 08 तक गोवर्धन मथुरा धाम में अपने मुखार बिंद से श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा यज्ञ की अमृत वर्षा करेंगे।
पं. प्रदीप मिश्रा इसके पूर्व भी देश भर के कई प्रमुख तीर्थ स्थानों पर श्रीमद् भागवत कथा का वाचन कर सीहोर नगर का नाम गोरान्वित कर चुके हैं। गोवर्धन, मथुरा के श्याम भवन परिक्रमा मार्ग जतीपुरा में प्रात: 9 से दोपहर 12 बजे तक एवं अपरान्ह 3 से सायं 6 बजे तक भागवत ज्ञान गंगा से श्रध्दालु भक्तों को अमृतपान करायेंगे।
पं. प्रदीप मिश्रा इसके पूर्व भी देश भर के कई प्रमुख तीर्थ स्थानों पर श्रीमद् भागवत कथा का वाचन कर सीहोर नगर का नाम गोरान्वित कर चुके हैं। गोवर्धन, मथुरा के श्याम भवन परिक्रमा मार्ग जतीपुरा में प्रात: 9 से दोपहर 12 बजे तक एवं अपरान्ह 3 से सायं 6 बजे तक भागवत ज्ञान गंगा से श्रध्दालु भक्तों को अमृतपान करायेंगे।
ग्रामीण रोजगार योजना के प्रचार-प्रसार के ठेको में उठ रही है शंका की ऊंगली
आष्टा 1 फरवरी (सुशील संचेती)। पूत के लक्षण पालने में ही नजर आने लगते हैं मतलब उक्त कहावत का यह है कि जन्म लेने वाला बच्चा जब पालने में रहता है और वो कैसी-कैसी बाल क्रिया करता है उससे उसके अभिभावक यह अंदाजा लगा लेते हैं कि यह बड़ा होगा तो कैसा होगा ? उक्त कहावत लगता है आगामी 1 अप्रैल से सीहोर जिले में गरीबों के लिये प्रारंभ हो रही राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के शुभारंभ होने के पहले इसके प्रचार-प्रसार हेतु जिस एजेंसी को आष्टा तहसील के प्रत्येक ग्राम में उक्त योजना का प्रचार-प्रसार की निविदा स्वीकृत की उसको लेकर जो शिकवा-शिकायत तथ्यों के साथ की गई है उससे लगता है कि उक्त योजना का जो बालकाल है जिसका पहला ठेका दिया है वो यह दर्शाता है कि जब इसके शुभारंभ के पहले इस योजना में जो कुछ हुआ है या यूँ कहे कि किसी को लाभ पहुँचाने के लिये किया गया है ? तो निश्चित ही इस योजना का क्या भविष्य होगा यह सोचकर ही डर लगता है। शासन की एक महती योजना प्रारंभ होने के पहले ही अनेक गड़बड़ियों का शिकार हो गई....।
असल में जो शिकायत तथ्यों के साथ जिलाधीश सीहोर को एक शिकायतकर्ता ने की है उसमें स्पष्ट खुला आरोप लगाया है कि जनपद पंचायत आष्टा द्वारा जिस डॉ अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी को प्रचार-प्रसार का लगभग 8 लाख का ठेका दिया है वो लगता है कि एक व्यक्ति विशेष को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से कार्य किया है। आष्टा जनपद पंचायत में इन दिनों क्या-क्या हो रहा है यह किसी से छुपा नहीं है। इसका उदाहरण है जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत डूका भमूरा जहाँ पर शिकायतकर्ता ने जो शिकायत पिछले दिनों की पहले तो यहाँ के अधिकारियों ने उक्त शिकायत को दबाने के काफी प्रयास किये लेकिन जब शिकायतकर्ता ने अपनी दमदारी नहीं छोड़ी तो जांच के लियं पंचायत तक जाना पड़ा जहाँ पर ग्रामीणों ने खुलकर कई मुद्दों पर शिकायतों के पक्ष में बयान दिये। यह तो केवल एक पंचायत का उदाहरण है शेष पंचायतों में हुए निर्माण कार्य, विभिन्न दी जाने वाले पेंशन, इंदिरा आवास व अन्य योजनाओं की अगर जांच हो तो अधिकारियों की आंखे खुली की खुली रह सकती है लेकिन कोई जांच करे ऐसी उम्मीद कम ही है क्योंकि ऐसा करने में बात खुद जांच करने वालों तक और उनके अधिकारियों तक आ जायेगी?
1 अप्रैल से जिले में प्रारंभ हो रही राष्ट्रीय ग्रामीण योजना के प्रचार-प्रसार के लिये जिय डॉ अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी इछावर को कार्य दिया है शिकायतकर्ता ने खुला आरोप लगाया है कि उक्त कार्य के लिये इस एजेंसी के अलावा युवा विकास मण्डल, अपवार्ड सोसायटी, रुरल वर्ल्ड हेल्थ एवं मंथन स्वयं सेवी संस्था ने भी निविदाएं डाली थी। अम्बेडकर के अलावा अन्य संस्थाओं के विभिन्न कार्यों के लिये काफी कम दाम होने के बाद भी अम्बेडकर वेलफेयर की निविदा स्वीकृत की गई है। बताया जाता है कि जब शिकायतकर्ता ने जनपद पंचायत आष्टा में शिकायत की तो उससे कहा गया कि जिला पंचायत द्वारा मांगे गये मार्गदर्शन में मीडिया प्लान को आधार बनाकर उक्त निविदा स्वीकृत की गई है जबकि शिकायत कर्ता का कहना है कि यह प्रक्रिया के विरुध्द है। अगर ऐसा ही करना था तो मिडिया प्लान के अनुरुप वित्तिय आफर मंगवाये जाना था तथ्यों के साथ शिकायत करने वाले शिकायत कर्ता राजेन्द्र सिंह सामाजिक कार्यकर्ता ने अपनी शिकायत में कहा कि जब हमने इसके बारे में जानने का प्रयास करते तो हमें बताया जाता कि हमने जिला पंचायत को भेज दिया है जैसे ही कोई निर्णय होगा बतायेंगे। बार-बार इसी प्रक्रिया से गुजरने के बाद हमें 7 जनवरी 08 को बताया गया कि डॉ अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी को उक्त कार्य दिया गया जबकि शिकायत कर्ता का आरोप है कि उक्त सोसायटी को इसके पहले ही 26 दिसम्बर 07 को कार्य दे दिया गया था यहाँ गंभीरता से लेने एवं जांच का विषय है।
इसकी सत्य प्रति भी शिकायतकर्ता ने शिकायत के साथ लगाई है जब उक्त कार्य की स्वीकृति 7 जनवरी 08 को हुई है तो उसे कार्य इसके पहले 26 दिसम्बर को कैसे दे दिया। वहीं शिकायतकर्ता ने एक और गंभीर आरोप लगाया है कि इस संस्था का प्रमुख है वो इछावर तहसील के ग्राम खजूरिया में शिक्षाकर्मी के रुप में पदस्थ है और वो 2 माह से आष्टा क्षेत्र में ही नजर आ रहा है इसने कईयों को अपना परिचय एक पत्रकार के रुप में देता है । यह भी जांच का विषय है कि अगर वो एक शिक्षाकर्मी है जो यह सब छुपाया क्यों गया तथा वो किस समाचार-पत्र का संवाददाता है।
शिकायत कर्ता राजेन्द्र सिंह ने बताया कि 26 दिसम्बर 07 को पत्र क्रमांक क्षएनआरईजीएस07 आदेश में उल्लेख था कि 7 दिन के अंदर 10 प्रतिशत राशि जमा की जाये। चार दिन बाद ही 1 जनवरी 08 को फिर पत्र के माध्यम से डॉ अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी रामनगर तहसील इछावर को सूचना दी गई कि आपकी राशि नहीं आई है। लेकिन अगले ही 2 जनवरी 08 को गुपचुप अनुबंध भी नियम विरुध्द कर लिया गया जबकि राशि संबंधित संस्था ने जमा नहीं की थी।
बिना राशि के अनुबंध जब हो ही नहीं सकता तब भी उसे अनुबंध पत्र दे दिया गया और हाथ बचाने के लिये मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किये। मतलब स्पष्ट है कि कहीं कुछ दाल में काला है। मामला यहीं नहीं थमा बल्कि 16 जनवरी तक भी एक सूचना पत्र जारी कर कागजी खानापूर्ति की गई लेकिन 16 जनवरी तक 10 प्रतिशत राशि जमा नहीं हुई। मतलब स्पष्ट है कि सभी अधिकारियाें की मिली भगत से ही यह कार्य दिया गया है। किसी खास व्यक्ति को लाभ पहुँचाने के लिये ऐसा किया जा रहा है।
पूरे ब्लाक में प्रति कार्यक्रम 1.85 पैसे में कठपुतली का प्रदर्शन, पूरे ब्लाक के हर गांव में मुनादी करने पर 10.25 रुपये, आमसभा की जानकारी देने पर 1.20 पैसे देना तय है लेकिन क्या पूरे 272 ग्रामों में इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्रचार-प्रसार किया जायेगा ? जब प्रारंभ में ही इतनी लम्बी-चौड़ी पोल है तो फिर आगे क्या होगा ? करीब 8 लाख रुपये का यह कार्य है क्या वाकई हर गांव में जाकर उपरोक्त कार्य होगा ? क्या संबंधित अधिकारी वाकई इस पर नजर रखेंगे ?
प्रतिक्रिया- शिकायतकर्ता की उक्त शिकायत पर जनपद पंचायत आष्टा के सी.ई.ओ. श्री आर.एस. वर्मा ने इस पूरी शिकायत की प्रतिक्रिया में बताया कि जो भी निविदाएं आई थी उसको खोलने के बाद जिले में भेज दिया गया था वहाँ से नियमानुसार पात्र डॉ अंबेडकर वेलफेयर सोसायटी की उक्त निविदा स्वीकृत की गई है। उक्त कार्य में पूरी पारदर्शिता अपनाकर नियमानुसार ही उक्त कार्य दिया गया है। शिकायतकर्ता की शिकायत सही नहीं है। जब उनसे पूछा की ऐसा बताया गया है कि संस्था का प्रमुख इछावर ब्लाक में शिक्षाकर्मी है तब श्री वर्मा ने कहा ऐसा मालूम नहीं है अगर ऐसा है तो इसकी जांच करवा लेता हूँ श्री वर्मा ने बताया कि 2 वर्ष के उक्त कार्य के रेट की तुलना में इसी संस्था को पात्र पाया गया था- आर.एस.वर्मा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत आष्टा । इस संबंध में फुरसत ने डा. अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी के प्रमुख से भी सम्पर्क कर उनका पक्ष लेने के भी प्रयास किये लेकिन उनसे सम्पर्क नहीं हो पाया।
असल में जो शिकायत तथ्यों के साथ जिलाधीश सीहोर को एक शिकायतकर्ता ने की है उसमें स्पष्ट खुला आरोप लगाया है कि जनपद पंचायत आष्टा द्वारा जिस डॉ अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी को प्रचार-प्रसार का लगभग 8 लाख का ठेका दिया है वो लगता है कि एक व्यक्ति विशेष को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से कार्य किया है। आष्टा जनपद पंचायत में इन दिनों क्या-क्या हो रहा है यह किसी से छुपा नहीं है। इसका उदाहरण है जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत डूका भमूरा जहाँ पर शिकायतकर्ता ने जो शिकायत पिछले दिनों की पहले तो यहाँ के अधिकारियों ने उक्त शिकायत को दबाने के काफी प्रयास किये लेकिन जब शिकायतकर्ता ने अपनी दमदारी नहीं छोड़ी तो जांच के लियं पंचायत तक जाना पड़ा जहाँ पर ग्रामीणों ने खुलकर कई मुद्दों पर शिकायतों के पक्ष में बयान दिये। यह तो केवल एक पंचायत का उदाहरण है शेष पंचायतों में हुए निर्माण कार्य, विभिन्न दी जाने वाले पेंशन, इंदिरा आवास व अन्य योजनाओं की अगर जांच हो तो अधिकारियों की आंखे खुली की खुली रह सकती है लेकिन कोई जांच करे ऐसी उम्मीद कम ही है क्योंकि ऐसा करने में बात खुद जांच करने वालों तक और उनके अधिकारियों तक आ जायेगी?
1 अप्रैल से जिले में प्रारंभ हो रही राष्ट्रीय ग्रामीण योजना के प्रचार-प्रसार के लिये जिय डॉ अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी इछावर को कार्य दिया है शिकायतकर्ता ने खुला आरोप लगाया है कि उक्त कार्य के लिये इस एजेंसी के अलावा युवा विकास मण्डल, अपवार्ड सोसायटी, रुरल वर्ल्ड हेल्थ एवं मंथन स्वयं सेवी संस्था ने भी निविदाएं डाली थी। अम्बेडकर के अलावा अन्य संस्थाओं के विभिन्न कार्यों के लिये काफी कम दाम होने के बाद भी अम्बेडकर वेलफेयर की निविदा स्वीकृत की गई है। बताया जाता है कि जब शिकायतकर्ता ने जनपद पंचायत आष्टा में शिकायत की तो उससे कहा गया कि जिला पंचायत द्वारा मांगे गये मार्गदर्शन में मीडिया प्लान को आधार बनाकर उक्त निविदा स्वीकृत की गई है जबकि शिकायत कर्ता का कहना है कि यह प्रक्रिया के विरुध्द है। अगर ऐसा ही करना था तो मिडिया प्लान के अनुरुप वित्तिय आफर मंगवाये जाना था तथ्यों के साथ शिकायत करने वाले शिकायत कर्ता राजेन्द्र सिंह सामाजिक कार्यकर्ता ने अपनी शिकायत में कहा कि जब हमने इसके बारे में जानने का प्रयास करते तो हमें बताया जाता कि हमने जिला पंचायत को भेज दिया है जैसे ही कोई निर्णय होगा बतायेंगे। बार-बार इसी प्रक्रिया से गुजरने के बाद हमें 7 जनवरी 08 को बताया गया कि डॉ अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी को उक्त कार्य दिया गया जबकि शिकायत कर्ता का आरोप है कि उक्त सोसायटी को इसके पहले ही 26 दिसम्बर 07 को कार्य दे दिया गया था यहाँ गंभीरता से लेने एवं जांच का विषय है।
इसकी सत्य प्रति भी शिकायतकर्ता ने शिकायत के साथ लगाई है जब उक्त कार्य की स्वीकृति 7 जनवरी 08 को हुई है तो उसे कार्य इसके पहले 26 दिसम्बर को कैसे दे दिया। वहीं शिकायतकर्ता ने एक और गंभीर आरोप लगाया है कि इस संस्था का प्रमुख है वो इछावर तहसील के ग्राम खजूरिया में शिक्षाकर्मी के रुप में पदस्थ है और वो 2 माह से आष्टा क्षेत्र में ही नजर आ रहा है इसने कईयों को अपना परिचय एक पत्रकार के रुप में देता है । यह भी जांच का विषय है कि अगर वो एक शिक्षाकर्मी है जो यह सब छुपाया क्यों गया तथा वो किस समाचार-पत्र का संवाददाता है।
शिकायत कर्ता राजेन्द्र सिंह ने बताया कि 26 दिसम्बर 07 को पत्र क्रमांक क्षएनआरईजीएस07 आदेश में उल्लेख था कि 7 दिन के अंदर 10 प्रतिशत राशि जमा की जाये। चार दिन बाद ही 1 जनवरी 08 को फिर पत्र के माध्यम से डॉ अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी रामनगर तहसील इछावर को सूचना दी गई कि आपकी राशि नहीं आई है। लेकिन अगले ही 2 जनवरी 08 को गुपचुप अनुबंध भी नियम विरुध्द कर लिया गया जबकि राशि संबंधित संस्था ने जमा नहीं की थी।
बिना राशि के अनुबंध जब हो ही नहीं सकता तब भी उसे अनुबंध पत्र दे दिया गया और हाथ बचाने के लिये मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किये। मतलब स्पष्ट है कि कहीं कुछ दाल में काला है। मामला यहीं नहीं थमा बल्कि 16 जनवरी तक भी एक सूचना पत्र जारी कर कागजी खानापूर्ति की गई लेकिन 16 जनवरी तक 10 प्रतिशत राशि जमा नहीं हुई। मतलब स्पष्ट है कि सभी अधिकारियाें की मिली भगत से ही यह कार्य दिया गया है। किसी खास व्यक्ति को लाभ पहुँचाने के लिये ऐसा किया जा रहा है।
पूरे ब्लाक में प्रति कार्यक्रम 1.85 पैसे में कठपुतली का प्रदर्शन, पूरे ब्लाक के हर गांव में मुनादी करने पर 10.25 रुपये, आमसभा की जानकारी देने पर 1.20 पैसे देना तय है लेकिन क्या पूरे 272 ग्रामों में इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्रचार-प्रसार किया जायेगा ? जब प्रारंभ में ही इतनी लम्बी-चौड़ी पोल है तो फिर आगे क्या होगा ? करीब 8 लाख रुपये का यह कार्य है क्या वाकई हर गांव में जाकर उपरोक्त कार्य होगा ? क्या संबंधित अधिकारी वाकई इस पर नजर रखेंगे ?
प्रतिक्रिया- शिकायतकर्ता की उक्त शिकायत पर जनपद पंचायत आष्टा के सी.ई.ओ. श्री आर.एस. वर्मा ने इस पूरी शिकायत की प्रतिक्रिया में बताया कि जो भी निविदाएं आई थी उसको खोलने के बाद जिले में भेज दिया गया था वहाँ से नियमानुसार पात्र डॉ अंबेडकर वेलफेयर सोसायटी की उक्त निविदा स्वीकृत की गई है। उक्त कार्य में पूरी पारदर्शिता अपनाकर नियमानुसार ही उक्त कार्य दिया गया है। शिकायतकर्ता की शिकायत सही नहीं है। जब उनसे पूछा की ऐसा बताया गया है कि संस्था का प्रमुख इछावर ब्लाक में शिक्षाकर्मी है तब श्री वर्मा ने कहा ऐसा मालूम नहीं है अगर ऐसा है तो इसकी जांच करवा लेता हूँ श्री वर्मा ने बताया कि 2 वर्ष के उक्त कार्य के रेट की तुलना में इसी संस्था को पात्र पाया गया था- आर.एस.वर्मा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत आष्टा । इस संबंध में फुरसत ने डा. अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी के प्रमुख से भी सम्पर्क कर उनका पक्ष लेने के भी प्रयास किये लेकिन उनसे सम्पर्क नहीं हो पाया।
लाख रु.खर्च कर नचवाया...और 20 लोगों ने देखा
जनता के रुपयों की ऐसे हो रही बर्वादी, बिना
प्रचार-प्रसार के कर डाला मंचीय कार्यक्रम
प्रचार-प्रसार के कर डाला मंचीय कार्यक्रम
सीहोर 1 फरवरी (फुरसत)। प्रदेश में मनाये जा रहे भारत पर्व के अवसर पर सीहोर में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें देश के मशहूर संतूर वादक ओम प्रकाश चौरसिया के निर्देशन में मधुकली वृन्द भोपाल कलाकारों ने संगीत रूपक मुक्ति का महायज्ञ की शानदार प्रस्तुति दी । प्रसिद्ध विद्याधर आमटे ने बांसूरी वादन प्रस्तुत किया । बड़ा बाजार में मंच बनाकर हजारों रुपये खर्च किये गये। कलाकारों को करीब 40-50 हजार रुपये दिये गये लेकिन 8 कुर्सियाँ मंच के सामने लगाकर 20-25 दर्शकों ने ही इसे देखा....। इस प्रकार बिना प्रचार-प्रसार किये इस कार्यक्रम को करके जनता के रुपये एक तरह से बर्वाद कर दिये गये। बड़ा बाजार में गणतंत्र दिवस की संध्या पर भारत पर्व के उपलक्ष्य में संगीत रूपक मुक्ति का महायज्ञ मंचित किया गया जिसमें मधुकली वृन्द भोपाल के कलाकारों ने 1857 से 1947 की आजादी की संघर्ष गाथा को संगीत और अभिनय की जुबानी प्रस्तुत किया । ओम प्रकाश चौरसिया के निर्देशन, संगीत, आकल्पन और प्रस्तुति के इस रूपक में कवि डा. रामबल्लभ आचार्य के वृन्दगान भारत प्यारा देश हमारा की कलाकारों ने अनूठी प्रस्तुति देकर कोरियोग्राफर मनोज नायर के परिश्रम को साकार कर दिखाया । मंच एवं पार्श्व गानवृन्द में जिन कलाकारों ने सहभागिता की उनमें संदीपा पारे, हिमानी सक्सेना, चित्रा जाम्बोलकर, एकता गोस्वामी, रूपक मंडलोई, देवना चौरसिया, स्मिता नायर, पूनम सोनी, नोशाबा सईद खां, रूपल गुप्ता, हर्षिता शर्मा, गोपाल लेले, लोकेन्द्र सिंह, गौरव शर्मा, सुदीप सोहनी, अंशुमान साकल्ले, अंकित लालवानी, विजय पटेल, उमेश धर्मेश, आतिक सईद खां, चिराग सोलंकी, और गोदान शामिल थे । संगीत रूपक में वाद्य वृन्द संयोजन उमेश धर्मेश ने किया । प्रकाश व्यवस्था तरूण पाण्डे, वाचक स्वर विवेक मृदूल, रंगभूषा संदीपा पारे, वेशभूषा स्मिता नायर तथा कोरियोग्राफी निदेशक मनोज नायर थे । कार्यक्रम में उद्धोषक के रूप में विनय उपाध्याय मोजूद थे । मुक्ति का महायज्ञ रूपक के बाद बांसूरी वादन के लिए मशहूर विद्याधर आमटे ने भी बांसूरी की स्वर लहरियां बिखेरकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया । कार्यक्रम में ए.डी.एम. श्रीमति भावना वालिम्बे उपस्थित थीं। आये कलाकार मुट्ठा भर के रुपये ले गये और यहाँ उनका अभिनय किसी ने देखा ही नहीं।
केन्द्र से सब्जी उगाने के लिये आये ढाई करोड़ मुख्यमंत्री के गांवों में ठूंसे जायेंगे, कांग्रेसी हाथ मलते रह जायेंगे....
सीहोर 1 फरवरी (फुरसत)। जिले भर में उद्यानिकी के विकास के लिये ढाई करोड़ से भी अधिक राशि की कार्ययोजना जो राय सरकार ने अनुमोदित कर स्वीकृति के लिये केन्द्र सरकार को भेजी गई थी उसे केन्द्र सरकार ने स्वीकृत कर दिया गया है। कार्ययोजना स्वीकृति के बाद जिले भर में करीब तीन सौ से भी अधिक हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी क्षेत्र का विकास कार्य को अमली जामा पहनाया जा सकेगा। जिसके तहत करीब आठ नर्सरियों की स्थापना, जैविक खेती के लिये 210 हेक्टेयर क्षेत्र में आर्गनिक फारमिंग, 93 हेक्टेयर क्षेत्र में पुष्प व मसाला उत्पादन 200 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जी को प्राथमिकता दी जायेगी। इसके लिये अभी तक 134 गांवों का चयन किया जा चुका है। जिनमें उद्यानिकी विकास के लिये केन्द्र से आये 2 करोड़, 55 लाख 78 हजार 400 रुपये की वृहद धनराशि खर्च की जावेगी। लेकिन जानबूझकर यह महती योजना नर्वदा किनारे के लिये गये हैं। जो मुख्यमंत्री के क्षेत्र के हैं और यहाँ पूर्व से ही किसानों की व उद्यानिकी की स्थिति बढ़िया है। देखते हैं कांग्रेसी नर्वदा की अपेक्षा जिले की सबसे बड़ी नदी पार्वती या नदियों को लेकर जाग्रत होते हैं या नहीं ?
जिला जनसम्पर्क कार्यालय से प्रसारित समाचार के अनुसार जिला उद्यानिकी के कर्ताधर्ता जिलाधीश की अध्यक्षता में गत दिवस संपन्न एक बैठक में उद्यानिकी विकास की वर्ष 2007-08 की कार्ययोजना का अनुमोदन किया गया । बैठक में जिलाधीश ने उद्यानिकी विकास के लिए पानी की पर्याप्त उपलब्धता को लेकर बातचीत करते हुए अपनी राय थोपी की नर्वदा किनारे पर्याप्त पानी है। फिर उद्यानिकी के कार्यो को तत्काल प्रारंभ करने और प्रस्तावित कार्ययोजना का जनपद पंचायतों की कृषि स्थायी समिति से तत्काल अनुमोदन कराने के निर्देश दिए। कृषक भ्रमण प्रशिक्षण के लिए उपयुक्त किसानों का चयन करने के भी उन्होंने निर्देश दिए। जिलाधीश ने उद्यानिकी विकास के लिए सबसे जरूरी तत्व पानी पर विशेष जोर देते हुए कहा कि वर्तमान में जहां पहले से ही पानी उपलब्ध है वहां उद्यानिकी कार्यो को प्राथमिकता दी जाये। उन्होंने सुझाव दिया कि पानी की सुलभता को देखते हुए कार्ययोजना में नर्मदा किनारे के ग्रामों का चयन उपयुक्त हो सकता है। अप्रत्यक्ष रुप से उन्होने स्पष्ट ही कह दिया कि प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री जी के क्षेत्र में नर्वदा बहती है इसलिये सब समझ जाईये कि वहीं पानी पर्याप्त है और कार्य तत्काल प्रारंभ हो जिससे मुख्यमंत्री का क्षेत्र हरा-भरा-समृध्द हो जाये ताकि वह हम पर व हमारे कार्यों से प्रसन्न हो सकें।
सहायक संचालक उद्यानिकी ने जिलाधीश को बताया कि प्रस्तावित कार्ययोजना के तहत जिले में 34 क्लस्टर के कुल 130 ग्रामों का चयन किया गया है। कृषकों के चयन का कार्य जारी है । सब्जी बीज इन्फास्ट्रक्चर के तहत 80 हेक्टेयर मसाला विकास और 13 हेक्टेयर क्षैत्र में पुष्प विकास के कार्य किए जायेगे । प्रस्तावित कार्ययोजना में पुराने बगीचों में उत्पादकता बढ़ाने के मद्देनजर 25 हेक्टेयर क्षैत्र को शामिल किया गया है । इसी तरह रोपण सामग्री उत्पादन के लिए पांच-पांच सौ वर्ग मीटर में ग्रीन हाउस और नेट हाउस बनाए जायेगे । दो हेक्टेयर में मल्ंचिग का कार्य किया जायेगा । एकीकृत जीवनाशी प्रबंधन का कार्य 20 हेक्टेयर में किया जायेगा । जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 200 हेक्टेयर में सब्जी और 10 हेक्टेयर में मिर्च का उत्पादन किया जायगा। प्रस्तावित कार्ययोजना में 20 वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण और 10 जल स्त्रोंतों का उत्पादन किया जायेगा । प्रस्तावित कार्ययोजना में 20 वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण और 10 जल स्त्रोंतो का सृजन शामिल किया गया । जिले से 400 किसानों के चयन का कार्य शुरू कर दिया गया है । किसानों का चयन कर उन्हें राज्य के भीतर और राज्य के बाहर प्रशिक्षण के लिए भेजा जायगा ।
इस प्रकार केन्द्र से मंजूर हुई इस महत्वपूर्ण योजना के लिये करोड़ो रुपये में प्राप्त धनराशि एक तरह से सिर्फ मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र जिसे नर्वदा का किनारा कहकर योजना में सम्मिलित किया गया है वही हरा-भरा होगा। मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में वैसे ही कल-कारखानों से लेकर करीब एक अरब रुपये (1,00,00,00,000) तक के तरह-तरह के निर्माण कार्यों की स्वीकृति पूर्व में ही हो चुकी है। नर्वदा के किनारे होने तथा पानी खूब होने से यहाँ के किसान पहले ही समृध्द और सम्पन्न हैं। यहाँ पर्याप्त पैदावार है सभी और खुशहाली है।
ऐसे में केन् द्र से आई योजनाओं का भी इस प्रकार यहाँ उपयोग किया जा रहा है। जिसको लेकर कोई बोलने या विरोध करने वाला नहीं है। देखते हैं क्या कांग्रेस इस मामले में कुछ करेगी ?
जिला जनसम्पर्क कार्यालय से प्रसारित समाचार के अनुसार जिला उद्यानिकी के कर्ताधर्ता जिलाधीश की अध्यक्षता में गत दिवस संपन्न एक बैठक में उद्यानिकी विकास की वर्ष 2007-08 की कार्ययोजना का अनुमोदन किया गया । बैठक में जिलाधीश ने उद्यानिकी विकास के लिए पानी की पर्याप्त उपलब्धता को लेकर बातचीत करते हुए अपनी राय थोपी की नर्वदा किनारे पर्याप्त पानी है। फिर उद्यानिकी के कार्यो को तत्काल प्रारंभ करने और प्रस्तावित कार्ययोजना का जनपद पंचायतों की कृषि स्थायी समिति से तत्काल अनुमोदन कराने के निर्देश दिए। कृषक भ्रमण प्रशिक्षण के लिए उपयुक्त किसानों का चयन करने के भी उन्होंने निर्देश दिए। जिलाधीश ने उद्यानिकी विकास के लिए सबसे जरूरी तत्व पानी पर विशेष जोर देते हुए कहा कि वर्तमान में जहां पहले से ही पानी उपलब्ध है वहां उद्यानिकी कार्यो को प्राथमिकता दी जाये। उन्होंने सुझाव दिया कि पानी की सुलभता को देखते हुए कार्ययोजना में नर्मदा किनारे के ग्रामों का चयन उपयुक्त हो सकता है। अप्रत्यक्ष रुप से उन्होने स्पष्ट ही कह दिया कि प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री जी के क्षेत्र में नर्वदा बहती है इसलिये सब समझ जाईये कि वहीं पानी पर्याप्त है और कार्य तत्काल प्रारंभ हो जिससे मुख्यमंत्री का क्षेत्र हरा-भरा-समृध्द हो जाये ताकि वह हम पर व हमारे कार्यों से प्रसन्न हो सकें।
सहायक संचालक उद्यानिकी ने जिलाधीश को बताया कि प्रस्तावित कार्ययोजना के तहत जिले में 34 क्लस्टर के कुल 130 ग्रामों का चयन किया गया है। कृषकों के चयन का कार्य जारी है । सब्जी बीज इन्फास्ट्रक्चर के तहत 80 हेक्टेयर मसाला विकास और 13 हेक्टेयर क्षैत्र में पुष्प विकास के कार्य किए जायेगे । प्रस्तावित कार्ययोजना में पुराने बगीचों में उत्पादकता बढ़ाने के मद्देनजर 25 हेक्टेयर क्षैत्र को शामिल किया गया है । इसी तरह रोपण सामग्री उत्पादन के लिए पांच-पांच सौ वर्ग मीटर में ग्रीन हाउस और नेट हाउस बनाए जायेगे । दो हेक्टेयर में मल्ंचिग का कार्य किया जायेगा । एकीकृत जीवनाशी प्रबंधन का कार्य 20 हेक्टेयर में किया जायेगा । जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 200 हेक्टेयर में सब्जी और 10 हेक्टेयर में मिर्च का उत्पादन किया जायगा। प्रस्तावित कार्ययोजना में 20 वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण और 10 जल स्त्रोंतों का उत्पादन किया जायेगा । प्रस्तावित कार्ययोजना में 20 वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण और 10 जल स्त्रोंतो का सृजन शामिल किया गया । जिले से 400 किसानों के चयन का कार्य शुरू कर दिया गया है । किसानों का चयन कर उन्हें राज्य के भीतर और राज्य के बाहर प्रशिक्षण के लिए भेजा जायगा ।
इस प्रकार केन्द्र से मंजूर हुई इस महत्वपूर्ण योजना के लिये करोड़ो रुपये में प्राप्त धनराशि एक तरह से सिर्फ मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र जिसे नर्वदा का किनारा कहकर योजना में सम्मिलित किया गया है वही हरा-भरा होगा। मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में वैसे ही कल-कारखानों से लेकर करीब एक अरब रुपये (1,00,00,00,000) तक के तरह-तरह के निर्माण कार्यों की स्वीकृति पूर्व में ही हो चुकी है। नर्वदा के किनारे होने तथा पानी खूब होने से यहाँ के किसान पहले ही समृध्द और सम्पन्न हैं। यहाँ पर्याप्त पैदावार है सभी और खुशहाली है।
ऐसे में केन् द्र से आई योजनाओं का भी इस प्रकार यहाँ उपयोग किया जा रहा है। जिसको लेकर कोई बोलने या विरोध करने वाला नहीं है। देखते हैं क्या कांग्रेस इस मामले में कुछ करेगी ?
Saturday, February 2, 2008
ध्वज अपमान मामला:प्रकरण दर्ज
जावर 31 जनवरी (फुरसत)। यहाँ जिस अमर मोती मेमोरियल स्कूल में ध्वज वंदन के बाद उसे उतारा नहीं गया था आज उस संबंध में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए यहाँ राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत मामला पंजीबध्द कर लिया है।
यहाँ अमरमोती मेमोरियल स्कूल में ध्वज वंदन हुआ था लेकिन सायं सूर्यास्त के पूर्व ध्वज को उतारा नहीं गया था। दूसरे दिन सुबह 27 जनवरी को करीब 10 बजे तक यह ध्वज लगा रहा और करीब इसी समय ये हवा में उड़कर नीचे भी गिर गया था। एक व्यक्ति ने उसे तत्काल उठाकर अपने पास सुरक्षित रख लिया था।
इसका पंचनामा भी पटवारी द्वारा बनवाया गया था। कल इस संबंध में कुछ लोगों मो. अतहर खां, भूपेन्द्र सिंह आदि के बयान भी हुए थे। आज पुलिस ने इस मामले में राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 (2) के तहत स्कूल संचालक गोपाल सिंह सिसोदिया के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है।
यहाँ अमरमोती मेमोरियल स्कूल में ध्वज वंदन हुआ था लेकिन सायं सूर्यास्त के पूर्व ध्वज को उतारा नहीं गया था। दूसरे दिन सुबह 27 जनवरी को करीब 10 बजे तक यह ध्वज लगा रहा और करीब इसी समय ये हवा में उड़कर नीचे भी गिर गया था। एक व्यक्ति ने उसे तत्काल उठाकर अपने पास सुरक्षित रख लिया था।
इसका पंचनामा भी पटवारी द्वारा बनवाया गया था। कल इस संबंध में कुछ लोगों मो. अतहर खां, भूपेन्द्र सिंह आदि के बयान भी हुए थे। आज पुलिस ने इस मामले में राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 (2) के तहत स्कूल संचालक गोपाल सिंह सिसोदिया के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है।
घरेलु गैस भरते मारुति कार पकड़ी
आष्टा 31 जनवरी (फुरसत)। आज आष्टा नगर के किलेरामा के पास से खाद्य अधिकारी ने एक स्थान पर छापा मार कर यहां पर घरेलु गैस के सिलेन्डर से अवैध रूप से एक मारूति कार क्रमांक एमपी-09-व्ही-9014 में गैस भरते समय पकड़ा है। खाद्य अधिकारी ने उक्त स्थान से मारूति एक घरेलु गैस सिलेंडर एक नलकी को जप्त किया है । पुलिस ने बताया है कि उक्त मारूति खाद्य विभाग ने जप्त कर केवल हमारी सुरक्षा में ही है जो यहां पर खड़ी है ।
सहेली हो तो ऐसी, 17-17 हजार में खरीदे सोफे
सीहोर 31 जनवरी (फुरसत)। दोस्ती हो तो ऐसी.....नगर में इन दिनों कार्यरत दो महिला अधिकारियों के बीच अच्छी बन रही है। अच्छी क्या बहुत अच्छी बन रही है। हालांकि दोनो हैं तो अलग-अलग शासकिय कार्यालयों की अधिकारी लेकिन उनकी आपस घुलती बहुत है। अक्सर दोनो को एक साथ देखा जा सकता है। बातचीत करते या फिर बाजार करते हुए भी आप एक ही नजर आ जाती हैं आखिर इसमें बुराई ही क्या है...बाहर से आने वाले अधिकारियों की स्थानीय स्तर पर कभी किसी से उतनी नहीं पट पाती जितनी किन्ही शासकिय स्तर के ही अधिकारियों से बनती है। इन दोनो शासकिय महिलाओं की इसी दोस्ती के चर्चे अब शुरु होने लगे हैं। असल छोटे-से नगर में जब कभी भी किन्ही अधिकारियों की कोई नई गतिविधि शुरु होती है तो सहज ही नगर में चर्चा का विषय भी बन जाती है। इन दोनो महिला अधिकारियों की तो पसंद भी एक-सी है । असल में पसंद को लेकर एक और चर्चा यह है कि दोनो ने 17-18 हजार की राशि के दो सोफा सेट इन दिनों बनवाये हैं। दोनो ही बेशकीमति सोफा सेट इन दोनो ने एक साथ बनवाये हैं जो इनके घर की शोभा बढ़ायेंगे। भाई तुझे जो पसंद वही मेरी पसंद यही अंदाज तो दोनो को एक दूसरे के और करीब लाया होगा तभी तो इनकी दोस्ती की चर्चाएं जिले भर के अधिकारियों में होने लगी है वो कहते हैं कि भाई दोस्ती हो तो ऐसी।
डेढ़ लाख के पार हुए विधानसभा के मतदाता महिलाएं घट गई और पुरुष बढ़ गये ?
सीहोर 31 जनवरी (फुरसत) धीरे-धीरे सीहोर विधानसभा क्षेत्र की संख्या में अब डे ढ़ लाख से पार हो गई है। हाल ही नई मतदाता सूची के प्रकाशन होने के बाद यह तथ्य सामने आया है कि अब यहाँ कुल 1 लाख 50 हजार 192 मतदाता हो गये हैं।
ज्ञातव्य है कि पूर्व में सीहोर विधानसभा में 1 लाख 39 हजार 483 कुल मतदाता था जिनमें 78 हजार 188 पुरुष और 71 हजार 295 महिलाएं शामिल थीं। लेकिन इस बार नई सूची में करीब 32 महिलाएं घटकर सिर्फ 71हजार 263 ही शेष बची हैं। नई सूची में पुरुषों की संख्या 78 हजार 929 है कुल मिलाकर 1 लाख 50 हजार 192 मतदाताओं के साथ सीहोर विधानसभा में डेढ़ लाख का आकड़ा पार हो चुका है।
शहीद दिवस पर एक तरफ गाँधी का स्मरण हुआ दूसरी तरफ खुले आम बिकता रहा मांस
सीहोर। भले पूरे देश में कुछ विशेष तिथियों महावीर जयंती, गाँधी जी की पुण्यतिथि और शहीद दिवस पर मांस-मद्य का विक्रय बंद रहता हो लेकिन यहाँ सीहोर में कभी इसका पालन नहीं कराया जाता। पिछली बार जब बार-बार जिला प्रशासन को लोगों ने महावीर जयंती पर दुकाने बंद कराने को कहा था तो बमुश्किल बंद कराई गई थी। कल 30 जनवरी को खुले आम मांस बिकता रहा।
ज्ञातव्य है कि पूर्व में सीहोर विधानसभा में 1 लाख 39 हजार 483 कुल मतदाता था जिनमें 78 हजार 188 पुरुष और 71 हजार 295 महिलाएं शामिल थीं। लेकिन इस बार नई सूची में करीब 32 महिलाएं घटकर सिर्फ 71हजार 263 ही शेष बची हैं। नई सूची में पुरुषों की संख्या 78 हजार 929 है कुल मिलाकर 1 लाख 50 हजार 192 मतदाताओं के साथ सीहोर विधानसभा में डेढ़ लाख का आकड़ा पार हो चुका है।
शहीद दिवस पर एक तरफ गाँधी का स्मरण हुआ दूसरी तरफ खुले आम बिकता रहा मांस
सीहोर। भले पूरे देश में कुछ विशेष तिथियों महावीर जयंती, गाँधी जी की पुण्यतिथि और शहीद दिवस पर मांस-मद्य का विक्रय बंद रहता हो लेकिन यहाँ सीहोर में कभी इसका पालन नहीं कराया जाता। पिछली बार जब बार-बार जिला प्रशासन को लोगों ने महावीर जयंती पर दुकाने बंद कराने को कहा था तो बमुश्किल बंद कराई गई थी। कल 30 जनवरी को खुले आम मांस बिकता रहा।
उन्नत उर्जा चूल्हे से अब मात्र 150 रु. महिने में बन सकता घर का भोजन
सीहोर 31 जनवरी (फुरसत)। इण्डियन इंस्टीटयूट आफ साइंस बैंगलोर भारत द्वारा बनाये गये उन्नत धुंआ रहित गैस चूल्हा जिसे बीपी एनर्जी इण्डिया लिमिटेड कम्पनी द्वारा बाजार में उतारा गया है ने सीहोर में आते ही धूम मचा दी है। तमिलनाडु व महाराष्ट्र में धूम मचाने के बाद यह स्टोव अब मध्य प्रदेश में आ गया है जहाँ बहुत तेजी से यह अपना स्थान बनाने में लगा है। नूतन के बत्ती वाले स्टोव की ही तर्ज पर यह आधुनिक धुंआ रहित चूल्हा कम्पनी द्वारा दी जाने वाली जलाऊ लकड़ी जो मात्र 4 रुपये किलो होती है से चलता है और नीचे लगे पंखे से इसकी आंच नीली पड़ने लगती है। मात्र 3 रुपये में एक घंटे तक यह सुविधा के अनुसार तेज-मद्दा करके चलाया जा सकता है। यहाँ अंतराष्ट्रीय कम्पनी आईटीसी के सोया चौपाल पर यह बिक रहा है।
एक तरफ जहाँ गैस की टंकी के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं और वह 329 रुपये में किसी तरह मिल पा रही है वहीं अचानक भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा बनाये गये धुंआ रहित चूल्हे ''उर्जा'' ने इसके खरीददारों को कुछ राहत दी है। उर्जा एक छोटा-सा चूल्हा है जिसमें बीच में लगी गोल जाली है इसमें कम्पनी द्वारा दी गई विशेष प्रकार की जलाऊ लकड़ी जो बिल्कुल गाय को खिलाई जाने वाली खली की तरह रहती है उसे डाल दिया जाता है। यह जलाऊ खली पूरा स्टोब भरने पर करीब 600 ग्राम भरा जाती है। फिर इस पर घासलेट की कुछ बूंदे डालकर माचिस से आग लगा दी जाती है। आग लगते ही यह मात्र 2-3 मिनिट में ही अच्छी तरह जलने लगता है।
इसी चूल्हे जाली के आने के लिये नीचे एक तरफ से पंखा भी लगाया गया है। यह छोटा-सा पंखा स्टोव में ही लगी एक ड्राय बैटरी से चलता है यह बेटरी मोबाइल सरीखे चार्जर से जितने घंटे चार्ज की जाती है उतने ही घंटे तक यह पंखा चला देती है। कुल मिलाकर चूल्हे में लगा पंखा चूल्हे में लगी बैटरी से चलता है और पंखा हवा तेजी से अंदर जाली के अंदर फेंकता है जिससे मात्र 5 मिनिट में ही आधुनिक चूल्हा बहुत अच्छी तरह जलने लगता है। पंखे को चलाने के लिये दो गति भी दी गई यदि पंखा तेज किया जाये तो आंच तेज रहती है और उस स्थिति में इस पर बड़ी तपेली या कुछ और भी रखकर पकाया जा सकता है। जबकि कम गति पर पंखा चलाने पर आंच भी धीमी उठती है और उस पर आराम से चाय, रोटी आदि बन सकती है।
इस प्रकार भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा बनाये गये इस चूल्हे में जो जलाऊ खली डाली जाती है बस वही एक खर्चा है। लेकिन यह खली का 20 रुपये में 5 किलो का एक बोरा आ जाता है। जिसे कम्पनी से ही खरीदा जाता है। यहाँ पर्याप्त मात्रा में यह जलाऊ खली है। जिसे उपयोगक्ता को जितनी चाहिऐ वह खरीद सकता है। एक बार पूरी खली भरने पर करीब 6 सौ ग्राम भराती है और यह चूल्हा करीब 1 घंटे तक चलता है धीरे-धीरे इसकी लौ कम होती जाती है इस दौरान यदि खली और डालने की इच्छा हो तो बहुत धीरे-धीरे डाली जा सकती है। किसी 5 सदस्यीय घर के लिये सुबह का भोजन एक घंटे में बन जाता है और शाम का भी इतने ही समय में बनता है। इस प्रकार प्रतिदिन अधिकतम सवा किलो 5 रुपये की खली जलती है जो पूरे महिने में 150 रुपये से अधिक का खर्चा सामान्यत: नहीं बैठता।
हालांकि गैस की टंकी का उपयोग करने वालों की सहूलियत कुछ अधिक है लेकिन यदि बचत करने के उद्देश्य से इस देखा जाये तो यह एक अच्छी बचत का स्त्रोत बन सकता है। बीपी कम्पनी उर्जा चूल्हा ग्रामीण बड़ी संख्या में खरीदकर ले जा रहे हैं जिन्हे गैस की टंकी सामान्यत: मिल नहीं पाती और मिलती भी है तो सवा गुना दाम में मिलती है। शहर के भी कई लोगों ने यह चूल्हा खरीदा है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यह बहुत अच्छी लौ उठाता है तेज उठाता है और धुंआ नाम मात्र का भी नहीं रहता।
सबसे शानदार बात यह भी है कि जिन्हे चूल्हे की रोटी का स्वाद लगा होता है उन्हे इस चूल्हे की रोटी का स्वाद और भी अच्छा लगता है। एक स्थिति से न सिर्फ लकड़ी के चूल्हे की अपेक्षा बल्कि केरोसिन से भी यदि महिने भर रोज एक घंटा चूल्हा जलाया जाये तो 300 रुपये के आसपास खर्च बैठ ही जाता है इससे अच्छा तो यह बीपी का ''उर्जा'' चूल्हा ही माना जा सकता है। चूल्हे में लगी बैटरी को मात्र 5 घंटे एक साथ चार्ज कर देने पर सप्ताह भर तक यह अच्छी चलती है। रेग्यूलेटर से पंखे की गति तेज-धीमी भी हो जाती है। इसके अंदर कुछ ऐसी धातु का उपयोग भी किया गया है जिसके कारण खुद स्टोव कभी यादा गर्म नहीं होता। इसकी कीमत थोड़ी यादा ही 675 रुपये है। जिसके कारण इसे खरीदने में एक बारगी खूब सोच-विचार करना पड़ता है फिर इसमें जलने वाली उर्जा भी जहाँ से चूल्हा खरीदा जाता है वहीं से खरीदना पड़ती है। अभी यह चूल्हा चौपाल सागर आकर्षण का केन्द्र है।
एक तरफ जहाँ गैस की टंकी के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं और वह 329 रुपये में किसी तरह मिल पा रही है वहीं अचानक भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा बनाये गये धुंआ रहित चूल्हे ''उर्जा'' ने इसके खरीददारों को कुछ राहत दी है। उर्जा एक छोटा-सा चूल्हा है जिसमें बीच में लगी गोल जाली है इसमें कम्पनी द्वारा दी गई विशेष प्रकार की जलाऊ लकड़ी जो बिल्कुल गाय को खिलाई जाने वाली खली की तरह रहती है उसे डाल दिया जाता है। यह जलाऊ खली पूरा स्टोब भरने पर करीब 600 ग्राम भरा जाती है। फिर इस पर घासलेट की कुछ बूंदे डालकर माचिस से आग लगा दी जाती है। आग लगते ही यह मात्र 2-3 मिनिट में ही अच्छी तरह जलने लगता है।
इसी चूल्हे जाली के आने के लिये नीचे एक तरफ से पंखा भी लगाया गया है। यह छोटा-सा पंखा स्टोव में ही लगी एक ड्राय बैटरी से चलता है यह बेटरी मोबाइल सरीखे चार्जर से जितने घंटे चार्ज की जाती है उतने ही घंटे तक यह पंखा चला देती है। कुल मिलाकर चूल्हे में लगा पंखा चूल्हे में लगी बैटरी से चलता है और पंखा हवा तेजी से अंदर जाली के अंदर फेंकता है जिससे मात्र 5 मिनिट में ही आधुनिक चूल्हा बहुत अच्छी तरह जलने लगता है। पंखे को चलाने के लिये दो गति भी दी गई यदि पंखा तेज किया जाये तो आंच तेज रहती है और उस स्थिति में इस पर बड़ी तपेली या कुछ और भी रखकर पकाया जा सकता है। जबकि कम गति पर पंखा चलाने पर आंच भी धीमी उठती है और उस पर आराम से चाय, रोटी आदि बन सकती है।
इस प्रकार भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा बनाये गये इस चूल्हे में जो जलाऊ खली डाली जाती है बस वही एक खर्चा है। लेकिन यह खली का 20 रुपये में 5 किलो का एक बोरा आ जाता है। जिसे कम्पनी से ही खरीदा जाता है। यहाँ पर्याप्त मात्रा में यह जलाऊ खली है। जिसे उपयोगक्ता को जितनी चाहिऐ वह खरीद सकता है। एक बार पूरी खली भरने पर करीब 6 सौ ग्राम भराती है और यह चूल्हा करीब 1 घंटे तक चलता है धीरे-धीरे इसकी लौ कम होती जाती है इस दौरान यदि खली और डालने की इच्छा हो तो बहुत धीरे-धीरे डाली जा सकती है। किसी 5 सदस्यीय घर के लिये सुबह का भोजन एक घंटे में बन जाता है और शाम का भी इतने ही समय में बनता है। इस प्रकार प्रतिदिन अधिकतम सवा किलो 5 रुपये की खली जलती है जो पूरे महिने में 150 रुपये से अधिक का खर्चा सामान्यत: नहीं बैठता।
हालांकि गैस की टंकी का उपयोग करने वालों की सहूलियत कुछ अधिक है लेकिन यदि बचत करने के उद्देश्य से इस देखा जाये तो यह एक अच्छी बचत का स्त्रोत बन सकता है। बीपी कम्पनी उर्जा चूल्हा ग्रामीण बड़ी संख्या में खरीदकर ले जा रहे हैं जिन्हे गैस की टंकी सामान्यत: मिल नहीं पाती और मिलती भी है तो सवा गुना दाम में मिलती है। शहर के भी कई लोगों ने यह चूल्हा खरीदा है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यह बहुत अच्छी लौ उठाता है तेज उठाता है और धुंआ नाम मात्र का भी नहीं रहता।
सबसे शानदार बात यह भी है कि जिन्हे चूल्हे की रोटी का स्वाद लगा होता है उन्हे इस चूल्हे की रोटी का स्वाद और भी अच्छा लगता है। एक स्थिति से न सिर्फ लकड़ी के चूल्हे की अपेक्षा बल्कि केरोसिन से भी यदि महिने भर रोज एक घंटा चूल्हा जलाया जाये तो 300 रुपये के आसपास खर्च बैठ ही जाता है इससे अच्छा तो यह बीपी का ''उर्जा'' चूल्हा ही माना जा सकता है। चूल्हे में लगी बैटरी को मात्र 5 घंटे एक साथ चार्ज कर देने पर सप्ताह भर तक यह अच्छी चलती है। रेग्यूलेटर से पंखे की गति तेज-धीमी भी हो जाती है। इसके अंदर कुछ ऐसी धातु का उपयोग भी किया गया है जिसके कारण खुद स्टोव कभी यादा गर्म नहीं होता। इसकी कीमत थोड़ी यादा ही 675 रुपये है। जिसके कारण इसे खरीदने में एक बारगी खूब सोच-विचार करना पड़ता है फिर इसमें जलने वाली उर्जा भी जहाँ से चूल्हा खरीदा जाता है वहीं से खरीदना पड़ती है। अभी यह चूल्हा चौपाल सागर आकर्षण का केन्द्र है।
Thursday, January 31, 2008
सुरेश साबू मित्र मंडल द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान
सीहोर 30 जनवरी (फुरसत)। स्वतंत्रता संग्राम सेनानीगण हमारे राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है । आज हम सभी का यहर् कत्तव्य है कि हम उनके द्वारा दिलायी गई आजादी को संभालकर रखें और जैसा सपना हमारे देश के महान सेनानियों ने रामराज को देखा था उसे साकार करने का ईमानदारी से प्रयास करें । गांधीजी, भगतसिंह, सुभाषचंद बोस, रामप्रसाद बिस्मिल, अश्फाक उल्ला खां जैसे असंख्य ज्ञात और अज्ञात महापुरूषों ने आजादी की नींव का पत्थर बनकर हमें दासता से मुक्ति दिलायी । ऐसे महान देशभक्तों का सपना अवश्व साकार होगा । ऐसा हम सभी को विश्वास है । उक्त उद्गार सुरेश साबू मित्र मंडल द्वारा आयोजित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि म।प्र। कांग्रेस विधायक दल के प्रवक्ता एवं पूर्व मंत्री सानसिंह वर्मा ने व्यक्त किये ।
श्री वर्मा ने युवाओं से आव्हान किया कि आज समाज और राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण हमारी संस्कृति से पाश्चात्य के भी उस पार जाने को है, इसे हमें दूर कर अपनी सांस्कृतिक सभ्यता की रक्षा करनी होगी । इस अवसर पर आल इंडिया हैंडीक्राफ्ट बोर्ड कपड़ा मंत्रालय नई दिल्ली के उपाध्यक्ष अक्षत कासट ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का देश के प्रति त्याग व समर्पण अतुलनीय है एवं वह सम्मान से भी परे है । यह हम सभी के लिए गौरव की बात है कि हमें आज भी भारत माता के सच्चे सपूतों का सम्मान करने का अवसर प्राप्त हुआ है । इसके लिये मैं सुरेश साबू मित्र मंडल को बधाई एंव धन्यवाद देता हूं । कार्यक्रम में उपस्थित सीहोर के पूर्व विधायक शंकरलाल साबू ने उपस्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को नमन करते हुए स्वतंत्रता संग्राम में सीहोर नगर के शहीदों का भी उल्लेख किया । जिला कांग्रेस अध्यक्ष कैलाश परमार ने अपने संबोधन में कहा कि हमें स्वतंत्रता के इन सेनानियों से सीख लेना चाहिये कि हमें जो बोलेंगे अच्छा बोलेंगे जो करेंगे अच्छा करेंगे तथा अपनी कथनी और करनी में अंतर नही करेंगें। श्री परमार ने सुरेश साबू मित्र मंडल को उक्त आयोजन आयोजित करने पर बधाई दी । कार्यक्रम में देवास विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष मनोज रजानी, उज्जैन के कांग्रेस नेता मनीष शर्मा व कांग्रेस नेता सुरेश साबू मंचासीन थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ उपस्थित अतिथियों ने राष्ट्रपति महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रावलित कर किया । अतिथियों को बेच युवक कांग्रेस अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल, शैलेष अग्रवाल, राम मित्तल, राजेन्द्र शर्मा, दीपक शर्मा, अजय अग्रवाल, विनोद जैन, नीरज राठौर, आशीष गेहलोत, पार्षद ने लगाये । स्वागत भाषण कांग्रेस नेता प्रेमबंधु शर्मा ने दिया। सेनानी सम्मान कार्यक्रम पर पार्षद आशीष गेहलोत ने प्रकाश डाला। प्रारंभ में अतिथियों का पुष्पमाला से स्वागत सुरेश साबू, नंद गोपाल बियाणी, सुश्री रूकमणी रोहिला, रामनारायण ताम्रकार, मदन मोहन शर्मा, महेन्द्र सिंह अरोरा, हफीज चौधरी, दामोदर राय, अशोक श्रीवास्तव, संजय पालीवाल, प्रमोद मेहता, पंकज गुप्ता, पवन राठौर, राहुल यादव, दिनेश भैरवे, शंकर गुप्ता, मनोहर शर्मा, इरफान बेल्डर, समाजसेवी हरीश अग्रवाल, सुदेश राय, साकेत कासट, हरी सोनी, विनय पालीवाल, राजाराज कसोटिया, अखिलेश राठौर, विनीत राठौर, मनोज राठौर, मृदुल तोमर, सुनीलधाड़ी, सोनी शर्मा, पवन गुप्ता, लल्लू राठी, द्वारका मित्तल, सौभालसिंह भाटी, सोहेल मिर्जा, प्रकाश पोरवाल, जगदीश चौहान, जावर नगर पंचायत अध्यक्ष फूलसिंह मालवीय आदि ने किया । इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को जाकेट, सम्मान पत्र, श्रीफल भेंट कर श्रीवर्मा ने उदय सिंह आर्य, पूरनसिंह आर्य, बेनी प्रसाद राठौर, गोपाल राठोर, केसरीमल गिरोठिया, विद्यासागर समाधिया, भगवान दास अग्रवाल, अभिमन्यु राठौर, मुंशीलाल राठौर, गेंदालाल सूर्यवंशी, शांतिलाल जैन, अमृतलाल शर्मा, चंद्रकिशोर व्यास, श्याम सुंदर सक्सेना, देवबगस वर्मा का सम्मान किया । कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप चौहान ने किया एवं आभार राजेन्द्र शर्मा पूर्व पार्षद एवं अध्यक्ष सुरेश साबू मित्र मंडल न व्यक्त किया ।
श्री वर्मा ने युवाओं से आव्हान किया कि आज समाज और राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण हमारी संस्कृति से पाश्चात्य के भी उस पार जाने को है, इसे हमें दूर कर अपनी सांस्कृतिक सभ्यता की रक्षा करनी होगी । इस अवसर पर आल इंडिया हैंडीक्राफ्ट बोर्ड कपड़ा मंत्रालय नई दिल्ली के उपाध्यक्ष अक्षत कासट ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का देश के प्रति त्याग व समर्पण अतुलनीय है एवं वह सम्मान से भी परे है । यह हम सभी के लिए गौरव की बात है कि हमें आज भी भारत माता के सच्चे सपूतों का सम्मान करने का अवसर प्राप्त हुआ है । इसके लिये मैं सुरेश साबू मित्र मंडल को बधाई एंव धन्यवाद देता हूं । कार्यक्रम में उपस्थित सीहोर के पूर्व विधायक शंकरलाल साबू ने उपस्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को नमन करते हुए स्वतंत्रता संग्राम में सीहोर नगर के शहीदों का भी उल्लेख किया । जिला कांग्रेस अध्यक्ष कैलाश परमार ने अपने संबोधन में कहा कि हमें स्वतंत्रता के इन सेनानियों से सीख लेना चाहिये कि हमें जो बोलेंगे अच्छा बोलेंगे जो करेंगे अच्छा करेंगे तथा अपनी कथनी और करनी में अंतर नही करेंगें। श्री परमार ने सुरेश साबू मित्र मंडल को उक्त आयोजन आयोजित करने पर बधाई दी । कार्यक्रम में देवास विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष मनोज रजानी, उज्जैन के कांग्रेस नेता मनीष शर्मा व कांग्रेस नेता सुरेश साबू मंचासीन थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ उपस्थित अतिथियों ने राष्ट्रपति महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रावलित कर किया । अतिथियों को बेच युवक कांग्रेस अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल, शैलेष अग्रवाल, राम मित्तल, राजेन्द्र शर्मा, दीपक शर्मा, अजय अग्रवाल, विनोद जैन, नीरज राठौर, आशीष गेहलोत, पार्षद ने लगाये । स्वागत भाषण कांग्रेस नेता प्रेमबंधु शर्मा ने दिया। सेनानी सम्मान कार्यक्रम पर पार्षद आशीष गेहलोत ने प्रकाश डाला। प्रारंभ में अतिथियों का पुष्पमाला से स्वागत सुरेश साबू, नंद गोपाल बियाणी, सुश्री रूकमणी रोहिला, रामनारायण ताम्रकार, मदन मोहन शर्मा, महेन्द्र सिंह अरोरा, हफीज चौधरी, दामोदर राय, अशोक श्रीवास्तव, संजय पालीवाल, प्रमोद मेहता, पंकज गुप्ता, पवन राठौर, राहुल यादव, दिनेश भैरवे, शंकर गुप्ता, मनोहर शर्मा, इरफान बेल्डर, समाजसेवी हरीश अग्रवाल, सुदेश राय, साकेत कासट, हरी सोनी, विनय पालीवाल, राजाराज कसोटिया, अखिलेश राठौर, विनीत राठौर, मनोज राठौर, मृदुल तोमर, सुनीलधाड़ी, सोनी शर्मा, पवन गुप्ता, लल्लू राठी, द्वारका मित्तल, सौभालसिंह भाटी, सोहेल मिर्जा, प्रकाश पोरवाल, जगदीश चौहान, जावर नगर पंचायत अध्यक्ष फूलसिंह मालवीय आदि ने किया । इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को जाकेट, सम्मान पत्र, श्रीफल भेंट कर श्रीवर्मा ने उदय सिंह आर्य, पूरनसिंह आर्य, बेनी प्रसाद राठौर, गोपाल राठोर, केसरीमल गिरोठिया, विद्यासागर समाधिया, भगवान दास अग्रवाल, अभिमन्यु राठौर, मुंशीलाल राठौर, गेंदालाल सूर्यवंशी, शांतिलाल जैन, अमृतलाल शर्मा, चंद्रकिशोर व्यास, श्याम सुंदर सक्सेना, देवबगस वर्मा का सम्मान किया । कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप चौहान ने किया एवं आभार राजेन्द्र शर्मा पूर्व पार्षद एवं अध्यक्ष सुरेश साबू मित्र मंडल न व्यक्त किया ।
जल प्रदाय नहीं होने से पेयजल के लिए भटकने लगे नगरवासी
सीहोर 30 जनवरी (फुरसत)। विगत पांच दिनों से पार्वती पेयजल योजना से सीहोर छावनी सहित अन्य क्षैत्रों में पेयजल आपूर्ति करने में नपा परिषद असफल सिद्ध हो रही है । पेयजल प्रदाय के लिए जब भी नागरिक परिषद के पेयजल प्रदाय के संबंध में जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करते है तो पहले तो उनहें संतोष जनक उत्तर नही दिया जाता है और दिया भी जाता है तो यह कहकर पल्ला झाड़ लेते है कि इन्टैकवेल पर रात्रि में विद्युत कटौती होने से पेयजल टंकियां नही भरा पाती है । परिणाम स्वरूप नगर में पेयजल आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हो रही है । पांच दिनों से नल नही चलने से छावनी, कस्बा, इंग्लिशपुरा, गंगा आश्रम, आदि क्षैत्रों में पेयजल संकट की स्थिति अभी से बनने लगी है । नागरिक पेयजल के लिए की खाक छानने लगे है।
स्वप्न में देवताओं ने दिये दर्शन और 20 दिन में तैयार हो गया काल भैरव मंदिर
मंदिर बनवाने वाले विद्युत मण्डल के कार्यपालन यंत्री सीहोर श्री सक्सेना के साथ घटे हैं अनेक दैवीय चमत्कार
सीहोर में बना चमत्कारिक भैरव तंत्र पर भैरव
मंदिर
सीहोर 30 जनवरी (विशेष संवाददाता फुरसत)। देव भूमि भारतवर्ष में देव चमत्कार तो आये दिन होते ही रहते हैं लेकिन वर्तमान विद्युत मण्डल कार्यपालन यंत्री रविन्द्र जीत सक्सेना के भाग्य इस मामले कुछ यादा ही प्रबल हैं। इन्हे अक्सर जिस क्षेत्र में यह यादा दिन रह लेते हैं वहाँ के आसपास के जाग्रत देव स्थानों के स्वप् आते हैं और फिर यदि वह देव स्थान खण्डहर की स्थिति में है या व्यवस्थित नहीं बना है अथवा वहाँ किसी को जानकारी ही नहीं है यहाँ भी कोई स्थान है तो फिर अपने स्वप् में दिखे स्थान को श्री रविन्द्र जीत ढूंढना शुरु कर देते हैं और जब स्वप्न में दिखा देव स्थान इन्हे ढूंढते-ढूंढते मिल जाता है तो फिर वह वहीं एक मंदिर बनवा देते हैं। यहाँ करोली वाली माता मंदिर गंज 7 जनवरी 2008 के पूर्व कभी रवीन्द्र जीत सक्सेना ने देखा भी नहीं था लेकिन स्वप् में आये इस मंदिर के दृश्य जब उन्होने एक कागज में उतारे तो विद्युत मण्डल में ही काम करने वाले पं। कमला प्रसाद ने चित्र देखकर बता दिया यह तो करोली वाली माता मंदिर है......।
आज मात्र 20 दिन के अंदर ही 30 जनवरी बुधवार माघ कृष्ण पक्ष अष्टमी को यहाँ काल भैरव का तंत्रोक्त विधि से भैरव यंत्र पर बना एक मंदिर पूर्ण हो चुका है जहाँ उनकी स्थापना हो गई। किसी यंत्र पर स्थापित अपनी तरह का यह एक ही मंदिर है जिसको लेकर नगर भर के धार्मिक लोगों में उत्सुकता भी जाग्रत हो गई है।
नगर के प्रसिध्द अन्नपूर्णा देवी करोली वाली माता मंदिर गंज के प्रांगण में आज काल भैरव मंदिर की विधिवत स्थापना की गई। यहाँ बड़ी संख्या में दर्शनार्थी उपस्थित थे। शहर के प्रसिध्द पंडित पृथ्वी बल्लभ जी दुबे ने काल भैरव की स्थापना के लिये यज्ञ-हवन आदि विधि विधान से कराये। यहाँ बने भैरव मंदिर को बकायदा भैरव यंत्र पर ही बनाया गया है। भैरव यंत्र के स्वरुप में ही मंदिर की सरंचना कराई जाकर फिर बीच में कालभैरव की स्थापना की गई है। काल भैरव जी महाराज के इस मंदिर की स्थापना विद्युत मण्डल के कार्यपालन यंत्री रविन्द्र जीत सक्सेना ने स्वयं कराई है। उन्हे यह प्रेरणा एक स्वप् के आधार पर हुई थी।
इस संबंध में फुरसत से बातचीत करते हुए श्री रविन्द्र जीत सक्सेना पुत्र शंभुदयाल सक्सेना ने बताया कि मुझ पर दैवीय आशीर्वाद कुछ ऐसा है कि समय-समय पर मुझे स्वप् आते रहते हैं और कई देवी-देवताओं से स्वप् में बातचीत भी मेरी होती है। उन्होने बताया कि पूर्व में जब मैं बरेली में कार्यरत था तो वहाँ मुझे पेड़ के नीचे बनी छोटी-सी मढ़िया के दर्शन स्वप्न में होते थे जहाँ साक्षात देवी नजर आती थीं और वह मुझे आशीर्वाद देती थीं। कई बार मुझे दर्शन तो हुए लेकिन वह स्थान कहाँ पर स्थित यह मुझे नहीं पता चल पाया।
फुरसत को श्री रविन्द्र जीत ने बताया कि फिर एक बार एक ग्रामीण मेरे पास आया उसका काम तो कुछ नहीं था लेकिन जबरन ही उसके गांव जाने का सौभाग्य मिला और तब जाकर स्वप् में दिखने वाला वह दैवीय स्थान मुझे सामने ही नजर आ गया। मैने वहाँ अपने स्तर पर चार खंबे खड़ेकर छोटा-सा मंदिर बनाने की शुरुआत की लेकिन देखते ही देखते ही मंदिर अच्छा खासा बन गया। वहाँ देवी दुर्गा की स्थापना की गई है।
धार्मिक स्वभाव के श्री रविन्द्र जीत से जब फुरसत ने पूछा कि आपको करोली वाली माता के मंदिर पर यह मंदिर बनाने की प्रेरणा कैसे मिली ? तो उन्होने बताया कि विगत 7 जनवरी को मुझे रात स्वप् आया जिसमें आसपास लगे दो-तीन पेड़ और तीन भवन दिखाई दिये। मैं वहाँ खड़ा था तभी तीनों तरफ से बड़े-बड़े शरीर धारी संत मेरी तरफ बहुत प्रसन्न मुद्रा में आते दिखाई दिये। मैने उन्हे देखकर सोचा की यह तो संत हैं तभी एक चौथे ने हंसकर कहा कि यह संत नहीं साक्षात काल भैरव व शिव गण हैं। मैने सामने देखा तो स्वयं भोलेनाथ थे। हम सभी ने करोली माता मंदिर के प्रांगण में आकर यहाँ दर्शन किये। गहन अंधेरा होने पर वह सब मुझ पर हंस रहे थे मैने पूछा यहाँ रोशनी नहीं है तो किसी ने एक कहा कि नहीं है तू क्या कर रहा है....? उनके ऐसा कहने पर घबराकर मेरी नींद खुल गई।
फुरसत ने पूछा कि फिर क्या हुआ तो रविन्द्र सक्सेना ने बताया कि स्वप् में दिखे मंदिर के आधार पर उन्होने इस बार कागज पर एक नक्शा जैसा बनाया और अच्छी तरह नक्शा बन जाने पर जब उन्होने सबसे पहले विद्युत मण्डल में ही कार्यरत पंडित कमला प्रसाद को दिखाकर पूछा कि क्या ऐसा-ऐसा कोई मंदिर है तो उन्होने तत्काल करोली माता मंदिर का नाम बताया। मैने पूछा कि वहाँ विद्युत आपूर्ति है या नहीं ? तो पं. कमला प्रसाद ने बताया कि दो माह से काट दी गई हैं तब मैने तत्काल आदेश देकर विधिवत विद्युत चालू कराई और यदि उसका कोई भार लगता हो तो उसे स्वयं वहन किया। दूसरे दिन 8 जनवरी को जब मैं कमला प्रसाद जी के साथ मंदिर देखने आया तो दंग रह गया। स्वप् में दिखा वहीं स्थान मेरे सामने था। मैरे तीनों से आये देवों के पास जाकर उन्हे प्रणाम किया। काल भैरव जी जिस पेड से आये थे वहाँ जाकर देखा तो मुझे कुछ आभास और आदेश हुआ था उसी के आधार पर वहाँ मिट्टी देखी तो एक छोटा-सा टीला दिखा जो भैरव जी की उपस्थिति का संकेत मुझे कर गया। और उसके बाद मंदिर निर्माण कार्य मैने शुरु किया जो इस स्वरुप में बन गया है आज उसकी स्थापना भी हो गई। यहाँ काल भैरव मंदिर की स्थापना पूर्ण विधि-विधान के साथ कराई गई।
आज मात्र 20 दिन के अंदर ही 30 जनवरी बुधवार माघ कृष्ण पक्ष अष्टमी को यहाँ काल भैरव का तंत्रोक्त विधि से भैरव यंत्र पर बना एक मंदिर पूर्ण हो चुका है जहाँ उनकी स्थापना हो गई। किसी यंत्र पर स्थापित अपनी तरह का यह एक ही मंदिर है जिसको लेकर नगर भर के धार्मिक लोगों में उत्सुकता भी जाग्रत हो गई है।
नगर के प्रसिध्द अन्नपूर्णा देवी करोली वाली माता मंदिर गंज के प्रांगण में आज काल भैरव मंदिर की विधिवत स्थापना की गई। यहाँ बड़ी संख्या में दर्शनार्थी उपस्थित थे। शहर के प्रसिध्द पंडित पृथ्वी बल्लभ जी दुबे ने काल भैरव की स्थापना के लिये यज्ञ-हवन आदि विधि विधान से कराये। यहाँ बने भैरव मंदिर को बकायदा भैरव यंत्र पर ही बनाया गया है। भैरव यंत्र के स्वरुप में ही मंदिर की सरंचना कराई जाकर फिर बीच में कालभैरव की स्थापना की गई है। काल भैरव जी महाराज के इस मंदिर की स्थापना विद्युत मण्डल के कार्यपालन यंत्री रविन्द्र जीत सक्सेना ने स्वयं कराई है। उन्हे यह प्रेरणा एक स्वप् के आधार पर हुई थी।
इस संबंध में फुरसत से बातचीत करते हुए श्री रविन्द्र जीत सक्सेना पुत्र शंभुदयाल सक्सेना ने बताया कि मुझ पर दैवीय आशीर्वाद कुछ ऐसा है कि समय-समय पर मुझे स्वप् आते रहते हैं और कई देवी-देवताओं से स्वप् में बातचीत भी मेरी होती है। उन्होने बताया कि पूर्व में जब मैं बरेली में कार्यरत था तो वहाँ मुझे पेड़ के नीचे बनी छोटी-सी मढ़िया के दर्शन स्वप्न में होते थे जहाँ साक्षात देवी नजर आती थीं और वह मुझे आशीर्वाद देती थीं। कई बार मुझे दर्शन तो हुए लेकिन वह स्थान कहाँ पर स्थित यह मुझे नहीं पता चल पाया।
फुरसत को श्री रविन्द्र जीत ने बताया कि फिर एक बार एक ग्रामीण मेरे पास आया उसका काम तो कुछ नहीं था लेकिन जबरन ही उसके गांव जाने का सौभाग्य मिला और तब जाकर स्वप् में दिखने वाला वह दैवीय स्थान मुझे सामने ही नजर आ गया। मैने वहाँ अपने स्तर पर चार खंबे खड़ेकर छोटा-सा मंदिर बनाने की शुरुआत की लेकिन देखते ही देखते ही मंदिर अच्छा खासा बन गया। वहाँ देवी दुर्गा की स्थापना की गई है।
धार्मिक स्वभाव के श्री रविन्द्र जीत से जब फुरसत ने पूछा कि आपको करोली वाली माता के मंदिर पर यह मंदिर बनाने की प्रेरणा कैसे मिली ? तो उन्होने बताया कि विगत 7 जनवरी को मुझे रात स्वप् आया जिसमें आसपास लगे दो-तीन पेड़ और तीन भवन दिखाई दिये। मैं वहाँ खड़ा था तभी तीनों तरफ से बड़े-बड़े शरीर धारी संत मेरी तरफ बहुत प्रसन्न मुद्रा में आते दिखाई दिये। मैने उन्हे देखकर सोचा की यह तो संत हैं तभी एक चौथे ने हंसकर कहा कि यह संत नहीं साक्षात काल भैरव व शिव गण हैं। मैने सामने देखा तो स्वयं भोलेनाथ थे। हम सभी ने करोली माता मंदिर के प्रांगण में आकर यहाँ दर्शन किये। गहन अंधेरा होने पर वह सब मुझ पर हंस रहे थे मैने पूछा यहाँ रोशनी नहीं है तो किसी ने एक कहा कि नहीं है तू क्या कर रहा है....? उनके ऐसा कहने पर घबराकर मेरी नींद खुल गई।
फुरसत ने पूछा कि फिर क्या हुआ तो रविन्द्र सक्सेना ने बताया कि स्वप् में दिखे मंदिर के आधार पर उन्होने इस बार कागज पर एक नक्शा जैसा बनाया और अच्छी तरह नक्शा बन जाने पर जब उन्होने सबसे पहले विद्युत मण्डल में ही कार्यरत पंडित कमला प्रसाद को दिखाकर पूछा कि क्या ऐसा-ऐसा कोई मंदिर है तो उन्होने तत्काल करोली माता मंदिर का नाम बताया। मैने पूछा कि वहाँ विद्युत आपूर्ति है या नहीं ? तो पं. कमला प्रसाद ने बताया कि दो माह से काट दी गई हैं तब मैने तत्काल आदेश देकर विधिवत विद्युत चालू कराई और यदि उसका कोई भार लगता हो तो उसे स्वयं वहन किया। दूसरे दिन 8 जनवरी को जब मैं कमला प्रसाद जी के साथ मंदिर देखने आया तो दंग रह गया। स्वप् में दिखा वहीं स्थान मेरे सामने था। मैरे तीनों से आये देवों के पास जाकर उन्हे प्रणाम किया। काल भैरव जी जिस पेड से आये थे वहाँ जाकर देखा तो मुझे कुछ आभास और आदेश हुआ था उसी के आधार पर वहाँ मिट्टी देखी तो एक छोटा-सा टीला दिखा जो भैरव जी की उपस्थिति का संकेत मुझे कर गया। और उसके बाद मंदिर निर्माण कार्य मैने शुरु किया जो इस स्वरुप में बन गया है आज उसकी स्थापना भी हो गई। यहाँ काल भैरव मंदिर की स्थापना पूर्ण विधि-विधान के साथ कराई गई।
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