Wednesday, January 23, 2008

दलित का अपमान करने वाले अभियुक्त को 6 महीने की सश्रम कारावास की सजा

सीहोर 22 जनवरी (फुरसत)। विधि सूत्र-स्पेशल प्रकरण नं. 592006में धारा-3 एससी.एसटी पी.ए.एक्ट में अभियुक्त विष्णुप्रसाद को न्यायाधीश एम.के.महेन्द्रा साहब ने 6 महिने के कठोर कारावास तथा अर्थदंड 500रु. की सजा का निर्णय दिया ।
अभियोजन की गाथा संक्षेप में इस प्रकार रही कि घटना दिनांक 6.5.06 को साढे चार बजे ग्राम ढाबलामाता में फरियादिया जो कि एक स्त्री है, के साथ बल प्रयोग कर उसकी लाज भंग करने के दुराशय से अभियुक्त विष्णुप्रसाद आ. नारायण सिंह नि. ढाबला ने उसका अपमान किया जो कि दलित वर्ग से थी । मामले की रिपोर्ट थाना इछावर पर की गई तथा विवेचक द्वारा कार्यवाही पूर्ण कर मामला मा. न्यायालय में भेजा जो कि आर.टी.नं. 143806 में दर्ज हुआ । मामला हरिजन एक्ट का होने से विशेष न्यायाधीश को सत्र समर्पित किया गया और विशेष प्रकरण क्र. 592006 पर अभियोजन ने अपना पक्ष रखते हुए आवश्यक साक्षीगण के बयान कराये गये । मामले में पैरवी करते हुए के.के.शर्मा, विशेष लोक अभियोजक ने बतलाया कि एम.के . महेन्द्रा ने साक्ष्य का सूक्ष्म अवलोकन किया दोनो पक्षों की अंतिम बहस सुनी गयी । तथा 7 पृष्ठीय निर्णय पारित किया गया । विद्वान विशेष न्यायाधीश महेन्द्रा ने अपने 7पृष्ठ के निर्णय में अभियुक्त विष्णुप्रसाद को दलित महिला के साथ अपमान कर उसके साथ जातिगत अपमान करने का मामला सिद्ध पाकर एस.सी., एस.टी. एक्ट में 6 महीने के सश्रम कारावास व 500रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। मामले की पैरवी म.प्र. राज्य की और से के.के. शर्मा विशेष लोक अभियोजक ने की ।

ब्राउन शुगर के अभियुक्त को 7-7 साल की सश्रम कारावास

सीहोर 22 जनवरी (फुरसत)। विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट एम.के.महेंद्रा ने अभियुक्त गण इलयास खां आ. सोहराब व आजाद खां आ. शेरखां को एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी पाकर सात-सात साल के कठोर कारावास एवं प्रत्येक को 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड का फैसला सुनाया ।
अभियोजन की और से मामले की पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक अनिल शर्मा ने बताया कि अभियोजन गाथा के अनुसार दिनांक 30.9.2006 को थाना कोतवाली के उपनिरीक्षक जे.यू.सिद्दीकी को मुखबिर की विश्वस्त सूचना मिली की आरोपीगण काले रंग की मोटर सायकल पर सवार होकर प्रतिबंधात्मक ब्राउन शुगर विक्रय करने के लिये अवैध रूप से ले जा रहे है और इस हेतू शुगर फेक्ट्री के आसपास धूम रहे है । इस सूचना पर मय गवाहों व पुलिस बल के मौके लिये रवाना हुये तथा घेराबंदी कर आरोपी गण को पकड़ा जिनमें अंधरे का लाभ उठाकर एक आरोपी जिसका नाम खुर्शीद था वह भाग गया । दो अभियुक्त इलयास निवासी सेमला थाना कुरावर, व आजाद खां आ. शेरखां अरेस्ट किया और मामला विवेचना उपरांत मा. सत्र न्यायालय में समर्पित किया । विद्वान सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश एम.के.महेन्द्रा, एनडीपीएस एक्ट ने गवाह उपनिरीक्षक पंकज गौतम, आरक्षक संतोष साहू, राकेश उमेरे, संतोष पाठक, व आरक्षक शहादत बेग त्रषिदेव वर्मा, देवेंद्र पटेल, नमो नारायण व उपनिरीक्षक- जे यू सिद्दीकी व हरीश शर्मा, तत्कालीन टीआई की गवाही को सूक्ष्मता से अवलोकन किया व दोनो ही पक्षों की अंतिम बहस सुनी गयी और निर्णय पारित कर आरोपी गण का एनडीपीएस एक्ट के तहत सात-सात साल की कठोर कारावास व प्रत्येक अभियुक्त को 20-20 हजार रु. का अर्थदंड का फैसला सुनाया । अभियोजन की और से पैरवी अनिल शर्मा, विशेष लोग अभियोजक एसडीपीएस एक्ट नेकी । सजा वारंट तैयार कर अभियुक्तों को सजा भगतने जेल भेजा गया ।

Tuesday, January 22, 2008

दिग्भ्रमित मत करो....शहीदों को तो छोड़ दो?

भारत माँ हम सभी भारतीयों की पूज्‍यनीय है। गर ऐसा ना होता तो हम अंग्रेजों के शासन में भी रह सकते थे लेकिन हमारी भारत माता परतंत्र हो यह हमें गवारा नहीं था...हमारा देश स्वतंत्र हो इसके लिये भारत माता के लालों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। अपने प्राणों का बलिदान उन्होने भारत माता पर ही तो किया है....माता की गोद में हंसते-हसंते सो जाने का उन्हे जरा मलाल नहीं था....सीना चौड़ा कर गोलियाँ खा लेते थे इसी भारत माता के लिये.....हजारों नहीं लाखों लोग 1857 के महासंग्राम में और फिर 1947 तक शहीद हुए तो सिर्फ इसी भारत माता की स्वतंत्रता के लिये....। जंजीरों में जकड़ी हमारी भारत भूमि स्वतंत्र हो उसे आजाद कराने के लिये भले ही हमें अपना सर्वस्व, अपने प्राण ही क्यों न गंवाने पड़ जाये लेकिन माता की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है ऐसी भावनाएं कूट-कूटकर भरी थी देश के उन लाखों शहीदों में.....।
आज इसी हमारी भारत माता का एक मंदिर का सीहोर में भी निर्माण होना शुरु हो रहा है जिसके के लिये प्रथम चरण के रुप में संस्कार भारती संस्था द्वारा 1857 के स्वातंत्र्य समर में शहीद हुए शहीद स्थलों की मिट्टी संग्रह का कार्यक्रम रखा गया है। सीहोर में न्यायालय परिसर के पीछे स्थित वैशाली नगर के नागरिक इस पुण्य कार्य को करने का सौभाग्य प्राप्त करने जा रहे हैं। इस कार्य से जुड़े सभी पुण्यात्माओं को बारम्बार नमन है।
लेकिन शर्म आनी चाहिऐ सीहोर के उन क थित बुध्दिजीवियो को जो स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए क्रांतिकारियों और अमर शहीदों पर भी अपनी ओछी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे....शर्म आनी चाहिऐ उन लोगों को जो छद्म लाभ के लिये शहीदों को अपना निशाना बनाने में जुट गये हैं...। कहाँ तो हजारों लोगों ने इस बात की परवाह किये बिना, की देश की आजादी में यदि वह शहीद हो भी गये तो क्या उनका नाम होगा या नहीं ? वह समर में कूद गये और सबसे आगे बढ़कर शहीद हुए। और एक आज के वह लोग हैं जो बिना अंगूली कटाये ही शहीद होने के लिये लालायित हैं और उस पर गंदी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे। लेकिन उन्हे यह नहीं मालूम की उनकी यह जरा-सी नादानी उन लाखों शहीदों के प्रति और इस भारत माता के प्रति किया गया जघन्यतम अपराध है।
असल मेरा मुद्दा यह है कि देश की आजादी के बाद उन लाखों ज्ञात-अज्ञात शहीदों की स्मृति में देश भर में जगह-जगह जय स्तंभ स्थापित किये गये थे और मुख्यत: ऐसे स्तंभ शासकिय विद्यालय या महाविद्यालयों के प्रांगण में बनाये गये थे कुछ शहरों में इन्हे प्रमुख चौराहों पर भी बनाया गया है ताकि उन्हे देखकर नई युवा पीढ़ी में राष्ट्रवादी सोच विकसित कर सके। लेकिन सीहोर में इस साल अचानक इस स्तंभ के साथ राजनीति खेलते हुए भोपाल से प्रकाशित एक अखबार ने जानबूझकर बिना किसी ऐतिहासिक साक्ष्य या संदर्भ के यह समाचार प्रकाशित कर दिया कि शा.स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रांगण में 1857 में 100 शहीदों को मार दिया गया था.....। यहीं से इतिहास के साथ खिलवाड़ करने का घिनौना खेल शुरु हुआ और नगर के आम जन को दिगभ्रमित करने का कुत्सित प्रयास किया गया। बात यहीं खत्म नहीं हुई फिर बढ़कर नगर के कुछेक तत्वों द्वारा मौखिक प्रचार के रुप में बताया जाने लगा कि इसी स्थान पर बहुत बड़ी संख्या में लोग शहीद हुए थे। जबकि इसका ना तो कोई प्रमाण है, न उल्लेख है, न पूर्व वर्ष तक इसको लेकर कभी किसी पूर्वज या सीहोर के नागरिकों ने इस संबंध में कोई जानकारी दी ..... लेकिन अब ऐसा झूठा प्रचार किस निजी स्वार्थ के लिये किया और कराया जा रहा है? नगर के बुध्दीजीवियों को यह अच्छी तरह मालूम है कि इतिहास के साथ खिलवाड़ करने की इस परम्परा का सूत्रधार कौन है ? वह लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं। नगर में भारत माता का मंदिर निर्माण होने जा रहा है जिसका भूमि पूजन संस्कार भारती के बेनर तले 26 जनवरी गणतंत्रता दिवस पर किया जायेगा। साथ ही कल 23 जनवरी को चूंकि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती है इसलिये भारत माता के वीर सपूत नेताजी की जयंती का लाभ उठाकर कल सीहोर में हुए शहीदों के शहीद स्थलों से मिट्टी संग्रह का कार्यक्रम भी किया जाना है। इस राष्ट्रीयता से ओतप्रोत कार्यक्रम में मिट्टी का संग्रह उपरोक्त दुष्प्रचार के कारण महाविद्यालय प्रांगण में बने स्तंभ से किया जाने वाला था। यदि ऐसा हो जाता तो निश्चित ही भारत माता के प्रति आस्थावान नगर वासियों के साथ इस प्रकार के दुराग्राही दुष्प्रचारकों द्वारा किया गया यह बड़ा अपराध होता। हे भारत माता इन लोगों को सद्बुध्दी प्रदान करें और सीहोर की इस धरा को नई ऊँचाईयाँ प्रदान करने का आशीर्वाद प्रदान करे।

जनार्दन शर्मा काव्यांजलि समारोह संपन्न

सीहोर 21 जनवरी (फुरसत)। तीस बरस तक लगातार शहरवासी किसी ऐसे व्यक्ति की याद को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए कार्यक्रम आयोजित करें जो इस शहर का ही नही है नि:संदेह ऐसा आयोजन अद्भूत और अनोखा है । यह विचार माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति डा. अच्युतानंद मिश्र ने यशस्वी जनकवि पं. जनार्दन शर्मा की 30वीं पुण्य तिथि पर स्थानीय ब्ल्यू बर्ड स्कूल के सभागार में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए व्यक्त किए । समारोह में पुलिस महानिरीक्षक पवन जैन को शाल, श्रीफल, सम्मान निधि तथा सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही जिले के युवा कवि केशव चौहान चिन्तक को जनार्दन शर्मा स्मृति युवा पुरस्कार से नवाजा गया ।
गत रात शहर के रचनाकारों ने पं. जनार्दन शर्मा को पूरी शिद्दत से याद करते हुए उन्हें काव्याजंलि अर्पित की । गरिमा और सादगी पूर्ण आयोजित इस समारोह में विख्यात समालोचक डा. विजय बहादूर सिंह, माधवराव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान भोपाल की निदेशक डा. मंगला अनुजा, स्थानीय विधायक रमेश सक्सेना, पूर्व विधायक एवं आंचलिक पत्रकार संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकरलाल साबू विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थे ।
जिले की प्रतिष्ठित संस्था प्रज्ञा भारती द्वारा स्व. श्रीमति चन्द्रकातां कुइया स्मृति न्यास तथा श्रीमति जमुना देवी देवी मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी के सहयोग से आयोजित इस 30 वे सुकवि पं. जनार्दन शर्मा स्मृति कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्षैत्रीय विधायक रमेश सक्सेना ने कवि जनार्दन शर्मा का पुण्य स्मरण किया और उनकी याद में विगत 29 वर्षो से लगातार आयोजित किए जाते रहे इस पुण्य स्मरण कार्यक्रम की निरन्तरता को सीहोर नगर की विशिष्ट उपलब्धि बताया
कार्यक्रम में सम्मानित किए गए कवि पवन जैन ने अपनी सशक्त रचनाओं का पाठ किया और श्रोताओं की जी भरकर दाद बटोरी, जनार्दन शर्मा स्मृति युवा पुरूस्कार से सम्मानित युवा कवि केशव चौहान चिन्तक ने भी कार्यक्रम को संबोधित कर स्वरचित व्यंग रचना सुनाकर तालियां बटोरी। अंबादत्त भारतीय ने पं. जनार्दन शर्मा के व्यक्तित्व और कृतित्य पर प्रकाश डाला
आयोजन की शुरूआत में सभी अतिथियों ने ज्ञान दात्री मां सरस्वती देवी की प्रतिमा और सुकवि पं. जनार्दन शर्मा के चित्र पर पुष्प मालायें अर्पित कर ज्ञान दीप प्रज्‍वलित किया।
ब्लू वर्ड स्कूल की छात्रा कु. जया मेवाड़ा ने सस्वर सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की और कु . सोहनी पालीवाल ने देश भक्ति गीत की सुमधुर प्रस्तुति दी । स्व. जनार्दन शर्मा की गजल का पाठ यूसुफ परवेज सीहोरी ने किया । कार्यक्रम का सफल संचालन बसंत दासवानी ने किया और आभार प्रदर्शन प्रज्ञा भारती के अध्यक्ष जयंत शाह ने किया।

ताजियों का विशाल विसर्जन जुलुस निकला

आष्टा 21 जनवरी (फुरसत)। आज आष्टा नगर में मोहर्रम कमेटी जुम्मापुरा एवं काजीपुरा का ताजियों का विशाल विसर्जन जुलुस प्रात: 12 बजे पुराना बस स्टेण्ड से प्रारंभ हुआ जो पुरानी सब्जी मंडी, बड़ा बाजार, सिकन्दर बाजार, गांधी चौक, गल चौराह, बुधवारा, परदेशीपुरा होता हुआ पार्वती नदी पर पहुंचा। यहां पर ताजियों का विसर्जन किया गया । मोहर्रम कमेटी जुम्मापुरा का जुलुस शहजानी मस्जिद पहुंचा इस जुलुस में काजीपुरा का जुलुस शामिल होकर आगे दोनो का जुलुस आगे बड़ा मोहर्रम पर आज ताजियों के निकले विशाल विसर्जन जुलुस में शामिल विभिन्न अखाड़ो के कलाकारों के स्थान-स्थान पर अपनी शानदार कला का अखाड़ों के माध्यम से प्रदर्शन किया विसर्जन जुलुस में अखाडे, बैन्ड, डी.जे. ताशापार्टी ताजिये आदि शामिल थे । विसर्जन जुलुस शाम को पार्वती नदी पर पहुंचा यहां पर ताजियों का विसर्जन किया गया । जुलुस में पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन के अधिकारी अधिनस्थों के साथ सुरक्षा व्यवस्था में लगे हुए थे ।

यात्री बस पलटने से चार घायल

सीहोर 21 जनवरी (फुरसत)। श्यामपुर-कुरावर राजमार्ग पर रविवार को एक यात्री बस के अनियंत्रित होकर पलट जाने से चार लोग घायल हो गए वही अन्य सड़क हादसों में तीन लोग घायल हो गए ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अनुबंधित बस क्रं. एमपी-04-एच-9065 रविवार को भोपाल से यात्री लेकर कुरावर की तरफ जा रही थी । बताया जाता है कि बस का चालक वाहन को तेजगति व लापरवाही पूर्वक चलाकर ले जा रहा था कि तभी बस सोठी जोड़ के समीप अनियंत्रित होकर पलट गई। परिणाम स्वरूप इसमें सवार आर.देवचंद आ. भंवरलाल, रामहित शाक्य, ब्रजलाल आ. मंगल प्रसाद, दुर्गा प्रसाद आ. भंवरलाल घायल हो गए जिन्हें प्राथमिक उपचार हेतू श्यामपुर अस्पताल में दाखिल कराया गया। बस चालक घटना के बाद से फरार हो गया। उधर आष्टा थाना क्षैत्र के मेवाड़ा कालोनी निवासी दौलत सिंह रविवार को पैदल रोड क्रास कर रहा था । अदालत के समीप मोटर सायकल क्र.एमपी-09-एनबी-3012 के चालक ने उसे टक्कर मारकर घायल कर दिया। इधर कोतवाली थाना अंतर्गत लसूडिया परिहार वायपास मार्ग पर ग्राम भैसाखेड़ी निवासी महेश मेवाड़ा की मोटर सायकल क्र. एमपी-37-एमबी-3735 में पीछे से अज्ञात सफेद रंग की इण्डिका के चालक ने लापरवाही पूर्वक वाहन चलाकर पीछे से टक्कर मार दी जिससे महेश एवं उसके भाई बृजमोहन घायल हो गये ।

शेयर बाजार की भारी गिरावट ने सीहोर में भी उथल-फुथल कर डाली लाखों का नुकसान हुआ जिले में

सीहोर 21 जनवरी (फुरसत)। शेयर बाजार में आज हुई ऐतिहासिक गिरावट ने सीहोर में भी शेयर खरीददारों को झटका दे दिया है। यहाँ हुई भारी गिरावट के चलते अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब करोड़ रुपये तक का नुकसान सीहोर में हुआ है। लेकिन इससे छोटे शेयर खरीददारों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है।
सोमवार को मुम्बई शेयर बाजार रिकार्ड गिरावट के साथ बंद हुआ है। इसके पूर्व कभी शेयर बाजार ने गिरावट का इतना बड़ा गोता नहीं लगाया था लेकिन इस गोते ने यहाँ कईयों को लुढ़का दिया है। सोमवार को सेंसेक्स में 1400 से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और सेंसेक्स 17605 के अंक पर बंद हुआ है। सीहोर में शेयर बाजार के लिये खुले अनेक टर्मिनलों पर भी स्थिति आज विचित्र हो गई थी। भारी गिरावट के कारण कुछेक टर्मिनल के बड़े भोपाल के कार्यालयों से उन्हे आगामी शेयर खरीदने की स्वीकृति बंद कर दी गई थी। हालांकि ऐसा सामान्यत: होता नहीं है लेकिन जब किसी का खाता गड़बड़ होता है तो फिर इस संबंध में यादा सावधानी बरती जाती है।
एक तरफ तो अचानक आई गिरावट का लाभ उठाने के लिये कई लोग भिड़ गये थे और टर्मिनलों के चक्कर काट रहे थे ताकि इस गिरावट के दौर में वह माल खरीद लें और शेयर बाजार में वापस स्थिरता आने पर इसे बेचकर अच्छा लाभ उठा लेते। लेकिन ऐसे शेयर खरीदने वालों को टर्मिनलों पर शेयर खरीदने की सहूलियत नहीं मिल पाई। कुछ टर्मिनलों को ऊपर से ही शेयर खरीदने की स्वीकृति बंद कर दी गई थी जिससे सीहोर वालों को दिक्कत आई।
आज आई गिरावट के कारण सीहोर के उन शेयर खरीदने वालों को झटका लग गया जो बहुत कम पूंजी से इस काम को करने का प्रयास करते हैं। जबकि बड़े लोगों को भी बड़े झटके लग गये। उदाहरण स्वरुप आरकाम का फ्यूचर सुबह 673 रुपये था जिसका एक लाट 350 शेयर है लेकिन अचानक दोपहर बाद इसके भाव सीधे 567 रुपये पर आ गये इस प्रकार इस लाट को खरीद चुके कई लोगों को करीब 35 से 40 हजार रुपये का झटका लगा। यह तो एक उदाहरण है लेकिन इसी प्रकार अनेक शेयरों में आई गिरावट ने आज शेयर बाजार से जुड़े लोगों के चेहरों पर तनाव की स्थिति पैदा कर दी थी। दिनभर शेयर वालों की अपनी चर्चाएं चलती रहीं।

गद्दारों ने हरवाया था सन् 57 में इंकलाबियों को

देश के लिए इस महान संग्राम और उसके शहीदों को याद करना गौरव की बात है। लेकिन इस मौके पर यह सवाल पूछा जाना जरूरी है कि भारत जैसे विशाल देश, जिसके चप्पे-चप्पे पर लोगों ने फि रंगी सरकार के खिलाफ दो साल से भी ज्यादा लगातार विद्रोह किया था, केवल 10 से 15 हजार गोरों से कैसे मात खा गया? अंगरेजों के चाटुकार इतिहासकार, जिनमें कई हिंदुस्तानी भी रहे हैं, जीत का कारण उनकी रणकौशलता, बहादुरी, हिम्मत और उनके पास उपलब्ध उच्च कोटि के जंगी साज-सामान को मानते हैं। उदाहरण के लिए, भारत के एक प्रसिध्द इतिहासकार आर सी मजुमदार और 1857 के प्रत्यक्षदर्शी सैयद अहमद खान का (जिन्हें सर सैयद के तौर पर ज्यादा जाना जाता है) कहना था कि 1857 का विद्रोह न राष्ट्रीय था, न देश की स्वतंत्रता से इसका कोई संबंध था और न ही इसे लोगों का समर्थन प्राप्त था।
यह इतिहासकार कहते हैं कि अंगरेजों ने 1857 में और उसके बाद 'विद्रोहियों' पर बहुत आसानी से जीत हासिल कर ली, क्योंकि 'विद्रोही' सेना की हिम्मत पस्त थी, वे असंगठित थे और उनमें रण-कौशल नहीं था। यह कितना बड़ा झूठ है, इसका अंदाजा दिल्ली पर हमला बोलने वाली अंगरेजी सेना के एक वरिष्ठ अफ सर हॅडसन की डायरी में लिखे इस वक्तव्य से होता है, 'शहर की सीमा पर जबरदस्त विरोध का सामना करने के बाद हमारी फोजें शहर में दाखिल हुईं, तो जिस हिम्मत और दृढ़ता के साथ विद्रोहियों और हथियारबंद योध्दाओं ने जंग लड़ी, वह सब हमारी सोच से बाहर था।'
सवाल उठता है कि अगर इंकलाबी हर तरह से तैयार थे, उनमें जज्बा था और अपने वतन को कंपनी के शिकंजे से आजाद कराने के लिए वे हर कीमत चुकाने को तैयार थे, तो हिंदुस्तान यह संग्राम क्यों हार गया? इसका जवाब खोजना जरा भी मुश्किल नहीं है। अंगरेज हुक्मरां षडयंत्र रचने में माहिर थे। उन्होंने जो युध्द जीते, वे अपनी बहादुरी और रणकौशलता की वजह से नहीं, बल्कि षडयंत्रों, जासूसों और हिंदुस्तानी दलालों की मदद के बल पर। प्लासी के युध्द में मीर जाफर जैसा गद्दार न होता, तो सिराजुद्दौला का हारना असंभव था। टीपू सुल्तान इसलिए हारे, क्योंकि मीर सादिक, मीर गुलाम अली, कासिम अली और दीवान पूरनिया जैसे गद्दार अंगरेजों के कुकर्मों में हिस्सेदार बन गए थे। इतिहासकार जॉन विलियम ने, जो उस दौर की घटनाओं के प्रत्यक्षदर्शी थे, 1868 में छपी अपनी पुस्तक सिपॉय वार इन इंडिया में माना, 'सच तो यह है कि हिंदुस्तान में हमारी सत्ता की पुनर्स्थापना का सेहरा हमारे हिंदुस्तानी समर्थकों के सिर है, जिनकी हिम्मत और बहादुरी ने हिंदुस्तान को अपने हमवतनों से छीनकर हमारे हवाले कर दिया। स्वाधीनता के पहले संग्राम के बारे में हमारे इतिहास की पाठयपुस्तकों में जो जानकारी मिलती है, वह अधूरी है। इस संग्राम का सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतना बड़ा देश मुट्ठी भर अंगरेज फौजियों से आखिर कैसे हार गया?
' विलियम रसल लंदन से छपने वाले अखबार द टाइम्स के युध्द संवाददाता के तौर पर युध्द का हाल बताने के लिए भारत भेजे गए थे। रसल ने 9 मई, 1857 को भेजी अपनी एक रपट में लिखा, 'दिल्ली की हमारी घेराबंदी बिल्कुल नामुमकिन होती, अगर पटियाला और जींद के राजा हमारे मित्र नहीं होते और अगर सिखों ने हमारी बटालियनों के लिए भरती नहीं की होती...।' रसल ने अपनी कई रपटों में इस सचाई को भी स्वीकारा कि अगर लखनऊ और दिल्ली के मोरचों पर नेपाल के राजा के गोरखा सैनिक नहीं पहुंचते, तो अंगरेजों की जीत असंभव थी।
यह संग्राम किस वजह से हारा गया, इसका मार्मिक वर्णन इस संग्राम के एक प्रमुख सेनापति नाना साहब के उस अंतिम पत्र में मिलता है, जो उन्होंने 1858 में देशवासियों के नाम लिखा था। 'यह पराजय मेरे अकेले की नहीं, बल्कि पूरे देश की है। इस पराजय का मुंह हमें गोरखों, सिखों और राजाओं की सेनाओं की वजह से देखना पड़ा। मैं जीवन भर देश की आजादी के लिए लड़ा और लड़ता रहूंगा। शैतान रजवाड़ों ने अपने स्वार्थ के लिए इस देश को अंगरेजों के हवाले कर दिया, जबकि अंगरेजों की हमारे सामने कोई हैसियत नहीं थी।' यहां यह याद रखना जरूरी है कि रसल और नाना साहब जब सिखों की बात करते हैं, तो उसका मतलब आम सिख नहीं, बल्कि सिख रजवाड़े हैं। सिख किसानों ने तो इस संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था और दिल्ली को अंगरेजों से बचाने में सैकड़ों सिख इंकलाबी सैनिकों ने अपनी जानें कुरबान की थीं।
20 सितंबर, 1857 को अंगरेज दिल्ली शहर पर एक बार फिर कब्जा करने में सफ ल हुए। फि रंगी उन हिंदुस्तानी गद्दारों की वजह से सफ ल हो सके, जो चांदी के चंद टुकड़ों के लिए कुछ भी करने को तैयार थे। इन गद्दारों की एक लंबी सूची है। इनके द्वारा अंगरेज आकाओं को लिखे पत्रों से इस सचाई का पता लगता है कि जिस समय दिल्ली के मोरचे पर इंकलाबी सैनिक अंगरेज सेनाओं के दांत खट्टे कर रहे थे, उसी दौरान 7 अगस्त, 1857 को इंकलाबियों के एक बहुत बडे बारूद के जखीरे में आग लग गई। उस विस्फोट में 500 से ज्यादा इंकलाबी शहीद हुए और इंकलाबियों को गोला-बारू द के लाले पड़ गए। यह कारनामा दरअसल रजबअली का था, जो न केवल बादशाह की परामर्शदात्री समिति का सदस्य बनने में सफल हुआ था, बल्कि बारूदखाने का दरोगा भी बन बैठा था।
एक और गद्दार मुंशी जीवनलाल, जिसे 'रायबहादुर' की उपाधि भी मिली, कंपनी में मुख्य मुंशी था और बहादुरशाह जफर और उनके परिवार पर चलाए गए मुकदमे में अंगरेजों के पक्ष में मुख्य भूमिका निभाने वाला रहा। कंपनी के एक इतिहासकार केव ब्राउन ने अपनी किताब पंजाब ऐंड देहली इन 1857 में इसकी चर्चा करते हुए लिखा, 'वे दिल्ली के बीचोंबीच रहते हुए शहर में मौजूद विद्रोहियों से संबंधित हर वह सूचना, जिसका जानना हमारे लिए जरूरी था, कागज की परचियों पर लिखकर चपातियों की परतों में, जूतों के तलों में, पगड़ियों की तहों में, सिखों के बालों के जूड़ों में छिपा-छिपाकर हम तक पहुंचाते रहे।'
'अंगरेजों को मध्य भारत में इंकलाबी सेनाओं के हाथों बार-बार पराजय का सामना करना पड़ा था।' मध्य भारत के अंगरेज मुख्य प्रशासक ने अपने संस्मरणों में यह लिखा है। दिल्ली और लखनऊ पर अंगरेजों का कब्जा करवाने में कश्मीर और पटियाला के महाराजाओं की सेनाओं ने जबरदस्त मदद की थी। ये राजपरिवार आजादी के बाद भी सत्ता में रहे। जिन विद्रोही राजपरिवारों का इस संग्राम में हिस्सेदारी की वजह से विनाश हुआ था, उनको न आजादी के समय और न ही प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शत वार्षिकी पर इंसाफ मिल सका था। कितना अच्छा हो, अगर इस महान संग्राम की 150वीं वर्षगांठ पर मुल्क के लिए मर मिट जाने वाले वीरों की मौजूदा पीढ़ियों को इंसाफ और सम्मान मिल सके।

Monday, January 21, 2008

रात ताजिये निकले, शहादती जुलूस को लेकर भारी उत्साह

सीहोर 19 जनवरी (फुरसत)। हजरत इमाम हुसैन की शहादत में हर साल मनाया जाने वाला मोहर्रम के पर्व की तैयारियां अंतिम दौर में है । शहर के लगभग सभी अखाड़े एवं ताजियों का निर्माण करने वाले कलाक ार इसे पूर्ण करने में जुटे है । वहीं मोहर्रम की 7 तारीख से मोहर्रम की 9 तारीख तक शहर के सभी अखाड़े मिलजुलकर रात्रि में जुलुस निकाले जा रहे है।
मोहर्रम की 10 तारीख रविवार को ताजिये निकाले जायेंगे । वही पर्व के चलते छबिल शर्बत बनाकर मोहल्ले में रोजाना बांटा जा रहा है इसके साथ ही मोहर्रम के 10 दिनों तक कुरान खानी मिलाद शरीफ, आसुरा के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हे। शहर में गंगा जमनी तहजीब की प्रतीय मिश्रा जी की सवारियां हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी निकाली जा रही है । हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक हिन्दू भाई के ताजिये भी निकाले जाते है ।
यह जानकारी देते हुए आल इंडिया जिला मुस्लिम त्यौहार कमेटी के जिलाध्यक्ष मेहफू ज कुरैशी उर्फ बंटी ने सभी से इस पवित्र मोहर्रम के त्यौहार को शांति सद्भाव, अमन एवं भाईचारे के साथ मनाने की अपील की है ।
अपील करने वालों में नगर अध्यक्ष साहीदशेख, जिला महामंत्री सिराज 401, मोहसीन लाला, हनीफ कुरैशी, रहमत भाई, बल्ली पहलवान, करीम कुरैशी, हाजी मकसूद, शाजीद शाह, रफीक मम्मा, फकीर मोहम्मद, सलीम शाह, सैयद आफताब अली, अशलम उर्फ अइया, खालिद कुरैशी, कलीम मंसूरी, नौशाद खान सईद अली सहित सभी पदाधिकारियों ने शांति एवं सद्भाव से त्यौहार मनाने की अपील की है ।

Sunday, January 20, 2008

सड़क हादसों में तीन मृत, सात घायल

सीहोर 18 जनवरी (फुरसत)। जिले के विभिन्न थाना क्षैत्रों में हुए अलग-अलग सड़क हादसों में तीन युवको की मौत हो गई तथा सात लोग घायल हो गये । पुलिस ने सभी मामले दर्ज कर लिये है ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधनी थाना अन्तर्गत ग्राम बेदाखेड़ी निवासी कै लाश यादव अपने जमाई महेश यादव के साथ गुरूवार को अपने गांव से स्कूटर क्रमांक एमपी-05-एफ-3388 से होशंगाबाद जा रहे थे तभी नर्वदा ब्रिज के समीप मोटर सायकल क्रं. एमपी-05-एएफ-0459 के चालक ने तेजगति एवं लापरवाही से वाहन चलाकर इनकी स्कूटर में टक्कर मारकर घायल कर दिया ।
इधर कोतवाली थाना अर्न्तगत ग्राम कांकड़खेड़ा निवासी 35 वर्षीय चम्पालाल खाती गत गुरूवार को राम बगस के साथ मोटर सायकल से सीहोर आ रहे थे। तभी हसनावाद के समीप गुप्ता बस क्रमांक एमआईसी 7433 के बस चालक ने पीछे से ओवर टैक कर मोटर सायकल में टक्कर मार दी जिसमें दोनों घायल हो गये ।
उधर सिद्धिकगंज थाना अर्न्तगत ग्राम नरपाखेड़ी निवासी जितेन्द्र आ. लखनसिंह एवं टकेसिंह नाल 27 दिसम्बर की रात मोटर सायकल से आष्टा से खाचरोंद तरफ जा रहे थे तभी खामखेड़ा पुलिया के समीप पीछे से अज्ञात डम्पर के चालक ने लापरवाही पूर्वक टक्कर मार दी परिणाम स्वरूप 25 वर्षीय टकेसिंह नाल की मृत्यु हो गई तथा जितेन्द्र गंभीर रूप से घायल होने के कारण उपचारार्थ हमीदिया अस्प. भोपाल में भर्ती रहा ।
इधर आष्टा थाना क्षैत्र में आज ग्राम भंवरा निवासी सहायक शिक्षक छमामीलाल अपने छोटे भाई नृपत सिंह के साथ मोटर सायकल क्रं. एमपी-04-एनबी-1799 से आष्टा आ रहे थे तभी सेमरी रोड पर आष्टा तरफ से आ रहे मोटर सायकल क्रं. एमपी-04-3475 के चालक ने लापरवाही पूर्वक वाहन चलाकर टक्कर मार दी जिसमें छदामीलाल को चोट आई।

जिला उपभोक्ता फोरम ने बिल निरस्त कर दिलाया हर्जाना

सीहोर 18 जनवरी (फुरसत)। जिला उपभोक्ता फोरम ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में आदेश पारित किये है कि आवेदक पन्नालाल आ. किशन लाल डोहर निवासी डोहर मोहल्ला गंज सीहोर को अनावेदक द्वारा दिया गया बिल 25 मई 07 का निरस्त किया जावे एवं 500रूपये क्षतिपूर्ति एवं 500रू. परिवाद व्यय स्वरूप दिलाये जावे
प्राप्त जानकारी के अनुसार आवेदक पन्नालाल डोहर जो कि दीपावली के बाद अपने पूरे परिवार के साथ मजदूरी करने घर से बाहर चले जाते है इस संबंध में एक आवेदन अनावेदक विद्युत कंपनी को दिया कि मेरा कनेक्षन दिनांक 6.11.07 से अस्थाई रूप से बंद कर दिया जावे परंतु अनावेदक ने कनेक्षन दिनांक बंद नही किया और नियमित रूप से बिल दिये जाते रहे जबकि आवेदक उक्त अवधि में कनेक्षन का उपयोग नही कर रहा था । अनावेदक ने दिनांक 26 मई,07 को 1950 रूपये का बिल आवेदक को प्रेषित किया । आवेदक ने अपने अधिवक्ता जी.डी.बैरागी से सलाह लेकर उपभोक्ता फोरम सीहोर में बिल निरस्त करने के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया । अनावेदक ने उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत किया एवं आवेदन निरस्त करने की मांग की ।
जिला उपभोक्ता फोरम के विद्धवान अध्यक्ष ए.के.तिवारी सदस्य अम्बादत्त भारती एवं श्रीमति शकुन विजयवर्गीय ने दोनो अधिवक्ताओं के तकर् श्रवण कर एवं दोनो अधिवक्ताओं के तर्क श्रवण कर आदेश पारित किये कि अनावेदक द्वारा प्रेषित बिल दिनांक 26.5.07 निरस्त किया जावे एवं 500रू. मानसिक त्रास एवं 500 रूपये परिवाद व्यय अनावेदक आवेदक को अदा करे । प्रकरण में पैरवी अधिवक्ता जी.डी. बैरागी ने की । इस प्रकार विद्युत कम्पनी द्वारा की जाने वाली यादगी पर उपभोक्ता फोरम के माध्यम से अंकुश लग गया ।

क्या ? हरकत-उल-जिहाद-ए-इसलामी ने दी हिन्दु उत्सव समिति अध्यक्ष को धमकी

सीहोर 18 जनवरी (फुरसत)। पाकिस्तान के दो संगठन जमात-उल-उलेमा-ए-इसलामी (जुल) और तबलीग-ए-जमात (तीज) को मिलाकर सन 1980 में बनाये गये आतंकी संगठन हरकत-उल-जिहाद- ए-इसलामी (हुजी) के पैर सीहोर में भी पड़ गये हैं इसका आंशिक आभास कल उस वक्त हुआ जब हिन्दु उत्सव समिति के अध्यक्ष सतीश राठौर को एक धमकी भरा अंतरदेशीय पत्र हुजी द्वारा मिला। जिसमें स्पष्ट लिखा था कि तुमने हमारे खिलाफ पेपर में खूब बयानबाजी करके हमे गोली से उडा दिये जाने की बात कही है अब तुम व तुम्हारा परिवार ही हमारी गोली के निशाने पर आ गये हैं। हुजी द्वारा प्रेषित इस पत्र का शीर्षक है इंतकाम-इंतकाम। क्या हरकत-उल-जिहाद-ए-इसलामी सीहोर में आ गया है तो फिर पुलिस व खुफिया तंत्र क्या कर रहा है यह जांच का विषय है।
उल्लेखनीय है कि सबसे बड़े आतंकवादी संगठन अलकायदा ने हुजी के जरिये पूरे भारत देश में पैर पसारने के प्रयास शुरु कर दिये हैं। पिछले दिनों नवम्बर में उत्तर प्रदेश में हुए बम धमाकों के बाद कई लोगों ने इसकी निंदा की थी जिस पर सीहोर हिन्दु उत्सव समिति सहित न्यायालय से जुड़े अभिभाषकों ने भी आंदोलन किया था। उत्तर प्रदेश न्यायालयों में हुए बम धमाकों में इसी आतंकवादी संगठन हुजी के होने की रिपोर्ट मिली थी बल्कि संगठन हुजी के प्रमुख आतंकवादी अल्ताफ हुसैन अंसारी उर्फ मुख्तार उर्फ राजू को कोलकत्ता में गिरफ्तार कर लिया था। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश के विशेष कार्य बल एसटीएफ ने भी 23 नवम्बर को हुए विस्फोटो के मामले में हुजी के दो आतंकवादियों तारिक और खालिद को गिरफ्त में ले लिया था जिनके पास से सवा किलो आरडीएक्स व जिलेटिन भी बरामद किया गया था। इसके पूर्व हुजी ने हैदराबाद में भी बम धमाके किये थे लेकिन तब भी इनके सदस्य पकड़ा गये थे।
इस प्रकार हुजी संगठन भारत में सक्रिय तो है लेकिन जब भी यह कोई घटनाक्रम करता है तो इससे जुड़े देशद्रोही भारतीय पुलिस व सुरक्षा बल के हाथों दबोच लिया जाता है। ऐसे में निश्चित ही इनके खिलाफ बयानबाजी करने वालों से हुजी से जुड़े लोगों को नाराजगी आती होगी ऐसा विश्वास व्यक्त किया जा सकता है।
हालांकि पूर्व में भी कई बार कुछ अलसुलझी घटनाएं इस बात का अंदेशा दे चुकी है कि यहाँ सीहोर में भी बाहरी आतंकी संगठनों की दस्तक संभवत: है लेकिन यहाँ पहली बार देश में सबसे यादा सक्रिय आतंकवादी संगठन हुजी के नाम से एक हिन्दु उत्सव समिति अध्यक्ष को चेतावनी मिली है।
हुजी की अभी तक सबसे बड़ी कार्यप्रणाली यही सामने आई है कि वह भारत में अपने पैर पसारने के लिये भारतीयों का ही सहयोग ले रहा है। उसने भारत में रहने वाले ही देशद्रोहियों को अपने संगठन का हिस्सा बनाना शुरु किया है पूर्व में जितने भी हुजी के आतंकवादी पकड़ाये हैं वह सारे के सारे ही भारतीय रहे हैं। हालांकि इसका पूरा केन्द्र बांग्लादेश है और बांग्लादेश के लोग बड़ी संख्या में यहाँ भारत में देखे जा सकते हैं। सीहोर में भी बांग्लादेशी शरणार्थी रहते हैं।
कई बार तरह-तरह की शंका-कुशंका सीहोर के नागरिकों ने पुलिस को जाहिर भी की है और गंभीरता के साथ सीहोर में सतर्क रहने, निगाह रखने की मांग उठाई है लेकिन पुलिस कभी सक्रिय नहीं दिखी। उल्लेखनीय है कि यहाँ अवैध रुप से पाकिस्तानियों के रहने संभावनाएं भी बनी रहती है। कल हिन्दु उत्सव समिति ने जिलाधीश व पुलिस अधीक्षक को इस मामले में एक ज्ञापन सौंपते हुए जानकारी दी है तथा आवश्यक कार्यवाही करते हुए तनाव व भय के वातावरण से नगर को मुक्त करने की मांग की है।

हुजी का उद्देश्य
हुजी का उद्देश्य हिंसा के माध्यम से जम्मु और कश्मीर को भारत से अलग करना साथ ही देश के अन्य भागों में आतंरिक सुरक्षा को नुकसान पहुँचाना भी इसका उद्देश्य है।
किसका है संरक्षण
हुजी को पाकिस्तानी देवबंदी कट्टरपंथियों का समर्थन हासिल है। इसे गतिविधियों में आईएसआई का भी सक्रिय सहयोग मिलता है।
पूरे देश में पैर पसारने में लगा
21 अगस्त 2007 को भारत म्यांमार सीमा पर अल कायदा के आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद हुजी के नेटवर्क को पश्चिम बंगाल में नेस्तनाबूद करने वाली एसटीएफ और भारतीय खुफिया एजेंसियों ने माना है कि हूजी के पीछे अलकायदा है। अलकायदा हूजी के जरिये देश भर में पैर पसारने में जुटा है। हूजी के खास कारकून कमर उर्फ नाटा को बांग्लादेश की सरकारी बंगलों में पनाह मिलती है।
वारदातें क्या-क्या की
2002 में कोलकत्ता के अमेरिकन इंनफार्मेशन सर्विस पर हमला के साथ-साथ गोधरा काण्ड में भी इसी संगठन का हाथ बताया जाता है।
2007 में उत्तरप्रदेश में बम धमाके 23 नवम्बर 2007 में उत्तर प्रदेश के तीन शहरों वाराणसी, लखनऊ व फैजाबाद में आतंकवादियों ने 20 मिनिट में एक के बाद एक 6 धमाके कर डाले थे जिसमें 18 लोग मरे व 86 घायल हो गये थे। यह धमाके न्यायालय परिसर में हुए थे। जांच एजेंसियों ने इसमें बांगलादेश आतंकवादी संगठन हरकत उल जिहादी इस्लामी (हुजी) का हाथ माना है। बाद यह बात सिध्द भी पाई जा चुकी है।

मोहम्मदी अखाड़ा की सद्भावना पूर्ण पहल: आओ सब मिलकर मनाये त्यौहार

सीहोर 18 जनवरी (फुरसत)। मोहम्मदी अखाड़ा चकला मोहल्ला सीहोर ने एक बार फिर अपनी राष्ट्रवादी सोच का परिचय देते हुए यहाँ मातमी जुलूस में सभी नगर वासियों से मिलजुल कर सम्मिलित होने की अपील की है बल्कि मोहम्मदी अखाड़ा ने इसके लिये बकायदा नगर के सम्मानित नागरिकों को दावत नामा देकर एक मिसाल कायम कर दी है।
उल्लेखनीय है कि चकला मोहल्ला के मोहम्मदी अखाड़ा अपने राष्ट्रवादी सोच के चलते कई बार महत्वपूर्ण मामलों में सकारात्मक स्थिति लाता है। इस बार नगर में मोहर्रम का पर्व बहुत अधिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। कल गुरुवार को गंज बजरिया से मोहर्रम की 7 तारीख को एक जोरदार मातमी जुलूस निकला जिसमें पूरे उत्साह के साथ कस्बे के लोग भी शामिल हुए और एक बडा विशाल मातमी जुलूस निकला।
जो गंज से होता हुआ छावनी मोहम्मदी अखाड़ा के नेतृत्व में पहुँचा और यहाँ से घूमता हुआ वापस गंज बजरिया में देर रात 12 बजे समाप्त हो गया था।
लेकिन आज मोहम्मदी अखाड़ा ने मोहर्रम की 8 तारीख शुक्रवार को अपने राष्ट्रवादी सोच का परिचय देते हुए मोहर्रम पर्व को मनाने के लिये सभी को आमंत्रित किया है। उन्होने नगर के सभी प्रतिष्ठित नागरिकों हिन्दुओं को सम्मिलित होने की अपील करते हुए मातमी जुलूस में शामिल होने की अपील की है बल्कि बकायदा एक एलान भी कराया गया है। रात 10 बजे चकला चौराहा से एक जोरदार मातमी जुलूस तैयार हुआ जिसमें कस्बा क्षेत्र के लोग भी अखाड़े और झांकी के साथ सम्मिलित हुए। मुस्लिम कौंसिल सदर अब्दुल हमीद चौधरी, मुस्लिम त्यौहार कमेटी के अध्यक्ष रिजवान पठान, उपाध्यक्ष मोहम्मद इरशाद (भगोली), अजीज चाचा, अन्नु मंसूरी, हनीफ कुरैशी, हाजी अतीकुर्रहमान साहब, आफताब अली, शहादत पठान, सगीर पहलवान, फारुक अंजुम, पप्पु भाई फैजान, मुन्ना उस्ताद, मुन्ने राईन, रईस भाई कबाड़ी, प्यारे पहलवान, आबिद अली, अजीज भाई लोहार, कय्यूम भाई, हारुन मोहम्मद, हफीज भाई मंसूरी, शमीम पार्षद, हफीज चौधरी, इरफान बेल्डर, अशफाक पातल, हाजी सलीम पार्षद, अतीक मियां टेक्सी यूनियन अध्यक्ष आदि सम्मिलित रहे। जुलूस चकला चौराहा से प्रारंभ होकर गाड़ी अड्डा, कोतवाली चौराहा, पुराना बस स्टेण्ड, मछली पुल, मछली बाजार, पान चौराहा, गाँधी रोड, नमक चौराहा होता हुआ लाल मस्जिद चौराहे से पुन: देर रात चकला में समाप्त हुआ।
कल मोहर्रम की 9 तारीख शनिवार को मछली बाजार का जुलूस निकलेगा जिसकी तैयारियाँ जारी हैं। इधर चाँद की 9 तारीख शनिवार कत्ल की रात भी है जिसमें रात 2 बजे के बाद ताजिये भी निकलेंगे जो चकला, गंज व कस्बा क्षेत्र से निकलेंगे।

Saturday, January 19, 2008

खड़ी में तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज

आष्टा 17 जनवरी (फुरसत)। दूसरे के गरीबी रेखा के कार्ड पर गरीबों की योजना का लाभ उठाकर शासन को धोखा देने के मामले में पुलिस ने जांच के बाद खड़ी निवासी आविद कय्यूम, एवं अनीस के खिलाफ धारा 420 का प्रकरण दर्ज किया है ।
पुलिस के अनुसार 21 नवम्बर को खड़ी निवासी नसरत-बी पत्नि अनवर खां को कुत्ते ने काट लिया थ शासन की ऐसी योजना है कि गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालो को इलाज नि:शुल्क होता है । नसरत-वी के पास तो ऐसा कोई कार्ड था नही इसलिये उसका इलाज नि:शुल्क हो इसलिये मकसूद खां खड़ी निवासी जिनका गरीबी का राशन कार्ड है ले आये और अस्पताल ने नसरत को रानी-वी बताकर उसका नि:शुल्क इलाज शुरू करवा लिया रानी-वी का नाम मकसूद खां के कार्ड में है । 21 को इंजेक्शन लग गया उसके बाद 13 दिसम्बर को पुन: एंटीरेविज एंजेक्शन लगवाने आये उस दिन लापरवाही से नर्स ने एन्टीरेबिज की जगह बेहोशी का इंजेक्षन लगा दिया जिससे उक्त महिला की मृत्यु हो गई पुरे क्षैत्र में हलचल मच गई प्रशासन ने प्रेस को जानकारी दे दी कि गलत इंजेक्षन लगने से रानी-वी की मृत्यु हो गई क्योंकि अस्पताल के रिकाड्र में जो मरी उसका नाम रानी-वी ही दर्ज था जबकि बाद में पोल खुली की रानी वी तो जिन्दा है और वो खड़ी में है ।
इसकी पुष्टि सरपंच खउी एवं वहां के सचिव ने भी की । तब पुलिस ने जांच प्रारंभ की और जांच में पाया की रानी-वी तो जिन्दा है जो मरी उसका नाम नसरत वी था और इस प्रकार शासन की योजना का झुठ के साहरे लाभा उठाना मंहगा पड़ गया। आष्टा पुलिस ने जांच के बाद खड़ी के तीन लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है ।