Tuesday, January 29, 2008

गैस-केरोसिन से चल रहे वाहन पकड़ाये, डेढ़ लाख का अर्थदण्ड भी

सीहोर 28 जनवरी (फुरसत)। केरोसिन से चने वाले वाहनों और ईधन गैस का गलत उपयोग करने वालो के खिलाफ सख्ती से कार्यवाही सुनिश्चित की गई है। कलेक्टर ने निर्देश पर जिला खाद्य विभाग द्वारा केरोसीन और गैस के दुरूपयोग को सख्ती से रोकने के लिए अभियान चलाया जा रहा है । अभियान के तहत गत दिवस दो ट्रक और एक ट्रेक्टर के खिलाफ कार्यवाही कर डेढ़ लाख का जुर्माना किया गया । जिला आपूर्ति अधिकारी श्रीमति सुनीता शिरपुरकर ने बताया कि 9 जनवरी,08 को चांदबड़-श्यामपुर मार्ग पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग के दल ने केरोसीन से चलते हुए तीन वाहनों को जब्त किया और पुलिस अभिरक्षा में थाना मण्डी सीहोर को सौंपा गया । दल द्वारा तीनो वाहन मालिकों के खिलाफ आवश्यक बस्तु अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जिलाधीश एवं जिला दण्डाधिकारी के न्यायालय में प्रस्तुत किया। प्रकरण में पारित निर्णय में जप्त ट्रक क्रं. एमकेओ-9059 के मालिक राकेश राठौर के विरूद्व 50 हजार, ट्रक क्रं. एमपी-09-केबी-1866 के मालिक गोवाल मेवाड़ा के विरूद्व 40 हजार तथा ट्रेक्टर क्रं. एमपी-ए-0229 के मालिक अखिलेश बिजोलिया के विरूद्व 60 हजार रूपये का अर्थदण्ड से दण्डित किया गया । केरोसीन एवं ईधन गैस के दुरूपयोग को रोकने के लिए खाद्य विभाग का यह अभियान सतत जारी रहेगा ।

मुस्लिम वर्ग के साथ मेहमानों जैसा व्यवहार करना गलत है

जिस प्रकार किसी मेहमान के साथ व्यवहार किया जाता है ठीक उसी प्रकार नगर में हर बार सीहोर में मुस्लिम वर्ग के साथ व्यवहार होता देखा जाता है। यह कहाँ तक न्यायोचित है। एक तरफ सीहोर के राष्ट्रवादी मुस्लिम वर्ग के लोग हमेशा भारतवर्ष की संस्कृति में मिल-जुल रहना पसंद करते हैं और दूसरी तरफ उनके साथ राय शासन का ही एक विभाग कुछ ऐसा व्यवहार करता है जैसे वह कोई मेहमान हों.....।
असल में यहाँ बात विद्युत मण्डल की हो रही है जिसने इस बार राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस पर भी विद्युत कटोती जारी रखी । मण्डल ने तो विद्युत ही काटी लेकिन यहाँ नगर के नागरिकों को काटो तो खून नहीं वाली कहावत चरितार्थ हो रही थी। देश के इस महानतम राष्ट्रीय पर्व के दिन भी मण्डल द्वारा विद्युत की कटौती किये जाने को लेकर दिनभर तरह-तरह की चर्चाएं जारी थी और इन चर्चाओं में यह चर्चा भी जोरों पर थी कि आखिर मण्डल जानबूझकर ऐसी हरकतें क्यों करता है ? क्या दो-तीन दिन पूर्व से मात्र चार घंटे की कटौती को बराबर करके 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर आपूर्ति नहीं की जा सकती थी ? क्या बहुत ज्‍यादा जरुरी था जो गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व पर भी लाल किले से हो रहे सीधे प्रसारण मे विद्युत मण्डल ने विघ्न उत्पन्न कर दिया। क्या बहुत जरुरी था जो हर एक विद्यालय में सुबह झण्डा वंदन के लिये तैयार होकर जा रहे विद्यार्थियों को परेशान किया गया ? गणतंत्र दिवस पर सुबह-सुबह उठे नन्हे बच्चों को न तो हीटर से गर्म पानी मिल सका और ना ही विद्युत आपूर्ति होने के कारण वह सही से तैयार हो सके। भागमभाग अलग थी की झण्डा वंदन के लिये जल्दी से जाना है क्योंकि विशेष कार्यक्रम और विशेष अतिथि इस दिन हर एक विद्यालय में आते हैं ? आखिर क्या जरुरत थी कि सुबह निश्चित 6 से 8 ही विद्युत काटी जाती एक दिन पहले अधिक विद्युत काटकर या रात को विद्युत आपूर्ति बंद करके भी तो इसकी पूर्ति की जा सकती थी ? लेकिन मण्डल अपनी दोहरी नीति से कभी बाज आया है जो गणतंत्र दिवस के दिन आ जाता ?
विद्युत मण्डल की इस लापरवाही के कारण नगर में दिनभर चर्चा रही थी कि आखिरकार जब देश के राष्ट्रीय पर्व पर विद्युत काटी गई तो फिर ईद पर क्यों नहीं काटी गई? मण्डल अक्सर इस प्रकार की नीति चलाकर नगर में तरह-तरह की चर्चाओं को गर्म करवा देता है। आखिर मण्डल मुस्लिम वर्ग के साथ इस प्रकार का पक्षपात करके उन्हे क्या बताना या दिखाना चाहता है ? किसी मेहमानों की तरह सा व्यवहार मण्डल क्यों हर बार इस वर्ग से करता है ? क्योंकि जो मण्डल गणतंत्र दिवस पर विद्युत आपूर्ति नहीं कर सकता वह ईद को कर रहा हो तो निश्चित ही समझा जा सकता है कि मण्डल कहीं कोई संदेश या संकेत देना चाहता है ? उसका जो भी संदेश या संकेत हो उससे हमें कोई लेना-देना नहीं है। हमारा तो सीधा साधा मतलब है कि इस वर्ग के साथ इस प्रकार का व्यवहार कर क्यों मण्डल द्वारा इन्हे देश की मुख्यधारा से अलग-थलग करने का कुत्सित प्रयास किया जाता है। आखिरकार क्यों उनसे समान व्यवहार नहीं रखा जाता। क्यों उन्हे कुछ आभास कराने का प्रयास हर बार विद्युत मण्डल किया करता है। वह क्या चाहता है? स्पष्ट कर दे कभी मण्डल के बिलों में ईद मुबारक छाप दिया जाता है तो कभी कुछ कर दिया जाता है। यह जोड़ने का प्रयास है या तोड़ने का ? मण्डल की इस घटिया नीति से राष्ट्रवादी मुस्लिम भी नाराज दिखाई देते हैं। अच्छा हो मण्डल अपनी नीतियों में सुधार करे।

पश्चिम रेल्वे महाप्रबंधक ने नई रेल्वे लाईन का निरीक्षण किया

सीहोर 28 जनवरी (फुरसत)। विगत लम्बे समय से यहाँ बन रही रेल्वे की दूसरी लाईन को अंतिम रुप से विगत सप्ताह भर में तैयार कर लिया गया। यहाँ हाउसिंग बोर्ड और फंदा फाटक के रेल्वे द्वार पर विशेष रंग रोगन के अलावा वहाँ लाईन के आसपास की सड़के भी बना दी गई। मण्डी द्वार पर भी सारी कमियां पूरी कर ली गई। सोमवार को आज रतलाम से रेल्वे के जीएम ने आकर निरीक्षण भी कर लिया है। शीघ्र ही यह मार्ग व्यवस्थित रुप से शुरु हो जायेगा।
रेल्वे स्टेशन पर पश्चिम रेल्वे के जीएम ए.के.झिंगरन की विशेष निरीक्षण रेल आज बैरागढ़ से निरीक्षण करने के बाद सुबह करीब 11 बजे सीहोर पहुँची। इस रेल में जी.एम. उनके साथ विशेष अधिकारियों का दस्ता शामिल था। जिसमें रतलाम मण्डल के डीआरएम समेत अन्य अधिकारी भी साथ थे। फंदा से पचामा के बीच शुरु हुए डबल डबल ट्रेक लाईन का निरीक्षण करने के लिये जी.एम. श्री झिंगरन नई तैयार की दूसरी रेल्वे लाईन पर ही सीहोर पहुँचे। उन्होने दूसरी लाईन का यहाँ विधिवत शुभारंभ भी किया। इसी के साथ जीएम श्री झिंगरन ने सबसे पहले सीहोर रेल्वे स्टेशन पर पौधरोपण किया गया। इसके बाद रेल्वे स्टेशन पर लगी हुई प्याऊ, शौचालय, रेल्वे टिकिट खिड़की, टीटी कक्ष, विजिटर कक्ष, रेल्वे रिकार्ड, रेल्वे कंट्रोलिंग कक्ष आदि का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होने कुछ स्थानों पर नाराजी भी व्यक्त करते हुए व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिये।
श्री झिंगरन का कहना था कि रेल्वे स्टेशन पर आगामी अप्रैल तक रेल्वे फुट ब्रिज का निर्माण पूरा हो जायेगा जिसके कारण दूसरे स्टेशन पर पहुँचने के लिये यात्रियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। अर्थात आमने-सामने की दोनो लाईनों पर आने-जाने की व्यवस्था आसान हो जायेगी। एक्सप्रेस यात्री गाड़ियों के संबंध में उन्होने कहा कि रेल्वे स्टेशन पर मिलने पर ट्राफिक के आधार पर रेलों के स्टापेज के संबंध में निर्धारण किया जाता है। सीहोर स्टेशन पर भी नहीं रुकने वाली गाड़ियों के संबंध में विचार किया जा रहा है।

Monday, January 28, 2008

चार युवक बाना लिये तैयार बैठे रहे....और युवतियाँ नहीं आई

आष्टा 27 जनवरी (फुरसत)। तहसील के चार ग्रामों में विवाह की खुशियाँ छाई हुई थीं। यहाँ रहने वाले अलग-अलग चार युवकों ने विगत दो-तीन दिनों में अपनी-अपनी परम्पराओं के अनुसार विवाह की सारी रस्में की। चारों ग्रामों में आज मेरे यार की शादी धुनों पर नाचते-गाते हुए बाने भी निकले और खुशी छा गई। इन चारों ग्रामों में युवकों ने गांव वालों को भोजन भी दिया बधाईयाँ भी लीं। फिर परम्परा के अनुसार चारों युवकों को हल्दी लगी और बाने के बाद यह लड़की लिवाने के लिये घर से रवाना भी हो गये। चार ग्रामों के अलग-अलग लड़कों का आज एक ही स्थान पर एक ही ग्राम की चार युवतियों से विवाह होना तय था। चारों युवक गाजे-बाजे धूम-धमाके के साथ विवाह स्थल पर पहुँचे गये सारी तैयारियाँ पूर्ण हो चुकी थी। रसोई बन रही थी। सगे-संबंधी आ चुके थे पंडित जी मुहूर्त को लेकर चिंतित थे और सारी तैयारियाँ कर चुके थे.....लेकिन काफी देर इंतजार करने के बाद भी जब वधु पक्ष की चारों ही युवतियाँ नहीं पहुँची तो इनका परिणय सूत्र में बंधने का सपना धूमिल होने लगा। अंतत: जब युवतियों के घर ही वाहन दौड़ाये तो पता चला कि ग्राम चारों ही युवतियाँ नदारत हैं........क्या लड़कों का विवाह होगा ? आखिर कैसे तय हुआ था यह विवाह ? पढ़िये यह रोचक खबर ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आष्टा तहसील के ग्राम सवाजपुरा, मोलूखेडी, क़चनारिया, लोरासबड़ी में चार परिवारों में इनके पुत्र जिनका नाम बाबू मेवाड़ा, मुकेश मेवाड़ा, कृपाल मेवाड़ा एवं केदार मेवाड़ा बताया गया है इन चारों का विवाह एक शाजापुर जिले के बिजाना ग्राम के मध्यस्थ द्वारा शाजापुर जिले के ही ग्राम कानड़ में रहने वाली चार कन्याओं से कुछ दिनों पूर्व एक निश्चित राशि के तय होने के बाद तय कराया गया था तथा आज इन चारों अलग-अलग ग्राम के वर पक्षों को एक निश्चित तय स्थान ग्राम किलेरामा में पहुँचना था तथा चारों वधुओं को भी बारात लेकर यहीं आना था और यहाँ पर विवाह कार्यक्रम सम्पन्न होना था एवं किलेरामा एक स्कूल के अंदर विवाह कार्यक्रम की सभी तैयारियाँ भी सुबह से ही चल रही थी। भोजन बनाने वाला अपना काम शुरु कर चुका था। वर पक्ष यहाँ डेरा जमा चुका था और वधु पक्ष का इंतजार कर रहा था लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी जब वधु पक्ष नहीं पहुँचा तब हलचल प्रारंभ हुई। बाद में इन चारों वर पक्ष के परिजन वधु पक्ष के यहाँ पहुँचे। इस संबंध में मोलूखेड़ी के पप्पु मेवाड़ा से जब चर्चा हुई तो उसने बताया कि यह चारों कन्याएं जिन्हे आज परिणय सूत्र में बंधना था जब इनके घर पहुँचे तो यह कन्याएं घर पर नहीं थी। बाद में वर पक्ष के परिजन संबंधित ग्राम के लगने वाले थाना शाजापुर जिले के मोमनबड़ोदिया पहुँचे। पप्पु मेवाड़ा ने बताया कि इन लोगों के खिलाफ इन लोगों ने जो धोखाधड़ी की उसकी शिकायत पुलिस को की है तथा इन लोगों को आष्टा में जो राशि दी है उसकी शिकायत आष्टा थाने में भी हम करेंगे। इस संबंध में शाजापुर जिले के मोमनबड़ोदिया थाने के आरक्षक शंकरलाल से चर्चा की तो उन्होने दूरभाष पर बताया कि आष्टा के पास के ग्राम के कुछ लोग आये थे तथा उन्होने उनके साथ जो कुछ भी घटा वह उन्होने बताया था लेकिन उक्त पूरी घटना आष्टा क्षेत्र की है इसलिये यहाँ पर कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया है। वो लोग यहाँ आये जरुर थे तथा दूसरे पक्ष के लोग भी आये थे तथा दोनो पक्षों के लोगों में यहाँ पर कुछ चर्चा हुई है उसके बाद आष्टा से आये लोग वापस चले गये। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बिजाना ग्राम के जिस व्यक्ति ने इस पूरे मामले की मध्यस्थता की थी उसने आज आष्टा से पहुँचे वर पक्ष के लोगों से एक दिन का समय मांगा है या तो वो उन चारों वधुओं को लेकर आयेगा या फिर जो राशि ली है वह राशि वापस देगा।

Saturday, January 26, 2008

क्लिनिक में आग लगी हजारों का नुकसान

आष्टा 25 जनवरी (फुरसत)। नगर के कन्नौद मार्ग पर स्थित चिकित्सक श्रीमति मीनल विनीत सिंघी के क्लिनिक में सुबह-सुबह अचानक आसपास के लोगों ने धुंआ उठते देखा तब पड़ोसियों ने तुरंत आग बुझाने के ठोस प्रयास किये तथा आग की सूचना डाक्टर को दी।
जिस वक्त आग लगी उस वक्त सुबह का समय था। पड़ोसियों ने कडी मेहनत कर आग को बढ़ने से रोका। सूचना के बाद फायर ब्रिगेड भी घटना स्थल पर पहुँची तथा समय से पूर्व ही आग पर काबू पा लिया गया। फिर भी आग में क्लिनिक का फर्नीचर आदि जल गया। मोटे अनुमान के अनुसार आग से 20-30 हजार का नुकसान माना जा रहा है।

पुलिस हिरासत में कैसे हुई मौत

कोतवाली के अंदर एक आरोपी ने मात्र घंटे भर में फांसी लगाकर आत्महत्या की ? 2 घंटे तक चला पुलिस के खिलाफ चक्काजाम
सीहोर 25 जनवरी (फुरसत)। सुबह 10 बजे जिला चिकित्सालय में एक शव लेकर दो पुलिस वाले आये। उन्होने बताया कि यह मरा हुआ ही रेल्वे स्टेशन के पास से मिला है। समझा गया कि यह ठंड के मारे मर गया। बात फैल भी गई। पुलिस वाले कुछ भी नहीं बोल रहे थे और मौन थे। मृतक का ना तो नाम बताया जा रहा था ना ही पता। लेकिन शरीर में ठंड की अकड़ के चिन्ह कहीं भी परिलक्षित नहीं हो रहे थे। डाक्टर भी मौन थे। करीब दो घंटे बाद जब मृतक के परिजन सक्रिय हुए तो भंडा फूटा कि यह शव पुलिस कोतवाली के अंदर से लाया गया है जिसे पुलिस ने सुबह ही पकड़ा था और करीब एक घंटे बाद कोतवाली के अंदर से इसका शव मिला। शव परिच्छेदन केन्द्र तक मृतक के परिजन पहुँच गये। वह पुलिस पर आक्षेप लगाते रहे और अंतत: नियति यह रही कि 2 बजे से 4 बजे तक कोतवाली चौराहे पर पुलिस के खिलाफ चक्काजाम हुआ। मृतक के परिजनों का कहना था कि पुलिस ने मार दिया और पुलिस कह रही थी कि उसने कोतवाली के अंदर फांसी लगा ली? अंतत: विशेष जांच के आश्वासन के बाद मामला कुछ ठंडा हुआ। प्रश् उठ रहा है कि आखिर फंदे से लटकी हुई लाश का पंचनामा पुलिस ने क्यों नहीं बनवाया ? आखिर फोटो क्यों नहीं उतरवाये गये ? आखिर दो घंटे बाद कहानी क्यों पेश की गई ?
करीब साढ़े दस बजे के आसपास जिला चिकित्सालय में एक शव लाया गया था जिसे दो पुलिस वाले लेकर आये थे। बहुत शांति के साथ इस शव के संबंध में यह प्रचारित किया जा रहा था कि मृतक को पुलिस रेल्वे स्टेशन से लेकर आई है। दोनो पुलिस वाले आरक्षक थे और चिकित्सकों से बातचीत कर मामला निपटवाने में लगे थे। तभी एक पत्रकार को इसकी जानकारी मिली तो उसने अपने स्तर पर पूछताछ शुरु की। पूछताछ में उसे भी यही बताया गया कि शव रेल्वे स्टेशन से लाया गया है। बताने वालों द्वारा प्रयास किया गया यह समझा जाये कि मृत अवस्था में ही व्यक्ति मिला है। जब ऐसी जानकारी मिली तो रात पडी मौसम की सबसे अधिक ठंड के कारण तो कहीं यह व्यक्ति नहीं मर गया ऐसी चर्चा शुरु हो गई और ठंड से एक व्यक्ति की मृत्यु की जानकारी सब और फैलने लगी।
यहाँ एक चिकित्सक से जब पत्रकारों ने जानना चाहा कि शव में अकड़न बिल्कुल नहीं है फिर यह ठंड में मरा हुआ कैसे हो सकता है ? तो इस पर चिकित्सक ने आश्चर्यजनक जबाव दिया कि रात 2-3 बजे भी मरा होगा तो ठंड में उतनी अकड़ शरीर में नहीं आती। यहाँ एक चिकित्सक ने उसके शरीर के कपड़े भी जो उघड़ रहे थे उन्हे ठीक किया ताकि कोई शरीर यादा न देख सके।
इधर जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा था वैसे-वैसे यह बात धीरे-धीरे फैल रही थी कि कोई व्यक्ति कोतवाली के अंदर मर गया है और उसका शव अस्पताल लाया गया है। पत्रकार यह समझ रहे थे कि एक व्यक्ति तो ठंड में मर ही चुका है यह दूसरा कोई व्यक्ति अब कोतवाली में भी मर गया है।
लेकिन समय बीतने के साथ जब करीब 12 बजे मृतक का शव परिच्छेदन केन्द्र पर ले जाया गया तो उनके परिजनों को सूचित किया गया। वहाँ परिजन भी पहँचे और बड़ी संख्या में पत्रकार व फोटो ग्राफर भी पहुँचे। यहाँ मृतक के परिजनों ने स्पष्ट कहा कि सुबह 8 बजे इसे घर से पुलिस ले गई और 10 बजे तक यह मर ही गया इतने कम समय में ऐसा क्या हुआ कि उसकी मौत हो गई ? मृतक का नाम हुकम चन्द्र रामगोपाल शाक्य बताया और उसे न्यायालय के किसी वारंट के कारण पकड़ा गया था जिसमें इसे राशि भरनी थी जो उसने नहीं भरी थी।
अब पुलिस की कहानी सामने आई- पुलिस ने कहा कि मृतक ने फांसी लगा ली। जब पूछा गया कि थाने के अंदर उसने कैसे फांसी लगा ली तो पुलिस ने इसका भी हाजिर जबाव दिया कि उसे लॉकअप में बंद कर दिया गया था, उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट था। उसने बाथरुम में जाकर कंबल से फांसी लगा ली। जब कंबल की मोटाई के संबंध में बातचीत हुई तो कहा गया कि कंबल बहुत पतली थी उसने कंबल चीरकर उसकी रस्सी बना ली और फिर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली और हमें तो उससे कोई मतलब ही नहीं था वह तो न्यायालय के कहने पर पकड़ा गया साधारण मुजरिम था उससे न तो पूछताछ करना थी और ना ही कोई अन्य जानकारी लेनी थी। हमें सिर्फ पकड़कर न्यायालय के समक्ष ले जाना था इसलिये उससे कोई मारपीट की संभावनाएं तक नहीं बनती।
लेकिन मृतक के परिजन यह कह रहे थे कि पुलिस रुपये मांग रही थी और वह भी 8 हजार रुपये में टूटक की बात कर रही थी ? मृतक के परिजनों के इस आरोप का पुलिस ने न तो खण्डन किया ना ही स्वीकारने जैसी कोई बात आई बल्कि पुलिस का कहना था कि उस पर न्यायालय ने जो जुर्माना लगाया था उसे जमा नहीं करने पर उसे पकड़ा गया था और बंद कर दिया था जहाँ उसने फांसी लगा ली। उधर शव परिच्छेदन डॉ तोमर द्वारा किया गया। और इधर करीब डेढ़ बजे तक आक्रोश फैल गया। मृतक के परिवार वालों का कहना था कि नन्हे-नन्हे उसके पाँच बच्चे हैं अब उनकी कौन देखभाल करेगा ? यहाँ कोतवाली चौराहे पर भारी भीड़ एकत्र हो गई और दो बजे तक इन्होने व्यवस्थित चक्काजाम शुरु कर दिया। जहाँ इंग्लिशपुरा मार्ग और गंज का मार्ग बंद कर दिया गया। बहुत बड़ी संख्या में पुलिस बल यहाँ उपस्थित था। बाहर से भी पुलिस बल बुलाया गया था। यहाँ मृतक का 5-6 वर्ष का नन्हा बालक पुलिस को अपशब्द बोलते हुए कह रहा था तुमने मेरे पिता को मार डाला....तुम्हे भगवान माफ नहीं करेगा.... तुम अत्याचारी हो....। यहाँ महिलाएं भी बड़ी संख्या में सड़क पर बैठ गई थी। करीब 4 बजे जाकर मामला जब थम सका जब एसडीएम श्री मिश्रा और एसडीओपी ने मिलकर यह आश्वासन दिया कि मामले की मजिस्ट्रियल जांच कराई जायेगी और दोषियों के विरुध्द कार्यवाही होगी। आंदोलन करने वालों ने मांग रखी की परिवार के एक सदस्य को सरकार नौकरी दे इस पर उन्हे समझा दिया गया। मृतक के परिजनाें को रेडक्रास से 10 हजार रुपये भी दिये गये।

Friday, January 25, 2008

वन भूमि पर अतिक्रमण करने वालो ने की वनकर्मियों की धुनाई

सीहोर 24 जनवरी (नि.सं.)। शाहगंज पुलिस ने वन कर्मचारियों के साथ अभ्रद व्यवहार कर मारपीट करने वाले चार आरोपियों को त्वरित कार्यवाही करते हुये गिरफ्तार कर लिया है ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम खटपुरा निवासी मंसूर भील, मरू उर्फ निर्भय, भागचन्द्र, जुल्लू उर्फ पवन ने मिलकर वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा था जिसे राजस्व एवं वनविभाग द्वारा संयुक्त रूप से प्रयास कर इस जमीन पर से इनका अवैध कब्जा दो-तीन वार हटवाया जा चुका था जिस पर पुन: इनके द्वारा कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था गत बुधवार को वनविभाग का गस्तीदल जब इस जमीन पर चेक करने गया तो वहां पर अवैध लकड़ी बगैरह रखे मिले जिसे बन कर्मी अपने साथ जप्त कर ला रहे थे तभी इन चारों ने मिलकर उनके साथ अभ्रद व्यवहार व मारपीट की जिसमें एक वनकर्मी को चोट आई । शाहगंज थाना प्रभारी मनोज मिश्रा ने घटना की रिर्पोट पर प्रकरण पंजीबद्ध करते हुए चारो आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर लिया है ।

विश्वास के साथ श्रध्दा भी जरुरी है - अवधेश दास जी

जावर 24 जनवरी (फुरसत)। परम पूय संत अवधेश दास जी महाराज ने श्रीराम क था के दूसरे दिन कथा का प्रारंभ गुरु वंदना गुरु देव सहारा वन जाओ से किया। गुरुजी की शिष्या प्रियंका जोशी ने भी अपने गुरुजी का वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा में गुरुजी ने कहा कि जब तक शिव का विश्वास पार्वती की श्रध्दा भक्त के पास न हो तब तक कथा सुनने का कोई महत्व नहीं है। उन्होने कहा कि व्यक्ति में विश्वास के साथ श्रध्दा भी जरुरी है। प्रवचन के बीच-बीच में गुरुजी ने भक्ति गीत से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। गुरुजी ने राम अवतार का प्रसंग प्रस्तुत किया गुरुजी द्वारा की जा रही संगीतमय श्रीराम कथा का श्रवण का क्षेत्र की जनता सैकड़ो की संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ उठा रही है। श्रीराम कथा में आज विशेष अतिथि के रुप में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हेण्डी क्राफ्ट बोर्ड दिल्ली अक्षत कासट, राजकुमार जायसवाल अध्यक्ष युवक कांग्रेस, रघुवर गोहिया वरिष्ठ पत्रकार, आशीष गेहलोत पार्षद सीहोर पधारे थे। सभी अतिथियों का स्वागत समिति पदाधिकारियों ने किया। अतिथियों ने गुरुजी का स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्रीराम कथा का श्रवण कर लाभ कमाया। समिति अध्यक्ष सचिन खत्री व बाबूलाल पटेल सहित सभी कार्यकर्ताओं ने अतिथियों को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन सुभाष भावसार ने किया। कार्यक्रम के अंत में श्रीराम की आरती समिति के राजपाल ठाकुर, तेजपाल, शिवम सोनी, राकेश सिंह, वीरेन्द्र, कमलेश ठाकुर, तेज सिंह गुड्डु, सुदीप सिंह, राजेश लक्ष्कार, गुलाब सिंह, मयंक चौरसिया, शिवनारायण राठौर, विमल सोनी, चेतन पटेल, कृष्णपाल सिंह, हरिनारायण मालवीय कृपाजी, नीरज ठाकुर सहित सेकडों की संख्या में माता-बहन उपस्थित थे। अंत में प्रसाद वितरण किया गया।

महिला की कुंए में डूबने से मौत

आष्टा 24 जनवरी (फुरसत)। सिद्धिकगंज थाना अर्न्तगत आने वाले ग्राम बांदरिया हाट में एक विवाहिता की कुंए में डूबने से मौत हो गई है । पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम बांदरिया हाट में रहने वाले गजराज सिंह अजा. की 35 वर्षीय पत्नी सुमनबाई आज दोपहर को ग्राम के सार्वजनिक कुंये पर पानी भरने गई थी तभी अचानक पानी भरते समय वह कुंए में जा गिरी जिसकी डूबने से मौत हो गई । इसी प्रकार सुशीलनगर सिद्धीकगंज निवासी विनोद का साढ़े चार वर्षीय पुत्री अभिलाषा की मौत गत बुधवार को बिमारी के कारण हो गई । इधर दोराहा थाना अर्न्तगत आने वाले ग्राम बरखेड़ा खरेट निवासी 45 वर्षीय वीरमजी आ. धूलजी की मौत गत बुधवार को उसके मकानद पर सीने में दर्द होने के कारण उपचार हेतू लाते समय रास्ते में हो गई ।

रंगे हाथ पकड़े गए सटोरिए

आष्टा 24 जनवरी (फुरसत)। आष्टा पुलिस ने बजरंग कालोनी आष्टा निवासी हरिराम आ. भागीरथ काजीखेड़ी निवासी संजय आ. चन्दरसिंह कसाई पुरा निवासी रफीक आ. चन्दू खां, तथा कोतवाली पुलिस ने सीहोर निवासी राजेन्द्र आ. गोपी, मनीष राठौर, बमूलिया निवासी शंकरलाल आ. बाबूलाल, नयापुरा निवासी परमानंद आ. भवानी सिंह तथा मछलीपुल निवासी आत्माराम आ. रामप्रसाद को अवैश रूप से सट्टा पर्ची लिखते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है ।
पुलिस ने इनके कब्जे से 2860रुपये नगदी व सट्टा पर्ची जप्त कर धूत अधिनियम के तहत प्रकरण कायम किया है ।

ठंड ने दिखाया रंग

आष्टा 24 जनवरी (फुरसत)। किसी को इतनी उम्मीद नही थी कि मकर संक्रांति के बाद इतनी ठंड पडेग़ी ठंड ने ऐसा रंग दिखाया की अच्छो-अच्छो को एहसास करा दिया कि इसे कहते हे ठंड 4-5 दिनो से ठंड ने ऐसा रंग दिखाया की लोगो ने दिन-दिन भर टोपे, मफलर, श्वेटर को नही उतारे ठंड की चमक पड़ने से गर्म कपडे बेचने वालो के यहा अचानक ग्राहकी चल पड़ी है ।
पारा काफी नीचे आ गया पड़ रही ठंड फसलों के लिए अच्छी मानी जा रही है। वही आम जन ठंड से कंपकंपा उठा है। रात्रि में नगर में जिधर निगाह घुमाओ आलाव जलता नजर आता है ।ठंड में सुबह-सुबह लगने वाले स्कूलों में छोटे-छोटे बच्चों की उपस्थित कर हो गई है । वही इस ठंड से मौसमी बिमारी ने भी नागरिकों को घेरा है ।
कड़ाके की पड़ रही ठंड के कारण नगर के बाजार रात्रि में जल्दी बंद हो जाते है। और सुबह देर से खुल रहे है। कड़ाके की ठंड के कारण मवेशीयों की काफी परेशानी हो रही है । ठंड के कारण चाय की दुकानो पर बिक्री बढ़ गई है ।

पशु क्रूरता की बात करने वाले यह बतायें क्या पशुओं से भी गऐ बीते हैं सीहोर के ये यात्री...?

सीहोर 24 जनवरी (फुरसत)। पशु क्रूरता अधिनियम के तहत आये दिन गाय-बैल से भरे ट्रक पकड़ने वाले पुलिस वालों तथा सामाजिक संगठन पहले यह बतायें कि क्या नगर में चल रही यात्री बसों में यात्रा करने वाले मनुष्य पशुओं से भी गये-बीते हैं। बसों में उन्हे बैठने तो दूर लटकने तक की जगह उपलब्ध नहीं कराई जाती, ठूंस-ठूंस कर भरा जाता है तो फिर पशुओं की चिंता करने वालों को मनुष्यों की फिक्र क्यों नहीं सताती। क्या यातायात विभाग पहल कर नगर के यात्रियों की दशा सुधारने का काम करना उचित नहीं समझता?
उक्त बात नगर के वरिष्ठ समाजसेवी व सेवा संस्था के संस्थापक नेत्र प्रेरक कमल झंवर ने फुरसत से अपनी बातचीत के दौरान कही। श्री झंवर ने कहा कि नगर में आये दिन पशु क्रूरताओं के मामले देखने-सुनने को मिलते हैं लेकिन देखा गया कि जिन ट्रकों या वाहनों में वह पशु भरे जाते हैं उन्हे कम से कम खड़े रहने की तो जगह मिलती है लेकिन इसके बावजूद भी हर एक पशु से भरे वाहन की जांच पुलिस पूरी मुस्तैदी से करती है कि कहीं कोई मूक पशु के साथ अत्याचार तो नहीं हो रहा ? पुलिस की यह चौकस कार्यप्रणाली तारीफ के काबिल है वह पशु क्रूरता के खिलाफ अपना अभियान जारी रखे इससे कोई गिला शिकवा नहीं है लेकिन नगर में जिस प्रकार मनुष्य के साथ अमानवीय व्यवहार यात्री बस चालकों द्वारा किया जा रहा है उसके खिलाफ भी पुलिस की सक्रियता आवश्यक है।
उल्लेखनीय है कि यहाँ नगर में सीहोर से आष्टा के मध्य चलने वाले वाहनों में अधिकांशत: जितने भी यात्री बैठते हैं उन्हे ठूंस-ठूंस कर ही भरा जाता है। उन्हे सही से बैठने के लिये सीट तक नहीं दी जाती है। महिलाएं भी परेशानी के साथ बैठती हैं। बैठने की सीट पूरी होने के बाद भी दुगनी सवारियाँ इन वाहनों में भरी जाती है। वाहन चालक आगे भी अधिकाधिक सवारी बैठाता है और परिचालक पीछे सीट पूरी होने के बाद कईयों को खड़ा करवा देता है और फिर उसके बाद यात्रियों को लटकवा भी देता है।
इस प्रकार यात्री एक-दूसरे के बीच दबे-सिकुड़े बैठने को और यात्रा करने को मजबूर हो जाते हैं। कईयों की सांस फूल जाती है। कईयों की दशा ही बिगड़ जाती है। जो लटककर जाते हैं उनके जीवन के साथ खिलवाड़ की स्थिति रहती है। कुल मिलाकर पशुओं से यादा अत्याचार यात्री वाहनों में मनुष्यों के साथ हो रहा है और वह भी खुले आम हर दिन हो रहा है।
इसके बावजूद लम्बे समय से यातायात विभाग अपनी सेटिंग के चलते इन वाहन वालों से कभी कुछ नहीं कहता। वाहन चालक जैसे चाहे वैसे अपने वाहनों में यात्रियों को ठूंस-ठूंस कर भरते हैं, अभद्र व्यवहार करते हैं। महिलाओं को खासी परेशानी आती है लेकिन यातायात पुलिस का इसकी तरफ ध्यान नहीं जाता।
यदि कोई यात्री इसका व्यवस्था का विरोध करता है तो वाहन चालक-परिचालक या वाहन मालिक उनके साथ दुर्व्‍यवहार करते हैं और बात बढ़ने पर नौबत मारपीट तक पहुँच जाती है बल्कि उन्हे बीच रास्ते में भी छोड़ कर उन्हे बेइज्‍जत करने का क्रम भी यह लोग करने से बाज नहीं आते। आये दिन इस प्रकार की घटनाएं सीहोर से आष्टा के बीच आसानी से देखी जा सकती है।

Thursday, January 24, 2008

जांगड़ा समाज संत रवि दास जयंती मनायेगा

आष्टा 23 जनवरी (फुरसत)। समाज कल्याण परिषद शाखा आष्टा की विशेष बैठक संपन्न हुई जिसके संत शिरोमणी रविदास जंयती समारोह दि. 24 जनवरी,08 को आष्टा में बड़ी धूम-धाम से मनाने का सर्व सम्मति से निर्णय लिया गया । जांगड़ा समाज आष्टा के अध्यक्ष बंशीलाल धनवाल एवं महामंत्री रमेश चंद्र कटारे ने एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी समाज के धार्मिक व अध्यात्मिक गुरूसंत शिरोमणी रविदास महाराज की जयंती समारोह दिनांक 24 जनवरी,08 को आष्टा में बड़ी धूम-धाम से मनाई जावेगी । सर्व सम्मिति से यह भी निर्णय लिया गया है कि जयंती समारोह में समाज के वरिष्ठ आईएएस. आईपीएस तथा समाज सेवी भारत सरकार की मंत्री जी का मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाये । बैठक में राकेश रेकवाल अध्यक्ष मंदिर समिति आष्टा, दिनेश गहरवाल, अनारसिंह धनवाल, रामचरण बकोरिया, रंजीतसिंह अटेरिया, सांवतसिंह, जगदीश रेकवाल, रमेश चंद्र दामड़िया, कैलाश बगाना, हरिराम रेकवाल, जगदीश प्रसाद, शंकरसिह, रामचंद्र अस्ताया, दिनेश रेकवाल, रमेश रकवाल, हनीरसिंह रेकवाल, प्रेमसिंह बडोदिया, देवकरण जागड़ा, फूलसिंह जागड़ा, रमेश चंद्र दगोंलिया, प्रेमसिंह बामनिया आदि प्रमुखों ने भाग लिया ।

वोट की राजनीति के कारण फांसी की सजा पाने वाला अफजल गुरु आज भी जिन्दा है -अनिल ओक

आष्टा 23 जनवरी (फुरसत)। जिस अफजल गुरू का फांसी की सजा मिली वो आज भी जिन्दा है क्यों क्योंकि वोट की राजनीति आड़े आ रही है । इस देश को राजनेताओं के भरोसे नही छोड़ा जा सकता है क्या कभी नेता को कुछ देते देखा गया नही नेता केवल लेता ही लेता है । वो अगर कुछ देता है तो जनता को झुठे कोरे आश्वासन और वादे देता है। आज युवा संगम में युवा यह दृढ़ निश्चिय करे कि जब भी भारत माता की रक्षा के लिए अगर उनकी आवश्यकता होगी तो वो सब कुछ अर्पण करने को तैयार रहूंगा ।
उक्त उद्गार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांतीय सेवा प्रमुख अनिल ओक ने नेताजी सुभाष चंद्र चौराहे पर आयोजित 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर उसकी स्मृति में आयोजित युवा संगम एवं सुभाष चंद्र बोस प्रतिमा का अनावरण अवसर पर व्यक्त किये । श्री ओक ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज युवा भटक रहा है । जिस युवा को देश भक्ति राष्ट्रभक्ति के गीत तराने गुनगुनाना चाहिये आज वो युवा जब दिल ही टुट गया तो जी कर क्या करे या इस दिल के टूकडे हजार हुए कोई यहां गिरा कोई वहां गिरा जैसे गीत गुनगुनाता है जबकि देश के नौजवान की आंखो के सामने इस प्रकार का भविष्य तैरना चाहिये की मै क्यों जी रहा हूं इस देश के लिए मैने क्या किया, इस समय के लिए मैने क्या किया और मुझे देश समाज राष्ट्र के लिए क्या करना चाहिये । श्री ओक ने वीर सावरकर जब जेल में थे उस वक्त का संस्मरण सुनाया कि जब सावरकर जेल मे थे । तो उनकी भाभी ने उनसे कहा कि वे माफी मांगकर जैल से बाहर आ जाये वे बाहर आजायेंगे तो बंश आगे बढ़ेगा । तब उन्होंने भाभी को पत्र लिखा था कि जब देश ही नहीं बचेगा तो वंश का क्या काम? उन्होंने कहा कि आज भी देश में ऐसा युवा है जिनके मन में देश के प्रति एवं देश के लिए कुछ करने के भाव रहते हेै । आज यह जो देश टिका है युवाओं एवं अच्छे लोगों के कारण ही टीका है । दृष्टि को दिल्ली और राजनीति से हटाकर देखों कई अच्छे अच्छे कार्य हो रहे है । युवा उसमें लगा है । उन्होंने वृद्ध हो जाने पर गाय को कसाईयों के हाथों बेचने वालो को आड़े हाथों लिया और पूछा कि जब वो दुध देती है तब तो उसे रखते हो और जब दूध देना बंद कर देती है तो उसे कसाईयों के हाथों बेच देते हो । अनिल जी ने कहा कि अब समय आ गया है ताली बजाने से काम नही चलेगा । अब युवाओं को ताल ठोक कर आगे आना होगा । आज युवाओं को संकल्पित होने की आवश्यकता है युवा संगम के इस शुभ अवसर पर हमें कुछ संकल्प लेना चाहिये आज युवा यह निश्चित करे क ी बुरी नीयत से भारत माता की और जो भी आंख उठेगी जो आक्रमण करेगा उसका मुंह तोड़ जवाब दिया जायेगा। भारत माता के लिए सर्वस अर्पण करने के लिए वो हमेशा तेयार रहेगा । उन्होंने स्वदेशी और विदेशी का मुद्दा भी सामने रखते हुए आव्हान किया की आज से निर्णय करे की हम अपना चौका और बाथरूम विदेशी बस्तुओं से मुक्त रखेगें । केवल स्वदेशी वस्तुओं का ही उपयोग करेंगे। उन्होंने उदाहरण दिया कि जिस प्रकार पत्नि और वैश्या में अंतर होता है बैसा ही अंतर स्वदेशी ओर विदेशी में है । स्वदेशी वस्तुएं पत्नि की तरह होती है । और विदेशी वस्तुएं वैश्या की तरह होती है । श्रीओक ने कहा कि शास्त्रों की रक्षा शस्त्रों से ही होगी निर्वल की रक्षा तो भगवान भी नही करता है । उन्होंने कहा कि गांधी जी की शांति की अंहिसा की बात करते थे। लेकिन उनके आराध्य भगवान श्री राम के हाथों में भी शस्त्र था आज युवा संगम कार्यक्रम में आष्टा एवं ग्राम-ग्राम से आये युवाओं को मंच सें तीन संकल्प दिलवाये आज से अपने-अपने घरो पर सात दिनों तक शहीदों की याद में एक-एक दीपक लगाऊंगा । घर में एक महापुरूष का चित्र अवश्य लगाऊॅगा । अपना बाथरूम एवं रसोईघर स्वदेशी वस्तुओं से ही सजाऊगा । अगर उक्त संकल्प के कारण आज का यह युवा संगम सफल होगा ।
युवा संगम के प्रारंभ में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चन्दनलाल बनबट कन्हैयालाल भूतिया एवं अनिल ओक ने दानदाता महेश मुदड़ा परिवार द्वारा अपने पिता श्री बाबूलाल मुदड़ा की स्मृति में स्थापित की गई नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया । महेश मुदड़ा ने प्रतिमा पर माल्यापर्ण किया। प्रारंभ मे संतोष झंवर, राजू जायसवाल, दीपेश गौतम, गोविंद चौहान, शिव श्रीवादी आदि ने भजन प्रस्तुत किया । कार्यक्रम का समापन भजन गायक रामनारायण श्रीवादी के वन्दे मातरम् गीत से हुआ। कार्यक्रम का संचालन बाबू देब्वाल ने तथा अंत में आभार सत्येन्द्र सोंलकी, ने व्यक्त किया । कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा, समाजसेवी, राजनेता, पत्रकार, आदि उपस्थित थे । आज उक्त कार्यक्रम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद एवं युवा मंच के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया था।
ऐसे प्रतिदिन विदेशों को 3 करोड़ जाते है
आष्टा 23 जनवरी (फुरसत)। हम अपने बाथरूम में विदेशी साबुनो का इस्तेमाल करके किस प्रकार विदेशों की आर्थिक सहायता करते है । इसका उदाहरण अनिल ओक ने एक उदाहरण देकर किया उन्होंने बताया कि हम जो लक्स साबुन का इस्तेमाल करते है । वो उसकी लागत कीमत 1 रुपये 30 पैसें की आती है । बाजार में उक्त साबून 10 रुपये में हम लाते है, एक साबून पर उक्त साबून की निर्माता कंपनी 5रु. कमाती है, देश में 6 लाख ग्राम है 60लाख की टिकिया खरीदते है । प्रतिदिन 3 करोड़ रु. कंपनी कमाती है । इस प्रकार हम 3 करोड़ रु रोज साबून के माध्यम से विदेशों को देते है। कल्पना करों कि हम कब कर्ज से आजाद होगे । आज का युवा संगम तभी सफल होगा जब हम विदेशी वस्तुओं का वहिष्कार कर स्वदेशी वस्तुओं को अपनायेगे ।